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राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति हब

इस पृष्ठ में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति हब की जानकारी दी गयी है I

प्रस्तावना

परत तीव्र विकास एवं समृद्धि के दौर से गुज़र रहा है। इसके सही मायनों में समावेशी होने के लिए समाज के सभी वर्गों को इस समृद्धि में भागीदार होना होगा। मज़दूरी, रोज़गार तथा शिक्षा के अलावा, समाज के उपेक्षित वर्गों द्वारा भी विकास की इस कहानी में एक बड़ी भूमिका निभाने के लिए उद्यमों की संकल्पना, सृजन एवं संवर्धन किए जाने की आवश्यकता है। पूर्व में, जबकि अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति के स्वामित्व वाले उद्यमों में कुछ वृद्धि हुई है, फिर भी, अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए इस संख्या में पर्याप्त वृद्धि करने की आवश्यकता है। इस संदर्भ में, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति हब, अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों के प्रति सहायक पारिस्थितिक तंत्र विकसित करने के लिए भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है। भारत सरकार एवं राज्य सरकारों ने उद्यमशीलता के विकास की सहायता के लिए अनेक योजनाएं आरंभ की हैं। अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों के लिए विशेष योजनाएं भी निर्धारित की गई हैं। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्तीय एवं विकास निगम, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्तीय एवं विकास निगम जैसे अनेक विशिष्ट संगठन समर्पित रूप से अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति के बीच उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रहे हैं, जिन्हें राज्य स्तर पर संगठनों द्वारा समुचित सहायता प्रदान की जाती है।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति हब अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों के प्रति सहायक पारिस्थितिक तंत्र विकसित करने के लिए भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है।

भारत के माननीय प्रधानमंत्री ने समाज के उपेक्षित वर्गों के बीच उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए सरकार के एक प्रमुख कार्यक्रम - ‘स्टैंडअप इंडिया' को आरंभ किया है। इस कार्यक्रम के तहत, बैंकों की सभी शाखाएं अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति वर्गों के कम से कम एक उद्यमी को अपनाएंगी तथा उसे ऋण प्रदान करेंगी। सार्वजनिक खरीद आदेश में अनुसूचित जाति–अनुसूचित जनजाति सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों से केंद्रीय मंत्रालयों तथा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों द्वारा कुल वार्षिक खरीद का 4 प्रतिशत का अधिदेश है जो 1 अप्रैल, 2015 से लागू है।

सूत्रों के अनुसार, इस समुदाय की कम भागीदारी होने के कारण अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों से सरकार द्वारा की गई वार्षिक खरीद एक प्रतिशत से भी कम है। अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति से खरीद लक्ष्य को पूरा करने के लिए इसे बढ़ाने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति हब अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों को प्रौद्योगिकीय उन्नयन एवं क्षमता विकास में सहायता प्रदान करेगा ताकि वे खरीद प्रक्रिया में प्रभावी तौर पर भाग ले सकें। इसमें सी.पी.एस.ई./केंद्रीय मंत्रालय, राज्य, डी.आई.सी.सी.आई. जैसे औद्योगिक संघों एवं अन्यों की भागीदारी शामिल होगी। यह हब ‘स्टैंडअप इंडिया' कार्यक्रम का लाभ उठाते हुए खरीद प्रक्रिया में भाग लेने के लिए नए उद्यमों का विकास करने के प्रति भी कार्य करेगा। चुनिंदा उद्यमियों को उद्योग विशेषज्ञों, सी.पी.एस.ई. तथा इन्क्यूबेटरों द्वारा सहायता एवं परामर्श प्रदान किया जाएगा।

आरंभ में, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति हब के लिए 2016-2020 की अवधि हेतु, 490 करोड़ रु. का आरंभिक आबंटन किया है। विभिन्न हितधारकों के साथ हुई चर्चाओं से मंत्रालय ने इस क्षेत्र में आरंभिक कार्य योजना तैयार की है। हालांकि, कार्यवाही हेतु एजेंडा लचीला है, तथा हितधारकों से प्राप्त सूचनाओं एवं अन्य ठोस आंकड़ों से यह आगे भी विकसित होगा, फिर भी, आरंभ में इसके द्वारा उन अंतरालों को दूर करने का प्रयास किया गया है जो उद्यमी परितंत्र के बहुसंचालकों के बीच स्थित हैं। यह कार्य योजना अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति वर्गों के लिए निर्धारित अवसरों एवं लाभों के प्रभावी सदुपयोग हेतु विभागों तथा सरकारी निकायों के बीच स्थित विभिन्न मौजूदा स्कीमों का उपयोग करने का एक प्रयास है। इस योजना में भी निजी क्षेत्र को उनकी आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए विचार किया गया है। अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति प्रवर्तित सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों) की भागीदारी में सुधार लाने तथा 4 प्रतिशत खरीद लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सुझाए गए व्यवधानों की प्रभावशीलता का आवधिक मॉनीटरिंग एवं मूल्यांकन कार्य योजना का एक अभिन्न अंग होगा।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति हब (एन.एस.एस.एच.) अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति उद्यमों को प्रौद्योगिकीय उन्नयन एवं क्षमता विकास में सहायता प्रदान करेगा ताकि वे खरीद प्रक्रिया में प्रभावी तौर पर भाग ले सकें।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी सार्वजनिक खरीद नीति, 2012 के अनुसार केवल सूक्ष्म एवं लघु उद्यम ही इस नीति के तहत शामिल हैं, अतः इन प्रयोजनों के लिए सूक्ष्म, लघु उद्यम शब्दों का प्रयोग किया गया है।

अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति हब की संरचना

यह हब इस प्रयोजन के लिए बनाए गए एक विशेष प्रकोष्ठ (सेल) की सहायता से दिल्ली में स्थित राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (एन.एस.आई.सी.) मुख्यालय से संचालित होगा। मौजूदा एवं अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों के पंजीकरण के लिए तथा उन्हें सार्वजनिक खरीद अभियान के संबंध में नवीनतम गतिविधियों से अवगत कराने के लिए एक वेबसाइट राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति हबआरंभ की गई है। ये उद्यमी केवल 100 रु. के मामूली भुगतान के साथ एन.एस.आई.सी. की एकल बिंदु पंजीकरण योजना पर भी पंजीकरण करा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए एक मोबाइल ऐप्लीकेशन भी विकसित की गई है। इस हब के सुगम संचालन के लिए विभिन्न समितियों की परिकल्पना की गई है, जो इस प्रकार हैं-

उच्चाधिकार प्राप्त मॉनीटरिंग समिति

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एम.एस.एम.ई.) मंत्री इस समिति के अध्यक्ष हैं। इस समिति के सदस्य राज्यों, विभिन्न मंत्रालयों, उद्योग संघों और अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों सहित विभिन्न हितधारकों के प्रतिनिधि हैं। मुख्य रूप से, यह समिति उच्चतम स्तर पर हब की समग्र गतिविधियों की निगरानी करेगी। इस समिति के अन्य मुख्य कार्य निम्नानुसार हैं-

  • अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमशीलता के प्रोत्साहन के लिए एक स्वरूप तैयार करना तथा इस कार्य नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के विकास के लिए हब को दिशा-निर्देश प्रदान करना।
  • अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति विक्रेता विकास के संबंध में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम/केंद्रीय मंत्रालय द्वारा किए गए कार्य की समीक्षा।
  • केंद्र सरकार में स्थित विभिन्न मंत्रालयों एवं संगठनों के तहत मौजूद अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमशीलता के विकास से संबंधित योजनाओं का पुनः मूल्यांकन और समन्वयन।
  • राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति हब द्वारा किए गए कार्य का अनुवीक्षण एवं मूल्यांकन।
  • अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति हब से संबंधित सभी मामलों के लिए एक ही स्थान पर निर्णय लेने वाली समिति के रूप में कार्य करना।

सलाहकार समिति

इस समिति के अध्यक्ष श्री मिलिंद कांबले, अध्यक्ष, भारतीय दलित वाणिज्य एवं उद्योग संघ (डी.आई.सी.सी.आई.) हैं। यह समिति सीधे उच्चाधिकार प्राप्त अनुवीक्षण समिति के अंतर्गत कार्य करती है। इससे हब को उद्योग तथा अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों का दृष्टिकोण प्राप्त होगा ताकि लक्षित समूह व सरकार के बीच प्रभावी एवं पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंध विकसित हो। यह आपूर्तिकर्ता (सप्लायर) विविधता को प्रोत्साहित करने के लिए निजी क्षेत्र में सकारात्मक कार्यवाही का प्रवर्तन करने में सहायक होगा।

सशक्त परियोजना अनुमोदन समिति

इस समिति के अध्यक्ष सचिव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय हैं। यह हब स्वाभाविक रूप से गतिशील है तथा एक परिकल्पित अवधि में विकसित होगा। अतः निर्धारित संकेंद्रण (फोकस) क्षेत्रों में परिवर्तनों अथवा महत्व प्राप्त क्षेत्रों में परिवर्तन के आधार पर, विभिन्न गतिविधियों के लिए निधियों की आवश्यकता में परिवर्तन होने की संभावना है। यह समिति अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों की बदलती हुई आवश्यकताओं को समायोजित करने के लिए आवश्यकता अनुरूप परिवर्तन सुनिश्चित करेगी।

