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सौर शहरों के विकास पर कार्यक्रम - दिशा निर्देश

इस भाग में नगर निगमों द्वारा अपने शहरों को सौर शहरों के रूप में विकसित करने के लिए रोड मैप तैयार और कार्यान्वयन करने हेतु सहायता प्रदान कर शहरी क्षेत्रों में अक्षय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा से संबंधित दिशा- निर्देशों की अधिक जानकारी दी जा रही है।

भूमिका

भारत की जनसंख्या का लगभग 30% भाग (2001 की जनगणना के अनुसार 285.35मिलियन व्यक्ति) शहरी क्षेत्रों में निवास करता है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद के काल में जहाँ भारत की जनसंख्या में तीन गुनी वृद्धि हुई है वहीं शहरी आबादी में पांच गुनी वृद्धि हुई है। शहरी क्षेत्र आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं की देखरेख घरों में रोशनी व्यवस्था, परिवहन प्रणालियों, बुनियादी सुविधाओं, उद्योग तथा वाणिज्य के लिए मुख्य रूप से जीवाश्म ईंधनों (प्रात: आयातित) पर निर्भर हैं। ईंधन की कमी और मांग में वृद्धि के कारण जीवाश्म ईंधन काफी मंहगे होते जा रहे हैं। इसके, जीवाश्म ईंधनों के उपयोग के पर्यावरणिक एवं सामाजिक प्रभाव तेजी से चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। इन प्रभावों में वायु प्रदूषण, वैश्विक तापन, अपशिष्ट निपटान की समस्याएँ, भूमि अवक्रमण और प्राकृतिक संसाधनों के क्षय होना शामिल हैं।

शहरीकरण और आर्थिक विकास के कारण शहरी क्षेत्रों में ऊर्जा की मांग में तेजी से वृद्धि हो रही है। शहरी क्षेत्र हरित गैस उत्सर्जन के सबसे बड़े स्रोतों में से एक के रूप में उभर कर आए हैं जिसमें अकेले भवनों का ही योगदान कूल जीएचजी उत्सर्जन का लगभग 40% है। संयूक्त राष्ट्र संघ की नवीनतम, रिपोर्ट  के अनुसार प्रत्येक सप्ताह एक मिलियन व्यक्ति शहरी क्षेत्रों का रूख कर रहे हैं। ऐसा अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2050 तक विश्व की लगभग दो- तिहाई आबादी प्रत्येक सप्ताह शहरों में निवास करने लगेगी। इसके लिए शहरी क्षेत्रों मर ऊर्जा संसाधनों में व्यापक बदलाव आवश्यक है। इस तथ्य को स्वीकार करते हुए विश्व भर के विभिन्न शहरों द्वारा अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने तथा जीएचजी उत्सर्जन में कमी लाने के लिए लक्ष्यों का निर्धारण और नीतियों की शुरूआत की जा रही है। लंदन द्वारा वर्षा 2010 तक कार्बन उत्सर्जन में 20% की कमी लेन की घोषणा की गई है न्यूयार्क और 200 अन्य अमेरिका शहरों ने भी ऐसा ही लक्ष्य निर्धारित किया है। टोक्यो ने वर्ष 2020 तक कूल खपत में अक्षय स्रोतों की 20% भागीदारी की घोषणा की है और आस्ट्रेलिया की सरकार ने सौर शहर कार्यक्रम प्रारंभ किया है।

कई भारतीय नगरों और शहरों में शीर्ष विद्युत मांग में 15% की वृद्धि हुई हैं स्थानीय सरकारों तथा विद्युत यूटिलिटिज के लिए मांग में हो रही इस तीव्र वृद्धि का सामना करना कठिन हो रहा है और इसके परिणाम स्वरूप अधिकांश नगरों/शहरों में बिजली की भारी कमी हो रही है। एक ऐसी रूप रेखा तैयार किये जाने की आश्यकता है जो शहरों को अपनी वर्तमान ऊर्जा खपत की स्थिति का आकलन करने, अक्षय ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से ऊर्जा सृजन के लिए कार्य योजना तैयार करने हेतु लक्ष्य निर्धारित करने और शहरी सेवाओं का संचालन में उपयोग की जाने वाली ऊर्जा के संरक्षण हेतु प्रोत्साहन और सहायता प्रदान कर सके। इसके लिए लक्ष्य निर्धारित किए जाएँ तथा अक्षय ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन करने हेतु कार्य योजना बनाई जाएँ तथा शहरी सेवाओं को संचालित करने में उपयोग की जाने वाली ऊर्जा को संरक्षित किया जाएँ।

सौर शहरों की विकास पर प्रस्तावित कार्यक्रम शहरी स्थानीय निकायों को अपने शहरों की ‘अक्षय ऊर्जा शहर’ अथवा ‘सौर शहर’ अथवा पर्यावरण/ ‘हरित शहर’ बनाने हेतु मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए एक भावी रूप रेखा (रोड मैप) तैयार करने में सहायता करेगा/बढ़ावा देगा। मंत्रालय द्वारा घरों, होटलों, छात्रवासों, अस्पतालों एवं उद्योग में सौर जल उष्मण प्रणालियों प्रदर्शन एवं जागरूकता सृजन के लिए शहरी क्षेत्रों में एसपीवी प्रणालियों/यंत्रों की संस्थापना अक्षय ऊर्जा दूकानों की संस्थापना सौर भवनों का निर्माण और शहरी एवं औद्योगिक अपशिष्ट/बायोमास से ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देने हेतु शहरी क्षेत्र में पहले ही कार्यक्रम प्रारंभ किए गए हैं।  इस कार्यक्रम का उद्देश्य मंत्रालय द्वारा शहरी क्षेत्र में किए जा रहे सभी प्रयासों को सामेकित करना और शहरी क्षेत्रों की ऊर्जा संबंधी समस्याओं की सम्यक रूप से समाधान करना है।

कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित किए जाने वाले प्रमुख कार्यकलाप

यह कार्यक्रम शहर स्तर पर धारणीय ऊर्जा के परिदान में होने वाली समस्याओं को निम्नलिखित के माध्यम से निष्पादित करने हेतु तैयार किया गया है।

