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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न- बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम (एमएसडीपी)

इस पृष्ठ में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न- बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम (एमएसडीपी) की जानकारी है I

एमएसडीपी क्या है और इसका लक्ष्य क्या है?

उत्तर- एमएसडीपी का अर्थ है बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम। यह एक केन्ट्रीय प्रायोजित योजना है जो पहचाने गए अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक अवसंरचना सृजित करते हुए और अल्पसंख्यक के जीवन की गुणवत्ता में उत्थान के लिए बुनियादी सुविधाएं प्रदान करते हुए विकास की कमियों को पूरा करने के लिए तैयार की गई है।

एमएसडीपी का कवरेज क्षेत्र क्या है?

उत्तर- एमएसडीपी की शुरुआत 20 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को कवर करते हुए 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान 2008-09 में 90 अल्पसंख्यक बहुल जिलों (एमसीडी) में की गई थी। अल्पसंख्यक बहुल जिलों (एमसीडी) की पहचान 2001 की जनगणना रिपोर्ट के आधार पर पर्याप्त अल्पसंख्यक आबादी और धर्म-विशिष्ट सामाजिक-आर्थिक सूचकों तथा बुनियादी सुविधाएं सूचकों के अनुसार की गई थी। 2013-14 में एमएसडीपी की पुनर्सरचना के बाद अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों पर और तेजी से ध्यान देने के लिए योजना का यूनिट क्षेत्र जिले की बजाए ब्लॉक/नगर कर दिया गया है। 12वीं योजना में कार्यान्वयन के लिए इस कार्यक्रम में अब 710 ब्लॉकों, 66 नगरों और 8 गांवों के समूह की पहचान की गई है।

एमएसडीपी का उद्देश्य क्या है?

उत्तर- इस कार्यक्रम का उद्देश्य 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए बुनियादी सुविधाओं के सामाजिक-आर्थिक मानदंडों में सुधार करना और पहचाने गए अल्पसंख्यक बहुल जिलों में असंतुलन को कम करना है। इस योजना का उद्देश्य अतिरिक्त संसाधन मुहैया कराते हुए भारत सरकार की मौजूदा योजनाओं के अंतराल को दूर करना तथा अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए नॉन गैप फिलिंग परियोजनाएं (नवाचारी परियोजनाएं) शुरू करना है।

एमएसडीपी के अधीन लाभार्थी कौन हैं?

उत्तर- राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम , 1992 की धारा 2(ग) के अधीन पहचाने गए अल्पसंख्यक एमएसडीपी के अधीन लाभार्थी हैं। यह हैं मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, बौद्ध, पारसी और जैन।

गैर-अल्पसंख्यकों को कवरेज

एमएसडीपी के अधीन गैर-अल्पसंख्यकों को कैसे कवर किया जाता है?

उत्तर - 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान, एमएसडीपी के कार्यान्वयन का यूनिट क्षेत्र अल्पसंख्यक बहुल जिला था। अल्पसंख्यक बहुल जिलों की पर्याप्त अल्पसंख्यक आबादी और विशिष्ट पिछड़ापन मानदंडों के आधार पर पहचान की गई है। जिले के भीतर भी परियोजनाओं के लिए प्राथमिकता गांवों/कालोनियों को दी जाती है जिनमें काफी अल्पसंख्यक आबादी है। चूंकि यह समुदाय परिसंपत्तियां हैं, अतः अल्पसंख्यक समुदाय के अलावा अन्य समुदायों को भी लाभ होता है। इंदिरा आवास योजना जैसी वैयक्तिक लाभार्थी उन्मुख योजना के संबंध में अल्पसंख्यक बहुल गांवों में गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के लिए स्वीकृति प्रदान की जाती है। जिनमें गैरअल्पसंख्यक भी शामिल होते हैं ताकि अन्य समुदायों के समान रूप से पात्र बीपीएल परिवारों में भेदभाव का भावना न उत्पन्न हो।

एमएसडीपी के कार्यान्वयन का यूनिट क्षेत्र क्या है?

