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सौर यंत्र

इस भाग में समुदायों में सौर ऊर्जा के उपयोग के प्रोत्साहन से जुड़े विभिन्न केस अध्ययनों और सर्वोत्क्रष्ट प्रयासों को प्रस्तुत किया गया है।

द सेंटर फ़ॉर अप्रॉप्रिएट टेक्नॉलॉजी एंड लाइवलीहुड स्किल्स (CATALIS) ने सौर प्रकाश उपकरणों के माध्यम से ग्रामीण समुदायों को सतत प्रकाश उपलब्ध कराने के लिए एक सूक्ष्म-उद्यम पहल की है। इन प्रयासों में ग्रामीण महिलाओं को सम्मिलित करना कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित करने का एक प्रभावी और टिकाऊ साधन साबित हुआ है।

भारत में स्थायी ग्रामीण प्रकाश व्यवस्था - महिलाओं द्वारा सूक्ष्म-उद्यम की पहल

शुरुआत

कैटालिस ने गांवों में उपयुक्त टेक्नॉलॉजी को बढ़ावा देने के लिए '3 एम’ दृष्टिकोण अर्थात ‘मेक, मार्केट एंड मेंटेन’ ('बनाओ, बेचो और रखरखाव करो') पहल की शुरुआत की। शुरुआत में झारखंड के आदिवासी गांव पेरेका को आदर्श गांव के रूप में चुना गया था। पेरेका गांव में, सामुदायिक स्वामित्व बनाने के क्रम में, 3 अलग बस्तियों से प्रतिनिधित्व के साथ एक समिति बनाई गई थी। 15 सदस्यीय आदर्श गांव समिति में 6 महिलाएं थीं। कैटालिस के कर्मचारियों के सहयोग से, इस समिति ने, गांव का एक संसाधन मानचित्रण तथा आवश्यकताओं का विश्लेषण किया तथा प्रयुक्त की जाने वाली विभिन्न उपयुक्त प्रौद्योगिकियां निर्धारित की गईं। लोगों द्वारा प्रारम्भिक कार्य के रूप में मुख्य क्षेत्र ऊर्जा के रूप में सुझाया गया – जिसमें घरेलू प्रकाश के लिए स्थायी तरीके मुख्य प्राथमिकता थे।

प्रक्रिया

गांवों में लोगों के लिए, शाम के बाद गतिविधियों में एक ठहराव आ जाता है। अपर्याप्त रोशनी न केवल प्रगति और विकास के अवसरों के लिए एक बाधा है, बल्कि स्वास्थ्य, पर्यावरण और सुरक्षा पर भी उसका सीधा असर पड़ता है, क्योंकि लोगों को मज़बूरीवश मिट्टी के तेल के लैंप, लकड़ी और फसल के अवशेषों द्वारा अपने घरों में प्रकाश करना पड़ता है। लोगों का सुझाव मिट्टी के तेल से मुक्त रोशनी सुनिश्चित करने के लिए सौर शक्ति प्रकाश व्यवस्था का था। समुदाय ने फैसला किया कि सौर प्रकाश की पहल एक उद्यमी मॉडल द्वारा लागू की जानी चाहिए, जिसे कैटालिस सहयोग दे। वैचारिक मॉडल कैटालिस द्वारा विकसित किया गया था और वह समुदाय के साथ सघन विचार-विमर्श की एक श्रृंखला के बाद साकार हुआ।

दो स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) गठित किए गए – गिदान मस्कल एसएचजी और हाराकन एसएचजी – प्रत्येक 10 महिला सदस्यों के साथ। दिलचस्प है कि महिलाओं के समूह ने गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से बहुत ही कम समय के भीतर जोड़ने का काम सीख लिया। महिलाओं को व्यापार कौशल, एसएचजी प्रबन्ध, संघर्ष समाधान और व्यापार की योजना के विकास के साथ ही सौर लालटेन की तकनीकी पहलुओं के क्षेत्र में प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण गांव में ही दिया गया, जो महिलाओं के दैनिक कार्यक्रमों के समय के अनुकूल था। प्रशिक्षण कार्यक्रम इस तरह बनाया गया कि उसके परिणाम प्रशिक्षण की अवधि के भीतर ही दिखाई दे रहे थे – जिससे प्रतिभागियों के बीच और अधिक उत्साहवर्धन एवं आत्मविश्वास उत्पन्न हुआ।

