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संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा अनुदान

इस पृष्ठ में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा अनुदान की जानकारी दी गयी है I

बौद्ध/तिब्बती संस्कृति और कला के विकास के लिए वित्तीय सहायता स्कीम

उद्देश्य

इस स्कीम का उद्देश्य बौद्ध/तिब्बती संस्कृति और परम्परा के प्रचार-प्रसार एवं वैज्ञानिक विकास तथा संबंधित क्षेत्रों में अनुसंधान में कार्यरत मठों सहित स्वैच्छिक बौद्ध/तिब्बती संगठनों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।

अनुदान के लिए मानदंड

  1. स्वैच्छिक संस्था/संगठन और सोसायटी को सोसायटी पंजीकरण अधिनियम (1860 का XXI) अथवा सदृश अधिनियमों के अंतर्गत एक सोसायटी के रूप में पंजीकृत होना चाहिए।
  2. केवल वही संगठन अनुदान के लिए आवेदन करने के पात्र होंगे, जो मुख्यतः बौद्ध/तिब्बती अध्ययन कार्यों में लगे हैं तथा कम से कम गत तीन वर्षों से इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं।
  3. संगठन क्षेत्रीय अथवा अखिल भारतीय स्तर का होना चाहिए।
  4. यह अनुदान तदर्थ आधार पर दिया जाएगा तथा इसका स्वरूप अनावर्ती प्रकृति का होगा।
  5. इस स्कीम के अंतर्गत केवल उन्हीं संगठनों को अनुदान दिया जाएगा, जिन्हें ऐसे ही प्रयोजनों के लिए किसी अन्य स्रोत से अनुदान प्राप्त नहीं होता है।
  6. हॉस्‍टल भवन, कक्षा, विद्यालय भवन और प्रशिक्षण केन्द्र के निर्माण के लिए भी वित्तीय सहायता दी जा सकती है।
  7. ऐसे संगठनों को वरीयता दी जाएगी, जिनका संबंधित क्षेत्र में किया जा रहा कार्य अच्छा है तथा जिनके पास समनुरूपी निधियों की पूर्ति के लिए संसाधन उपलब्ध हैं।

सहायता का प्रयोजन और मात्रा

किसी एक संगठन को प्रत्येक वर्ष अधिकतम 30.00 लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता नीचे दी गई सभी मदों अथवा किसी एक मद के लिए दी जा सकती है। अखिल भारतीय स्वरूप के ऐसे संगठनों और मठ विषयक शिक्षा प्रदान करने वाले किसी स्कूल के संचालन के मामले में वित्तीय सहायता की राशि अधिकतम सीमा से ज्यादा हो सकती है और जो विशेषज्ञ सलाहकार समिति की सिफारिश पर और वित्तीय सलाहकार, संस्कृति मंत्रालय के परामर्श से संस्कृति मंत्री के अनुमोदन पर निर्भर करेगी।

क्र.सं.

मदें

अधिकतम राशि प्रतिवर्ष

i

अनुरक्षण (कार्मिकों को वेतन, कार्यालय व्यय/विविध व्यय)

5,00,000/रु.

ii

बौद्ध/तिब्बती कला और संस्कृति के संवर्धन संबंधी अनुसंधान

2,00,000/रु.

iii

बौद्ध धर्म से संबंधित पुस्तकों की खरीद, प्रलेखन, सूचीकरण

5,00,000/रु.

iv

मठवासी छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करना

5,00,000/रु.

v

बौद्ध/तिब्बती कला और संस्कृति के संवर्धन के लिए विशेष पाठ्यक्रम चलाना

2,00,000/रु.

vi

बौद्ध कला और संस्कृति के परिरक्षण और प्रसार के लिए पारंपरिक सामग्रियों की ऑडियो-वीडियो रिकार्डिंग/प्रलेखन/ अभिलेख तैयार करना

5,00,000/रु.

vii

मठीय बौद्धभिक्षुक स्कूलों के लिए आईटी उन्नयन और आईटी समर्थित षिक्षण/प्रशिक्षण सहायता प्रदान करना

5,00,000/रु.

viii

दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित मठीय स्कूलों/मठों के लिए परिवहन सुविधा

5,00,000/रु.

ix

मठ-विषयक शिक्षा प्रदान करने के लिए स्कूल का संचालन कर रहे संगठन के अध्यापकों का वेतन

5,00,000/रु.

x

बौद्ध धर्म से संबंधित प्राचीन मठों एवं विरासत भवनों की मरम्मत, जीर्णोद्धार, नवीकरण

30,00,000/रु.

xi

कक्षाओं के लिए शौचालय तथा पीने के पानी सहित विद्यालय भवन, छात्रावास और प्रशिक्षण केन्द्रों का निर्माण जो बौद्ध/तिब्बती कला और संस्कृति तथा मठीय विद्यालयों के लिए पारंपरिक शिल्‍प के कौशल विकास पर केन्द्रित हैं।

30,00,000/रु.

किसी संगठन को अनुमत अधिकतम अनुदान की मात्रा विनिश्चित अधिकतम सीमा के अध्यधीन किसी मद पर होने वाले कुल व्यय का 75 प्रतिशत होगी। शेष 25 प्रतिशत अथवा अधिक खर्च राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र द्वारा वहन किया जाना चाहिए। ऐसा न होने पर अनुदानग्राही संगठन अपने स्वयं के संसाधनों से उक्त राशि का योगदान कर सकता है। तथापि, पूर्वोत्तर राज्यों और सिक्किम के मामले में, भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा क्रमश 9010 के अनुपात में निधि की भागीदारी होगी, ऐसा न होने पर अनुदानग्राही संगठन अपने स्वयं के संसाधन से उक्त राशि का योगदान करेगा।

आवेदन की प्रक्रिया

सम्बद्ध संगठन संबंधित राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र के माध्यम से संगठन की पात्रता की जांच करने के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों/सूचना के साथ पूर्ण आवेदन प्रस्तुत करेगा। तथापि, पूर्वोत्तर राज्यों, सिक्किम, जम्मू और कश्‍मीर के लेह और कारगिल जिले में स्थित संगठन को अपने आवेदन केवल संबंधित जिलाधीश/उपायुक्त की सिफारिश के बाद सीधे संस्कृति मंत्रालय को भेजने की छूट दी गई है।

क्र.सं.

दस्तावेज/सूचना

i.

वैध पंजीकरण प्रमाण पत्र की प्रतिलिपि जिसमें पंजीकरण की वैधता स्पष्ट रूप से दर्शायी गई हो। पंजीकरण प्रमाण-पत्र की यह प्रति राजपत्रित अधिकारी द्वारा विधिवत प्रमाणित हो।

ii.

संगम ज्ञापन की प्रतिलिपि।

iii.

पिछले तीन वर्षों की लेखा परीक्षा लेखों की प्रतियां

iv.

पिछले तीन वर्षों की वार्षिक रिपोर्ट की प्रतियां

v.

शुरू किए जाने वाले प्रत्येक कार्यकलाप संबंधी मदवार विवरण, साथ ही मांगी गई निधियों का विस्तृत ब्यौरा, वांछित लाभार्थियों की संख्या, परियोजना की समय सूची आदि।

vi.

खरीदी जाने वाली पुस्तकों की सूची और उनकी लागत, यदि लागू हो।

vii.

सिविल निर्माण के मामले में भूमि/भवन का मालिकाना हक साबित करने वाले पंजीकरण प्रमाणपत्र एवं अन्य दस्तावेजों की प्रतियां, यदि लागू हो।

viii.

सिविल कार्यों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट संबंधी सूचना जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ कुल भूमि उपलब्धता, अनुमानित लागत-मदवार, व्यय की स्थिति, पूर्णता अनुसूची, प्रत्येक मद के लिए राज्य लोक निर्माण विभाग से अनुमोदित प्राक्कलन, वास्तुविद के ब्यौरे, अध्ययन कक्षों के ब्यौरे - क्या प्राथमिक अथवा माध्यमिक हैं, अध्ययन कक्षों की संख्या, प्रत्येक कक्षाओं में छात्रों की संख्या, कौन से पाठ्यक्रम चलाए जाते हैं और किस कक्षा तक आदि शामिल हैं, यदि लागू हों।

ix.

शिक्षकों का ब्यौरा - नाम, आयु, योग्यता एवं उनको भुगतान किया गया वेतन। शिक्षकों  के वेतन से संबंधित प्रस्ताव निम्नलिखित के अध्यधीन होंगे-

  • यदि सोसायटी अपने भवन में मठीय विद्यालय चला रही है अथवा यह इसके मठ में विद्यालय चला रही है।
  • ऐसे विद्यालय में प्रशिक्षण लेने वाले मठवासी/मठ विद्यार्थियों की संख्या।
  • शिक्षकों की संख्या, उनकी आयु और योग्यता तथा उनको भुगतान किया गया वेतन।
  • क्या मठीय विद्यालय, राज्य में किसी स्थानीय शिक्षा बोर्ड अथवा किसी अन्य शिक्षा बोर्ड से संबद्ध है ?
  • छात्र दैनिक शिक्षार्थी हैं अथवा विद्यालय स्रोत आवास में रह रहे हैं?

x.

विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान करने से संबंधित प्रस्ताव निम्नलिखित शर्तों के अध्यधीन होगा-

छात्रवृत्ति के भुगतान के लिए व्यक्तियों के चयन का मानदंड,

क्या संगठन छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने हेतु अभ्यर्थियों को छात्रवृत्ति जारी करने के बारे में वित्तीय अथवा शैक्षिक वर्ष के प्रारंभ में अधिसूचित करता है? यदि हॉ, तो ऐसी अधिसूचना का तरीका और प्रमाण देना होगा।

सिफारिश राज्य सरकार/संघ राज्यक्षेत्र, जिलाधीश/उपायुक्त प्रस्ताव की सिफारिश करते समय निम्नलिखित की जांच करेंगे -

  • संगठन की पंजीकरण स्थिति।
  • क्या संगम ज्ञापन के अनुसार संगठन के उद्देश्यु और कार्यकलाप बौद्ध/तिब्बती कला और संस्कृति के संवर्धन से संबंधित हैं।
  • सूचना प्रौद्योगिकी उन्नयन, परिवहन सुविधाएं, सिविल निर्माण कार्य/शिक्षकों  के वेतन के लिए मांगी गई निधियों के मामले में, क्या मठ, मठीय विद्यालय विद्यमान हैं/संगठन के स्वामित्व में हैं।
  • क्या संगठन ऐसी परियोजनाएं शुरू करने में सक्षम है?
  • कार्यकलाप/कार्यकलापों और संबंधित राशि की सिफारिश की जाती है।
  • केन्द्रीय बौद्ध अध्ययन संस्थान, लेह, जम्मू और कश्मीर  के लेह और कारगिल जिले में स्थित संगठनों के लिए सहायता केन्द्र के रूप में कार्य करेगा।

 

अनुदान जारी करने का तरीका तथा शर्तें

क.      आवेदन पत्रों के मूल्यांकन और विशेषज्ञ परामर्शी   समिति द्वारा संस्तुत तथा उसके बाद संस्कृति मंत्रालय में सक्षम प्राधिकारियों की प्रशासनिक  स्वीकृति तथा वित्तीय सहमति के आधार पर अनुदान प्रदान किया जाएगा। प्रभारी संयुक्त सचिव प्रत्येक मामले में विशेषज्ञ परामर्शी   समिति तथा आईएफडी के साथ परामर्श के आधार पर 30.00 लाख रूपए की राशि जारी करने हेतु सक्षम प्राधिकारी होंगे।

ख.      अनुदान की अदायगी दो समान किस्तों में की जाएगी, पहली किस्त सामान्यतः परियोजना की स्वीकृति के समय जारी की जाती है। दूसरी किस्त संपूर्ण अनुदान राशि तथा अनुदानग्राही/संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र सरकार के हिस्सों के इस्तेमाल को दर्शाने वाले विधिवत लेखा परीक्षा विवरण तथा सनदी लेखाकार की ओर से अन्य दस्तावेजों की प्राप्ति पर जारी की जाएगी। शेष केंद्रीय अनुदान के जारी किए जाने का निर्णय परियोजना पर किए गए वास्तविक व्यय के आधार पर किया जाएगा, बशर्तें कि यह अधिकतम सीमा से अधिक न हो।

ग.       इस योजना के अंतर्गत वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले संगठन का संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार अथवा संबंधित राज्य सरकार के किसी अधिकारी द्वारा निरीक्षण किया जा सकता है।

घ.       परियोजना का लेखा अलग से और समुचित ढंग से रखा जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर भारत सरकार को प्रस्तुत किया जाएगा। केन्द्रीय सरकार अथवा राज्य सरकार के अधिकारी द्वारा अथवा भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक द्वारा अपने विवेकानुसार उसकी जांच की जा सकती है।

ङ.        संगठन, लेखाओं के भाग के रूप में अलग संलग्नक में अनुरक्षण शीर्ष के अंतर्गत व्यय का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करेगा।

च.       अनुदानग्राही निम्नलिखित की व्यवस्था करेगा

  • सरकार से प्राप्त सहायता अनुदान के सहायक लेखे।
  • विधिवत मुद्रित संख्याओं वाली जिल्दयुक्त पुस्तकों में हस्तलिखित रोकड़ बही रजिस्टर।
  • सरकार तथा अन्य एजेंसियों से प्राप्त अनुदानों के लिए सहायता अनुदान।
  • खर्च की प्रत्येक मद जैसे- छात्रावास भवन आदि के निर्माण के लिए अलग बही-लेखे।

छ.      संगठन ऐसी सभी परिसम्पत्तियों का रिकॉर्ड रखेगा जो सम्पूर्णतः अथवा अधिकांशतः केन्द्रीय सरकार के अनुदान से अधिगृहित की गई हों। इन परिसम्पत्तियों को भारत सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना उन उद्देश्यों के अलावा, जिनके लिए अनुदान दिया गया है, न तो इस्तेमाल किया जाएगा अथवा बेचा जाएगा अथवा गिरवी रखा जाएगा।

ज.      यदि किसी समय भारत सरकार को इस बात का विश्वास हो जाता है कि मंजूर किए गए धन का इस्तेमाल अनुमोदित उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा रहा है, तो अनुदान की अदायगी रोक दी जाएगी तथा पहले दिए गए अनुदानों की वसूली की जाएगी।

झ.      संगठन को अनुमोदित परियोजना के संचालन में समुचित मितव्ययिता बरतनी चाहिए।

ञ.       अनुदानग्राही संगठन, संस्कृति मंत्रालय को परियोजना की तिमाही प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा, जिसमें प्रत्येक अनुमोदित मदों की वास्तविक उपलब्धियों और उस पर होने वाले व्यय को विस्तारपूर्वक अलग-अलग दर्शाया गया हो।

ट.        सिविल कार्यों के लिए अनुदान प्राप्त करने वाले संगठन, अगले 10 वर्षों के लिए समतुल्य उद्देश्य के लिए अनुदान के लिए पात्र नहीं होंगे।

ठ.       अनुदानग्राही, पीडब्ल्यूडी से कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र तथा सिविल कार्य का फोटो साक्ष्य  प्रस्तुत करेगा।

ड.        अनुदानग्राही, अनुसंधान परियोजना की 5 प्रतियां प्रस्तुत करेगा।

ढ.        बौद्ध धर्म से संबंधित विरासत भवनों की मरम्मत, जीर्णोद्धार, नवीकरण के लिए अनुदान, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से प्राप्त प्रमाण-पत्र के अध्यधीन होगा। इस कार्य के लिए एएसआई कार्यालय/संबंधित मंडल से यथोचित स्तर का एक अधिकारी संगठन से सम्बद्ध होगा।

ण.      ऐसे आवेदनों, जिनके पिछले अनुदान/उपयोग प्रमाण-पत्र लंबित हैं, पर विचार नहीं किया जाएगा।

भुगतान का तरीका

सभी भुगतान इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर के माध्यम से किए जाएंगे।

स्कीम का परिणाम

निम्नलिखित प्रारूप के अनुसार दूसरी और अंतिम किस्त के अनुरोध के समय, हाथ में लिए गए कार्यकलाप संबंधी ‘निष्पादन तथा उपलब्धि रिपोर्ट’ संस्कृति मंत्रालय को विधिवत जिल्दसाजी की हुई 3 प्रतियों में प्रस्तुत की जाएगी।

बौद्ध/तिब्बती संस्कृति और कला के विकास के लिए वित्तीय सहायता स्कीम कार्य निष्पादन-सह-उपलब्धि रिपोर्ट की मुख्य बिन्दुएँ इस प्रकार से होगी -

i.     संगठन का नाम, पता, टेलीफोन/फैक्स नंबर

ii.    संस्वीकृति संख्या एवं तारीख

iii.    कुल स्वीकृत अनुदान/व्यय

iv.    परियोजना का स्थान

v.    लाभार्थियों की संख्या

vi.    फोटो सहित मदवार कार्य निष्पादन-सह-उपलब्धियां

vii.   बौद्ध कला और संस्कृति के परिरक्षण और विकास में सहायता के लिए इसने कैसे   सहायता की/करेगा

viii.   कोई अन्‍य बिन्‍दु

संगठन के अध्यक्ष/सचिव का हस्ताक्षर

अपूर्ण आवेदन

अपूर्ण आवेदन जिनके साथ अपेक्षित दस्तावेज संलग्न नहीं हैं तथा निर्धारित प्राधिकारी की सिफारिश के बिना प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा तथा पूर्णतः अस्वीकृत कर दिए जाएंगे।

विशेष प्रावधान

स्कीम से सम्बद्ध विशेषज्ञ परामर्शी समिति (ईएसी) को राज्य सरकार / संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन / स्थानीय प्रशासन से बिना सिफारिश अथवा सिफारिश से प्राप्त किसी भी प्रस्ताव को संस्तुत अथवा अस्वीकृत करने की शक्ति प्राप्त है और साथ ही वह अधिकतम सीमा से बाहर भी राशि की सिफारिश कर सकती है परंतु यह राशि इस स्कीम से 1.00 करोड़ रूपए से अधिक नहीं होनी चाहिए। किसी ऐसे प्रस्ताव के संबंध में जो उत्कृष्ट स्वरूप का हो और जिसके संबंध में ईएसी अनुभव करे कि उक्त परियोजना को हाथ में लेने के लिए मंत्री (संस्कृति) के अनुमोदन से और संस्कृति मंत्रालय के अपर सचिव और वित्तीय सलाहकार की सहमति से अधिकतम सीमा राशि पर्याप्त नहीं होगी तो उस पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है। तथापि, ऐसे प्रत्येक मामले में जिसमें 30.00 लाख रूपए की सीमा पार की गई हो, ईएसी द्वारा विस्तृत औचित्य दिया जाएगा।

निरीक्षण और मॉनीटरिंग

प्रत्येक वर्ष कम से कम 5 प्रतिशत मामलों में मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया जाएगा और केन्द्रीय तिब्बती अध्ययन विश्‍वविद्यालय, सारनाथ, नव नालंदा महाविहार, नालंदा, केन्द्रीय बौद्ध अध्ययन संस्थान, लेह, जेडसीसीज जैसे स्वायत्तशासी संस्थानों की सेवाओं का भी उपयोग किया जाएगा। संबंधित राज्य सरकार/ संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन, जिलाधीश/उप आयुक्त भी मॉनीटर करेंगे।

