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ऊर्जा के स्त्रोत

ऊर्जा विभिन्न प्रकार के स्त्रोतों से प्राप्त होती है। विभिन्न प्रकार के नवीनीकृत और अ-नवीनीकृत ऊर्जा के स्त्रोत,उनके उपयोग लाभ और हानि की संक्षिप्त जानकारी दी गई है।

ऊर्जा क्या है?

ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा की माँग दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। वर्तमान में ऊर्जा का उपयोग मुख्य रूप से खाना बनाने, प्रकाश की व्यवस्था करने और कृषि कार्य में किया जा रहा है। 75 प्रतिशत ऊर्जा की खपत खाना बनाने और प्रकाश करने हेतु, उपयोग में लाया जा रहा है। ऊर्जा प्राप्त करने के लिए बिजली के अतिरिक्त स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जैव ईंधन एवं केरोसिन आदि का भी उपयोग ग्रामीण परिवारों द्वारा बड़े पैमाने पर किया जाता है। कृषि क्षेत्र में ऊर्जा का उपयोग मुख्यतः पानी निकालने के काम में किया जाता है। इन कार्यों में बिजली और डीज़ल भी उपयोग में लाया जा रहा है। देश में कृषि कार्यों में मानव शक्ति बड़े पैमाने पर व्यर्थ चला जाता है। यद्यपि ऊर्जा उपयोग का स्तर गाँव के भीतर अलग-अलग है, जैसे अमीर और गरीबों के बीच, सिंचाईपरक भूमि और सूखी भूमि के बीच, महिलाओं और पुरुषों के बीच आदि।

भारत में ऊर्जा के इस्तेमाल की वर्तमान स्थिति

भारत  की लगभग 70 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। यदि हमें  वर्तमान विकास की गति को बरकरार रखना है तो ग्रामीण ऊर्जा की उपलब्धता को सुनिश्चित करना सबसे महत्वपूर्ण चुनौती है। अब तक हमारे देश के 21 प्रतिशत गाँवों तथा 50 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों तक बिजली नहीं पहुँच पाई है।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच प्रति व्यक्ति ऊर्जा की खपत में काफी अंतर है। उदाहरण के लिए 75 प्रतिशत ग्रामीण परिवार रसोई के ईंधन के लिए लकड़ी पर, 10 प्रतिशत गोबर की उपालियों पर और लगभग 5 प्रतिशत रसोई गैस पर निर्भर हैं। जबकि इसके विपरीत, शहरी क्षेत्रों में खाना पकाने के लिए 22 प्रतिशत परिवार लकड़ी पर, अन्य 22 प्रतिशत केरोसिन पर तथा लगभग 44 प्रतिशत परिवार रसोई गैस पर निर्भर हैं। घर में प्रकाश के लिए 50 प्रतिशत ग्रामीण परिवार केरोसिन पर तथा अन्य 48 प्रतिशत बिजली पर निर्भर हैं।

जबकि शहरी क्षेत्रों में इसी कार्य के लिए 89 प्रतिशत परिवार बिजली पर तथा अन्य 10 प्रतिशत परिवार केरोसिन पर निर्भर हैं। ग्रामीण महिलाएँ अपने उत्पादक समय में से लगभग चार घंटे का समय रसोई के लिए लकड़ी चुनने और खाना बनाने में व्यतीत करती हैं लेकिन उनके इस श्रम के आर्थिक मूल्य को मान्यता नहीं दी जाती।

