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राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम लिमिटेड (एनएसआईसी) का विपणन सहायता स्कीम

इसमें राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम लिमिटेड (एनएसआईसी) का विपणन सहायता स्कीम को बताया गया है|

पृष्ठभूमि

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम पिछले पांच दशकों के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था के एक गतिशील क्षेत्र के रूप में उभरा है। सूक्ष्म लघु मध्यम उद्योग (सू.ल.म.उ.) न सिर्फ बड़े उद्यमों की तुलना में कम पूंजी लागत पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है बल्कि ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में औद्योगीकरण में सहायता करता है जिससे क्षेत्रीय असंतुलन कम होता है तथा राष्ट्रीय आय और धन का अधिक समान वितरण सुनिश्चित होता है। सू.ल.म.उ बड़े उद्यमों के लिए सहायता-इकाइयों के रूप में पूरक होते हैं तथा इनका देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में बहुत योगदान है।

तेजी से बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य ने भारत में सू.ल.म.उ. के समक्ष अनेक अवसर और चुनौतियां उत्पन्न की हैं। जबकि एक ओर तो इस क्षेत्र के समक्ष अपनी उत्पादकता बढ़ाने और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नए बाजार तलाशने के लिए बहुत से अवसर खुले हुए हैं, वहीँ  दूसरी ओर यह प्रतिस्पर्धा का सामना कर अपनी सामर्थ्य बढ़ाने के लिए बाध्य हैं क्योंकि विश्वव्यापी  बाजार में नए-नए उत्पाद बहुत तेजी से बहुत कम समय में सामने आ रहे हैं। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के पास बड़े उद्योगों की तरह व्यापार/बाजार के विकास के लिए रणनीतिक उपकरण/साधन नहीं होते हैं। वर्तमान प्रतिस्पर्धी युग में, विपणन सबसे कमजोर क्षेत्रों में से एक है जिनमें सू.ल.म.उ. बड़ी-बड़ी समस्याओं का सामना करते हैं।

विपणन सहायता स्कीम

विपणन जो व्यापार विकास के लिए एक रणनीति उपकरण है, वह सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की वृद्धि और जीविता के लिए महत्वपूर्ण है। किसी उद्यम की सफलता के लिए विपणन सबसे महत्वपूर्ण घटक है। बड़े उद्यमों के पास बहुत अधिक संसाधन होते हैं जिससे वे अपने उत्पादों और सेवाओं के विपणन की देखरेख के लिए बड़े स्तर पर कार्मिकों को किराए पर लगा सकते हैं। सू.ल.म.उ. क्षेत्र के पास उक्त संसाधन नहीं हैं और इसलिए इसके विपणन क्षेत्र में इन इनपुटों का उपयोग करने के लिए सांस्थानिक सहायता की जरूरत होती है।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय अन्य बातों के साथ-साथ, राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम, मंत्रालय के एक सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम के माध्यम से विपणन सहायता स्कीम के अन्तर्गत सूक्ष्म और लघु उद्यमों को विपणन सहायता उपलब्ध कराता है।

पिछले वर्षों के दौरान वृहद्‌ और विविधतापूर्ण सेवा क्षेत्रों का जो विकास हुआ है, उसने एक ऐसी स्थिति पैदा की थी जिसके तहत अब सूक्ष्म और लघु उद्यमों (सूलउ)  पूर्व में लघु उद्योग

(एसएसआई) के रूप में ज्ञात चिन्ताओं का समाधान करना था बल्कि उद्यमों के सम्पूर्ण दायरे को शामिल करना जरूरी था जिसमें सूक्ष्म, लघु उद्यम क्षेत्र के साथ-साथ संबंधित सेवा क्षेत्रों को भी एक परस्पर संबंधित संजाल के रूप में शामिल किया जा सके। यह आवश्यक था कि लघु उद्यमों से मध्यम उद्यमों के लिए एक दायरा बढ़ाने की जरूरत थी जिससे इसी तरह प्रौद्योगिकी के बेहतर और उच्चतर स्तर अपनाने और तेजी से हो रहे वैश्वीकरण में भी प्रतिस्पर्धा करने में समर्थ हो सकेंगे। इस प्रकार अधिकांश विकसित और विकासशील देशों की तरह भारत में ही यह आवश्यक था कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के सम्पूर्ण दायरे के सरोकारों पर ध्यान दिया गया और इस क्षेत्र को एक एकल कानूनी ढांचे के दायरे में लाया गया। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (एमएसएमईडी) अधिनियम, 2006 ऐसे ही विषयों की ओर ध्यान देता है तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों से संबंधित ऋण, विपणन,प्रौद्योगिकी उन्नयन आदि से संबंधित अन्य मुद्‌दों पर भी ध्यान देता है। 2 अक्तूबर, 2006 से लागू एम.एस.एम.ई.डी अधिनियम, 2006 का अधिनियम ने मध्यम स्तरीय उद्योगों तथा सेवा संबंधी उद्यम को भी मंत्रालय की सीमा में लाया है।

