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राष्ट्रीय मुख स्वास्थ्य कार्यक्रम

इस पृष्ठ में राष्ट्रीय मुख स्वास्थ्य कार्यक्रम के प्रचालनात्मक दिशानिदेश - 2012-17 की जानकारी दी गयी है I

परिचय

मुख संबंधी स्वास्थ्य व्यक्ति के जीवन की अच्छी गुणवत्ता एवं समग्र स्वास्थ्य के लिए एक अपरिहार्य अंग है। मुख संबंधी अस्वस्थता नकारात्मक रूप से वृद्धि, विकास, शिक्षा, पोषण, सम्प्रेषण, आत्मविश्वास और अनेक सामान्य स्वास्थ्य स्थितियो को प्रभावित करती है। भारत में दन्त-क्षरण और पेरिओडोंटिसिस दो सबसे अधिक व्यापक दन्त रोग हैं। अन्य रोगों की स्थिति जैसे मुख कैंसर और पूर्व-कैंसर की स्थिति, एडेंटूलोसनेस, मैलोक्लुजन के साथ-साथ इन दोनों रोगों की, खासकर देश के वंचित क्षेत्रों में, वर्षों तक उपेक्षा की गयी, क्योंकि इस रोग के कारण मृत्यु-दर पर नगण्य प्रभाव पड़ता है। इन रोगों के बारे में जागरूकता के अभाव से समस्याएँ और अधिक गंभीर एवं प्रबल रूप धारण कर चुकी हैं। अब बैक्टीरियल एन्डोकार्डीटिस, अथेरोस्क्लेरोसिस, क्रोनिक प्रतिरोधी फेफड़े की बीमारियों, डायबिटीज मेल्लीटस और असमय जन्म आदि के साथ भी मुख संबंधी रोग जुड़ने लगे हैं। इसके अतिरिक्त, दर्द व पीड़ा के रूप में लोगों के दैनिक जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों, क्षतिग्रस्त व ख़राब दांतों के कारण जीवन की गुणवत्ता के नुकसान पर भी विचार किया जाना चाहिए।

सके महंगे उपचार एवं बारम्बारता की स्थिति के कारण दन्त रोग का आर्थिक प्रभाव बहुत महत्वपूर्ण है। विकासशील देशों में, संसाधनों को मुख्यत- आपातकालीन मुख संबंधी सेवा व दर्द से राहत के लिए आवंटित किया जाता है, यदि उपचार सामान्य रूप से उपलब्ध हो तो बच्चों में दन्त क्षरण की लागत अकेले ही बच्चों के लिए कुल स्वास्थ्य सेवा बजट से अधिक होगी। इसके अलावा, मुख संबंधी रोग स्कूल व काम में गतिविधियों को प्रतिबंधित करते हैं जिसके कारण, दुनिया भर में हर साल स्कूल व काम के लाखों घंटे बर्बाद हो जाते हैं।

विश्व मुख संबंधी स्वास्थ्य रिपोर्ट-2003 के अनुसार, मुख संबंधी रोग की पूरे विश्व में व्यापकता के चलते, इसे एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या रूप में माना गया है। मुख के रोगों का सबसे अधिक प्रभाव आर्थिक रूप से वंचित एवं सामाजिक रूप से हाशिये की आबादी पर है। इसलिए, मुख संबंधी स्वास्थ्य की इन अनियमितताओं को सुलझाने के लिए, भारत सरकार ने मुख संबंधी स्वास्थ्य सेवाओं के, समन्वित तरीके से, सस्ते, सुलभ एवं न्यायसंगत वितरण के लिए राष्ट्रीय मुख संबंधी स्वास्थ्य कार्यक्रम की परिकल्पना की है।

भारत में मुख संबंधी (मुख संबंधी) रोगों की स्थिति

भारत में मुख संबंधी रोगों की समस्या काफी अधिक है, अपनी बहुघटकीय प्रकृति के कारण ये अन्य असंक्रामक रोगों के लिए भी एक खतरा के रूप में हैं। कई मुख संबंधी स्वास्थ्य सर्वेक्षण देश के विभिन्न क्षेत्रों में समय-समय पर किए गए हैं। मुख संबंधी स्वास्थ्य पर व्यापक आंकड़े ‘भारत में वृहद-अर्थशास्त्र व स्वास्थ्य, मुख संबंधी स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय आयोग की रिपोर्ट में उद्धृत किये गये थे - बहुकेन्द्रिक मुख संबंधी स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट (शाह व अन्य, 2007) इन रिपोर्टों के आधार पर, लोगों में विभिन्न मुख संबंधी रोगों की व्यापकता का विवरण नीचे दिया गया है

मुख संबंधी रोगों की स्थिति (बहुकेंद्रिक सर्वेक्षण 2007)

क्रम सं.

