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महिलाएं तथा मलेरिया

इसमें महिलाएं तथा मलेरिया की जानकारी दी गयी है|

भूमिका

मलेरिया रोग एक संक्रमित व्यक्ति से असंक्रमित व्यक्ति तक मादा एनोफिलिज मच्छरों के काटने से फैलता है। 40 साल पहले मलेरिया वैज्ञानिकों का यह मानना था कि मलेरिया तथा मच्छरों को नियंत्रित किया सकता है जिससे मलेरिया के होने तथा मृत्यु के साये में रहने वाले लाखों की आशा बंधी। दुर्भाग्यवश ये आशाएं पूरी नहीं हुईं। आज पूरे विश्व में मलेरिया की स्थिति बदतर होती जा रही है। प्रतिवर्ष लगभग 50 करोड़ लोग मलेरिया से बीमार तथा लगभग 10 लाख लोग इससे मर जाते हैं।

भारत में राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम में 1958 में डी०डी०टी० (मलेरिया नाशक दवा) का छिड़काव शुरू किया गया था। इससे मलेरिया से पीड़ित रोगियों की संख्या में भारी कमी आई। परंतु कुछ स्थानों पर मच्छरों ने डी०डी०टी० के विरुद्ध प्रतिरोध उत्पन्न कर लिया। कहीं कहीं लोगों को अपने घरों में डी०डी०टी० छिड़कवाना भी पसंद नहीं था। इससे मलेरिया फिर से बढ़ा और आजकल भारत में मलेरिया के लगभग 20-25 लाख मामले व उससे 200-500 मौतें, प्रतिवर्ष होती हैं। कभी-कभी तो यह संख्या और भी अधिक होती है। वास्तव में हमें यह सही रूप से मालूम नहीं है कि प्रति वर्ष कितने लोगों को मलेरिया होता है क्योंकि सरकारी आंकड़ों में केवल उन्हीं रोगियों को गिना जाता है जिन्हें सरकारी स्वास्थ्यकर्मी द्वारा देखा जाता है।

महिलाएं तथा मलेरिया

मलेरिया पुरुषों तथा महिलाओं दोनों को प्रभावित करता है। यह दोनों में मृत्यु का कारण भी बन सकता है लेकिन जहां यह मौत न भी कर पाए, वहां इसके प्रमाण अनेक अदृश्य खतरे होते हैं ; विशेषकर महिलाओं के लिए। भारत में लगभग 70-80 % महिलाएं एनीमिया से पीड़ित होती हैं (अर्थात उनमें खून की कमी होती है) जिसका कारण भोजन की कमी, माहवारी में खून का नुकसान, अधिक काम करना, भोजन में लौह तत्व तथा फोलिक एसिड की कमी बार-बार गर्भधारण तथा हुकवर्म संक्रमण होता है। मलेरिया के बार-बार आक्रमण से उनका एनीमिया और भी बढ़ जाता है और उन्हें अन्य संक्रमण होने की संभावना भी बढ़ जाती है।

मलेरिया गर्भवती महिलाओं में और भी खतरनाक होता है क्योंकि उनमें मलेरिया की जटिलताओं तथा गंभीर एनीमिया से मृत्यु भी हो सकती है। मलेरिया से जन्म के समय बच्चे का वजन कम होने, गर्भपात या गर्भ में मृत्यु की संभावना काफी बढ़ जाती है। कम वजन के बच्चों के जीवित रहने की संभावना काफी कम होती है।

महिलाओं पर मलेरिया का बोझ उनके स्वास्थ्य पर होने वाले प्रभावों से कहीं अधिक होता है। अध्ययनों से पता चला है कि जब उसका बच्चा मलेरिया से बीमार पड़ता है तो महिला घर के बाहर तथा अंदर सामान्य कार्य नहीं कर पाती है। अगर घर को कोई वयस्क बीमार होता है तो आमदनी में होने वाली कमी को पूरा करने के लिए उसे अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है।

मलेरिया क्या है ?