अनुदानों के दुरूपयोग के मामले में दंड

संगठन के कार्यकारी निकाय के सदस्यों से दुरूपयोग किए गए अनुदानों को वापस वसूल किया जाएगा। उक्त संगठन को निधियों के दुरूपयोग, गलत पंजीकरण प्रमाण-पत्र आदि के लिए काली-सूची में भी डाला जाएगा। सरकारी अनुदानों से बनाई गई सभी अचल सम्पत्तियां, मंत्रालय द्वारा निर्धारित स्थानीय प्रशासन द्वारा अपने अधिकार में ले ली जाएंगी।

योजना की विस्तृत व अद्यतन जानकारी हेतु इस लिंक पर देखें

बौद्ध/तिब्बती संस्कृति और कला के विकास के लिए वित्तीय सहायता स्कीम, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार

हिमालय क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए वित्तीय सहायता स्कीम

उद्देश्‍य

इस स्कीम का उद्देश्‍य अनुसंधान, प्रलेखन, प्रसार आदि माध्यमों से जम्मू और कश्‍मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरूणाचल प्रदेश में फैले हिमालयी क्षेत्र की विस्तृत सांस्कृतिक विरासत का संवर्धन, संरक्षण व परिरक्षण करना है।

अनुदान की प्रक्रिया

  1. स्वैच्छिक संस्थान का पंजीकरण, सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 या पब्लिक न्यास के रूप में भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 के तहत होना चाहिए और वह विगत तीन वर्षों से कार्यरत हो।
  2. कॉलेज और विश्‍वविद्यालय भी आवेदन के पात्र हैं।
  3. संस्थान में, अनुसंधान परियोजना को हाथ में लेने और उसको आगे बढ़ाने की क्षमता होनी चाहिए। इसमें अनुदान के लिए अपेक्षित स्कीम को लागू करने के लिए आवश्‍यक सुविधाएं, स्रोत और कार्मिक भी होने चाहिए।
  4. कॉलेज और विश्‍वविद्यालयों को अपने पाठ्यक्रम की विवरणी में या अनुसंधान पाठयक्रम में, हिमालय की कला और संस्कृति के परिरक्षण से सम्बद्ध अध्ययन के विभिन्न पहलुओं को प्रारंभ करना चाहिए, यदि इन्हें पहले शामिल नहीं किया गया हो।
  5. आवेदन करने वाले कॉलेज को विश्‍वविद्यालय से संबद्ध होना चाहिए।
  6. अनुदान, तदर्थ और गैर-आवर्ती प्रकृति का होगा।
  7. इस स्कीम से अनुदान केवल उन संस्थानों को दिए जाएंगे जो किसी अन्य स्रोत से, ऐसे ही उद्देश्‍य के लिए अनुदान प्राप्त नहीं कर रहे हैं।
  8. ऐसे संस्थानों को वरीयता दी जाएगी जो अपने क्षेत्रों में अच्छा कार्य कर रहे हैं और अपने हिस्से की धन राशि जुटाने में समर्थ हैं।

सहायता का उद्देश्‍य और मात्रा

वित्तीय सहायता, अधोलिखित किसी भी मद के लिए, किसी एक संस्थान को अधिकतम, 10.00 लाख रू. तक दी जाती है

क्र.सं.

मद

प्रतिवर्ष अधिकतम राशि

i.

सांस्कृतिक विरासत का अध्ययन और अनुसंधान

10.00 लाख रू.

ii.

प्राचीन पांडुलिपियों, साहित्य, कला और षिल्प का अनुरक्षण और सांस्कृतिक कार्यकलापों/ गतिविधियों जैसे संगीत नृत्य आदि का प्रलेखन।

10.00 लाख रू.

iii.

कला और संस्कृति के कार्यक्रमों का श्रृव्य-दृश्य  माध्यमों से प्रसार करना।

10.00 लाख रू.

iv.

पारम्परिक और लोक कलाओं में प्रशिक्षण

10.00 लाख रू.

किसी संस्थान के लिए अधिकतम स्वीकार्य अनुदान राशि, किसी मद पर अधिकतम निर्धारित सीमा के अधीन खर्च की जाने वाली राशि की 75 प्रतिशत  होगी। शेष 25 प्रतिशत  या उससे अधिक व्यय, सरकार/संघ राज्य क्षेत्र वहन करेगा। ऐसा न होने पर अनुदान प्राप्त करने वाला संस्थान, अपने संसाधनों से धन जुटाएगा। तथापि, अरूणाचल प्रदेश और सिक्किम के मामलों में निधि का बंटवारा भारत सरकार और उस संस्थान के मध्य क्रमश 9010 के अनुपात में किया जाएगा।

आवदेन की प्रक्रिया

संस्थान/व्यक्ति, अपना विधिवत भरा हुआ आवेदन, अधोलिखित दस्तावेजों/ सूचना सहित संस्कृति मंत्रालय में प्रस्तुत करने के पूर्व, उस संस्थान की पात्रता के आकलन के लिए उस सम्बद्ध राज्य सरकार के माध्यम से भेजेगा, जहां पर परियोजना को लागू करने का प्रस्ताव है। तथापि, ऐसे संस्थान जो सिक्किम, अरूणाचल प्रदेश तथा जम्मू और कश्‍मीर के लेह और कारगिल जिलों में स्थित हैं, उन्हें केवल उस जिले के कलेक्टर/उपायुक्त की सिफारिश से अपने आवेदन, सीधे संस्कृति मंत्रालय को भेजने की छूट दी गई है। कॉलेज और विश्‍वविद्यालय अपने आवेदन विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग के माध्यम से संस्कृति मंत्रालय को अग्रेषित करेंगे।

क्र.सं.

दस्तावेज/सूचना

i

पंजीकरण प्रमाण-पत्र की वैध प्रतिलिपि, जिसमें स्पष्ट रूप से पंजीकरण की वैधता दर्शित  हो। पंजीकरण प्रमाण-पत्र की प्रतिलिपि विधिवत राजपत्रित अधिकारी द्वारा सत्यापित की जाए।

ii

संगम ज्ञापन की प्रतिलिपि।

iii

पिछले तीन वर्षों की लेखा परीक्षा लेखाओं की प्रतियां।

iv

वार्षिक रिपोर्ट की पिछले तीन वर्षों की प्रतियां, जिनमें उपलब्धि से संबंधित दस्तावेजी प्रमाण पुष्टि हेतु संलग्न हों।

v

प्रारंभ की जाने वाली योजना के कार्यकलापों का क्रमिक विवरण जिसमें लागत अनुमानों का ब्यौरा, सरकार से निधि प्राप्त करने की आवश्‍यकता, निधि के अन्य स्रोत, परियोजना की पूर्णता विषयक सारिणी आदि शामिल हो।

vi

अनुसंधान से संबंधित कार्मिकों के मामले में संक्षिप्त वर्णन।

संस्तुति

  • राज्य सरकार/जिला कलेक्टर/उपायुक्त/विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग, प्रस्ताव की संस्तुति के समय संस्थान की पंजीकरण स्थिति की जांच करेगा/करेगी।
  • यह सत्यापित करेगा कि संस्थान ऐसी परियोजना को चलाने में समर्थ है।
  • यह सत्यापित करेगा कि शीर्ष/क्षेत्र संबंधी परियोजना चलाई जाने वाली प्रस्तावित परियोजना पहले कभी आरंभ नहीं किया गया था और यह एक नई परियोजना है।
  • गतिविधि/ गतिविधियों और उससे सम्बद्ध राशि की संस्तुति करेगा/करेगी।