रोग

व्याप्ति

1

दन्त क्षरण

40-45%

2

पेरिओडोंटल रोग

>90% (40% में विकसित रूप में)

3

मैलोक्क्लुजन

30% बच्चो में

4

होंठ व तलवे का कटना-फटना

1.7 प्रति 1000 के जन्म पर

5

मुख का कैंसर

12.6 प्रति एक लाख लोगों पर

6

ओरल सबमुकस फाइब्रोसिस (मुँह की पूर्व घातक और गंभीर हालत)

4 प्रति 1000 वयस्क (ग्रामीण भारत में)

7

डेटल फलोरोसिस

स्थानीय रूप से 19 राज्यों के 230 जिलों में

8

एडेंटूलोसनेस (दांतों की क्षति)

19-32% बुजुर्ग आबादी (65 साल से अधिक)

9

मुख के घाव (एड्स/एचआईवी के कारण)

72% एड्स/एचआईवी रोगियों का

10

जन्म दोष (मुख-चेहरे में असामान्यता)

0.82 से 3.36 प्रति 1000 के जन्म पर

11

अन्य-

दर्दनाक चोटें

• रेडिएशन व कीमोथेरेपी से जुड़े क्षेष्मक घाव

• मुंह के कैंसर की सर्जरी के बाद रुग्णता और विकृति।

मुख संबंधी रोगों की व्याप्तता(राष्ट्रीय मुख स्वास्थ्य सर्वेक्षण और फ्लोराइड मैपिंग-2003)

एक राष्ट्रीय मुख संबंधी स्वास्थ्य कार्यक्रम की आवश्यकता

मुख संबंधी रोग सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है और इनका व्यवस्थित स्वास्थ्य पर काफी प्रभाव पड़ता है। मुख संबंधी अस्वस्थता सौंदर्य में कमी, प्रतिकूल चर्वण, पीड़ादायक दर्द का कारण बन सकती है और साथ ही लोगों के कार्य क्षमता घटने के कारण कुल उत्पादकता में भी कमी हो सकती है।

भारतीय दन्त परिषद के ताजा आकड़ों के अनुसार, 121 मिलियन की आबादी के लिए कुल 1,52679 दंत चिकित्सक देशभर में हैं। अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में दंत शल्य चिकित्सकों का समरूप वितरण भी नहीं है, देश की 72% जनसँख्या ग्रामीण क्षेत्रों में है जबकि 70% दन्त चिकित्सक केवल शहरी क्षेत्रों में सेवारत हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा वितरण के माध्यम से दन्त स्वास्थ्य सेवाओं के प्रावधान अभी तक देशभर में समान रूप से हासिल नहीं किए जा सके हैं, जबकि कई प्रगतिशील राज्यों ने अपने खुद के बजट या एनएचएम फलेक्सिपूल से दन्त स्वास्थ्य सेवा वितरण के लिए प्रयास किए हैं।

राष्ट्रीय मुख संबंधी स्वास्थ्य कार्यक्रम के उद्देश्य एवं लक्ष्य

इस कार्यक्रम के उद्देश्य निम्नलिखित हैं -

  • मुख संबंधी स्वास्थ्य के निर्धारक तत्वों में सुधार, जैसे स्वस्थ आहार, मुख संबंधी स्वच्छता आदि और ग्रामीण व शहरी आबादी में मुख संबंधी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में समरूपता लाने का प्रयास करना।
  • आरम्भ में तहसील या जिला स्तर के अस्पतालों में मुख संबंधी स्वास्थ्य सेवाएँ को सुदृढ़ कर मुख संबंधी रोगों की रुग्णता को कम करना।
  • मुख संबंधी स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले अन्य क्षेत्रों व सामान्य स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था के साथ मुख संबंधी स्वास्थ्य की प्रसार व रोकथाम सेवाओं को जोड़ना, इनमें विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम (राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम, स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम, सीवीडी, मधुमेह और स्ट्रोक आदि के रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम, रोकथाम और फ्लोरोसिस का नियंत्रण, राष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम आदि) शिक्षा, समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास आदि कार्यक्रम होंगे।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) को बढ़ावा देना

लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए रणनीतियाँ

कार्यक्रम के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए मूल रणनीतियाँ इस प्रकार हैं -

