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ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक उन्नति का आधार बना सुजनी कला

इस पृष्ठ में कैसे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक उन्नति का आधार बन रहा है बिहार का मशहूर सुजनी कला, इसके बारे में जानकारी दी गयी है।

परिचय

सुजनी बिहार की लोकप्रिय कला है। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं वर्षो से इस कला के जरिये ग्रामीण क्षेत्रों में इसे अपनी आर्थिक उन्नति का आधार बनाये हुए हैं। बड़ी संख्या में महिलाएं इस कार्य को कर रही हैं। सूबे के कई ऐसे जिले हैं, जहां इस कला को लेकर काफी समय से काम होता रहा है, लेकिन संसाधन के अभाव में यह कला दम तोड़ रही थी। महिला हित में काम करने वाली संस्था ने इस पर ध्यान दिया। जिसका काफी उत्साहजनक परिणाम सामने निकल कर आ रहा है। फैशन इंस्टिट्यूट के द्वारा की गयी नयी पहल से इस कार्य में व्यापक बदलाव की बयार बह रही है। जिसे बाजार में काफी पसंद किया जा रहा है।

नए सिरे से की गयी तैयारी

संस्था के सूत्र बताते हैं, इलाके में सुजनी का काम पहले भी होता रहा है, लेकिन तब इससे जुड़ी महिलाएं संगठित नहीं थी। इस काम को करने से उन्हें कोई उनकी मेहनत के हिसाब से लाभ नहीं मिल रहा था। छिटपुट तरीके से हो रहे काम को इस स्तर तक सफलता नहीं मिलने का एक कारण असंगठित तरीके से कार्य का ना होना भी था। जिससे इलाके की महिलाओं में सुजनी के प्रति धीरे-धीरे आकर्षण कम हो रहा था। वो इस काम को छोड़ रही थी। संस्था ने इन सभी को एक करने की तैयारी की। सभी को संगठित किया गया। इन सभी को करीब 20 दिनों तक प्रशिक्षण दिया गया था।

प्रशिक्षण के साथ हुई नयी पहल

सन् 2010 में इन सभी को संगठित करने के बाद इसे ग्रुप का आकार दिया गया। इसकी शुरुआत में ही करीब 30 महिलाओं ने अपनी सहभागिता जतायी। इसके बाद प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया गया। इन सभी महिलाओं को यह बताया गया कि अभी तक वह संगठित होकर कार्य नहीं कर रही थी। जिसके कारण उन्हें उनके मेहनत के हिसाब से पैसे नहीं मिल पा रहे थे। इन सारे मुद्दों को गंभीरता से समझने के बाद महिलाएं साथ कार्य करने के लिए एकजुट हो गयी। साथ ही बिना मूलभूत सुविधाओं के कार्य कर रही महिलाओं को सहायता के लिए वित्तीय राशि भी प्रदान की गयी। कार्यालय खोलने के लिए भी पहल की गयी। इसमें कंप्यूटर, टेबल, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की गयी। सूत्र बताते हैं, मकसद यही था कि सभी आवश्यक जरूरतों को पूरा किया जायेगा तो काम करने की क्षमता में वृद्धि अवश्य होगी। इसका आशातीत परिणाम भी देखने को मिला। इनकी काम करने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार आया।

शहरों तक दिखायी धमक

गांव की गलियों में बनने वाली सुजनी की कृति के मुरीद हर तरफ हैं। चाहे वह कोई भी इलाका हो। इसके तहत किसी फूल, सुंदर दृश्य या किसी देवी-देवता की कृति को सुई की सहायता से थीन पेपर पर उकेरा जाता है। जिसके बाद इस पेपर को कपड़े के नीचे रख के कपड़े पर कॉपी कर ली जाती है। बारिकी और मेहनत के इस अद्भूत संगम को सही आकार तब मिलता है, जब यह बन कर तैयार हो जाती है। संस्था के अधिकारी के अनुसार, इसके ज्यादा खरीदार ट्रेड फेयर में ज्यादा मिलते हैं। गांव की इन महिलाओं ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली प्रदर्शनी में अपनी भागीदारी हमेशा करती रहती हैं। इसके अलावा सरस मेला के साथ-साथ पटना में आयोजित होने वाले बिहार दिवस समारोह में भी अपनी कला का प्रदर्शन किया है। इन सभी जगहों पर इसके खरीदार डिजाइन की प्रशंसा करते हैं। इसके अलावा अगर कोई खरीदार ऑर्डर देता है तो इसके काम को महिलाएं पूरी कर देती हैं। अभी तक लगभग 10 बार इस कला की प्रदर्शनी को राष्ट्रीय स्तर के मेले में प्रदर्शित किया जा चुका है। बिहार में तो इसके खरीदार हैं ही लेकिन किसी बड़े शहर में इसकी प्रदर्शनी लगती है तो वहां इसके कद्रदानों की बहुत बढ़िया हिस्सेदारी स्टॉल पर देखने को मिलती है। संस्था के अधिकारी बताते हैं, दिल्ली और कई अन्य बड़े शहरों में प्रदर्शनी स्टॉल से ही सामान हाथोंहाथ बिक जाते हैं।