अनुदान जारी होने की शर्ते  और तरीका

  1. यह अनुदान विशेषज्ञ परामर्शी समिति द्वारा आवेदन पत्रों के मूल्यांकन तथा सिफारिश और उसके बाद संस्कृति मंत्रालय के सक्षम प्राधिकारियों द्वारा दिए गए प्रशासनिक अनुमोदन एवं वित्तीय सहमति के आधार पर प्रदान किया जाएगा।
  2. अनुदान की राशि दो समान किस्तों में भुगतान की जाएगी, सामान्य रूप से, पहली किस्त परियोजना के अनुमोदन के साथ ही जारी कर दी जाएगी। दूसरी किस्त, परियोजना के पूर्ण होने और विधिवत लेखा परीक्षा किए गए लेखाओं के विवरण, जिसमें यह प्रदर्शित किया गया हो कि अनुदान की समस्त राशि तथा अनुदान प्राप्तकर्ता/संबंधित राज्य/संघ शासित क्षेत्र की सरकार के अंशदान का सदुपयोग कर लिया गया है, और अन्य दस्तावेज प्राप्त होने पर जारी कर दी जाएगी। अनुदान की शेष राशि को जारी करने का निर्णय, परियोजना के लिए अधिकतम सीमा को ध्यान में रखते हुए, परियोजना पर किए गए वास्तविक व्यय के आधार पर किया जाएगा।
  3. इस स्कीम के तहत जो संस्थान आर्थिक सहायता प्राप्त करते हैं, उनका निरीक्षण, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार या संबंधित राज्य सरकार के किसी अधिकारी द्वारा किया जा सकता है।
  4. परियोजना के लेखाओं का रख-रखाव, उचित रूप से और अलग-अलग किया जाएगा और जब कभी आवश्‍यक हो, इन्हें, भारत सरकार को प्रस्तुत किया जाएगा और यह जांच, केंद्र सरकार या राज्य सरकार या भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक द्वारा उनके विवेक के अधीन होगी।
  5. अनुदान प्राप्तकर्ता अधोलिखित का रख-रखाव करेगा-
  • सरकार से प्राप्त सहायता अनुदान के सहायक खाते।
  • कैश बुक रजिस्टर - हाथ से लिखी बाउंड बुक्स जिनमें मशीन से संख्याकन किया गया हो।
  • सरकार और अन्य अभिकरणों से प्राप्त अनुदान के लिए सहायता अनुदान रजिस्टर।
  • प्रत्येक मद के व्यय जैसे सिविल कार्य का निर्माण आदि के लिए अलग-अलग लेखा बही।
  1. संस्थान, उन परिसंपत्तियों का पूरा अभिलेख रखेगा जो पूर्ण रूप से या वास्तविक रूप से केंद्र सरकार के अनुदान से अर्जित किए गए हैं और उनका निस्तारण, लाभकारी कार्यों में प्रयुक्त करने या उन उद्देश्‍यों से भिन्न प्रयोग करना जिनके लिए अनुदान दिया दिया गया था, भारत सरकार की पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जाएगा।
  2. यदि किसी समय, भारत सरकार के पास ऐसा विश्‍वास करने का पर्याप्त कारण है कि स्वीकृत धन का उपयोग अनुमोदित प्रस्तावों के लिए नहीं किया जा रहा है, तो, अनुदान का भुगतान रोका जा सकता है और पूर्व अनुदानों की वसूली की जा सकती है।
  3. अनुमोदित परियोजना की कार्य प्रणाली में, संस्थान को, तर्कयुक्त मितव्ययिता का अनुसरण करना चाहिए।
  4. अनुदान प्राप्तकर्ता संस्थान, संस्कृति मंत्रालय को, परियोजना की एक तिमाही प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा, जिसमें वास्तविक उपलब्धियों और प्रस्तावित प्रत्येक मद पर व्यय, दोनों के विवरणों को, अलग से दिखाया गया हो।
  5. अनुदान प्राप्तकर्ता, परियोजना रिपोर्ट की तीन प्रतियां, विधिवत बाउंड/श्रव्य-दृश्य  सीडी/फोटोग्राफ सहित, संस्कृति मंत्रालय को प्रस्तुत करेगा और एक प्रति, उस राज्य को भेजेगा, जहां पर परियोजना का प्रारंभ किया गया है।
  6. उन संस्थानों के आवेदनों पर, जिनके विरूद्ध पूर्व अनुदान/उपयोग प्रमाण-पत्र विलंबित है, विचार नहीं किया जाएगा।

भुगतान का तरीका

सभी भुगतान इलेक्‍ट्रॉनिक अन्तरणों द्वारा किए जाएंगे।

स्कीम का परिणाम

अंतिम किस्त के लिए अनुरोध करते समय परियोजना के कार्यकलाप के संबंध में विधिवत बाउंड की गई, निष्पादन और उपलब्धि रिपोर्ट तीन प्रतियों में, संस्कृति मंत्रालय को प्रस्तुत की जाएगी। इसमें अन्य बातों के साथ-साथ, परियोजना रिपोर्ट का निष्पादन सारांश, लाभार्थियों की संख्या, परियोजना का स्थान आदि अधोलिखित प्रारूप में दिए जाने चाहिए

हिमालय क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए वित्तीय सहायता स्कीम

कार्य निष्पादन-सह-उपलब्धि रिपोर्ट में मुख्य बिन्दुएँ इस प्रकार की होंगी -

परियोजना का शीर्षक

  1. संस्थान का नाम, पता, टेली./फैक्स
  2. स्वीकृति सं. और तारीख
  3. संपूर्ण स्वीकृत अनुदान/किया गया संपूर्ण व्यय
  4. परियोजना का स्थान
  5. लाभार्थियों की संख्या
  6. निष्पादन तथा उपलब्धियां
  7. यह किस प्रकार से, हिमालय क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का संवर्धन, संरक्षण और अनुरक्षण करने में सहायक होगा।
  8. अन्य कोई बिन्दु

संगठन के अध्यक्ष/ सचिव का हस्ताक्षर

अपूर्ण आवेदन

ऐसे आवेदन जो उचित रूप में नहीं भरे गए हैं और जिनके साथ में आवश्‍यक दस्तावेज नहीं लगाए गए है तथा वे आवेदन जो निर्धारित प्राधिकारी की संस्तुति के बिना ही प्राप्त हुए हैं, उन पर विचार नहीं होगा और वे सरसरी तौर पर निरस्त कर दिए जाएंगे।

विशेष प्रावधान

स्कीम से सम्बद्ध विशेषज्ञ समिति को राज्य सरकार / स्थानीय प्रशासन से बिना सिफारिश अथवा सिफारिश सहित प्राप्त किसी भी प्रस्ताव को संस्तुत अथवा रद्द करने तथा ऐसा कोई प्रस्ताव जो अत्यधिक महत्व का हो जिसके लिए ईएसी महसूस करे कि संस्कृति मंत्री के अनुमोदन तथा एएस एवं एफए, संस्कृति  मंत्रालय की सहमति से उक्त परियोजना को आरंभ करने हेतु उच्चतम सीमा पर्याप्त नहीं हैं, तो इस स्कीम की अधिकतम सीमा से अधिक किन्तु 30 लाख रुपए की राशि से कम की राशि की सिफारिश करने की षक्ति प्राप्त है।

निरीक्षण और निगरानी

कम से कम 5 प्रतिशत मामलों में निरीक्षण, संस्कृति मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा किया जाएगा। संबंधित राज्य सरकार, जिला कलेक्टर/उपायुक्त भी निगरानी करेंगे।

अनुदान के दुरूपयोग के मामलों में आर्थिक दंड

संस्थान के कार्यकारी निकाय के सदस्य किसी भी दुरूपयोग के मामले में वसूली के लिए उत्तरदायी होंगे। संस्थान को निधि के दुरूपयोग, फर्जी प्रमाण-पत्र आदि के लिए काली सूची में दर्ज़ कर दिया जाएगा। सरकारी अनुदान की सहायता से सृजित सभी अचल परिसम्पत्तियां संस्कृति मंत्रालय द्वारा संस्तुत स्थानीय प्रशासन द्वारा हाथ में ले ली जाएंगी।

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हिमालय क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए वित्तीय सहायता स्कीम, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार

सांस्कृतिक समारोह अनुदान योजनाएं (सीएफजीएस)

यह गैर लाभार्थी संगठनों द्वारा सांस्कृतिक विषयों पर सेमिनारों, उत्सवों तथा प्रदर्शनियों के लिए वित्तीय सहायता की स्कीम है

कार्यक्षेत्र

इस स्कीम में सोसाइटियों, न्यासों तथा विश्वविद्यालयों सहित, जो भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर सेमिनार, अनुसंधान, कार्यशालाएं, उत्सव तथा प्रदर्शनियां आयोजित करते हैं, सभी गैर लाभार्थी संगठनों को सहायता देना शामिल है। ये संगठन सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम (1860), न्यास अधिनियम, कंपनी अधिनियम या केन्द्र या राज्य सरकार के अन्य किसी अधिनियम के तहत पंजीकृत होने चाहिए और कम से कम तीन वर्ष से कार्यरत होने चाहिए। तथापि, यह स्कीम ऐसे संगठनों या संस्थाओं के लिए नहीं होगी जो धार्मिक संस्थाओं या स्कूलों/कॉलेजों के रूप में कार्य कर रहे हों। अनुदान, सांस्कृतिक विरासत, कलाओं, साहित्य और अन्य सृजनात्मक कार्यों के परिरक्षण या संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण विषयों पर सम्मेलनों, सेमिनारों, संगोष्ठियों, उत्सवों तथा प्रदर्शनियों जैसे सभी प्रकार के परस्पर मेलजोल के मंचों के लिए दिया जाएगा।

पात्रता

  1. अनुदान का पात्र होने के लिए आवेदक संगठन का समुचित रूप से गठित ऐसा प्रंबधन निकाय या शासी परिषद होनी चाहिए जिसकी शक्तियां, कार्य व जिम्मेदारियां लिखित संविधान में स्पष्ट रूप से परिभाषित व निर्धारित हों।
  2. संगठन द्वारा परियोजना लागत के कम से कम 25 प्रतिशत तक मैचिंग संसाधनों का करार किया होना चाहिए या इसकी योजना बनाई जानी चाहिए।
  3. संगठन के पास उस समारोह/परियोजना को शुरू करने के लिए सुविधाएं, संसाधन, कार्मिक तथा अनुभव होना चाहिए जिसके लिए अनुदान की मांग की गई हो।
  4. यथा आवेदित ऐसे समारोह के आयोजनों के विगत अनुभव को वरीयता दी जाएगी।

सहायता की मात्रा

उक्त पैरा 4 के तहत विशिष्ट परियोजनाओं के लिए अनुदान, विशेषज्ञ समिति द्वारा यथा संस्तुत व्यय का 75 प्रतिशत तक परन्तु प्रति परियोजना अधिकतम 5.00 लाख रू. तक दिया जाएगा। अपवाद स्वरूप परिस्थितियों में (सक्षम प्राधिकारी अर्थात् संस्कृति मंत्रालय के अनुमोदन से) 20.00 लाख रूपए की राशि प्रदान की जा सकती है।