मानव संसाधन

जिला स्तर तक स्वास्थ्य सेवा वितरण व्यवस्था के प्रत्येक स्तर पर मुख संबंधी स्वास्थ्य सेवाओं के वितरण में चरणवार ढंग से सुधार लाने के लिए, पीएचसी / सीएचसी स्तर तक राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों के प्रयासों के पूरक के रूप में, दन्त शल्य चिकत्सक, दन्त स्वच्छता चिकित्सक एवं दन्त चिकित्सा सहायक अनुबंध के आधार पर भर्ती किये जायेंगे।

समर्थन व सहयोग

कार्यक्रम कुशल मुख संबंधी स्वास्थ्य सेवा वितरण के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए, राज्यों की भिन्न-भिन्न आवश्यकताओं के अनुसार जिला और उप जिला अस्पतालों में समर्पित दन्त चिकित्सा केन्द्रों की स्थापना के लिए समर्थन करेगा। राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों को, अपने जिला व तहसील अस्पतालों में मूलभूत मुख संबंधी स्वास्थ्य रक्षण सेवाएं प्रदान करने के लिए, दंत कुर्सी, एक्स-रे मशीन और अन्य सहायक उपकरणों की खरीद के लिए अनुदान दिया जाएगा।

प्रशिक्षण

सभी स्वास्थ्य रक्षण कर्मचारियों को सामान्य मुख संबंधी स्वास्थ्य से सम्बंधित प्रशिक्षण दिया जायेगा ताकि मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसी पुरानी बीमारियों से पीड़ित रोगियों, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों पर विशेष ध्यान देने के साथ, लोगों के बीच दन्त स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके। अलग-अलग लक्ष्य समूहों के लिए अलग-अलग प्रशिक्षण मॉडयूल एवं प्रत्येक राज्य में प्रासंगिक प्रशिक्षण का संचालन करने के लिए प्रशिक्षकों की पर्यात संख्या का विकास करके कौशल निर्माण का कार्य किया जाएगा।

आईईसी व बीसीसी

सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) सामग्री / व्यवहार परिवर्तन संचार (बीसीसी) सामग्री तैयार की जायेगी एवं इसे राज्यों में प्रसारित किया जायेगा जहाँ इसे स्थानीय आवश्यकताओं  के अनुरूप संशोधित कर लोगों में मुख संबंधी स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता फैलाने के काम में लाया जा सकता है। व्यवहार परिवर्तन के लिए, इन विषयो पर पारस्परिक सम्प्रेषण का प्रयोग किया जा सकता है –

• मुख की स्वच्छता के लिए उचित विधियाँ

• मुख संबंधी स्वस्थता के लिए भोजन आदतें

• मुख संबंधी स्वास्थ्य पर तंबाकू और शराब का प्रभाव

विस्तृत कार्यक्रम प्रबंधन

राज्य, जिला और उप जिला स्तर पर मुख संबंधी स्वास्थ्य कार्यक्रम का विभिन्न हितधारकों के साथ समन्वय कराने के लिए, राष्ट्रीय मुख संबंधी स्वास्थ्य प्रकोष्ठ (एन.ओ.एच.सी.) को केंद्र में स्थापित किया जाएगा।

निगरानी और मूल्यांकन

जिला स्तर से केंद्र तक सूचनाओं व आंकड़ों के सतत प्रवाह के लिए, एनसीडी सेल के मौजूदा मानव संसाधनों का उपयोग करते हुए, सभी स्तरों पर एन.ओ.एच.पी. का निगरानी किया जाना चाहिए।

पूरक रणनीतियाँ

  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) - सामुदायिक मुख संबंधी स्वास्थ्य के सम्बन्ध में जागरूकता उत्पन्न करने और सेवा वितरण के लिए निजी डेंटल कॉलेजों, इंडियन डेंटल एसोसिएशन, सामुदायिक संस्थाओं के साथ पीपीपी मॉडल के आधार पर कार्य किया जायेगा।
  • दन्त-चिकित्सा शिक्षा को सामुदायिक मुख संबंधी स्वास्थ्य सेवा वितरण की ओर दिशा देना - दंत चिकित्सा के स्नातक छात्रों को, देश की स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणाली के बारे में जागरूक करने और उनकी इंटर्नशिप के दौरान उन्हें सीएचसी/पीएचसी स्तर पर सेवा वितरण प्रणाली से ओतप्रोत कराने की तत्काल आवश्यकता है।