देश के विकास के लिए ऊर्जा की उपलब्धता एक आवश्यक पूर्व शर्त्त है।  खाना पकाने, पानी की सफाई, कृषि, शिक्षा, परिवहन, रोज़गार सृजन एवं पर्यावरण को बचाये रखने जैसे दैनिक गतिविधियों में ऊर्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोग होने वाले लगभग 80 प्रतिशत ऊर्जा बायोमास से उत्पन्न होता है। इससे गाँव में पहले से बिगड़ रही वनस्पति की स्थिति पर और दबाव बढ़ता जा रहा है। गैर उन्नत चूल्हा, लकड़ी इकट्ठा करने वाली महिलाएँ एवं बच्चों की कठिनाई को और अधिक बढ़ा देती है। सबसे अधिक, खाना पकाते समय इन घरेलू चूल्हों से निकलने वाला धुंआँ महिलाओं और बच्चों के श्वसन तंत्र को काफी हद तक प्रभावित करता है।

नवीनीकृत ऊर्जा

अक्षय ऊर्जा प्राकृतिक प्रक्रिया के तहत सौर, पवन, सागर, पनबिजली, बायोमास, भूतापीय संसाधनों और जैव ईंधन और हाइड्रोजन से लगातार अंतरनिहित प्राप्त होती रहती है।

सौर ऊर्जा

सूर्य ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत है। यह दिन में हमारे घरों में रोशनी प्रदान करता है कपड़े और कृषि उत्पादों को सुखाता है हमें गर्म रखता है इसकी क्षमता इसके आकार से बहुत अधिक है।

लाभ

  • यह एक बारहमासी, प्राकृतिक स्रोत और मुफ्त है।
  • यह प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।
  • यह प्रदूषण रहित है।

हानियां

  • मौसम में परिवर्तन आश्रित - इसलिए इनका हमेशा प्रयोग नहीं किया जा सकता है।
  • उत्पादक को बहुत अधिक प्रारंभिक निवेश करने की आवश्यकता होती है।
सौर ऊर्जा के उत्पादक उपयोग हेतु प्रौद्योगिकी

सौर्य ऊर्जा का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए किया जा सकता है। सोलर फोटोवोल्टेइक सेल के माध्यम से सौर विकिरण सीधे डीसी करेन्ट में परिवर्तित हो जाता है। इस प्रकार, उत्पादित बिजली का उसी रूप में इस्तेमाल किया जा सकता या उसे बैटरी में स्टोर/जमा कर रखा जा सकता है। संग्रह किये गये सौर ऊर्जा का उपयोग रात में या वैसे समय किया जा सकता जब सौर्य ऊर्जा उपलब्ध नहीं हो। आजकल सोलर फोटोवोल्टेइक सेल का, गाँवों में घरों में प्रकाश कार्य, सड़कों पर रोशनी एवं पानी निकालने के कार्य में सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में सौर ऊर्जा का उपयोग पानी गर्म करने में भी किया जा रहा है।

पवन ऊर्जा

पवन स्थल या समुद्र में बहने वाली हवा की एक गति है। पवन चक्की के ब्लेड जिससे जुड़े होते है उनके घुमाने से पवन चक्की घुमने लगती है जिससे पवन ऊर्जा उत्पन्न होती है । शाफ्ट का यह घुमाव पंप या जनरेटर के माध्यम से होता है तो बिजली उत्पन्न होती है। यह अनुमान है कि भारत में 49,132 मेगावॉट पवन ऊर्जा का उत्पादन करने की क्षमता है।

लाभ

  • यह पर्यावरण के अनुकूल है ।
  • इसकी स्वतंत्र रूप और बहुतायत से उपलब्ध।

नुकसान

  • उच्च निवेश की आवश्यकता।
  • हवा की गति जो हर समय एक समान नहीं होने से बिजली उत्पादन की क्षमता प्रभावित होती है।

जैव भार और जैव ईंधन

जैव भार क्या है?

