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नई मंजिल योजना

इस पृष्ठ में अल्पसंख्यक समुदायों के लिए एक एकीकृत शिक्षा एवं आजीविका पहल-नई मंजिल योजना की जानकारी दी गयी है ।

भूमिका

वर्ष  2001 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, भारत की 1,028 मिलियन आबादी का 20%  से थोड़ा ज्यादा हिस्सा अल्पसंख्यकों का है। उनमें से मुस्लिमों का हिस्सा सबसे बड़े अल्पसंख्यक 13.4%  इसके पश्चात्  ईसाई 2.3%, सिक्ख 1.9%, बौद्ध 0.8%, जैन 0.4 प्रतिशत और बहुत थोड़ी संख्या में पारसी है। अल्पसंख्यकों की स्कूल ड्रॉपआउट दर बहुत उच्च है जो प्राथमिक स्तरों(राष्ट्रीय 2% के मुकाबले)14% तथा माध्यमिक स्तर पर (राष्ट्रीय 3%   के मुकाबले)18% बनती है। अल्पसंख्यकों की कार्य बल सहभागिता दर भी राष्ट्रीय औसत (54% के राष्ट्रीय औसत के मुकाबले 44%) से निम्नतर है जो समुदाय में रोजगारपरकता कौशलों  के अभाव को दर्शाता  है। अल्पसंख्यक समुदाय के लिए सरकार की मौजूदा योजनाएं अल्पसंख्यक आबादी के लिए शिक्षा हेतु छात्रवृत्तियों तथा कौशल एवं नेतृत्व विकास के सीमित क्रियाकलापों की व्यवस्था करती हैं। ईडीसीआईएल (इंण्डिया) लिमिटेड, मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा किए गए 2013 के सर्वेक्षण के अनुसार, मुस्लिमों में स्कूल ड्रॉपआउट दरें देश की उच्चतम दरों में से एक है तथा ये ड्रॉपआउट ज्यादातर प्राथमिक स्तर पर होता है। भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति संबंधी सच्चर समिति की रिपोर्ट (2005) भी विभिन्न कारणों जैसे कि गरीबी, शिक्षा  से प्रतिफल की न्यून संभावना, स्कूलों तक कम पहुंच आदि के कारण मुस्लिमों में कम शिक्षा  परिणामों का उल्लेख करती है। इसलिए, ऐसा कोई कार्यक्रम बनाया जाना महत्वपूर्ण है जो शिक्षा  तक पहुंच सुनिश्चित करे जिससे नौकरियों के अर्थों में प्रत्यक्ष प्रतिफल प्राप्त हो। तद्‌नुसार शिक्षा  और कौशल विकास की समेकित योजना के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदाय के समग्र विकास की तैयारी की गई है जिसका उद्देश्य  शिक्षा  प्राप्ति और अल्पसंख्यकों की रोजगारपरकता की कमी को दूर करना है।

योजना का उद्देश्य

नई मंज़िल का उद्देश्य  गरीब अल्पसंख्यक युवाओं को रचनात्मक तौर पर नियोजित करना और उन्हें सतत एवं लाभकारी रोजगार के अवसर प्राप्त करने में मदद करना है जिससे कि वे मुख्य धारा के आर्थिक क्रियाकलापों के साथ जुड़ सके। अगले 5 वर्षों  में परियोजना के विशिष्ट  उद्देश्य  निम्नलिखित हैं-

  1. अल्पसंख्यक समुदायों के उन युवाओं, जो स्कूल ड्रॉपआउट्‌स है, को जुटाना और उन्हें राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय संस्थान (एनआईओएस) अथवा अन्य राज्य मुक्त विद्यालय प्रणाली के माध्यम से कक्षा 8 अथवा 10 तक की औपचारिक शिक्षा  उपलब्ध कराना और प्रमाण-पत्र देना है।
  2. कार्यक्रम के भाग के रूप में, युवाओं को बाजार प्रेरित कौशलों  में एकीकृत कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराना।
  3. कम से कम 70% प्रशिक्षित  युवाओं को नौकरी में प्लेसमेंट उपलब्ध कराना जिससे कि वे मूलभूत न्यूनतम मजदूरी प्राप्त कर सके और उन्हें अन्य सामाजिक सुरक्षा हकदारियां जैसे कि भविष्य  निधियां, कर्मचारी राज्य बीमा(ईएसआई) आदि मुहैया कराना।
  4. स्वास्थ्य एवं जीवन कौशलों  के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सुग्राहीकरण करना।

दृष्टिकोण

परियोजना का कार्यान्वयन दृष्टिकोण  निम्नानुसार है –

  1. वर्तमान परियोजना प्रायोगिक है और इसमें कई क्रियाकलाप शामिल होंगे जो भारत के अल्पसंख्यक समुदायों के लिए शिक्षा  और कौशल प्रशिक्षण हेतु कार्यनीतियां सीखने में सरकार को सक्षम बनाएंगे। इससे प्रत्येक परिवार आदि की आर्थिक और सामाजिक पृष्ठभूमि का विशलेषण करते हुए एक आधारिक मूल्यांकन होगा।
  2. इसे देशभर में चरणबद्ध ढंग से क्रियान्वित किया जाना है। अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र मुख्य भौगोलिक लक्ष्य होंगे।
  3. इस प्रयोजनार्थ पंजीकृत कम्पनी/फर्म/ट्रस्ट/सोसायटी और/अथवा सरकारी कार्यक्रम कार्यान्वयनकर्ता एजेंसियों (पीआईए) को नियुक्त किया जाएगा।
  4. परियोजना द्वारा प्रत्येक स्तर पर अल्पसंख्यकों की शिक्षा  के परिणामों और रोजगारपरकता के अर्थों में समानता लाने के लिए उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए नवाचार को प्रोत्साहित किया जाएगा।
  5. परियोजना मंत्रालय के संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय में स्थित परियोजना प्रबंधक द्वारा कार्यान्वित की जाएगी। योजना के विभिन्न संघटकों की देख-रेख के लिए उनके साथ बाजार से हायर किए गए विशेषज्ञों  की एक टीम होगी।

योजना की कार्यनीति

जुटाव

गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के 17-35 वर्षों  के आयु समूह वाले अल्पसंख्यक युवा, जो स्कूल ड्रॉपआउट्‌स है, योजना के अधीन मुख्य लक्षित आबादी हैं। उनकी संस्कृति के अनुकूल विभिन्न कार्यनीतियों के माध्यम से उन्हें प्रेरित किया जाएगा। मंत्रालय द्वारा बृहत स्तर पर तथा पीआईए द्वारा परियोजना क्षेत्रों में लघु स्तर पर समर्थन/सूचना, शिक्षा एवं संप्रेषण(आईईसी) तथा जागरूकता उत्पन्न करने वाले कार्यक्रम तैयार एवं क्रियान्वित किए जाएंगे। अल्पसंख्यक महिलाओं की नेतृत्व क्षमता विकास के लिए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की नई रोशनी  योजना के अंतर्गत प्रशिक्षित  महिलाओं को भी इस योजना के लिए प्रेरकों के रूप में लगाया जाएगा। इसी प्रकार, स्व सहायता समूहों (एसएचजी) सरीखी सामुदायिक स्तर की संरचनाओं का भी युवाओं की लामबंदी के लिए उपयोग किया जा सकता है। इस योजना के अंतर्गत, लाभार्थियों हेतु प्राथमिक कैचमेंट एरिया 1,228 सामुदायिक विकास ब्लॉक होंगे जहां अल्पसंख्यक आबादी अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा पता लगाए गए अनुसार कुल आबादी का 25% अथवा इससे अधिक है । इस योजना के कार्यान्वयन के लिए संचालन समिति द्वारा राज्य  सरकारों के साथ सलाह-मशविरा  करके इन ब्लॉकों के अलावा भी कैचमेंट एरिया अधिसूचित किए जा सकते हैं।

