सामग्री पर पहुँचे | Skip to navigation

होम (घर) / ऊर्जा / पर्यावरण / प्रतिपूरक वनरोपण निधि विधेयक, 2015(संशोधन)
शेयर
Views
  • अवस्था संपादित करने के स्वीकृत

प्रतिपूरक वनरोपण निधि विधेयक, 2015(संशोधन)

इस लेख में प्रतिपूरक वनरोपण निधि विधेयक, 2015 में किये गए संशोधन का विशेष उल्लेख किया गया है।

पृष्ठभूमि

वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के अंतर्गत ग़ैर वनीय उद्देश्य हेतु वनभूमि के परिवर्तन की पूर्वगामी स्वीकृति देते हुए केंद्र सरकार यह शर्त रखती है कि इस धनराशि का इस्तेमाल उपयोगकर्ता एजेंसियों द्वारा प्रतिपूरक वनरोपण करने हेतु एवं वनों के संरक्षण तथा विकास से संबंधित गतिविधियों के लिए किया जाएगा ताकि वनभूमि में बदलाव का असर कम किया जा सके।

सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की पालन करते हुए, यह धनराशि एक तदर्थ प्राधिकरण द्वारा चलाए जा रहे राज्यवार खातों में जमा की जाती है। प्राधिकरण में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के दो अधिकारी, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक का एक प्रतिनिधि एवं केंद्र सरकार की अधिकार प्राप्त समिति के अध्यक्ष का एक नुमाइंदा शामिल होता है।

एक स्थाई सांस्थानिक व्यवस्था की ग़ैर मौजूदगी में इस तदर्थ प्राधिकरण के पास 40,000 करोड़ रुपए इकट्ठे हो गए हैं।

विधेयक राष्ट्रीय स्तर पर, प्रत्येक राज्य में एवं केंद्र शासित प्रदेश में प्राधिकरणों के गठन की व्यवस्था करता है। यह प्राधिकरण इस प्रकार इकट्ठी हुई धनराशि का उपयोग कृत्रिम वृक्षारोपण में, प्राकृतिक तौर पर होने वाले वृक्षारोपण की मदद में, वनों के संरक्षण के लिए, वनों की अवसंरचना के विकास हेतु, हरित भारत कार्यक्रम के लिए, वन्यजीवन के संरक्षण के लिए एवं संबंधित गतिविधियों के लिए करेंगे।

केंद्रीय कैबिनेट ने किये क्या बदलाव

 

यह विधेयक प्रतिपूरक वनरोपण निधि प्रबंधन एवं नियोजन प्राधिकरण के पास संचित अव्ययित धनराशि, जो वर्तमान में 40,000 करोड़ रुपए है, एवं पुंजित अव्ययित शेष पर प्रतिपूरक करारोपण एवं ब्याज का ताज़ा संग्रहण, जो कि सालाना लगभग 6,000 करोड़ होगा, का सक्षम एवं पारदर्शी तरीक़े से जल्द उपयोग सुनिश्चित करेगा।

इन राशियों का उपयोग वनभूमि में परिवर्तन से हुए दबाव को कम करने के लिए यथोचित युक्तियों के समयबद्ध निष्पादन को सुगम बनाएगा, जिस वजह से यह राशियां जारी की गई हैं। वनभूमि के परिवर्तन के कारण पैदा हुए दबाव को कम करने के अलावा, इन राशियों का उपयोग गांवों में लाभकर सम्पत्तियों की रचना करेगा एवं ख़ासकर पिछड़े आदिवासी इलाकों में रोजगार के ढेरों अवसर पैदा करेगा।

आलेखन में संशोधनों के अलावा निम्न आधिकारिक बदलाव होंगे

i. विधेयक के उपवाक्य 2 (e) में किए गए संशोधन से पर्यावरण संबंधी सेवाओं की सूची को समावेशी बनाना एवं कुछ ऐसी पर्यावरण संबंधी सेवाओं को हटाया जाना जिनके मौद्रिक मूल्य का कोई विश्वसनीय मॉडल अस्तित्व में नहीं है।

ii. विधेयक के उपवाक्य 2 (I) एवं 30 (1) में संशोधन राज्य सरकारों से नये विधेयक के अनुसार नियम बनाने की पूर्वगामी मंत्रणा की व्यवस्था करेगा।

