सामग्री पर पहुँचे | Skip to navigation

होम (घर) / ऊर्जा / ग्रामीण नवाचार / सूक्ष्म उद्यमी
शेयर
Views
  • अवस्था संपादित करने के स्वीकृत

सूक्ष्म उद्यमी

यह खंड सूक्ष्म उद्यमों से संबंधित जमीनी स्तर पर किये जा रहे अनेक नवाचारों की जानकारी देता है।

पिसाई मशीन

आविष्कारक: विवेकानंदन, कोयंबतूर,तमिलनाडू।

Machine

नवाचार के लाभ

कोयंबतूर (तमिलनाडु) के रहने वाले श्री के. विवेकानंदन ने 8 लाख रुपये का निवेश कर मिर्चा व धनिया पीसने के लिए 3 एचपी के पिन-पल्वेराइज़र का निर्माण किया। श्री विवेकानंदन कहते हैं "जो ग्रामीण महिलाएँ अपनी पारिवारिक आय बढ़ाना चाहते हैं उनके लिए आय उत्पन्न करने के लिए यह एक आदर्श मशीन है"।

मिर्चा और धनिया पीसने वाले अधिकतर वर्त्तमान मशीनों को स्थापित करने में उच्च लागत आता है और उसमें बिजली की खपत भी अधिक होती है और इस कारण यह ग्रामीण क्षेत्रों में उपयुक्त नहीं होता क्योंकि वहाँ आप बिजली आपूर्ति पर भी निर्भर नहीं रह सकते।

चुनौतियों का मुकाबला

जब श्री विवेकानंदन ने मशीन विकसित किया तो उन्होंने सोचा कि वे पीसने से संबंधित 90 प्रतिशत समस्याओं को सुलझा लिया है और उसने करीब 100 मशीन बना लिया। लेकिन उन्हें उस वक्त बहुत आश्चर्य हुआ जब उसके मशीन का केवल 20 खरीदार ही मिला। कुछ खरीदारों ने मशीन वापस भी कर दिया क्योंकि मिर्ची और धनिया फिल्टर स्क्रीन से पास नहीं हो पा रहे थे और पीसते वक्त बहुत ही अधिक धूल पैदा करते थे। इससे उसका सारा कार्य रूक गया और एक वर्ष तक कुछ नहीं किया जा सका।

तभी विवेकानंदन को विल्ग्रो के बारे में पता चला। यह एक ऐसी संस्था है जो ग्रामीण उद्यमियों को सहायता प्रदान करती है। उन्होंने सलाह के लिए इस संस्था से संपर्क किया। विल्ग्रो के स्टाफ इस समस्या को दूर करने के लिए विभिन्न संसाधनों की तलाश करने लगे। तकनीकी विशेषज्ञों ने पहले विवेकानंदन को 1 एचपी, सिंगल फेज मशीन को विकसित करने में मदद किया क्योंकि मशीन प्रारंभ में 3 एचपी स्पीड पर नहीं चलाया जा सकता है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में वोल्टेज के उतार-चढ़ाव के कारण 1 एचपी, सिंगल फेज मशीन को प्राथमिकता दी जाती है।

काफी प्रयास के बाद उन्हें पता चला कि मिर्ची और धनिया स्क्रीन में इसलिए नहीं अटक जाते क्योंकि वे उच्च फाइबर सामग्री होते हैं बल्कि रोटर के स्पीड के कारण ऐसा हो रहा है। इस तरह मशीन का वजन कम कर दिया गया, इसके दीवाल की मोटाई, आकार और स्टेटर और रोटर के व्यास को बदल दिया गया ताकि ग्रामीण आवश्यकता को पूरा की जा सके।

लागत

श्री विवेकानंदन ने मशीन प्रयोग किये जाने वाले सामान के प्रकार और मात्रा को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण आवश्यकता के अनुसार इसका मूल्य कम कर दिया। प्रत्येक मशीन का मूल्य (मोटर सहित) 11500 रुपये रखा गया है।

