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12 वीं पंचवर्षीय योजनान्तर्गत बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम

इस पृष्ठ में 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु दिशा -निर्देश की जानकारी दी गयी है I

पृष्ठभूमि

वर्ष  1971 की जनगणना के अनुसार, किसी जिले में अल्पसंख्यकों की 20 प्रतिशत  अथवा अधिक आबादी के एकमात्र मानदंड के आधार पर अल्पसंख्यक बहुल 41 जिलों की सूची वर्ष  1987 में तैयार की गई थी, ताकि सरकारी कार्यक्रमों और योजनाओं में इन जिलों पर विशेष  ध्यान दिया जा सके। बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम (एमएसडीपी) की संकल्पना सच्चर समिति की सिफारिशों  पर अनुवर्ती कार्रवाई की एक विशेष  पहल के रूप में की गई थी। यह 11वीं पंचवर्षीय योजना की शुरुआत में सरकार द्वारा अनुमोदित एक केंद्र प्रायोजित योजना है और जिसे वर्ष  2008-09 में 90 अल्पसंख्यक बहुल जिलों (एमसीडी) में आरंभ किया गया था। यह एक क्षेत्र विकास पहल है, जिसे सामाजिक-आर्थिक अवसंरचना का सृजन करते हुए तथा आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए अल्पसंख्यक बहुल जिलों की विकास संबंधी कमियों को दूर करने के लिए शुरु किया गया था।

कार्यक्रम का उद्‌देश्य

इस कार्यक्रम का उद्देश्य 12वीं पंचवर्षीय  योजना के दौरान अल्पसंख्यकों की सामाजिक-आर्थिक दशाओं में सुधार लाना और लोगों के जीवन स्तर को उन्नत बनाने के लिए उन्हें मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराना तथा अभिज्ञात अल्पसंख्यक बहुल जिलों में असंतुलन को कम करना है। एमएसडीपी के तहत शुरु की जाने वाली परियोजनाएं आय सृजक अवसरों को पैदा करने की योजनाओं के अलावा शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पक्के मकान, सड़के, पेयजल हेतु बेहतर अवसंरचना की व्यवस्था करने से संबंधित होंगी। योजना का उद्देश्य  अतिरिक्त संसाधन मुहैया कराते हुए तथा अल्पसंख्यकों के कल्याणार्थ अंतरों को दूर करने वाली परियोजनाएं (नवाचारी परियोजनाएं) शुरु करते हुए भारत सरकारी की मौजूदा योजनाओं के अंतरों को दूर करना होगा।

यह पहल समावेशी  तीव्र विकास प्रक्रिया तथा लोगो की जीवन स्तर में सुधार करने के लिए केंद्र एवं राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों का एक संयुक्त प्रयास होगा। इस योजना का उद्देश्य  पिछड़े अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों के लिए विकास संबंधी कार्यक्रमों पर विशेष  ध्यान देना है ताकि इनमें असंतुलन को कम किया जा सके तथा विकास की गति को तेज किया जा सके।

अंतर को दूर करने वाली परियोजनाएं भारत सरकार की मौजूदा योजना के अंतर्गत लागू दिशा -निर्देशों  के अनुरूप ही क्रियान्वित की जाएंगी। अंतरों को दूर करने वाली नवाचारी  परियोजनाएं  प्रस्तुत  एवं  अनुमोदित  परियोजना  अभिकल्पन  के  अनुसार क्रियान्वित की जाएंगी।

अल्पसंख्यक कौन हैं

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के तहत मुस्लिमों, सिक्खों, ईसाईयों, बौद्धों और पारसियों को अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में अधिसूचित किया गया है। वर्ष  2001 की जनगणना के अनुसार, देश  में अल्पसंख्यकों की प्रतिशतता देश  की कुल आबादी के 18.4% के लगभग है, जिनमें से मुस्लिम 13.4%, ईसाई 2.3%, सिक्ख 1.9%, बौद्ध 0.8%और पारसी 0.007% हैं।

कार्यक्रम के क्रियान्वयन का क्षेत्र

ब्लॉक योजना की ईकाई के तौर पर

एमएसडीपी के क्रियान्वयन हेतु योजना की ईकाई ब्लॉक होगा, न कि जिला के जैसा कि इस समय है। इससे अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों पर कार्यक्रम पर विशेष  ध्यान दिया जा सकेगा, क्योंकि इस प्रयोजनार्थ जिला एक बड़ी ईकाई था। इसके अलावा, इससे पात्र अल्पसंख्यक बहुल ब्लॉकों (एमसीबी) जो इस समय मौजूदा एमसीडी से बाहर पड़ते हैं, को कवर करने में भी मद्‌द मिलेगी।

11वीं पंचवर्षीय  योजना के दौरान पिछड़ेपन के अंगीकृत मानदण्डों के आधार पर चुने गये पिछड़े जिलों में आने वाली न्यूनतम 25% अल्पसंख्यक आबादी वाले ब्लाकों को पिछड़े अल्पसंख्यक बहुल ब्लाकों (एमसीबी) के रूप में चिन्हित किया जाएगा। 6 राज्यों (लक्षद्वीप, पंजाब, नागालैंड, मेघालय, मिजोरम तथा जम्मू एवं कश्मीर) के मामले में, जहॉँ अल्पसंख्यक समुदाय बहुसंखयक है, उस राज्य/संघ राज्य क्षेत्र में अल्पसंख्यक समुदाय के अतिरिक्त बहुसंखयकों की अल्पसंख्यक जनसंख्या का न्यूनतम कट-आफ 15% अंगीकार किया जाएगा। पिछड़े जिलों की पहचान के लिए अंगीकृत पिछड़ेपन के मानदंड (11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान अंगीकृत के समान ही) निम्नानुसार हैं-

(क)जिला स्तर पर धर्म-विशिष्ट सामाजिक-आर्थिक संकेतक -

साक्षरता दर;

महिला साक्षरता दर;

कार्य में भागीदारी दर; और

महिलाओं द्वारा कार्य में भागीदारी दर; तथा

(ख)जिला स्तर पर आधारभूत सुविधा संकेतक -

पक्की दीवार वाले मकानों की प्रतिशतता;

स्वच्छ पेय जल की सुविधा वाले मकानों की प्रतिशतता;

विद्युत सुविधा वाले मकानों की प्रतिशतता;

चुनिंदा ब्लाकों में, अधिक अल्पसंख्यक आबादी वाले गॉंवों को गाँव -स्तर की अवसंरचनाओं/परिसम्पत्तियों के सृजन हेतु प्राथमिकता दी जाएगी। परिसंपत्तियों के स्थान का चयन इस तरह से किया जाना चाहिए कि आवाह क्षेत्र में कम-से-कम 25% अल्पसंख्यक आबादी हो। 155 पिछड़े जिलों में आने वाले ऐसे कुल 710 अल्पसंख्यक बहुल ब्लाकों को वर्ष 2001 की जनगणना के आधार पर चिन्हित किया गया है।