मंत्रालय द्वारा मंजूरी प्रदान किए जाने की तारीख में एक वर्ष की अवधि के भीतर एक मास्टरप्लान तैयार किया जाना चाहिए। विहित प्रपत्र में तैयार किए गए मास्टर प्लान में अगले 10 वर्षो के लिए ऊर्जा की मांग एवं पूर्ति के लिए कूल तथा क्षेत्र-वार प्रयोजन उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अतिरिक्त, यह संबंधित शहर में ऊर्जा उपयोग तथा जी एच जी उत्सर्जन पर एक पूर्ण क्षेत्रवार आधार – रेखा उपलब्ध कराएगा। मास्टर प्लान में कार्यान्यवन हेतु कार्य योजना के साथ ऊर्जा संरक्षण, अक्षय ऊर्जा वर्धन और जीएचजी उपशमन के लिए वर्षवार लक्ष्यों का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाएगा। वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए संबंधित संगठनों (सर्वजनिक और निजी दोनों) से वित्त पोषण के संभावित स्रोतों की पहचान की जाएगी अंतिम रूप देने से पहले, प्रारूप मास्टर प्लान पर एक स्टेक धारकों की एक परामर्शी कार्यशाला में विचार किया जाएगा जिसमें निर्वाचन प्रतिनिधि, स्थानीय अनूसंधन एवं शैक्षिक संस्थान, नागरिक कल्याण एसोसिएशन, उद्योग एवं कार्पोरेट संगठनों, गैर – सरकारी संगठनों, एसएनए आदि का प्रतिनिधित्व होगा। इस मास्टर प्लान में कुछेक कार्यान्यवन योग्य विस्तृत परियोजना रिपोर्टें भी शामिल होंगी जिन्हें कार्यान्यवन एजेंसी द्वारा मंजूरी हेतु प्रस्तुत किया जा सकता है। मास्टर प्लान द्वारा ऊर्जा की खपत के वर्तमान स्तर में कमी तथा उसके फलस्वरूप कार्बनडाई ऑक्साइड उत्सर्जन में कमी सुनिश्चित की जाएगी।

नगर परिषद में नियोजन एवं कार्यान्वयन हेतु वरिष्ठ प्रशासक एवं नगर अभियंताओं एसएन ए के प्रतिनिधियों सहित एक ‘सौर शहर प्रकोष्ठ’ की स्थापना करना। सौर शहर प्रकोष्ठ में कम से कम एक समर्पित प्रशिक्षित तकनीकी कर्मी (कम से कम इंजीनियर स्नातक) होना चाहिए जिसकी सहायता के लिए एक सचिवीय व्यक्ति हो, जो अक्षय ऊर्जा/ऊर्जा क्षमता आदि के क्षेत्र में दिन-प्रतिदिन के कार्यकलापों के लिए विशेष रूप से नियुक्त किया जाए। उपयुक्त प्रस्तावों को बनाकर प्रस्तुत करना सौर शहर प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी होगी। संबंधित सौर शहरों के लिए सौर शहर प्रकोष्ठों हेतु प्रशिक्षित/ सुयोग्य व्यक्तियों की नियुक्ति करना एम्एनआरई/एसएनए का कार्य होगा। सौर शहर प्रकोष्ठ के अन्य कर्मियों की व्यवस्था नगर निगमों द्वारा उनके अपने - अपने मौजूदा अधिकारीयों/इंजीनियरों में से व्यवस्था की जाएगी। संबंधित नगर निगम/एसएनए आवश्यक बुनियादी ढाँचा, कार्यालय स्थान तथा अन्य कार्यालय संबंधी खर्चों आदि को वहन करेंगे।

नगर निगम निकायों, स्थानीय अनूसंधान तथा शैक्षिक संस्थानों, निवासी कल्याण एसोसिशनों, उद्योगों एवं कार्पोरेट संगठनों, गैर - संगठनों, राज्य नोडल एजेंसियों तथा अन्य संबंधित स्टेक धारकों के निर्वाचित प्रतिनिधियों को शामिल का करते हुए परामर्शी सहायता हेतु एक ‘सौर शहर स्टेक धारक समिति’ गठन किया जाएगा।

विभिन्न स्टेक धारकों जैसे नगर निगम निकायों, नगरपालिका के कार्मिकों, वास्तुविदों/इंजीनियरों, भवन निर्माताओं एवं विकासकर्त्ताओं, वित्तीय संस्थाओं, गैर- सरकारी संगठनों, तकनीकी संस्थाओं, उत्पादकों एवं अपूरकों, आरडब्ल्यूए आदि के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम/कार्यशाला/व्यापर बैठकों/जागरूकता शिविरों आदि का आयोजन तथा भारत के भीतर दौरे/अध्ययन दौरे आयोजित करना।

कार्बन वित्तपोषण हेतु प्रस्ताव तैयार करना।

प्रिंट एवं इलेक्ट्रोनिक माध्यमों से प्रचार एवं जागरूकता अभियान चलाना।

मंत्रालय द्वारा वित्तीय सहायता के माध्यम से सरकारी/सार्वजनिक भवनों में अक्षय ऊर्जा और ऊर्जा संरक्षण यंत्रों/प्रणालियों की संस्थापना तथा हरित परिसर विकास हेतु कार्ययोजना के लिए विकसित किए जा रहे लगभग 100 नए छोटे नगर-क्षेत्रों/परिसरों को सहायता प्रदान की जाएगी।

वित्तीय प्रावधान

केन्द्रीय वित्तीय सहायता निम्नानुसार उपलब्ध कराई जाएगी-

कार्य योजनाओं के साथ-साथ मास्टर प्लान की तैयारी, सौर शहर सैल स्थापित करने और कार्य करने, अन्य संवर्धनात्मक कार्यकलाप और कार्यान्वयन की देखभाल आदि हेतु केन्द्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए)

प्रति शहर/नगर 50.00 लाख रू. तक जो वहाँ की जनसंख्या पर निर्भर होगा तथा नगर परिषद/प्रशासन/नगर द्वारा की गई पहले, जिनका विवरण नीचे दिया गया है:

I. 10.00 लाख रू, तक एक वर्ष के अंदर कुछ कार्यान्वयन योग्य विस्तृत परियोजना रिपोर्टों  के साथ-साथ मास्टर प्लान की तयारी हेतु हैं।

II. 10.00 लाख रू. तक तीन वर्षों के दौरान कार्यान्वयन की देखभाल हेतु हैं।

III. तीन वर्षों की अवधि के लिए सौर शहर सैल स्थापित करने और उसके कार्य करने के लिए 10.00 लाख रू. की राशि।

IV. शेष 20 लाख रू. की राशि को अन्य संवर्धनात्मक कार्यकलाप, प्रशिक्षण, कार्यशालाओं, अध्ययन दौरों और सौर शहर सैलों के कार्यकलापों के बढ़ाने के लिए तीन वर्षों में उपयोग किया जाना है।

उपरोक्त प्रावधान इनके लिए और कहीं अलग से किए गए वित्तीय प्रावधानों पर ध्यान किए बिना प्रायोगिक सौर शहरों और मॉडल सौर शहरों सहित सभी 60 शहरों के लिए लागू हैं। इन सौर शहरों में अक्षय ऊर्जा संस्थापन हेतु छोटे नगरों/पर्यटन स्थलों/धार्मिक/महत्वपूर्ण स्थानों जहन बहुत भीड़-भाड़ रहती है उन्हें भी इसके अंतर्गत लाया जाना चाहिए। यदि उपरोक्त निधियों का उपयोग पूर्ण रूप से नहीं होता है तो शेष निधियों पर उनके अक्षय ऊर्जा वाली परियोजनाओं के संस्थापन के लिए उपयोग करने पर विचार किया जा सकता है। जिसमें कुछ नवोन्वेषी परियोजनाएं भी शामिल हैं।