पौधों प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के माध्यम सौर ऊर्जा का उपयोग बायोमास उत्पादन के लिए करते हैं। इस बायोमास का उत्पादन ऊर्जा स्रोतों के विभिन्न रूपों के चक्रों से होकर गुजरता है। एक अनुमान के अनुसार भारत में बायोमास की वर्तमान उपलब्धता 150 मिलियन मीट्रिक टन है। अधिशेष बायोमास की उपलब्धता के साथ, यह उपलब्धता प्रति वर्ष लगभग 500 लाख मीट्रिक टन होने का अनुमान है।

बायोमास के उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली प्रौद्योगिकी

बायोमास सक्षम प्रौद्योगिकियों के कुशल उपयोग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित हो रहा है। इससे ईंधन के उपयोग की दक्षता में वृद्धि हुई है। जैव ईंधन ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है जिसका देश के कुल ईंधन उपयोग में एक-तिहाई का योगदान है और ग्रामीण परिवारों में इसकी खपत लगभग 90 प्रतिशत है। जैव ईंधन का व्यापक उपयोग खाना बनाने और उष्णता प्राप्त करने में किया जाता है। उपयोग किये जाने वाले जैव ईंधन में शामिल है- कृषि अवशेष, लकड़ी, कोयला और सूखे गोबर।

  • स्टोव की बेहतर डिजाइन के उपयोग से कुशल चूल्हे की दक्षता दोगुना हो जाती है।

लाभ

  • स्थानीय रूप से उपलब्ध और कुछ हद तक बहुत ज़्यादा।

  • जीवाश्म ईंधन की तुलना में यह एक स्वच्छ ईंधन है। एक प्रकार से जैव ईंधन, कार्बन डायऑक्साइड का अवशोषण कर हमारे परिवेश को भी स्वच्छ रखता है।

हानि

  • ईंधन को एकत्रित करने में कड़ी मेहनत।

  • खाना बनाते समय और घर में रोशनदानी (वेंटीलेशन) नहीं होने के कारण गोबर से बनी ईंधन वातावरण को प्रदूषित करती है जिससे स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित होता।

  • जैव ईंधन के लगातार और पर्याप्त रूप से उपयोग न करने के कारण वनस्पति का नुकसान होता है जिसके चलते पर्यावरण के स्तर में गिरावट आती है।

जैव ईंधन के उत्पादक प्रयोग हेतु प्रौद्योगिकी

जैव ईंधन के प्रभावी उपयोग को सुरक्षित करती प्रौद्योगिकियाँ ग्रामीण क्षेत्रों में फैल रहीं हैं।

ईंधन उपयोग की क्षमता निम्नलिखित कारणों से बढ़ाई जा सकती है -

  • विकसित डिज़ाइन के स्टोवों का उपयोग, जो क्षमता को दोगुणा करता है जैसे धुँआ रहित ऊर्जा चूल्हा।

  • जैव ईंधन को सम्पीड़ित/सिकोड़कर (कम्प्रेस) ब्रिकेट के रूप में बनाये रखना ताकि वह कम स्थान ले सके और अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सके।

  • जैव वस्तुओं को एनारोबिक डायजेशन के माध्यम से बायोगैस में रूपांतरित करना जो न केवल ईंधन की आवश्यक्ताओं को पूरा करता है बल्कि खेतों को घुलनशील खाद भी उपलब्ध कराता है।

  • नियंत्रित वायु आपूर्ति के अंतर्गत जैव ईंधन के आंशिक दहन के माध्यम से उसे उत्पादक गैस में रूपांतरित करना।

जैव ईंधन

जैव ईंधन मुख्यत: सम्मिलित बायोमास से उत्पन्न होता है अथवा कृषि या खाद्य उत्पाद या खाना बनाने और वनस्पति तेलों के उत्पादन की प्रक्रिया से उत्पन्न अवशेष और औद्योगिक संसाधन के उप उत्पाद से उत्पन्न होता है। जैव ईंधन में किसी प्रकार का पेट्रोलियम पदार्थ नहीं होता है किन्तु इसे किसी भी स्तर पर पेट्रोलियम ईंधन के साथ जैव ईंधन का रूप भी दिया जा सकता है। इसका उपयोग परंपरागत निवारक उपकरण या डीजल इंजन में बिना प्रमुख संशोधनों के साथ उपयोग किया जा सकता है। जैव ईंधन का प्रयोग सरल है। यह प्राकृतिक तौर से नष्ट होने वाला सल्फर तथा गंध से पूर्णतया मुक्त है।