अभिज्ञात अल्पसंख्यक बहुल ब्लाकों के बाहर स्थित अल्पसंख्यक बहुल गांवों के समूह

पिछड़े जिलों में ब्लॉकों के साथ सटे हुए समीपस्थ अल्पसंख्यक गांवों के समूह (कम से कम 50% अल्पसंख्यक आबादी वाले) जिन्हें अल्पसंख्यक बहुल ब्लाकों के रूप में चयनित नहीं गया है, चिन्हित किए जाएंगे। पूर्वोत्तर राज्यों के पहाड़ी क्षेत्रों के मामले में, ऐसे गांव जिनमें अल्पसंख्यक आबादी 25% है, चिन्हित किये जायेंगे। लगभग 500 गांव, जो अल्पसंख्यक बहुल ब्लाकों के बाहर स्थित हैं, उन्हें इन समूहों के माध्यम से कवर किया जाएगा। उपर्युक्त मापदंड को पूरा करने वाले समूहों की पहचान राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा की जाएगी। राज्य स्तरीय समिति द्वारा अभिज्ञात समूहों की सिफारिश  अधिकार-प्राप्त समिति को कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु इसके अंतिम चयन के लिए की जाएगी। अधिकार-प्राप्त समिति समूह के चयन को अंतिम रूप देगी और 12वीं पंचवर्षीय  योजना हेतु प्रत्येक समूह के लिए आबंटन की निश्चित  करेगी।

पिछड़े अल्पसंख्यक बहुल नगर/शहर

नगर/शहर  जिनकी न्यूनतम 25% अल्पसंख्यक जनसंख्या, (6 राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों के मामले में, उस राज्य/संघ राज्य क्षेत्र बहुलता में आए अल्पसंख्यक समुदायों के अतिरिक्त, अल्पसंख्यक जनसंख्या का 15%) सामाजिक-आर्थिक और मूलभूत सुविधाओं के दोनों मानदण्डों में राष्ट्रीय औसत से नीचे हैं, को कार्यक्रम के कार्यान्वयन हेतु अल्पसंख्यक बहुल नगरों/शहरों  के रूप में चिन्हित किया जाएगा। 90 एमसीडी के बाहर स्थित 53 जिलों के कुल 66 अल्पसंख्यक बहुल नगरों को कार्यक्रम के कार्यान्वयन हेतु चिन्हित किया गया है। इस कार्यक्रम में नगरों/शहरों  के अल्पसंख्यकों के सच्चक्तिकरण हेतु कौशल  एवं व्यावसायिक शिक्षा  सहित, केवल शिक्षा  के संवर्धन में ही दखल दिया जाएगा।

कार्यक्रम का कवरेज

इस प्रकार यह कार्यक्रम 196 जिलों में स्थित 710 अल्पसंख्यक बहुल ब्लाकों तथा 66 शहरों  को कवर करेगा। ब्लॉक/शहर /नगरों की सूची परिशिष्ट-I पर है। तथापि, 2011 की जनगणना के आंकड़े उपलब्ध होने पर अथवा राज्यों द्वारा किसी नये ब्लॉक/नगर के मानदण्ड के पूरा करने की सूचना मिलने पर, इसे संशोधन किया जाएगा।

बहुक्षेत्रीय विकास योजना (एमएसडी प्लान)

राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन  बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम की देख-रेख की स्पष्ट जिम्मेदारी के साथ किसी विभाग को अधिसूचित करेंगे। यह सलाह देने योग्य बात होगी कि एमएसडीपी तथा प्रधानमंत्री के नए 15 सूत्री कार्यक्रम का क्रियान्वयन राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन  में उसी विभाग की जिम्मेदारी हो। एमएसडीपी हेतु योजना तैयार करते समय राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन  अल्पसंख्यकों के कल्याणार्थ अंतरों को दूर करने वाली (मौजूदा केंद्र प्रयोजित योजनाओं के अंतर्गत शामिल) तथा अंतरों को दूर न करने वाली परियोजनाएं (नवाचारी परियोजनाएं) दोनों ही संचालित करेंगे।

एमएसडीपी हेतु योजना तैयार करते समय, राज्य सरकारें/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन  अल्पसंख्यकों के कौशल  प्रशिक्षण सहित शिक्षा , स्वास्थ्य एवं कौशल  विकास को प्राथमिकता देंगे। राज्य को दिए गए आबंटन का कम-से-कम 10% अल्पसंख्यक युवाओं को दिए जाने वाले कौशल  प्रशिक्षण से संबंधित क्रियाकलापों हेतु निर्धारित किया जाएगा। इसके अलावा, अल्पसंख्यक समुदायों की बालिकाओं में शिक्षा  को सुविधाजनक बनाने एवं बढ़ावा देने के लिए एमएसडीपी के तहत 9वीं कक्षा की अल्पसंख्यक छात्राओं को निःशुल्क साईकलें दी जा सकती हैं। छात्रा 8वीं कक्षा की निर्धारित परीक्षा उत्तीर्ण किए हुए हो और 9वीं कक्षा में पढ़ाई जारी रख रही हो, और ऐसी छात्रा गरीबी रेखा से नीचे के परिवार से संबंधित होनी चाहिए।

एमएसडीपी प्लान की तैयारी

योजना प्रक्रिया को आधारिक स्तर तक ले जाने वाले और इस कार्यक्रम में पंचायती राज संस्थानों की भागीदारी को सुनिश्चित  करने के लिए इस कार्यक्रम के तहत कवर किए गए सभी ब्लॉकों में ब्लॉक स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। ब्लॉक स्तरीय समिति ग्राम स्तर पर योजना (बेसलाइन सर्वेक्षण के आधार पर आवश्यक  विभिन्न परियोजनाओं वाली) तैयार करेगी। फिर यह समिति जिला स्तरीय समिति को प्रधानमंत्री के नए 15 सूत्री कार्यक्रम के लिए योजना की सिफारिश  करेगी। शहरों /नगरों के लिए परियोजनाओं का प्रस्ताव स्थानीय निकाय द्वारा तैयार किया जाएगा और जिला स्तरीय समिति को प्रस्तुत किया जाएगा। जिला स्तरीय समिति योजना प्रस्ताव की जांच करेगी और 15 सूत्री कार्यक्रम के लिए इसकी सिफारिश  राज्य स्तरीय समिति को करेगी। राज्य स्तरीय समिति राज्य द्वारा केंद्रीय मंत्रालय की समानांतर योजनाओं के अनुमोदित मानको से राज्य द्वारा प्राप्त मानकीकृत लागत के आधार पर परियोजनाओं को अनुमोदन प्रदान करेगी। बिना मानकीकृत लागत वाली अन्य योजनाओं के मामले में राज्य स्तरीय समिति राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के एसओआर के आधार पर परियोजनाओं को अनुमोदित करेगी। राज्य स्तरीय समिति 10 करोड़ रु0 तक की लागत वाली परियोजनाओं को अनुमोदित करेगी। केंद्र की अधिकार-प्राप्त समिति ब्लॉक/शहर  तथा गांवों के समूह की समग्र योजना को अनुमोदित करेगी तथा 10 करोड़ रु0 से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी देगी। इस अनुमोदन के आधार पर मंत्रालय तथा राज्य सरकार द्वारा निधियां जारी की जाएंगी।