प्रयोगिक सौर शहर में विभिन्न अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं/प्रणालियों/युक्तियों की संस्थापना हेतु सीएफए

मास्टर प्लान और डीपीआर के साथ सदृश प्रस्ताव की परिपक्वता पर निर्भर करते हुए मंत्रालय द्वारा सौर शहर कार्यक्रम के अंतर्गत मंजूरी दी जाएगी। शहर में विभिन्न अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं/प्रणालियों/युक्तियों की संस्थापना हेतु कुल सीएफए प्रत्येक प्रयोगिक सौर शहर के लिए 2.50 करोड़ रू. तक उपलब्ध कराई जाएगी।

सौर शहर कार्यक्रम के अंतर्गत सौर शहर/नगर क्षेत्र की निधियां इस शर्त के अध्यधीन जारी की जाएगी कि सामान राशि अर्थात 2.50 करोड़ रू, संबंधित नगर निगम/शहर प्रशासन/राज्य अथवा किसी अन्य संसाधनों द्वारा उपलब्ध कराए जाएंगे। पहले से विद्यमान अथवा इस संशोधित योजना के तहत मंजूर किए जाने वाले प्रायोगिक सौर शहरों के लिए सीएफए की पद्धति वही होगी जो सौर संबंधित परियोजनाओं के लिए मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किए जा रहे जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन के तहत तथा एमएनआरईके अन्य क्षेत्रों की विभिन्न योजनाओं/कार्यक्रम के लिए स्कीमों में लागू है।

12वीं योजना के दौरान इस वित्तीय सहायता के अंतर्गत पहले अनुमोदित/स्वीकारी 10 शहरों के अतिरिक्त प्रथम नये पांच शहरों को “पहले आओ पहले पाओ” के आधार पर मांग के अनुसार गुण-दोष को देखते हुए पायलट सौर शहरों के रूप में शामिल किया जाएगा। यह वित्तीय सहायता उन शहरों को उपलब्ध होगी जो परिशिष्ट – 1 में दी गई कम से कम तीन शर्तों को पूरा करते हो।

प्रायोगिक सौर शहरों के रूप में एमएनआरई की 2.50 करोड़ रू. की राशि को प्राप्त कर स्थापित शहर किसी अन्य कार्यक्रम के अंतर्गत इसी परियोजना के लिए एमएनआरई की आगे और सब्सिडी प्राप्त करने के लिए पात्र नहीं होंगे। तथापि, एमएनआरई कार्यक्रमों के अंतर्गत अन्य परियोजनाएँ स्थापित की जा सकती है।

अन्य सौर शहरों के लिए वित्तीय पद्धति वही होगी जो सौर संबंधित परियोजनाओं के लिए मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किए जा रहे जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन के अंतर्गत स्कीमों में लागू है और अन्य परियोजनाओं के लिए इस कार्यक्रम के अंतर्गत एमएनआरई के संबंधित कार्यक्रम में लागू एमएनआरई के संबंधित कार्यक्रमों में लागू एमएनआरई की सीएफए का उपयोग किया जा सकता है।

प्रमोटरों/बिल्डरों द्वारा विकसित किए जा रहे नए लघु नगर क्षेत्रों/परिसरों, विशेष आर्थिक क्षेत्रों/औद्योगिक नगरों, संस्थागत परिसरों आदि के लिए कार्य योजना सहित मास्टर प्लान और डीपीआर की तैयारी हेतु सीएफए।

मास्टर पालन और डी पी आर तैयार करने, जिसमें अक्षय ऊर्जा संस्थागत, हरित परिसर विकास, जागरूकता लाना और प्रशिक्षण आदि के लिए कार्य योजना भी शामिल है, के लिए राज्य/स्थानीय प्राधिकरणों द्वारा विधिवत अधिसूचित/अनुमत प्रत्येक नये और मौजूदा लघु नगर क्षेत्रों/परिसरों के लिए 5.00 लाख रू. तक प्रदान किया जाएगा। यह मौजूदा नगर क्षेत्रों/परिसरों के लिए भी प्रोत्साहित किया जाए कि उन्हें यथा संभव हरित परिसर बनाने के लिए अक्षय ऊर्जा और ऊर्जाक्षम उपकरण उपायों की उपयुक्त रेट्रोफिटिंग मौजूद हो।

इन परिसरों में अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं/प्रणालियों की संस्थापन एमएनआरई की विभिन्न योजनाओं के प्रावधानों के अनुसार की जाएगी।

सेमिनार/कार्यशाला, प्रशिक्षण, जागरूकता अभियान अयोजित करने, साहित्य/दिशा- निर्देश आदि की तयारी हेतु सीएफए।

देश में सौर शहर कार्यक्रम शहर में अक्षय ऊर्जा का उपयोग था ऊर्जा दक्ष उपाय करने की दिशा में नगर निगमों और शहरी स्थानीय निकायों को प्रेरित करने में एक भूमिका अदा कर सकता है। क्षमता सृजन से संबंधित कार्यकलाप, जिसमें जागरूकता, राष्ट्रीय स्तर की कार्यशालाएं/क्षेत्रीय सेमिनार, क्षमता सेमिनार, क्षमता सृजन संबंधी साहित्य विकास, दिशानिर्देश और उन्नयन संबंधी कार्यकलाप सोफ्टवेयर विकास, नवोन्वेषी परियोजनाएँ या अन्य विविध कार्य आदि शामिल हैं, जिन्हें गुणदोष के आधार पर इस कार्यक्रम के अंतर्गत पर्याप्त रूप से बढ़ाया जाएगा। वास्तव में इस स्कीम में क्षमता सृजन/प्रशिक्षण एक प्रकार से नियमित कार्यक्रम रहेगा।

सेमिनार/कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, जागरूकता संबंधी अभियानों आदि के लिए 4.00 लाख रू. तक की धनराशि प्रदान की जाएगी। अन्य कार्यकलापों के लिए गुणदोष के आधार पर आवश्यकतानुसार निधियां प्रदान करने पर विचार किया जा सकता है। इस प्रकार के लगभग 50 कार्यकलापों के लिए 12 वीं योजना अवधि के दौरान सहायता दी जा सकती है। इस कार्यकलापों के लिए वर्ष 2013-14 में तथा 12वीं पंचवर्षीय योजना की शेष अवधि के दौरान कुल बजट 1.00 करोड़ रू. तक प्रतिबंधित होगा।