नए अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों के पंजीकरण के लिए तथा उन्हें सरकारी खरीद अभियान के संबंध में नवीनतम घटनाओं से अवगत कराने के लिए वेबसाइट राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति हब आरंभ की गई है।

परिकल्पना को कार्यवाही में बदलना

कार्य एजेंडा

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति हब के निहित उद्देश्यों को पूरा करने के लिए एक बहुआयामी कार्यनीति अपनाई जा रही है। इसका उद्देश्य अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों के विकास में आने वाली बाधाओं को दूर करना है। अन्य पहलुओं के साथ-साथ, यह हब बाजार की उपलब्धता/संपर्को को सुदृढ़ करने, परामर्शन, क्षमता विकास, वित्तीय सहायता स्कीमों का लाभ प्राप्त करने और उद्योग की सर्वोत्तम पद्धतियों को साझा करने इत्यादि में सहायक होगा।

एम.एस.एम.ई.डाटा बैंक

हितधारकों, विशेषकर सी.पी.एस.ई. और केंद्रीय मंत्रालयों के साथ परामर्श से उभरे मुद्दों में से एक मुख्य मुद्दा अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों के बारे में सूचना का अभाव है। अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों का एक विश्वसनीय डाटा बेस अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति विक्रेताओं को विकसित करने एवं नीति तैयार करने के लिए एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है। अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एम.एस.एम.ई.) की कुशलता को बढ़ाने और उनकी भूमिका को सुदृढ़ करने के लिए पंजीकरण द्वारा तथा अन्य विश्वसनीय स्रोतों से डाटा का एकीकरण कर डाटा बैंक तैयार किया जा रहा है। अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों से सम्बन्धित सारी सूचना इस डाटा बेस पर केन्द्रिय रूप से उपलब्ध किये जाने से खरीद करने वाली एजेंसियों को अधिक सुलब्धता होगी।

ब्यौरे

  • एम.एस.एम.ई. विकास (सूचना प्रदान करना) नियमावली, 2016 में प्रत्येक उद्यम द्वारा एमएसएमई डाटा बैंक पर सूचना प्रदान करने का अधिदेश है। अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों को प्रोत्साहित किया जाएगा कि वे इस वेबसाइट पर अपने उद्यमों के संबंध में अपेक्षित सूचना उसके प्रभावी मिलान के लिए प्रदान करें। यह गतिविधि विशेष प्रकोष्ठ (सेल) की एक महत्वपूर्ण गतिविधि होगी।
  • उद्योग आधार ज्ञापन (यू.ए.एम.) तथा किसी अन्य सरकारी पंजीकरण/प्रमाणपत्र के धारक अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों के स्वामित्व वाले सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को एम.एस.एम.ई. डाटा बैंक पर पंजीकरण कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उन मौजूदा उद्यमों को भी इसमें शामिल किया जाएगा जिनके पास यू.ए.एम. नहीं हो।
  • उद्योग संघ/संघों तथा अन्य संगठन, जैसे डी.आई.सी.सी.आई. को भी इस डाटा बैंक में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों को शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। अंततः, इस डाटा बैंक द्वारा अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमी उन मंत्रालयों अथवा सी.पी.एस.ई./केंद्रीय मंत्रालयों के नाम इंगित कर सकेंगे जिनमें वे अपने उत्पादों अथवा सेवाओं की आपूर्ति करने में रुचि रखते हों।
  • यह एम.एस.एम.ई. डाटा बैंक केंद्रीय मंत्रालयों/सी.पी.एस.ई. के लिए भी उपलब्ध होगा ताकि वे अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्योगों तथा खरीद के लिए उपलब्ध उनके उत्पादों एवं सेवाओं के बारे में सूचना प्राप्त कर सकें।
  • यह डाटा बैंक सभी उद्यमी मानदंडों पर वास्तविक उपलब्धता के आधार पर डाटा प्रदान करेगा, जो क्रेता एवं विक्रेता दोनों के लिए सहायक होगा।
  • एम.एस.एम.ई. डाटा बैंक सी.पी.एस.ई./केंद्रीय मंत्रालयों/निजी क्षेत्र के लिए संभावित आपूर्तिकर्ता बनने हेतु उद्यमों की तैयारी का मूल्यांकन करने तथा उक्त आवश्यकता के अनुसार कार्यनीतिक कार्यवाही का स्वरूप तैयार करने के लिए भी प्रयोग में आएगा।

अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों का एक विश्वसनीय डाटा बेस अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति विक्रेताओं को विकसित करने और नीति तैयार करने के लिए एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है।