पहचान एवं चयन

इस योजना के अंतर्गत जुटाए गए युवाओं को उपयुक्त परामर्श  दिया जाएगा जिससे पीआईए को शिक्षा  एवं कौशलों  के अर्थों में उपयुक्त सहायता की पहचान करने के लिए उम्मीद्‌वारों की चयन-पूर्व जांच करने में मदद मिलेगी। इससे बेसलाइन के लिए डाटाबेस भी तैयार होगा।

प्लेसमेंट

प्रशिक्षण के सफलतापूर्वक संपन्न होने के उपरांत, पीआईए प्रशिक्षणार्थियों के वैतनिक रोजगार के लिए नौकरियों में प्लेसमेंट को सुकर बनाएंगे। यह अधिदेश दिया गया है कि परियोजना के अंतर्गत प्रशिक्षित  70%  युवाओं को प्रशिक्षण की समाप्ति के तीन महीनों के भीतर सफलतापूर्वक प्लेस किया जाना चाहिए। उन्हें संगठित उद्योगों में प्लेस करने का प्रयास किया जाएगा, तथापि, यदि ऐसा संभव नहीं होता है तो यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उनका वेतन राज्य स्तर पर मूल न्यूनतम वेतन से अधिक है और उन्हें भविष्य  निधि,  ईएसआई,  सवेतन छुट्‌टी आदि सरीखे अन्य लाभ मिल रहे हैं।

योजना के संघटक

यह योजना 9 से 12 महीनों के लिए गैर-आवासीय एकीकृत शिक्षा  एवं कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम उपलब्ध कराएगी जिसमें से 3 महीने कौशल प्रशिक्षण को समर्पित किए जाएंगे। आशा  की जाती है कि इस योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण की प्रदानगी पूर्णतः एकीकृत होगी जिसमें प्रशिक्षण की अवधि के दौरान प्रत्येक उम्मीद्‌वार को समान रूप से ऑफर किए जा रहे वर्णित विभिन्न संघटक शामिल होंगे।

बेसिक ब्रिज कार्यक्रम

लाभार्थियों को बेसिक ब्रिज कार्यक्रम ऑफर किया जाएगा जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय संस्थान (एनआईओएस) अथवा अन्य किसी राज्य बोर्ड जो ओपन स्कूलिंग देता है, से प्रमाण-पत्र दिए जाएंगे। लाभार्थी की पात्रता के आधार पर, उसे ओपन बेसिक एजुकेशन  (ओबीई) स्तर 'सी' पाठ्‌यक्रम करना होगा जो कक्षा VIII के समतुल्य है अथवा एनआईओएस/ राज्य बोर्ड का माध्यमिक स्तर परीक्षा कार्यक्रम जो कक्षा X के समतुल्य है। मूल्यांकन एवं प्रमाणीकरण एनआईओएस/राज्य बोर्ड के मानकों के अनुसार होगा। सीखने की प्रगति का पता लगाने के लिए पीआईए द्वारा आवधिक नियमित आंतरिक मूल्यांकन भी किए जाएंगे। यदि कोई अभ्यर्थी पहले प्रयास में मुक्त विद्यालय की परीक्षा उत्तीर्ण करने में प्रत्येक छात्र को कक्षा X उत्तीर्ण करने के लिए पांच वर्षों  में नौ बार प्रयास करने की अनुमति देता है।

कौशल प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट

  1. कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के मानदंडों के अनुसार पाठ्‌यक्रम और अन्य इन्पुट्‌स प्रयोग किए जाएंगे।
  2. प्रत्येक प्रतिभागी इस परियोजना के अंतर्गत उपलब्ध क्षेत्र विशिष्ट व्यावसायिक कौशल कार्यक्रमों के विकल्पों में से अपनी रूचि और योग्यता के आधार पर चयनित कौशल आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेगा। इसमें संगत मृदु कौशल और जीवन कौशल भी शामिल  होंगे।
  3. कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम हेतु, पाठ्‌क्रम राष्ट्रीय कौशल अर्हता ढांचा (एनएसक्यूएफ) के अनुरूपी रोजगारपरक मॉडुलर कौशल (एमईएस)/अर्हता पैक-राष्ट्रीय व्यावसायिक मानक (क्यूपी-एनओएस) के अनुसार होगा।
  4. मूल्यांकन एवं प्रमाणीकरण की प्रक्रिया राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद्  (एनसीवीटी) अथवा क्षेत्र कौशल परिषद्  (एसएससी) के मॉडयूलर रोजगारपरक कौशलों  (एमईएस) के निर्धारण के अनुसार होगी।
  5. कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम न्यूनतम 3 माह की अवधि का होगा और इसमें मृदु कौशल प्रशिक्षण,बेसिक आईटी प्रशिक्षण तथा बेसिक इंग्लिश  प्रशिक्षण शामिल  होगा।
  6. इस कार्यक्रम का फोकस इस पर होगा कि प्रशिक्षण से युवाओं को लाभकारी और सतत रोजगार मिले।
  7. कौशल प्रशिक्षण का क्षेत्र इस परियोजना हेतु किए गए कौशल अंतराल अध्य्‌यन के दौरान पीआईए द्वारा किए गए मूल्याँकन के अनुसार बाजार संगत होगा। पीआईए द्वारा किए कौशल अंतराल अध्ययन का एमएसडीई द्वारा किए गए कौशल अंतराल अध्ययन से मिलान किया जाएगा। टे्रडों/पाठ्‌यक्रमों के चयन का अन्तिम निर्णय मंत्रालय द्वारा किया जाएगा। अतः प्रस्ताव प्रस्तुत करने के दौरान पीआईए को उस क्षेत्र में निर्माण और सेवा क्षेत्रों दोनों में उद्योगों के कुछ विशलेषण के आधार पर उस क्षेत्र में कौशल की मांग का उल्लेख करना चाहिए।
  8. पीआईए के लिए सफल उम्मीदवारों को नियमित रोजगार में उसी क्षेत्र में प्लेस करना होगा जिनमें उनको प्रशिक्षण दिया गया है। औपचारिक क्षेत्र में रोजगार वांछनीय है, तथापि, यदि यह संभव न हो तो पीआईए को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नौकरी राज्य में अर्द्ध-कुशल  कार्मिकों हेतु यथा आदेशित  न्यूनतम वेतन दिया जाता है और नियोक्ता को कार्यक्रम के जारी रहने के दौरान अपने स्टाफ को भविष्य  निधि, ईएसआई, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) तथा अन्य लाभ देने चाहिएं।
  9. नियोक्ताओं को आकर्षित  करने के लिए, पीआईए को स्थानीय क्षेत्र के उद्योगों के साथ निरंतर संपर्क में रहना चाहिए और या तो स्वयं अथवा राज्य कौशल विकास मिशन  के साथ सहभागिता करके जॉब मेलों का आयोजन करना चाहिए।
  10. एक बार प्लेस हो जाने के पश्चात् , पीआईए को अभ्यर्थियों को कम से कम तीन महीनों के लिए प्लेसमेंट्‌ उपरांत सहायता या तो दौरों के माध्यम से अथवा फोन कॉल्स द्वारा अथवा अन्य किन्हीं माध्यमों, जो सुगम हों, के जरिये नियमित परामर्श  से उपलब्ध करानी चाहिए।
  11. पीआईए एक वर्ष की अवधि के लिए अपने सभी छात्रों को ट्रैक  भी करेगा। यदि उस दौरान छात्र श्रम बाज़ार से ड्रॉप आउट हो जाता है, तो उसके लिए अन्य नौकरी खोजने की जिम्मेदारी पीआईए की होगी।

स्वास्थ्य एवं जीवन कौशल

सभी प्रतिभागियों को मूलभूत स्वच्छता, प्राथमिक चिकित्सा आदि सहित स्वास्थ्य जागरूकता और जीवन कौशलों  संबंधी मॉडयूल भी उपलब्ध कराया जाएगा।