योजना इस ढंग से तैयार की जाएगी कि या तो केंद्र सरकार की चल रही योजनाओं/कार्यक्रमों की निधियों को बढ़ाकर 'विकास संबंधी कमियों' को दूर किया जाएगा अथवा ऐसी परियोजनाओं का प्रस्ताव किया जाएगा, जिन्हें केंद्र तथा राज्य सरकारों की मौजूदा योजनाओं/कार्यक्रमों में शामिल नहीं किया गया है तथा 12वीं पंचवर्षीय  योजना अवधि के दौरान कार्यान्वयन हेतु वर्ष -वार वित्तीय एवं वास्तविक चरणबद्धता का उल्लेख करेगा।

यह सुनिश्चित  किया जाएगा कि बहु-क्षेत्रीय विकास योजना में शामिल परियोजनाएं राज्य/केन्द्र सरकार की किसी योजना के तहत अथवा आरएसवीवाई/बीआरजीएफ और बीएडीपी में सम्बद्ध ब्लाकों से संबंधित किसी भी निधि स्रोत के तहत स्वीकृत अथवा प्रस्तावित न हों। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि लक्षित एमसीबी/शहरों /नगरों/गांवों में क्रियान्वित किए जा रहे इन्हीं उद्देश्यों  वाली अन्य सरकारी तौर पर वित्तपोषित  योजनाओं के साथ इनकी पुनरावृत्ति न हो। यह भी सुनिश्चित  किया जाना होगा कि बहु-क्षेत्रीय विकास योजना वार्षिक  योजनाओं और 12वीं पंचवर्षीय  योजना के अनुरूप हो तथा ब्लॉकों/शहरों /नगरों/गांवों को दिए जा रहे संसाधन मौजूदा योजनाओं/कार्यक्रमों के अंतर्गत इन क्षेत्रों को किए जाने वाले नियमित आबंटन के अलावा हों।

बहुक्षेत्रीय विकास योजना के तहत, प्राथमिकता प्रदत्त प्रत्येक योजनाओं से संबंधित

धारणा पत्र शामिल होगा, जिसके साथ अंतराल को स्पष्ट तौर पर रेखांकित करते हुए प्रस्ताव का औचित्य सिद्ध करने के आशय का सामाजिक-आर्थिक व्यवहार्यता रिपोर्ट, इसकी जटिलताएं, लक्ष्य, कार्यनीति, परिणाम और लाभ, दूरगामिता, वर्ष वार वित्तीय और भौतिक विवरण के साथ परियोजना का अनुमानित लागत, निजी निवेश  भागीदारी (यदि कोई हो), परियोजना की स्थान-स्थिति, भूमि की उपलब्धता और संभावित लाभार्थी, कार्यान्वयन एजेंसी, परियोजना की अवधि, कार्यान्वयन के लिए वर्तमान एवं प्रस्तावित तंत्र, प्रबंधन/संचालन और सृजित परिसंपति के अनुरक्षण संबंधी विवरण शामिल होगा।

विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर)

  1. 10 करोड़ रु0 से अधिक की अनुमानित परियोजना लागत वाली परियोजनाओं के लिए डीपीआर मंत्रालय को भेजे जाएंगे।
  2. डीपीआर राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के संबंधित लाईन डिपार्टमेंट द्वारा अथवा परियोजना संचालित कर रही एजेंसी के माध्यम से ही तैयार किया जाएगा।
  3. प्रत्येक परियोजना प्रस्ताव के साथ विस्तृत परियोजना रिपोर्ट होनी चाहिए। डीपीआर में अन्य बातों के अलावा आधारभूत सूचना का उल्लेख होना चाहिए तथा इसके औचित्य, लागत, आवश्यक  धन, परियोजना स्थल के आस-पास उपलब्ध सुविधाएं, विस्तृत तकनीकी विशिष्ट ताएं आदि जैसे आर्थिक और तकनीकी व्यवहार्यता की दृष्टि से पूर्ण होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त डीपीआर में निम्नलिखित का उल्लेख होना चाहिए-

इस आशय  का प्रमाणन कि लागत अनुमान राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के सक्षम प्राधिकारी द्वारा दी गई स्वीकृति अनुसार है और लागत सम्बद्ध राज्य/संघ राज्य क्षेत्र में लागू अद्यतन दर अनुसूची (एसओआर) पर आधारित है;

विनियामक और सांविधिक अनापत्तियों (क्लियरेंस) की स्थिति।

प्रत्येक परियोजना रिपोर्ट से संबंधित डीपीआर की दो प्रतियां अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय को जांच और क्लियरेंस के लिए भेजी जाएंगी।