लेखाकरण पद्धतियां

केन्द्र सरकार द्वारा जारी अनुदानों के संबंध में अलग लेखे रखे जाएंगे।

  1. अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन के लेखाओं की समीक्षा, भारत के नियन्त्रक एवं महालेखा परीक्षक या उसके विवेक पर उसके नामिती द्वारा की जा सकेगी।
  2. अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन, भारत सरकार को अनुमोदित परियोजना पर किए गए व्यय का उल्लेख करते हुए और पूर्व वर्षों में सरकारी अनुदान के उपयोग का ब्यौरा देते हुए किसी सनदी लेखाकार से संपरीक्षित लेखाओं का विवरण प्रस्तुत करेगा। यदि उपयोग प्रमाण-पत्र निर्धारित अवधि के भीतर प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो अनुदान प्राप्तकर्ता को प्राप्त अनुदान की समग्र राशि और उस पर भारत सरकार की वर्तमान दर पर ब्याज तत्काल वापिस करना होगा बशर्तें कि सरकार द्वारा विशेष रूप से ब्याज माफ न किया गया हो।
  3. अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन की, सरकार द्वारा कभी भी आवश्यक समझे जाने पर कोई समिति नियुक्त करके या सरकार द्वारा निर्धारित किसी अन्य तरीके से भारत सरकार, संस्कृति मंत्रालय द्वारा समीक्षा की जा सकेगी।
  4. अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन, विदेश मंत्रालय से अनुमति लिए बिना विदेशी प्रतिनिधिमण्डल को आमंत्रित नहीं करेगा, जिसके लिए आवेदन अनिवार्यतः संस्कृति मंत्रालय के जरिए प्रस्तुत किया जाएगा।
  5. यह ऐसी अन्य शर्तों के अध्यधीन होगा जो समय-समय पर सरकार द्वारा लागू की जाएं।

आवेदन प्रस्तुत करने की पद्धति

यह स्कीम सम्पूर्ण वर्ष खुली रहेगी। इस स्‍कीम के अंतर्गत अनुदान हेतु विहित प्रपत्र में आवेदन पत्र को निदेशक, उत्‍तर मध्‍य क्षेत्र सांस्‍कृतिक केन्‍द्र (एनसीजेडसीसी), 14, सीएसपी सिंह मार्ग, इलाहाबाद-211001 को भेजा जाए। आवेदन, किसी भी राष्ट्रीय अकादमी या भारत सरकार के तहत संस्कृति से सम्बद्ध किसी अन्य संगठन या संबंधित राज्य सरकार/संघ राज्य प्रशासन, राज्य अकादमियों द्वारा संस्तुत होना चाहिए।

आवेदन के साथ संलग्न किए जाने वाले दस्तावेज

  1. संगठन का संविधान
  2. प्रबंधन बोर्ड या शासी निकाय का संविधान और प्रत्येक सदस्य का ब्यौरा
  3. नवीनतम उपलब्ध वार्षिक रिपोर्ट की प्रतिलिपि
  4. निम्नलिखित सहित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट
  • परियोजना की अवधि सहित उस परियोजना का विवरण जिसके लिए सहायता का अनुरोध किया गया है तथा परियोजना के लिए सेवा में लगाए जाने वाले स्टाफ की अर्हताओं तथा अनुभव का ब्यौरा;
  • आवर्ती व गैर-आवर्ती व्यय का अलग से मदवार ब्यौरा देते हुए परियोजना का वित्तीय विवरण।
  • स्रोत जिनसे सहयोगी निधियां प्राप्त की जाएंगी।
  1. आवेदक संगठन के गत तीन वर्षों के आय व व्यय का विवरण तथा किसी सनदी लेखाकार या सरकारी लेखा-परीक्षक द्वारा प्रमाणित गत वर्ष के तुलन-पत्र की प्रतिलिपि
  2. समुचित मूल्यवर्ग के स्टाम्प पेपर पर निर्धारित प्रोफार्मा में क्षतिपूर्ति बॉण्‍ड
  3. संस्वीकृत निधियों के इलेक्‍ट्रॉनिक अंतरण हेतु निर्धारित प्रोफार्मा में बैंक खाते का ब्यौरा

किस्त

अनुदान, 75 प्रतिशत (प्रथम किस्त) और 25 प्रतिशत (दूसरी किस्त) की दो किस्तों में जारी किया जाएगा।

भुगतान का तरीका

भुगतान केवल सम्बद्ध संगठन के बैंक खाते में इलेक्‍ट्रॉनिक अतंरणों से किया जाएगा।

स्‍कीम का कार्य निष्‍पादन

इस समारोह से संबंधित एक रिपोर्ट सजिल्‍द रूप में 3 प्रतियों में प्रस्‍तुत की जाएगी। इसकी पहली प्रति मंत्रालय को तथा दूसरी प्रति आईजीएनसीए को और तीसरी प्रति उस संगठन को प्रस्‍तुत की जाएगी जिसने आवेदन प्राप्‍त करता संगठन के आवेदन पत्र की सिफारिश की थी।

मामलों पर कार्रवाई हेतु लगने वाला समय

अपेक्षित दस्‍तावेजों से समर्थित नहीं किए गए अपूर्ण आवेदनों को सरसरी तौर पर निरस्‍त कर दिया जाएगा और वापस कर दिया जाएगा।

नोट

  • यह स्‍कीम कॉलेजों / विश्‍वविद्यालय महोत्सवों के लिए नहीं है।
  • यह स्‍कीम वैयक्तिक आवेदकों के लिए नहीं है।

सभी अनुदान प्राप्‍तकर्ताओं के लिए अनुदेश

अब से सभी विभिन्‍न अनुदान प्राप्‍तकर्ता संगठनों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे उनके आस-पास के किसी विद्यालय में कम से कम 2 गतिविधियों (उदाहरणार्थ समारोह, व्‍याख्‍यान, संगोष्‍ठी, कार्यशाला, प्रदर्शनी आदि) का आयोजन करें। अनुदान प्राप्‍तकर्ता के लिए दूसरी किस्‍त जारी करने हेतु संबंधित स्‍कूल के प्रधानाचार्य से प्रमाणपत्र एक अनिवार्य रूप से प्रस्‍तुत करना होगा।

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सांस्कृतिक समारोह अनुदान योजनाएं (सीएफजीएस),संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार

विनिर्दिष्ट मंच कला अनुदान स्कीम

विशिष्टी मंच कला परियोजनाओं के लिए कार्यरत व्यावसायिक समूहों और व्यक्तियों को वित्तीय सहायता की स्कीम

प्रस्तावना

स्कीम का नाम विनिर्दिष्ट मंच कला अनुदान स्कीम होगा। इस स्कीम के अंतर्गत नाट्य समूहों, रंगमंच समूहों, संगीत मण्डलियों, बाल रंगशाला, और मंच कला कार्यकलापों के सभी प्रकार के स्वरूपों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इस स्‍कीम के घटक में रेपर्टरी अनुदान शामिल होगा।

अनुदान के लिए पात्रता एवं मानदण्‍ड

  1. रेपर्टरी अनुदान सहायता प्रदान किए जाने वाली नाटक मंडलियों से यह अपेक्षा की जाती है कि उनके पास पर्याप्त संख्या में और गुणवत्ता परक रंगपटल हो और उन्‍होंने अखिल भारतीय स्तर पर प्रस्‍तुति पेश की हों।
  2. जो रेपर्टरी अनुदान प्राप्त कर रहे हैं अनुदान प्राप्तकर्ता के रेपर्टरी अनुदान के नवीकरण की सिफारिश तभी की जाएगी जब वे वित्त वर्ष के दौरान कम से कम दो प्रस्‍तुतियों का मंचन करें। इन दो में से एक प्रस्‍तुति नयी अर्थात जो पहले मंचित न की गयी हो, होना चाहिए।
  3. इस उद्देश्‍य के लिए स्थापित विशेषज्ञ समिति द्वारा वेतन अनुदान का वार्षिक समीक्षा की जाएगी।
  4. कोई संगठन वित्‍तीय वर्ष में केवल एक बार अनुदान प्राप्‍त करने का पात्र होगा।
  5. प्रत्येक 4 (चार) वर्ष के पश्‍चात रेपर्टरी अनुदान जारी रखने के लिए वास्‍तविक सत्‍यापन अनिवार्य होगा।
  6. अनुदान नवीकरण करने हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत करते समय निम्नलिखित शर्तों को पूरा करने पर रेपर्टरी अनुदान को एक किस्त में संवितरित किया जाएगा -
  • जिन संगठनों को वित्तीय सहायता प्रदान की गई है, वे अपने आसपास के किसी भी स्कूल में कम से कम 02 सांस्कृतिक कार्यकलाप (समारोह, व्याख्यान, सेमिनार, कार्यशाला, प्रदर्शनी आदि) अनिवार्य रूप से आयोजित करेंगे। अनुदान के नवीकरण और जारी करने के लिए स्कूल के प्रधानाचार्य से इस आशय का एक प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से अपेक्षित होगा।
  • रेपर्टरी अनुदान प्राप्‍त कर रहे संगठनों को उनके निर्मित कार्यक्रमों / समारोह/ संगोष्ठियों आदि की विडियो को यू-ट्यूब पर अप्‍लोड करना होगा और संस्‍कृति मंत्रालय के यू-ट्यूब /फेसबुक/ ट्विटर पेज पर लिंक प्रदान करना होगा और रेपर्टरी अनुदान के नवीकरण के लिए यह एक पूर्व-शर्त होगी तथा रेपर्टरी अनुदान का नवीकरण करने के लिए उनके अपलोड किए गए विडियो / सामग्री पर आम लोगों से प्राप्‍त टिप्‍पणियों को ध्‍यान में रखा जाएगा।

