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क्रोमियम से होने वाले जल प्रदूषण की जांच एक पोर्टेबल किट से होगी

इस पृष्ठ में भाभा परमाणु अनुसंधान केन्‍द्र ने क्रोमियम से होने वाले जल प्रदूषण की जांच के लिए जो एक पोर्टेबल किट का आविष्‍कार किया है, उसकी जानकारी दी गयी है।

परिचय

क्रोमियम का इस्‍तेमाल चमड़ा, इस्‍पात क्रोम प्‍लेटिंग, पेंट विनिर्माण, लकड़ी संरक्षण आदि विभिन्‍न उद्योगों में व्‍यापक रूप से किया जाता है। इन उद्योगों से निकलने वाला गैर-उपचारित कचरा देश के कई भागों में बड़े पैमाने पर जल को प्रदूषित करता है।

क्रोमियम है सेहत के लिए हानिकारक

क्रोमियम वातावरण में मुख्‍य रूप से ट्रिवैलेंट क्रोमियम सीआर(III) और हेक्‍सावैलेन्‍ट क्रोमियम सीआर(VI) के रूप में विद्यमान रहता है, जिनमें से हेक्‍सावैलेन्‍ट क्रोमियम सीआर(VI) ज़हरीला होता है और विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने इसे कार्सोजेनिक की श्रेणी में वर्गीकृत किया है, जिससे पेट में अल्‍सर और कैंसर हो सकता है तथा किडनी और लीवर को क्षति पहुंच सकती है।

पेयजल संबंधी भारतीय मानक आईएसओ500 के अनुसार पेयजल में कार्सोजेनिक की न्‍यूनतम स्‍वीकार्य सीमा 50 माइक्रोग्राम प्रतिलीटर है। अमरीकी पर्यावरण संरक्षण विभाग इससे भी कम,  यानी मात्र 10 माइक्रोग्राम प्रतिलीटर संकेन्द्रित की सिफारिश करता है।

कैसे काम करता है क्रोमियम की जांच के लिए पोर्टेबल किट

भाभा परमाणु अनुसंधान केन्‍द्र ने स्‍थल पर सीआर(VI) की जांच के लिए एक आसान, इस्‍तेमालकर्ता अनुकूल और कम लागत वाली किट का विकास किया है, जो आईएसओ500 और अमरीकी पर्यावरण एजेंसी के मानदंड पूरे करती है। यह पेयजल और टैप वाटर, झीलों और नदियों तथा भूमिगत जल में क्रोमियम से होने वाले प्रदूषण की जांच के लिए एक आवश्‍यक समाधान प्रस्‍तुत करता है। तत्‍संबंधी प्रक्रिया के अंतर्गत जल के नमूनों में एक विशेष रीएजेंट मिलाया जाता है और उससे विकसित रंग की पहचान की जाती है।

यह रंग पांच मिनट में विकसित हो जाता है और इसे बिना किसी सहायक उपकरण के सामान्‍य आंखों से देखा जा सकता है।आसानी से तुलना के लिए किट के साथ एक रंग चार्ट उपलब्‍ध कराया जाता है। जल के नमूनों को आसानी से निर्धारित किया जा सकता है कि वे सीआर(VI)  की दृष्टि से कितने सुरक्षित हैं। इस किट के इस्‍तेमाल के अनेक फायदे हैं। इससे अधिक महंगे और अत्‍याधुनिक उपकरणों की आवश्‍यकता समाप्‍त हो जाती है। इससे स्‍थल पर परीक्षण करने और शीघ्र परिणाम ज्ञात करने में मदद मिलती है।

मेक इन इंडिया अभियान की उपलब्धि है यह किट

सीआर(VI) की जांच के लिए वर्तमान किट आयात करनी पड़ती है और उससे जांच की लागत प्रति नमूना 100 रुपये आती है जबकि भाभा परमाणु अनुसंधान केन्‍द्र-बीएआरीसी द्वारा विकसित किट से मात्र रुपये 16 प्रति नमूना लागत आती है।  यह भारत सरकार के मेक इन इंडिया अभियान की दिशा में बार्क की एक और उपलब्धि है।

सीआर(VI) की जांच के लिए बार्क किट से संबधी प्रौद्योगिकी नागपुर में मैसर्ज एलटीईके उद्योग को सौप दी गई है।

स्त्रोत: पत्र सूचना कार्यालय

 

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sherbahadurpatel Oct 03, 2017 12:35 PM

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