ऊर्जा प्रभावी तेल पेराई मशान

श्री कल्पेश गज्जर, शहर - मेहसाना, राज्य - गुजरात

श्री कल्पेश गज्जर स्वास्तिक इण्टरप्राइजेज के प्रबन्ध निदेशक हैं। मैट्रिक उत्तीर्ण श्री गज्जर ने प्रयोग एवं अनुभव के द्वारा बहुत कुछ सीखा है। इन्हें गुजरात सरकार की ओर से साराभाई पुरस्कार भी प्रदान किया गया है।

स्वास्तिक तेल पेराई मशीन

  • यह अन्य तेल पेराई मशीन की तुलना में तीन गुना अधिक परिणाम देने वाला, उसकी तुलना में केवल 2/3 बिजली का उपभोग करने वाला (अर्थात् इसके प्रयोग से 1/3 बिजली की बचत हो सकती है) और मशीन का आकार पुराने मशीनों से आधा है।
  • यह 30 हॉर्स पावर की मोटर द्वारा चलाई जाती है तथा प्रतिदिन 18 मीट्रिक टन से 28 मीट्रिक टन तक तेल बीजों की पेराई कर देती है।
  • परम्परागत मशीनों के संचालन में 6 मजदूरों की की तुलना में इसके लिए मात्र 3 मजदूरों की जरूरत।
  • यह तेल पेराई मशीन कपास के बीज सहित सभी प्रकार के तैलीय बीजों की पेराई करने मे सक्षम है।
  • राष्ट्रीय तथा अन्तरराष्ट्रीय बाजारों में तेल पेराई की अन्य मशीनों की तुलना में इसकी कार्य क्षमता 3 गुना अधिक है।
  • अन्य मशीनों से यह तीन गुना कम क्षेत्रफल ग्रहण करती है।
  • इसकी देखभाल पर अन्य मशीनों की तुलना में कम खर्च। स्टील से निर्मित होने के कारण इसका जीवन काल भी अधिक होता है।
  • इस मशीन की लम्बाई 3055 मिली मीटर, चौड़ाई 1045 मिली मीटर और ऊँचाई 2145 मिली मीटर है।

बहु उद्देशीय इंधन संरक्षणकारी स्टोव

श्री एस. जे. जो, शहर- कालीकट, राज्य - केरल

56 वर्षीय श्री एस. जे. जोई को वायु शीतक, प्रशीतन व सौर उपकरण के साथ औद्योगिक मिस्त्री के रूप में कार्य करने का 32 वर्ष का अनुभव है।

बहु उपयोगी स्टोव

  • यह धुँआ एवं बाष्प रहित है।
  • उपयोग करते समय इसमें उर्जा की खपत काफी कम होती तथा इसमें एक लीटर किरोसिन से 14 घण्टे तक भोजन तैयार किया जा सकता है।
  • इस स्टोव को आवश्यकतानुसार एक, दो या बहु बर्नर वाला बनाया जा सकता है।
  • इसमें एक बर्नर, ब्यॉलर तथा वाटर रेगुलेटर होता है। खाना पकाते समये किनारे से निकलने वाली ऊर्जा को ब्यॉलर द्वारा सोख कर पानी गर्म किया जाता है। साथ ही, इससे निकली वाष्प का उपयोग इडली व केक बनाने में किया जा सकता है।
3.08510638298

सावंत सिंह Apr 06, 2017 01:19 PM

ठीक है

सावंत सिंह Apr 06, 2017 01:16 PM

ठीक है

surendra चौधरी Nov 18, 2015 08:57 PM

यह जानकारी बहुत शानदार है तथा जानकारियो का खजाना है

अपना सुझाव दें

(यदि दी गई विषय सामग्री पर आपके पास कोई सुझाव/टिप्पणी है तो कृपया उसे यहां लिखें ।)

Enter the word
Back to top