मलेरिया सूक्ष्म परजीवी प्लाजमोडियम के कारण होता है। मच्छरों के काटने के द्वारा ये मानव शरीर में प्रविष्ट हो जाते हैं। मच्छरों के काटने के द्वारा ये मानव शरीर में प्रविष्ट हो जाते हैं। काटने के 1-2 सप्ताह बाद उस व्यक्ति को बुखार हो जाता है, सिरदर्द तथा उल्टियां लग जाती हैं। कभी-कभी रोगी को सभ्रांति हो जाती है और मिरगी के दौरे भी पड़ सकते हैं। जब ऐसा हो तो यह गंभीर या भयंकर किस्म का मलेरिया है।

जिन क्षेत्रों में मलेरिया अधिक होता है, वहां वर्ष भर में मलेरिया के कई आक्रमण हो सकते हैं। अगर कम मलेरिया क्षेत्र में बच्चे, गर्भवती महिलाएं या अन्य लोग अधिक मलेरिया वाले क्षेत्र में आते हैं तो उन्हें गंभीर मलेरिया हो सकता है क्योंकि उनके शरीर को मलेरिया का कोई अनुभव नहीं होता है और उनका इम्युन तंत्र इसके लिए तैयार नहीं होता है।

मलेरिया कैसे फैलता है ?

  1. मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति को काटता है।
  2. मलेरिया परजीवी मच्छर के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
  3. मच्छर के शरीर में मलेरिया परजीवी विकसित होते हैं।
  4. संक्रमित मच्छर किसी असंक्रिमित व्यक्ति को काटते हैं।
  5. मलेरिया परजीवी उस व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।

मलेरिया एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक मच्छरों द्वारा फैलता है। मच्छर त्वचा को भेदकर मानव रक्त का भोजन करते हैं। जब मच्छर खून चूसते हैं तो उसी के साथ वे सूक्ष्म मलेरिया परजीवियों को रक्त की नलिकाओं में छोड़ देते हैं। ये परजीवी तेजी से अपनी संख्या में वृद्धि करते हैं व रक्त के लाल कणों को भोजन की तरह प्रयोग करके उन्हें नष्ट करना शुरू कर देते हैं जिससे बुखार व एनीमिया हो जाता है। जब संक्रमित रोगी महिला को मच्छर काटता है तो कुछ मलेरिया परजीवी उस महिला के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। जब यह संक्रमित मच्छर किसी असंक्रमित महिला को काटता है तो ये परजीवी उसके शरीर में प्रवेश कर उसे भी संक्रमित कर देते हैं।

मच्छरों को अपने अंडे देने (प्रजनन करने के लिए) पानी की आवश्यकता होती है। भिन्न प्रकार के मच्छर, पनपने के लिए, भिन्न प्रकार का पानी पसंद करते हैं। तो कुछ को गढ़ों, नारियल के खाली खोलों या खाली पड़े  बर्तनों में एकत्रित पानी पसंद है तो कुछ को बहती धाराओं के किनारे का पानी। उड़ीसा, आसाम तथा पूर्वोतर राज्यों में मच्छर बहती धाराओं में पनपते हैं जिनसे उनका नियंत्रण करना बेहद कठिन हो जाता है।

मच्छर भिन्न प्रकार के होते हैं परन्तु मलेरिया केवल मादा एनोफिलिज मच्छरों द्वारा ही फैलता है। केवल वे मच्छर ही मनुष्यों में मलेरिया फैला सकते हैं। मलेरिया फैलाने वाले मच्छर अक्सर रात में ही काटते हैं।

मलेरिया परजीवी भी कई प्रकार के होते हैं। इनमें से कुछ अन्य की तुलना में अधिक गंभीर तरह का मलेरिया होता है जो दौरे, बेहोशी व मृत्यु तक कर सकता है। पी० फाल्सीपेरम द्वारा होने वाली अन्य जटिलताओं में जिगर के संक्रमण के कारण पीलिया, गुर्दों का संक्रमण जिससे पेशाब की मात्रा में बेहद कमी हो सकती है या पेशाब बंद हो सकता है व पैरों में सूजन आ सकती है। इसके अतिरिक्त गंभीर पेचिश तथा उल्टियां लग सकती हैं। रक्त में शुगर का स्तर कम हो सकता है। रक्तचाप गिर सकता है तथा शॉक को सकता है। मलेरिया की इन जटिलताओं का शीघ्र निदान व उपचार अति आवश्यक है।

रोगी को ठंड व कंपकंपी के साथ प्रतिदिन या एक दिन छोड़कर तेज बुखार चढ़ता है। साथ में सिरदर्द व उल्टियां भी हो सकती है। अत्यधिक पसीना आने के साथ बुखार उतर जाता है। मलेरिया के लक्षण व चिन्ह इन अवस्थाओं में प्रकट होते हैं :