वर्तमान समय की आवश्यकता संपूर्ण सू.ल.म.उ. क्षेत्र (सेवा क्षेत्र मिलाकर) को चुनौतियों को अवसरों में बदलने तथा नई ऊँचाइयों को प्राप्त करने के लिए उन्हें सुदृढ़ करने के लिए उपयुक्त उपायों के माध्यम से ग्रामीण और सूक्ष्म उद्यमों पर विशेष  जोर के साथ सहायता प्रदान करना है। इस प्रकार, यद्यपि लक्षित लाभार्थियों के रूप में मध्यम उद्यमों को भी इस स्कीम में शामिल किया गया है तथा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के सूक्ष्म और लघु उद्यमों के उत्पादों और सेवाओं के विपणन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

योजना का उद्देश्य

स्कीम के विस्तृत उददेश्यों में, अन्य बातों के साथ-साथ निम्न शामिल हैं-

  1. सू.ल.म.उ. की विपणन क्षमता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाना,
  2. सू.ल.म.उ. की क्षमताओं को प्रदर्शित करना,
  3. प्रचलित बाजार परिदृश्य तथा उनके कार्यकलापों पर संभावित प्रभावों के संबंध में सू.ल.म.उ को अद्यतन करना।
  4. उत्पादों और सेवाओं के विपणन के लिए सू.ल.म.उ. के कंसोर्टियम के गठन को सुविधा प्रदान करना।
  5. बड़े संस्थागत क्रेताओं के साथ पारस्परिक प्रतिक्रिया के लिए सू.ल.म.उ. को प्लेटफॉर्म प्रदान करना।
  6. सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों का प्रसार/प्रचार करना।
  7. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के विपणन कौशलों को बढ़ावा देना।

सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग को विपणन सहायता

इस स्कीम के अन्तर्गत राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (एनएसआईसी) के माध्यम से सू.ल.म.उ. को विपणन सहायता उपलब्ध कराने तथा निम्न कार्यकलापों के माध्यम से उनके उत्पादों की प्रतिस्पर्धा और विपणन क्षमता बढ़ाने का प्रस्ताव है।

राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम द्वारा विदेशों में अंतर्राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी प्रदर्शनियों का आयोजन तथा अन्तर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों/व्यापार मेलो में भागीदारी-

राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम द्वारा अंतर्राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी प्रदर्शनों/प्रदर्शनियों का आयोजन इस बात पर ध्यान रखकर किया जा सकता है कि भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को अधिक एक्सपोजर उपलब्ध कराया जाए ताकि वह नए उभर रहे व विकसित हो रहे बाजारों में नए विपणन अवसरों का पता लगा सकें। ये प्रदर्शनियां संबंधित पणधारियों और उद्योग संघों आदि के परामर्श से आयोजित की जा सकती है। इन कार्यक्रमों के कैलेंडर को पहले ही अंतिम रूप दिया जा सकता है और सभी भागीदारों/ स्टेकहोल्डरों के बीच व्यापक प्रचार किया जा सकता है। कार्यक्रमों का कैलेंडर राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम की वेबसाइट पर भी दर्शाया जाएगा। इस प्रकार के प्रदर्शन से भारतीय सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) को अपनी विविध प्रौद्योगिकी,  उत्पादों तथा सेवाओं को दर्शाने का मौका मिलेगा जिससे उन्हें व्यापार के अधिक अवसर मिलेंगे तथा व्यापार को बढ़ावा देने, संयुक्त उपक्रमों की स्थापना, प्रौद्योगिकी अन्तरण, विपणन व्यवस्था और इमेज निर्माण में सहायता मिलेगी। अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों के आयोजन के अतिरिक्त, राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम भारतीय सू.ल.म.उ. को चयनित अन्तर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों और व्याापार मेलों में भाग लेने में भी मदद पहुँचाएगी। इस तरह के कार्यक्रमों में भाग लेने में भी सू.ल.म.उ. अन्तर्राष्ट्रीय तौर-तरीकों को जान सकेंगे तथा उनका व्यापारिक कौशल  बढेगा। ये कार्यक्रम सू.ल.म.उ. को ऐसा प्लेटफॉर्म प्रदान करते हैं जहां वे आपस में मिलते हैं तथा परस्पर चर्चा के आधार पर तकनीकी तथा व्यापारिक समझौता करते हैं।

सहायता का मापदंड

क    विदेशों में प्रौद्योगिकी प्रदर्शनियों का आयोजन

क्र.सं.

पात्र मदें

सहायता का स्तर

 

1.