बहुक्षेत्रीय विकास योजना की तैयारी के समय अनुसरणीय सिद्धांत -

योजना की तैयारी के लिए निम्नलिखित सिद्धांत निर्धारित किए गए हैं

  1. किसी ब्लॉक द्राहर के लिए योजना सामाजिक-आर्थिक स्थिति तथा आधारभूत सुविधाओं में सुधार की अपेक्षा पर आधारित होगी।
  2. योजना में विभिन्न लक्षित क्षेत्रों में प्राथमिकता प्रदत्त परियोजनाओं अर्थात्‌ प्राथमिक/माध्यमिक शिक्षा , पेयजल आपूर्ति, विद्युत, स्वास्थ्य, स्वच्छता, आवास और आय सृजक क्रियाकलापों का उल्लेख होना चाहिए। ऐसा किसी जिले के समग्र विकास के लिए अपेक्षित आवश्यक  अवसंरचना के लिए भी किया जाएगा। इसमें जिलों की सामाजिक-आर्थिक मानदंडों में सुधार के लिए बच्चों को विद्यालय भेजने, महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने आदि जैसे सामाजिक अभियान चलाने से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हो सकती हैं।
  3. यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों के लिए उपलब्ध कराई गई धनराशि इन जिलों के लिए अतिरिक्त संसाधन हैं और इन्हें केंद्र अथवा राज्य सरकार द्वारा पहले से संवाहित निधियों के साथ नहीं मिलाया जाना चाहिए।
  4. यह सुनिश्चित  किया जाना चाहिए कि लक्षित जिलों में समान प्रयोजन से कार्यान्वित सरकारी तौर पर धन सहायता प्राप्त योजनाओं के साथ पुनरावृत्ति न हो।
  5. अल्पसंख्यक समुदायों के सामाजिक, आर्थिक तथा आधारभूत सुविधाओं के मानदंडों में सुधार के लिए सम्बद्ध जिले की वंचना स्तर के अनुसार ही ध्यान दिया जाना चाहिए और संसाधन उपलब्ध कराया जाना चाहिए, किन्तु ऐसे जिलों को उपलब्ध कराई जाने वाली वित्तीय सहायता की सीमा पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
  6. अभिनिर्धारित जिलों को राष्ट्रीय औसत के अनुरूप लाने के लिए भौतिक परिसंपत्ति सृजित करने हेतु परियोजनाएं, आजीविका सहायता उपलब्ध कराने और सेवाओं के अनुकूलन के अपेक्षित अवसंरचनात्मक संपर्क उपलब्ध कराने के लिए होनी चाहिए।
  7. कार्यक्रम के तहत लागत में वृद्धि की अनुमति नहीं दी जाएगी। लागत की वृद्धि के मामलें में इसे राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
  8. योजना निरूपण, कार्यान्वयन और निगरानी के साथ-साथ सभी स्तर पर स्व-सहायता  समूहों,  गैर  सरकारी  समूहों  और  पीआरआई  की  भागीदारी सुनिश्चित  की जानी चाहिए।
  9. प्रस्तावित परियोजनाएं निरंतर चलते रहने योग्य होनी चाहिए और परिसंपतियों का सृजन सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए, ताकि परियोजना समाप्ति के बाद भी उनकी उपयोगिता बनी रहे।
  10. बहुक्षेत्रीय विकास कार्यक्रम केन्द्र/राज्य एजेंसियों के माध्यम से ही कार्यान्वित की जाएगी। तथापि, राज्य यह निर्णय ले सकेंगे कि परियोजना को पात्र, खयातिप्राप्त अनुभवी एजेंसी तथा खयातिप्राप्त एवं व्यापक रूप से मान्य गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से करा सकें, किन्तु इसके औचित्य का उल्लेख प्रस्ताव में किया जाना होगा।
  11. इस योजना के तहत नए पदों के सृजन की पूरी-पूरी मनाही है। यह सुनिश्चित  करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन  की होगी कि इस कार्यक्रम के तहत सृजन हेतु प्रस्तावित परिसंपतियों को संचालित करने के लिए अपेक्षित कर्मचारी पहले से उपलब्ध हैं अथवा उपलब्ध कराए जाएंगे। केन्द्र सरकार के संसाधनों से किसी भी आवर्ती व्यय की पूर्ति इस योजना के तहत नहीं की जाएगी और यह सुनिश्चित  करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन  की होगी कि इस कार्यक्रम के तहत सृजन हेतु प्रस्तावित परिसंपतियों का रख-रखाव उनके द्वारा किया जाए।
  12. सभी योजनाएं/डीपीआर सम्बद्ध राज्य में अल्पसंख्यक कल्याण/कार्य से जुडे़ विभाग द्वारा अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय को अग्रसारित की जाएंगी। पत्राचार के मामले में भी संचार की यही प्रणाली लागू होगी।
  13. परियोजना निर्धारण कार्य में निम्नलिखित मानदंड सहायक होंगे -

(क) शिक्षा , स्वास्थ्य और कौशल  विकास से जुड़ी परियोजनाओं पर विशेष  ध्यान दिया जाना चाहिए;

(ख) स्व-रोजगार/आय सृजन से जुड़ी परियोजनाएं ऋण आधारित होनी चाहिए न कि सब्सिडी आधारित तथा इस प्रकार तैयार की जानी चाहिए कि बैंकों/वित्तीय संस्थानों और लाभार्थी योगदान के माध्यम से ऋण के रूप में बड़ा निवेश  किया जा सके। तथापि, केन्द्र सरकार की सब्सिडी आधारित योजनाओं के मामले में इसमें ढील दी जा सकेगी क्योंकि योजना के कार्यक्षेत्र में विस्तार हेतु संसाधनों में वृद्धि नितान्त आवश्यक  है। ऐसे मामलें में, सब्सिडी को उस स्तर पर रखा जाना चाहिए, जैसा केन्द्र सरकार की योजनाओं/कार्यक्रमों के तहत प्रदान किया गया है।

(ग) ऐसे अल्पसंख्यक बहुल ब्लॉकों/शहरों /नगरों/गावों में कार्यान्वयनाधीन किसी वर्तमान कार्यक्रम के दिशा -निर्देशों  में कोई बदलाव नहीं होगा, जिसके लिए इस योजना के तहत अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी।

14 सामाजिक-आर्थिक अवसंरचना और समुदाय परिसंपति के सृजन के लिए परियोजना निर्धारण कार्य में निम्नलिखित मानदंड सहायक होंगे -

(क)   भूमि अधिग्रहण लागत को इस कार्यक्रम के तहत शामिल नहीं किया जा सकेगा। इसे राज्य/संघ राज्य क्षेत्र द्वारा वहन किया जाएगा।

(ख)   इस कार्यक्रम के लिए वित्तीय सहायता का उपयोग प्रशासनिक भवनों के नवीकरण अथवा निर्माण, प्रतिद्गठान लागत/कर्मचारी लागत आदि के मद में नहीं किया जा सकेगा।

(ग)   परियोजना कार्यान्वयन प्राधिकरणों द्वारा इस कार्यक्रम से कोई भी कर्मचारी घटक - कार्य प्रभारित अथवा नियमित - नहीं सृजित किया जाएगा।

योजना अनुमोदन

इस कार्यक्रम के अंतर्गत योजना अभिज्ञात ब्लॉक/शहर /समूह के स्तर पर बनायी जाएगी। एमसीबी के रूप में अभिज्ञात ब्लॉकों के लिए एमएसडीपी (ब्यौरा पैरा 8 में) हेतु गठित ब्लॉक स्तरीय समिति योजना बनाएगी और इसे प्रधानमंत्री के नए 15 सूत्री कार्यक्रम हेतु जिला स्तरीय समिति के पास भेजेगी। शहरों /नगरों के मामले में इस कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए अभिज्ञात शहरी  क्षेत्र के स्थानीय निकाय द्वारा योजना बनायी जाएगी और जिला स्तरीय समिति को प्रस्तुत की जाएगी। ब्लॉक स्तरीय समिति ऐसे ब्लॉकों के लिए गठित की जाएगी, जिनके  अल्पसंख्यक गावों के समूहों को ईसी द्वारा अनुमोदित किया गया है। ऐसे समूहों के लिए योजना ब्लॉक स्तरीय समिति द्वारा बनायी जाएगी और जिला स्तरीय समिति को भेजी जाएगी।

जिला स्तरीय समिति

जिला स्तरीय समिति योजना प्रस्ताव की संवीक्षा करेगी और 15 सूत्रीय कार्यक्रम हेतु इसे राज्य स्तर की समिति को सिफारिश  करेगी। समितियां यह सुनिश्चित  करेंगी कि जिले के लिए बहुक्षेत्रीय विकास योजना, कार्यक्रम के विवरण में उल्लिखित अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है

(क) सम्बद्ध जिले को राष्ट्रीय औसत के अनुकूल लाने के लिए आधारभूत सुविधा मानदंडों और अल्पसंख्यकों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए परियोजनाओं का प्रस्ताव करना;