प्राथमिक अवस्था (कुछ घंटों तक रहती है)

  • शरीर टूटना, अस्पष्ट तकलीफ तथा सुस्ती

शीत अवस्था ( 15 मिनट से डेढ़ घंटे तक चल सकती है)

  • सिरदर्द जो धीरे-धीरे बढ़ता जाता है
  • जी मितलाना
  • ठंड व कंपकंपी लगना
  • त्वचा का ठंडा पड़ना
  • बुखार होना जो तेजी से 102 डिग्री फरेन्हाईट (38.8 से 41.0 डिग्री सेल्सियस) तक जा पहुंचता है।

गर्भावस्था (30 मिनट से 5 घंटे तक चल सकती है)

  • अत्यधिक गर्मी लगना
  • चेहरा, हाथ व त्वचा बहुत गर्म महसूस होती है
  • अत्यधिक सिरदर्द
  • उल्टियां
  • सांस का तेज चलना
  • बुखार का धीरे –धीरे कम होना

पसीने की अवस्था

  • बहुत पसीना आना
  • बुखार समाप्त हो जाता है ( तापमान सामान्य हो जाता है )
  • अत्यधिक थकावट महसूस होना व नींद आना

मलेरिया किस प्रकार के परजीवी से हुआ है, इस बात पर निर्भर करते हुए ऊपर बताए गए लक्षण प्रतिदिन, हर दूसरे दिन या हर तीसरे दिन हो सकते हैं अगर रोगी को उपचार नहीं किया गया है। रोगी को सामान्य थकावट तथा कमजोरी महसूस होती है।

मलेरिया के आक्रमण में बुखार होने के साथ रोगी की तिल्ली (प्लीहा) भी प्राय: बढ़ जाती है। मलेरिया के लक्षण डेंगू बुखार, इंफ्लुएंजा या वायरल बुखार की भांति भी दिख सकते हैं। मलेरिया के हर रोगी को बुखार अवश्य होता है परंतु हर बुखार का कारण मलेरिया नहीं होता है। जब भी आप बुखार का रोगी मानें। अगर आपके पास बुखार नापने के लिए थर्मामीटर नहीं है तो अपने हाथ के पिछले भाग से रोगी की छाती या माथे को छू कर बुखार का अंदाजा लगाएं।

कभी-कभी थोड़ी से अवधि के बुखार के पश्चात रोगी उनींद होने लगता है, उसे संभ्राति व मिरगी के दौरे भी पड़ सकते हैं। ये सब दिमागी मलेरिया के लक्षण हैं–जिनमें मलेरिया परजीवी मस्तिष्क को संक्रमित कर देते हैं। यह एक बहुत खतरनाक स्थिति है और ऐसे में तुरंत उपचार की आवश्यकता होती है क्योंकि इससे बहुत शीघ्र ही बेहोशी तथा मृत्यु हो सकती है।

चूँकि मलेरिया में तिल्ली का संक्रमण होता है और वह बढ़ जाती है, इसलिए रोगी को तिल्ली की बाहर से जांच करके मलेरिया की पुष्टि की जा सकती है।

तिल्ली की जांच

  1. रोगी को दाई करवट लिटायें
  2. रोगी को सीधे हाथ की ओर खड़ा होकर, उसकी बायीं पसलियों के नीचे वाले किनारे की आराम से महसूस तब करें जब वह गहरे सांस ले रहा हो।
  3. अगर तिल्ली बढ़ी हुई है तो यह कड़ी महसूस होती है और रोगी के सांस लेने के साथ ऊपर नीचे होती है। इस क्रिया को हाथ से महसूस किया जा सकता है (सामान्य: तिल्ली को पसलियों के नीचे महसूस नहीं किया जा सकता है)

हालांकि इन सब तरीकों से मलेरिया के होने का अंदाजा हो जाता है,फिर भी मलेरिया के निदान की विश्वसनीय पुष्टि केवल रक्त की स्लाइड की जांच से ही हो सकती है। इसके लिए रोगी की उंगली से एक बूंद खून लेकर उसकी स्लाइड बनाई जाती है और फिर इस स्लाइड की प्रयोगशाला में सूक्ष्मदर्शी यंत्र से, मलेरिया परजीवी की उपस्थिति के लिए जांच की जाती है।