उत्तर - 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान , एमएसडीपी सामाजिक-आर्थिक और बुनियादी सुविधाएं मानदंडों के आधार पर चुने गए 90 अल्पसंख्यक बहुल जिलों में कार्यान्वित किया गया था। इस कार्यक्रम को और अधिक कारगर तथा लक्षित अल्पसंख्यकों पर और जयादा फोकस करने के लिए 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान इसकी पुनर्संरचना की गई है। पुनर्सरचित एमएसडीपी में योजना का यूनिट क्षेत्र जिले से बदलकर ब्लॉक/नगर कर दिया गया है ताकि अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों पर और अधिक फोकस किया जा सके। इस कार्यक्रम में 12वीं योजना के दौरान कार्यान्वयन के लिए 710 ब्लॉकों और 66 नगरों की पहचान की है। विस्तृत सूचना http://www.minorityaffairs.gov.in/msdp एचआर मार्गनिर्देशों में उपलब्ध है।

आबादी का मापदंड

आबादी का वह कौन-सा मापदंड है जिस पर अल्पसंख्यक बहुल ब्लॉकों/नगरों की पहचान की गई है?

उत्तर- क) अल्पसंख्यक बहुल ब्लॉकों की पहचान-

11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान पिछड़ेपन के अंगीकृत मानदण्डों के आधार पर चुने गये पिछड़े जिलों में आने वाली न्यूनतम 25% अल्पसंख्यक आबादी वाले ब्लाकों की पिछड़े अल्पसंख्यक बहुल ब्लाकों (एमसीबी) के रूप में पहचान की गई है। 6 राज्यों के मामले में, जहाँ अल्पसंख्यक समुदाय बहुसंख्यक है, उस राज्य/संघ राज्य क्षेत्र में अल्पसंख्यक समुदाय के अतििरक्त बहुसंख्यर्को की अल्पसंख्यक जनसंख्या का न्यूनतम कटआफ 15% अंगीकार किया गया है। चुने गए ब्लॉकों में गांव स्तर की अवसंरचना/ परिसंपत्तियों के सूजन के लिए उच्च अल्पसंख्यक आबादी वाले गांवों को प्राथमिकता दी जाएगी।

ख) अल्पसंख्यक बहुल नगरों की पहचान-

ऐसे नगर/शहर जिनकी न्यूनतम 25% आबादी अल्पसंख्यक है (6 राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों के मामले में, उस राज्य/संघ राज्य क्षेत्र में बहुसंख्यक में अल्पसंख्यक समुदाय के अतिरिक्त, अल्पसंख्यक जनसंख्या का 15%), और जिनमें सामाजिक आर्थिक और मूलभूत सुविधाओं दोनों के मानदण्ड राष्ट्रीय औसत से नीचे हैं , को कार्यक्रम के कार्यान्वयन हेतु अल्पसंख्यक बहुल नगरों/शहरों के रूप में पहचाना गया है।

ग) एमसीबी के बाहर अल्पसंख्यक बहुल गांवों के कलस्टर की पहचान-

पिछड़े जिलों के ब्लॉकों में जिन्हें अल्पसंख्यक बहुल ब्लाकों के रूप में चयनित नहीं गया है, उनसे सटे अल्पसंख्यक बहुल गांवों, जिनमें कम से कम 50% अल्पसंख्यक आबादी है (जिन राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों अल्पसंख्यक समुदाय बहुसंख्या में है वहां 25%), के कलस्टर की पहचान की जाएगी।

मानदंड क्या हैं

मानदंड क्या हैं जिन पर अल्पसंख्यक बहुल जिलों की पहचान की गई है?

उत्तरः पिछड़े जिलों/नगरों की पहचान के लिए अपनाए गए पिछड़ेपन के मापदंड निम्नलिखित हैं-

(क) धर्म-विशिष्ट सामाजिक-आर्थिक सूचक-

(i) साक्षरता  दर;

(ii) महिला साक्षरता दर;

(iii) कार्य में भागीदारी दर; और

(iv) महिलाओं दवारा कार्य में भागीदारी दर; और

(ख) बुनियादी सुविधा सूचक-

(i) पक्की ठोवार वाले मकानों का प्रतिशत;

(ii) स्वच्छ पेयजन वाले मकानों का प्रतिशत;

(iii) विद्युत सुविधा वाले मकानों का प्रतिशत,

अल्पसंख्यक बहुल ब्लॉकों/नगरों की पहचान

अल्पसंख्यक बहुल ब्लॉकों/नगरों की पहचान के लिए 6 राज्यों के संबंध में अलग प्रतिशतता मापदंड क्यों अपनाया गया है?

