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अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन अधिनियम, 2015

इस भाग में अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन अधिनियम, 2015 की जानकारी दी गई है।

परिचय

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन अधिनियम, 2015 अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के खिलाफ अत्याचार की रोकथाम के लिए और अधिक कठोर प्रावधानों को सुनिश्चित करनाहै। यह अधिनियम प्रधान अधिनियम में एक संशोधन है और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) (पीओए) अधिनियम,1989 के साथ संशोधन प्रभावों के साथ लागू किया गया है।

प्रमुख विशेषताएं

अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन अधिनियम, 2015 की कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैः-

अपराधों की विस्तृत सीमा
अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के विरुद्ध किए जाने वाले नए अपराधों में अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लोगों के सिर और मूंछ की बालों का मुंडन कराने और इसी तरह अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लोगों के सम्मान के विरुद्ध किए गए कृत हैं। अत्याचारों में समुदाय के लोगों को जूते की माला पहनाना,उन्हें सिंचाई सुविधाओं तक जाने से रोकना या वन अधिकारों से वंचित करने रखना, मानव और पशु नरकंकाल को निपटाने और लाने-ले जाने के लिए तथा बाध्य करना, कब्र खोदने के लिए बाध्य करना, सिर पर मैला ढोने की प्रथा का उपयोग और अनुमति देना,अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की महिलाओं को देवदासी के रूप में समर्पित करना ,जाति सूचक गाली देना,जादू-टोना अत्याचार को बढ़ावा देना, सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार करना , चुनाव लड़ने में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकना, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की महिलाओं को वस्त्र हरण कर आहत करना,अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के किसी सदस्य को घर,गांव और आवास छोड़ने के लिए बाध्य करना,अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के पूजनीय वस्तुओं को विरुपित करना, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के सदस्य के विरुद्ध यौन दुर्व्यवहार करना, यौन दुर्व्यवहार भाव से उन्हें छूना और भाषा का उपयोग करना है ।
आहत करना और धमकाना
अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के सदस्य को आहत करने,उन्हें दुखद रूप से आहत करने, धमकाने और उपहरण करने जैसे अपराधों को,जिनमें 10 वर्ष के कम की सजा का प्रावधान है, उन्हें अत्याचार निवारण अधिनियम में अपराध के रूप में शामिल करना। अभी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों पर किए गए अत्याचार मामलों में 10 वर्ष और उससे अधिक की सजा वाले अपराधों को ही अपराध माना जाता है ।
मामलों का तेजी से निपटान
मामलों को तेजी से निपटाने के लिए अत्याचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत आने वाले अपराधों में विशेष रूप से मुकदमा चलाने के लिए विशेष अदालतें बनाना और विशेष लोक अभियोजक को निर्दिष्ट करना।
प्रत्यक्ष संज्ञान लेने की शक्ति
विशेष अदालतों को अपराध का प्रत्यक्ष संज्ञान लेने की शक्ति प्रदान करना और जहां तक संभव हो आरोप पत्र दाखिल करने की तिथि से दो महीने के अंदर सुनवाई पूरी करना ।
अतिरिक्त अध्याय
पीड़ितों तथा गवाहों के अधिकारों पर अतिरिक्त अध्याय शामिल करना आदि।
जानबूझकर कर की गई ढिलाई की स्पष्ट परिभाषा
शिकायत दर्ज होने से लेकर एवं अधिनियम के अंतर्गत कार्य की उपेक्षा के आयामों को लेते हुए हर स्तर के सरकारी कर्मचारियों के लिए 'जानबूझकर कर की गई ढिलाई' पद की स्पष्ट परिभाषा तय करना।
अपराध की अन्य प्रकल्पनाएं
अपराधों में प्रकल्पनाओं का शामिल किया जाना—यदि अभियुक्त पीड़ित या उसके परिवार से परिचित है, तो जब तक इसके विपरीत सिद्ध न किया जाए अदालतें यह मानेंगी कि अभियुक्त पीड़ित की जाति अथवा जनजातीय पहचान के बारे में जानता था।

यह क़ानून क्या करता है?