पात्रता मापदंड

प्रशिक्षणार्थी/लाभार्थी

  1. कार्यक्रम देश के सभी क्षेत्रों में संचालित किया जाएगा। कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग 100,000 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों के प्रशिक्षण का कुल वास्तविक लक्ष्य 5 वर्षों  की कार्यान्वयन अवधि में पूरा किया जाएगा। आशा  की जाती है कि लक्ष्य का लगभग 2%  प्रथम प्रथम वर्ष  में कवर किया जाएगा और बकाया आने वाले वर्षों  में वितरित किया जाएगा।
  2. प्रशिक्षणार्थी राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के अंतर्गत यथा अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदाय (अर्थात्‌ मुस्लिम, इसाई, सिक्ख, बौद्ध, जैन एवं पारसी) से संबंधित होना चाहिए।
  3. उन राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में, जहां संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र की सरकारों द्वारा अधिसूचित अन्य अल्पसंख्यक समुदाय मौजूद है तो उन्हें भी कार्यक्रम हेतु पात्र समझा जा सकता है किंतु उन्हें कुल सीटों के 5%  से ज्यादा नहीं मिलेगा।
  4. प्रशिक्षणार्थी की आयु 17-35 वर्ष  के बीच होनी चाहिए।
  5. गैर-अल्पसंख्यक जिले अथवा शहर  के भीतर अल्पसंख्यक आबादी की बहुलता वाले कुछ विशेष पॉकेट्‌स भी विचार किए जाने के पात्र होंगे।
  6. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों दोनों से प्रशिक्षणार्थी गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के होने चाहिएं।
  7. प्रशिक्षणार्थी की न्यूनतम अर्हता एनआईओएस/नीचे परिभाषित  समतुल्य के अनुसार होनी चाहिए-

क) कक्षा VIII हेतु ब्रिज कार्यक्रम

अभ्यर्थी के पास कक्षा V उत्तीर्ण अथवा अनुत्तीर्ण का अथवा समतुल्य शिक्षा  का स्कूल छोड़ने का प्रमाण-पत्र होना चाहिए अथवा उसे इस पाठ्‌यक्रम को जारी रखने की अपनी योग्यता का उल्लेख करते हुए स्व-प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराना होगा। अभ्यर्थी पाठ्‌यक्रम को जारी रखने के लिए एनआईओएस अथवा समतुल्य बोर्ड द्वारा यथा निर्धारित न्यूनतम आयु को पूरा करता हो।

ख) कक्षा X हेतु ब्रिज कार्यक्रम

अभ्यर्थी के पास कक्षा VIII उत्तीर्ण अथवा अनुत्तीर्ण का अथवा समतुल्य शिक्षा  का स्कूल छोड़ने का प्रमाण-पत्र होना चाहिए अथवा उसे इस पाठ्‌यक्रम को जारी रखने की अपनी योग्यता का उल्लेख करते हुए स्व- प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराना होगा। अभ्यर्थी पाठ्‌यक्रम को जारी रखने के लिए एनआईओएस अथवा समतुल्य बोर्ड द्वारा यथा निर्धारित न्यूनतम आयु को पूरा करता हो।

  1. योजना के अंतर्गत 30%  लाभार्थी सीटें बालिका/महिला अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित की जाएंगी तथा 5%  लाभार्थी सीटें अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित दिव्यांग व्यक्तियों के लिए निर्धारित की जाएंगी। अंतर-समुदाय एकता को प्रोत्साहित करने के लिए गैर-अल्पसंख्यक समुदायों के बीपीएल परिवारों से संबंधित 15% अभ्यर्थियों पर भी विचार किया जाएगा।
  2. यदि इस योजना के अंतर्गत यथा निर्धारित आरक्षित श्रेणियां रिक्त रहती हैं, तो इन रिक्त सीटों को अनारक्षित समझा जाएगा।

कार्यक्रम क्रियान्वयनकर्त्ता एजेंसियों (पीआईए) की पात्रता

  1. योजना में शामिल होने के लिए पीआईए को आमंत्रित किया जाएगा। पीआईए का चयन उनके चयन हेतु मापदंड में निर्धारित किए गए अनुसार मूल्यांकन की जटिल प्रक्रिया और समुचित कर्मठता के अध्यधीन होगा। नीचे संस्थानों के प्रकारों की एक अस्थायी सूची दी गई है जिनका परियोजना के अंतर्गत पीआईए के रूप में चुनाव किया जाएगा-

क) एनसीवीटी  अथवा  एससीवीटी  से  मान्यता  प्राप्त  सरकारी  अथवा  निजी आईटीआई

ख)केंद्रीय अथवा राज्य माध्यमिक शिक्षा  बोर्डों अथवा मुक्त विद्यालयों (अथवा समतुल्य) द्वारा अनुमोदित विद्यालय/संस्थान

ग) पैनल में शामिल  होन के लिए पीआईए का पिछले तीन वित्तीय वर्षों  में कम से कम 15 करोड़ का कारोबार होना चाहिए और पिछले तीन वर्षों  में प्रतिवर्ष  कम से कम 500 प्रशिक्षाणार्थियों को प्रशिक्षण दिया हुआ होना चाहिए।

घ) व्यावसायिक  शिक्षा /प्रशिक्षण/जॉब उन्मुख/स्व-रोजगार/उद्यमिता  विकास प्रशिक्षण पाठ्‌यक्रमों को संचालित करने वाली पंजीकृत कंपनी/फर्म/ट्रस्ट/ सोसायटी जिसने केंद्र सरकार की किसी योजना के अंतर्गत विगत तीन वर्षों  में 500 व्यक्तियों को अनिवार्य रूप में प्रशिक्षित  किया हो। वह कम से कम तीन वर्षों  से अस्तित्व में हो और उसकी वैध स्थायी आयकर खाता संख्या  अथवा सेवा कर पंजीकरण संख्या  हो। उसके पास विगत तीन वर्षों  के लेखा-परीक्षित खातों के ब्यौरे हों तथा उसे भारत में किसी भी सरकारी संस्था द्वारा काली सूची में न डाला गया हो। उसे केंद्र सरकार के उस संबंधित मंत्रालय का संतोषजनक निष्पादन  का पत्र प्रस्तुत करना होगा जिस मंत्रालय की योजना के अंतर्गत उसने 1000 से अधिक व्यक्तियों को प्रशिक्षण दिया हो।

  1. पीआईए को एक प्रमुख संघटक के कार्यान्वयन हेतु उत्तरदायी प्रत्येक सहभागी के साथ सहायता संघ में आने की अनुमति है। सहायता-संघ दृष्टिकोण  के अधीन सभी भागीदारों से दस्तावेज लिए जाएंगे और अग्रणी (लीड) पीआईए उत्तरदायी होगा। तथापि तुलन-पत्र आदि जैसे वित्तीय दस्तावेज अग्रणी (लीड) पीआईए और अन्य भागीदार के संबंध में सहायता संघ/संयुक्त उद्यम के मामले में ही लिए जाएंगे।
  2. पीआईए को संबंधित संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में एक अंतर-मंत्रालयी चयन समिति

द्वारा 5 वर्षों  के लिए पैनल में शामिल  किया जाएगा जो उनके वार्षिक  कार्य-निष्पादन  और मंत्रालय द्वारा निर्धारित प्राथमिकताओं के अध्यधीन होगा। चयनित पीआईए को चयन के समय पर निर्णय लिए गए अनुसार एक अथवा एक से अधिक क्षेत्रों में कार्य करने की अनुमति होगी। योजना के अंतर्गत आउटसोर्सिंग अथवा फ्रेंचाइजिंग की अनुमति नहीं है।

  1. पीआईए की मूल्यांकन प्रक्रिया में निम्नलिखित का प्रोमोटरों गुणात्मक मूल्यांकन शामिल होगा-

क)संगठन क्षमताः इसमें संगठन कौशलकरण अनुभव, प्रोमोटरों एवं प्रबंधन टीम का अनुभव, आंतरिक संगठनात्मक नीतियों की सुदृढ़ता, प्रशिक्षकों  की गुणवत्ता शामिल  है।

ख) प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट ट्रैक  रिकॉर्ड –

आवेदक पीआईए तथा/अथवा सरकारी एवं निजी परियोजनाओं में सहायता-संघ सहभागियों का कार्य-निष्पादन , उम्मीदवार का फीडबैक, नियोक्ता का फीडबैक, उद्योग के साथ टाई अप आदि शामिल  है।

