सामग्री पर पहुँचे | Skip to navigation

होम (घर) / समाज कल्याण / आपदा प्रबंधन / आपदाओं की दृष्टि से भारतीय संवेदनशीलता की रुपरेखा
शेयर
Views
  • अवस्था संपादित करने के स्वीकृत

आपदाओं की दृष्टि से भारतीय संवेदनशीलता की रुपरेखा

इस भाग में आपदाओं की दृष्टि से भारतीय संवेदनशीलता की रुपरेखा (वल्नेरेबिलिटी प्रोफाइल) की जानकारी दी गई है।

संवेदनशीलता की रुपरेखा

भारत अपनी भू-जलवायु एवं सामाजिक-आर्थिक विशिष्टताओं के कारण प्राकृतिक और मानव जनित आपदाओं की दृष्टि से एक अति-संवेदनशील देश है। देश के 35 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में से 27 आपदा Mi (disaster prone) हैं। लगभग 58.6 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र कम या अधिक प्रबलता के भूकम्प के प्रति संवेदनशील है; 4 करोड़ हेक्टेयर भूमि (संपूर्ण भूमि का 12 प्रतिशत) बाढ़ और नदियों के क्षरण से प्रभावित हैं, कुल 7.516 किलोमीटर लम्बी समुद्री सीमा का लगभग 5700 किलोमीटर क्षेत्र तूफान और सुनामी की दृष्टि से अति संवेदनशील है, कृषि योग्य भूमि का लगभग 68 प्रतिशत हिस्सा सूखे से प्रभावित है तथा देश के पर्वतीय क्षेत्र भूस्खलन और हिम-स्खलन (avalanches) की दृष्टि से अति संवेदनशील हैं।

आपदाओं की दृष्टि से भारत में सम्भावित खतरे (हैजर्ड प्रोफाइल ऑफ इंडिया)

  • भारत दुनिया के दस सबसे अधिक आपदा प्रभावित देशों में से एक है। हमारा देश अनेक कारणों से आपदाओं की दृष्टि से अति संवेदनशील है जिनमें प्रमुख हैं-प्राकृतिक और मानव जनित कारण, प्रतिकूल भू-जलवायु परिस्थितियां, देश की भौगोलिक स्थिति, पर्यावरण क्षरण (एनवायर्नमेंटल डीग्रेडेशन), बढ़ती जनसंख्या, अनियोजित शहरीकरण, अवैज्ञानिक विकास की परिपाटी तथा अन्य कारण। देश के चार विशिष्ट क्षेत्र जो कि हिमालय क्षेत्र, जलोड मिट्टी का मैदानी क्षेत्र, प्रायद्वीप के पर्वतीय भाग तथा समुद्र के तटीय क्षेत्र हैं, सभी की आपदाओं की दृष्टि से अपनी-अपनी विशिष्ट समस्याएं हैं।
  • हिमालय क्षेत्र नियमित भूकम्पीय गतिविधियों के लिए अति संवेदनशील है। हिमालय से निकलने वाल विभिन्न बड़ी नदियों के द्वारा बहाकर लाये जाने वाले तलछट (सेडिमेंट्स) के कारण नदियों के मार्ग गाद से अवरद्ध हो जाते हैं जिसके कारण नियमित बाढ़ का प्रकोप बना रहता है।
  • देश का पश्चिमी क्षेत्र नियमित रूप से सूखे से प्रभावित रहता है। समुद्र के ऊपर तापमान व वायु दबाव में असामान्य परिवर्तन के कारण तटीय क्षेत्रों में तूफान आते रहते हैं। समुद्र की सतह के नीचे भूगर्भीय टेकटोनिक गतिशीलता तटीय क्षेत्रों को सुनामी से होने वाली आपदा से प्रभावित करती हैं। अपने बृहद तटीय क्षेत्र के कारण भारत हर वर्ष अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाले उष्णकटिबंधीय तूफानों से प्रभावित होता रहता है।
  • विभिन्न मानव प्रेरित गतिविधियां जैसे कि बढ़ता हुआ जनसांख्यिकीय दबाव, बिगड़ता हुआ वातावरण, अंधाधुन्द वनों कि कटाई, अव्यवहारिक विकास, दोषपूर्ण कृषि कार्यप्रणालियां, अनियोजित शहरीकरण तथा अन्य कारणों से देश में आपदाओं की सख्यां और उनका प्रभाव बढ़ गया है।

बीसवी शताब्दी के आखिरी तीन दशकों (1980–2010) में भारत में प्राकृतिक आपदाओं के कारण लगभग 1,43,039 मौतें हुई हैं (औसतन 4,768 मौतें प्रति वर्ष)

स्त्रोत: राष्ट्रीय आपदा प्रबंध संस्थान,गृह मंत्रालय,भारत सरकार।

2.90909090909

अपना सुझाव दें

(यदि दी गई विषय सामग्री पर आपके पास कोई सुझाव/टिप्पणी है तो कृपया उसे यहां लिखें ।)

Enter the word
नेवीगेशन
संबंधित भाषाएँ
Back to top

T612019/12/14 09:19:13.325193 GMT+0530

T622019/12/14 09:19:13.341691 GMT+0530

T632019/12/14 09:19:13.342416 GMT+0530

T642019/12/14 09:19:13.342700 GMT+0530

T12019/12/14 09:19:13.302765 GMT+0530

T22019/12/14 09:19:13.302959 GMT+0530

T32019/12/14 09:19:13.303142 GMT+0530

T42019/12/14 09:19:13.303296 GMT+0530

T52019/12/14 09:19:13.303384 GMT+0530

T62019/12/14 09:19:13.303458 GMT+0530

T72019/12/14 09:19:13.304185 GMT+0530

T82019/12/14 09:19:13.304378 GMT+0530

T92019/12/14 09:19:13.304597 GMT+0530

T102019/12/14 09:19:13.304833 GMT+0530

T112019/12/14 09:19:13.304882 GMT+0530

T122019/12/14 09:19:13.304976 GMT+0530