मॉडल और शहरों हेतु सीएफए

चार मॉडल सौर शहरों को प्रत्येक मॉडल सौर शरह के लिए 9.50 करोड़ रू. तक की सीएफए इस शर्त के साथ उपलब्ध कराई जाएगी कि 9.50 करोड़ रू. तक की इसी प्रकार की सामान राशि नगर निगम/नगर पालिका/राज्य/जिला प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराई गई है अथवा चार मॉडल सौर शहरो  के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी सहित अपने आप अथवा और अन्य स्रोतों से उनके द्वारा व्यवस्था की गई है। यह वित्तीय सहायता उन मॉडल सौर शहरों को संबंधी परियोजनाओं/प्रणालियों/युक्तियों की स्थापना हेतु उपलब्ध कराई जाएगी जो परिशिष्ट – 1 में दी गई। कम से कम तीन शर्तों को पूरा करते हैं अथवा उन पर कार्रवाई की है। पहले से स्वीकृत दो मॉडल सौर शहरों के लिए मंजूर की गई निधियां में से 50% सीएफए प्राप्त की जा सकती है। तथापि इस संशोधित स्कीम में अंतर्गत मंजूर किए जाने वाले दो नए मॉडल सौर शहरों के लिए वित्तीय पद्धति वही होगी जो सौर संबंधित परियोजनाओं के लिए मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किए जा रहे जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन के अंतर्गत स्कीमों में लागू है अन्य परियोजनाओं के लिए है।

सांकेतिक उपाय और ऊर्जा संरक्षण तथा अक्षय ऊर्जा यूक्तिओं/प्रणालियाँ जो मास्टर प्लान की तैयारी में और शहरों को सौर शेरोन के रूप में विकसित करने में मदद कर सकती है, की सूची परिशिष्ट – 2 और 3 में  दी गई है।

सहायता किए जाने वाले शहर

12वीं योजना अवधि के दौरान सौर शहरों के रूप में विकसित किए जाने के लिए कुल 60 शहरों/नगरों का प्रस्ताव किया गया है। मंत्रालय द्वारा प्रत्येक राज्य में कम से कम एक शहर और अधिकतम पांच शहरों की सहायता की जाएगी । कार्यक्रम में शामिल शहरों/नगरों की जनसंख्या 50 लाख से 0.50 लाख के बीच होनी चाहिए जिसमें प्लावी जनसंख्या शामिल है। गुणवत्ता पर मामला - दर – मामला आधार पर इस कार्यक्रम के तहत पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों, द्वीप समूहों और संघ शासित क्षेत्रों में कम जनसंख्या वाले शहरों पर भी विचार किया जाएगा।

सौर शहरों में आर ई परियोजनाओं की संस्थापना सुनिश्चित करने के लिए 12 वीं योजना के दौरान प्राथमिकता के आधार पर प्रत्येक राज्य/संघ शासित क्षेत्र में आदर्श/पायलट सौर शहरों को मांग और वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के अनुसार विकसित किया जाएगा।

शहरों के चयन हेतु पात्रता

इस कार्यक्रम में उच्च स्तर की प्रतिबद्धता और नेतृत्व की गुणवत्ता के साथ शहरों को प्रोत्साहित किया जाता है। शहरों के चयन करते समय एमएनआरई द्वारा निम्नलिखित पर विचार किया जाएगा।

  • शहर की जनसंख्या, क्षेत्रीय स्थिति और क्षेत्र में प्रमुखता।
  • टिकाऊ सतत ऊर्जाओं को अपनाने के लिए राजनैतिक और प्रशासनिक प्रतिबद्धता (सौर शहर कार्यक्रम में विनिर्दिष्ट सभी कार्यकलापों के कार्यान्वयन हेतु नगर परिषद/प्रशासक द्वारा प्रस्ताव पारित किया जाए)
  • ऊर्जा संरक्षण और अक्षय ऊर्जा को अपनाने पर किए गए नियामक उपाय।
  • शहर के कार्यकलापों में ऊर्जा संरक्षण और अक्षय ऊर्जा को अपनाने हेतु संभाव्यता।
  • ऊर्जा संरक्षण और अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने में नगर परिषद/प्रशासन/निजी विकास कर्त्ताओं/उद्योग/आम जनता द्वारा पहले से ही गई पहलें।
  • सार्वजनिक भागदारी शामिल करने और सभी पणधारियों के साथ कार्य करने में शहरी स्थानीय निकायों का पूर्व का अनुभव।
  • संसाधन, वित्तीय अंशदान उपलब्ध कराने के लिए इच्छा और प्रतिबद्धता तथा कायर्क्रम के अंतर्गत आरंभ किए गए कार्यकलापों की पुष्टि।

प्रस्ताव प्रस्तुत करने, निधियों की स्वीकृति और जारी करने हेतु प्रक्रिया

प्रस्तावों को परिशिष्ट 4 तथा 5 में दिए गए निर्धारित प्रपत्र के अधिमानत: रूप से नोडल एंजेंसी के माध्यम से नगर परिषद/प्रशासन/नगर-पालिकाओं/विकासकर्त्ताओं/संस्थाओं आदि प्रस्तुत किया जाएगा। मंत्रालय में प्रस्तावों की जाँच की जाएगी जिसके आधार पर सीएफए का 50% मंजूर की गई/कार्यकलापों पर जारी किया जाएगा और शेष कार्यकलापों अर्थात मास्टर प्लान की तयारी हेतु, सौर शहर सैल स्थापित करने, अन्य जागरूकता, प्रशिक्षण और प्रचार, परियोजनाएँ स्थापित करने की लागत के अलावा कार्यान्वयन की देखभाल करने के लिए जारी की गई निधियों के उपयोग और प्रगतिशील उपलब्धि पर जारी की जाएगी।

अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं/प्रणालियों/युक्तियों की स्थापना करने के लिए विचार किए जाने हेतु अनुमोदित सौर शहर की संबंधित नगर परिषद/प्रशासन/नगर निगम/नगरपालिकाओं/संगठन द्वारा प्रत्येक परियोजना अथवा परियोजनाओं के समूह हेतु विशिष्ट प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाएंगे। प्रस्ताव के साथ सौर शहर के लिए 2.50 करोड़ रू तक की मैचिंग निधि उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्धता दर्शाते हुए नगर निगम/नगरपालिकाओं/नामित एंजेंसी का प्रस्ताव होना चाहिए। मानक और लागत तथा दिशा निर्देश हेतु बैचमार्क एमएनआरई के अन्य कार्यक्रमों में लागू मानक और लागत तथा दिशा निर्देशों अनुसार होंगे। इसी प्रकार, मॉडल और शहरों हेतु भी प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे और संबंधित संगठन की प्रतिबद्धता के साथ प्रस्तुत किए जाएंगे।