राष्ट्रीय मुख संबंधी स्वास्थ्य कार्यक्रम की संगठनात्मक संरचना

  1. राष्ट्रीय मुख संबंधी स्वास्थ्य प्रकोष्ठ -

यहाँ एक तकनीकी अधिकारी (सीएमओ (एन.ओ.एच.पी.) के रूप में राष्ट्रीय केंद्र बिंदु होता है, जो कि तकनीकी मामलों में उप महानिदेशक (एनसीडी) को और अन्य प्रशासनिक मामलों के लिए संयुक्त सचिव (जे.एस.)/ निदेशक को रिपोर्ट करेंगे। एक मुख संबंधी स्वास्थ्य सलाहकार उनके सहयोगी होंगे। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में एक टीम, जिसमे कुछ सचिव एवं कुछ सहायक होंगे, कार्यक्रम के संयुक्त सचिव और सीएमओ को सहयोग देगी। ये दोनों टीमें, मंत्रालय और जीएचएस निदेशालय में कार्यरत मुख्य एनसीडी टीम के साथ मिलकर कार्य करेंगी।

  1. राज्य मुख संबंधी स्वास्थ्य प्रकोष्ठ (एस.ओ.एच.सी)

शिनाख्त किए गए राज्य के नोडल अधिकारी राष्ट्रीय मुख संबंधी स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रकोष्ठ के राज्य स्तर के प्रभारी होंगे। वे राज्य के न फैलनेवाली बीमारी विभाग के सामान्य सी.एम.ओ. प्रभारी या अलग-अलग राज्यों की आवश्यकताओं के अनुसार अलग से कार्यक्रम अधिकारी भी हो सकते हैं। यह प्रकोष्ठ अन्य एन.सी.डी. कार्यक्रम के लिए मौजूदा राज्य एनसीडी प्रकोष्ठ के साथ मिलकर काम करेगा।

  1. जिला मुख संबंधी स्वास्थ्य प्रकोष्ठ

इसी तरह से जिला एन.सी.डी. प्रकोष्ठ द्वारा शिनाख्त किया गया जिला नोडल अधिकारी के नेतृत्व में जिले स्तर पर भी एक ढाँचा होगा।

राष्ट्रीय मुख संबंधी स्वास्थ्य कार्यक्रम (एन.ओ.एच.पी.) की गतिविधियाँ

विभिन्न स्तरों पर राष्ट्रीय मुख संबंधी स्वास्थ्य कार्यक्रम (एन.ओ.एच.पी.) की गतिविधियाँ

राष्ट्र स्तरीय

क) जिलों के लिए भर्ती किए जाने वाले श्रमिकों के टी.ओ.आर. तैयार करना

ख) दंत चिकित्सा इकाइयों के उपकरणों के लिए तकनीकी विनिर्देश तैयार करना

ग) आई.ई.सी./ बी.सी.सी./ आई.सी.टी. गतिविधियाँ

घ) प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण

ड) जाँच और मूल्यांकन

राज्य स्तरीय

क) शिनाख्त किए गए जिलों के दंत चिकित्सा इकाइयों का सुदृढ़ीकरण

ख) जाँच और मूल्यांकन

ग) जिला स्तर और उसके नीचे के स्तरों पर शामिल स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों का मुख संबंधी स्वास्थ्य से सम्बंधित प्रशिक्षण

जिला स्तरीय

क) जिलों में शिनाख्त किए गए दंत चिकित्सा इकाइयों का सुदृढ़ीकरण

ख) कर्मियों की भर्ती दंत चिकित्सक, दंत स्वास्थ्य विशेषज्ञ, दंत चिकित्सा सहायक

ग) प्रशिक्षण

घ) आई.ई.सी. गतिविधियाँ

एन.ओ.एच.पी. के तहत विभिन्न स्तरों पर उपलब्ध कराई जानेवाली सेवाएँ

स्वास्थ्य सुविधाएँ

सेवा पैकेज

उप-केंद्र

1. दिनचर्या कार्यक्रम के माध्यम से सभी लक्षित समूहों को मुख संबंधी स्वास्थ्य शिक्षा

2. मुख संबंधी स्वास्थ्य विषय पर चर्चा के लिए मासिक या पाक्षिक कार्यक्रम में समर्पित दिन

3. दंत चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता के आधार पर दांत की समस्या वाले मरीजों को पी.एच.सी. या एफ.आर.यु. के लिए परामर्श

4. दर्द से राहत और अन्य दांत की नियमित समस्याओं के लिए दवा का निर्धारण

5. पी.एच.सी. को रिपोर्टिग करने के लिए रिकार्ड रखना

पी.एच.सी.

1. चिकित्सा अधिकारी (दन्त) द्वारा दैनिक ओपीडी सेवाएं

2. अन्य विभागों के सहयोग से दंत चिकित्सा शिविरों की व्यवस्था

3. सी.एच.सी. की रिपोर्टिग करने के लिए दिए गए प्रारूप में रिकॉर्ड का रखरखाव

4. स्कूल द्वारा भेजे गए बच्चों को सेवाएँ प्रदान करना

सी.एच.सी.