पानी और भूतापीय ऊर्जा

पानी

बहता पानी और समुद्र ज्वार ऊर्जा के स्रोत हैं। जनवरी 2012 में लघु पन बिजली के संयत्रों ने ग्रिड इंटरेक्टिव क्षमता में 14% योगदान दिया । लघु पन बिजली परियोजनाओं में बड़ी परियोजनाओं पर भारी निवेश किया जाता है। हाल के वर्षों में, पनबिजली ऊर्जा (मध्यम और छोटे पनबिजली संयंत्र) का उपयोग दूरदराज के अविद्युतीकृत गांवों तक बिजली पहुंचने के लिए प्रयोग किया जाता है। लघु जल विद्युत की अनुमानित क्षमता देश में लगभग 15,000 मेगावाट है।वर्ष 2011-12 के दौरान, लघु जल विद्युत परियोजनाओं (3MW तक) की स्थापित क्षमता 258 मेगावाट के बराबर रही है।

भूतापीय ऊर्जा

भूतापीय ऊर्जा पृथ्वी से उत्पन्न गर्मी है। प्रकृति में प्रचलित गर्म जल के फव्वारे हैं जो भूतापीय ऊर्जा स्रोतों की उपस्थिति के लिए निदेशक का काम रूप में काम करते हैं। भारत में 340 से अधिक गर्म जल के फव्वारे हैं जिनका दोहन होना अभी बाकी है।

नाभिकीय ऊर्जा

नाभिकीय ऊर्जा ऐसी ऊर्जा है जो प्रत्येक परमाणु में अंतर्निहित होती है। नाभिकीय ऊर्जा संयोजन (परमाणुओं के संयोजन से) अथवा विखंडन (परमाणु-विखंडन) प्रक्रिया द्वारा उत्पन्न की जा सकती है। इनमें विखंडन की प्रक्रिया व्यापक रूप से प्रयोग में लाई जाती है।

नाभिकीय विखंडन प्रक्रिया के लिए यूरेनियम एक प्रमुख कच्चा पदार्थ है। दुनियाभर में यह कई स्थानों से खुदाई के माध्यम से प्राप्त किया जाता है। इसे संसाधित कर छोटी गोलियों में बदला जाता है। (संवर्धित यूरेनियम अर्थात्, रेडियो सक्रिय आइसोटोप प्राप्त करने हेतु)। इन गोलियों को लंबी छ्ड़ों में भरकर ऊर्जा इकाईयों के रिएक्टर में डाला जाता है। परमाणु ऊर्जा इकाई के रिएक्टर के अंदर यूरेनियम परमाणु नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया (कंट्रोल्ड चेन रिएक्शन) द्वारा विखंडित किये जाते हैं। विखंडित होकर बनने वाले अन्य पदार्थों में प्लूटोनियम तथा थोरियम शामिल हैं।

किसी श्रृंखला अभिक्रिया में परमाणु के टूटने से बने कण अन्य यूरेनियम परमाणुओं पर प्रहार करते हैं तथा उन्हें विखंडित करते हैं। इस प्रक्रिया में निर्मित कण एक श्रृंखला अभिक्रिया द्वारा पुनः अन्य परमाणुओं को विखंडित करते हैं। यह प्रक्रिया बड़ी तीव्र गति से न हो इसके लिए नाभिकीय ऊर्जा प्लांट में विखंडन को नियंत्रित करने के लिए नियंत्रक रॉड का प्रयोग किया जाता है। इन्हें मंदक (मॉडरेटर) कहते हैं।

