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शौचालयों में अंतर

इस भाग में विभिन्न शौचालयों के अंतर को समझाया गया है।

अस्वच्छकर एवं स्वच्छकर जल-बन्द शौचालय में अन्तर

सेप्टीक टैंक वाले अस्वच्छकर शौचालय एवं स्वच्छकर जल-बन्द शौचालय में अन्तर

सेप्टीक टैंक वाला अस्वच्छकर शौचालय स्वच्छकर जल-बन्द शौचालय
यह अधिक खर्चीला एवं इसमें दीवाल और सतह पर प्लास्टर करना पड़ता हैं जिससे लागत अधिक आती है। स्वच्छकर जल-बन्द शौचालय इसमें केवल सुपरस्ट्रक्चर में यदि लाभार्थी चाहे तो ही प्लास्टर की जरूरत होती है। लिचपिट की चुनाई में सीमेंट कम लगता है इसलिए यह कम खर्चीला एवं इसमें कम लागत आती है।
इसमें ज्यादा जगह की आवश्यकता होती है। इसमें तीन चैम्बर बनते हैं और इसमें ज्यादा जगह की आवश्यकता होती है। इसमें लिचपिट लाभार्थी की सुविधा एवं जमीन की उपलब्धता के अनुसार बनाये जा सकते हैं अतएव अपेक्षाकृत कम जगह की आवश्यकता।
सैप्टिक टैंक वाले शौचालय में प्रति प्रयोग ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है। स्वच्छकर जल-बंद शौचालय में रूरल पैन लगता है जिससे इसमें कम पानी की आवश्यकता होती है।
सैप्टिक टैंक वाले शौचालय में मल में कोई परिवर्तन नहीं होता है साथ ही पानी सोखने का कोई सिस्टम नहीं होने से एवं मूत्र और पानी के मल में लगातार मिलते रहने से यह और अधिक हानिकारक हो जाता है। स्वच्छकर जल-बंद शौचालय में मल, मूत्र पानी का सुरक्षित निपटान होता है तथा मल को खाद में परिवर्तित करने की प्रक्रिया सम्पादित होती है।
सैप्टिक टैंक वाले शौचालय में टैंक के भरने पर ओवर फ्लो की समस्या हो जाती है। स्वच्छकर जल-बंद शौचालय में लिचपिट तकनीक का प्रयोग होता है तथा इसमें जंक्शन बॉक्स के द्वारा दूसरे पीट का प्रावधान निर्माण के दौरान ही रखा जाता है। जिसे लाभार्थी चाहे तो शुरुआत में या सुविधा अनुसार कभी भी बना सकता हैं।
सैप्टिक टैंक वाले शौचालय में टैंक के भरने पर इसे खाली करना महंगा पड़ता है और बीमारी फैलने की संभावना बनी रहती है। साथ ही जब तक ना खाली हो वह बहते मल की सफाई/निस्तारण की समस्या बनी रहती है जिससे ना केवल, स्वयं बल्कि दूसरों को भी परेशानियाँ उठानी पड़ती हैं। स्वच्छकर जल-बंद शौचालय में लिचपिट तकनीक का प्रयोग होता है तथा इसमें जंक्शन बॉक्स के द्वारा दूसरे पीट का प्रावधान निर्माण के दौरान नहीं रखा जाता है तथा पीट के भरने पर खाली करना आसान।
सैप्टिक टैंक वाले शौचालय में टैंक के भरने पर इकठ्ठा हुए मल का उपयोग घरेलू स्तर पर सम्भवनहीं है। स्वच्छकर जल-बंद शौचालय में लिचपिट के भरने के बाद एक वर्ष तक बंद रखने से यह सोना खाद के रूप में परिवर्तित हो जाता है। सोना खाद उत्तम किस्म की कार्बनिक खाद होती है।
सैप्टिक टैंक वाले शौचालय में मल एवं मल के किसी भी अवयव का निष्पादन/विर्सजन नहीं होता है। स्वच्छकर जल-बंद शौचालय में मल के सभी अवयवों का निष्पादन/विर्सजन होता है।
सैप्टिक टैंक वाले शौचालय में गैस पाइप लगाना अनिवार्य है। स्वच्छकर जल-बंद शौचालय में गैस पाइप की जरूरत नहीं होती है। गैस मिट्टी द्वारा सोख ली जाती है।
इसमें गैस पाइप अनिवार्य होने के कारण बदबू निकलती है। स्वच्छकर जल-बंद शौचालय में लिचपिट तकनीक का उपयोग होने से किसी तरह की बदबू नहीं निकलती है।
सैप्टिक टैंक वाले शौचालय को भरने के पश्चात् टैंक को साफ करने में बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ता है, एवं इसमें बहुत अधिक पैसा खर्च करना पड़ता है। खाली करने के लिए मशीन की जरूरत पड़ती हैं। स्वच्छकर जल-बंद शौचालय में लिचपिट भरने के पश्चात् Y जंक्शन से जोड़कर दूसरे पीट को उपयोग में लिया जा सकता है तथा लिचपिट के भर जाने पर एक वर्ष तक सूखने के पश्चात् उसे खाली करने में कोई परेशानी नहीं उठानी पड़ती है।
सैप्टिक टैंक वाले शौचालय को भरने के पश्चात् गृह मलिक को स्वयं परेशानियों का सामना करना पड़ता है एवं आस-पास के लोगों को भी परेशानी और बदबू का सामना करना पड़ता है। स्वच्छकर जलबंद शौचालय में Y जंक्शन होने से लिचपिट के भरने के बाद किसी प्रकार का समस्या ना तो खुद को और न दूसरों को समस्या का सामना करना पड़ता है।
सैप्टिक टैंक वाले शौचालय में कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होती है। स्वच्छकर जल-बंद शौचालय में Y जंक्शन होने से वैकल्पिक व्यवस्था की आवश्यकता ही नहीं पड़ती है।