स्कीम के अंतर्गत आवेदन आमंत्रित करने के लिए विज्ञापन

  1. जब राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्‍ली और संस्‍कृति मंत्रालय की वेबसाइट पर वार्षिक रूप से एक विज्ञापन निकाला जाएगा और संगठन आगामी वित्‍तीय वर्ष के लिए वर्ष के दौरान 1 फरवरी से 15 मार्च के बीच (दोनो तारीखें शामिल हैं) आवेदन कर सकते हैं जिन्‍हें इस उद्देश्‍य के लिए गठित विशेषज्ञ समिति द्वारा आवधिक रूप से मूल्‍यांकित किया जाएगा। निर्धारित तारीख से पहले अथवा बाद में प्राप्‍त आवेदन पत्रों पर विचार नहीं किया जाएगा। आवेदन-पत्र राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी), कलाक्षेत्र फाउंडेशन, सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी), इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए), क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र (जेडसीसी) और इसी प्रकार के निकायों सहित संबंधित राज्य सरकार/केंद्र शासित क्षेत्र प्रशासन या किसी भी राज्य अकादमी या राष्ट्रीय आकादमी से विधिवत रूप से संस्तुत होना चाहिए।
  2. आवेदन पत्र के साथ नीचे पैरा च में यथा निर्धारित दस्तावेज, संलग्न किए जाने चाहिएं। इन दस्तावेजों के बिना प्रस्तुत आवेदनों को अस्वीकृत कर दिया जाएगा।
  3. संस्कृति मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय नाटय विद्यालय (एनएसडी) वार्षिक रूप से एनएसडी / मंत्रालय की वेबसाइटों पर स्कीम को अधिसूचित करेगा।
  4. ‘स्कीम’ के पैरा च में उल्लिखित आवश्यक दस्तावेजों द्वारा समर्थित आवेदनों को विहित प्रपत्र में निदेशक, राष्ट्रीय नाटय विद्यालय, बहावलपुर हाउस, प्‍लॉट न.1, भगवान दास रोड, नई दिल्ली-110001 को भेजें (राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा आवेदक को आवेदन पत्र के संबंध में संसूचित किसी कमी को सीधे निदेशक, एनएसडी को प्रस्तुत किया जाए)

चयन का तरीका

  1. इस उद्देश्‍य के लिए गठित विशेषज्ञ समिति द्वारा रेपर्टरी अनुदान पर विचार किया जाएगा / सिफारिश की जाएगी। विशेषज्ञ समिति का गठन दो वर्षों के लिए होगा तथा यह मंत्रालय द्वारा अनुमोदित होगी। विशेषज्ञ समिति अपनी सिफारिशों के लिए मामला-दर-मामला आधार पर औचित्य बताएगी।
  2. निधि की उपलब्धता और अनुदान के लिए आवेदनों की संख्या के आधार पर विशेषज्ञ समिति द्वारा आवेदनों की जांच आवधिक रूप से की जाएगी।
  3. प्रारंभ में, नए संगठनों के लिए रेपर्टरी अनुदान एक गुरू और दो कलाकारों के लिए होगा जिसे उत्‍तरोत्‍तर एक गुरू और अठारह कलाकारों तक बढ़ाया जा सकता है। तथापि, नृत्‍य और संगीत के लिए किसी भी समय यह बढ़ोत्‍तरी मौजूदा संख्‍या के 100% से अधिक नहीं होनी चाहिए, इसे एक गुरू और दस कलाकार से ज्‍यादा नहीं होना चाहिए।
  4. बजटीय दबावों को ध्‍यान में रखते हुए और नए कलाकार समूहों / संगठनों को अवसर प्रदान करने के लिए, रेपर्टरी अनुदान प्राप्‍त करने वाले मौजूदा संगठनों के 10% भाग को प्रत्‍येक वर्ष हटाया जा सकता है। हटाए जाने का मानदण्‍ड विगत कार्य निष्‍पादन, प्रतिष्‍ठा और कार्य करने की कला (दुर्लभ / पारम्‍परिक / प्रयोगात्‍मक / नवाचार / मूल / लुप्‍तप्राय कला रूप आदि।) हो सकती है।
  5. रेपर्टरी अनुदान प्रस्‍ताव के नवीकरण के लिए व्‍यक्तिगत बातचीत की जाएगी।

अनुदान की राशि

  • प्रत्‍येक गुरू / निर्देशक के लिए 10,000 रु. (दस हजार रु. केवल) प्रतिमाह की दर से सहायता होगी वहीं प्रत्‍येक शिष्‍य / कलाकार के संबंध में यह सहायता निम्‍नानुसार होगी-

शिष्‍य / कलाकार की श्रेणी

आयु समूह

प्रतिमाह सहायता / मानदेय की राशि

(क) वयस्‍क शिष्‍य /कलाकार

(18 साल और इससे अधिक)

6000/- रु. (छ हजार रुपये केवल)

(ख) क श्रेणी के बाल शिष्‍य / कलाकार

(12-<18 वर्ष की आयु)

4500/- रु. (चार हजार पांच सौ रुपये केवल))

(ग) ख श्रेणी के बाल शिष्‍य /कलाकार

(6 -<12 वर्ष की आयु)

2000/- रु. (दो हजार रुपये केवल)

(घ) ग श्रेणी के बाल शिष्‍य /कलाकार

(3-<6 वर्ष की आयु)

1000/- रु. (एक हजार रुपये केवल)

 

  • इस स्‍कीम के अंतर्गत व्‍यय स्‍कीम के अंतर्गत आबंटित परिव्‍यय तक सीमित होना चाहिए।

नोट-

प्रचलित व्‍यवहार के अनुसार, आवेदक संगठनों को भुगतान सर्वदा इलेक्‍ट्रोनिक माध्‍यम / आरटीजीएस द्वारा किया जाएगा।

आवेदन के साथ प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेज़

  1. संगठन के पिछले वर्ष के कार्यकलापों के संबंध में प्रेस समीक्षा, प्रेस विज्ञापनों, टिकटों की स्‍मारक प्रतियों आदि सहित आवेदक संगठन का संक्षिप्‍त परिचय।
  2. संस्‍था के संगम ज्ञापन / विलेख, उप-नियमों व पंजीकरण प्रमाण-पत्र की प्रतिलिपि।
  3. एनजीओ-पीएस (एनजीओ-दर्पण) पोर्टल से प्राप्‍त संगठन की यूनीक आई.डी. संख्‍या की प्रति।
  4. आयकर विभाग द्वारा जारी स्‍थायी खाता संख्‍या (पेन) की प्रति।
  5. विहित प्रपत्र में विधिवत भरा हुआ संकल्‍प (मूल रूप में)।
  6. संगठन की मोहर सहित प्राधिकृत हस्‍ताक्षरकर्ता द्वारा प्रत्‍येक पृष्‍ठ पर हस्‍ताक्षर करते हुए विहित प्रपत्र में विधिवत भरा हुआ क्षतिपूर्ति बंध-पत्र (मूल रूप में) जिस पर दिए गए स्‍थान पर दो गवाहों के हस्‍ताक्षर उनके नाम और पूरे पते के साथ।
  7. अन्‍य बातों के साथ-साथ निम्‍नलिखित का उल्‍लेख करते हुए संगठन की वार्षिक कार्य योजना -
    • संगठन द्वारा इसके आस-पास के किसी स्‍कूल में आयोजित कम से कम दो सांस्‍कृतिक कार्यकलापों (समारोह व्‍याख्‍यान, संगोष्‍ठी, कार्यशाला, प्रदर्शनी आदि) के ब्‍यौरे। अनुदान के नवीकरण एवं जारी किए जाने के लिए स्‍कूल के प्रधानाचार्य द्वारा इसके संबंध में प्रमाण-पत्र को आवश्‍यक रूप से संलग्‍न किया जाना चाहिए।
    • प्रस्‍तुत की जाने वाली कम से कम दो प्रस्‍तुतियों के वार्षिक कार्यक्रम के ब्‍यौरे (जो 150 टंकित-लिखित शब्‍दों से अधिक न हो) (इन दो प्रस्‍तुतियों में से एक प्रस्‍तुति आवश्‍यक रूप से नई होनी चाहिए अर्थात् जिसे पहले मंचित नहीं किया गया हो) इन ब्‍यौरों में मदवार ब्‍यौरे अर्थात् पूर्वाभ्‍यास परिधान, परिवहन, अनुसंधान, पटकथा, मंचन आदि की लागत का उल्‍लेख करते हुए अनुमानित लागत ; और
    • यू-ट्यूब पर अपनी प्रस्‍तुतियों / सामारोह /संगोष्ठियों आदि के विडियो अपलोड करने के प्रमाण और उनके अपलोड किए गए विडिओ / सामग्री पर प्राप्‍त हुई आम लोगों की टिप्‍पणियों के साथ संस्‍कृति मंत्रालय के यू-ट्यूब / फेसबुक/ ट्विटर पेज को लिंक प्रदान करना (यह रेपर्टरी अनुदान के नवीकरण के लिए एक पूर्व-आवश्‍यक शर्त है)(अनुदान का नवीकरण करने के लिए इसे ध्‍यान में रखा जाएगा।)
  1. जिस संगठन हेतु वित्‍तीय सहायता की मांग की गई है, उस संगठन में नाम दर्ज गुरू / निदेशक तथा शिष्‍य /कलाकारों का संपूर्ण विवरण निर्धारित प्रारूप में।
  2. वित्‍तीय सहायता को नए रेपर्टरी अनुदान के रूप में मांगे जाने अथवा रेपर्टरी अनुदान के नवीनीकरण अथवा रेपर्टरी अनुदान के संवर्धन का औचित्‍य।
  3. संगठन के सभी कार्यकलापों को शामिल करते हुए आय एवं व्‍यय तथा प्राप्ति एवं भुगतान के स्‍त्रोतों और प्रवृत्ति सहित गत तीन वर्षों का संपरीक्षित लेखा विवरण।
  4. गत तीन वर्षों के आय कर आकलन आदेश।
  5. पिछले तीन‍ वर्षों के तुलन-पत्र लेखापरीक्षक के प्रमाण पत्र सहित।
  6. संगठन द्वारा प्राप्‍त किए गए अंतिम अनुदान के संबंध में निर्धारित प्रारूप (अर्थात फॉर्म जी एफ आर 19-ए) में उपयोगिता प्रमाण-पत्र (मूल रूप में) तथा चाटर्ड अकाउंटेंट (सीए) द्वारा अपने लेटर हैड (लेटरहैड पर सीए की सदस्‍यता संख्‍या दर्शाई जाए) पर जारी की गई रसीदें एवं भुगतान विवरण (मूल रूप में) जिसे अनुदान प्राप्‍तकर्ता संगठकन के प्राधिकृत हस्‍ताक्षरकर्ता द्वारा मोहर सहित प्रति हस्‍ताक्षरित किया गया हो।
  7. पिछले वर्षों के निर्माण कार्यों की प्रेस समीक्षा, प्रेस विज्ञापन, टिकट आदि की स्‍मारिका प्रतिलिपि आदि।
  8. इस बात का दस्‍तावेजी प्रमाण कि अनुदान प्राप्‍तकर्ता संगठन ने प्रत्‍येक वैयक्तिक लाभार्थी (अर्थात गुरू एवं शिष्‍य /कलाकार) के बैंक खाते में विगत वर्ष में इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्राप्‍त अनुदान को नकद रूप में अंतरित कर दिया है (यथा प्रत्‍येक वैयक्तिक लाभार्थी के बैंक विवरण की प्रति) (रेपर्टरी अनुदान के नवीनीकरण के लिए यह एक अनिवार्य शर्त है)
  9. विधिवत भरा गया एवं हस्‍ताक्षरित विहित बैंक प्रपत्र / प्राधिकृत करने संबंधी पत्र जिसे संबंधित बैंक के प्रबंधक द्वारा सत्‍यापित एवं हस्‍ताक्षरित किया गया हो (मूल रूप में)।
  10. विधिवत भरी गई जांच सूची के साथ आवेदन पत्र।
  11. आवेदन पत्र, सम्बधित राज्य सरकार / संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन या किसी भी राज्य अकादमी या राष्ट्रीय अकादमी जिसमें राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी), कलाक्षेत्र प्रतिष्‍ठान, सांस्कृतिक संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी), इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए), क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र (जेड़सीसी) और सदृश स्तर के निकाय शामिल हैं, से संस्तुत होने चाहिए। इस संबंध में, विहित प्रारूप में प्राप्‍त संस्‍तुति पत्र (मूल रूप में) इस आवेदन पत्र के साथ संलग्‍न किया जाना चाहिए।

