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महिलाओं में यू.टी.आई. अथवा मूत्र तंत्र के संक्रमण

इस पृष्ठ पर महिलाओं में यू.टी.आई. अथवा मूत्र तंत्र के संक्रमण के बारे में जानकारी दी गयी है|

भूमिका

इस अध्याय में मूत्र तंत्र की सर्वाधिक आम समस्याओं का वर्णन किए गया है | कभी-कभी इन समस्याओं में अंतर करना कठिन होता है | अगर आपकी समस्या यहां वर्णित समस्याओं से भिन्न लगती है तो चिकित्सकीय सहायता प्राप्त करें | आपको अपनी समस्या के निदान के लिए कुछ विशेष परीक्षण  कराने पड़ सकते हैं |

अगर आप अपनी समस्या का निदान करने में सफल होती हैं तो इसका घर पर उपचार करना संभव हो सकता है विशेषत: अगर इसका उपचार शीघ्र शुरू कर दिया जाए | लेकिन यह भी याद रखिए कि कुछ गंभीर समस्याओं के शुरूआती लक्षण बेहद मामूली हो सकते हैं | इस प्रकार की समस्याएं जल्दी ही दर्दनाक व खतरनाक रूप धारण कर सकती है | इसलिए अगर आपको 2-3 दिन में आराम न पड़े तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें |

महिला सुन्नत (फीमेल सर्कमसीजन)

यह भारत में आप रूप से प्रचलित नहीं है | इससे मूत्र तंत्र को गंभीर क्षति पहुंच सकती है और इससे महिला को जीवन भर के लिए गंभीर समस्याएं हो सकती हैं | तदापि अगर ऐसी महिला को, जिसकी सुन्नत हुई हो, पेशाब करने में परशानी है या उसे बार बार मूत्र तंत्र के संक्रमण हो रहे हैं तो उसे स्वास्थ्यकर्मी की राय लेनी चाहिए | हो सकता है अपनी समस्या से मुक्ति पाने के लिए ऑपरेशन करवाना पड़े |

मूत्र तंत्र के संक्रमण

मूत्र तंत्र के संक्रमण मुख्यत: 2 प्रकार के होते हैं | मूत्राशय का संक्रमण सर्वाधिक व्याप्त होता है तथा उसका आसानी से उपचार किया जा सकता है | गुर्दों का संक्रमण अति गंभीर होता है | इससे गुर्दों को स्थायी हानि पहुंच सकती है और मृत्यु भी हो सकती है |

क्यों होते हैं मूत्राशय और गुर्दों के संक्रमण ?

मूत्र तंत्र के संक्रमण कीटाणुओं द्वारा होते हैं | आमतौर पर ये बाहर से योनि द्वार के पास स्थित मूत्र द्वार से होते हुए –शरीर में प्रवेश करते हैं | पुरुषों की अपेक्षा, महिलाओं में मूत्र तंत्र के संक्रमण अधिक होते हैं | ऐसा महिलाओं में निम्न मूत्रनली के छोटा होने के कारण होता है | इस कारण संक्रामक कीटाणु, इस छोटी निम्न मूत्र नली में से होते हुए, आसानी व तेजी से मूत्राशय तक पहुंच जाते हैं |

आमतौर पर संक्रमक कीटाणु महिला के शरीर में प्रवेश या उसके शरीर में गुणन तब करते हैं जब वह –