इस कानून की तीन विशेषताएँ हैं :

  • यह अनुसूचित जातियों और जनजातियों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ़ अपराधों को दंडित करता है।

  • यह पीड़ितों को विशेष सुरक्षा और अधिकार देता है।

  • यह अदालतों को स्थापित करता है, जिससे मामले तेज़ी से निपट सकें।

इस क़ानून के तहत किस प्रकार के अपराध दण्डित किये गए हैं ?

  • कुछ ऐसे अपराध जो भारतीय दंड संहिता में शामिल हैं, उनके लिए इस कानून में अधिक सज़ा निर्धारित की गयी है ।

  • अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों के विरुद्ध होने वाले क्रूर और अपमानजनक अपराध, जैसे उन्हें जबरन अखाद्य पदार्थ (मल, मूत्र इत्यादि) खिलाना या उनका सामाजिक बहिष्कार करना, को इस क़ानून के तहत अपराध माना गया है I इस अधिनियम में ऐसे २० से अधिक कृत्य अपराध की श्रेणी में शामिल किए गए हैं ।

अत्याचार क्या है?

  • धारा ३ में कृत्यों की एक लम्बी सूची दी गयी हैl अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के खिलाफ़ यदि कोई व्यक्ति इनमें से कोई भी कृत्य करता है, तो इस क़ानून के अंतर्गत वह एक अत्याचार माना गया है और उसे दण्डित भी किया गया है ।

  • अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को जबरन अखाद्य या घृणास्पद पदार्थ (जैसे गोबर) खिलाना या पिलाना एक अपराध है ।

  • अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के घर/निवास स्थल पर या घर के द्वार पर, घृणास्पद पदार्थ (जैसे मृत जानवरों के शव या मल, मूत्र) डाल/छोड़ देना, एक अपराध है । यदि उस बस्ती में जिसमें अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के सदस्य रहते है, ऐसे पदार्थ, उन्हें अपमानित करने या उन्हें परेशान करने की मंशा से फेंके जाएँ, तो यह भी एक अपराध है ।

  • अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को जूतों या चप्पलों की माला पहना कर या फ़िर नग्न अथवा अर्ध-नग्न अवस्था में बस्ती में घुमाया जाना अपराध है ।

  • अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य से ऐसे कार्य करवाना जो उनकी गरिमा के विरुद्ध हो, अपराध है, जैसे –

  • बलपूर्वक कपड़े उतरवाना,

  • सर के बाल या मूँछ मुंड़वाना,

  • चेहरे पर कालिख़ पोतना।

  • अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य की ज़मीन (जिस पर उसका मालिकाना अधिकार हो या जो उसके द्वारा नियंत्रित हो या जो उसे आवंटित की गयी हो), पर अवैध कब्ज़ा करना अपराध है । ऐसा क़ब्ज़ा अवैध माना जाएगा जो कि-

  • वह पीड़ित की सहमति लिए बिना किया गया हो,

  • पीड़ित या पीड़ित से सम्बंधित किसी व्यक्ति को डरा-धमका कर किया गया हो,

  • झूठे दस्तावेज़ बना कर किया गया हो।

  • इसी तरह, अनुसूचित जाति व जनजाति के सदस्यों को उनकी संपत्ति से गैर-क़ानूनी तरीके से वंचित करना या उनके भूमि अधिकारों का हनन करना भी एक अपराध है । इसमें निम्न अपराध शामिल हैं:

  • अनुसूचित जाति व जनजाति के किसी सदस्य के तहत दिए गए वन अधिकारों का हनन करना,

  • जल स्रोत या सिंचाई के स्त्रोतों से वंचित करना,

  • फसल नष्ट करना या फसल पर कब्ज़ा कर लेना।

  • अनुसूचित जाति / जनजाति के किसी सदस्य से बँधुआ मज़दूरी करवाना भी एक अपराध है; पर यदि सरकार किसी प्रकार की लोक सेवा अनिवार्य कर देती है, तो उस परिस्थिति में यह अपराध नहीं माना जाएगा ।