नोट

  1. पद्म पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं को संबंधित राज्य सरकारों/ संघ राज्यक्षेत्र प्रशासनों या किसी भी राज्य अकादमियों या राष्ट्रीय अकादमियों जिसमें राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, कला क्षेत्र प्रतिष्‍ठान, सांस्कृतिक संसाधन एवं प्रशिक्षण केन्द्र (सीसीआरटी), इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, आईजीएनसीए), क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्र और सदृश प्रकृति के निकाय शामिल हैं, से संस्तुति प्राप्त करने की छूट होगी।
  2. आवेदन पत्र, मौजूदा स्‍कीम के दिशानिर्देशों के अनुसार सभी तरह से पूर्ण होना चाहिए। यदि किसी प्रकार की विसंगति/ कमी पाई जाती है तो उन पर विचार नहीं किया जाएगा। इस संबंध में एनएसडी/ संस्‍कृति मंत्रालय का निर्णय अंतिम माना जाएगा।

 

स्कीम का मूल्यांकन और मोनिटरिंग

संस्कृति मंत्रालय जैसा भी आवश्‍यक समझे, आवधिक आधार पर, विशेषतः रेपर्टरी अनुदानग्राहियों के लिए, आवधिक निरीक्षणों, फील्ड दौरों आदि के माध्यम से अनुदान ग्राहियों का मूल्यांकन करेगा। जहां तक रेपर्टरी अनुदान के नए मामलों का संबंध है, प्रत्येक मामले में अनुमोदित अनुदान राशि मंत्रालय द्वारा यथा निर्धारित संगठनों के वास्तविक सत्यापन के पश्चात ही जारी की जाएगी। इसके अलावा कम से कम 5-10 प्रतिशत नए संस्तुत प्रस्तावों / मामलों का वास्तविक निरीक्षण / सत्यापन संस्कृति मंत्रालय में संबंधित अवर सचिव / अनुभाग अधिकारी द्वारा किया जाएगा।

योजना की विस्तृत व अद्यतन जानकारी हेतु इस लिंक पर देखें

विनिर्दिष्ट मंच कला अनुदान स्कीम,संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार

राष्ट्रीय महत्व के सांस्कृतिक संगठनों को वित्तीय  सहायता संबंधी स्कीम

पात्रता

  1. अनुदान प्राप्त करने के लिए पात्रता हेतु आवेदक संगठन का एक समुचित रूप से गठित प्रबंधन निकाय अथवा शासी निकाय अथवा शासी परिषद होनी चाहिए जिसमें लिखित संविधान के रूप में इनकी शक्तियों, दायित्वों और कर्तव्यों को स्पष्ट रूप से उल्लिखित और निर्धारित किया होना चाहिए।
  2. इसके पास जिस परियोजना के लिए अनुदान अपेक्षित है उसको शुरू करने के लिए सुविधाएं, संसाधन, कार्मिक एवं अनुभव होना चाहिए।
  3. आवेदक संगठन को भारत में पंजीकृत होना चाहिए और राष्ट्रीय मौजूदगी समेत इसे अखिल भारतीय स्तर का होना चाहिए तथा इसकी राष्ट्रीय/ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचालनात्मक मौजूदगी होनी चाहिए।
  4. इस संगठन के कार्यकलाप मुख्य रूप से अथवा महत्वपूर्ण रूप से सांस्कृतिक होने चाहिए।
  5. इस संगठन की क्षमता वर्ष भर में कम से कम 20 समारोह / कार्यक्रम करने की होनी चाहिए।
  6. इस संगठन के पास पर्याप्त कार्यक्षमता, कलाकार / स्टाफ / स्वैच्छिक सदस्य होने चाहिए।
  7. इस संगठन द्वारा सांस्कृतिक कार्यकलापों पर विगत 5 वर्षों के 3 वर्षों में एक करोड़ अथवा अधिक की राशि खर्च की हुई होनी चाहिए।
  8. वित्‍तीय सहायता नीचे सूचीबद्ध सभी मदों और अथवा कुछ मदों के लिए प्रदान की जाएगीः-
  • सामान्यतः कुल सरकारी अनुदान के 25 प्रतिशत का उपयोग कला एवं संस्कृति के प्रोन्नयन पर केन्द्रित संस्थान / संगठन/ संस्कृति के भवन के रख-रखाव (स्टाफ वेतन, कार्यालयी खर्च, विविध खर्च) निर्माण / मरम्मत / विस्तार/ पुनर्स्‍थापन/ नवीकरण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • सामान्यतः कुल सरकारी अनुदान के 25 प्रतिशत का उपयोग हर हाल में कला एवं संस्कृति के संवर्धन संबंधी शोध परियोजनाओं समेत सांस्कृतिक विरासत तथा कला के परिरक्षण और संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण समारोह को प्रदर्शित / आयोजित करने पर हुए अन्य विविध खर्चों तथा मानदेय के भुगतान के लिए उपयोग किए जा सकते हैं।

अनुदान को जारी करने की पद्धति और शर्तें

  1. विशेषज्ञ सलाहकार समिति द्वारा स्कीम के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों / प्रस्तावों के मूल्यांकन तथा इसके पश्चात् संस्कृति मंत्रालय में प्रशासनिक प्राधिकार के आधार पर अनुदान प्रदान किया जाएगा।
  2. यह अनुदान 2 किश्तों में प्रदान किया जाएगा (अर्थात् 75 प्रतिशत और 25 प्रतिशत) इसकी पहली किश्त परियोजना के अनुमोदन के समय जारी की जाएगी। इसकी दूसरी किश्त समुचित प्रारूप (जीएफआर-19 (ई) के अनुसार) में उपयोग प्रमाण-पत्र, अनुदान प्राप्तकर्ता के हिस्से समेत अनुदान की संपूर्ण राशि के उपयोग को दर्शाते हुए लेखाओं का विधिवत लेखा-परीक्षा विवरण तथा चार्टर्ड एकाउंटेंट द्वारा सत्यापित अन्य दस्तावेजों की प्राप्ति होने पर जारी किया जाएगा। अनुदान की शेष राशि को जारी करने पर निर्णय अनुमोदित अनुदान की अधिकतम सीमा के अध्यधीन रहते हुए वास्तविक व्यय के आधार पर किया जाएगा।
  3. वित्‍तीय सहायता पाने वाला संगठन संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार अथवा संबंधित राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत अधिकारी / प्रतिनिधि द्वारा निरीक्षण के लिए खुला रहेगा।
  4. परियोजना के लेखाओं को समुचित तथा पृथक रूप से रखा जाएगा और भारत सरकार के द्वारा जब कभी मांगा जाए इन्हें प्रस्तुत किया जाएगा और ये इसके विवेक के आधार पर केन्द्र सरकार अथवा राज्य सरकार अथवा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के अधिकारी द्वारा जांच के अध्यधीन होंगे।
  5. यह संगठन कला एवं संस्कृति के प्रोन्नयन पर केन्द्रित संस्थान/संगठन/केन्द्र के भवन के रख-रखाव (स्टाफ वेतन, कार्यालय खर्च, विविध खर्च) और निर्माण/मरम्मत/विस्तार/पुनर्स्‍थापन/नवीकरण के लिए उपयोग के परिव्यय का विस्तृत मद-वार ब्यौरा प्रदान करेंगे।
  6. अनुदान प्राप्तकर्ता निम्नलिखित का रख-रखाव करेगा-
  • सरकार से प्राप्त सहायतानुदान के अतिरिक्त लेखे
  • मशीन से विधिवत छपे हुए हस्त-लिखित सजिल्द पुस्तक में रोकड़ बही रजिस्टर
  • सरकार और अन्य एजेंसियों से प्राप्त अनुदान के लिए सहायतानुदान रजिस्टर
  • व्यय की प्रत्येक मद जैसे हॉस्‍टल भवन का निर्माण आदि के लिए पृथक बहीखाते
  1. संगठन केन्द्र सरकार के अनुदान से पूर्णतः और आंशिक रूप से अर्जित सभी परिसम्‍पत्तियों का रिकॉर्ड रखेगा और जिस उद्देश्य के लिए अनुदान दिया गया है उसके अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए इन्हें भारत सरकार की पूर्व अनुमति के बिना नहीं बेचेगा अथवा ऋणग्रस्त और उपयोग करेगा।
  2. किसी भी समय यदि भारत सरकार के पास ऐसा विश्वास करने के पर्याप्त कारण हैं कि मंजूर की गई धनराशि का उपयोग अनुमोदित उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा रहा है तो अनुदान का भुगतान रोका जा सकता है और पहले के अनुदानों की वसूली की जा सकती है।
  3. संगठन को अनुमोदित परियोजना के कार्य के लिए अवश्य ही तर्कसंगत किफायत अपनानी चाहिए।
  4. अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन वास्तविक उपलब्धियों तथा प्रत्येक अनुमोदित मद पर पृथक रूप से हुए व्यय दोनों के विस्तृत ब्यौरे देते हुए परियोजना की तिमाही प्रगति रिपोर्ट संस्कृति मंत्रालय को प्रस्तुत करेगा।
  5. ऐसे आवेदन जिनके पिछले अनुदान/उपयोग प्रमाण-पत्र लंबित हैं उन पर विचार नहीं किया जाएगा।
  6. संगठन को अपने आस-पास के किसी भी विद्यालय में कम से कम 2 गतिविधियां (समारोह, व्याख्यान, सेमिनार, कार्यशाला, प्रदर्शनी आदि) अवश्य ही आयोजित करनी चाहिए। दूसरी किस्त जारी करने के लिए इस संबंध में विद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा जारी एक प्रमाण-पत्र अनिवार्य रूप से अपेक्षित होगा।