कई तरह के हैं कार्य

सुजनी की कढ़ाई साड़ी के ऊपर तो की ही जाती है साथ ही शॉल, समीज,  कुर्ती, फ्रॉक पर भी इसकी कढ़ाई की जाती है। सुजनी कला को आम जीवन में प्रयोग होने वाले सामानों में ही बनाया जाता है। जिसे महिलाएं बहुत पसंद करती हैं। इसके अलावा कुशन कवर, बेड सीट, झोला, मोबाइल हैंडसेट का कवर, टीवी कवर, तकिया कवर और हैंड बैग पर भी इसके कार्य किये जाते हैं। इन सभी का मूल्य रंग के सामंजस्य और कढ़ाई के मुताबिक होता है। साड़ी के ऊपर किये गये कार्य को जहां महिलाएं काफी पसंद करती हैं वहीं सुजनी के कार्य किये हुए कुर्ती, समीज का क्रेज लड़कियों में बहुत देखने को मिलता है। मोबाइल फोन के कवर पर बने इस आर्ट को भी लोग काफी पसंद करते हैं। टीवी के कवर को भी लोग काफी पसंद करते हैं। इसे बनाने में उपयोग होने वाले सभी सामान जैसे कपड़ा, धागा, केरोसिन तेल स्थानीय बाजार और मुजफ्फरपुर में ही मिल जाता हैं। संस्था के  अधिकारी बताते हैं, हमारी कोशिश रहती है कि कला और आधुनिकता को एक साथ मिला कर डिजाइन में कार्य किया जाये जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इसके तरफ आकर्षित हो सके। हमारा एकमात्र ध्येय यही रहता है कि इसे बनाने वाले समूह को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सके।

जीवन स्तर में आ रहा सुधार

समाज के निम्न तबके से जुड़ी महिलाओं के द्वारा किये जा रहे इस कार्य से काफी प्रगति देखने को मिल रही है। इस कार्य को करने वाली महिलाओं में करीब सभी महिलाएं समाज के अंतिम कतार से संबंध रखने वाले वर्ग से ही आती हैं। इस कार्य को करने और ऑनरशीप मिलने से उत्साहित होकर महिलाएं और प्रभावी तरीके से कार्य को अंजाम दे रही हैं। पहले अपने काम को किसी तरह भी तरह की कोई मदद नहीं मिलता देख महिलाएं इस कार्य को छोड़ने की योजना बना रही थी लेकिन मदद की बढ़ते हाथ और इस क्षेत्र में ग्रोथ को देख कर काफी महिलाएं इससे जुड़ने को तैयार हो रही हैं। निफ्ट के छात्रों को अपने साथ बैठ कर काम करते देख इन महिलओं में काफी आत्मविश्वास आया है। अपने काम को सम्मान मिलता देख ये महिलाओं और प्रभावी तरीके से कार्य कर रही हैं। इसके करने के साथ ही वह अब शिक्षा के तरफ भी अपना ध्यान दे रही हैं।

कुछ और भी है तैयारी

सुजनी के बढ़ते कद्रदान और मिल रही वाजिब कीमत से उत्साहित संस्था अब दूसरे जगह पर भी इसे शुरू करने की योजना बना रही है। फिलहाल बोचहां प्रखंड के सरफुद्दीनपुर में चल रहे इस कार्य को देखते हुए दूसरे जगहों पर उत्पादक समूह बनाने की योजना पर कार्य कर रही है। दूसरे समूह को गायघाट ब्लॉक के रामनगर में शुरू किये जाने की योजना है। इस समूह को अगले माह से ही शुरू कर देने की योजना है। संस्था का कहना है कि इस जगह की क्षमता ज्यादा है। यहां करीब 50 महिलाओं के साथ शुरू करने की योजना है। इसके अलावा तकनीकी क्षमता, डिजाइन और मार्केटिंग में भी व्यापक पहल करने की योजना पर कार्य हो रहा है। तकनीकी क्षमता को विकसित करने के लिए अलग तकनीकी सहायक को रखने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। संस्था का मानना है, अगर इसके मार्केटिंग और डिजाइन पर अगर केंद्रित किया जाये तो इसे आगे बढ़ाने में काफी मदद मिल सकती है। वह कहते हैं, वैसे तो यह कला ग्रामीण क्षेत्र की धरोहर है लेकिन अगर इसे आज के माहौल और आज के लोगों के पसंद के हिसाब से विकसित किया जाये तो इसे काफी मदद मिल सकती है। अधिकारी कहते हैं, अगर इस कला को सही तरकी के से समझाया जाये तो नयी जुड़ने वाली महिला इसे आसानी से समझ सकती है। इससे कला को तो जीवित किया ही जा सकता है साथ ही बड़े शहरों में लोग इसे पसंद करें तो इससे जुड़े लोगों को और बड़े पैमाने पर आर्थिक तरक्की के लिए नया रास्ता खुल सकता है।

‘निफ्ट’ ने बढ़ाया हाथ

सुजनी कला को और निखारने व बढ़ावा देने के लिए पटना के निफ्ट सेंटर के छात्रों ने काफी पहल की है। अभी तक दो बार इस सेंटर के छात्रों की टीम इंटर्नशीप करने के लिए इस जगह आ चुकी है। संस्था के मुताबिक पहली बार इसी साल जनवरी माह में 12 छात्रों की टीम और दूसरी बार जुलाई माह में 14 छात्रों की टीम ने इस जगह पर हो रहे इस कार्य को देखा। इन छात्रों ने इस कला को तो सराहा ही साथ ही डिजाइन को लेकर भी काफी रुचि जतायी है और अपने सुझाव बांटे हैं। जिससे काफी मदद मिल रही है।

अधिक जाननें के लिए पाठक सुजनी संघ सहकारी समिति, ग्राम: सरफुद्दीनपुर, प्रखंड: बोचहां, जिला: मुजफ्फरपुर, बिहार से संपर्क कर सकतें है।

लेखन : संदीप कुमार, स्वतंत्र पत्रकार

 

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हेमंत कुमार Apr 01, 2017 08:38 PM

मैं पशुपालन​ करना चाहता हू तो मुझे इसके लिए क्या करना पडेगा कृप्या बताऐ

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