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राज्य औषधि विनियामक प्रणाली का सुदृढीकरण

इस लेख में राज्य औषधि विनियामक प्रणाली का सुदृढीकरण योजना का विशेष उल्लेख किया गया है|

परिचय

राज्य औषधि विनियामक प्रणाली का सुदृढीकरण स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार और

- - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - सरकार (राज्य/संघ राज्यक्षेत्र का नाम)

के बीच समझौता ज्ञापन

1. प्रस्तावना

1.1 केन्द्रीय सरकार के लोक स्वास्थ्य उद्देश्यों की पूर्ति के लिए मुख्य हस्तक्षेपों में एक हस्तक्षेप यह सुनिश्चित करना है कि जनता को उपलब्ध औषधियां सुरक्षित, प्रभावकारी और विहित क्वालिटी मानकों के अनुरूप हों । देश में औषधियों की क्वालिटी, सुरक्षा और प्रभावकारिता पर एक केन्द्रीय विधान, जिसे औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 कहा जाता है और उसके अधीन बनाए गए औषधि और प्रसाधन सामग्री नियम, 1945 के माध्यम से विनियामक नियंत्रण का प्रयोग किया जाता है ।

1.2 केन्द्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीआो) ऐसा केन्द्रीय वाले विषयों की बाबत औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और औषधि और प्रसाधन सामग्री नियम, 1945 के उपबंधों के कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायी है ।

1.3 इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अधीन, देश में आयातित औषधियों और प्रसाधन सामग्री पर विनियामक नियंत्रण का प्रयोग केन्द्रीय सरकार द्वारा सीडीएससीओ के माध्यम से किया जाता है ।

11.4 औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और औषधि और प्रसाधन सामग्री नियम, 1945 के उपबंधों के अधीन, औषधियों और प्रसाधन सामग्री का विनिर्माण, विक्रय और वितरण राज्य सरकारों द्वारा नियुक्त राज्य औषधि नियंत्रण प्राधिकारियों द्वारा विनियमित किया जाता है । सीडीएससीओ द्वारा अनुमति दिए जाने के पश्चात् आयातित औषधियों का विक्रय भी राज्य औषधि नियंत्रण विभागों द्वारा मानिटर और विनियमित किया जाता है । तदनुसार, औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और औषधि और प्रसाधन सामग्री नियम, 1945 के उपबंधों के कार्यान्वयन में राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों के औषधि नियंत्रण विभाग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ।

1.5 भारतीय भेषज उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था के सर्वाधिक जीवंत क्षेत्रों में है। । इसमें 10-12 प्रतिशत वार्षिक दर से वृद्धि हो रही है । यह विश्व का मात्रा के अनुसार तीसरा और मूल्यानुसार दसवां सबसे बड़ा क्षेत्र है । भारतीय भेषज उद्योग का कुल आकार लगभग 2 लाख करोड़ रुपए है जिसमें निर्यात का हिस्सा लगभग 55 प्रतिशत है । घरेलू उपयोग और निर्यात दोनों के लिए औषधियों की क्वालिटी, सुरक्षा और प्रभावकारिता सुनिश्चित करने के लिए राज्य विनियामक प्रणाली को सुदृढ़ करना आवश्यक है ।

1.6 राज्य औषधि विनियामक प्रणाली से संबंधित मुख्य चिंताएं निम्न प्रकार हैं:

  • राज्य स्तर पर अपर्याप्त या कमजोर औषधि नियंत्रण संरचना ।
  • अपर्याप्त औषधि परीक्षण सुविधाएं ।
  • विधि और नियमों के प्रवर्तन में एकरूपता का न होना ।
  • विनियामक अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण की कमी ।
  • डाटा बेस की कमी |
  • अपर्याप्त आई.टी. सेवाएं ।