श्रृंखला अभिक्रिया द्वारा ऊष्मा ऊर्जा मुक्त होती है। इस ऊष्मा का प्रयोग रिएक्टर के कोर में स्थित भारी जल को गर्म करने में किया जाता है। इसलिए नाभिकीय ऊर्जा प्लांट परमाण्विक ऊर्जा को ऊष्मा ऊर्जा में बदलने के लिए किसी अन्य इंधन को जलाने की बजाय, श्रृंखला अभिक्रिया द्वारा उत्पन्न ऊर्जा का प्रयोग करता है। नाभिकीय कोर के चारों तरफ फैले भारी जल को ऊर्जा प्लांट के अन्य खंड में भेजा जाता है। यहां यह जल से भरे पाइपों के दूसरे सेट को गर्म कर भाप पैदा करता है। पाइपों के इस दूसरे सेट से उत्पन्न वाष्प का प्रयोग टर्बाइन चलाने में किया जाता है, जिससे बिजली पैदा होती है।

नाभिकीय ऊर्जा के लाभ

  • नाभिकीय ऊर्जा के निर्माण में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की अपेक्षाकृत कम मात्रा निकलती है। इसलिए वैश्विक तापन (ग्लोबल वार्मिंग) में नाभिकीय ऊर्जा के निर्माण का अपेक्षाकृत कम योगदान रहता है।
  • मात्र एक इकाई द्वारा ही बड़े पैमाने पर बिजली पैदा की जा सकती है।

नाभिकीय ऊर्जा के दोष

  • रेडियो सक्रिय अपशिष्ट पदार्थों के सुरक्षित निबटान की समस्या।
  • दुर्घटना होने पर बड़े खतरे तथा उसके गहरे हानिकारक प्रभाव की संभावना।
  • इसमें प्रयुक्त कच्चा पदार्थ यूरेनियम एक दुर्लभ संसाधन है। एक आकलन के मुताबिक वास्तविक मांग के अनुसार यह 30 से 60 वर्षों में ही खत्म हो जाएगा।

अनवीनीकृत ऊर्जा

कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों हैं। पौधों के उत्पाद हजारों साल दबे रहे थे जिन्हें धीरे-धीरे पृथ्वी से निकाला जाता है जो जीवाश्म ईंधन कहलाते हैं। जीवाश्म ईंधन आज मुख्य रूप से इस्तेमाल ऊर्जा के स्रोत हैं। भारत लगभग 286 अरब टन (मार्च 2011) के अनुमानित भंडार के साथ दुनिया में कोयले का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। कोयला देश के कुल ऊर्जा जरूरतों का 50% से अधिक की पूर्ति करता है। भारत में सालाना 210 लाख टन के बराबर कच्चे तेल की खपत होती है।

स्रोतः http://edugreen.teri.res.in

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gabbar Mar 27, 2017 06:03 PM

Vegyaniko khoj karne pr kitna inAm milta h

Dharmraj Mar 23, 2017 09:41 AM

ऊर्जा के छेतर में तीन अविष्कार किया हो

मुकेश जाट chittriya Jan 15, 2017 10:03 AM

नॉन रिन्यूएबल एनर्जी सोर्सेज इन डिटेल

अभिषेक Oct 31, 2016 01:06 PM

सर क्या मुझे सौर ऊर्जा के विभिन्न रूपों के उत्पादन की वर्तमान स्थिती के लेटेस्ट आंकड़े मिल सकते हे २०१६ के...क्योंकि मैupscकी तैयारी कर रहा हूँ और मुझे लेटेस्ट आंकड़ों की सख़्त जरूरत है.. धन्यवाद :)