(ख)  कमी/अंतराल को पूरा करने के लिए परियोजनाओं का प्रस्ताव करना, न कि बजट सहायता प्राप्त किसी वर्तमान योजना को समान प्रयोजन से रखने के लिए;

(ग) यह सुनिश्चित करना कि अल्पसंख्यक बहुल जिलों के लिए उपलब्ध कराई गई धनराशि इन जिलों के लिए अतिरिक्त संसाधन हैं और इन्हें राज्यों में संवाहित राज्य सरकार की निधियों के साथ नहीं मिलाया जाना चाहिए। अल्पसंख्यक बहुल जिलों से निधियां अन्यत्र लगाया जाना रोकने के लिए सम्बद्ध जिले की पिछले वर्ष  की धनराशि को उपयोग में लाए जाने को आधार माना जाएगा।

(घ)  उन चुनिन्दा क्षेत्रों के लिए परियोजनाओं का प्रस्ताव करना, जिन्हें सम्बद्ध राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों की वार्षिक  योजनाओं तथा ग्याहरवीं पंचवर्षीय  योजना के कार्यक्रमों में और केन्द्र सरकार के कार्यक्रम/योजनाओं में शामिल नहीं किया गया है किन्तु जिले के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता हो।

(ड.) यह सुनिश्चित  करना कि राज्य और केन्द्रीय योजनाओं के तहत कार्यान्वित अथवा कार्यान्वयन हेतु प्रस्तावित योजनाओं का समान प्रयोजन से पुनरावृत्ति न हो।

(च)   अल्पसंख्यक बहुल गांवों/स्थान स्थितियों पर मुखय रूप से ध्यान केन्द्रित करने वाली योजनाओं का चयन करना।

(छ)   सम्बद्ध क्षेत्र के संसाधनों को न्यायोचित ढंग से संवितरित करना, ताकि संगतपूर्ण मानदंडो को राष्ट्रीय औसत से ऊपर लाया जा सके।

(ज)   जहां कहीं तंत्र स्थापित है वहां पंचायती राज्य संस्थाओं/स्थानीय निकायों को बहुक्षेत्रीय विकास योजनाओं में लगाया जाना।

(झ)   यह सुनिश्चित  करना कि सम्बद्ध जिले से संबंधित बहुक्षेत्रीय विकास योजना उस जिले में संसाधनों की उपलब्धता और कार्यक्षेत्र को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

(ञ)   यह सुनिश्चित  करना कि बहुक्षेत्रीय विकास योजना वार्षिक  योजनाओं और ग्याहरवीं पंचवर्षीय  योजना को शामिल करते हुए जिले के अंतर्गत समग्र नियोजन प्रक्रिया के अनुरूप तैयार किया गया है।

उपायुक्त/कलेक्टर/जिला मिशन  निदेश क जैसा भी मामला हो, जिला योजना को बनाने और इसके कार्यान्वयन और प्रभावी निगरानी रखने के लिए सहायता प्रदान करेंगे।

राज्य/संघ राज्य क्षेत्र स्तरीय समिति

अल्पसंख्यकों के कल्याणार्थ प्रधान मंत्री के नए 15-सूत्रीय कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए मुखय सचिव की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय समिति सम्बद्ध राज्य/संघ राज्य क्षेत्र में बहुक्षेत्रीय विकास कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए राज्य स्तरीय समिति का कार्य भी करेगी। वर्तमान सदस्यों के अतिरिक्त, इसमें सभी सम्बद्ध विभाग के सचिवों, वित्त व योजना विभागों के सचिवों, सम्बद्ध जिले की जिला नियोजन समिति/उप आयुक्त तथा राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के अग्रणी बैंक के प्रमुख को सदस्य के रूप में शामिल किया जा सकता है। बैठक से संबंधित सूचनाएं अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय को भेजी जाएंगी, ताकि मंत्रालय का कोई अधिकारी बैठक में शामिल हो सके।

राज्य स्तरीय समिति (एसएलसी) 10 करोड़ रु0 तक की परियोजनाएं अनुमोदित करेगी।परियोजनाओं को अनुमोदित करते समय एसएलसी निम्नलिखित सुनिश्चित करेगी -

i) यह देखेगी कि योजना प्रस्ताव एमएसडीपी की परिधि में है अर्थात्‌ परियोजनाएं एमएसडीपी के उद्देश्यों  और दिशा -निर्देशों  के अनुरूप हैं।

ii) यह अपने आपकों संतुष्ट  करेगी कि प्रस्तावित स्थान पर परियोजना की जरुरत और औचित्य है।

iii) यह सुनिश्चित करेगी कि राज्य द्वारा अनुमोदित एकल परियोजनाओं की लागत केंद्रीय मंत्रालयों की अनुरूप योजनाओं के मानकों/बनावट से ली गई मानक लागत के अनुसार है।

iv) यह सुनिश्चित करेगी कि एमएसडीपी के अंतर्गत परिसंपत्तियां सृजन के कैचमेंट क्षेत्र में अल्पसंख्यक बहुल जनसंख्या है।

v) यह सुनिश्चित करेगी कि केंद्र और राज्य सरकार की अन्य योजनाओं की परियोजनाओं का दोहरीकरण न हो रहा है।

vi) यह सुनिश्चित करेगी कि परियोजना के लिए भूमि उपलब्ध है।

vii) यह    सुनिश्चित    करेगी  कि    सृजित की    गई    परिसंपत्तियों  का    स्वामित्व सरकारी/सरकारी निकायों के पास हो।

viii) यह सुनिश्चित करेगी कि राज्य सरकार भविष्य  में आवर्ती व्यय करने में सक्षम हो और परियोजना के लिए जरुरी स्टॉफ उपलब्ध करा सके।

ix) यह सुनिश्चित करेगी की केंद्र और राज्य सरकार के बीच परियोजना की निधियों की हिस्सेदारी का तरीका उस परियोजना के संबंधित केंद्र प्रायोजित योजना के अनुरूप है।

मंत्रालय के एक प्रतिनिधि को राज्य स्तरीय समिति की बैठक में भाग लेने के लिए भी तैनात किया जाएगा। राज्य स्तरीय समिति ब्लॉक/शहरों /समूहों पर अनुमोदित परियोजनाओं के आधार पर ब्लॉक/शहर /समूह की योजना अधिकार प्राप्त समिति को विचारार्थ भेजेगी। प्रस्तावित योजना दिए गए परिशिष्ट-II के प्रारूप के अनुसार भेजी जाएगी।

तथापि, 10 करोड़ रु0 की और इससे अधिक की लागत वाली परियोजनाएं विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, समर्थन आदि के साथ केंद्र में अधिकार प्राप्त समिति को भेजी जाएगी।

