सामग्री पर पहुँचे | Skip to navigation

होम (घर) / समाज कल्याण / उद्यमिता / कौशल विकास / रोजगार के समाधान के लिए कौशल विकास पर है जोर
शेयर
Views
  • अवस्था संपादित करने के स्वीकृत

रोजगार के समाधान के लिए कौशल विकास पर है जोर

इस पृष्ठ में रोजगार के समाधान के लिए कौशल विकास पर है जोर कैसे है, इसकी जानकारी दी गयी है।

परिचय

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) देश के करोड़ युवकों को रोजगार मुहैया कराने में महती भूमिका अदा कर सकती है। पीएमकेवाई का मूल चरित्र आजाद भारत के संस्कार पुरुष महात्मा गांधी के सपनों के अनुरुप है। गांधी जी ने हुनरमंद होने की पुरजोर पैरवी की थी। उनका अपना काम खुद करने पर सर्वाधिक विश्वास था। पीएमकेवीवाई की इमानदार पहल से सरकार की ओर से हुनरमंद तैयार करने के लिए पहले चरण में प्रशिक्षण केंद्रों की बाढ़ आ सकती है। फिर अगले चरण में उससे प्रशिक्षित होकर निकलने वाले हुनरमंदों की फौज खड़ी हो सकती है। ये प्रशिक्षित लोग सरकार की ओर से प्रदत ऋण योजनाओं का लाभ उठाकर स्वरोजगार खड़े कर सकते हैं। पीएमकेवाई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्किल इंडिया और स्टैंड अप इंडिया का अहम हिस्सा है। जिसके सहारे दुनिया भर में मेक इन इंडिया का डंका बजाना है।

पीएमकेवीवाई के अहम् बदलाव

पीएमकेवीवाई को प्रभावी बनाने के लिए बीते नबंवर में नए सिरे से लॉच किया गया है। इसमें कई अहम बदलाव किए गए हैं। जैसे हर पीएमकेवीवाई प्रशिक्षण केंद्र पर आधार बायोमेट्रिक्स और सीसीटीवी से निगरानी को अनिवार्य कर दिया गया है। प्रशिक्षकों के स्टैंडर्ड को पुनर्निधारित किया गया है। बायोमेट्रिक्स की हाजिरी तय करेगी कि वास्तव में छात्रों को हुनरमंद बनाया जा रहा है। सेक्टर स्किल कॉसिल से दक्षता का प्रशिक्षण पाए प्रशिक्षक तय करेंगे कि प्रशिक्षण हासिल करने आए प्रशिक्षुओं को हुनरमंद बनाने में कोई कोताही नहीं बरती जा रही है। इसके अलावा प्रशिक्षण अवधि में प्रशिक्षार्थियों को उद्यमी बनाने में मदद करने की व्यवस्था की गई है। प्रशिक्षणदाता केंद्रों के लिए प्रशिक्षण उपरांत “रोजगार मेला” लगवाने का प्रावधान है। ये नई व्यवस्था पूर्व में पीएमकेवीवाई के संचालन में मिली खामियों के निवारण के लिए की गई हैं।

उद्यमिता का भाव स्वरोजगार पैदा करने के लिए जरुरी है। स्वरोजगार का स्वावलंबन से स्वावलंबन का स्वाभिमान से गहरा रिश्ता है। इसके लिए पीएमकेवीवाई से प्रशिक्षण हासिल करके निकले लोगों को उद्मिता ऋण देने के लिए बैंकों को खास निर्देश दिया गया है। पीएमकेवीवाई से प्रशिक्षित हुनरमंदों की उद्यमिता से नए रोजगार का सृजन हो, तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। प्रधानमंत्री कौशल विकास केंद्रों के जरिए माली, प्रेसमैन, पल्मबर, इलेक्ट्रिक फीटर, हेल्थ वर्कर, सुरक्षा गार्ड, टेलरिंग जैसे दो सौ पच्चीस किस्मों के हुनर के व्यवसायिक प्रशिक्षण की व्यवस्था है। इन कौशल प्रशिक्षण केंद्रों का संचालन अपने आप में बेरोजगारों को रोजगार देने का प्रसाधन बन रहा है। पत्रकारिता को छोड़ पीएमकेवीवाई केंद्रों के संचालन का काम कर रहे अत्तदीपा फांउडेशन के अध्यक्ष विकास सिंह बताते हैं कि प्रधानमंत्री कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्रों के संचालन मात्र से बेरोजगारी की समस्या व्यापक पैमाने पर दूर हो रही है। आज सुदूर गांवों तक प्रशिक्षण केंद्रों के धुन की धूम मची है।