बी.एच. परेवा bhagchandparewa@gmail.com Sep 14, 2016 12:31 AM

सर आपकी दी गई ऊर्जा सबंधित जानकारी पढ़कर बहुत ख़ुशी हुई और में बिजली उत्पादन के विषय पर पिछले १५ सालो से रिसर्च कर रहा हूं। जिसमें अनेको बार असफलता मिली, लेकिन मे ने हिम्मत नही हारी और आखिर में सफलता हांसिल कर ली। सर आपके जरिये में यह सन्देश आमजन को देना चाहता हू कि मुझे सरकार से कोई भी समर्थन नही मिला। मेने पीएम मोदी जी को मेल, ट्विटर, फेसबुक आदि माध्यम से लेटर लिखकर उन्हें अवगत किया पर कोई रिप्ले नही आया। पता नही मोदी जी ने लेटर पढ़ा भी हे कि नही। सर वही लेटर की कॉपी आपको भेज रहा हूं शायद आपके जरिये पीएम मोदी जी तक मेरा यह सन्देश पहुंच जाए प्रधान मंत्रीजी भारत गणराज्य। विषय:- देश के हित में ऊर्जा सबंधित नई खोज को नई दिशा देने के सन्दर्भ में प्रार्थना पत्र, जिस से कि अपने देश को पुरे विश्व में सबसे ताकतवर और समृद्ध बनाने का नया इतिहास रचा जाये। आदरणीय, श्री नरेंद्र भाई दामोदर दास मोदी जी सादर प्रणाम सर में देश का एक साधारण इंसान हूँ जो पिछले १५ सालो से अपने देश के हित में ऊर्जा विनिर्माण पर अनुसंधान कर रहा हु। सर आपके कॉX्XिडेX्स और एक्स्XीरिXंस को में तहे दिल से प्रणाम करता हूँ। सर आप की मन की बात सुन कर में बहुत प्रभावित हुआ, सर मेने भी अपने देश के लिए सुनहरे सपने संजोये है। विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में नये आविष्कारो ने लोगो की दैनिक जीवन-शैली को आधुनिक और उन्नत बनाने में महान भूमिका निभाई है। विज्ञान और तकनीकी की उन्नति ने एक तरफ लोगो की जीवन-शैली को प्रत्यक्ष और सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है हालांकि, दूसरी और इसने लोगो के स्वास्थ्य पर अप्रत्Xक्ष और नकारात्मक प्रभाव भी डाला है। इस आधुनिक दुनिया में एक देश के लिये दूसरे देशो से मजबूत, ताकतवर और अच्छी तरह से विकसित होने के लिये विज्ञान और और तकनीकी क्षेत्र में, हमे आगे बढ़ने और जीवन में सफल व्यक्ति बनने के लीए अधिक तकनिकीयो की जरूरत है। विज्ञान और तकनीकी का विकास तथ्यों के विश्लेषण और उच्चित समझ पर निर्भर करता है। अपना देश भारत विज्ञान और प्रौXोगिकी की दृष्टि से तेजी से विकास करता हुआ देश है। सर मेने अपने देश और मानवता की भलाई के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, एक ऐसी तकनीक ईजाद की है जो बिना किसी अतिरिक्त खर्च के बिजली उत्पादन कर सके। वैसे तो बिजली उत्पादन के लिए महान वैज्ञाXिकों ने अनेको स्त्रोतो की खोज की है, जो में आपको विस्तार से बताता हूं उर्जा के अन्य स्त्रोतो से विद्युत शक्ति का निर्माण विद्युत उत्पादन कहलाता है। व्यवहारिक रूप में विद्युत शक्ति का उत्पादन, विद्युत जनित्रो (generators) द्वारा किया जाता है। विद्युत उत्पादन के मूलभूत सिद्धान्त की खोज अंग्रेज वैज्ञानिक माइकेल फैराडे ने १९२० के