1. पी.एच.सी. और उससे नीचे के लिए प्रथम परामर्श इकाई (एफ.आर.यु.)

2. अन्य विभागों के सहयोग से दंत चिकित्सा शिविरों की व्यवस्था

3. रिपोर्टिंग के लिए दिए गए प्रारूप में रिकॉर्ड का रखरखाव

4. स्कूल द्वारा भेजे गए बच्चों को सेवाएँ प्रदान करना

जिला अस्पताल

1. सी.एच.सी. और पी.एच.सी. के परामर्श पर मामलों का प्रबंधन, कृत्रिम दांतों प्रदान करना, फ्रैंक्चर में कमी, परामर्श आधार पर साप्ताहिक या मासिक तौर पर दन्त हड़ी विशेषज्ञ की नियुक्ति

2. पीएचसी और सीएचसी से रिपोर्ट का मिलान करना

3.एन.एच.एम. और एन.सी.डी. के तहत अन्य कार्यक्रमों के साथ सम्मलेन

4. आर.बी.एस.के. के तहत संदर्भित स्कूली बच्चों तक सेवाएँ पहुँचाना

वित्तीय दिशानिदेश

कार्यक्रम प्रबंधन का वित्तीय प्रबंधन समूह (एफ.एम.जी.) एन.एच.एम. के तहत स्थापित हुए राज्य और जिला स्तर की इकाइयों को मदद करते हैं। ये खातों के रखरखाव, फंड जारी करना, व्यय रिपोर्ट, उपयोगिता प्रमाणपत्र और लेखा परीक्षा व्यवस्था के रखरखाव के लिए जिम्मेदार होगा । राज्य स्वास्थ्य सोसाइटी (एसएचएस) को कोषागार मार्ग के माध्यम से राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा फंड जारी किया जाएगा। इनका कार्य विभिन्न स्तरों पर परिचालन दिशानिर्देशों में दी गई और स्वीकृत राज्य पी.आई.पी. गतिविधियों का कार्यान्वन करना होगा।

वित्त वर्ष 2014-15 में राज्यों/ केंद्र प्रशासित क्षेत्रों को योजना के अनुसार फंड जारी किए गए थे । हालांकि, वित्तीय वर्ष 2015-16 से यह निर्णय लिया गया है कि राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों के परिचालन लचीलेपन में सुधार लाने के लिए योजना के अनुसार जारी करने के बदले उन्हें विभिन्न फ्लेक्सी पूल्स के तहत जारी किया जाएगा।

यह भी निर्णय लिया गया है कि राष्ट्रीय मुख संबंधी स्वास्थ्य कार्यक्रम (एन.ओ.एच.पी.) मिशन फ्लेक्सिबल पूल' कहे जाने वाले एन.एच.आर.एम. के तहत उसे सुदृढ़ करता स्वास्थ्य प्रणाली का ही एक हिस्सा होगा। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत बनाने के तहत एन.ओ.एच.पी. में राज्यों को मान्यता दी जाएगी, योजनाओं के विलय और उसके अनुसार व्यय को एफ.एम.आर. में मिला लिया जाएगा।वित्त वर्ष 2014-15 के लिए व्यय विवरण (एस.ओ.ई.) और उपयोगिता प्रमाण पत्र (यू.सी.) को अनुबंध में दिए गए निर्धारित फार्मेट में जी.एफ.आर. 19ए के अनुसार जमा करने होंगे। वित्तीय वर्ष 2015-16 से एन.ओ.एच.पी. के तहत अलग से कोई यू.सी. प्रस्तुत किए जाने की जरूरत नहीं है। प्रणाली को मजबूत बनाने के पूल के तहत यू.सी. राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एन.ओ.एच.पी.) के उपयोग को कवर करेगा।

उपरोक्त के अलावा यह भी ध्यान देने योग्य है कि राज्यों को पी.आई.पी. प्रस्ताव भेजेने के समय ही छूट दी गई थी और व्यय करने के लिए अन्य पूल से अस्थायी ऋण का भी प्रवधान है। लेकिन किसी भी स्थिति में पी.आई.पी. में मंजूर की गई राशि से व्यय अधिक न हों।

कर्मियों के लिए टी.ओ.आर.