जगह का किराया (बनाई गई दुकान)

सामान्य श्रेणी के उद्यमियों के लिए :

सूक्ष्म उद्यम : वास्तविक प्रभार का 75%

लघु उद्यम : वास्तविक प्रभार का 60%

मध्यम उद्यम : वास्तविक प्रभार का 25%

पूर्वोत्तर क्षेत्र/महिलाएं/अ.जा./अ.ज.जा. के उद्यमियों के उद्यमों

के लिए :

सूक्ष्म उद्यम : वास्तविक प्रभार का 95%

लघु उद्यम : वास्तविक प्रभार का 85%

मध्यम उद्यम : वास्तविक प्रभार का 50%

2

कार्यक्रमों को भेजी जानेवाली वस्तुओं का लदाई प्रभार

अधिकतम 25000/.रु. के अध्यधीन वास्तविक (37500/.रु. लैटिन अमेरिकी देशों के लिए), प्रति उद्यमी प्रति मार्ग

 

3

वायुयान भाड़ा

सामान्य श्रेणी के उद्यमियों के लिए

सूक्ष्म उद्यम

इकोनॉमी क्लास वापसी भाड़ा का 85% (एक उद्यम से एक प्रतिनिधि के लिए)

लघु उद्यम

इकोनॉमी क्लास वापसी भाड़ा का 75% (एक उद्यम से एक प्रतिनिधि के लिए)

मध्यम उद्यम

इकोनॉमी क्लास वापसी भाड़ा का 25% (एक उद्यम से एक प्रतिनिधि के लिए)

पूर्वोत्तर क्षेत्र/महिला/अ.जा./अ.ज.जा. उद्यमियों के उद्यमों के लिए

सूक्ष्म उद्यम : इकोनॉमी क्लास वापसी भाड़ा 95% (एक उद्यम से एक प्रतिनिधि के लिए)

लघु उद्यम : इकोनॉमी क्लास वापसी भाड़ा 85% (एक उद्यम से एक प्रतिनिधि के लिए)

मध्यम उद्यम : इकोनॉमी क्लास वापसी भाड़ा 50% (एक उद्यम से एक प्रतिनिधि के लिए)

 

4

वायुयान भाड़ा, स्थान किराया और शिपिंग/परिवहन

 

प्रभार के लिए सहायता की अधिकतम राशि सामान्य श्रेणी

लैटिन अमेरिका      अन्य देश

सूक्ष्म उद्यम  2.40 लाख रु. 2.00 लाख रु.

लघु उद्यम   2.10 लाख रु. 1.75 लाख रु.

मध्यम उद्यम 1.25 लाख रु. 1.00 लाख रु.

पूर्वोत्तर क्षेत्र/महिलाएं/अ.जा./अ.ज.जा. श्रेणी के उद्यमियों के लिए

लैटिन अमेरिका      अन्य देश

सूक्ष्म उद्यम  2.70 लाख रु. 2.25 लाख रु.

लघु उद्यम   2.40 लाख रु. 2.00 लाख रु.

मध्यम उद्यम 1.60 लाख रु. 1.25 लाख रु.

 

5

विज्ञापन, प्रचार और थीम पैविलियन

अधिकतम 20 लाख रु. के अध्यधीन उक्त चार उप शीर्षों के अन्तर्गत कुल देय सब्सिडी का 20%

 

नोट:

सामान्य तौर पर, ऐसे किसी मामले में कम से कम 20 या अधिक सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) को भाग लेना चाहिए। तथापि, छानबीन समिति अंतर्राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी प्रदर्शनियों के आयोजन के प्रस्ताव पर विचार कर सकती है, जिसमें सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) कारणों की रिकॉर्डिंग के बाद 20 से कम भाग ले रहे हैं, छानबीन समिति ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन के लिए प्रतिनियुक्त किए जाने वाले राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम के प्रतिनिधियों की न्यूनतम को ध्यान में रखकर संख्या  की सिफारिश भी कर सकती है। छानबीन समिति राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक को अनुमोदन के लिए उपयुक्त औचित्य और सिफारिश के साथ प्रस्ताव भेजेंगे। तथापि, यदि कार्यक्रम हेतु बजटीय सहायता 50 लाख रु. से अधिक हो तो प्रशासनिक मंत्रालय का अनुमोदन आवश्यक होगा।

ख.   विदेशों में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों/व्यापार मेलों में भागीदारी

क्र.सं.

पात्र मदें

सहायता का स्तर

 

1

स्थान  किराया (बनाई गई दुकान)

सामान्य श्रेणी के उद्यमियों के लिए

सूक्ष्म उद्यम : वास्तविक प्रभार का 75%

लघु उद्यम : वास्तविक प्रभार का 60%

मध्यम उद्यम : वास्तविक प्रभार का 25%

पूर्वोत्तर क्षेंत्र/महिला/अ.जा./अ.ज.जा. के उद्यमियों के उद्यमों के लिए

सूक्ष्म उद्यम : वास्तविक प्रभार का 95%

लघु उद्यम : वास्तविक प्रभार का 85%

मध्यम उद्यम : वास्तविक प्रभार का 50%

2

कार्यक्रम     में भेजी  जाने   वाली वस्तुओं के लिए लदाई प्रभार

प्रति उद्यमी अधिकतम 20000/-रु. (लैटिन अमेरिकी देशों के लिए 30000/-रु.)  के अध्यधीन वास्तविक राशि।

 