1.7 घरेलू उपभोक्ताओं तथा निर्यात प्रयोजनों के लिए औषधियों की क्वालिटी, सुरक्षा और प्रभावकारिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता सर्वोपरि है और यदि यह सुनिश्चित नहीं किया जाता है तो इससे लोक स्वास्थ्य, राष्ट्र हित और विश्व में भारत की ख्याति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है । इसके लिए प्रयोगशालाओं में पर्यास संख्या में नमूनों के सुव्यवस्थित संग्रहण और परीक्षण की आवश्यकता है । इसलिए, राज्यों में प्रयोगशालाओं को सुदृढ करना आवश्यक समझा गया है । साथ ही तकनीकी जनशक्ति/(स्टाफ) की क्षमता और संख्या में भी वृद्धि करना आवश्यक समझा गया है । इसके मददेनजर विनियमन की एक ऐसी आदर्श पद्धति बनाना प्रस्तावित है जिससे एक सुदृढ औषधि विनियामक प्रणाली के माध्यम से संपूर्ण देश में विधियों (कानूनों) का एकसमान प्रवर्तन सुनिश्चित किया जा सके ।

1.8 उपरोक्त क्रियाकलापों को आरंभ करने के लिए केन्द्र और राज्य दोनों स्तरों पर समुचित आधारभूत सुविधाओं की आवश्यकता है जिसके तहत नई संरचना विकसित की जानी है और पर्याप्त जनशक्ति की भर्ती की जानी है ।

1.9 यह सुनिश्चित करने के लिए कि केवल सुरक्षित औषधियां ही ठपभोण के लिए ठपलब्ध हों, दक्ष औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं का एक नेटवर्क स्थापित करना आवश्यक होगा । इन प्रयोगशालाओं को आपस में जोड़कर औषधि सुरक्षा और क्वालिटी से संबंधित जोखिम निर्धारण संघटक को भी सुदृढ़ करने की आवश्यकता है । अतः, केन्द्र और राज्य/संघ राज्यक्षेत्र सरकारें निगरानी पद्धति के विद्यमान ढांचे को मजबूत करेंणी और वर्तमान और नई औषधि सुरक्षा और क्वालिटी से संबंधित आशंकाओं के बारे में ठपभोक्ता जागरुकता में वृद्धि करेंगी |

1.10 उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए, इस समझौता ज्ञापन के हस्ताक्षरकर्ता नीचे दिए गए बिन्दुओं पर सहमत हुए हैं ।

2. समझौता ज्ञापन की अवधि

2.1 समझौता ज्ञापन 1 सितम्बर, 2015 से लागू होगा और 31 मार्च, 2018 तक या पारस्परिक सहमति से इसका नवीकरण होने तक, इनमें से जो भी पहले हो, प्रभावी रहेगा ।

3. राज्य के प्रस्ताव और वित्तपोषण

3.1 केन्द्र सरकार, राज्य औषधि विनियामक प्रणाली के कार्यान्वयन के लिए संसाधन उपलब्ध कराएगी | आरंभ में, राज्य/संघ राज्यक्षेत्र सरकारों को वार्षिक कार्य योजना तैयार करने के लिए एक सांकेतिक रकम की सूचना दी जाएगी।

3.2 निधियों की उपलब्धता और समग्र प्राथमिकता के अधीन रहते हुए, वर्ष 2015-16, 2016-17 और 2017-18 के दौरान राज्य को दी जाने वाले सहायता अनुदान की रकम, जिसमें राज्यों का अंश भी शामिल है, वही होगी जिस पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग और राज्य सरकार के बीच सहमति हो । राज्य/संघ राज्यक्षेत्र इस कारण कुल व्यय में से अपना अंश अपने स्वयं के संसाधनों में से उपलब्ध कराएंगे | केन्द्र और राज्यों का अंश सभी राज्यों के लिए 75:25 के अनुपात में होगा सिवाय जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, 90:10 होगा |