  • सहवास करती है | सहवास के दौरान, योनि तथा गुदा के कीटाणु, मूत्र छिद्र में से होते हुए निम्न मूत्र नली में पहुंच सकते हैं | मूत्राशय में संक्रमण का यह सर्वाधिक काम तरीका है | इससे बचने के लिए सहवास के तुरंत पेशाब करें | ऐसा करने से मूत्र नली की सफाई हो जाती है ( लेकिन इससे गर्भधारण नहीं रुकता) |
  • बहुत समय तक बिना पानी पिए रहती है – विशेषत: अगर वह गर्म वातावरण में काम करती है और उसे बहुत पसीना आता है है | खाली मूत्राशय में कीटाणु गुणन करने लगते हैं | एक दिन में कम से कम 8 गिलास पानी पिएं | गर्मी के मौसम में और भी अधिक पानी पिएं |
  • बहुत समय तक पेशाब नहीं करती हैं ( उदहारण के तौर पर यात्रा करते समय ) | अगर कीटाणु अधिक समय तक मुत्रतंत्र में रहते हैं तो वे संक्रमण उत्पन्न कर सकते हैं | हर 3-4 घंटे में कम से कम एक बार पेशाब अवश्य करें |
  • अपने जननांगों को साफ नहीं रखती हैं | जननांगों विशेषत: गुदा से कीटाणु मूत्र तंत्र में प्रवेश करके संक्रमण कर सकते हैं | जननांगों को प्रतिदिन एक बार अवश्य धोयें | शौच के पश्चात शौच को साफ करने के लिए हाथ को आगे से ( योनि की तरफ से ) पीछे ( गुदा की ओर ) ही चलायें | शौच को पीछे से आगे की ओर हाथ चलाकर साफ करने से कीटाणु गुदा से मूत्र छिद्र में प्रवेश कर सकते हैं | इसके अतिरिक्त सहवास से पहले भी जननांगों को साफ करें | माहवारी के समय प्रयोग करने वाले कपड़े व पैड साफ होने चाहिए |
  • अशक्तता ग्रस्त हो –विशेषत: मेरुदंड की चोटें या शरीर के निचले भाग पर संवेदनहीनता से ग्रस्त हो |

लक्षण तथा उपचार

मूत्राशय संक्रमण के लक्षण :

  • बार-बार पेशाब जाना ( ऐसा ही लग सकता है कि पेशाब करने के बाद भी अंदर पेशाब रह गया है )|
  • पेशाब करते समय दर्द या जलन होना |
  • पेशाब करने के तुरंत पश्चात पेट के निचले भाग में दर्द होना |
  • पेशाब में बदबू आती है या वह गंदला लगता है | उसमें खून या मवाद भी हो सकता है ( पेशाब का गहरा रंग होना “पीलिया” का लक्षण हो सकता है |

गुर्दे के संक्रमण के लक्षण :

  • मूत्राशय संक्रमण के लक्षणों में से कोई लक्षण |
  • बुखार व ठंड लगना |
  • कमर के निचले भाग में दर्द जो कि अकसर काफी तेज होता है और शुरू होकर, साईड से पीछे कमर की ओर जाता है |
  • जी मितलाना तथा उल्टियां लगना |
  • अत्यधिक बीमार लगना व कमजोरी | अगर आपको मूत्राशय तथा गुर्दों –दोनों में संक्रमणों के लक्षण हैं तो शायद आपको गुर्दे का संक्रमण है |

महत्पूर्ण :

अगर आपके लक्षण गंभीर हैं तो दवाईयां लेना शुरू कर दें |

मूत्राशय संक्रमण के लक्षण :

मूत्राशय संक्रमणों का अकसर ही घरेलू नुस्खों से इलाज किया जा सकता है| जैसे की आप लक्षण महसूस करें, उपचार शुरू कर दें| कभी-कभी मूत्राशय का संक्रमण बहुत जल्दी व तेजी से मूत्र नलियों में होता हुआ गुर्दों तक पहुंच सकता है |

  • अधिक मात्रा में तरल पदार्थ पिएं | हर आधा घंटे बाद कम से कम एक कप पानी पीने को कोशिश करें | इससे आपको पेशाब भी अधिक आएगा | कभी –कभी संक्रमण के बदतर होने से पहले ही कीटाणु के मध्यम से मूत्र तंत्र से बाहर हो जाते हैं |
  • कुछ दिन तक या तब तक सहवास न करें जब तक लक्षण ठीक न हो जाएं |
  • उन फूल पतीयों या बीजों के रस की चाय बनाकर सेवन करें जो मूत्र संक्रमणों को ठीक कर सकती हैं | इस प्रकार पेड़-पौधों की जानकारी समुदाय की बुजुर्ग महिलाओं से लें |

अगर आपको 1-2 दिन में आराम नहीं पड़ता है तो घरेलू नुस्खें बंद कर दें और चिकित्सक से संपर्क करें|

गुर्दे के संक्रमण का उपचार

गुर्दे के संक्रमण के लक्षण हैं तो घरेलू उपचार काफी नहीं होंगा | तुरंत चिकित्सकीय सहायता प्राप्त करें |