मलेरिया परजीवी की उपस्थिति और उसके प्रकार को जांचने के लिए रक्त स्लाइड का परिक्षण करना आवश्यक है क्योंकि पी.वाइवेक्स तथा पी.फ़ाल्सीपेरम द्वारा होने वाले मलेरिया का उन्मूलक उपचार भिन्न है। अगर स्लाइड नहीं बनाई जा सकती है परंतु मलेरिया का शक है तो भी उपचार देना चाहिए।

मलरिया के प्रबंधन में उसके उपचार के लिए क्लोरोक्वीन की गोलियां प्रथम चयन हैं। ये सभी सरकारी अस्पतालों, डिस्पेंसरियों तथा स्वास्थ्याकर्मियों से आसानी से नि:शुल्क उपलब्ध हैं। अनेक गांव में बुखार उपचार डिपो भी होते हैं जो ये गोलियां नि:शुल्क बाटने के लिए रखते हैं। डिपो धारक अक्सर ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता होती है।

मलेरिया बुखार के लिए मान्य उपचार रक्त में मलेरिया परजीवियों को नष्ट करने तथा मलेरिया रोगी को राहत देने के लिए। दिया जाता है ( यह माना जाता है कि हर बुखार मलेरिया है ) :

बुखार पीड़ित सभी रोगियों को या उन सभी को जिन्हें पिछले 15 दिनों में बुखार हुआ हो। जहां संभव हो वहां रक्त स्लाइड अवश्य बनानी चाहिए अन्यथा उसके बिना भी उपचार किया जा सकता है।

गर्भवती महिलाओं व बच्चों सहित आयु व लिंग का भेद किये बिना बुखार के सभी रोगियों को।

क्लोरोक्वीन की गोलियां गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित होती हैं परन्तु किसी भी रोगी को इन गोलियों को खाली पेट नहीं लेना चाहिए।

एक अन्य मलेरियानाशक दवाई कुनैन गर्भपात करने के लिए प्रयोग की जाती है। अनके गर्भवती महिलाएं कुनैन व क्लोरोक्वीन नामों में भेद नहीं कर पाती हैं और इसलिए बुखार होने पर क्लोरोक्वीन का प्रयोग नहीं करती हैं।

मलेरिया का उपचार

पहला दिन  : 4 गोलियां एक साथ की शुरूआती खुराक, इसके 6 घंटों बाद 2 गोलियां एक साथ

दूसरा दिन : 2 गोलियां

तीसरा दिन : 2 गोलियां

निर्देश: चिकित्सीय परामर्श आवश्यक है।

क्लोरोक्वीन के इंजेक्शन विरले ही दिए जाते हैं (अगर उल्टियां अत्याधिक हो रही हों, तभी)। ये इंजेक्शन केवल प्रशिक्षित व अनुभवी डॉक्टर द्वारा ही दिए जाने चाहिए।

पी.वाइवेक्स तथा पी.फ़ाल्सीपेरम का उपचार पूर्ण करने के लिए एक अन्य दवा प्राइमाक्चिन किसी अनुभवी डॉक्टर द्वारा दी जाती है। ध्यान रहे कि यह दवा गर्भवती महिलाओं तथा शिशुओं (1 वर्ष से कम आयु के बच्चों ) को नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि यह उनके लिए खतरनाक हो सकती है।

अन्य दवाओं जैसे कि पेरासिटामोल, से रोगी को थोडा बहुत आराम अवश्य मिलता है परंतु वे मलेरिया का उपचार नहीं है क्योंकि वे बुखार व सिरदर्द के लाक्षणिक उपचार के लिए होती है। इन्हें क्लोरोक्वीन के साथ लिया जा सकता है परंतु वे उसका विकल्प नहीं है। रोगी को तरल पदार्थ अधिक मात्रा में पिलाने चाहिए। जीवन रक्षक घोल (ओ.आर.एस.) इसके लिए अनुकूल है – विशेषत: गर्भवती महिलाओं बच्चों के लिए।

अगर किसी रोगी के दिमागी मलेरिया के लक्षण नजर आते हैं तो उसे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या असपताल ले जाना चाहिए। वहां उसे नसों के द्वारा दवाइयां दी जाएंगी। अक्सर यह दवा क्लोरोक्वीन होती है जो गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित होती हैं।