 

 

अस्वच्छकर एवं स्वच्छकर जल-बन्द शौचालय में अन्तर

बकेट शौचालय (अस्वच्छकर) एवं स्वच्छकर जल-बन्द शौचालय में अन्तर

बकेट/शुष्क शौचालय मल के निपटान का एक अस्थायी समाधान हैं। स्वच्छकर जलबन्द शौचालय मल के निपटान का एक स्थायी समाधान है।
बकेट शौचालय, स्वच्छकर शौचालय की श्रेणी में नहीं आता कयोंकि यह खुले में शौच को रोकता है लेकिन एक बिन्दु केन्द्रित शौच स्थान है। स्वच्छकर जलबन्द शौचालय मल के सभी अवयवों के समुचित निपटान करने से एक बिन्दु केन्द्रित शौच स्थान की श्रेणी में ना आकर मल निपटान का सुरक्षित साधन है।
बकेट/शुष्क शौचालय में संक्रमण का खतरा बरकरार रहता।इससे विशेषकर महिलाओं व बालिकाओं को माहवारी (मासिक धर्म)के दौरान संक्रमण का खतरा अधिक होता है। स्वच्छकर जलबन्द शौचालय में वाटर शील (जलबन्द) होने से किसी प्रकार के संक्रमण का खतरा नहीं है। यह महिलाओं के लिए भी पूर्ण रूप से सुरक्षित है।
बकेट/शुष्क शौचालय बच्चों के लिए खतरनाक सिद्ध हो सकता है मल त्याग के लिए इसमें मुँह बड़ा रहा है। जिसमें बच्चों के गिरने की संभावना है। स्वच्छकर जलबन्द शौचालय बच्चों में स्वच्छता की आदतें विकसित करने का सबसे सरल साधन है इसमें बच्चों के गिरने की कोई संभावना नहीं है।
बकेट/शुष्क शौचालय की बनावट कच्ची रहती है जिससे बारिश के दौरान धसने की संभावना बनी रहती है। बकेट/शुष्क शौचालय में मल को ढ़कने के लिए मिट्टी/लकड़ी का बुरादा/राख (छाई) का प्रयोग किया जाता है। स्वच्छकर जलबन्द शौचालय में प्लींथ लेवल (जमीनी स्तर) तक पका एवं सुरक्षित निर्माण आवश्यक होता है। स्वच्छकर जलबन्द शौचालय में रूरल पेन लगने एवं चौड़े मुँह वाले पात्र से मात्र एक लिटर पानी प्रति प्रयोग से मल को लिचपीट में सुरक्षित निपटान हेतु भेजा जाता हैं।
बकेट/शुष्क शौचालय में मल को समुचित रूप से ढकने के लिए प्रति प्रयोग कम से कम 3 कि.ग्रा. मिट्टी/लकड़ी का बुरादा/राख (छाई) का प्रयोग किया जाता है, जो घरेलूस्तर पर नियमित सम्भव नहीं हैं। स्वच्छकर जलबन्द शौचालय में मात्र एक लिटर पानी प्रति प्रयोग से मल को लिचपिट में सुरक्षित निपटान हेतु भेजा जाता है, जो घरेलू स्तर पर आसानी से सम्भव है।
बकेट/शुष्क शौचालय में मल एवं मनुष्य के बीच अवरोध प्रभावी व शील बन्द नहीं होता इसलिए बदबू आती है। स्वच्छकर जलबन्द शौचालय में मल एवं मनुष्य के बीच वाटर शील (जलवन्द) होने से किसी प्रकार की बदबू नहीं आती है।

स्त्रोत : श्री कृष्णा लोक प्रशासन संस्थान, इन्नोवेशन प्लानिंग मानिटरिंग यूनिट,रांची,झारखंड।

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अजय Feb 25, 2019 04:45 PM

सर हमारा शौचालय नही बन रहा है जो पधान नही बनवा रहे है

धर्मेन्द्र कुमार Jun 18, 2018 01:37 AM

महोदय जी सुचालय का गढ्ढा २० फुट होना चाहिए

कमला शंकर विश्वकर्मा Aug 03, 2017 09:26 PM

रिसाव खेती में यूरिया/एवं रसायन,कीट नासक के कारण भूजल में नाइट्रोजन , फ्लोराइड आदि तत्व पेयजल को दूषित करते है। भूजल एक मीठे पानी के स्रोत के रूप में एक प्राकृतिक संसाधन है। मानव के लिए जल की प्राप्ति का एक प्रमुख स्रोत भूजल के अंतर्गत आने वाले जलभरे है। जिनसे कुओ और नलकुपो द्वारा पानी निकाला जाता है। भूजल पुनर्भरण एक जब वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत सतही जल रिसकर और पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से खीचकर भूजल का हिस्सा बन जाता है। इस घटना को रिसाव को या निस्पंदन द्वारा भूजल पुनर्भरण कहते है । भूजल पुनर्भरण एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। क्या स्वच्छकर जलबंद शौचालय में मौजूद अपशिष्ट एवं जल का रिसाव पृथ्वी के ऊपरी सतह से नीचे गुरुत्वाकर्षण एवं भीतरी जलस्रोत के माध्यम से जलभरे तक पहुच सकता है? क्या यह रिसाव जल को प्रदूषित नहीं करेगा?

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