3

हवाई जहाज किराया

सामान्य श्रेणी के उद्यमियों के लिए :

सूक्ष्म उद्यम: इकोनॉमी क्लास वापसी भाड़ा का 85% (एक उद्यम से एक प्रतिनिधि के लिए)

लघु उद्यम: इकोनॉमी क्लास वापसी भाड़ा का 75% (एक उद्यम से एक प्रतिनिधि के लिए)

मध्यम उद्यम: इकोनॉमी क्लास वापसी भाड़ा का 25% (एक उद्यम से एक प्रतिनिधि के लिए)

पूर्वोत्तर क्षेत्र/महिला/अ.जा./अ.ज.जा. के उद्यमियों के उद्यमों के लिए:

सूक्ष्म उद्यम: इकोनॉमी क्लास वापसी भाड़ा का 95% (एक उद्यम से एक प्रतिनिधि के लिए)

लघु उद्यम : इकोनॉमी क्लास वापसी भाड़ा का 85%(एक उद्यम से एक प्रतिनिधि के लिए)

मध्यम उद्यम : इकोनॉमी क्लास वापसी भाड़ा का 50%(एक उद्यम से एक प्रतिनिधि के लिए)

4.

वायुयान भाड़ा, स्थान किराया और शिपिंग, परिवहन शुल्कों के लिए सहायता की अधिकतम राशि

 

सामान्य श्रेणी

लैटिन अमेरिका      अन्य देश

सूक्ष्म उद्यम        2.25 लाख रु.       2.00 लाख रु.

लघु उद्यम         2.00 लाख रु.       1.75 लाख रु.

मध्यम उद्यम       1.50 लाख रु.       1.25 लाख रु.

पूर्वोत्तर क्षेत्र/महिला/अ.जा./अ.ज.जा. श्रेंणी के उद्यमियों के उद्यमों के लिए

लैटिन अमेरिका      अन्य देश

सूक्ष्म उद्यम        2.50 लाख रु.       2.25 लाख रु.

लघु उद्यम         2.25 लाख रु.       1.75 लाख रु.

मध्यम उद्यम       1.75 लाख रु.       1.50 लाख रु.

5

विज्ञापन, प्रचार और थीम पैविलियन आदि  अधिकतम 5 लाख रु. के अध्यधीन उक्त चार उप-शीर्षों के अंतर्गत स्वीकार्य कुल सब्सिडी का 20 %

 

 

सामान्य तौर पर, इस तरह के कार्यक्रमों में कम से कम 5 सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) को भाग लेना चाहिए। यदि 10 सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) तक भाग लेते हैं तो भाग लेने वाले उद्यमी के साथ सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) मंत्रालय तथा राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम में से प्रत्येक से एक-एक प्रतिनिधि जा सकते हैं। यदि 10 सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) से अधिक भाग लेते हैं तो उस स्थिति में छानबीन समिति आवश्यकता के आधार पर इस तरह के कार्यक्रम के लिए 1 अतिरिक्त राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम अधिकारी की प्रतिनियुक्ति  के प्रस्ताव पर विचार कर सकती है। छानबीन समिति, उपयुक्त औचित्य और सिफारिश के साथ, प्रस्ताव को अनुमोदन के लिए अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम को सौंपेंगे।

एक अन्तर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी/व्यापार मेले में भाग लेने के लिए अधिकतम निवल बजटीय सहायता प्रति कार्यक्रम 30 लाख रु. की कुल अधिकतम सीमा में सीमित होगी। (लैटिन अमेरिकी देशों के लिए 40 लाख रु.)। उन मामलों में जहां कार्यक्रम के लिए बजटीय सहायता 30 लाख रु. से अधिक हो तो (लैटिन अमेरिकी देशों के लिए 40 लाख रु.), उसके लिए प्रशासनिक मंत्रालय का अनुमोदन अपेक्षित होगा।

घरेलू प्रदर्शनियों का आयोजन तथा भारत में प्रदर्शनियों/व्यापार मेलों में भागीदारी

देश के भीतर सू.ल.म.उ. को विपणन अवसर उपलब्ध कराने के लिए कुछ निश्चित विषय आधारित प्रदर्शनियां/प्रौद्योगिकी मेलों आदि राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम द्वारा आयोजित किए जा सकते हैं, जिनका ध्यान सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) द्वारा दिए जानें वाले उत्पादों और सेवाओं पर होगा, जिसमें रोजगार सृजन के लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकी, विशेष क्षेत्रों या क्लस्टरों से उत्पाद (जैसे पूर्वोत्तर क्षेत्र, खाद्य प्रसंस्करण, मशीन उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक, चमड़ा आदि) शामिल  होंगे। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को ऐसी प्रदर्शनियों/मेलों में अपने उत्पादों और सेवाओं का प्रदर्शन करने के लिए रियायती दर पर स्थान दिए जाएंगे। उक्त के अतिरिक्त, राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम विभिन्न राज्य सरकार विभागों, उद्योग संघों और अन्य संस्थाओं को सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) को संपूर्ण देश में उनके उत्पादों और सेवाओं का प्रदर्शन करने के लिए सहायता प्रदान करेगा। इन प्रदर्शनियों का आयोजन संबंधित स्टेकहोल्डरों और उद्योग संघों आदि के परामर्श से किया जा सकता है। इन कार्यक्रमों के लिए कैलेंडर को पहले से अच्छी तरह अंतिम रूपा दिया जा सकता है तथा व्यापक प्रचार के लिए सभी भागीदारों/स्टेकहोल्डरों के मध्य वितरित किया जा सकता है। कार्यक्रमों के कैलेंडर को भी राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम की वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाएगा। ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेने से सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) को नए बाजारों अधिकार में लेने तथा विद्यमान बाजारों तक अपना विस्तार करने में मदद मिलेगी। इससे उन्हें सहायक कंपनियां बनने, संयुक्त उद्यमों में भागीदार बनने और बड़ी कम्पनियों के लिए उप संविदा करने में मदद मिलेगी।