मलेरिया की रोकथाम

मलेरिया परजीवी में मलेरिया  औषधियों के विरुद्ध अधिकाधिक प्रतिरोध होता जा रहा है – विशेषत: पी.फ़ाल्सीपेरम का क्लोरोक्वीन विरुद्ध। अधिकतर रोगियों में क्लोरोक्वीन अभी भी कारगर रहती है और उसे पहली पसंद के रूप में दिया जाना चाहिए। लेकिन अगर रोगी उससे  ठीक नहीं होता है या केवल थोड़े समय के लिए ठीक होता है और उसे फिर से बुखार हो जाता है तो प्रतिरोध का शक करना चाहिए। ऐसे रोगी को वैकल्पिक दवाओं के प्रयोग के बारे में किसी प्रशिक्षित डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।

मुख्यत: तीन तरीकों से लोग स्वयं की मलेरिया से रक्षा कर सकते हैं :

  1. मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों की संख्या में कमी करके।
  2. मच्छरों के काटने से बचकर।
  3. मलेरिया की रोकथाम के लिए क्लोरोक्वीन का प्रयोग करके।

मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों की संख्या में कमी करना

(क) मच्छरों के पैदा होने की जगहों को नष्ट करना

मच्छरों की संख्या में कम करने के लिए यह आवश्यक है कि हम उन्हें पैदा ही न होने दें और उनकी पैदा होने की जगहों को नष्ट कर दें। ऐसा इन तरीकों से किया जा सकता है :

  • सभी डिब्बों, गमलों, रूम कूलरों, पुराने पड़े टायरों, टूटी बोतलों के खोलों आदि में भरे पानी को सप्ताह में कम से कम एक बार खाली कर दें। ऐसा करने में पानी में उपस्थित मच्छरों के अंडे व लारवा आदि नष्ट हो जाते हैं।
  • खाली डिब्बों, पुराने टायरों, टीनों आदि में बारिश का पानी एकत्रित न होने दें।
  • नलों, हैंड पम्पों आदि के आप पानी को एकत्रित न होने दें। उसकी निकासी का उचित प्रबंध करें।
  • गड्ढों, टूटी-फूटी जगहों आदि को मिटटी से भरकर समतल कर दें ताकि वहां पानी एकत्रित न हो सके।
  • सड़कों व रास्तों को समतल कर दें ताकि गाड़ियों आदि के पहियों से उमें गड्ढे न बनें।सड़कों तथा नहरों के दोनों ओर के गड्ढों को भर दें।
  • पानी के सभी पात्रों, जैसे कि ओवरहेड टैंक व ड्रम आदि में अच्छी तरह से बंद होने वाले दक्कन लगवाएं। इन्हें वर्ष में कम से कम एक बार भली भांति साफ करें।
  • छोटे टैंकों व तालाबों में मच्छरभक्षी मछलियां (गुप्पी या गेम्बुसिया) छोड़ें।
  • पानी निकासी में सुधार करने के लिए घर के पानी व बरसाती पानी की निकासी के लिए पक्के नाले व नालियां बनवाएं।
  • जिस पानी का निकासी संभव न हो, उसमें मिटटी का तेल या कोई अन्य तेल डालें। इससे मच्छरों के लारवे सांस नहीं ले पाते हैं और मर जाते हैं।

(ख)  मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों को नष्ट करें

इन मच्छरों को डी.डी.टी., बी.एच.सी. या मेलाथायोंन जैसी मच्छर व कीटनाशक दवाओं का घरों में छिडकाव करके नष्ट किया जा सकता है। ये मच्छर मनुष्य को काटने के बाद सुस्त हो जाते हैं और घर की दीवारों पर बैठकर आराम करते हैं। अगर उन दीवारों पर कीटनाशक दवा छिड़की हुई है तो यह मच्छरों के लिए विष का काम करती है और उन्हें मार देती हैं। रसोईघरों, स्नानगृह व गांव में पशुओं के घर जैसे स्थानों पर कीटनाशक दवाई का छिड़काव सावधानीपूर्वक करना चाहिए। इन कीटनाशक दवाओं का प्रभाव 2 महीनों के लंबे समय तक रहता है। इसके अतिरिक्त अगर विचार करें कि मलेरिया के संचरण की अवधि भारत में जुलाई से अक्टूबर के 4 महीनों में सर्वाधिक होती है तो इस अवधि में यह छिड़काव दो बार करना होगा।