विक्रेता विकास कार्यक्रम

सी.पी.एस.ई./केंद्रीय मंत्रालयों को अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों के साथ विक्रेता विकास कार्यक्रम (वी.डी.पी.) आयोजित करने तथा उन्हें आपूर्ति श्रृंखला का भाग बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा। विक्रेता विकास बैठकों के माध्यम से सी.पी.एस.ई./केंद्रीय मंत्रालय संभावित अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति आपूर्तिकर्ताओं के साथ संपर्क स्थापित करेंगे तथा उनके बारे में सूचना एकत्र करेंगे। इसके पश्चात् सी.पी.एस.ई./केंद्रीय मंत्रालय इस प्रकार के अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों का मूल्यांकन करके उन्हें विक्रेता विकास कार्यक्रम के तहत अपनाएंगे।

ब्यौरे

  • प्रत्येक सी.पी.एस.ई./केंद्रीय मंत्रालय के खरीद विभाग में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति विक्रेताओं के लिए एक नोडल अधिकारी के साथ विशेष विक्रेता विकास प्रकोष्ठ (सेल) बनाया जाएगा।
  • प्रत्येक सी.पी.एस.ई. विक्रेता विकास बैठकों का आयोजन करेगा।
  • सी.पी.एस.ई./केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों की छानबीन उपयुक्त उत्पादों के निर्माण करने व सेवाएं प्रदान करने की उनकी क्षमता के आधार पर की जाएगी।
  • चयनित इकाईयों का सी.पी.एस.ई./केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा आगे और मूल्यांकन किया जाएगा, ताकि उन इकाईयों की पहचान हो सके जिन्हें सी.पी.एस.ई./केंद्रीय मंत्रालय अपने वी.डी.पी. का हिस्सा बना सकें।
  • अधिक विकसित होने की संभावना वाली चयनित इकाईयों को आगे और परामर्शन के लिए सी.पी.एस.ई./केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा अपनाया जाएगा।
  • सी.पी.एस.ई./केंद्रीय मंत्रालय 'स्टैंडअप इंडिया' और अन्य सरकारी कार्यक्रमों को मजबूती प्रदान करते हुए, विक्रेता विकास कार्यक्रम के भाग के तौर पर नए अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों को सहायता भी प्रदान करेंगे।
  • इन अपनाई गई इकाईयों को उनके विकास और संवृद्धि के लिए उद्योग संघों/परामर्शकों, ऋण/वित्तीय स्कीमों की उपलब्धता, प्रौद्योगिकी उन्नयन अथवा विस्तार के माध्यम से सहायता प्रदान की जाएगी।
  • सी.पी.एस.ई./केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा इकाई के लिए विस्तृत स्वरूप (रोड मैप) तैयार करने के अलावा डी.आई.सी.सी.आई. सहित उद्योग संघ भी इन इकाईयों के विकास के नियोजन में शामिल होंगे।
  • कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं, क्षमता विस्तार एवं प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए वित्तपोषण की सुलभता हेतु 'स्टैंडअप इंडिया स्कीम' तथा उद्यम वित्तपोषण स्कीमों को विक्रेता विकास कार्यक्रम के साथ जोड़ा जाना चाहिए।

एम.एस.एम.ई. परामर्श

परामर्श कार्यक्रम का उद्देश्य उन अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों का सशक्तिकरण करना है जो अपने कारोबार की आरंभिक अवस्था में हैं, ताकि वे अपने संपूर्ण कारोबारी सामर्थ्य को प्राप्त करने के लिए आमने-सामने बैठकर परामर्श द्वारा सफल उद्यमियों, अत्यधिक अनुभवी कार्यकारियों (एक्जीक्यूटिवों) एवं व्यावसायिकों द्वारा सीखें तथा मार्गदर्शन प्राप्त करें।

ब्यौरे

  • विक्रेता विकास कार्यक्रम के भाग के रूप में अपनाए गए अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों के लिए उद्योग विशेषज्ञों एवं कंपनी मालिकों जिन्होंने अपनी कंपनियों का स्वयं संचालन किया हो अथवा प्रबंधकीय पदों पर कार्य किया हो, उनका नामांकन परामर्शकों के तौर पर किया जाएगा।
  • अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों का हाथ पकड़ कर उनका लक्ष्य पूरा करवाने के लिए विशिष्ट उद्योग संघों एवं राज्य सरकारी संगठनों का सहयोग प्राप्त किया जाएगा।
  • उन उद्यमियों को सघन मार्ग निर्देशन व क्षमता विकास सहायता प्रदान की जाएगी जो मौजूदा रूप से सी.पी.एस.ई./केंद्रीय मंत्रालयों अथवा बड़े निजी उद्योग को उत्पाद एवं सेवाओं की आपूर्ति कर रहे हों तथा जिनकी कुल बिक्री (टर्नओवर) एक निश्चित संख्या से अधिक हो।
  • सरकारी संस्थानों में गठित विभिन्न प्रौद्योगिकी व्यापार इन्क्यूबेटरों में, प्रत्येक से, कम से कम दो नए अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों को शामिल करने का अनुरोध किया जाएगा।
  • अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों को सहायता प्रदान करने के लिए एक ऑनलाइन डिजिटल सलाहकार सहायक तंत्र आरंभ किया जाएगा। सभी सहायक सलाहकार सेवाएं इस तंत्र के माध्यम से प्रदान की जाएगी।

अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों को सहायता प्रदान करने के लिए एक ऑनलाइन डिजिटल सलाहकार सहायक तंत्र आरंभ किया जाएगा। सभी सहायक सलाहकार सेवाएं इस तंत्र के माध्यम से प्रदान की जाएंगी।

ऋण सुविधा केंद्र

एम.एस.एम.ई. इकाईयों की ऋण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक ऋण सुविधाकरण सहायक तंत्र विकसित किया गया है ताकि मौजूदा एवं संभावित अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों को उनके कारोबार में वृद्धि तथा विस्तार हेतु सहायता प्रदान की जाए।

ब्यौरे

  • एन.एस.आई.सी. के वित्तीय सुविधाकरण केंद्र में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों के लिए अलग से एक खिड़की होगी। जो उद्यमी ऋण प्राप्त करने के इच्छुक हों, वे वित्तीय सुविधाकरण केंद्र में अपना प्रस्ताव ऑनलाइन जमा करा सकते हैं।
  • वित्तीय सुविधाकरण केंद्र प्रस्ताव का पूर्व मूल्यांकन करेगा तथा उसे अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों द्वारा इंगित वित्तीय संस्थानों के समक्ष रखेगा। यह केंद्र अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों तथा वित्तीय संस्थानों को एक साथ लाएगा एवं ऋण-संबन्धि संपर्क स्थापित करने में उनकी सहायता करेगा।
  • अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की निष्पादन एवं ऋण पात्रता स्कीम के अंतर्गत कम से से कम शुल्क के साथ ऋण पात्रता (क्रेडिट रेटिंग) कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि बैंकों से ऋण प्राप्त करना सुविधाजनक हो।
  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की ऋण-संबद्ध पूंजी सहायता स्कीम (सी.एल.सी.एस.एस.) में चुनिंदा प्रौद्योगिकीय उन्नयन के लिए 1 करोड़ रु. तक के ऋण के लिए, 15 प्रतिशत पूंजीगत सहायता प्रदान करने का प्रावधान है। अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों के लिए इस स्कीम के तहत सहायता को बढ़ा दिया जाएगा।
  • नए अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों के विकास के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा वित्तीय सहायता हेतु अनेक स्कीमें हैं, जैसे स्टैंडअप इंडिया, पी.एम.ई.जी.पी., अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम की स्कीमें, उद्यम वित्त पोषण, ऋण गारंटी निधियां जैसे सी.जी.टी.एम.एस.ई. एवं अन्य वित्त सुविधाकरण केंद्र अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति आवेदकों को इन स्कीमों से लाभ प्राप्त करने में सहायता करेगा।

ऋण सुविधाकरण सहायक तंत्र विकसित किया गया है ताकि मौजूदा एवं संभावित अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों को उनके कारोबार में वृद्धि तथा विस्तार हेतु सहायता प्रदान की जाए।

अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति आपूर्तिकर्ता संघ

अनेक छोटे अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति आपूर्तिकर्ता सी.पी.एस.ई./केंद्रीय मंत्रालयों में आपूर्ति करने में कठिनाई महसूस करते हैं। इन आपूर्तिकारों को सी.पी.एस.ई./केंद्रीय मंत्रालयों की आपूर्ति श्रृंखला में शामिल करने हेतु, एन.एस.आई.सी., एन.ई.डी.एफ.आई., अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति विक्रय संगठनों एवं अन्यों में शामिल किया जाएगा ताकि अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति आपूर्तिकर्ताओं के संघ तैयार किए जा सकें।

ब्यौरे

  • अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति आपूर्तिकर्ताओं को एकत्र करने तथा विक्रय संघ तैयार करने के लिए राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति विकास संगठनों को सहायता प्रदान की जाएगी।
  • इस प्रकार के संघो से छोटे अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति आपूर्तिकर्ता सी.पी.एस.ई. तथा केंद्रीय मंत्रालयों की मध्यम एवं बड़ी निविदाओं में भाग ले सकेंगे।
  • एन.एस.आई.सी. संघ के निर्माण के लिए अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों को शिक्षित करने के लिए कार्यक्रम आयोजित करेगा तथा आवश्यकता होने पर संघ की भरपूर सहायता करेगा।