उत्तर- 2001 की जनगणना में यह सूचित किया गया है कि लक्षदवीप, पंजाब, नागालैंड, मेघालय, मिजोरम और जम्मू एवं कश्मीर राज्य में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 की धारा 2(ग) में सूचीबद्ध एक समुदाय बहुसंख्या में है। ऐसे मामले में इन राज्यों में बहुसंख्यक समुदाय को छोड़कर अल्पसंख्यक समुदायों पर एमएसडीपी के अधीन विचार किया जाता है। इन राज्यों में अल्पसंख्यक बहुल ब्लॉकों/नगरों (एमसीबी/एमसीटी) की पहचान के लिए आबादी का कटऑफ 25% के बजाए कम करके 15% कर दिया गया है।

यह कैसे सुनिश्चित किया जाता है कि अधिकतम लाभ अल्पसंख्यकों को ही होते हैं?

उत्तर- एमएसडीपी को और अधिक कारगर बनाने और लक्षितत अल्पसंख्यकों पर और अधिक ध्यान केन्द्रित करने के लिए इसकी पुनर्सरचना की गई है। अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों पर और तेजी से ध्यान केन्द्रित करने के लिए इसकी योजना का यूनिट क्षेत्र जिले से बदलकर ब्लॉक/नगर कर दिया गया है। कार्यक्रम ने 12वीं योजना के दौरान कार्यान्वयन के लिए अब 710 ब्लॉकों एवं 66 नगरों की पहचान की है।

इसके अतिरिक्त एमएसडीपी के अधीन राज्य सरकारों को सलाह दी जाती है कि वह अल्पसंख्यक आबादी की सर्वाधिक प्रतिशतता वाले ब्लॉकों/नगरों में इस योजना के अधीन परिसंपित्तयों का पता लगाएं और अधिकार प्राप्त समिति की बैठकों के कार्यवृत्त में भी इसका और इंटर कॉलेजों के लिए सुनिश्चित किया जाता है कि निधियां जारी करने से पहले उस स्थान एवं क्षेत्र में अल्पसंख्यक आबादी का संस्थान दवारा पता लगा लिया जाए। एमएसडीपी योजना में संकल्पना है कि सामाजिक-आर्थिक अवसंरचना स्थापित करने के लिए प्राथमिकता पर्याप्त अल्पसंख्यक आबाटी वाले गांवों/कालोनियों/ब्लॉकों को टी जाएगी।

चुने हुए प्रतिनिधि

कृपया उल्लेख करें कि क्या चुने हुए प्रतिनिधि जिला और राज्य समितियों में शामिल किए जाते हैं?

उत्तर: एमएसडीपी के लिए जिला और राज्य स्तरीय समितियों में पंचायती राज संस्थानों के प्रतिनिधि, संसद सदस्य, विधानसभा के सदस्य और अल्पसंख्यकों से संबंधित प्रतिष्ठित संस्थानों  के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। इन समितियों का उत्तरदायित्व जिला योजना तैयार करना और जिले में शुरू की जाने वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता देना है।

ब्लॉक स्तरीय फैसिलिटेटर(बीएलएफ) क्या है?

उत्तरः कोई बीएलएफ संविदा आधार पर नियोजित वह व्यक्ति होता है जो अल्पसंख्यक समुदायों और सरकारी कार्यक्रमों के बीच सेतु का काम करता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कार्यक्रम के लाभ उन तक सही ढंग से पहुंच सकें। वह ब्लॉक स्तरीय समिति को योजना प्रस्ताव की छानबीन के लिए आवश्यक सहायता लेता है , कार्यक्रमों के लिए प्रगति रिपोर्ट और अनन्य अपेक्षित रिपोर्ट तैयार करता है और ब्लॉक स्तर पर सामाजिक लेखा-परीक्षा समिति को जरूरी सहायता प्रदान करता है।

ब्लॉक स्तरीय समिति (बीएलसी) की संरचना क्या है?