मूत्र तंत्र की अन्य समस्याएं

पेशाब में खून जाना

अगर आपके पेशाब में खून जा रहा है और साथ में मूत्राशय या गुर्दे के संक्रमण के अन्य लक्षण नहीं है तो आपको गुर्दे या मूत्राशय की पथरी हो सकती है या फिर आपको -

  • गुर्दे या मूत्राशय की तपेदिक (टी.बी.) हो सकती है जो आपके मूत्राशय या गुर्दों को ख़राब कर सकती है |

गुर्दे या मूत्राशय की पथरी

ये छोटे-छोटे, बहुत सख्त पत्थर के टुकड़े होते हैं जो गुर्दे में बनने लगते हैं और फिर मूत्र तंत्र के नीचे खिसकने लगते हैं |

लक्षण:

  • अत्यधिक तेज, अचानक दर्द होना

अन्य लक्षण :

  • पेशाब में खून जाना, पत्थरों द्वारा मूत्र तंत्र की आंतरिक दीवार पर खरोचें लगने से ऐसा होता है |
  • पेशाब करने में कठिनाई होना | अगर पत्थर का कोई टुकड़ा मूत्र नली में रुकावट पैदा कर देता है तो ऐसा हो सकता है |

उपचार :

  • तुरंत चिकित्सकीय सहायता प्राप्त करने क्योंकि आपको ऑपरेशन की आवशयकता हो सकती है |

बार बार पेशाब जाना यह इसलिए होता है :

  • आपके मूत्राशय तथा गर्भाशय के आस पास की मांसपेशियां कमजोर पड़ गई हैं | भिनचाव (स्क्विजिंग) वाली व्यायाम करने से इन्हें मजबूत किया जा सकता है |
  • आपके पेट में कोई अबुर्द( रसौली, ट्यूमर), जैसे कि गर्भाशय में फाइब्राइड्, मूत्राशय पर दबाब डाल रही है जिसके कारण वह अधिक पेशाब रोकने में असमर्थ है |
  • आपको मूत्राशय का कोई संक्रमण है |
  • आपको मधुमेह (डायबिटिज) रोग है |
  • पेशाब निकलते रहना (रिसाव)

पेशाब पर बुरा सयंम

यह मूत्राशय के आस-पास की मांसपेशियों के कमजोर या क्षतिग्रस्त होने के कारण हो सकता है | यह आमतौर पर बुजुर्ग महिलाओं में अथवा महिलाओं के प्रसव के पश्चात होता है | जब सहवास, खांसने, छींकने या वजन उठाने से महिला की इन कमजोर मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है तो पेशाब निकल आता है | इसे में “भिंचाव(स्क्विजिंग) वाली व्यायाम” करने में लाभ होता है |

योनि से पेशाब का रिसाव

(मूत्राशय-योनि फिस्चुला या वी.वी.एफ.)

अगर किसी महिला को पेशाब का रिसाव निरंतर रहता है तो हो सकता है कि उसके मूत्राशय व योनि के बीच कोई छेद हो | (कभी-कभी मलाशय(“रेक्टम”) व योनि के बीच भी छेद हो सकता है जिसके कारण योनि से शौच का रिसाव हो सकता है)

यह एक गंभीर समस्या है और आम तौर पर प्रसव में कोई बाधा होने से उसके लंबा होने के कारण होती है | यह कच्ची उम्र में लड़कियों के साथ गर्भधारण के कारण भी हो सकती है | जिन महिलाओं को बहुत अधिक बच्चे हुए हैं, उन्हें भी यह समस्या हो सकती है क्योंकि बच्चे के प्रसव के दौरान नीचे करने के लये उनकी मांसपेशियों में अधिक ताकत नहीं रह जाती है | दोनों मामलों में योनि के रस्ते व बच्चे का सिर –मूत्राशय व योनि के बीच की दीवार पर दबाव डालकर उसे हानि पहुंचता है वहां एक छेद बन जाता हैं | ऐसे मामलों में बच्चा अकसर मृत पैदा होता है |