सहायता की मात्रा

एक संगठन को सामान्यतः 1.00 करोड़ रू. तक की वित्‍तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, मंत्रालय द्वारा यह वित्‍तीय सहायता केवल 2.00 करोड़ रू. तक सीमित होगी। तथापि, संस्कृति मंत्री के अनुमोदन से आपवादिक/ सुयोग्य मामलों में इस धनराशि को 5.00 करोड़ रू. तक बढ़ाया जा सकता है। स्कीम के अंतर्गत किसी संगठन के लिए सहायता उपरोक्त सीमा के अध्यधीन अनुमोदित लागत के अधिकतम 67 प्रतिशत तक सीमित रहेगी। अनुमोदित लागत के शेष 33 प्रतिशत को संगठन द्वारा इसके ‘बराबर के हिस्से’ के रूप में खर्च किया जाएगा(राज्य /संघ राज्यक्षेत्र सरकार/केन्द्रीय मंत्रालय/पीएसयू/विश्वविद्यालय आदि द्वारा अंशदान के अलावा)।

लेखांकन प्रक्रियाएं

केन्द्र सरकार द्वारा जारी किए गए अनुदान के संबंध में पृथक लेखाओं का रख-रखाव किया जाएगा ;

  1. अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन के लेखे भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक अथवा उसके विवेकानुसार उनके नामिती के द्वारा किसी भी समय लेखा-परीक्षा के लिए उपलब्ध रहेंगे।
  2. अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन अनुमोदित परियोजना पर हुए खर्च को दर्शाते हुए तथा पूर्व वर्षों में सरकारी अनुदान के उपयोग का उल्लेख करते हुए सनदी लेखाकार द्वारा लेखा-परीक्षित लेखाओं का विवरण भारत सरकार को प्रस्तुत करेगा। यदि निर्धारित अवधि के भीतर उपयोग प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो जब तक सरकार द्वारा कोई विशेष छूट न दी गई हो, वह तुरंत प्राप्त अनुदान की राशि को उस पर भारत सरकार की मौजूदा ब्याज दर के साथ वापस लौटाने की व्यवस्था करेगा।
  3. अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन, जब कभी भी सरकार द्वारा आवश्यक प्रतीत होने पर भारत सरकार, संस्कृति मंत्रालय द्वारा समिति नियुक्त करके अथवा भारत सरकार द्वारा निर्धारित किसी अन्य तरीके के माध्यम से समीक्षा के लिए खुला रहेगा।
  4. अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन विदेश मंत्रालय की पूर्व अनुमति के बिना किसी विदेशी प्रतिनिधिमंडल (जिन्हें संस्कृति मंत्रालय की स्कीम द्वारा वित्‍तीय सहायता प्राप्त कार्यक्रमों के संबंध में आमंत्रित किया जा रहा है) को आमंत्रित नहीं करेगा। इस प्रकार की अनुमति के आवेदन संस्कृति मंत्रालय के माध्यम से भेजे जाएंगे।
  5. यह संगठन समय-समय पर सरकार द्वारा लगाए गए अन्य शर्तों के अध्यधीन होगा।

आवेदन पत्र प्रस्तुत करने की प्रक्रिया

संस्कृति मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर पात्र संगठनों से आवेदनों को आमंत्रित करने के लिए विज्ञापन अपलोड किया जाएगा। विहित प्रपत्र में विधिवत भरे आवेदन पत्रों को केन्द्र सरकार/राज्य सरकार/ संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन के संबंधित सांस्कृतिक विभाग/स्कंध अथवा संस्कृति मंत्रालय के किसी क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्रों/राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी), संगीत नाटक अकादमी (एसएनए), ललित कला अकादमी (एलकेए), सीसीआरटी, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए), सहित राष्ट्रीय अकादमियों तथा इसी के समतुल्य निकायों द्वारा संस्तुत किया जाना चाहिए और इन्हें केवल इन्हीं संगठनों के माध्यम से भेजा जाना चाहिए। तथापि, संस्कृति मंत्रालय के पास किसी आवेदन पर सीधे विचार करने का विवेकाधिकार होगा।

आवेदन के साथ प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेज

  1. संगठन की संरचना
  2. शासी निकाय के प्रबंधन बोर्ड का संघटन और प्रत्येक सदस्य संबंधी ब्यौरे
  3. अद्यतन उपलब्ध वार्षिक रिपोर्ट की प्रति
  4. निम्नलिखित को शामिल करते हुए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट ;
  • जिस परियोजना के लिए सहायता चाहिए उसकी अवधि समेत उस परियोजना का ब्यौरा।
  • आवर्ती तथा गैर-आवर्ती व्यय का अलग-अलग मदवार ब्यौरा प्रदान करते हुए परियोजना का वित्‍तीय विवरण।
  • उस स्रोत का उल्लेख जहां से सदृश धनराशि प्राप्त की जाएगी।
  1. आवेदक संगठन का विगत तीन वर्षों का आय और व्यय का विवरण तथा विगत वर्षों के तुलन पत्र की एक प्रति।
  2. समुचित मूल्य के स्टाम्प पेपर पर विहित प्रपत्र में एक क्षतिपूर्ति बंध पत्र।
  3. अनुमोदित अनुदान के इलेक्ट्रॉनिक हस्तांतरण को सुलभ बनाने के लिए विहित प्रपत्र में बैंक खाते के विवरण।

छूट

ऐसे सभी सांस्‍कृतिक संगठन जो गैर-योजना शीर्ष के अंतर्गत पहले से ही सहायता अनुदान प्राप्‍त कर रहे हैं उन्‍हें स्‍कीम दिशा-निर्देशों के प्रावधानों के अंतर्गत योजना शीर्ष से अनुदान के लिए औपचारिक रूप से आवेदन करने से छूट प्राप्‍त होगी।

आपवादिक मामलों में संस्कृति मंत्रालय के पास विशेषज्ञ/संचालन/सलाहकार समिति की सिफारिशों पर दिशा-निर्देश के किसी भी मानदंड में कारणों को लेखबद्ध करते हुए छूट प्रदान करने का अधिकार सुरक्षित रहेगा।

योजना की विस्तृत व अद्यतन जानकारी हेतु इस लिंक पर देखें

राष्ट्रीय महत्व के सांस्कृतिक संगठनों को वित्तीय सहायता संबंधी स्कीम, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार

 

स्रोत:संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार

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अभिनव राय किशुनदासपुर आजमगढ़ मो.९४५०८६१५९३ Jul 11, 2017 12:53 PM

श्रीमान जी मै भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म......... (हिंXू-XौX्X-सिक्ख-जैX) के विकास हेतू ...हिंदू धर्म अध्दयन केन्द्र खोलना चाहता !

Sanjay vaidik Jun 14, 2017 10:49 PM

श्रीमान संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत केवल आपको बौद्ध धर्म के अलावा भारतीय सनातन संस्कृति के अनुरक्षण के लिए भी ग्रांड प्रदान करना चाहिए जिसके माध्यम से भारतीय संस्कृति जो सभी धर्मों की जननी है और जिसमें विश्व बंधुत्व की भावना निहित है जिसके माध्यम से समस्त कल्याण एवं सर मार्ग पर चलने का मार्ग प्रशस्त होगा तथा विश्व शांति की दिशा में एक भारतीय जन समुदाय द्वारा अनोखा प्रयास प्रस्तुत किया जा सकता है एवं

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