सहायता का मापदंड

सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) को अपने उत्पादों और सेवाओं को विभिन्न घरेलू प्रदर्शनियों में प्रदर्शन करने के लिए कार्यान्वयन एजेंसी अर्थात्‌ राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम द्वारा सब्सिडी दरों पर बना बनाया स्थान उपलब्ध कराया जाएगा। सब्सिडी की दर उपलब्ध स्थान प्रभार पर निम्नानुसार होगीः

सामान्य श्रेणी

सूक्ष्म उद्यम- 75 प्रतिशत

लघु उद्यम- 60 प्रतिशत

मध्यम उद्यम- 25 प्रतिशत

पूर्वोत्तर क्षेत्र/महिला/अ.जा./अ.ज.जा श्रेणी से संबंधित उद्यम

सूक्ष्म उद्यम-95 प्रतिशत

लघु उद्यम-85 प्रतिशत

मध्यम उद्यम-50 प्रतिशत

घरेलू प्रदर्शनियाँ/व्यापार मेले आयोजित करने का बजट व्यय के विभिन्न घटकों जैसे निर्माण और फैब्रिकेटिंग शुल्कों सहित स्थान का किराया, थीम पैबिलियन, विज्ञापन, मुद्र्रण सामग्री, परिवहन आदि। पर निर्भर करता है तथापि, इस प्रकार की प्रदर्शनी /व्यापार मेला आयोजित करने के निबल व्यय के लिए बजटीय सहायता सामान्य रूप से अधिकतम 45 लाख रु. की राशि के भीतर होगी। प्रदर्शनी /व्यापार मेले में भागीदारी के लिए संगत बजटीय सीमा 10 लाख रु. होगी। प्रदर्शनी/व्यापार मेले में भागीदारी के लिए अनुरूप बजटीय सीमा 15 लाख रूपये होगी। उक्त बजटीय सीमाओं से अधिक होने के मामलों में, प्रशासनिक  मंत्रालय का अनुमोदन आवद्गयक होगा।

राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम द्वारा ''टेकमार्ट'' प्रदर्शनी

राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम प्रत्येक वर्ष नवम्बर माह में भारतीय अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेले (आईआईटीएफ) के दौरान टेकमार्ट प्रदर्शनी  का आयोजन करता रहा है। यह एक अन्तर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी है जिसमें भारत के सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) के सबसे अच्छे उत्पादों, प्रौद्योगिकी और सेवाओं का प्रदर्शन  किया जाता है। इस प्रदर्शनी  में भाग लेने वाले सामान्य श्रेणी के उद्यमियों को कोई सब्सिडी नहीं दी जाती है। इस उद्देश्य  के लिए आवंटित स्थान के कुल क्षेत्र का 30 प्रतिशत  तक इस उद्देश्य  से समय-समय पर जारी निर्देशों  और दिशा -निर्देशों  को ध्यान में रखते हुए विशेष  श्रेणी के उद्यमियों अर्थात्‌ पूर्वोत्तर क्षेत्र/महिला/अ.ज/अ.ज.जा श्रेणी के उद्यमियों को दिया जाएगा। विशेष श्रेणी के उद्यमियों को उपलब्ध कराया जाने वाली सब्सिडी निम्नानुसार है-

सूक्ष्म उद्यम-95 प्रतिशत

लघु उद्यम-85 प्रतिशत

मध्यम उद्यम-50 प्रतिशत

टेकमार्ट आयोजित करने के लिए कुल बजटीय सहायता सामान्य रूप से केवल 75 लाख रु. के भीतर होगी। इस सीमा से अधिक व्यय होने के प्रस्ताव का अनुमोदन प्रशासनिक  मंत्रालय से लेना आवश्यक होगा।

अन्य संगठनों/उद्योग संघों/एजेन्सियों द्वारा आयोजित प्रदर्शनियों के सह-प्रायोजन हेतु सहायता

सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) क्षेत्र के लाभ के लिए देश के भीतर प्रदर्शनियाँ/मेले आयोजित करने के लिए, सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) के संवर्धन और विकास में संलग्न विभिन्न संस्थाओं, उद्योग संघों और संगठनों को सहायता प्रदान की जा सकती है। यह सहायता राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम द्वारा उस कार्यक्रम का सह-प्रायोजन करने के रूप में होगी। राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम द्वारा किसी कार्यक्रम के सह-प्रायोजन  के लिए आवेदन करने के लिए, आवेदक संगठन/एजेन्सी को निम्नलिखित मानदण्ड/शर्तों  को पूरा करना चाहिए-

(क)   आवेदक संगठन/उद्योग संघ/संस्थान को कम से कम 3 वर्षो से सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) के विकास में लगा होना चाहिए तथा उनके पास इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करने के लिए पर्याप्त अनुभव और योग्यता होनी चाहिए।

(ख) आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रम और दुकानों के लिए विशेष  रूप से कम से कम 5 हजार वर्ग फीट का कवर क्षेत्र होना चाहिए तथा इसमें कम से कम 50 सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) इकाइयों की भागीदारी होनी चाहिए। आयोजक को अपने आवेदन के साथ प्रस्तावित प्रदर्शनी  का एक अंतिम रूपरेखा/विन्यास प्रस्तुत करना होगा।

(ग) मंत्रालय और इसके संगठनों के संवर्धनात्मक और अन्य स्कीमों के बारे में सूचना प्रसार के लिए कम से कम 100 वर्ग फीट की एक दुकान आयोजक द्वारा राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम को उपलब्ध कराई जाएगी।

(घ) कार्यक्रम के नाम के पूर्व 'राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम' लिखा होगा और इस बात को भी प्रमुखता के साथ प्रदर्शित  किया जाएगा कि यह कार्यक्रम 'सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों' के लिए है तथा सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) मंत्रालय द्वारा समर्थित है।

(ङ)   कार्यक्रम के सभी प्रकाद्गानों, साहित्य, बैनरों, होर्डिंगों  आदि पर राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम और सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) मंत्रालय का नाम प्रमुखता से प्रदर्शित  होगा।

सहायता का मापदंड

किसी प्रदर्शनी /व्यापार मेले के सह-प्रायोजन के लिए आवेदक संगठन/एजेन्सी को सहायता का मापदंड कार्यक्रम के स्थान पर निर्भर करेगा। कार्यक्रम के सह-आयोजन  के लिए प्रदर्शनी  की जमीन/कक्ष, दुकान लगाने, प्रचार आदि के व्यय को आंशिक  रूप से पूरा करने के लिए बजटीय सहायता निबल व्यय(सकल व्यय-कुल आय) के 40 प्रतिशत  की सीमा में होगी, जो निम्नलिखित अधिकतम राशि के अध्यधीन होगी-

'क' श्रेणी के शहरों  के लिए 5 लाख रु.

'ख' श्रेणी के शहरों  के लिए 3 लाख रु.

'ग' श्रेणी के शहरों  के लिए 2 लाख रु.

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 1 लाख रु.

कार्यक्रम के सह-प्रायोजन के लिए सहायता कार्यक्रम सम्बन्धी रिपोर्ट और अन्य संगत कागजात प्रस्तुत करने पर, कार्यक्रम के उपरान्त प्रतिपूर्ति आधार पर आवेदक संगठन को उपलब्ध कराई जाएगी।

क्रेता-विक्रेता बैठकें

क्रेता-विक्रेता बैठकों का आयोजन एक प्लेटफार्म पर थोक क्रेताओं/सरकारी विभागों तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को एक साथ लाने के लिए किया जाता है। थोक और विभागीय क्रेता जैसे रेलवे, रक्षा, संचार विभाग तथा बड़ी कम्पनियां अपनी विपणन प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाने के लिए सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) के नजदीक आने के लिए क्रेता-विक्रेता बैठकों में भाग लेने के लिए आमंत्रित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों का लक्ष्य थोक विनिर्माताओं के लिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम से विक्रेता विकास करना है। इन कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए एक ओर तो थोक क्रेताओं की आवश्यकताओं  के बारे में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम को पता चलता है वहीं दूसरी ओर थोक क्रेताओं  को उनकी अपनी खरीद के लिए सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) की क्षमताओं का पता चलता है। इन क्रेता-विक्रेता बैठकों का आयोजन, औद्योगिक विकास में लगे उद्योग संघों और अन्य एजेन्सियों सहित सम्बन्धित स्टेकहोल्डरों के साथ परामर्श करके किया जा सकता है, और इन कार्यक्रमों के लिए कैलेण्डर को पहले से अच्छी तरह अंतिम रूप दिया जा सकता है और व्यापक रूप से प्रकाशित  किया जा सकता है।

सहायता का मापदंड

ऐसी बैठकों में भाग लेने के लिए सामान्य श्रेणी के उद्यमियों को कोई सब्सिडी उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। तथापि, पूर्वोत्तर क्षेत्र/महिला/अ.जा./अ.ज.जा श्रेणी के उद्यमियों के लिए निम्न उल्लिखित दरों के अनुसार क्रेता-विक्रेता बैठकों में भाग लेने के लिए सब्सिडी दरों पर स्थान उपलब्ध कराया जाएगा-