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय में अधिकार प्राप्त समिति

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय में अधिकार प्राप्त समिति (ब्यौरे पैरा 15 में दिए गए हैं) ब्लॉक/शहरों /समूहों की समग्र योजना और दस करोड़ से अधिक लागत वाली परियोजनाओं को अनुमोदन प्रदान करेगी। केंद्र में अधिकार प्राप्त समिति समग्र योजनाओं की जांच करेगी और देखेगी कि योजना प्रस्ताव एमएसडीपी के दिशा निर्देशों  के अनुरूप हैं कि नहीं। अधिकार प्राप्त समिति परियोजनाओं को राज्य सरकारों की जरूरतों की तुलना में योजना परिव्ययों पर निर्भर होते हुए उन्हें कम या ज्यादा कर सकती है और अन्त में योजना को अनुमोदित कर सकती है।

निधियों की निर्मुक्ति

  1. कार्यक्रम के अंतर्गत परियोजनाएं केंद्र सरकार की मौजूदा योजनाओं के अंतर को भरने के लिए या अल्पसंख्यक समुदायों की क्षेत्र विशेष  की जरूरतों को पूरा करने के लिए अभिनव परियोजनाओं के लिए हो सकती है। परियोजनाओं के मौजूदा योजनाओं के अंतर को भरने के लिए परियोजनाओं हेतु निधियन का स्वरूप वही होगा जो सरकार की संबंधित योजनाओं में होता आ रहा है। निधियों को दो किस्तों, 50% प्रत्येक और दूसरी किस्त पहली किस्त के 60% उपयोग करने के पश्चात्  जारी किया जाना, जारी रखा जाएगा।
  2. अभिनव परियोजनाओं के मामले में केंद्र और राज्यों के बीच में निधियों की हिस्सेदारी 6040 अनुपात में और उत्तर पूर्वी राज्यों में 8020 होगी। इसके अतिरिक्त अभिनव परियोजनाओं के लिए निधियों का केंद्रीय हिस्सा 30%, 30%  और 40% की तीन किस्तों में जारी किया जाएगा। ऐसी परियोजनाओं के लिए दूसरी किस्त राज्य को जारी किए गए 50% और केंद्रीय हिस्से के 50% उपयोग के पश्चात्  जारी की जाएगी। तीसरी किस्त राज्य के हिस्से की पूर्ण निर्मुक्ति और निर्मुक्त किए गए केंद्रीय हिस्से के 50% उपयोग के पश्चात्  जारी की जाएगी। निधियों की निर्मुक्ति पहले किए गए परियोजना-वार के बजाय ब्लॉक/शहर /नगर-वार की जाएगी।
  3. निधियों की निर्मुक्ति ब्लॉक, द्राहर और समूह को योजना-वार इकाई मानकर की जाएगी। पहली किस्त अधिकार प्राप्त समिति से योजना को अनुमोदन मिलने के पश्चात्  की जाएगी बर्शते  कि एमएसडीपी के अंतर्गत योजनाओं के लिए पृथक खाते रखे जाएं और ब्यौरे संबंधित केंद्रीय मंत्रालय को संपत्तियों के सही रिकार्ड रखने और दोहरी गणना करने और दोहरीकरण से बचने के लिए भेजे जाएंगे।
  4. राज्य द्वारा निधियों की उत्तरवर्ती किस्तों की निर्मुक्ति के लिए किए गए आग्रह के साथ होने चाहिए-  उपयोग प्रमाण पत्र (यूसी), तिमाही प्रगति रिपोर्टें (क्यूपीआर),परिवर्तनात्मक परियोजनाओं के मामले में राज्य के हिस्से को जारी करने के संबंध में रिपोर्ट यूसी को निर्धारित आरूप (अनुलग्नक-III) में तभी भरा जाए जब कार्यान्वयन एजेंसी द्वारा परियोजना पर व्यय उठा लिया गया हो। राज्य सरकार में अल्पसंख्यक कार्यों से संबंधित विभाग के सचिव द्वारा यूसी पर हस्ताक्षर किए हुए होने चाहिए। अगली किस्तों की निर्मुक्ति यूसी और अन्य संबंधित दस्तावेजों की प्राप्ति के पश्चात्  ही संस्तुत की जाएगी।

अनुमोदित परियोजनाओं का कार्यान्वयन

  1. कार्यक्रमों का कार्यान्वयन संबंधित राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन  की जिम्मेदारी होगा।  परियोजनाओं  का  निष्पादन पंचायती  राज्य  संस्थानों/लाइन विभाग/एजेंसियों/अनुसूचित क्षेत्र परिषदों द्वारा राज्य/संघ राज्य क्षेत्र में परिचलित कार्यान्वयन प्रणाली के अनुसार किया जाएगा।
  2. अंतर भरने वाली परियोजनाओं के मामले में कार्यान्वयन करने वाली एजेंसी सामान्यतः वही एजेंसी होगी जिसने प्रारंभिक योजना का कार्यान्वयन किया है जिसके लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। तथापि, यदि राज्य/संघ राज्य क्षेत्र परियोजना किसी अन्य एजेंसी के माध्यम से करवाने का प्रस्ताव करते हैं तो उसी को अधिकार प्राप्त समिति को योजना अनुमोदन के साथ प्रस्तावित किया जाना चाहिए।
  3. अभिनव परियोजनाओं (अंतर न भरने वाली परियोजनाएं) के मामले में कार्यान्वयन एजेंसी को परियोजना रिपोर्ट का भाग होना चाहिए और अधिकार प्राप्त समिति को भेजे गए योजना प्रस्ताव में भी इसे इंगित करना चाहिए।

लागत में वृद्धि

बहुक्षेत्रीय विकास कार्यक्रम के तहत स्वीकृत परियोजनाओं के लागत में वृद्धि, चाहे किसी भी कारण से हो, से संबंधित किसी भी प्रस्ताव पर विचार नहीं किया जाएगा। ऐसे सभी मामलों में क्षति का वहन राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।

प्रशासनिक लागत

  1. कार्यक्रम के अंतर्गत कुल आबंटन का अधिकतम 3% प्रशासनिक और संबद्ध व्ययों के लिए निर्धारित किया जाएगा। इसमें से 1% आईईसी क्रियाकलापों और केंद्रीय स्तर पर व्यय के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। आबंटन का 2% राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर ब्लॉक स्तर सहायकों को रखने से संबंधित व्ययों सहित (ब्यौरे पैरा 14 पर हैं) प्रशासनिक और संबद्ध व्ययों हेतु उपयोग किया जा सकता है।
  2. अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रशासनिक लागत हेतु प्रस्तावों के अनुमोदन को सहायता देने के लिए, अनुमोदन योग्य अनुमानित व्यय सहित मदों की एक सूची प्रदान करेगा। तब तक राज्य/संघ राज्य अपनी जरूरतों के हिसाब से प्रशासनिक लागत हेतु अपने प्रस्ताव भेज सकते हैं।

निगरानी तंत्र

  1. विभिन्न स्तरों पर समितियों की निगरानी सर्रंचना के अतिरिक्त कार्यक्रमों पर निगरानी हेतु एक स्वतंत्र निगरानी प्रणाली और समुदाय की सहभागिता के साथ एक मजबूत निगरानी तंत्र

होगा। इस प्रकार कार्यक्रम के निगरानी निम्नलिखित प्रणालियों के माध्यम से की जाएगी -