आपूर्तिकर्ता संघों से छोटे अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति आपूर्तिकर्ता सी.पी.एस.ई. तथा केंद्रीय मंत्रालयों की मध्यम एवं बड़ी निविदाओं में भाग ले सकेंगे।

प्रबंधन सूचना तंत्र (एम.आई.एस)

सी.पी.एस.ई./केंद्रीय मंत्रालयों के निष्पादन की तथा सार्वजनिक खरीद में पंजीकृत अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति विक्रेताओं की निगरानी हेतु एक प्रबंधन सूचना तंत्र (एम.आई.एस.) तैयार किया जाएगा, ताकि वे अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों से अपने वार्षिक खरीद के लक्ष्य को पूरा करें। एम.आई.एस. निगरानी रखने तथा मूल्यांकन करने का एक असरदार साधन होगा जिससे अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों को प्रदान की जाने वाली सहायता के लिए सूचनाएं प्राप्त होंगी।

ब्यौरे

  • आरंभ में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों से सी.पी.एस.ई./केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा हुई खरीद के परिणाम आवधिक रूप से वेबसाइट पर प्रकाशित किए जाएंगे। अंततः, इस प्रकार के परिणामों को वास्तविकता के आधार पर सी.पी.एस.ई./केंद्रीय मंत्रालयों के पोर्टल तथा संबंधित वेबसाइटों पर भी प्रकाशित किया जाएगा।
  • सी.पी.एस.ई./केंद्रीय मंत्रालयों से यह अनुरोध भी किया जाएगा कि वे अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों से खरीदी गई मदों की सूची, खरीद का हिस्सा, उद्यम का नाम, उद्यम का पता इत्यादि साझा करें। इसमें योजना स्तरीय तथा उद्यम स्तरीय ब्यौरे शामिल होंगे। सी.पी.एस.ई./केंद्रीय मंत्रालय पंजीकृत अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति विक्रेताओं से की गई खरीद के ब्यौरे भी प्रदान करेंगे।
  • एम.आई.एस. पोर्टल से प्राप्त डाटा विश्लेषण का प्रयोग क्षेत्रों के विकास एवं पहचान के लिए किया जाएगा ताकि अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों सार्वजनिक एवं निजी खरीद कार्यक्रमों का सुगमता से हिस्सा बनने का मार्गदर्शन प्रदान किया जाए।
  • एम.आई.एस. के माध्यम से सरकार अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों से सी.पी.एस.ई. तथा केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा खरीद में संवर्धन के लिए समुचित कार्यवाही कर सकेगी।

एम.आई.एस. के माध्यम से सरकार अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों से सी.पी.एस.ई. तथा केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा खरीद में संवर्धन के लिए समुचित कार्यवाही कर सकेगी।

पुरस्कार एवं अभिनंदन

अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों के बीच उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए पुरस्कार आरंभ किए जाएंगे तथा उद्यमियों के बीच प्रतिस्पर्धा का माहौल तैयार किया जाएगा। इससे उद्यमियों को बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलेगी तथा अन्य अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति उद्यम क्षेत्र में शामिल होने के लिए प्रेरित होंगे।

ब्यौरे

  • सर्वोत्तम अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमी पुरस्कार।
  • एम.एस.एम.ई. क्षेत्र में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों के विकास के लिए सर्वोत्तम सी.पी.एस.ई. पुरस्कार।
  • उद्यमशील उद्यमियों को प्रदान किए गए मार्गदर्शन, सहयोग एवं सुविधाओं के लिए सर्वोत्तम इन्क्यूबेटर पुरस्कार ।
  • अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमी विक्रेता विकास कार्यक्रम के लिए सर्वोत्तम सी.पी.एस.ई.।
  • अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों को ऋण सुविधाकरण में आसानी के लिए सर्वोत्तम वित्त सुविधाकरण केंद्र पुरस्कार ।
  • उद्यमियों को परामर्श देने में तथा एम.एस.एम.ई. डाटा बैंक तैयार करने में सहायता प्रदान करने के लिए योगदान हेतु सर्वोत्तम उद्योग संघ पुरस्कार ।
  • अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों के माध्यम से आपूर्ति विविधता के संवर्धन में योगदान के लिए निजी क्षेत्र कंपनी को सर्वोत्तम सकारात्मक कार्यवाही पुरस्कार।