दौरान एवं १९३० के आरंभिक काल में किया था। माइकल फैराडे की मूल विधि आज भी उसी रूप में प्रयुक्त होती है। विद्युत का उत्पादन जहाँ किया जाता है उसे बिजलीघर कहते है। बिजलीघरों में विद्युत यांत्रिक जनित्रो के द्वारा बिजली पैदा की जाती है जिसे किसी किसी अन्य युक्ति से घुमाया जाता है, इसे मुख्Xघूर्णक या प्रधान चालक (प्राइम मूवर) कहते है। प्राइम मूवर के लिये जल टर्बाइन, वाष्प टर्बाइन या गैस टर्बाइन हो सकती है। विद्युत शक्ति जल से, कोयले आदि की ऊष्मा से, नाभिकीय अभिक्रिXाओं से, पवन शक्ति से एवं अन्य कई विधियों से पैदा की जाती है। सौर्य उर्जा; सूर्य भी विद्युत शक्ति का असीम साधन है। अभी तक तो केवल प्रXोगात्Xक रूप में ही इसे विX्Xुतशक्ति के उत्पादन के लिए प्रयोग किया गया है, परन्तु सहारा एवं अरब के रेगिस्ताXों की चिलचिलाती धुप में सौर बिजलीघर बनाने की योजनाऍ बनाई जा रही है। आजकल पर्Xाण्विX बिजलीघरों की स्थापना में अधिक ध्यान दीया जा रहा है। पर्माणवीय बिजलीधर बहुत से देशो में बनाए गए है और उनकी बड़ी बड़ी योजनाये बनाई जा रही है। ब्रिटेन, अमेरिका तथा रूस में पिछले कुछ वर्षो में बहुत बड़े बड़े पर्माणविय बिजलीघर बनाये गये है और बहुत से बनाये जा रहे है। इनका मुख्य लाभ यह है कि ये भार केन्द्रो के सन्निकट बनाये जा सकते है, जिससे लम्बी संचरण लाइनों की अवशक्यता नही रहती। इसके अतिरिक्त, ईंधन की मात्रा अत्यंत कम होने के कारण परिवहन व्यय तथा इसकी समस्या नही रहती। परन्तु इनका प्रतिस्थापX व्यय साXेक्षतXा अधिक होता है और फिर इनकी प्रचलन प्रणाली अभी तक शोध का विषय है। प्रणालिXों में नित्य नये अनुसन्धान के कारण इनकी स्थापना का निश्चय बहुत ही विवाXास्XX है। परमाणु ईंधन चक्र में प्लूटोXिXX प्राप्त करने के लिए काम आ चुके परमाणु ईंधन के पुनरूपचार की प्रक्रिया सबसे ज्यादा खतरनाक, समस्याओ से भरी और पर्यावरण के लिए बेहद हानिकारक होती है। रिएक्टरों में काम अ चुके परमाणु ईंधन के पुनरूपचार के लिए बनाए गए किसी भी सयंत्र ने अपनी क्षमता का पांचवा भाग भी पूरा नही किया है। दुनिया के पांच बड़े पुनरूपचार सयंत्रों में से चार कुछ भी काम कीये बिना होने वाली दुर्धटनाओ का केंद्र बन गये थे। परमाणु बिजलीधरो से निकला अति भयानक रेडिXXXर्Xि कचरा अनन्तकाल तक यानि जब तक यह धरती है तब तक, बिलकुल सुरक्षित रूप से जमा कर के रखना होगा। है कोई राजनेता या वैज्ञानिक जो इसका दावा कर सकता है? परमाणु उर्जा के कट्टर से कट्टर समर्थको में से कोई भी यह नही कह सकता है कि उस कचरे के निपटान की समस्या का हल मिल गया है। यह विष आज संसार में 20,000 टन तक की मात्र में मौजूद है। इसका अधिकांश भाग बिजलीघरों के काम आ चुके ईंधन के हौजो में पड़ा है। परमाणु बिजलीघर कचरे में यूरेनियम का कूड़ा, ईंधन की टूटन हर साल रिएक्टरों से फैका जाने वाला कीचड़ और रेडिXोXर्Xी विकिरण से प्रदूषित