  • ब्लॉक से केंद्र की ओर आरंभ होने वाली विभिन्न स्तरों पर गठित समितियों द्वारा निगरानी
  • स्वतंत्र एजेंसी अथवा योग्य निरीक्षकों द्वारा निगरानी
  • राज्य, क्षेत्रीय, राज्य और क्षेत्रीय स्तरों पर सम्मेलनों और अधिकारियों द्वारा परियोजना स्थलों के दौरों के माध्यम से निगरानी
  • सामाजिक लेखा तंत्र के माध्यम से समुदाय की सहभागिता के साथ निगरानी
  • विभिन्न स्तरों पर समितियों के माध्यम से निगरानी

एमएसडीपी के लिए ब्लॉक स्तर समिति ब्लॉक स्तर पर कार्यक्रम के निगरानी के लिए जिम्मेदार होगी। यह समिति तीन माह में एक बार बैठक करेगी और इसकी रिपोर्ट प्रधानमंत्री के 15 सूत्री कार्यक्रम के लिए जिला स्तरीय समिति (डीएलसी) को भेजेगी। ब्लॉक स्तरीय समिति को कार्यक्रम के कार्यान्वयन हेतु प्रत्येक ब्लॉक में लगाई जाने वाले ब्लॉक स्तरीय सहायकों (ब्यौरे पैरा 13 में हैं) से भी सहायता मिलेगी। जिला स्तरीय समिति एमएसडीपी के अंतर्गत कार्यान्वयन किए जाने वाली परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा हेतु त्रैमासिक बैठकें करेंगी और रिर्पोटें अगली तिमाही के 15वें दिन तक प्रधानमंत्री के 15 सूत्री कार्यक्रम के लिए जिला स्तरीय समिति (डीएलसी) को भेजेगी। एसएलसी को कार्यक्रम के अंतर्गत प्रगति की समीक्षा करने के लिए तीन माह में एक बार बैठक करनी चाहिए और तिमाही के अंत के एक महीने के अंदर इसकी रिपोर्ट अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय को भेज देनी चाहिए। केंद्र की अधिकार प्राप्त समिति निरीक्षण समिति का भी कार्य करेगी और कार्यक्रम के कार्यान्वयन की निगरानी भी करेगी।

स्वतंत्र एजेंसी/योग्य निरीक्षकों द्वारा निगरानी

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय विखयात वाह्‌य एजेंसियों और योग्य निरीक्षकों काम पर रखते हुए एक स्वतंत्र निगरानी तंत्र का निर्माण करेगी। इस प्रणाली से कार्यक्रम के कार्यान्वयन के संबंध में राज्य-संघ राज्य क्षेत्र-वार आवधिक फीडबैक मिलेगा, जिसका आवश्यक  सुधारात्मक कार्रवाई करने के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के साथ सांझा भी किया जाएगा।

समुदाय की सहभागिता के साथ निगरानी-सामाजिक लेखा

कार्यक्रम की निगरानी और मूल्यांकन में समुदाय को शामिल करने के लिए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा सामाजिक लेखा का एक उपयुक्त तंत्र अपनाया जाएगा। राज्य/संघ राज्य क्षेत्र जिला और ब्लॉक स्तरीय प्रशासन  सामाजिक लेखा प्रणाली के सफल कार्यान्वयन के लिए अपना पुरा सहयोग प्रदान करेंगे। समुदाय के प्रमुख सदस्यों से प्रत्येक ब्लॉक में हुए कार्यों की निगरानी करने के लिए सामाजिक लेखा समिति नामक एक समिति गठित की जाएगी।

सम्मेलन और दौरों के माध्यम से निगरानी

इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रगति की राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर निगरानी रखने के लिए नियमित बैठकें आयोजित की जाएंगी। कार्यक्रम से संबंधित अधिकारी और स्टॉफ कार्यकम का जल्द कार्यान्वयन और गुणवत्ता का पालन सुनिश्चित  करने के लिए परियोजना स्थलों का नियमित दौरा करेंगे। राज्य/जिला अधिकारियों द्वारा विखयात प्रयोगशाला  सहुलियतों के माध्यम से नियमित गुणवत्ता परीक्षा की जाएंगी। तिमाही के अंत में राज्य सरकार/संघ राज्य प्रशासन  प्रत्येक परियोजना के संबंध में की गई प्रगति रिपोर्ट करेंगे। कार्यान्वयन की परियोजना-वार प्रगति, तिमाही आधार पर इस कार्य के लिए अनुलग्नक-IV में निर्धारित तिमाही प्रगति रिपोर्ट (क्यूपीआर) के प्रारुप और ऑनलाईन जब आईटी सक्षम प्रणाली शुरु हो जाती है, रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। कोई अतिरिक्त सूचना प्रारूप में दी जाए। ऐसी क्यूपीआर की कागजी प्रति तिमाही के खत्म हो जाने के 15 दिनों के भीतर अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव तक पहुंच जानी चाहिए।

ब्लॉक स्तरीय समिति

जिला मजिस्ट्रेट प्रत्येक अल्पसंख्यक बहुल ब्लॉक (एमसीबी) के लिए ब्लॉक स्तरीय समिति (बीएलसी) गठित करेगा। ब्लॉक स्तरीय समिति का गठन निम्न प्रकार से होगा –

  • पंचायती राज का ब्लॉक स्तरीय मुखिया
  • खंड विकास अधिकारी अध्यक्ष सह-अध्यक्ष
  • ब्लॉक  स्तर अधिकारी     (बीएलओ)    शिक्षा सदस्य
  • ब्लॉक  स्तर अधिकारी     (बीएलओ)    स्वास्थ्य सदस्य
  • ब्लॉक  स्तर अधिकारी     (बीएलओ)    आईसीडीएस  सदस्य
  • ब्लॉक  स्तर अधिकारी     (बीएलओ)    कल्याण      सदस्य
  • मुखय स्थानीय बैंक अधिकारी प्रधानाचार्य, आईटीआई, यदि कोई हो सदस्य अल्पसंख्यकों के लिए कार्य करने वाले विख्यात  जिला मजिस्ट्रेट द्वारा एनजीओ/सिविल सोसाईटी के तीन प्रतिनिधि नामित सदस्य ब्लॉक स्तरीय समिति ब्लॉक के अल्पसंख्यकों द्वारा महसुस की गई जरूरतों के आधार पर ब्लॉक की योजना तैयार करने के लिए जिम्मेदार होंगे। समिति ब्लॉक स्तर पर कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए भी जिम्मेदार होगी।

ब्लॉक स्तरीय सहायक

अल्पसंख्यक समुदायों और सरकारी कार्यक्रमों के मध्य सेतु का कार्य करने के लिए उनको दी गई जिम्मेदारी के निर्वहन हेतु ठेकागत आधार पर ब्लॉक स्तर पर एक सुविधाप्रदाता लगाया जाएगा। सुविधाप्रदाता कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार जिला नोडल अधिकारी के सीधे नियंत्रण और देख-रेख के अधीन काम करेगा। ब्लॉक स्तरीय सुविधाप्रदाता को 10000/-से 15000/- रुपये मासिक पारिश्रमिक और 5000/- अधिकतम कार्यक्रम के प्रशासनिक लागत से टीए/डीए और अपने संचालन और क्रियाकलापों के लिए भुगतान किया जा सकता है।