सूक्ष्म उद्यम -95 प्रतिशत

लघु उद्यम -85 प्रतिशत

मध्यम उद्यम -50 प्रतिशत

इस प्रकार के क्रेता-विक्रेता बैठकों में कुल क्षेत्र का 30 प्रतिशत  तक इस सम्बन्ध में समय-समय पर जारी निर्देशों  और दिशा -निर्देशों  को ध्यान में रखते हुए विशेष श्रेणी अर्थात्‌ पूर्वोत्तर क्षेत्र/महिला/ अ.जा./अ.ज.जा. श्रेणी के उद्यमियों को अवांटित किया जा सकता है।

क्रेता-विक्रेता बैठक आयोजित करने के लिए बजट व्यय के विभिन्न घटकों अर्थात्‌ स्थान का किराया, आन्तरिक सज्जा, विज्ञापन, मुद्रण सामग्री, परिवहन पर निर्भर करेगा। तथापि, क्रेता-विक्रेता बैठक के लिए बजटीय सहायता निम्नलिखित सीमाओं के अध्यधीन होगा-

'क' श्रेणी के शहरों  में बैठक के लिए 5 लाख रु.

'खश्रेणी के शहरों  में बैठक के लिए 3 लाख रु.

'ग' श्रेणी के शहरों  में बैठक के लिए 2 लाख रु.

ग्रामीण क्षेत्रों में बैठक के लिए 1 लाख रु.

गहन अभियान तथा विपणन संवर्धन कार्यक्रम

गहन अभियान तथा विपणन संवर्धन कार्यक्रमों का आयोजन सम्पूर्ण देश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लाभ के लिए विभिन्न स्कीमों के सम्बन्ध में सूचना प्रसार के लिए किया जाता है। उन्हे अपने उत्पादों और सेवाओं की विपणन क्षमता सुधारने तथा नवीनतम विकास कार्यकलापों, गुणवत्ता मानकों आदि के सम्बन्ध में पूर्ण जानकारी प्रदान करने के लिए भी सुविधा प्रदान की जाती है।

सहायता का मापदंड

गहन प्रचार तथा विपणन सुधार कार्यक्रमों के आयोजन के लिए व्यय इस स्कीम के अन्तर्गत सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई बजटीय सहायता में से किया जाएगा, जो निम्नलिखित अधिकतम सीमा के अध्यधीन होगा-

'क' श्रेणी के शहरों  के लिए 80 हजार रु.

'ख' श्रेणी के शहरों  के लिए 48 हजार रु.

'ग' श्रेणी के शहरों  के लिए 32 हजार रु.

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 16 हजार रु.

कार्यक्रम में भाग लेने के लिए भागीदार इकाइयों को कोई वित्तीय सहायता नहीं दी जाएगी। भाग लेने वाले सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) को अपने खर्च पर इन कार्यक्रमों में भाग लेना है।

अन्य सहायता कार्यकलाप

स्कीम के अन्तर्गत सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) के विपणन सम्बन्धी प्रयासों को सहायता प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम द्वारा निम्नलिखित कार्यकलाप संपादित किए जा सकते हैं :-

 

  1. सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) के उत्पादों और सेवाओं के सम्वर्धन के लिए प्रदर्शन  केन्द्रों, शो-विन्डो और होर्डिंग आदि का विकास।
  2. सम्बन्धित साहित्य, ब्रोचर और उत्पाद विद्गिाष्ट कैटलगों का मुद्रण तथा सीडी आदि और सूचना प्रसार के लिए लघु फिल्मों  का निर्माण।
  3. सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) उत्पादों और सेवाओं के विपणन को सुविधा प्रदान करने हेतु वेबसाइट/पोर्टल विकसित करना।
  4. सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) क्षेत्रों और कार्यक्रमों के लिए विभिन्न कार्यक्रमों/स्कीमों  के बारे में सामग्री के विज्ञापन और प्रचार का विकास और प्रसार करना।
  5. सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) विनिर्माताओं/आपूर्तिकर्ताओं/निर्यातकों की निर्देशिका  तैयार करना और अद्यतन करना।
  6. सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) की सफल कहानियों का वृत्त चित्रण।
  7. घरेलू तथा अन्तर्राष्ट्रीय बाजारों दोनों के लिए नए बाजारों/व्यापार तथा उत्पादरेंज का अन्वेषण करने तथा उनका आकलन करने के लिए अध्ययन आयोजित करना।
  8. अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि मंडलों की मेजबानी करना तथा नेटवर्किंग सम्बन्धी कार्यक्रम।
  9. ऐसे कार्यकलापों के लिए बजटीय सहायता की अधिकतम राशि स्कीमों के कुल वार्षिक बजट के पांच प्रतिशत  के भीतर होगी तथा किसी भी एक वैयक्तिक प्रस्ताव के लिए, उक्त किसी कार्यक्रम/कार्यकलाप के लिए अधिकतम स्वीकार्य सीमा 5.00 लाख रु. ही होगी।