बच्चे के जन्म कब बाद, ये छेद (फिस्चुला) भरता नहीं है और मूत्राशय से पेशाब का रिसाव हर समय योनि के रस्ते से होता रहता है | पीड़ित महिला को इस पेशाब को सोखने के लिए हर समय कोई कपड़ा या पैड प्रयोग करना पड़ता है | अगर उसे शीघ्र सहायता न मिलें तो एह उसे दैनिक जीवन में गंभीर परेशानियां पैदा कर देता है | उसका पति, परिवारजन व मित्र उससे कन्नी काटने लगते हैं क्योंकि उसके शरीर से हर समय पेशाब की दुर्गंध आती रहती है |

उपचार :

अगर प्रसव के पश्चात आपकी योनि से पेशाब या मल का रिसाव होता है तो तुरंत किसी स्वास्थ्यकर्मी से किसी ऐसे अस्पताल के बारे में जानकरी प्राप्त करें जहां इसका ऑपरेशन हो सके | शीघ्रातिशीघ्र वहां जाएं |

अगर आप शीघ्र अस्पताल जाने में असमर्थ हैं तो शायद स्वास्थ्यकर्मी मूत्र छिद्र से आपके मूत्राशय में एक नली (केथेटर) डाल सकती है | यह नली मूत्राशय से पेशाब को स्वयं खाली करती रहती है | फिस्चुला को ठीक होने में सहायता मिलेगी | इसके बावजूद भी आपको अस्पताल जाना चाहिए | वहां डॉक्टर आपका परीक्षण  करके यह बताएगा कि वह फिस्चुला भर गया है या आपको इसे ठीक करने के लिए ऑपरेशन कराना पड़ेगा |

घबराईए नहीं | इस समस्या को ठीक किया जा सकता है |

रोकथाम :

  • कच्ची आयु में लड़कियों की शादी न करें |
  • अगर 18 वर्ष से काम आयु की लड़की गर्भवती है तो सुरक्षति प्रसव के विषय में जानकारी के लिए उसे स्वास्थ्यकर्मी से शीघ्र मिलाना चाहिए |
  • कम अंतर पर, जल्दी-जल्दी बच्चे पैदा न करें ताकि जन्मों के बीच अंतराल में आपकी मांसपेशियां फिर से मजबूत बन सकें |

भिंचाव वाली (स्क्विजिंग) व्यायाम

यह व्यायाम आपकी उन मांसपेशियों को मजबूत करने में सहायक होगा जिनके कारण आपको बार-बार पेशाब करने व पेशाब के रिसाव की समस्या होती है | पहले, पेशाब करते समय इसका अभ्यास करें | जैसे ही पेशाब बाहर निकलता है, उसे तुरंत, अचानक रोकिए | ऐसा करने के लिए आपकी योनि के भीतर की मांसपेशियों को एकदम भींचना होगा | पेशाब एकदम रोकर 10 तक गिनती गिनिए | उसके बाद पेशाब छोड़ीए | जब भी आप पेशाब करें, हर बार इसे व्यायाम को करें | जब आप इसमें परांगत हो जाएं तो इस व्यायाम को प्रतिदिन –अन्य समयों पर भी करें | इसके बारे में किसी को भी पता नहीं चलेगा | प्रतिदिन इसे 4-5 बार करें और हर बार, 5-10 बार मांसपेशियों को भींचे |

कुछ महिलाओं को पेशाब के रिसाव को रोकने के लिए ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ सकती है | अगर आपको पेशाब का रिसाव ज्यादा है और भिंचाव वाली व्यायाम से कोई लाभ नहीं हो रहा है तो महिला स्वास्थ्य के विषय में प्रशिक्षित किसी स्वास्थ्यकर्मी से परामर्श करें | भिंचाव वाली व्यायाम हर महिला के लिए लाभकारी होती है | इससे मांसपेशियां मजबूत होती हैं और परिणामस्वरूप बात में होने वाली समस्याओं की रोकथाम हो सकती है |