3.3 राज्य/संघ राज्यक्षेत्र वर्ष 2015-16, 2016-17 और 2017-18 के लिए वार्षिक कार्य योजना इस प्रयोजनार्थ विहित प्रोफार्मा (परिशिष्ट 1 से 4) में तैयार करेंगे जो उन्हें उपलब्ध कराई गई निधियों की मात्रा पर आधारित होगी । यह प्रस्ताव इस क्षेत्र के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय व राज्य-स्तरीय नीतियों तथा पहले से ही मान्य अन्य योजनाओं के आम सिद्धान्तों के अनुरूप होगा ।

3.4 राज्य/संघ राज्यक्षेत्र, प्रस्ताव के आधार पर केन्द्रीय सरकार से परामर्श करेंगे |

3.5 केन्द्र सरकार इस सहायता के जरूरी परिणामों के विषय में जानकारी देणी जिनका पालन करना राज्यों के लिए आवश्यक होगा ।

3.6 प्रस्ताव में दी गई कार्य योजना के कार्यान्वयन की राज्य स्तर पर प्रत्येक मास में एक बार समीक्षा की जाएगी |

3.7 केन्द्र सरकार द्वारा प्रत्येक तीन मास में समीक्षा कराई जाएगी ।

3.8 स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों को कार्य योजनाओं को शीघ्र अंतिम रूप देने के लिए सुविधास्वरूप प्रयोगशालाओं के भिन्न-भिन्न स्तरों के लिए अपेक्षित उपस्करों, जनशक्ति और स्थान इत्यादि की एक निर्देशिक सूची तैयार की है जो इस समझौता ज्ञापन के परिशिष्ट 4 पर है ।

3.9 इसके अतिरिक्त, चूंकि केन्द्र सरकार भी अपनी विद्यमान और नई प्रयोगशालाओं के लिए अनेक उपस्कर इत्यादि की खरीद मैसर्स एचएलएल इन्फ्रा टैक इंजीनियरिंग सर्विसिज़ लिमिटेड के माध्यम से करेणी इसलिए राज्य/संघ राज्यक्षेत्र भी उन शर्तों और निबंधनों पर, जो केन्द्र सरकार द्वारा ऐसी खरीद के लिए सामान्य रूप से लागू होते हैं, मैसर्स एचएलएल इन्फ्रा टैक इंजीनियरिंग सर्विसिज़ लिमिटेड से सुविधाएं प्राप्त करने का विकल्प अपना सकेंगे। |

3.10 वे राज्य/संघ राज्यक्षेत्र भी, जो स्वयं निर्माण क्रियाकलाप आरंभ करने में समर्थ नहीं हैं, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की परियोजनाओं को लागू निबंधनों और शतों पर मैसर्स एचएलएल इन्फ्रा टैक इंजीनियरिंग सर्विसिज़ लिमिटेड की सेवाएं ले सकेंगे |

4. निधि प्रवाह व्यवस्था

4.1 कुल नियत अनुदान में से सहायता अनुदान की पहली किस्त राज्य/संघ राज्यक्षेत्रों को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने और संबंद्ध राज्य/संघ राज्यक्षेत्र से सभी विनिर्दिष्ट प्रस्तावों के प्राप्त हो जाने के पश्वात् दी जाएगी साथ ही, यह भी आवश्यक होगा कि राज्य/संघ राज्यक्षेत्र केन्द्र के अंश के प्राप्त होने के एक मास के भीतर अपना अंश उपलब्ध कराएंगे |

4.2 बाद में सहायता राशि तभी दी जाएगी जब राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों द्वारा मान्य परिणामों की प्रगति के संबंध में लिखित में रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएणी, जिसमें निम्नलिखित भी शामिल हैं:

  • सहमत कार्य-निष्पादन सूचकों के लिए लक्ष्य/मील के पत्थर की पूर्ति के लिए दस्तावेजी साक्ष्य ।
  • व्यय का ब्यौरा, जिसमें ठपयोगिता और राज्य/संघ राज्यक्षेत्र सरकार का अंश जमा किए जाने की पुष्टि की गई हो।
  • वर्ष 2017-18 के लिए निधियों का निस्तारण, केन्द्रीय सरकार को ठपयोगिता प्रमाणपत्र (विहित पूप में, जो कि परिशिष्ट 5 पर है) ठपलब्ध कराए जाने के पश्चात् ही किया जाएगा ।

5. व्ययों की अधिकतम सीमा

5.1 राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों की वार्षिक योजना की समीक्षा के आधार पर, व्यय की भिन्न-भिन्न मदों के लिए अधिकतम सीमाएं होंगे, जैसा कि परिशिष्ट 6 में उल्लिखित है ।

6. व्यय को वर्षवार चरणबद्ध करना

6.1 राज्यों को अनुदान सहायता की अनुमोदित रकम का निस्तारण वर्ष 2015-16 से 2017-18 के दौरान किया जाएगा और व्यय को वर्षवार इस प्रकार चरणबद्ध किया जायेगा जैसा कि राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों और केंद्रीय सरकार के बीच सहमति हो और वह ऐसे अतिरिक्त परिवर्तनों के अध्यधीन होगा, जो केन्द्रीय सरकार वर्ष 2O16-17 और ठसके बाद वाले वर्षों के लिए करे ।

7. कार्य-निष्पादन सूचक

7.1 निधियों का निस्तारण सहमत परिदेयों के कार्यान्वयन से संबंधित सहमत कार्य-निष्पादन सूचकों की संतोषजनक प्रगति के अध्यधीन होगा ।

7.2 सहमत कार्य-निष्पादन सूचक वे हैं जो परिशिष्ट 7 में दिए गए हैं ।

8. संस्थागत व्यवस्था : राष्ट्रीय स्तर

8.1 राष्ट्रीय स्तर पर, औषधि महानियंत्रक (भारत) स्कीम के कार्यान्वयन के लिए उतरदायी होगा ।

8.2 राज्य के प्रस्ताव का स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा अनुमोदन के लिए मूल्यांकन करके मंजूर किया जाएगा ।

8.3 स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय स्कीम के कार्यान्वयन की प्रगति को मॉनिटर करेगा ।

9. संस्थागत व्यवस्था : राज्य स्तर

9.1 राज्य स्तर पर, औषधि नियंत्रक/ऑौषधि नियंत्रण विभाग का भारसाधक अधिकारी (Officer-in charge)स्कीम के कार्यान्वयन के लिए उतरदायी होगा ।

9.2 मुख्य सचिव/अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) स्कीम को कार्यान्वयन की प्रगति को मॉनिटर करेंगे |

10. कार्य-निष्पादन समीक्षा

10.1 केन्द्रीय सरकार में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय सहमत राज्य कार्य-निष्पादन सूचकों की प्रगति की समीक्षा करने के लिए समय-समय पर बैठकें आयोजित करेगा ।

10.2 राज्य भी राज्य स्तर पर ऐसी समीक्षाओं का आयोजन करेगा और केन्द्रीय सरकार के अधिकारी भी इनमें से कुछ समीक्षा बैठकों में भाग लेंगे ।

10.3 समीक्षा बैठकों के परिणामस्वरूप कभी-कभी प्रस्तावों में कुछ जोड़ा या बदलाव किया जा सकेगा । इन बदलावों को लिखित में लेखबद्ध किया जाएगा और वे इस समझौता ज्ञापन के अनुपूरक होंगे ।

11. केन्द्रीय सरकार की प्रतिबद्धताएं

11.1 निधियों का सहमत कार्य-निष्पादन सूचकों और सहमत समय-सीमा के अनुसार निस्तारण |

11.2 राज्य सरकार को तकनीकी सहायता निवेश जुटाने में राज्यों की सहायता करना जिनमें स्टाफ की भर्ती या उपस्कर की खरीद के विषय भी आते हैं ।