  • अनुसूचित जाति /अनुसूचित जनजाति के सदस्यों से मानव अथवा पशुओं के शवों को उठवाना और उनका अंतिम संस्कार करवाना , अपराध है ।

  • अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के सदस्यों से मैनुअल स्कैवेंजिंग (यानि हाथ से मल साफ़ करवाना अथवा सर पर मलबा ढुलवाना) करवाना या उन्हें इस हेतु नौकरी पर रखना, अपराध है ।

  • देवदासी प्रथा को बढ़ावा देना भी एक अपराध है ।

  • अनुसूचित जाति व जनजाति के सदस्य के मतदान के अधिकार में हस्तक्षेप करना इस क़ानून के तहत अपराध है, विशेष रूप से :

  • अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को किसी निश्चित तरीके से वोट करने के लिए मजबूर करना अपराध है ।

  • अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के सदस्य को चुनाव में खड़े होने से रोकना अपराध है ।

  • अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को, उम्मीदवार प्रस्तावित करने और किसी अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के नामांकित उम्मीदवार का समर्थन करने से रोकना, अपराध है ।

  • अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के ऐसे सदस्य जो पंचायत/नगर पालिका के प्रतिनिधि हैं, उनके कार्य में हस्तक्षेप करना अपराध है l उनको डरा या धमका-कर काम में अवरोध पैदा करना वर्जित है ।

  • अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को चोट पहुँचाना या उसका बहिष्कार करना अपराध है।

  • यदि आप किसी अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के सदस्य के खिलाफ़ इसलिए अपराध करते हैं क्योंकि उसने किसी निश्चित तरीके से मतदान किया है, तो इस क़ानून के तहत यह दंडित किया गया है।

  • अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के सदस्य के खिलाफ़ झूठा केस/मुकदमा दर्ज़ करना अपराध है ।

  • किसी सरकारी अधिकारी /लोक सेवक को झूठी जानकारी देना अपराध है यदि इस कारणवश उस कर्मचारी द्वारा किसी अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के सदस्य का उत्पीड़न किया जाता है।

  • किसी सार्वजनिक स्थल पर अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के सदस्य का अभिप्राय- पूर्वक/ जान-बूझ कर अपमान करना व उसे शर्मिंदा करना अपराध है ।

  • किसी सार्वजनिक स्थल पर अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के सदस्य को अपमानजनक, जातिसूचक शब्दों से संबोधित करना अपराध है ।

  • किसी भी ऐसी वस्तु को हानि पहुँचाना जो अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के सदस्य के लिए महत्वपूर्ण है जैसे कि डॉक्टर अम्बेडकर की मूर्ति अथवा तस्वीर ।

  • अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदायों के प्रति नफ़रत को बढ़ावा देने वाले विचार व्यक्त करना या प्रकाशित करना अपराध है ।

  • किसी ऐसे स्वर्गीय व्यक्ति विशेष के बारे में अपमानजनक शब्द कहना या लिखना जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिए महत्त्वपूर्ण हों ।

  • अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की महिला सदस्य को उसकी इच्छा के विरुद्ध छूना अपराध है । अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की महिला का यौन उत्पीड़न करना भी इस क़ानून के तहत अपराध है। यदि ऐसा अपराध घटित होता है तो पीड़ित महिला का पूर्व चरित्र व आचरण किसी भी तरह से आरोपियों के विरुद्ध मुक़दमे के परिणाम को प्रभावित नहीं करेगा ।

  • अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्यों द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले जलाशय या जल स्त्रोतों को गंदा करना या अनुपयोगी बना देना अपराध है ।

  • अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को सार्वजनिक स्थानों पर जाने से रोकना अपराध है ।

  • अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को अपना निवास स्थान छोड़ने पर मज़बूर करना अपराध है, सिवाय तब जब वह क़ानूनी रूप से किया जाए ।

  • नीचे दिए गए कृत्य भी अपराध की श्रेणी में आते हैं-

  • अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को किसी भी सार्वजनिक स्थल या संसाधन जैसे जलाशय, नल, कुएँ , श्मशान इत्यादि, का उपयोग करने से रोकना।

  • अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को घोड़े या वाहन की सवारी करने से अथवा जुलूस निकालने से रोकना।

  • अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति के सदस्यों का ऐसे धार्मिक स्थल और धार्मिक समारोह में प्रवेश वर्जित करना जो जन साधारण के लिए खुले हों।

  • किसी सार्वजनिक क्षेत्र जैसे कोई स्कूल, अस्पताल या सिनेमा घर में अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के सदस्यों का प्रवेश वर्जित करना ।

  • नौकरी या व्यापार करने से अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति के सदस्य को रोकना ।

  • किसी अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के सदस्य पर टोनही/डायन होने का आरोप लगाना और उन्हें शारीरिक या मानसिक रूप से कष्ट पहुँचाना अपराध है ।

  • आर्थिक व सामाजिक बहिष्कार करना अथवा ऐसा करने करने की धमकी देना अपराध है ।

इस अधिनियम के तहत ज़ुर्माने के साथ, कम से कम ६ महीने या अधिकतम ५ साल तक की सज़ा देने का प्रावधान है । इसके अलावा इस कानून के तहत किसी अनुसूचित जाति /अनुसूचित जनजाति के सदस्य को सज़ा नहीं दी जा सकती ।

आश्रित कौन है ?

यह क़ानून सरकार को पीड़ित और उस पर आश्रित व्यक्तियों की सहायता करने के निर्देश देता है। पीड़ित के परिवार के वे सदस्य है जो उस पर निर्भर हैं, इस क़ानून में आश्रित की श्रेणी में आते हैं।

आर्थिक बहिष्कार किसे कहते हैं ?

यदि कोई व्यक्ति किसी अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के सदस्य से व्यापार करने से इनकार करता है तो इसे आर्थिक बहिष्कार कहा जाएगा ।

निम्न गतिविधियाँ आर्थिक बहिष्कार की श्रेणी में आएँगी:

  • किसी अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति के सदस्य के साथ काम करने या उसे काम पर रखने/नौकरी देने से इनकार करना।

  • अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के सदस्य को सेवा न प्रदान करना अथवा उन्हें सेवा प्रदान करने न देना।

  • सामान्यतः व्यापार जैसे किया जाता है उस तरीके में बदलाव लाना क्योंकि अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति का सदस्य इसमें शामिल है।

  • स्त्रोत: न्याय

संबंधित संसाधन

3.0202020202

MUKESH CHAND Feb 13, 2019 10:40 AM

मैं खुद को एक असहाय और निकृष्ट व्यक्ति महसूस करता हूँ। समाज में हमारा कोई वजूद ही नहीं है। क्योंकि मैं क्षुद्र हूँ।

Rama Shankar Sharma Feb 11, 2019 12:12 PM

यदि अधिकारी अत्याचार करे। जैसे राज्य सरकार का कर्मचारी, अधिकारी राज्य सरकार के आदेशाXुसार कार्य करेगा या केन्द्र सरकार की बात करके जाति प्रXाणपत्र बनाने से इनकारने वाले अधिकारी पर दण्डित करनेवाला कानून से दण्डित करे सरकार।

प्रताप सिंह गोदरे शोधार्थी समाजशास्त्र Dec 29, 2018 07:23 PM

भारत सरकार द्वारा प्रदत्त नियम, जो की अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों को प्राप्त हो रहे है, इन नियमों को और प्रसारित व प्रचारित करके, इन समुदायों को जागरूक करने की आवश्यकता है, क्योंकि इनमें शिक्षा के प्रति जागरूकता पर विकास अभी भी बाकी है साथ ही इन समुदायों की भी जिX्XेXारी बनती है कि वे उच्च शिक्षा अर्जित कर इन नियमों की जानकारी हासिल कर तथा समाज की मुख्य धारा से जुड़ने का प्रयास करें।

Birendra kumar Dec 08, 2018 10:52 AM

Sir Ji mere pita lekhpal the naukari ke Dauran bimari ke Karan Mratu Ho gai mughe abhi tak naukari mili

vivek Nov 26, 2018 03:51 PM

If this content should be available in pdf format. Please make it possible. Thank you

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