क. राष्ट्रीय मुख संबंधी स्वास्थ्य प्रकोष्ठ

मुख संबंधी स्वास्थ्य सलाहकार-

योग्यता -आवश्यक

1) एम.डी.एस./ एम.डी. [कम्युनिटी मेडिसिन, कम्युनिटी स्वास्थ्य प्रशासन, सामुदायिक दंत चिकित्सा] या

2) सार्वजनिक स्वास्थ्य में स्नातक एवं स्नातकोत्तर (एम.पी.एच.) तथा सम्बंधित क्षेत्र में न्यूनतम दो वर्ष का अनुभव,

3) भारतीय चिकित्सा/ दंत चिकित्सा परिषद में पंजीकृत हों

वांछनीय -

मुख संबंधी स्वास्थ्य या किसी अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम में अनुभव

ज्ञान और कौशल -

• देश में मुख संबंधी स्वास्थ्य की स्थिति और जनता के स्वास्थ्य पर उसके प्रभावों के बारे में ज्ञान

• मुख संबंधी स्वास्थ्य संवर्धन और स्थानीय भागीदारी योजना के क्षेत्रों में ज्ञान और बहु-अनुशासनात्मक वातावरण में सहयोग से और उत्पादकता के साथ कार्य करने की क्षमता

• भारत में स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणाली के बारे में ज्ञान

• शोध प्रणाली और मुख संबंधी स्वास्थ्य से संबंधित अनुसंधान प्रस्तावों के मूल्यांकन के बारे में ज्ञान

• स्वास्थ्य संचार का ज्ञान

• अधिकतम यात्रा करने की क्षमता

• एम.एस.-ऑफिस और इंटरनेट कौशल

• अंग्रेजी और हिंदी दोनों में अच्छा संचार कौशल लिखित और मुख संबंधी

उत्तरदायित्व और कर्तव्य

• राष्ट्रीय मुख संबंधी स्वास्थ्य कार्यक्रम की योजना और कार्यान्वयन के लिए तकनीकी के साथ-साथ कार्यक्रम के प्रबंधन में सहयोग प्रदान करना

• राष्ट्रीय मुख संबंधी स्वास्थ्य कार्यक्रम के लिए आई.ई.सी. के विकास में सहयोग करना

• राष्ट्रीय मुख संबंधी स्वास्थ्य कार्यक्रम के कार्यान्वयन की जाँच करना

• मुख संबंधी स्वास्थ्य कार्यबल (प्रशिक्षण मॉडयूल, प्रशिक्षण कार्यक्रम का विकास, मूल्यांकन आदि) की क्षमता निर्माण को सुगम बनाना

तकनीकी सहायक - 1

> योग्यता –आवश्यक

1) मान्यता प्राप्त संस्थान से किसी भी अनुशासन में स्नातक।

2) कम्प्यूटर एप्लीकेशन में एक वर्ष प्रमाणपत्र

3) आवेदक को न्यूनतम 1-2 वर्ष का व्यावसायिक अनुभव/ स्वास्थ्य से संबंधित क्षेत्र से अवगत हो।

वांछनीय –

1) आवेदक को न्यूनतम 1-2 वर्ष का व्यावसायिक अनुभव/ स्वास्थ्य से संबंधित क्षेत्र से अवगत हो।

2) राष्ट्रीय / राज्य स्तर पर सरकारी क्षेत्र में काम करने का दिखाया गया

अनुभव ज्ञान और कौशल –

• अच्छा समय प्रबंधन और बहु-कार्य कौशल के साथ समय सीमा संचालित वातावरण में काम करने की क्षमता

• उद्ध स्तर के व्यक्तिगत आचरण के साथ पारस्परिक कौशल के अच्छे प्रदर्शन की क्षमता और टीम में काम करने की क्षमता

• कंप्यूटर ज्ञान में प्रवीणता और एम.एस.-ऑफिस और इंटरनेट कौशल में दक्षता और टीम में काम करने की क्षमता

अच्छा संवाद कौशल

राज्यों/ केंद्र शासित राज्यों में एन.एच.एम. घटक

डेटल सर्जन –

  • . डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थान बी.डी.एस.
  • किसी अस्पताल/ संस्था में काम करने का न्यूनतम 2 वर्ष का अनुभव आयु सीमा- 40 वर्ष

आवश्यकता और जिम्मेदारियाँ -

• रोगियों को ओपीडी सेवाएं प्रदान करना

• समय समय पर दंत चिकित्सा शिविरों का आयोजन और प्रबंधन करना

• पदानुक्रम में केन्द्रों को जटिल मामलों का उल्लेख करना

• पैरामेडिकल कर्मियों को प्रशिक्षण देना

• एन.ओ.एच.पी. के तहत गतिविधियों का पर्यवेक्षण और प्रबंधन करना

डेंटल चिकित्सकीय / डेंटल तकनीशियन / डेंटल मैकेनिक –

  • मान्यता प्राप्त बोर्ड से (10 + 2) विज्ञान में उत्तीर्ण
  • सरकारी मान्यता प्राप्त संस्थान से डेंटल चिकित्सकीय / डेंटल तकनीशियन / डेंटल मैकेनिक कोर्स में डिप्लोमा
  • राज्य डेंटल काउंसिल में पंजीकरण