11.3 प्रगति की समीक्षा के लिए राज्यों के साथ नियमित आधार पर परामर्श ।

11.4 राज्य से नीति, प्रक्रियागत और कार्यक्रम संबंधी परिवर्तनों के लिए प्राप्त अनुरोधों पर विचार करना ।

11.5 ऐसे किसी मूल्यांकन, रिपोर्ट इत्यादि का प्रसारण और उस पर विचारविमर्श, जिसका प्रभाव नीति पर पड़ता है और/या जिसमें नीति में परिवर्तन करने की संभाव्यता है ।

12. राज्य सरकार की प्रतिबद्धताएं

12.1 राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेणी कि इस समझौता ज्ञापन के अधीन सहमत कार्य-निष्पादन सूचकों की सहायता के लिए उपलब्ध निधियों का उपयोग सहमत वित्तपोषण सारणी के साथ सहमत कार्य-निष्पादन सूचकों का वित्तपोषण करने के लिए ही किया जाए और इसका उपयोग ऐसे दिन-प्रतिदिन के व्ययों को प्रतिस्थापित करने के लिए नहीं किया जाए जिनका उतरदायित्व राज्य सरकार पर है |

12.2 राज्य/संघ राज्यक्षेत्र सरकार केन्द्रीय सरकार द्वारा निधियों के निस्तारण पर यथास्थिति अपना अंशदान करेगी । इसका अंशदान न करने के परिणामस्वरूप निधियों का निस्तारण निलंबित हो जाएगा ।

12.3 निधियों की प्रत्येक किस्त के निस्तारण के पश्वात् और अगली किस्त के निस्तारण से पूर्व व्यय का ब्यौरा प्रस्तुत किया जाना है ।

12.4 केन्द्रीय सरकार को, वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पश्वात् भारत सरकार के साधारण वितीय नियमों में नियत अवधि के भीतर सम्यक् रूप से संपीक्षित (Audit) उपयोगिता प्रमाणपत्र भेजे जाने हैं |

12.5 स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रतिनिधि इस समझौता ज्ञापन के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विषयों के संबंध में राज्य के किसी भाग का दौरा कर सकेंगे और उन्हें ऐसी जानकारी सुलभ कराई जाएगी जो इस समझौता ज्ञापन के अंतर्गत सम्मिलित क्रियाकलापों की प्रगति का निर्धारण करने के लिए आवश्यक हो |

13. लेखा रखना और संपीक्षा (Audit)

13.1 इस समझौता ज्ञापन के निबंधनानुसार आबंटित निधियां राज्य के अंश के साथ पृथक् रखी जाएंगी ।

13.2 राज्य, प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर तुरंत निधियों की संपीक्षा (Audit) कराएगा | राज्य सरकार, व्यय का एक समेकित विवरण, जिसमें प्राप्त ब्याज भी शामिल है, तैयार करेगा और उसे केन्द्रीय सरकार को ठपलब्ध कराएगा |

13.3 इस समझौता ज्ञापन की प्रक्रिया के माध्यम से दी गई निधियों की भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक द्वारा कानूनी लेखापरीक्षा की जा सकेणी ।

14. निलंबन

14.1 इसमें इसके अधीन नियत प्रतिबद्धताओं और बाध्यताओं के अननुपालन और/या संतोषजनक प्रगति करने में असफल रहने पर, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के लिए इस समझौता ज्ञापन के माध्यम से वचनबद्ध सहायता की समीक्षा करनी आवश्यक हो सकती है जिसके परिणामस्वरूप उसका निलंबन, लघुकरण या रद्दकरण हो सकता है । स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ऐसी किसी कार्रवाई पर विचार करने से पूर्व राज्य/संघ राज्यक्षेत्र सरकार को आगाह करने के लिए वचनबद्ध है |

2015 को हस्ताक्षरित

- - - - - - - - - - - - सरकार

 

(पदनाम)

अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/ सचिव/ भारसाधक, औषधि नियंत्रण विभाग