कर्XचरिXों के कपड़े, जूते, दस्ताने, टोपी आदि शामिल है। इसे गढ्ढे में या समुन्द्र में गाड़ना भी एक बड़ी आफत है। देर सवेर यह सब मछलियो आदि के माध्यम से आहार चक्र में दाखिल होने ही वाला है। सर मेरे कहने का तातपर्य यह है कि आज तक विश्व के महान वैज्ञाXिकों ने बिजली उत्पादन के स्त्रोतो की खोज की है वह बड़ी जटिल एवं खर्चीली तथा प्रदूषित है। और बिजली की मांग दिनों दिन बढ़ती जा रही है, और में ने इन सब समस्याओ को ध्यान में रखते हुए, और इनसे निजात पाने के उद्देश्य से एक ऐसी तकनीक इजाद की है। जिसके जरिये विद्युत जनित्रो(generators) को चलाया जा सके एसा एक प्राइम मूवर बनाया है। जो बिना किसी अतिरिक्त खर्च के तथा बिना किसी (वर्तमान में चल रहे पारम्परिक) वस्तु-X्रXार्थ के प्रयोग से रहित विद्युत जनित्रो (generators) को चलाया जा सकता है। सर वैज्ञाXिकों की दृष्टि में यह असम्भव है, परन्तु मेने इसे सम्भव किया है। सर में मानता हु की उर्जा ब्रह्Xाण्ड का अंतिम सत्य है, उर्जा ही ब्रह्Xाण्ड है। वह किसी अन्य वस्तु से नही बना है, समस्त पदार्थ उर्जा से बना है। यह ज्ञान मेने प्रकृति के नियमो से प्राप्त किया है, और प्रकृति के नियमो को कोई नही बदल सकता। सर, विज्ञान वह व्यवस्थित ज्ञान या विद्या है जो विचार, अवलोकन, अध्य्यन और प्रयोग से मिलती है, जो की किसी अध्यन के विषय की प्रकृति या सिX्XाX्तों को जानने के लिये किये जाते है। विज्ञान शब्द का प्रयोग ज्ञान की ऐसी शाखा के लिये भी करते है, जो तथ्य, सिद्धान्त और तरीको को प्रयोग और परिकल्पना से स्थापित और व्यवस्थित करती है। इस प्रकार कह सकते है कि किसी भी विषय का क्रमबद्ध ज्ञान को विज्ञान कह सकते है। ऐसा कहा जाता है कि विज्ञान के ज्ञाX-Xण्डार के बजाय वैज्ञानिक विधि विज्ञान की असली कसौटी है। और इस कसौटी में खरा उतरना मेरे लिए एक बहुत बड़ी चुनोती थी। इस चुनोती को स्वीकार करके, मेने इन सब समस्याओ से निजात पाने के उद्देश्य को ही अपना लक्ष्य बना लिया।और मेने पिछले १५ सालो से सयंम के साथ अपने फन को बड़ी लगन से तारम तय के साथ कड़ी महेनत करके सफलता हासिल की है। सर में आप से निवेदन करता हूं, कि मेरी बनाई तकनीक को नई दिशा दी जाये ताकि अपने देश को पुरे विश्व में सबसे ज्यादा समृद्ध और ताकतवर बनने का एक नया इतिहास रच जाये। जय हिन्द जय भारत। आओ रचे एक नया इतिहास, यह इतिहास हमारा होगा, इसमें भाई चारा होगा। इसमें मेहनत होगी अपनी, अपना ही अब नारा होगा। रचेंगे मिलकर साथ एक नया इतिहास। शिक्षा होगी अपनी साथी, ज्ञान का दीपक ज्ञान की बाती, हर घर में उजियारा होगा, सारा विश्व हमारा होगा। रचेंगे मिलकर साथ एक नया इतिहास। जय हिन्द, जय भारत। आपका शुभेच्छु बी.एच. परेवा 78XXXजय XXXXX@gmail.कॉम Twitter: बी.एच.परेवा @bhagchandparewa फेस बुक :- बी.एच. परेवा

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