परियोजनाओं की स्थापना हेतु सीएफए दो किस्तों में जारी की जाएगी। 50% की पहली किस्त परियोजना की मंजूरी के समय इस प्रतिबद्धता के साथ जारी की जाएगी कि मैंचिंग निधियां प्रस्ताव करने वाले संगठन द्वारा उपलब्ध कराई जाएंगी। शेष 50%की दूसरी किस्त परियोजना के पूर्ण होने, पहली किस्त के उपयोग प्रमाणपत्र की प्राप्ति और सक्षम प्राधिकारी द्वारा विधिवत प्रस्तुत की गई परियोजना पूर्णता रिपोर्ट मिलने पर जारी की जाएगी।

छोटे नगर क्षेत्रों/परिसरों के लिए प्रस्ताव उपयुक्त बौंड पेपर में प्रतिबद्धता के साथ यह दर्शाते हुए कि अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं/प्रणालियों/युक्तियों की संस्थापना मास्टर प्लान/डीपीआर की तैयारी के आंरभ की जाएगी, जो दिए गए निर्धारित प्रपत्र में संबंधित विकासकर्त्ताओं/बिल्डरों/संस्था द्वारा तैयार किए जाने चाहिए।

सौर शहरों में नवोन्वेषी परियोजनाएँ

सौर शहर विकसित करने से अक्षय ऊर्जा के माध्यम से नई – नई परियोजनाओं को उन्नत बनाने का कार्य भी होगा। जो स्मार्ट ग्रिड, संस्थापन के बाद सेवा केंद्र, स्ट्रीट लाइट के ऊपर कार्य होगा तथा अक्षय ऊर्जा के माध्यम से सौर ऊर्जा के केन्द्रीकृत विद्युत प्रणाली, बायोगैस उत्पति, रसोई का कचरा आधारित संयंत्र आदि के माध्यम से परियोजनाएँ चलेंगी। ये नवोन्वेषी परियोजनाएँ गुण- दोष के आधार पर विचारित हो सकती है।

पुरस्कारों की व्यवस्था

सौर शहर के रूप में अपने शहर को विकसित करने पर आरंभ की गई पहलों के संबंध में नगर परिषद/प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना के आधार पर शील्ड/प्रमाणपत्रों के रूप में मंत्रालय द्वारा पहचान किए गए सौर शहरों को वार्षिक पुरस्कार दिए जा सकते हैं। सौर नगर क्षेत्र अथवा सौर परिसर का प्रयोग करने के प्रणामपत्र के साथ सर्वश्रेष्ठ नगर क्षेत्रों/परिसरों को भी पुरस्कार दिए जाएंगे।

12वीं पंचवर्षीय योजना के अंत में कार्यक्रम के कार्यान्वयन के अनुभव का मूल्यांकन किया जाएगा और कार्यक्रम का आगे और विस्तार तथा समावेश/अंशशोधन पर  निर्णय किया जाएगा।

नोडल एजेंसियों को सेवा प्रभार

राज्य नोडल एजेंसियों नगर निगम/यूल एल बी/ अन्य कार्यान्वयक एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करेंगी और उन्हें इस कार्यक्रम के कार्यान्वयन में मार्गदर्शन तथा तकनीकी सहायता प्रदान करेंगी, जिसमें अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं/प्रणालियों के स्थापना, क्षमता सृजन, प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन भी शामिल है। वे समय समय पर समीक्षा, मानिटरन और आकलन करेगें। यदि, जहाँ को कार्यान्वित करने में असर्मथ है वहाँ राज्य नोडल एजेंसियों भी स्कीम को कार्यान्वित कर सकती है। राज्य नोडल एजेंसियों/कार्यान्वयन एजेंसियों को इन स्कीमों के प्रदान करने के बदले 2% सेवा शुल्क प्रदत्त किया जा सकता है।

सौर शहर की घोषणा

सौर शहरों का विकास एक दीर्घकालिक प्रक्रिया है। इसकी शूरूआत किसी शहर की पहचान करने, प्रस्ताव तैयार करने तथा सौर शहर के विकास हेतु मंजूरी प्रदान करने, मास्टर प्लान तैयार करने, सौर शहर सेल तथा स्टेकधारकों की समिति को अनुमोदन प्रदान करना, अनुमोदन हटो विशिष्ट प्रस्ताव तैयार करने और अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं/ऊर्जा दक्षता उपकरणों आदि की संस्थापना  से होती है। इसके लिए संबंधित पणधारियों का अभिप्रेरण और क्षमता-सृजन करने की आवश्यकता होती है। अत: किसी सौर शहर को स्वीकृति मिल जाने से ही इसे सौर शहर घोषित नहीं किया जा सकता। अत: “सौर शहर को विकसित करने” हेतु मंजूरी प्रदान की जाती है और शहर को “विकासशील सौर शहर” के रूप में माना जाएगा।

किसी विकासशील सौर शहर को ‘सौर शहर’ घोषित किया जा सकता है यदि उस शहर में पर्याप्त कार्यकलाप किए गए हों। सौर शहर के जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा खपत को 10% तक कम कराने के लक्ष्य को देखते हुए मंत्रालय द्वारा किसी “विकासशील सौर शहर” को पूर्ण रूप से “सौर शहर” घोषित करने संबंधी उपयुक्त शर्तों/मानदंडो को यथा समय तैयार किया जाएगा। तथापि “सौर शहर” के लिए संबंधित नगर निगमों/राज्य नोडल एजेंसियों द्वारा किए जाने वाले प्रतीकात्मक कार्य परिशिष्ट – 4 में दिए गए हैं।

परामर्शी सहायता का प्रावधान

कार्यक्रम के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करने, निगरानी, मूल्यांकन और कार्यान्वयन हेतु परियोजना प्रबंधन सेल में परामर्शी, तकनीकी, कंप्यूटर ऑपरेटर, हेल्पर तथा आवश्यक्तानूसार कुछ हार्डवेयर उपयोग में लाए जाएंगे। इससे कार्यकलापों का विस्तार करने, सख्त निगरानी करने तथा अनुवर्तन करने में आसानी होगी। इससे सौर शहरों के लिए तैयार किए जा रहे मास्टर प्लानों का विश्लेषण करना भी सुनिश्चित होगा।