 

भारत सरकार

 

(संयुक्त सचिव, भारसाधक औषधि नियंत्रण, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय

परिशिष्ट 1

राज्य वार्षिक कार्य योजना के त्रिए प्रोफार्मा

राज्य औषधि नियंत्रण विभाग (वर्ष 2015-16, 2016-17 और 2017-18 के लिए पृथक्-पृथक् शीट)

राज्य का नाम

 

विनिर्माण इकाइयों की संख्या

 

बिक्री इकाइयों की की संख्या (खुदरा)

 

लिए गए नमूनों

की संख्या

2014-15

2013-14

2012–13

क.    अपेक्षितत उजनशक्ति

क्रम सं.

पदनाम

विद्यमान संख्या

जनशक्ति में प्रस्तावित वृद्धि

प्रति पदधारी कुल उपलब्धियां

कुल अतिरिक्त व्यय

1

औषधि निरीक्षक

 

 

 

 

2

सहायक औषधि निरीक्षक

 

 

 

 

3

आंकड़ा प्रविष्टि प्रचालक (data entry operator)

 

 

 

 

4

तकनीकी आंकड़ा सहायक

 

 

 

 

5

अन्य (विनिर्दिष्ट करें)

 

 

 

 

कुल लागत

ख.    सिविल संकर्म (Works)

विद्यमान कार्यालयों के विस्तार के लिए स्थान की उपलब्धता

 

 

- नए कार्यालय (यदि कोई हैं)

 

- आम समस्याओं से मुक्त और सन्निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि की उपलब्धता

 

- प्रस्तावित सन्न्निर्माण के ब्यौरे

 

- कुल लागत – 3000 रु. प्रति वर्गफुट की दर से

 

ग.      जानकारी तकनीकी/ फर्नीचर

 

- फर्नीचर

 

- कंप्यूटर/ आई.टी. सहायता (ब्यौरे दिए जाने हैं)

 

कुल लागत

 

घ.     आवर्ती लागत

 

- स्टेशनरी

 

­- विविध (विनिर्दिष्ट की जाए)

 

कुल लागत

 

कुल योग

(क+ख+ग+घ)

 

[समर्थनकारी दस्तावेज़ (यदि कोई है) संलग्न करें]

परिशिष्ठ 2

राज्य वार्षिक कार्य योजना के लिए प्रोफार्मा

राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला के लिए (वर्ष 2015-16, 2016-17 और 2017-18 के लिए पृथक्-पृथक् शीट)

राज्य का नाम

 

प्रयोगशाला/ प्रयोगशालाओं

के पते

(I)

(II)

(III)

 

प्रति वर्ष परिक्षण क्षमता

परिक्षण किये गए नमूने

प्रयोगशाला I

प्रयोगशाला II

प्रयोगशाला III

 

2014–15

2013-14

2012- 13

 

क.   अपेक्षित जनशक्ति

क्रम सं.

पदनाम

विद्यमान संख्या

जनशक्ति में प्रस्तावित वृद्धि

प्रति पदधारी कुल उपलब्धियां

कुल अतिरिक्त व्यय

1

औषधि विश्लेषक

 

 

 

 

2

बेंच रसायनज्ञ

 

 

 

 

3

सूक्ष्मजीव विज्ञानी

 

 

 

 

4

सहायक कर्मचारीवृन्द

 

 

 

 

5

अन्य (विनिर्दिष्ट करें)

 

 

 

 

कुल लागत

ख.   अपेक्षित उपस्कर

उपस्कर का नाम और अपेक्षित मात्र

प्रयोगशाला के भीतर उपलब्ध विद्यमान उपस्कर के ब्यौरे संलग्न किये जाएँ| उपस्कर संलग्न सूची में से लिए जायेंगे|

प्रति वर्ष ए.एम.सी./सी.एम.सी. लागत

 

कुल लागत

 

ग.    सिविल संकर्म (लागत की संगणना 3000 रु. प्रति वर्गफुट की दर से की जानी है)