ग) शिक्षा  का रिकॉर्ड –

विगत तीन वर्षों  में आधारभूत शिक्षा  परियोजनाएं, जैसे कि दाखिल किए गए और बोर्ड परीक्षा में बैठने वाले और उत्तीर्ण होने वाले छात्रों की संख्या , को क्रियान्वित करने में संगठन के अथवा सहायता-संघ के सहभागियों के अनुभव शामिल  हैं।

घ) अल्पसंख्यक क्षेत्रों का अनुभव –

अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में कार्य करने के साक्ष्य जैसे कि केस अध्ययन, अपनाई गईं कार्यनीतियां, स्थानीय समूहों के साथ भागीदारी करना आदि शामिल  हैं।

ङ) सेक्टर का अनुभव –

प्रस्तावित सेक्टर, पाठ्‌यक्रम की पाठ्‌य सामग्री और एनएसक्यूएफ के साथ तालमेल में प्रशिक्षण संचालित करने का पूर्व का अनुभव।

च) राज्य/क्षेत्र में अनुभव –

प्रस्तावित राज्य/क्षेत्र में प्रशिक्षण संचालित करने का पूर्व का अनुभव। संघटन संबंधी कार्यनीतियां नियोक्ताओं के साथ टाई-अप, कौशल अंतर अध्ययनों के माध्यम से कौशलों  के लिए सूक्ष्म स्तर की मांग की समझ शामिल  है।

छ) प्रशिक्षण  संबंधी  अवसंरचना-

प्रशिक्षण  हेतु  मौजूदा  अवसंरचना  जैसे  कि प्रयोगशालायें और मशीनरी  आदि।

ज) शिक्षा  संबंधी अवसंरचना –

एनआईओएस अथवा अन्य किन्हीं ओपन बोर्डों में अधिदेश दिए गए अनुसार अवसंरचना वाली एजेंसियों के साथ टाई-अप।

झ)वित्त व्यवस्था –

पीआईए अथवा सहायता-संघ के मामले में अग्रणी पीआईए के तुलन-पत्र सरीखे वित्तीय दस्तावेज।

  1. गुणात्मक मूल्यांकन के उपरांत पीआईए का वास्तविक सत्यापन किया जाएगा जहां उसकी अवसंरचना, संकाय तथा वित्त व्यवस्था की मंत्रालय द्वारा गठित परियोजना प्रबंधन एकक द्वारा जांच की जाएगी। एक से अधिक संगठनों के पात्र होने की स्थिति में भागीदार (भागीदारों) का उक्त निर्धारित मापदंड को सफलतापूर्वक पूरा करने में सक्षम हो जाने के पश्चात्  'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर चयन किया जाएगा। ऐसे मामलों में जहां किसी समय विशेष  और स्थान पर एक से अधिक पीआईए काम करना चाहती हैं तो कार्य आबंटित करने के लिए गैर मूल्य/गुणवत्ता मानदंड प्रयुक्त किए जाएंगे।
  2. पीआईए को पैनल में शामिल  किए जाने का अर्थ प्रशिक्षण कार्य अनिवार्यतः आबंटित करना नहीं है। मंत्रालय द्वारा जरूरत के अनुसार नए सिरे से पैनल तैयार कर सकता है।

परियोजना का वित्तपोषण

1.  यह एक 100% केंद्रीय क्षेत्र की योजना है जो मंत्रालय द्वारा पैनल में शामिल  संगठनों के माध्यम से प्रत्यक्ष रूप से क्रियान्वित की जाएगी। अनुमोदित परियोजनाओं की संपूर्ण लागत मंत्रालय द्वारा, निर्धारित वित्तीय मानकों के अनुसार वहन की जाएगी। योजना के अंतर्गत विभिन्न संघटकों जो वित्तपोषण  पाने के पात्र होंगे, की लागत नीचे दी गई है –

विस्तृत मदें

ब्यौरे

जुटाव (मोबिलाइजेशन)

  • आईईसी सामग्रियां
  • यात्रा

पहचान एवं चयन

  • प्रतिभागियों का परामर्शन
  • चयन पूर्व जाँच

शिक्षा (एनआईओएस द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार लागतें)

  • ओपन स्कूलिंग के अंतर्गत दाखिला
  • शिक्षकों का वेतन/पारिश्रमिक
  • किराया एवं अवसंरचना
  • शिक्षण अध्यय्‌न सामग्रियां
  • उपकरण एवं उपभोग्य वस्तुएं
  • परीक्षा शुल्क
  • प्रशासनिक लागत

कौशल प्रशिक्षण (मंत्रालय द्वारा निर्धारित मानदण्डों के अनुसार)

  • स्थानीय स्तर कौशल अंतराल विशलेषण
  • जगह का किराया एवं अवसंरचना
  • अनुदेशकों के लिए पारिश्रमिक
  • उपकरण एवं उपभोग्य वस्तुएं
  • परीक्षा शुल्क
  • प्रशासनिक लागत

प्लेसमेंट एंड ट्रेकिंग

  • स्थानीय उद्योग को अभिप्रेरित करना
  • पूर्व प्रशिक्षणार्थियों के साथ संपर्क
  • फोन कॉल तथा दौरों के माध्यम से ट्रेकिंग।

रिपोर्टिंग एवं निगरानी

  • लक्ष्य तथा व्यय के मामले में प्रगति पर नियमित रिपोर्टिंग।

 

2.  परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों को भुगतान प्रति लाभार्थी आधार पर होगा। प्रति लाभार्थी प्रशिक्षण के लिए औसत लागत निम्नलिखित अनुसार परिकलित की जाती है –

प्रति स्थान 100 अभ्यर्थी मानते हुए पीआईए को प्रति लाभार्थी औसत लागत (आंकड़े रुपए में)

क्रम सं.

मद

प्रति लाभार्थी

अभियुक्तियाँ

1.

प्रत्यक्ष लागत

 

 

1.1

शिक्षण  लागत

 

 

 

अध्ययन केंद्र के लिए किराया एवं रख-रखाव व्यय

3,000

प्रशिक्षण अवधि, बिजली, पानी तथा ईएससी के हाउसकीपिंग व्यय के लिए प्रति वर्ग फुट 10 रु0 की दर से 6 कक्षा कमरों के लिए 500 वर्ग फुट

 

शिक्षकों  एक केंद्र प्रभारी का वेतन

6,900

5 शिक्षक प्रति ईएससी (प्रति विषय  के लिए 1) तथा एक केंद्र प्रमुख

 

5 केंद्रों के लिए एक मुख्य संसाधन व्यक्ति तथा एक प्रशासक/ एमआईएस/ परामर्शदाता

700

लगभग 500 अभ्यर्थियों वाले 5 केंद्रों के एक समूह के लिए

 

शिक्षकों को प्रशिक्षण

500

5 विषय  के शिक्षकों के लिए पुनश्चर्या कार्यक्रम

 

लर्निंग एड्‌स

1,150

10 कंप्यूटर तथा एक प्रिंटर को किराये के आधार पर प्रत्येक स्थान पर कंप्यूटर लैब स्थापित किया जाना है।

 

टीचिंग एड्स

 

750

प्रोजेक्शन  सिस्टम, व्हाईट बोर्ड, टीचिंग एड्‌स तथा पोस्टर आदि जैसे टीचिंग एड्स

 

लर्निंग किट

 

1,000

नोट बुक तथा ज्योमेट्री बॉक्स, मैप, असाइनमैंट जैसे अन्य लर्निंग मेटीरियल सहित स्टेशनरी

 

कुल (1.1)

14,000

 

1.2

प्रमाण-पत्र लागत सहित कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम लागत

18,000

 

 

उप-योग (1)

32,000

 

2.