परिशिष्ट – 1

एमएनआरई की निधियां प्राप्त करने के लिए एक सौर शहर हेतु आवश्यक शर्तें

i. शहर में एक सौर शहर सैल का सृजन हो गया है और पणधारी समिति गठित हो गई है। सौर शहर सैल के सृजन तथा पणधारी समिति हेतु अधिसूचना की एक प्रति भेजनी होगी।

ii. कुछ श्रेणी के भवनों में सौर का  जल तापन प्रणालियों के प्रयोग को अनिवार्य बनाने के लिए भवन उप-नियमों के संशोधन के लिए आरंभ की गई/की गई करवाई।

iii. नगर नियमों/पालिकाओं के माध्यम से सम्पति कर और विशेष कर घरेलू क्षेत्र में सौर जल तापकों के प्रयोग के लिए यूटिलिटिज/बिजली बोर्डों के माध्यम से बिजली शुल्क दर में छूट उपलब्ध कराने हेतु आरंभ की गई/की गई कार्यवाई।

iv. विशेषकर वाणिज्यिक और संस्थागत भवनों में ऊर्जा दक्ष हरित भवनों के विनिर्माण हेतु राष्ट्रीय रेटिंग प्रणाली को बढ़ावा देने हेतु आंरभ की गई। की गई कार्रवाई विशेष रूप से सरकारी/सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के भवनों में गृह जैसी अनुमोदित राष्ट्रीय रेटिंग प्रणाली के अनुपालन में हरित भवनों के निर्माण के संबंध में शहर ने सामान्य आदेश (जीओ) जारी किए हैं।

v. पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित एमएसडब्ल्यू नियमों के अनुसार शहर ने उचित एमएसबीडब्ल्यू प्रबंधन और शहरों/नगरों से एकत्रित अपशिष्ट से ऊजा के उत्पादन हेतु उपयुक्त क्षमता की परियोजनाएँ स्थापित करने के लिए कार्रवाई आरंभ/कर ली है।

vi. शहर ने उपनियम संशोधन करने हेतु कार्रवाई आरंभ की है/संशोधित कर दिए हैं अथवा वह बाजारों, सार्वजनिक स्थलों, स्कूलों कार्यालयों आदि में डीजल और पेट्रोजन जैनसेट के प्रयोग को रोकने के लिए अक्षय ऊर्जा विकल्पों को बढ़ावा देने हेतु नए उपनियम बनाता है।

vii. ऊर्जा संरक्षण और अक्षय युक्तियों का प्रयोग करके सड़क रोशनी/उद्यान रोशनियों, ट्रेफिक रोशनियों, ब्लिकरों, होर्डिंग आदि और स्कूलों, वाणिज्यिक भवनों, कार्यालयों, संस्थागत भवनों और अन्य प्रतिष्ठानों में बिजली की खपत को कम करने हेतु आंरभ की गई/कार्रवाई की गई
viii. नगर निगम/नगर पालिका/ राज्य नोडल एजेंसी द्वारा अपनी परिसर अथवा शहर के किसी प्रमुख स्थान पर मरम्मत एवं रख रखाव सुविधाओं के साथ कम से कम एक अक्षय ऊर्जा दुकान की संस्थापन की गई है।

ix. मास्टर प्लान तैयारी कर लिया गया है और अक्षय ऊर्जा की कम से कम 2 सर 3 प्रमुख परियोजनाएँ हैं/ मंजूर की गई हैं/आरंभ हो गई हैं।

परिशिष्ट – 2

सौर शहरों हेतु अक्षय ऊर्जा और ऊर्जा संरक्षण परियोजनाएँ/प्रणाली/उपकरण

सौर शहर द्वारा समिति और लोकप्रिय अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं/प्रणालियों/उपकरणों जैसे –समेकित प्रकाशवोल्टीय, किचन अपशिष्ट आधारित संयंत्र, सौर जल तापन प्रणालियों, सौर कूकिंग प्रणालियों, सौर भाप उत्पादन/शुष्कन/वायु तापन प्रणालियों, सौर कूकिंग प्रणालियों, सौर वाष्प उत्पादक/शुष्कन/वायु तापन प्रणालियों, प्रक्रिया ताप अनुप्रयोगों हेतु सौर संकेन्द्रक, सौर वातानुकूलन, पवन आदि सहित सौर पीवी प्रणालियों के निर्माण पर बल दिया जाएगा।

ऊर्जा संरक्षण/उपकरण/प्रणालियाँ

(i)  उद्दीप्त बल्बों के स्थान पर लैड/सीएफएल।

(ii)  लैड ट्रेफिक लाइटें।

(iii)  इलेक्ट्रोनिक चोक और पंखों के रेगुलेटर।

(iv)  सड़कों लाइटों की ऑटोमेटिक ऑन/ऑफ़ के लिए संवेदक।

(v)   ऑटोमेटिक स्पीड रेगुलेटिंग फैन/मोटर।

(vi)   जल आपूर्ति प्रणाली में लीकेज की प्लानिंग और अच्छे पंप और मीटरों का प्रयोग।

(vii)  ऊर्जा दक्ष बिजली की मशीनें जैसे फैन, रेफ्रीजरेटर, वातानुकूल यंत्र, कूलर, रूम हीटर, वाटर पंप आदि।

(viii)  इंसुलेटिंग सामग्रियों और कम ऊर्जादक्ष/ऊर्जा वाले भवन निर्माण सामग्रियों जैसे फलाई ऐश ब्रिक्स, होलो ब्रिक्स, स्टैबिलाइज्ड मद ब्लॉक आदि का भवन निर्माण में प्रयोग।

(ix)  ब्यूरो ऑफ़ एनर्जी एफिशिएंसी (बी ई ई) विद्युत मंत्रालय अथवा एमएनआरई द्वारा बढ़ावा दिया जा रह अन्य कोई ऊर्जा दक्ष/ऊर्जा संरक्षण उपकरण।

भवनों/आवासीय परिसरों में सौर निष्क्रिय (सोलर पैसिव) संरचना

सौर निष्क्रिय भवन संरचना का प्रमुख घटक हैं भवनों का अभिमुखीकरण, सूर्यच्छादन, कांच की दोहरी परत वाली खिड़कियाँ, स्मार्ट ग्लेजिंग खिड़की ओवर हेंग, तापीय भण्डारण दिवार/छत, रूफ पेंटिंग, वेंटीलेशन, वाष्पन कूलिंग, दिन में प्रकाश, पवन टावर, भू-वायु टनलिंग, निर्माण सामग्रियां आदि। विशिष्ट घटकों का संयोजन इस पर निर्भर करेगा कि भवन का निर्माण किस जलवायु क्षेत्र में किया जाता है।

हरित भवन

हरित भवनों का गृह (जीआरआईएचए) रेटिंग, लीड (एलईईडी) इंडिया, ईसीवीसी भवन कोड, पीईई स्टार रेटिंग, इको आवास अथवा अन्य श्रेणी निर्धारण (रेटिंग) प्रणालियों के अनुसार निर्माण करना।

परिशिष्ट – 3

नगर परिषद/प्रशासन द्वारा अपने शहर/ नगर को ‘सौर शहर’ के रूप में विकसित करने हेतु किया जाने वाला संकेतिक उपाय