 

विद्यमान क्षेत्र

विस्तार / उन्नयन के लिए अपेक्षित क्षेत्र

प्रयोगशाला I

 

 

प्रयोगशाला II

 

 

प्रयोगशाला III

 

 

नयी प्रयोगशालाओं के लिए उपलब्ध भूमि के ब्यौरे (यदि अपेक्षित हो)

 

क्षेत्रफल सहित नया सन्निर्माण

 

कुल लागत

 

घ.    आवर्ती लागत

 

रसायन

 

कांच पात्र

 

स्टेशनरी

 

विविध/ अन्य व्यय (विनिर्दिष्ट किये जाएँ)

 

कुल लागत

 

कुल योग

क+ख+ग+घ

 

[समर्थनकारी दस्तावेज़ (यदि कोई हैं) संलग्न करें]

परिशिष्ठ 3

अपेक्षित निधियों का सार

(वित्तीय वर्ष 2O15-16 से 2O17–18 तक के लिए)

क्रम सं.

मद

वित्तीय वर्ष

औषधि नियंत्रण विभाग

औषधि परिक्षण प्रयोगशाला

कुल (लाख रुपयों में)

1

जनशक्ति अपेक्षा

2015-16

2016-17

2017-18

 

 

 

2

सिविल संकर्म

2015-16

2016-17

2017-18

 

 

 

3

आई.टी./फर्नीचर

2015-16

2016-17

2017-18

 

 

 

4

उपस्कर

2015-16

2016-17

2017-18

 

 

 

5

आवर्ती लागत

2015-16

2016-17

2017-18

 

 

 

कुल योग

रसायन, इंस्ट्रूमेंटेशन और सूक्ष्मजीव विज्ञानं के लिए अपेक्षित क्षेत्र

क्रम सं.

विशिष्टयां

प्रत्येक प्रयोगशाला में प्रति नमूना परिक्षण क्षमता

1000 नमूने

3000 नमूने

5000 नमूने

10000 नमूने

1

अपेक्षित क्षेत्र (रसायन और उपकरण परिक्षण)

5000 वर्गफुट

10000 वर्गफुट

15000 वर्गफुट

25000 वर्गफुट

2

सूक्ष्मजीव सम्बन्धी परिक्षण के लिए अपेक्षित क्षेत्र

-

2000 वर्गफुट

3000 वर्गफुट

5000 वर्गफुट

3

भवन निर्माण लागत (6000 रूपए प्रति वर्गफुट)

3 करोड़

7.2 करोड़

10.8 करोड़

18 करोड़

 

केन्द्र द्वारा प्रत्यायोजित स्कीम के अधीन प्रवर्तन ढांचे के विभिन्न घटकों के त्रिए मानिटरिंग प्ररूप

क. राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों में प्रवर्तन ढाँचे की स्थापना के लिए मानिटरिंग प्रारूपः 1. राज्य/संघ राज्यक्षेत्र का नामः

2. स्वीकृति पत्र सं./तारीखः

3. भर्ती किए गए कर्मचारीवृन्द की संख्या: 4. प्रवर्तन के लिए सृजित सुविधाएं(क्षमता सहित):

5. दिशानिर्देशों के अनुसार व्यय किया गया है अथवा नहीं । विचलन की दशा में, कृपया कारणों सहित निम्नलिखित विनिर्दिष्ट करें:

क) नाम और पते सहित ब्यौरे, नियुक्त तकनीकी कर्मचारीवृन्द के ब्यौरे (पृथक् रिपोर्ट संलग्न करें) और व्यय विवरण, इत्यादि सृजित या प्रस्तावित विश्लेषण 8तमता |

ख) क्या मानिटरिंग दल कार्यान्वयन से संतुष्ट है । यदि नहीं, तो सुधार के लिए आधार और सुझाव विनिर्दिष्ट करें ।

स्त्रोत: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार

3.0

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