उत्तर- ब्लॉक स्तरीय समिति (बीएलसी) संरचना निम्नलिखित अनुसार है-

(i) पंचायती राज का ब्लॉक स्तरीय मुखिया अध्यक्ष

(ii) खंड विकास अधिकारी सह-अध्यक्ष

(iii) ब्लॉक स्तरीय शिक्षा अधिकारी सदस्य

(iv) ब्लॉक स्तरीय स्वास्थ्य अधिकारी सदस्य

(v) आईसीडीएस का ब्लॉक स्तरीय अधिकारी सदस्य

(vi) ब्लॉक स्तरीय कल्याण अधिकारी सदस्य

(vii) स्थानीय लोड बॅक अधिकारी सदस्य

(viii) प्रधानाचार्य, आईटीआई, यदि कोई हो सदस्य

(ix) अल्पसंख्यकों के लिए कार्य करने वाले विख्यात जिला मजिस्ट्रेट दवारा एनजीओ/सिविल सोसाईटी के तीन प्रतिनिधि नामित सदस्य

जिला स्तरीय समिति (डीएलसी) की संरचना क्या है?

उत्तर- जिला स्तरीय समिति (बीएलसी) में कलैक्टर/उपायुक्त , पंचायती राज संस्थानों/स्वायत जिला परिषदों के प्रतिनिधि और  अल्पसंख्यकों से संबंधित प्रतिष्ठित संस्थानों के तीन प्रतिनिधि शामिल होते हैं। जिले का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी संसद सदस्य और सभी विधानसभा सदस्य शामिल किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाला राज्य सभा से एक संसद सदस्य केन्द्र सरकार दवारा नामित किया जाएगा।

राज्य स्तरीय समिति (एसएलसी) की संरचना क्या है?

उत्तर- राज्य स्तरीय समिति (एसएलसी) में सचिव और योजना को कार्यान्वित करने वाले विभागों के प्रमुख, पंचायती राज संस्थानों/स्वायत जिला परिषदों के प्रतिनिधि , अल्पसंख्यकों से संबंधित प्रतिष्ठित गैर-सरकारी संस्थानों के तीन प्रतिनिधि और तीन ऐसे सदस्य शामिल होते हैं जो राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन दवारा उपयुक्त समझे जाएं। राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले लोकसभा से दो संसद सदस्य और राज्य सभा से एक संसद सदस्य को केन्द्र सरकार दवारा नामित किया जाता है और विधानसभा से दो सदस्य राज्य सरकार दवारा नामित किए जाते हैं।

अधिकार-प्राप्त समिति की संरचना क्या है?

उत्तर- अधिकार-प्राप्त समिति में निम्नलिखित शामिल होते हैं:-

(i) सचिव, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय-अध्यक्ष

(ii) सचिव, व्यय अथवा उसका प्रतिनिधि जो संयुक्त सचिव के रैंक से नीचे का न हो-सदस्य

(iii) प्रस्तावित परियोजना क्षेत्र का कार्य देख रहे संबंधित मंत्रालय/विभाग का सचिव अथवा उसका प्रतिनिधि जो संयुक्त सचिव के रैंक से नीचे का न हो-सदस्य

(iv) प्रस्तावित परियोजना क्षेत्र का कार्य देख रहे तकनीकी स्कंध/एजेंसी/प्राधिकरण के मुख्य इंजीनियर अथवा सापेक्ष रैंक का उसका प्रतिनिधि-सदस्य

(v) वित्त सलाहकार, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय-सदस्य

(vi) सचिव, भारतीय समाज विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली-सदस्य

(vii) बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम के प्रभारी संयुक्त सचिव/संयुक्त सचिव गण-एक संयुक्त सचिव संयोजक सदस्य

एमएसडीपी की क्या प्रगति

11वीं पंचवर्षोंय योजना और 12वीं पंचवर्षोंय योजना के दौरान एमएसडीपी की क्या प्रगति है ?