  1. नगर प्रशासन/परिषद के अधीन एक सौर शहर सैल का निर्माण करना जो कि उसे एक सौर शहर बनाने में शहर नियोजन और परियोजनाओं का कार्यान्वयन करने के लिए पूर्ण रूप से उत्तरदायी होगा।
  2. शहर में नियमित अंतरालों पर सरकारी/सार्वजनिक क्षेत्र के भवनों, जल पंपिंग और सड़क रोशनियों की ऊर्जा लेखा परिक्षण करने और विद्युत के संरक्षण की ओर जरूरी कदम उठाना। इस हेतु अन्य संस्थापनाओं को भी प्रोत्साहित किया जाना है।
  3. ऊर्जा संरक्षण और अक्षय ऊर्जा उपकरणों का प्रयोग कर सड़क लाइट/उद्यान लाइटों, ट्रेफिक लाइटों, ब्लिंकारों, होर्डिंग आदि में ऊर्जा खपत को कम करना।
  4. भवनों के निश्चित वर्ग में सौर जल तापन प्रणालियों के प्रयोग को अनिवार्य बनाने हेतु भवन उप नियमों में संशोधन करना।
  5. सौर जल हीटरों के उपयोग कर्त्ताओं को विशेष रूप से घरेलू क्षेत्र के उपयोग कर्त्ताओं के नगर निगमों/महापलिकाओं के माध्यम से प्रापर्टी कर में और यूटिलिटों/बिजली बोर्डों के माध्यम से बिजली प्रशुल्क में छूट उपलब्ध कराना।
  6. ईसीवीसी 2006 के अनुसार कम से कम सरकारी/सार्वजनिक क्षेत्र में ऊर्जा दक्ष सौर भवनों के निर्माण के संबंध में जी.ओ. जारी करना और उसके कार्यन्वयन को गंभीरता से लेना।
  7. पर्यावरण और वन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित एमएसडब्ल्यू रूल 2000 कका अनुपालन करना और शहर/नगर से एकत्रित अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादित करने हेतु उपयुक्त क्षमता की परियोजनाएँ स्थापित करना।
  8. विभिन्न स्टेक होल्डरों जैसे वास्तुकार, इंजीनियरों, बिल्डरों और विकासकर्त्ताओं, वित्तीय संस्थाओं, गैर – सरकारी संगठनों, तक तकनीकी, संस्थाओं, निर्माण कर्त्ताओं/आपूर्तिकर्ताओं, आरडब्ल्यू आदि के लिए कड़ाई से प्रचार-प्रसार और साथ ही प्रशिक्षण कार्यक्रमों/व्यवसायिक बैठकों का आयोजन करना।
  9. किसी शहर को ‘सौर शहर’ के रूप में बनाने के उद्देश्य को प्राप्त करने हेतु राज्य सरकार और अन्य फंडिंग संगठनों से आवश्यक निधियां विकसित करना। उद्देश्यों को प्राप्त करने हेतु भारत सरकार की स्कीमों का लाभ भी शामिल किया जाएगा।

10.  नगर परिषद/प्रशासन द्वारा अपने शहर को सौर शहर के रूप में विकसित करने हेतु कार्यान्वयन के पांच वर्षों के दौरान असंख्य ऊर्जा और ऊर्जा संरक्षण उपकरणों के माध्यम से बिजली की खपत कम करने के निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करना।

परिशिष्ट – 4

सौर शहर के लिए निर्देशात्मक कार्य

i. शहर में एक सौर शहर सैल का सृजन हो गया है जिसे अधिसूचित किया गया है और  शहर प्रशासन/परिषद में पणधारी समिति गठित हो गई है। जो ‘सौर शहर’ बनाने की दिशा में शहर नियोजन और परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए पूर्ण रूप से उत्तरदायी होगी।

ii. सौर शहर का मास्टर प्लान तैयार किया गया है।

iii. नगर द्वारा कुछ श्रेणियों के भवनों में सौर जल तापन प्रणालियों के उपयोग को अनिवार्य बनाने के लिए भवन उप-नियमों में संशोधन किया गया है।

iv. शहर सौर जल हीटरों के उपयोगकर्त्ताओं को विशेष रूप से घरेलू क्षेत्र के उपयोगकर्त्ताओं के नगर निगमों/महापलिकाओं के माध्यम से प्रोपर्टी कर में और यूटिलिटी/बिजली बोर्डों के माध्यम से बिजली प्रशुल्क में छूट उपलब्ध करा रहा है।

v. संबंधित डिस्कोम/यूटिलिटी द्वारा शहर में ग्रिड-संबंद्ध एसपीवी रुफटाप प्रणालियों को अनुमति दी जा रही है/बढ़ावा दिया जा रहा है।

vi. शहर में नियमित अंतरालों पर सरकारी/सार्वजनिक क्षेत्र के भवनों, जल पंपिंग और सड़क रोशनियों की ऊर्जा लेखा परिक्षण करने और विद्युत के संरक्षण की ओर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं तथा विद्युत संरक्षण की दिशा में आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं।

vii. ऊर्जा संरक्षण और अक्षय ऊर्जा उपकरणों का प्रयोग कर सड़क लाइट/उद्यान लाइटों, ट्रेफिक लाइटों, ब्लिंकरों, होर्डिंग आदि में ऊर्जा खपत को कम करना।

viii. ईसीवीसी या अन्य रेटिंग प्रणाली के अनुसार कम से कम सरकारी/सार्वजनिक क्षेत्रों में ऊर्जा दक्ष सौर भवनों/हरित भवनों के निर्माण के संबंध में जी.ओ. जारी करना और उसके कार्यान्वयन को गंभीरता से लेना।

ix. पर्यावरण और वन मंत्रालय द्वारा अधीसूचित एमएसडब्ल्यू, नियम 2003 का अनुपालन किया जा रहा है और शहर/नगर से एकत्रित अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादित करने हेतु उपयुक्त क्षमता की परियोजनाएँ स्थापित की जा रही है।

x. नगर में ऊर्जा उत्पादन प्रणाली के साथ मलजल उपचार उपचार की सुविधा है।

xi. नगर में अक्षय ऊर्जा प्रणालियों एवं उपकरणों के लिए कम से कम या उससे अधिक अक्षय ऊर्जा दूकानें या विक्रय सेवा केंद्र हैं।

अनुलग्नक – 5

सौर शहर/प्रायोगिक शहर/आर्दश सौर शहर के लिए प्रस्ताव करने हेतु प्रपत्र

1. शहर की जानकारी

शहर का नाम

 

श्हर की जनसंख्या (2001 जनगणना)

 

अनुमानित वर्तमान जनसंख्या

 

क्षेत्र (वर्ग कि.मी.)