स्कीम के कार्यान्वयन के लिए प्रक्रिया

सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) मंत्रालय स्कीम का कार्यान्वयन राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम के माध्यम से करेगा, जो सम्पूर्ण देश में स्थित अपने कार्यालयों के माध्यम से स्कीम के अन्तर्गत आने वाले विभिन्न कार्यकलापों को सम्पादित करेगा। स्कीम के कार्यान्वयन के लिए निधियां राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम को कार्य निपटाने के लिए पहले ही दे दी जाएंगी, जो इसकी उचित उपयोगिता तथा यथापेक्षित उपयोगिता प्रमाणपत्र तथा अन्य रिपोर्टों की प्रस्तुति हेतु पूरी तरह जिम्मेवार होगी।

राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम आगामी कार्यक्रमों को कम से कम तीन माह पहले अपलोड करेंगे ताकि लक्षित लाभार्थी पहले ही अच्छी तरह अपनी भागीदारी निश्चित कर सके। स्कीम के अन्तर्गत सहायता प्राप्त करने के लिए आवेदनों/प्रस्तावों को पूर्ण ब्योरा तथा औचित्य के साथ सीधे तौर पर राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम को दिया जाएगा। समेकित प्रस्ताव को विचार हेतु छानबीन समिति के समक्ष रखा जाएगा। छानबीन समिति प्रस्तावों की जांच करेगी और उन पर विचार करेगी। प्रस्तावों पर विचार करने के दौरान उन भागीदारों/इकाइयों को वरीयता दी जाएगी जिन्होंने अब तक इस स्कीम अथवा मंत्रालय की इस प्रकार की अन्य स्कीम के अन्तर्गत यथापेक्षित है। प्रस्तावों को छानबीन समिति द्वारा प्रक्रिया तैयार करने के बाद अपनी सिफारिशों  के साथ राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष-सह-प्रबन्ध निदेशक के समक्ष अनुमोदन हेतु रखा जाएगा। प्रशासनिक  मंत्रालय के अनुमोदन वाले प्रस्तावों को राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक द्वारा, आईएफडी के साथ परामर्श करके, उचित औचित्य के साथ मंत्रालय के विचार और अनुमोदन हेतु अग्रेषित किया जाएगा। सहायता को भागीदारों की फीडबैक सहित कार्यक्रम की रिपोर्ट और अन्य निर्धारित दस्तावेजों की प्राप्ति पर प्रतिपूर्ति आधार पर संबन्धित आवेदक संगठन को राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम द्वारा जारी की जाएगी।

छानबीन समिति

विपणन सहायता स्कीम के अन्तर्गत प्राप्त प्रस्ताव की जांच एक छानबीन समिति द्वारा की जाएगी जिसकी अध्यक्षता राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम के निदेशक (नियोजन और विपणन) करेगें जिसमें वित्त और प्रदर्शनी  प्रभागों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। छानबीन समिति की बैठक प्रत्येक माह में कम से कम एक बार या जब और जहाँ अपेक्षित हो, वहाँ होगी।

प्रशासनिक  व्यय

राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) मंत्रालय की विपणन सहायता स्कीम के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेन्सी है। विपणन सहायता स्कीम के कुल व्यय का 10 प्रतिशत  के आस-पास प्रशासनिक  व्यय स्कीम के कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम को प्रतिपूर्ति की जाएगी। प्रशासनिक  व्यय में उपरिव्यय तथा जनशक्ति की लागत तथा स्कीम के कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम द्वारा किए गए अन्य प्रयासों की लागत शामिल है।

मॉनीटरिंग और मूल्यांकन

स्कीम की प्रगति की समीक्षा और मॉनीटरिंग समय-समय पर राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम तथा सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्योग(सूल्मउ) मंत्रालय द्वारा की जाएगी तथा प्रगति पर आधारित आवधिक रिपोर्ट मंत्रालय को प्रस्तुत की जाएगी। स्कीम के प्रभाव और लाभों का मूल्यांकन, अध्ययनों, नमूना सर्वेक्षणों, फीडबैक रिपोर्टों आदि और एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा अध्ययन के माध्यम से किया जाएगा।

राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम लिमिटेड (एनएसआईसी) का सरकारी भंडार खरीद कार्यक्रम की जानकारी के लिए तथा आवेदन के लिए सरकार के वेबसाइट http://www.nsic.co.in/ पर क्लिक करें|

 

स्रोत: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई)का राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम लिमिटेड (एनएसआईसी) |

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देवेन्द्र सावरकर Apr 02, 2017 02:13 PM

मुझे काम्पोस खत बनाने के लिय साहता , जो हमारे ग्रामिण शेतकरी भाई को/ खेती बाली अच्छी फसल ले / जमीन उत्तपादक मात्र बठाये- आगे आप मार्गदशन कारे / plz suggest mi

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