प्रोत्साहन

अपने ही गांव की प्रकाश की आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद, एसएचजी के सदस्य अब अपने दम पर (प्रशिक्षकों या प्रोग्राम टीम से कोई सहायता के बिना) सौर लालटेन तैयार करते हैं (1 अमेरिकी डॉलर = 46.9 भारतीय रुपए)। वे उन्हें स्थानीय बाजार में और साथ ही अन्य गांवों में बेचते हैं, तथा प्रति लालटेन 250 से 300 रुपयों का लाभ अर्जित करते हैं। इन सौर लालटेनों में एलईडी (प्रकाश उत्सर्जक डायोड) का उपयोग होता है, जिससे मौज़ूदा सौर लालटेन मॉडल के अधिकतम 4-8 घंटों के भंडारण की तुलना में 20 घंटों के लिए भंडारण प्राप्त होता है। एसएचजी एक विश्वसनीय स्रोत से आवश्यक स्पेयर भागों की आपूर्ति प्राप्त करते हैं। 6 महीने के भीतर, एसएचजी ने आसपास के क्षेत्र में लगभग 800 लालटेनों को जोड़कर उनका विपणन किया है। जहां सौर लालटेन प्रकाश व्यवस्था की जरूरत को पूरा करते हैं, वहीं अब मोबाइल फोन चार्जरों की ज़रूरत सामने आ गई है। अतिरिक्त प्रशिक्षण के साथ, महिलाएं सौर चार्जिंग इकाइयों के माध्यम से मोबाइल फोन बैटरी चार्जिंग सेवाएं प्रदान करना भी आरम्भ कर सकती हैं, जो उन्हें आय का एक अतिरिक्त स्रोत प्रदान करेगी। अतिरिक्त प्रशिक्षण के साथ, महिलाएं भी सौर चार्जिंग इकाइयों के जरिए मोबाइल फोन बैटरी चार्जिंग सेवा प्रदान करने वाली सेवाओं में उतर सकते हैं। उद्यमशीलता की पहल के लिए प्रारंभिक पूंजी आंशिक रूप से एक स्थानीय गैर सरकारी संगठन (LEADS) द्वारा प्रदान की गई, जबकि बाकी राशि एसएचजी की बचत से प्राप्त की गई। प्रारंभिक चरण के दौरान मुनाफे का उपयोग समूह की पूंजी निधि में व्यापार करने के लिए प्रत्यक्ष निवेश के रूप में किया गया। अब, लाभ का 40% पूंजी कोष में चला जाता है और 60% समान रूप से समूह के सदस्यों के बीच विभाजित किया जाता है।

अनुभव

यह पहल एक सीखने वाला अनुभव रहा और इससे पता चला कि ग्रामीण महिलाएं ऊर्जा सेवा प्रदाताओं की भूमिका निभा सकती हैं। ऐसा करने के लिए, उन्हें तकनीकी और गैर तकनीकी दोनों प्रकृति की क्षमता निर्माण तथा अन्य सामग्री की कई किस्मों की जरूरत होती है। इस मॉडल को वर्तमान में भारत के छत्तीसगढ़ और उड़ीसा राज्यों में 2 अन्य गांवों में दोहराया जा रहा है।

3.06930693069

सुभाष बिशनोई Dec 24, 2016 10:29 PM

मैं सोलर ऊर्जा से खेती करना चाहता हूँ कोई भी मुझे उचित सुझाव दे !82XXX47

Amar Nov 29, 2016 12:45 PM

Home K leya solar panels system or subcde ketene melege 1kw alwar rajasthan7

mukesh nag Aug 10, 2016 12:12 PM

Mai jo bolunga wo majak lagela par mai kar chuka hu mai bina koe extera power ke unlimited bijli paida kar sakta hu garib faimli ka hu aur kahi se help nae mil pa raha hai mera project 90% ho gaya hai par paiso ke karan kaam pura nae kar pa raha hu kya karu aap hi ray do...mera modile no. 90XXX40

Rohit Malviya Aug 09, 2015 08:22 AM

Ham Ghar Par Sular Sale Kese Bana Sakte He Krapiya Btaye!

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