पास थ्रू कॉस्ट

 

 

2(क)

मूल्यांकन एवं प्रमाणन

 

 

 

एनआईओएस अथवा समतुल्य के अंतर्गत शिक्षा  प्रमाणन

 

3,000

इसमें 5 विषयों  के लिए पंजीकरण, परीक्षा तथा प्रैक्टिकल शुल्क  शामिल  होंगे।

 

कौशल मूल्यांकन एवं प्रमाणन

1,000

यह एसएससी/एनसीवीटी दिशा -निर्देशों  के अनुसार (वास्तविक के अध्यधीन) है।

2(ख)

लाभार्थी सहायता

 

 

 

वृत्तिका

 

 

 

शिक्षा

6,000

6 महीनों के लिए प्रति माह 1,000 रु0

 

कौशल

4,500

3 महीनों के लिए प्रतिमाह 1,500 रू0

2(ग)

प्लेसमेंट के बाद सहायता

4,000

'सीखो और कमाओ' योजना दिशा -निर्देश  के अनुसार नियोजित अभ्यार्थियों के लिए 2 महीनों के लिए प्रति माह 2,000 रू0

 

उप-योग (2)

18,500

 

3.

निवारक स्वास्थ्य जांच तथा दवाईयां

1,000

 

4.

परियोजना प्रबंधन लागत

5,000

परियोजना लागत का 10%

कुल

(1+2+3+4)

56,500

 

 

3.  पीआईए को प्रति लाभार्थी 56,500 रू0 की औसत दर पर भुगतान किया जाएगा और इस लागत के भीतर ही प्रशिक्षण से जुड़ी सभी रूपात्मकताओं का पालन किए जाने की उम्मीद की जाएगी। उपर्युक्त तालिका में दर्शायी गई अंनतिम है और जरूरतों के अनुसार संशोधन किया जा सकता है। योजना का कौशल विकास संघटक सामान्य मानदंडों (यदि लागू हो) के अनुसार विनियमित किया जाएगा।

4.  उपर्युक्त तालिका में असमूहीकृत लागत समग्र लागत के संदर्भ में ही है और उसमें संशोधन किया जा सकता है। पीआईए द्वारा लाभार्थी को वृत्तिका का भुगतान इलेक्ट्रॉनिक अंतरण के माध्यम से प्रशिक्षणार्थियों के बैंक खातों में किया जाएगा। पीआईए जिला प्रशासन के माध्यम से आधार के लिए प्रशिक्षणार्थियों को नामांकित करने का प्रयास करेगा और उन्हें बैंक खातों से जोड़ेगा।

5.  योजना के लिए प्रारंभिक बजट नीचे प्रस्तुत है –

क्र. सं.

मुख्य शीर्ष

राशि (करोड़ रु0 में)

अभ्युक्तियां

1.

पीआईए को लाभार्थी प्रशिक्षण लागत

565.00

1 लाख लाभार्थियों के लिए

2.

परियोजना प्रशासक

 

 

 

(क) तकनीकी सहायता एजेंसी सहित परियोजना प्रबंधन एकक

40.00

 

 

(ख) सूचना प्रबंधन प्रणाली

5.00

 

 

(ग) पायलट इंटर्वेंशन्स तथा निगरानी एवं मूल्यांकन अध्ययन

10.00

 

 

(घ) पक्षसमर्थन

 

1.50

 

 

उप-योग

56.50*

प्रशिक्षण लागत का 10%

3.

आकस्मिक लागत

28.25

प्रशिक्षण लागत का 5%

 

कुल योग

649.75

 

 

परियोजना की कुल लागत का 10%  प्रशासनिक  व्यय समग्र सीलिंग के भीतर योजना की प्रचालन संबंधी आवश्यकता के अनुसार पुनः समायोजित किया जा सकता है।

वार्षिक  लक्ष्य एवं लागत नीचे प्रस्तुत है

लागत (करोड़ रु0 में)

वर्ष

लक्षित लाभार्थी

पीआईए के लिए लागत

प्रशासन

आकस्मिक

कुल

वर्ष  1

 

2,000

 

11.30

30.00

0.00

41.30

वर्ष  2

 

25,000

 

141.25

7.50

5.00

153.75

वर्ष  3

 

30,000

 

169.50

7.50

10.00

187.00

वर्ष  4

 

30,500

 

172.33

7.50

10.00

189.83

वर्ष  5

12,500

 

70.63

4.00

3.25

77.88

कुल

 

1,00,000

 

565.00

56.50

28.25

649.75

निधियां जारी करना

  1. परियोजना के अनुमोदन पर, सामान्य वित्तीय अनुसरण करते हुए निधियां तीन किस्तों में निर्मुक्त की जाएंगी। जारी करने के लिए निधियां पीआईए को सीधे पीआईए के खाते में इलैक्ट्रॉनिक अंतरण के द्वारा संवितरित की जाएगी।
  2. निधियां जारी करने के लिए अंनतिम किस्त पैटर्न नीचे वर्णित है। तीन किस्तें 30-50-20 के अनुपात में हो सकती है। किस्तों का भुगतान सामान्य मानदंडों, यदि लागू हो, के अनुसार हो सकता है। अतिरिक्त संघटक भी, निष्पादन  प्रोत्साहन सहित, नीचे पहचान की गई भुगतान शर्तों  में जोड़ा जा सकता है -

प्रथम किस्त –

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा परियोजना का अनुमोदन तथा पक्षकारों के बीच समझौता ज्ञापन होने के पश्चात्  प्रथम किस्त जारी की जाएगी।

दूसरी किस्त –

दूसरी किस्त निम्नलिखित के अनुपालन के अधीन जारी की जाएगी -

क) प्रारंभिक प्रशिक्षणार्थियों के कम से कम 70%  के साथ प्रशिक्षण की निरंतरता तथा प्रथम किस्त का एनआईओएस तथा पीआईए द्वारा किए गए  कुल व्यय दिखाते हुए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय को प्रस्तुत लेखा परीक्षित उपयोग प्रमाण-पत्र के साथ प्रथम किस्त का 70%  उपयोग।

ख) परियोजना की लेखा परीक्षित रिपोर्ट का समय पर प्रस्तुतीकरण।

ग) दूसरी किस्त प्रशिक्षणार्थियों के प्रशिक्षण पूरा करने के आधार पर जारी की जाएगी और उत्तरवर्ती समायोजन प्रथम किस्त के संबंध में किए जाएंगे।

घ) यह पीएमयू द्वारा मॉनीटर किए गए परिणामों से भी जोड़ा जाएगा।

तीसरी किस्त –

तीसरी किस्त निम्नलिखित के होने पर जारी की जाएगी-

क) अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा यथा निर्धारित परियोजना समापन रिपोर्ट। परियोजना समापन का अर्थ है शैक्षणिक  भाग की समाप्ति, त्रैमासिक कौशल विकास, पाठ्‌यक्रम की समाप्ति के तीन महीने के भीतर न्यूनतम 70 प्रतिशत प्रशिक्षित  अभ्यर्थियों का प्लेसमेंट और उनकी एक साल की अवधि की ट्रैकिंग । परियोजना चक्र की सम्पूर्ण अवधि लगभग 2 वर्षों  से अधिक बनेगी। परिणामों तथा परियोजना समापन का मूल्यांकन करने के लिए व्यावसायिक पीएमयू की स्थापना की जा रही है।

ख) लेखा परीक्षित उपयोग प्रमाण-पत्र का प्रस्तुतीकरण।

ग) परियोजना में यथा अपेक्षित प्रदानगियां पूरी की गई हो और पीआईए द्वारा निम्नलिखित के संयोगिक वास्तविक सत्यापन के माध्यम से सत्यापित की गई हो -

  • एमआईएस डेटा वास्तविक एवं वित्तीय उपलब्धि, दोनों।
  • निर्धारित प्रपत्र में किए गए प्लेसमेंट का ब्यौरा।
  • निर्धारित प्रपत्र में स्व-नियोजित प्रशिक्षित अभ्यर्थियों के ब्यौरे।
  • निर्धारित प्रपत्र में उच्चतर शिक्षा में लिए जाने वाले प्रशिक्षित अभ्यार्थियों के ब्यौरे।

परियोजना निगरानी एवं मूल्यांकन

सूचना प्रबंधन प्रणाली (एमआईएस)

क) अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा एक वेब-आधारित सूचना प्रबंधन प्रणाली (एमआईएस) विकसित की जाएगी जिसमें कई ब्यौरे शामिल  किए जाएंगे जैसे कि-

(क) विद्यार्थियों का नामांकन रिकॉर्ड

(ख) टीचर्स प्रोफाईल

(ग) मासिक उपस्थिति रिकॉर्ड

(घ) ड्रॉपआउट्‌स तथा कारण

(ङ) मासिक परीक्षाओं के लिए मूल्यांकन रिपोर्टें

(च) छात्रों का पुनः नामांकन, यदि कोई है

(छ) प्लेसमेंट ट्रैकिंग डाटा

(ज) मॉनिटरिंग दौरों के दौरान पहचान की गई समस्या तथा उसका निवारण

(झ) अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित कोई अन्य मद

ख) परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियां (पीआईए) आवधिक आधार पर एमआईएस द्वारा यथा अपेक्षित रिकार्ड इलैक्ट्रानिक और/या हार्ड कापी प्रारूप में भेजने के लिए उत्तरदायी होंगी और उनमें निर्धारित सभी अपेक्षाओं का अनुपालन करेंगी। पीआईए को भागीदार विशिष्ट  सूचना बनाए रखनी होगी और सभी प्रयोज्य रिपोर्टिंग अपेक्षाएं पूरी करनी होगी। सूचना की प्रविष्टि की नियमितता और गुणवत्ता आवश्यकता अनुसार मंत्रालय द्वारा जरूरत के अनुसार निर्धारित की जाएगी।

ग) पीआईए द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सीसीटीवी रिकॉडिंग रिकॉर्ड के प्रयोजन तथा क्रॉस चैकिंग के लिए रखी जाएगी। केंद्रों की बायो-मैट्रिक अटेंडेस (आधार बेस्ड) तथा जीआईएस टेगिंग भी पीआईए द्वारा की जाएगी।

घ) पीआईए प्रशिक्षित  पूरा होने के बाद एक वर्ष  के लिए ट्रैकिंग आंकड़ा बनाकर रखेगा और प्रशिक्षार्थियों की प्रगति को मॉनीटर करने के लिए उसे एमआईएस पर बनाए रखेगा।

ङ) जो अभ्यर्थी इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं और जो संघटितकर्ता ऐसे अभ्यर्थियों को लाभार्थी के रूप में पंजीकृत करना चाहते है। एमआईएस पोर्टल उन्हें ऑनलाइन आवेदन करने देगा। इस योजना के समर्थन प्रयासों के भाग के रूप में एमआईएस पोर्टल का व्यापक प्रचार भी किया जाएगा और राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्लान (एनईजीपी) और राष्ट्रीय श्रम बाजार सूचना प्रणाली (एलएमआईएस) के सामान्य सेवा केन्द्रों (सीएससी) के जरिए उपलब्ध कराया जाएगा जिसे कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय द्वारा विकसित किया जा रहा है।

च) परियोजना प्रबंधन एकक (पीएमयू) परियोजना मूल्यांकन, वार्षिक  बैंच मार्किंग सर्वेक्षणों आदि सहित योजना की समग्र मॉनीटरिंग एवं मूल्यांकन करेगा। इसके अलावा, राज्य सरकार को परियोजनाओं का निरीक्षण करने का अधिकार होगा। राज्य सरकार द्वारा निर्धारित प्रपत्र में निरीक्षण रिपोर्ट मंत्रालय को प्रस्तुत की जाएगी। स्वायत्त एजेंसियों द्वारा तीसरे पक्ष की मॉनीटरिंग की भी परिकल्पना की जा सकती है। दूसरी किस्त की निर्मुक्ति को यह पीएमयू द्वारा मॉनीटर किए गए परिणामों से भी जोड़ा जाएगा।

पर्यवेक्षण तथा गुणवत्ता प्रबंधन

(i) अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय किसी पीआईए अथवा किसी अन्य एजेंसी को एमआईएस पर वास्तविक वित्तीय रिपोर्टों की साथ-साथ निगरानी और रेंडम जांच के लिए प्राधिकृत कर सकता है। प्रशिक्षण केन्द्रों को भौगोलिक स्थिति से जोड़ा जाएगा ताकि उनकी स्थिति गूगल मानचित्रों पर आसानी से उपलब्ध हो जाए। निरीक्षण टीम बिना किसी स्थानीय सहायता के सीधे प्रशिक्षण केन्द्र पर पहुंच सकती है। इसके अतिरिक्त, यह आंकड़ा एमआईएस पोर्टल पर भी डाला जा सकता है जिसका उपयोग अभ्यर्थियों द्वारा अपने आस-पास किसी केन्द्र को तलाशने  के लिए किया जा सकता है। एमआईएस में एक और खास बात होगी जिसके द्वारा दौरा करने वाली टीम दौरा किए गए केन्द्र के फोटो सीधे अपलोड कर सकती है। इससे एकत्र की गई सूचना योजना के अधीन आगे और मंजूरियों और निधियां जारी करने के लिए निर्णयन प्रक्रिया में फीड की जाएगी। मॉनीटरिंग में प्रशिक्षण केन्द्रों का रेंडम दौरा और निम्नलिखित का विधिमान्यकरण शामिल  हो सकता है -

क) जरूरतों के अनुसार न्यूनतम अवसंरचना की मौजूदगी

ख) लाभार्थियों की सच्चाई को प्रमाणित करने के लिए उपयुक्त तरीके उपयोग करते हुए एमआईएस प्रविष्टियां

ग) आवासीय क्षेत्र से उन अभ्यर्थियों के प्रशिक्षण, प्लेसमेंट और रिटेंशन  के बारे में तथ्य जिन्हें योजना के अधीन लाभार्थियों और/या लाभार्थियों के परिवार के सदस्यों से मिलकर प्रशिक्षण दिया गया।

(ii)    मंत्रालय जब कभी आवश्यक हो इस प्रयोजन के लिए ज्ञान भागीदारों के रूप में गठित पीएमयू के माध्यम से शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्त एजेंसियों को भी नियोजित कर सकता है।

बेंचमार्किंग सर्वेक्षण और योजना का मूल्यांकन

मंत्रालय योजना के प्रभाव का आकलन करने के लिए किसी तीसरे पक्ष द्वारा वार्षिक  बेंचमार्किंग सर्वेक्षण कराएगा और अपनी रणनीति और/या लक्ष्य क्षेत्र और जनसंख्या  में बेहतर तालमेल करेगा। इन सर्वेक्षणों में मात्रात्मक और गुणात्मक सर्वेक्षण, कठोर प्रभाव मूल्यांकन आदि शामिल  होंगे। इस योजना में अधिकतम अतिरिक्त सहायता जो कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए प्रदान किए जाने की जरूरत है, कि पहचान के लिए प्रायोगिक क्रियाकलापों के लिए भी सहायता दी जाएगी।

प्रशासनिक  व्यवस्थाएं

संचालन समिति

(i)   परियोजना का मार्गदर्शन एक संचालन समिति द्वारा किया जाएगा जो योजना कार्यान्वयन से संबंधित सभी महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय में गठित की जाएगी। सचिव, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय इस समिति की अध्यक्षता करेंगे और इसकी संरचना निम्नलिखित अनुसार होगी-

(क) सचिव, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय - अध्यक्ष

(ख) अध्यक्ष, राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा  संस्थान (या उसका/उसकी नामिती)

(ग) संयुक्त सचिव, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय

(घ) महानिदेशक, राष्ट्रीय कौशल विकास एजेंसी

(ङ) सीईओ, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम

(च) संयुक्त सचिव, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग

(छ) प्रबंध निदेशक, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम

(ज) भारत सरकार द्वारा शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण में विशेष  विशेष ज्ञता वाले नामित दो सदस्य

(झ) सीआईआई, फिक्की और एसोचैम द्वारा क्रमशः नामित 3 सदस्य

(ञ) अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय का वित्त सलाहकार (या उसका/उसकी नामिती)