कीटनाशक दवाओं का घर में छिड़काव करने से पहले व बाद में ली जाने वाली सावधानियां

छिड़काव कराने/ करने से पहले सभी भोजन, खाद्य पदार्थों, पानी व अन्य पेयों, अनाजों व बर्तनों आदि को या तो हटा दें अथवा उन्हें भली भांति ढक दें ताकि उनमें कीटनाशक दवा का प्रदूषण न हो। बच्चों को भी छिड़काव वाले स्थान से दूर रखें। हो सके तो उन्हें घर के बाहर ही रखें।

छिड़काव करने के बाद दीवारों पर लिपाई-पुताई, सफेदी व प्लास्टर आदि न करें–विशेषत: करने के बाद दीवारों की जहां मच्छर अधिक बैठते हैं अन्यथा कीटनाशक दवा प्रभावकारी नहीं होगी।

मच्छरों के काटने से बचाव

हम अपने आपको मच्छरों के काटने से बचा सकते हैं। इसके लिए यह सब करें:

  • ऐसे कपड़े पहने जिनसे हाथ, पैर आदि पूरी तरह से ढके रहें। जिस समय (सुबह या शाम को) मच्छर अधिक सक्रिय रहते हैं, यह सावधानी बरतना और भी आवशयक है।
  • जो समय मच्छरों के अधिक काटने का होता है, उस समय पर घर के अंदर रहें।
  • सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
  • मच्छरों को भगाने या मारने वाली कॉइल्स, मैट्स आदि का प्रयोग करें।
  • नीम के पत्तों को जला कर धुआं उत्पन्न करें या स्थानीय रूप से उपलब्ध धुपबत्ती/ अगरबत्तीयों का प्रयोग करें। इनसे मच्छर भाग जाते हैं।
  • शरीर के खुले भागों जैसे कि चेहरे, हाथ व पैर आदि पर मच्छर भगाने वाली  क्रीम तेल (जैसे की नीम, सिट्रोनेला आदि) प्रयोग करें।
  • घरों के दरवाजों व खिडकियों पर महीन जाली लगवाएं। शाम के समय उन्हें बंद कर दें क्योंकि प्राय: इसी समय मच्छर घरों में प्रवेश करते हैं।

इन तरीकों में से कोई भी मच्छरों व मलेरिया के विरुद्ध शत-प्रतिशत कारगर नहीं होता है परंतु ये सभी मलेरिया के खतरे को काफी कम कर देते हैं अगर इनका विवेकपूर्ण तरीके से प्रयोग किया जाए। इन तरीकों को संयुक्त रूप से प्रयोग करने से (जैसे कि घर से बाहर रहने पर शरीर को भली भांति ढकना व रात में मच्छरदानी में सोना) मलेरिया का खतरा और भी कम हो जाता है।

मलेरिया ग्रस्त क्षेत्रों में मच्छरदानियों को कीटनाशक दवाओं के घोल में डुबो कर प्रयोग किया जा सकता है। इससे मच्छर मरते भी हैं और भी दूर भी भागते हैं। अगर इस कीटनाशक दवा में कोई कपड़ा भिगो क्र उसे घर के दरवाजे पर लटका दिया जाए तो भी मच्छर दूर रहते हैं। स्वास्थ्यकर्मीयों को इन कीटनाशक दवाओं को सुरक्षित रूप से मिलाने व मच्छरदानियों को इसमें डुबोने का प्रशिक्षण देना होगा।

दवाओं के प्रयोग से मलेरिया की रोकथाम

विश्व स्वास्थ्य संगठन यह सिफारिश करता है कि मलेरिया ग्रस्त क्षेत्रों में सभी गर्भवती महिलाओं को मलेरिया संक्रमण रोकने के लिए क्लोरोक्वीन का प्रयोग करना चाहिए। गर्भ के चौथे महीने से शुरू करके प्रसव तक, प्रति सप्ताह क्लोरोक्वीन की दो गोलियां लें। क्लोरोक्वीन की गोलियां सस्ते दामों में कैमिस्टों के दुकानों तथा सरकारी अस्पतालों, स्वस्थ्या केंद्रों आदि से नि:शुल्क व आसानी से उपलब्ध होती है।