 

वार्डों की संख्या

 

क्षेत्रीय सैटिंग और कनेक्टिविटी (एयर, रेल और रोड़)

 

शहर का आर्थिक आधार

 

अन्य कोई सूचना

 

 

2. कार्यान्वयन एजेंसी/संगठन

स्थानीय निकाय का नाम

 

संगठन (कृपया बताएं) नगर निगम/नगर परिषद/ नगरपालिका

 

संपर्क व्यक्ति

 

ई-मेल सहित पूरा पता

 

दूरभाषा:

 

फैक्स:

 

ई-मेल पता और वेबसाइट:

 

 

 

3. शहर, नेतृत्व और प्रतिबद्धता

कृपया संक्षिप्त रूप में वर्णित करें, विस्तृत सूचना हेतु पृथक शीट संलग्न करें

ऊर्जा संरक्षण और अक्षय ऊर्जा उपकरणों को शामिल करने पर अन्य विनियामक उपाय

 

निजी क्षेत्र अन्य ऊर्जा सरंक्षण/ ऊर्जा में की की गई अनुकरणीय पहलें

 

स्थानीय/राज्य संस्थाओं (शैक्षिक अनुसंधान संस्थाओं), कार्पोरेट संगठनों, वास्तुकारों, एनजीओ ऊर्जा लेखा परीक्षकों, परामर्शदाताओं आदि जो कि पहल में योगदान कर सकते हैं

 

परियोजना में राजनीतिक प्रतिबद्धता

 

क्या नगर क्षेत्रों/कैम्पस द्वार प्रशासकों (राज्य/स्थानीय)संबंधित संगठनों/संस्थाओं, राजनीतिज्ञों, परामर्शदाताओं, यूटिलिटी, सूचना केन्द्रों आदि (विस्तार में सूचना उपलब्ध कराएँ) सहित एक स्थानीय विशेषज्ञ दल की स्थापना और उसकी सहायता की जा सकती है।

हाँ/नहीं

 

4. कार्यकलाप योजना और बजट

कृपया संक्षिप्त रूप में वर्णित करें, विस्तृत सूचना हेतु पृथक शीट संलग्न करें

स्कीम के प्रावधान के अनुरूप एमएनआरई से मांगी गई धनराशि

 

प्रस्ताव करने वाली एजेंसी द्वारा अंशदान की जाने वाली धनराशि।

 

निधियों के उपयोग हेतु कार्ययोजना

 

प्रस्ताव की मंजूरी के पश्चात् मंत्रालय को मास्टर प्लान की प्रस्तुती और उसकी तयारी में लगी समयावधि

 

कोई अन्य सूचना

 

 

रुचि की अभिव्यक्ति

........................................ की ओर से हम नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत

के सौर शहर कार्यक्रम में सम्मिलित होने की अपनी रुचि अभिव्यक्त करते हैं।

अनुलग्नक – 6

अक्षय ऊर्जा संस्थापनाओं ग्रीन कैम्पस विकास, जागरूकता सृजन और प्रशिक्षण हेतु कार्य योजना सहित मास्टर/प्लान/डीपीआर की तैयारी करने हेतु लघु नगर क्षेत्रों/कैम्पसों के लिए प्रस्ताव भेजने का प्रारूप

1. नगर क्षेत्र/कैंपस सूचना

नगर क्षेत्र/ कैंपस का नाम

 

नगर क्षेत्र/कैंपस की जनसंख्या

 

अनुमानित वर्तमान जनसंख्या

 

क्षेत्र (वर्ग कि.मी.)

 

वार्डों/कालोनियों/सेक्टर की संख्या

 

क्षेत्रीय सेटिंग और कनेक्टिविटी (एयर, रेल और सड़क)

 

नगर क्षेत्रों/ कैंपस का आर्थिक आधार

 

 

2. कार्यान्वयन एजेंसी/संगठन

स्थानीय निकाय का नाम

 

संगठन (कृपया बताएँ) नगर निगम/नगर परिषद/महापालिका/विकासकर्त्ता/बिल्डर/संस्था

 

संपर्क व्यक्ति

 

ई-मेल सहित पूरा पता

 

दूरभाष:

 

फैक्स:

 

ई-मेल पता और वेबासाइट :

 

 

 

3. नगर क्षेत्रों/कैंपस लीडरशिप और प्रतिबद्धता

 

ऊर्जा संरक्षण और अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने में नगर क्षेत्रों/कैंपस/परिषद/प्रशासन द्वारा पहले से की गई पहलों का विविरण

 

ऊर्जा संरक्षण और अक्षय ऊर्जा उपकरणों को शामिल करने पर अन्य विनियामक उपाय

 

निजी क्षेत्र द्वारा ऊजा संरक्षण/अक्षय ऊर्जा में की गई अनुकरणीय पहलें

 

स्थानीय/राज्य संस्थाओं (शैक्षिक अनुसंधान संस्थाओं), कार्पोरेट संगठनों, वास्तुकारों, एनजीओ ऊर्जा लेखा परीक्षकों, परामर्शदाताओं आदि जो कि पहल में योगदान कर सकते हैं।

 

परियोजना में राजनीतिक प्रतिबद्धता

 

क्या नगर क्षेत्रों/कैम्पस द्वारा प्रशासकों (राज्य/स्थानीय) संबंधित संगठनों/संस्थाओं, राजनीतिज्ञों, परामर्शदाताओं, यूटिलिटी, सूचना केन्द्रों आदि (विस्तार में सूचना उपलब्ध कराएँ) सहित एक स्थानीय विशेषज्ञ दल की स्थापना और उसकी सहायता की जा सकती है।

हाँ/नहीं

 

 

 

4. कार्यकलाप योजना और बजट

कृपया संक्षिप्त रूप में वर्णित करें, विस्तृत सूचना करें हेतु पृथिक शीट संलग्न करें

स्कीम के प्रावधान के अनुरूप एमएनआरई से मांगी गई धनराशि

 

प्रस्ताव करने वाली एंजेंसी द्वारा अंशदान की जाने वाली धनराशि।

 

प्रस्ताव की मंजूरी के पश्चात् मंत्रालय को मास्टर प्लान की प्रस्तुती और उसकी तैयारी में लगी समयावधि

 

कोई अन्य सूचना

 

 

रुचि की अभिव्यक्ति

………………………………………………….. की ओर से हम नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार के सौर शहर कार्यक्रम में सम्मिलित होने की अपनी रुचि अभीव्यक्त करते हैं।

 

कार्यालय मुहर के साथ हस्ताक्षर

(नगर परिषद/प्रशासन प्रमुख)

स्रोत :

3.04347826087

योगध्यान चक्र्वेर्ती Mar 31, 2017 09:43 AM

एक आम आदमी इससे कैसे लाभवंतीत हो सकता है।

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