उत्तर- 11वीं पंचवर्षीय योजना और 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान प्रत्येक राज्य/संघ राज्य क्षेत्र की वित्तीय प्रगति और वास्तविक प्रगति http://www.minorityaffairs.gov.in/reports, उपलब्ध है।

मानीटरिंग एवं मूल्यांकन

एमएसडीपी के अधीन मानीटरिंग एवं मूल्यांकन तंत्र की व्याख्या करें?

उत्तर- प्रधानमंत्री के नए 15 सूत्री कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए गठित राज्य स्तरीय समितियां और जिला स्तरीय समितियां एमएसडीपी के कार्यान्वयन की प्रगति की मानीटरिग करने के लिए राज्य और जिला स्तरों पर निरीक्षण समितियां हैं। इसके अतिरिक्त राज्य सरकारें/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन एमएसडीपी के कार्यान्वयन पर परियोजना-वार तिमाही प्रगति रिपोर्ट इस मंत्रालय को भेजते हैं।

केंद्रीय  स्तर पर एमएसडीपी के कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा करने के लिए 3 स्तरीय मानीटरिंग तंत्र है| सचिव, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की अध्यक्षता में केंद्र में अधिकार प्राप्त समिति एमएसडीपी के कार्यान्वयन की प्रगति की तिमाही आधार पर मानीटरिंग करने के लिए निरीक्षण समिति के रूप में काम करती है। प्रधानमंत्री के नए 15 सूत्री कार्यक्रम के साथ एमएसडीपी के अधीन प्रगति की सचिवों की समिति दवारा अर्धवार्षिक आधार पर भी समीक्षा की जाती है। सचिवों की समिति टिप्पणियों की केन्द्रीय मंत्रिमंडल दवारा छमाही आधार पर समीक्षा की जाती है। इस कार्यक्रम के कार्यान्वयन की प्रगति की मानीटरिंग इस मंत्रालय दवारा राज्य /संघ राज्य  क्षेत्रों के साथ नियमित बैठकों के साथ-साथ अधिकारियों के दौरों  की जरिए भी की जाती है। कार्यक्रम की निगरानी और मूल्यांकन में समुदाय को शामिल करना सुनिश्चित करने के लिए समुदाय से प्रमुख सदस्यों को शामिल करते हुए ब्लॉक में कार्य को मानीटर करने के लिए प्रत्येक ब्लॉक में एक सामाजिक लेखा-परीक्षा समिति गठित की जाती है।

एमएसडीपी के अधीन पारदर्शिता और सूचना के प्रसार

एमएसडीपी के अधीन पारदर्शिता और सूचना के प्रसार को सुनिश्चित करने के लिए क्या उपाय किए गए हैं?

राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्रे को निम्नलिखित सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है -

(i) सभी अनुमोदित योजनाओं/परियोजनाओं को स्थानीय समाचार पर्चे के माध्यम से व्यापक रूप से प्रचारित एवं प्रसारित किया जाएगा तथा संबंधित वेबसाइट पर भी डाला जाएगा।

(ii) परियोजना को स्वीकृति प्राप्त होने के तुरंत बाद ही राज्य सरकार परियोजना स्थल पर एक बोर्ड लगाएगी, जिस पर परियोजना स्वीकृति की तिथि, पूरा होने की संभावित तिथि, अनुमानित परियोजना लागत, वित्त पोशण का स्रोत अर्थात्र बहु-क्षेत्रीय विकास योजना (भारत सरकार), ठेकेदारों के नाम और वास्तविक लक्ष्य का उल्लेख किया जाएगा। परियोजना समाप्ति के बाद एक स्थायी बोर्ड लगाया जाएगा।

(iii) राज्य सरकार मीडिया-प्रिंट/इलैक्ट्रानिक के जरिए सूचना का प्रसार करेगी और इसे मौजूदा वेबसाइटों पर भी डालेगी।

 

स्रोत: अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय

2.91780821918

अकरम Jun 23, 2017 01:05 PM

मेरा नाम अकरम मै विकास खंड मुज़X्XरXाX मैं फैसिलिटेटर हु

Mohd Aakil Jun 15, 2017 01:43 PM

Kafi vistar se jankari Di h Jo ki minority k logo k liye faydemand h thanks Iske fund ki rahi or kharch karne wali mado k bare m bhi bata dete

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