सन 1960 व 1970 के दशकों में मलेरिया के कारण होने वाली मौतों में भारी कमी जन स्वास्थ्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जाती है। तत्पश्चात अन्य स्वास्थ्य प्राथमिकताओं जैसे कि परिवार नियोजन व आर्थिक तंगी के कारण, मलेरिया धीरे –धीरे फिर से वापस आ गया। सरकार यह जानती है कि केवल वह मलेरिया को नियंत्रित नहीं कर सकती है। इसके लिए जन समुदायों, परिवारों, गांवों आदि की सरकारी कर्मचारीयों के साथ भागीदारी होना आवशयक है। मलेरिया के नियंत्रण के लिए उसके विरुद्ध एक जन आन्दोलन होना आवशयक है।

स्थानीय कार्रवाई

चूँकि मलेरिया के मामले एक सीमित स्थानीय परिधि में ही होते हैं, इसलिए उसके नियंत्रण के लिए स्थानीय कार्रवाई के लिए यह आवशयक है कि आप अपने क्षेत्र के मच्छरों के व्यवहार को समझें ; लोगों के व्यवहार को जाने और मलेरिया के बारे में उनके विहारों को समझें।

मलेरिया को समझने का अर्थ है मच्छरों के पनपने व काटने की आदतों को समझना ताकि समुचित योजनाएं बनाई जा सकें। उधाहरण के तौर पर, अगर मच्छर मुख्यतः गांव के पास वाली जल धाराओं में पनपते हैं तो सर्वाधिक प्रभावित योजना यह होती कि ग्राम निवासियों को मच्छरों के काटने से बचने के लिए सलाह दी जाए। तत्पश्चात मच्छरों के काटने से बचने के लिए उनसे चर्चा की जा सकती है और सभी के द्वरा उसका पालन करने का निर्णय लिया जा सकता है।

  • मलेरिया नियंत्रण के लिए योजना बनाने व उसे लागू करने में स्कूल के विद्यार्थियों को सम्मिलित करें।
  • लोगों को मलेरिया के बारे में बताने के लिए सबसे प्रभावी तरीके के बारे में सोचें। यह पता करें कि उन्हें पहले से मलेरिया के बारे में कितना ज्ञान है, उसके बारे में वे क्या सोचते हैं और इस समस्या को वे किस प्रकार देखते हैं। उनसे पूछें कि वे कितनी बार मलेरिया से बीमार पड़ते हैं ; कितना आर्थिक नुकसान मलेरिया के कारण भुगतते हैं या उन्होंने किसी की मलेरिया के कारण मृत्यु तक होने का खतरा होता है।
  • इस विषय पर चर्चा करें कि किस प्रकार समुदाय यह सुनिश्चित कर सकता है कि आवशयकता पड़ने पर रक्त परिक्षण किया जा सकता है और किस प्रकार मलेरियानाशक उपचार सभी को सरलता व शीघ्रता से मिल सकता है।

समस्या के प्रभावी समाधान के लिए यह आवश्यक है कि आपके क्षेत्र में मलेरिया फैलाने के लिए मच्छर की कौन सी किस्म जिम्मेवार है  ?

अध्ययनों से पता चला है कि 1994 में राजस्थान में मलेरिया में एनोफिलिस स्टीफेंसाईं नामक मच्छर की किस्म जिम्मेवार थी। यह किस्म पीने के पानी को एकत्रित करने के स्थानों में पनपती है।आसाम में 1995 में हुई महामारी में एनोफिलिस मिनिमस मच्छर जिम्मेवार था जो कि धीमी गति से बहती हुई जलधाराओं में पनपता है।

  • इस प्रकार विचार करें कि लोग क्या व्यवहारिक कदम उठा सकते हैं और उन्हें स्पष्ट रूप से बताएं। लोगों से बातचीत करें और यह सुनिशिचत करने के लिए कि वे आपके संदेशों को समझ गये हैं, उनके द्वरा उठाए गए क़दमों पर निगाह रखें। उनसे उन कार्रवाईयों को लागू करने में आ रही कठिनाइयों के विषय में पूछें। इन कार्यक्रमों में आवशयक फेर-बदल करने के लिए नियमित रूप से मिलें और समुदाय में प्रभावित अन्य सामुदायिक समूहों को भागीदार बनाएं।

स्रोत: ज़ेवियर समाज सेवा संस्थान लाइब्रेरी,स्वास्थ्य विभाग,विहाई।

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रजत कुमार गुप्ता Sep 13, 2017 12:19 PM

अगर किसी को बार बार मलेरिया हो ता ह तो क्या परेशानी हो सकती ह और हम उसे रोकने के लिए क्या कर सकते ह कृपया जरूर बताये

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