सुविधाप्रदाता को विशेष तः सामाजिक क्षेत्र में दो वर्षों  के कार्य अनुभव के साथ स्नातक होने चाहिए। राज्य सरकार/संघ राज्य प्रशासन  सहायकों के लिए सही अर्हताएं निर्धारित करेंगे जिसके विस्तृत मानक यहां दिए गए हैं और समाचार-पत्रों में खुले आवेदन के जरिए एक पारदर्शी  प्रक्रिया के जरिए सहायकों को रखेगी। संविधा सेवा की निबंधन एवं शर्तें  राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा निर्धारित की जाएंगी।

ब्लॉक स्तरीय सुविधाप्रदाता के निम्नलिखित कार्य होंगे -

  1. सरकारी संस्थानों और अल्पसंख्यक समुदायों के मध्य सेतु का कार्य यह सुनिश्चित  करने के लिए करना कि कार्यक्रमों का लाभ उन तक उचित ढंग से पहुंचे।
  2. ब्लॉक स्तरीय समिति को जिला स्तरीय समिति हेतु इसकी सिफारिशों  के लिए और परियोजना के कार्यान्वयन के लिए,योजना प्रस्ताव की जांच करने के लिए जरूरी सहयोग देना।
  3. सुविधाप्रदाता कार्यक्रम के लिए प्रगति रिपोर्ट और अन्य जरूरी रिर्पोटें तैयार करेगा।
  4. सुविधाप्रदाता ब्लॉक स्तर पर सामाजिक लेखा समिति को आवश्यक  सहयोग प्रदान करेगा।

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय में अधिकार प्राप्त समिति

अल्पसंख्यक बहुल जिलों की योजना में परियोजनाओं के मूल्यांकन, अनुशंसा  और स्वीकृति के लिए 'बहुक्षेत्रीय विकास कार्यक्रम से सम्बद्ध अधिकारप्राप्त समिति' होगी। समिति की संरचना इस प्रकार होगी

  1. सचिव, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय   -     अध्यक्ष
  2. व्यय सचिव अथवा कम से कम संयुक्त सचिव स्तर का प्रतिनिधि-सदस्य
  3. प्रस्तावित परियोजना क्षेत्र का कार्य देख रहे सम्बद्ध मंत्रालय/विभागों के सचिव अथवा कम से कम संयुक्त सचिव स्तर का उनका कोई प्रतिनिधि      -     सदस्य
  4. प्रस्तावित परियोजना क्षेत्र का कार्य देख रहे तकनीकी स्कंध/एजेंसी/प्राधिकरण के मुखय इंजीनियर अथवा समकक्ष श्रेणी का उनका कोई प्रतिनिधि    -     सदस्य
  5. योजना आयोग में सामाजिक कार्य विषय  का प्रभारी प्रधान सलाहकार/सलाहकार -     सदस्य
  6. वित्त सलाहकार, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय -     सदस्य
  7. सचिव, भारतीय समाज विज्ञान अनुसंधान परिषद् , नई दिल्ली-सदस्य
  8. बहुक्षेत्रीय विकास कार्यक्रम के प्रभारी संयुक्त सचिव/संयुक्त सचिव गण - एक संयुक्त सचिव संयोजक सदस्य

अधिकारप्राप्त समिति आवश्यकतानुसार आईसीएसएसआर के क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थानों अथवा आधारभूत सर्वेक्षण करने वाले विश्वविद्यालय जैसी व्यावसायिक एजेंसी के प्रमुखों को अपनी बैठकों में आमंत्रित कर सकेगी।

अधिकारप्राप्त समिति के कार्य

अधिकारप्राप्त समिति के कार्य इस प्रकार होंगे -

  1. राज्य स्तरीय समिति से प्राप्त ब्लॉक/शहर /समूहों की योजनाओं का अनुमोदन करना।
  2. डीपीआर के आधार पर 10 करोड़ रु0 से अधिक के लागत वाले परियोजनाओं का अनुमोदन करना।
  3. ब्लॉकों/शहरों  का आबंटन ब्लॉक/शहर /गांवों में अच्छा निष्पादन  करने के लिए प्रोत्साहित करना।
  4. कार्यक्रम के कार्यान्वयन की जांच करना।
  5. कार्यक्रमों/परियोजनाओं के कार्यान्वयन में आ रही प्रक्रियागत और अन्य खामियों को दूर करने के लिए नीतिगत बदलाव का सुझाव देना।
  6. निर्विघ्न कार्यान्वयन हेतु कार्यक्रम में जरुरी नीति बदलाव सुझाना।

राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों से प्राप्त प्रस्तावों पर विचार के लिए आवश्यकतानुसार अधिकारप्राप्त समिति की बैठक होगी।

सूचना का प्रसार और पारदर्शिता

कार्यान्वित विकास योजनाओं से संबंधित सूचना लाभार्थियों अर्थात्‌ लक्षित लाभार्थियों तक पहुंचाना सुनिश्चित  करने की दृष्टि से यह आवश्यक  है कि सूचनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार हो तथा उसमें पारदर्शिता  बनाई रखी जाए। इस प्रयोजन से निम्नलिखित बातें सुनिश्चित  की जाएंगी -

  1. सभी अनुमोदित योजनाओं/परियोजनाओं को स्थानीय समाचार पत्रों के माध्यम से व्यापक रूप से प्रचारित एवं प्रसारित किया जाएगा तथा संबंधित वेबसाईट पर भी स्थान दिया जाएगा।
  2. परियोजना को स्वीकृति प्राप्त होने के तुरंत बाद ही राज्य सरकार परियोजना स्थल पर एक पटि्‌टका लगाएगी, जिस पर परियोजना स्वीकृति की तिथि, पूरा होने की संभावित तिथि, अनुमानित परियोजना लागत, वित्त पोषण का स्रोत अर्थात्‌ बहुक्षेत्रीय विकास योजना (भारत सरकार), ठेकेदारों के नाम और वास्तविक लक्ष्य का उल्लेख होगा। परियोजना समाप्ति के बाद एक स्थायी पटि्‌टका लगाई जाएगी।
  3. राज्य सरकार द्वारा समाचार पत्रों/दूरदर्शन के माध्यम से सूचना को प्रसारित किया जाएगा तथा वर्तमान वेबसाईट पर स्थान दिया जाएगा।

12वीं पंचवर्षीय  योजना के दौरान बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम के कार्यान्वयन के तहत कवर किए गए राज्य/जिला-वार ब्लॉकों और शहरों  की सूची और साथ ही परिपत्रों और अनुलग्नकों को मंत्रालय के वेबसाइट में देखें I

स्रोत: भारत सरकार का अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय

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