(ट) पीएमयू का परियोजना समन्वयक-सदस्य सचिव

(ii)    संचालन समिति अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित कार्य करेगीः

(क) परियोजना प्रबंधन एकक(पीएमयू) के कार्यों का मार्गदर्शन करना;

(ख) पीएमयू की वार्षिक कार्य योजना और बजट (एडब्ल्यूपीबी) की समीक्षा और उसका अनुमोदन करना;

(ग) कार्यान्वयन प्रगति की आवधिक समीक्षा करना;

(घ) लाभार्थी की पहचान, प्रशिक्षण प्रदानगी, कार्यक्रम क्रियान्वयनकर्ता एजेंसियों (पीआईए) को नियोजनशर्तों आदि सहित योजना के कार्यान्वयन के संबंध में किसी अतिरिक्त दिशा-निर्देशों , परिवर्तनों और आशोधनों  का अनुमोदन करना; और

(ङ) पीएमयू द्वारा उठाए गए किसी अन्य मामले पर निर्णय लेना I

(iii)  संचालन समिति की वर्ष  में दो बैठकें होंगी लेकिन अध्यक्ष द्वारा जरूरत के आधार पर तदर्थ बैठकें बुलाई जा सकती हैं।

परियोजना प्रबंधन एकक (पीएमयू)

  1. रोजमर्रा के कार्य मंत्रालय में गठित परियोजना प्रबंधन यूनिट(पीएमयू) द्वारा देखे जाएंगे जिसमें इस प्रयोजनार्थ मेहनताना देकर रखे गए तकनीकी विशेषज्ञों  को शामिल  किया जाएगा।
  2. पीएमयू अन्य के साथ-साथ निम्नलिखित कार्य करेगी -

(क) परियोजना कार्यान्यवन के लिए उत्तरदायी एवं जबावदेह होने के नाते रोजमर्रा का प्रबंधन और समन्वय तथा सभी प्रशासनिक एवं विधिक आवश्यकताओं को पूरा करना;

(ख) संचालन समिति के अनुमोदन के लिए वार्षिक कार्य योजना और बजट एडब्ल्यूपीबी) तैयार करना

(ग) पीआईए के लिए चयन/समापन और उसे अधिसूचित करना;

(घ) पीआईए की कार्य-प्रणाली की समीक्षा करना, उनके आबन्ध का प्रबंधन, उन्हें सभी संवितरणों को संसाधित और अनुमोदित करना;

(ङ) योजना में बेहतर लाभार्थी लक्ष्यकरण और नामांकन के लिए समर्थन और आईईसी (सूचना,

शिक्षा एवं संप्रेषण);

(च) योजना के लिए गुणवत्ता आश्वासन मानक स्थापित करना;

(छ) परियोजना मूल्यांकन, वार्षिक बेंचमार्किंग सर्वेक्षणों आदि सहित योजना के लिए समग्र

मॉनीटरिंग और मूल्यांकन करवाना;

(ज) योजना के लिए सूचना प्रबंधन प्रणाली (एमआईएस) विकसित और प्रारंभ करना, एमआईएस रिपोर्टों की आवधिक समीक्षा करना और किसी आवश्यक कार्य मद की पहचान करना तथा कार्यान्वित करना; और

(झ) योजना के सुचारू कार्यान्वयन के लिए यथा अपेक्षित अन्य कोई क्रियाकलाप शुरू करना।

परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों की आवेदन प्रक्रिया

  1. मंत्रालय पैनल में शामिल  करने के लिए संगठनों/संस्थानों से समाचार पत्रों और मंत्रालय की शासकीय वेबसाइट के जरिए रूचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) आमांत्रित करेगा।
  2. नामिकायन के लिए मंत्रालय की एक संचालन समिति द्वारा रूचि की अभिव्यक्तियों (ईओआई) की जांच की जाएगी। नामिकायन योजना की संपूर्ण अवधि के लिए वैध रहेगा। तथापि, मंत्रालय के पास किसी भी चरण पर बिना कोई सूचना दिए नामिकायन को रद्द करने का अधिकार होगा।
  3. मंत्रालय आवश्यकता के अनुसार प्रत्येक वित्त वर्ष  में संगठनों का पैनल बना सकता है।
  4. मंत्रालय एक तकनीकी सहायता एजेंसी के माध्यम से आवेदनकर्ता संगठनों के प्रत्यय-पत्रों का सत्यापन कर सकता है।
  5. पैनल में शामिल  संगठनों के प्रस्तावों पर मंजूरीदाता समिति द्वारा विचार किया जाएगा। मंजूरीदाता समिति द्वारा अनुशंसित  प्रस्ताव सचिव, अल्पसंख्यक कार्य द्वारा अनुमोदित किए जाएंगे।
  6. मंत्रालय के पास आवेदन प्रक्रिया में संशोधन का अधिकार भी सुरक्षित है।

परियोजना कार्यान्वयनकर्ता एजेंसियों की भूमिका एवं उत्तरदायित्व

परियोजना कार्यान्वयनकर्ता एजेंसियों की विस्तृत भूमिकाओं एवं उत्तरदायित्वयों को समझौता ज्ञापन में सम्मिलित किया जाएगा जिस पर वस्तुतः दोनों पक्षों द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे। भूमिकाओं और उत्तरदायित्वयों की एक नमूना सूची नीचे दी गई हैः

शिक्षा एवं प्रशिक्षण उत्तरदायित्व

(क) जनांकिकी की संरचना, शिक्षा स्तर और युवाओं की आकांक्षाओं को समझने के लिए कैचमेंट एरिया का प्रारंभिक अध्ययन करना।

(ख) अल्पसंख्यक समुदाय में कार्यक्रम के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए जन परामर्श और प्रेरणा अभियान चलाना तथा उन्हें कार्यक्रम में सफलतापूर्वक नामांकित करना।

(ग) लाभार्थियों की आवश्यकताओं और कार्यक्रम के उद्देश्यों  को बाजार मांग के अनुकूल बनाना। इसके लिए एक आधार के रूप में कौशल अंतर अध्ययन किया जा सकता है।

(घ) लाभार्थियों के लिए पात्रता परीक्षा, परामर्श , प्रशिक्षण-पूर्व प्रवेश कार्यक्रम आदि आयोजित करना।

(ङ) राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा  संस्थान या अन्य राज्य बोर्ड जो मुक्त शिक्षा  की अनुमति देता है, के पाठ्‌यक्रम के अनुसार अकादमिक शिक्षा के लिए व्यवस्थित कक्षाएं आयोजित करना।

(च) प्रभावी कार्यान्वयन के लिए परियोजना क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाली अवसंरचना और विधिवत रूप से अर्हता प्राप्त एवं अनुभवी अध्यापकों/सुविधाप्रदाताओं का पूल उपलब्ध कराना।

(छ) प्रशिक्षार्थियों का वैतनिक रोजगार में प्लेसमेंट के लिए बाजार से संबंध बनाना।

(ज) रोजगार मेलों और रोजगार परामर्श  के लिए उद्योग के सहयोग से तंत्र को मजबूत बनाना ताकि जागरूकता फैलाई जा सके, विकल्प सृजित किए जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रशिक्षण प्रक्रिया में गरीब और अरक्षितों का समुचित ध्यान रखा जाता है।

(झ) समर्थन और जागरूकता पैदा करने के लिए कार्यक्रम ब्रांड का निर्माण करना।

प्लेसमेंट तथा प्लेसमेंट पश्चात् सहायता

(क) सभी अभ्यर्थियों को प्लेसमेंट सहायता और परामर्श की पेशकश की जाएगी तथा प्रमाण-पत्र

प्राप्त अभ्यर्थियों के न्यूनतम 70%  का प्लेसमेंट किया जाना चाहिए।

(ख) साथ ही, स्व-रोजगार तथा/अथवा उच्चतर अध्ययन के लिए दाखिला और संगठित क्षेत्र में कम से कम 50% ।