iii. विधेयक के उपवाक्य 4 (1) में संशोधन, ऐसे केंद्र शासित प्रदेश जिनकी अपनी विधायिका नहीं है, के लिए राज्य निधि की स्थापना करने की व्यवस्था करेगा।

iv. विधेयक के उपवाक्य 6 (द) में संशोधन संरक्षित क्षेत्रों में स्वैच्छिक पुनर्स्थापन के लिए संरक्षित क्षेत्रों की वनभूमि को परिवर्तित करने के एवज में उपयोगकर्ता एजेंसियों से प्राप्त धन के इस्तेमाल का अधिकार प्रदान करेगा।

v. विधेयक के उपवाक्य 8 (4) (ii) में संशोधन अंतरिक्ष एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्रालयों के सचिवों को राष्ट्रीय प्राधिकरण के प्रबंध निकाय में बतौर सदस्य लिए जाने की व्यवस्था करेगा।

vi. विधेयक के उपवाक्य 8 (4) (x) में संशोधन राष्ट्रीय प्राधिकरण के प्रबंध निकाय में विशेषज्ञ सदस्यों की संख्या दो से पांच करने की व्यवस्था करेगा।

vii. विधेयक के उपवाक्य 9 (2) (ix) में संशोधन राष्ट्रीय प्राधिकरण की कार्यकारी समिति में विशेषज्ञ सदस्यों की संख्या दो से बढ़ाकर तीन करने की व्यवस्था करेगा।

viii. विधेयक के उपवाक्य 11 (2) एवं 11 (3) में संशोधन किसी राज्य प्राधिकरण की कार्यकारी एवं संचालन समितियों में आदिवासी मामलों के विशेषज्ञ अथवा आदिवासी समाज के प्रतिनिधि को सम्मिलित करने की व्यवस्था करेगा।

ix. विधेयक के उपवाक्य 15 (1) (i) में संशोधन राष्ट्रीय प्राधिकरण की कार्यकारी समिति को राज्य प्राधिकरणों के लिए वार्षिक योजना स्वीकृत करने हेतु तीन माह की समय सीमा देने की व्यवस्था करेगा एवं राष्ट्रीय प्राधिकरण की कार्यकारी समिति को राज्य प्राधिकरणों की वार्षिक योजना में संशोधन करने की शक्तियां प्रदान करने की व्यवस्था करेगा।

x. विधेयक के उपवाक्य 29 में संशोधन वार्षिक रिपोर्ट एवं अंकेक्षण रिपोर्ट के साथ केंद्र शासित प्रदेशों में गठित राज्य प्राधिकरण की सिफारिशों पर की गई कार्रवाई के पत्रक को पेश करने की व्यवस्था करेगा।

संशोधनों से किसी प्रकार के अतिरिक्त व्यय की बात नहीं है। विधेयक जम्मू एवं कश्मीर को छोड़ कर संपूर्ण भारत में लागू होगा।

स्त्रोत: पत्र सूचना कार्यालय

3.11475409836

अपना सुझाव दें

(यदि दी गई विषय सामग्री पर आपके पास कोई सुझाव/टिप्पणी है तो कृपया उसे यहां लिखें ।)

Enter the word
नेवीगेशन
संबंधित भाषाएँ
Back to top

T612019/05/22 18:33:20.790242 GMT+0530

T622019/05/22 18:33:20.804243 GMT+0530

T632019/05/22 18:33:20.804991 GMT+0530

T642019/05/22 18:33:20.805255 GMT+0530

T12019/05/22 18:33:20.767692 GMT+0530

T22019/05/22 18:33:20.767865 GMT+0530

T32019/05/22 18:33:20.768004 GMT+0530

T42019/05/22 18:33:20.768142 GMT+0530

T52019/05/22 18:33:20.768231 GMT+0530

T62019/05/22 18:33:20.768302 GMT+0530

T72019/05/22 18:33:20.768977 GMT+0530

T82019/05/22 18:33:20.769159 GMT+0530

T92019/05/22 18:33:20.769360 GMT+0530

T102019/05/22 18:33:20.769571 GMT+0530

T112019/05/22 18:33:20.769616 GMT+0530

T122019/05/22 18:33:20.769707 GMT+0530