जब आपको पेशाब या शौच करने में परेशानी हो

बहुत सी महिलाओं ( तथा पुरुषों ) को पेशाब करने व शौच करने की क्रियाओं पर अमान्य नियंत्रण नहीं होता है | (विशेषत:  मरणासन लोगों व मेरुदंड की चोट से ग्रस्त या शरीर के निचले भाग में मांसपेशियों की कमजोरी से ग्रस्त लोगों का) | यह स्थिति काफी असुविधाजनक व लज्जाजनक हो सकती है | इससे गंभीर संक्रमण व त्वचा की बीमारियां भी हो सकती हैं | इसलिए यह आवश्यक है कि साफ सूखा व स्वस्थ रहा जाए |

शौच नियंत्रण

यह जानकारी उन लोगों के लिए सहायक होगी जिन्हें कब्ज की समस्या रहती है या जिन्हें शौच करने में कठिनाई होती है | अगर आपको शौच करने में कठिनाई होती है तो आप अपने शौच की आसान निकासी कराने के बारे में सीख सकती हैं | आंतें बैठे होने की अवस्था में लेते रहने की अपेक्षा –अधिक अच्छी तरह से कार्य करती हैं | इसलिए शौच को शौच स्थल पर बैठकर निकालने की कोशिश करें | अगर आपके लिए बैठना संभव नहीं है तो अपनी बाई करवट लेटकर ऐसा करें |

शौच कैसे निकालें :

  1. अपने हाथ में रबड़ के दस्ताने पहनें | आब हाथ की तर्जनी (अंगूठे के पास वाली उंगली) पर वनस्पति तेल लगाएं |
  2. तेल लगी हुई इस उंगली को गुदा द्वार के लगभग 1 एंच अंदर डालें और धीरे-धीरे, आराम से इस उंगली को लगभग 1 मिनट तक गोलाई में तब तक घुमाएं जब तक गुदाद्वार की मांसपेशियां की सख्ती कम होकर, शौच बाहर न हो जाए |
  3. अगर शौच इस तरीके से अपने आप बाहर नहीं आता है तो उंगली से जीतना हो सके शौच निकाल दें |
  4. इसके बाद गुदा और उसके आस-पास की खाल को भली भांति साफ कर दें |अपने हाथों को अच्छी तरह से धो लें |

शौच को कड़ा होने से रोकने के लिए

  • प्रतिदिन खूब पानी पिएं
  • शौच जाने से नियमित रहें
  • रेशे (फाइबर) युक्त खाद्ध्य पदार्थ का अधिक सेवन करें |
  • प्रतिदिन व्यायाम करें या अपने शरीर को हिलाएं-डुलाये |

मूत्राशय नियंत्रण

कभी-कभी रबड़ मूत्र नली (केथेटर) का प्रयोग करके मूत्राशय से पेशाब निकालना आवशयक हो जाता है | स्वास्थ्यकर्मी इस नली का सही रूप से प्रयोग करने में सहायता कर सकता है | जब तक आवशयक न हो, केथेटर का प्रयोग बिल्कुल न करें | ध्यानपूर्वक प्रयोग न करने से केथेटर के द्वारा गुर्दों व मूत्राशय का संक्रमण हो सकता है | इसलिए इसका प्रयोग तभी करें जब –

  • मूत्राशय पूर्णतया भरा होकर दर्द कर रहा है और पेशाब नहीं हो रहा है |
  • वी.वी.एफ. हो |
  • अशक्तता या चोट हो और पेशाब करने को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियां महसूस न हो रही हों |

पेशाब नली के प्रयोग से संक्रमण की रोकथाम के लिए, यह आवशयक है कि आप स्वच्छता रखें तथा केवल ऐसी नली ही प्रयोग करें जिसे उबाल कर एकदम कीटाणु रहित कर लिया गया हो |

स्रोत: स्वास्थ्य विभाग, विहाई, ज़ेवियर समाज सेवा संस्थान|

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Manju Nov 23, 2016 08:15 PM

Muje urin karte samay dard hota hai

अजीत कुमार Oct 26, 2016 03:17 PM

सेक्स करते करते थक जाता हु फिर भी मेरी बीबी parsan रहती है

puja May 09, 2016 10:19 PM

Mujhe period khul k nhi hote or vaginal infection b h khujli hoti h marid hu 28years age h

रंजना Dec 02, 2015 11:35 PM

मुझे पेशाब आती हे तो मै 2 मिनट भीरोक नहीं सकती मुझे जाना ही पड़ता हे।उपाय बताये

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