(ग) इस योजना के प्रयोजनार्थ शब्द संगठित क्षेत्र का अभिप्राय ऐसे व्यवसायों से है जो कर्मचारी राज्य बीमा योजना (ईएसआई) के अंतर्गत कवर किए गए हैं और जिन्हें भविष्य  निधि के लाभ मिलते हैं।

(घ) प्लेसमेंट, जहां तक संभव हो कम से कम विस्थापन के साथ की जानी चाहिए।

(ङ) प्लेसमेंट पश्चात् सहायता (पीपीएस) के अधीन अभ्यर्थियों को आर्थिक सहायता का समय पर वितरण पीआईए के महत्वपूर्ण उत्तरदायित्वों में से एक है।

(च) इस तथ्य को देखते हुए कि निर्माण-कार्य जैसे कुछ क्षेत्र बहुत संगठित नहीं हैं लेकिन अदायगी अधिकांशतः संगठित क्षेत्र से अधिक हो जाती है; अनौपचारिक क्षेत्र की नौकरियों पर निम्नलिखित शर्तों के अधीन विचार किया जाएगा-

i. अभ्यर्थी के पास किसी जॉब के लिए विशेष मान्यता प्राप्त कौशल का होना; और

ii. जॉब द्वारा वैध भावी प्रगति होती हो।

(छ) अनौपचारिक क्षेत्र में प्लेसमेंट पर तभी विचार किया जा सकता है यदि निम्नलिखित शर्तें पूरी की जाएं;

i. राज्य की न्यूनतम मजदूरी का आश्वासन देने वाला प्रस्ताव-पत्र

ii. नियोक्ता की ओर से प्रमाण-पत्र कि न्यूनतम मजदूरी के अनुसार मजदूरी का भुगतान कर दिया गया है; और

iii. नौकरी पूरी तरह अस्थायी नहीं होनी चाहिए और उसमें स्थिरता हो जिसका अर्थ है कि नौकरी का समापन उचित नोटिस अवधि के साथ किया जाएगा।

(ज) निम्नलिखित में से कोई एक दस्तावेज प्लेसमेंट का प्रमाण समझा जाएगा।

i. नियोक्ता द्वारा जारी वेतन-पर्ची

ii. वेतन जमा किए जाने के साथ अभ्यर्थी के बैंक खाते का विवरण

iii. अभ्यर्थी के नाम और वेतन विवरण के साथ पत्र

(झ) कार्यक्रम कार्यान्वयन एजेंसी को एक साल की अवधि के लिए प्लेसमेंट के बाद की ट्रेकिंग  और मॉनीटरिंग, नई नौकरियों में बने रहने की समय-सीमा को सुनिश्चित करना होता है।

(ञ) कार्यक्रम कार्यान्वयन एजेंसी को अभ्यर्थियों को व्यवस्थापित होने और उनके रोजगार की शुरुआती अवस्था में उनकी जरूरतों का ध्यान रखने के लिए प्लेसमेंट पश्चात् सहायता प्रदान करनी चाहिए।

लेखापरीक्षा

  1. मंत्रालय सीएजी तथा मंत्रालय के प्रधान लेखा अधिकारी या किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा लेखापरीक्षा सहित परियोजना के खातों की लेखापरीक्षा करने का अधिकार रखता है। पीआईए को जब भी मंत्रालय की किसी प्राधिकृत एजेंसी द्वारा अनुरोध किया जाए तो इस प्रयोजनार्थ सभी संगत दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे।
  2. सांविधिक उपबंधों के अनुसार वित्तीय लेखापरीक्षा पीआईए के चार्टर्ड एकाउंटेंट द्वारा किया जाए और अर्थपूर्ण लेखा परीक्षा को सुविधाजनक बनाने के लिए परियोजना के खातो का अलग से रख-रखाव किया जाएगा।
  3. परियोजना के अधीन लेखा परीक्षक की टिप्पणियों और वास्तविक प्रगति पर की गई कार्रवाई के साथ लेखा परीक्षा रिपोर्ट केन्द्रीय निधियों की दूसरी/तीसरी किस्त जारी करने के समय प्रस्तुत की जाएगी।

परियोजना का पूरा होना

  1. तीसरी (अंतिम) किस्त जारी करने से पहले पीआईए द्वारा लेखा-परीक्षित उपयोग प्रमाण-पत्र और दूसरी किस्त की लेखा परीक्षा रिपोर्टों के साथ परियोजना पूरी होने की रिपोर्ट मंत्रालय को उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
  2. परियोजना समापन का अर्थ है शैक्षणिक  भाग की समाप्ति, त्रैमासिक कौशल विकास, पाठ्‌यक्रम की समाप्ति के तीन महीने के भीतर न्यूनतम 70% प्रशिक्षित अभ्यर्थियों का प्लेसमेंट और उनकी एक साल की अवधि की ट्रैकिंग । परियोजना चक्र की सम्पूर्ण अवधि लगभग 2 वर्षों  से अधिक बनेगी।
  3. परियोजना से पहले और बाद में लाभर्थियों की स्थिति देते हुए वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ प्रलेखन (वीडियो, ऑडियो तथा फोटोग्राफ सहित) परियोजना का अभिन्न अंग है। इसमें परियोजना में उल्लिखित अनुसार प्रदानगियों का विवरण और उनकी तुलना में प्राप्त की गई उपलब्धियों को कवर किया जाना चाहिए

मंत्रालय अपेक्षाओं के अनुसार किसी भी समय योजना के दिशा -निर्देशों में संशोधन कर सकता है।

अद्यतन जानकारी

अल्‍पसंख्‍यक मामले मंत्रालय की केन्‍द्रीय क्षेत्र की योजना ‘नई मंजिल’ के लिए पांच वर्ष की अवधि हेतु 650 करोड़ रुपये की मंजूरी मिल गई है। इसमें 325 करोड़ रुपये की विश्‍व बैंक की 50 प्रतिशत सहायता राशि शामिल है। वित्‍त मंत्री ने इस योजना को मंजूरी दी। परियोजना की कुल लागत का 50 प्रतिशत देते समय विश्‍व बैंक के प्रतिनिधि ने इस प्रकार की योजना तैयार करने के लिए मंत्रालय की सराहना की।

‘नई मंजिल’ योजना अल्‍पसंख्‍यक समुदाय के लिए व्‍यापक शिक्षा और जीवन यापन हेतु एक पहल है। इस योजना का उद्देश्‍य उन अल्‍पसंख्‍यक युवाओं को फायदा पहुंचाना है, जिन्‍होंने स्‍कूल बीच में छोड़ दिया या मदरसा जैसे सामुदायिक शिक्षा संस्‍थानों से शिक्षित हैं। इसके तहत उन्‍हें प्रमाण पत्र सहित कौशल प्रशिक्षण और औपचारिक शिक्षा (कक्षा 8 या 10 तक) प्रदान की जाएगी। इससे उन्‍हें संगठित क्षेत्र में बेहतर रोजगार पाने में मदद मिलेगी और उनके जीवन स्‍तर में सुधार आएगा। यह योजना पूरे देश के लिए है।

इस योजना की क्षमता से प्रभावित होकर विश्‍व बैंक ने कहा कि वह इसी प्रकार के विकास की चुनौतियों का मुकाबला करने वाले अफ्रीका के देशों के लिए भी इस परियोजना की सिफारिश करेगा। अब मंत्रालय इस योजना के कार्यान्‍वयन के लिए कार्य कर रहा है, जिसमें निगरानी में सुधार, मूल्‍यांकन और इसी प्रकार की उद्देश्‍यों वाली मौजूदा योजनाओं का लाभ उठाना शामिल है। इस योजना के लिए मंत्रालय लगातार कोशिश कर रहा था।

स्रोत: भारत सरकार का अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय

3.13888888889

Mohd Nadeem Mar 25, 2018 07:39 AM

I am Mohd Nadeem I am interested work

Shama Parveen Mar 22, 2018 10:30 PM

NGO hi kam kr sakta h bina NGO ke bhi es yojna ka lab liya ja sakta h kya

मनोज verma Dec 07, 2017 11:09 PM

बहुत अच्छी पहल है मै ngo के द्वारा काम करुगा

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