विभिन्न पुरस्कार कार्यक्रमों से उद्यमियों को बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलेगी तथा अन्य अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति उद्यम क्षेत्र में शामिल होने के लिए प्रेरित होंगे।

विपणन (बिक्री) सहायता

एन.एस.आई.सी. तथा विकास आयुक्त, एम.एस.एम.ई. अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों के लिए विशेष विक्रेता सहायता की योजना क्रियान्वित करेंगे। इस योजना के तहत अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों को विभिन्न घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय समारोहों, व्यापार मेलों, क्रेता-विक्रेता बैठकों, संघों के निर्माण, सेमिनारों तथा अन्य संबंधित विक्रय गतिविधियों में भाग लेने के लिए सहायता प्रदान की जाएगी।

ब्यौरे

  • घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेलों तथा क्रेता-विक्रेता बैठकों में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति एम.एस.एम.ई. उद्यमों की भागीदारी के लिए सहायता प्रदान की जाएगी।
  • अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं से अवगत कराने के लिए जागरुकता अभियानों का आयोजन किया जाएगा।
  • राष्ट्रीय एवं वैश्विक सम्मेलनों में कारोबारी संपर्क स्थापित करने के लिए सहायता प्रदान की जाएगी।

इस योजना के तहत अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों को विभिन्न घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय समारोहों, व्यापार मेलों, क्रेता-विक्रेता बैठकों, संघों के निर्माण, सेमिनारों तथा अन्य संबंधित विक्रय गतिविधियों में भाग लेने के लिए सहायता प्रदान की जाएगी।

निजी सकारात्मक कार्य योजना

सकारात्मक कार्य योजना के माध्यम से विक्रेताओं के तौर पर अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों को शामिल करने के माध्यम से निजी क्षेत्र की कंपनियों को अपने आपूर्तिकर्ताओं के बीच विविधता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

ब्यौरे

  • अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों को उन निजी क्षेत्र उद्यमों के साथ संबद्ध किया जाएगा जिनके पास आपूर्तिकर्ता विविधता के लिए ठोस सकारात्मक कार्यवाही तथा सी.एस.आर. कार्यक्रम हो ।
  • आपूर्तिकर्ता विविधता में विस्तार किया जाएगा तथा अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों के लिए निजी विक्रय अवसर विकसित किए जाएंगे।
  • अनेक अग्रणी कॉर्पोरेटों ने उद्योग संगठनों द्वारा तैयार की गई आचरण संहिता पर हस्ताक्षर किए हैं, जैसे कर्मचारियों/आवेदकों/विक्रेताओं के संदर्भ में निष्पक्षता, सहायता एवं पारदर्शिता से संबंधित भारतीय उद्योग संघ (सी.आई.आई.)। यह आपूर्ति श्रृंखला में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को शामिल करने का समर्थन करता है।
  • सकारात्मक कार्यवाही के प्रति समर्पित निजी कंपनियों के साथ विक्रेता विकास बैठकें एवं कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी ताकि इन कारोबारों की आपूर्ति श्रृंखला में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों को शामिल किया जा सके।
  • उद्योग संघों के साथ नेटवर्किंग एवं समन्वयन तथा संचार एवं व्यापार के लिए समुचित संपर्क स्थापित किया जाएगा।
  • बड़ी निजी क्षेत्र कंपनियों को मानक आपूर्तिकर्ता विविधता कार्यक्रम क्रियांवित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों को उन निजी क्षेत्र उद्यमों के साथ संबद्ध किया जाएगा, जिनके पास आपूर्तिकर्ता विविधता के लिए ठोस सकारात्मक कार्यवाही तथा सी.एस.आर. कार्यक्रम हो।

क्षमता विकास

अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों को बड़े बाज़ार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रौद्योगिकीय उन्नयन, क्षमता बढ़ाने तथा बेहतर ऋण उपलब्धता की आवश्यकता है। जबकि इस प्रकार के सहयोग के लिए इन आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु अनेक सरकारी योजनाएं मौजूद हैं फिर भी रिक्तियां पाटने के लिए इस केंद्र के माध्यम से अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों को अतिरिक्त सहायता प्रदान की जाएगी। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से कौशल विकास एवं उन्नयन किया जाएगा।