अनुभव - एक डेंटल कॉलेज/ क्लिनिक में दो वर्ष का अनुभव

उत्तरदायित्व

• रोगी स्क्रीनिंग प्रक्रिया, जैसे मुख संबंधी स्वास्थ्य की स्थिति का मूल्यांकन

• डेंटल रेडियोग्राफ लेना और विकसित करना

• कृत्रिम दांतों का निर्माण और मरम्मत

• मुख संबंधी स्वच्छता के रखरखाव के बारे में रोगी को शिक्षा प्रदान करना

दंतचिकित्सा सहायक- 1

योग्यता

मान्यता प्राप्त बोर्ड से मैट्रिक परीक्षा

अनुभव

डेंटल कॉलेज / क्लिनिक में दो वर्ष का अनुभव

जिम्मेदारियाँ –

• वर्तमान संक्रमण नियंत्रण प्रक्रियाओं के अनुसार कीटाणुरहित और स्वच्छ काम के माहौल को बनाए रखना

• स्टॉक संचालन और नैदानिक आपूर्ति सूची का रखरखाव करना

• रोगी के रिकॉर्ड का रखरखाव और नियुक्तियों को सारणीबद्ध करना

अनुबंध -2 उपयोगिता प्रमाणपत्र

क्र.सं.

पत्र संख्या और दिनांक

राशि कुल

 

 

 

 

 

यह प्रमाणित किया जाता है कि रु.------ में से वर्ष------- के लिए अनुमोदित अनुदान सहायता राशि---------- के पक्ष में--------- हाशिये में दिए गए मंत्रालय/ विभाग के पत्र संख्या तथा खर्च न होने के कारण रूपए. की शेष राशि, पिछले वर्ष की खर्च न हुई शेष राशि के कारण कुल रू·--------------का उपयोग .उसके अनुमोदित कार्य के लिए किया VTPT--------- और रूपए. की शेष राशि खर्च न होने पर वर्ष के अंत में सरकार को समर्पित जा रही है (संख्या-----वहाँ देखें, दिनांक----)/ अगले वर्ष के दौरान देय अनुदान सहायता राशि में समायोजित कर लिया जाएगा।

प्रमाणित किया जाता है कि मैंने अपने आप को संतुष्ट किया है कि जिन शताँ पर अनुदान सहायता राशि स्वीकृत की गई थी, वे विधिवत पूरी की गई हैं/पूरी की जा रही हैं और जिस उद्देश्य के लिए यह इन पैसों को स्वीकृति मिली थी वह पैसा वास्तव उसी परायों में प्रयुक्त किया जा रहा है या नहीं यह सुनिचित करने के लिए मैंने प्रस्तुत जाँच का प्रयोग किया है।

प्रयोग में लाए गए जाँच के प्रकार ------------------------

हस्ताक्षर

अनुलग्नक III

राष्ट्रीय मुख स्वास्थ्य कार्यक्रम (एनओएचपी)

व्यय विवरण

राज्य स्वास्थ्य सोसायटी---------------- वर्ष------------------ तिमाही (I/II/III/IV)

आवर्ती/गैर-आवर्ती अनुदान

क्र.सं.

सहायता अनुदान

सरकार से प्राप्त खर्च न की गई बकाया राशि

भारत सरकार से प्राप्त निधियां

किया गया व्यय

शेष

1

जिला स्तर

 

 

 

 

 

मानव संसाधन (संविदागत)

 

 

 

 

 

उपभोज्य

 

 

 

 

 

दंत चिकित्सा क्लीनिक को सुदृढ़ करने के लिए उपकरण

 

 

 

 

2

सीएचसी स्तर

 

 

 

 

 

मानव संसाधन (संविदागत)

 

 

 

 

 

उपभोज्य

 

 

 

 

 

दंत चिकित्सा क्लीनिक को सुदृढ़ करने के लिए उपकरण

 

 

 

 

3

पीएचसी स्तर

 

 

 

 

 

मानव संसाधन (संविदागत)

 

 

 

 

 

उपभोज्य

 

 

 

 

 

दंत चिकित्सा क्लीनिक को सुदृढ़ करने के लिए उपकरण

 

 

 

 

अनुलग्नक IV

राष्ट्रीय मुख स्वास्थ्य कार्यक्रम पीआईपी दिशानिर्देश

विभिन्न घटकों के लिए राज्यों / संघ शासित क्षेत्रों को भौतिक लक्ष्य मांगी गई निधियां राष्ट्रीय मुख स्वास्थ्य कार्यक्रम सहायता अनुदान

 

भौतिक लक्ष्य

मांगी गयी निधियाँ

एसएन

घटक

 

 

एन.1

आवर्ती जीआईए (13.4 लाख रु.)