ब्यौरे

  • अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर सेमिनार / विचार गोष्ठियां/कार्यशालाएं आयोजित करने के लिए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय वित्तीय सहायता प्रायोजित/प्रदान करेगा। इस प्रकार की गतिविधियां उद्योग संघ द्वारा समर्थन हेतु और क्षमता विकास एवं डाटा बेस को मजबूत करने के लिए इस योजना का अनिवार्य हिस्सा हैं।
  • उद्यमों के गठन तथा उनके संचालन में, वित्तीय संपर्को को विकसित करने में एवं प्रस्ताव तैयार करने के संबंध में जानकारी प्रदान करने के माध्यम से उदीयमान उद्यमियों की क्षमता विकास करने के लिए कार्यक्रम चलाए जाएंगे। मंजूरी के उपरांत, भरपूर हैंड-होल्डिंग सहयोग प्रदान करने के अलावा भारत सरकार की ‘स्टैंडअप इंडिया' पहल के संबंध में जागरुकता उत्पन्न करने का कार्यक्रम भी चलाया जाएगा।
  • कर निर्धारण, मानव संसाधन, वित्तीय प्रबंधन नवयुग विपणन (ऑनलाइन बी2बी सेवा, ई-टेंडरिंग) जैसे विषयों में स्व-अध्ययन/क्षमता विकास (मानक ई-लर्निग मॉड्यूल-लघु अवधि के पाठ्यक्रम) के लिए विषय-वस्तु विकसित करना। इस प्रकार के पाठ्यक्रमों के लिए अनुदान के रूप में सुविधा दी जाएगी।
  • चुनिंदा उद्यमों को पोषित किया जाएगा तथा उन्हें अवसंरचना, ऋण, प्रौद्योगिकी और विक्रय सहयोग की सुविधा प्रदान करने के माध्यम से गति प्रदान की जाएगी।
  • प्रतिक्रियात्मक क्षमता विकास में परामर्श के लिए पूर्व-बैंकर, उद्योग विशेषज्ञ, उद्योग संघ और अन्य निकाय शामिल होंगे।
  • अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों को प्रौद्योगिकीय उन्नयन, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास, गुणवत्ता सुधार के लिए सहयोग तथा क्षमता विकास करने हेतु औद्योगिकी केंद्रों के नेटवर्क का प्रयोग किया जाएगा ताकि उन्हें आपूर्ति/मूल्य श्रृंखला में ऊपर किया जाए तथा वैश्विक सर्वोत्तम पद्धतियां विकसित की जाएं।
  • क्षमता विकास की सहायता के लिए कार्यक्रम इन्क्यूबेशन केंद्रों, शैक्षिक संस्थानों, निजी संगठनों तथा शोध एवं विकास संस्थानों के सहयोग से आयोजित किए जाएंगे।
  • राष्ट्रीय विनिर्माण प्रतिस्पर्धा कार्यक्रम (एन.एम.सी.पी.) का प्रयोग अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों के लिए प्रौद्योगिकी उन्नयन हेतु किया जाएगा।

अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर सेमिनार / विचार गोष्ठियां/कार्यशालाएं आयोजित करने के लिए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय वित्तीय सहायता प्रायोजित/प्रदान करेगा।

राज्य सरकारों के साथ सहयोग

राज्य सरकारें अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों को सहयोग प्रदान करने के लिए विभिन्न योजनाओं का संचालन करती हैं। इनमें उच्चतर पूंजीगत सहायता, औद्योगिक शेडों का आबंटन, प्रशिक्षण, मार्जिन राशि सहायता, विक्रय सहयोग इत्यादि शामिल हैं। यह हब अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों के क्षमता विकास हेतु, राज्य व केन्द्र सरकार दोनों की योजनाओं का लाभ उठाने के लिए, राज्यों के साथ काम करेगा। राज्य सरकारों के पास जिला स्तर पर बड़ा प्रशासनिक तंत्र होता है, जिसका सहयोग ‘हैंड-होल्डिंग' सहायता प्रदान करने, परामर्श तथा विनियामक अनुपालनों के सुविधाकरण के लिए महत्वपूर्ण है।

ब्यौरे

  • अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों के विकास के लिए निर्दिष्ट राज्य स्तरीय नीतिगत प्रावधानों का प्रयोग उद्यमशीलता विकास के लिए किया जाएगा।
  • अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों को राज्य स्तरीय योजनाओं, समूहों तथा स्थानीय सहायता केंद्रों के साथ संबद्ध किया जाएगा।
  • राज्य सरकार, राज्य स्तरीय संस्थानों तथा अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों के बीच नेटवर्किंग स्थापित की जाएगी। इसके अतिरिक्त अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमियों के लिए स्थानीय एवं सामुदायिक सहायता को राज्य स्तरीय पहलों के साथ संस्थापित किया जाएगा।

यह हब अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति उद्यमों के लिए। क्षमता विकास करने में तथा केंद्रीय एवं राज्य की योजनाओं को इसमें शामिल करने के लिए उनका सहयोग मांगने हेतु राज्यों के साथ मिलकर काम करेगा।

 

स्रोत: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति हब

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