 

 

एन.1.1

संविदागत जनशक्ति एचआर

 

 

एन.1.1.1

दंत चिकित्सा सर्जन दर 40000 रु./माह

 

 

एन.1.1.2

दंत चिकित्सा स्वास्थिक दर 20000 रु./ माह

 

 

एन.1.1.3

दंत चिकित्सा सहायक दर 10000 रु./ माह

 

 

एन.1.2

उपभोज्य दर 5 लाख रु./वर्ष

 

 

एन.2

गैर-आवर्ती जीआईए (7.0 लाख रु.)

 

 

एन.2.1

जिला अस्पतालों का सृदृढ़ीकरण (नवीकरण, डेंटल चेयर, उपकरण) दर 7 लाख रु.

 

 

कुल

20.4 लाख रु.

 

 

 

  • 5% वार्षिक पारिश्रमिक वृद्धि के प्रावधान पर विचार किया जा सकता है बशर्त कि संविदागत स्टॉफ और परामर्शदाताओं की समिति द्वारा कार्य-निष्पादन मूल्यांकन किया जाए।
  • विभिन्न क्षेत्रों / राज्यों में संविदागत स्टॉफ की उपलब्धता के अनुसार पारिश्रमिक को घटाया-बढ़ाया जा सकता है बशर्त कि ऊपर उल्लिखित अनुसार सांकेतिक राशि दी जाए। पारिश्रमिक को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा जारी समग्र दिशानिदेशों के अनुसार निर्धारित किया जाएगा।

अनुलग्नक V

प्रस्तावों में उपकरणों के लिए दिशानिर्देश

जिन स्वास्थ्य सुविधाओं को एनएचएम/राज्य सरकार या अन्य किसी राष्ट्रीय / अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी के अंतर्गत पहले से शामिल किया गया है, उन्हें सहायता के लिए प्रस्तावित नहीं किया जाना चाहिए। एनएचएम/या राज्य सरकार/ अन्य किसी राष्ट्रीय/ अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी के अंतर्गत जिन उपकरणों को किसी अस्पताल/केन्द्र को पहले उपलब्ध कराया गया है, उन्हें इस सहायता में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। उपचार सहायता नेमी प्रक्रिया, चिकित्सा, परीक्षणों के लिए दी जाएगी, जो सामान्यता दंत रोगियों के लिए आवश्यक होती है। एक जिला अस्पताल/एसडीएच/ सीएचसी में प्रस्तावित अतिरिक्त मुख स्वास्थ्य संबंधी मदों की आवश्यकता के लिए सहायता दी जाएगी-

क.सं.

मद

डीएचएसडीएच/सीएचसी/पीएचसी

 

1

पर्यात सहायक उपकरण सहित इलेक्ट्रॉनिक डेंटल चेयर (हेडपीस, कंप्रेसर, तीन प्रकार की सिरिंज)

1

2

आटोक्लेव (इलेक्ट्रॉनिक)

1

3

दांतों की मैनुअल सफाई के लिए उपकरण

 

5 सेट

 

4

अल्ट्रासोनिक स्केलर और पोलिशिंग किट

2 सेट

5

डेवलपर सहित डेंटर एक्स-रे

1

6

लाइट क्योर गन

2 सेट

7

एक्सट्रैक्शन फोर्सेप्स

4 सेट

8

रेस्टोरेटिव (फिलिंग) उपकरण

5 सेट

9

आरपीडी और सीडी के लिए इम्प्रैशन ट्रे

प्रत्येक 2 सेट

10

रूट कनाल इंस्टूमेंटसेट (मैनुअल)

5 सेट

11

क्लिनिक के लिए अतिरिक्त डेंटल सामग्री और उपकरण तथा उपभोज्य वस्तुएं

 

 

स्रोत: भारत सरकार का स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय

 

2.91666666667

Dr.Zebagul Siddique Dec 29, 2017 07:01 PM

Its very good initiation toward oral heath care Because lots of people neglect in maintaioning oral hygiene and habit of tobacco chewing and smoking causes lots of malignant lesion ... Carry on this mission for prevetion of such diseases

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