उच्च स्तरीय कौशल विकास के अंतर्गत लाभार्थी लें रहे हैं प्रशिक्षण

गांव-गांव, शहर-शहर, डगर-डगर शुरु हो रहे प्रधानमंत्री कौशल विकास केंद्रों के अलावा राष्ट्रीय कौशल विकास निगम की ओर से उच्च स्तरीय कौशल विकास के बडे प्रशिक्षण केंद्र शुरु किए जा रहे हैं। इन केंद्रों की शुरुआत के लिए सरकार की ओर से प्रशिक्षण में लगी कंपनियों को अतिरिक्त आर्थिक मदद दी जा रही है। पीएमकेवीवाई प्रशिक्षण केंद्रों पर घंटों में सीमित प्रशिक्षण से तैयार प्रशिक्षु आईटीआई व पॉलिटेकनिक के डिप्लोमा होल्डर वाले रोजगार पाने के हकदार बन रहे हैं।

पीएमकेवीवाई के केंद्र पारदर्शी और इमानदारी के साथ काम करें। इसके लिए इस बार कई एहतियात बरते गए हैं। लेकिन एहतियात के नाम पर प्रशिक्षण केंद्र को चलाने का काम व्यवहारिक दिक्कतें आ रही हैं। पीएमकेवाई के प्रशिक्षण केंद्रों से जुड़ी दिक्कतों का असरदार निवारण जरुरी है। पीएमकेवीवाई को प्रभावी तरीके से लागू करने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) पर है। योजना क्रियान्वयन में पारदर्शिता रखने के लिए एनएसडीसी को इसे सेक्टर स्किल कॉसिल (एसएससी) और क्वालिटी कंट्रोल ऑफ इंडिया (क्यूसीआई) के जरिए पूरा करना है। शिकायतें आ रही है। पारदर्शिता के नाम पर विभिन्न एजेंसियों के बीच बंटा ज्यादातर काम ऑन लाइन अथवा कॉल सेंटर के नवागंतुकों के मार्फत किया जा रहा है। पीएमकेवीवाई को जमीन पर उतारने का दारोमदार थामने वाले वरिष्ठ अधिकारी व एनसीडीसी के सीईओ मनीष कुमार का कहना है कि पीएमकेवीवाई के तहत प्रशिक्षण केंद्र खोलने की अपेक्षित रफ्तार नहीं हासिल हो पाया है।

पीएमकेवीवाई केंद्रों तक प्रशिक्षुओं को आकर्षित करने के लिए यात्रा भत्ता व रहने-ठहरने के खर्च का प्रावधान किया गया है। प्रशिक्षण के बाद रोजगार तलाशने के दौरान दो महीने के आर्थिक मदद सीधे प्रशिक्षु के खाते में भेजने की व्यवस्था की गई है। केंद्रीय कैबिनेट ने अगले चार वर्षों (2016-2020) में एक करोड़ नए लोगों को प्रशिक्षित करने का ध्येय रखा है। इसमें से साठ लाख प्रशिक्षण केंद्रों से प्रशिक्षित होंगे तो 40 लाख कार्यरत कर्मचारियों को गुणवत्ता वृद्धि का प्रशिक्षण दिया जाना है। इसके लिए योजना मद से 12000 करोड़ रुपए की धनराशि का प्रावधान किया गया है। आम बजट में रोजगार सृजन के संदर्भ में प्रधानमंत्री कौशल केंद्रों को देशभर के 600 जिलों में विस्तृत करने की घोषणा की गई।

इसके अलावा विदेश जाकर नौकरी करने वालों का ख्याल रखकर देशभर में सौ भारतीय अंतर्राष्ट्रीय कौशल केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इससे उन्नत प्रशिक्षण तथा विदेशी भाषा के पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। दरअसल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विदेश यात्राओं के दौरान अंधाधुन रैलियों से यह बात साबित हो चुकी है कि भारतीय मूल के लोग दुनिया के हर देश में मौजूद हैं। पहले ये बिना किसी खास प्रशिक्षण के विदेश जाने की तैयारी में रहते थे। खास हुनर के अभाव में विदेशों में भारतीयों के शोषण की शिकायतें आम थी। अब जब प्रशिक्षित होकर यानी हुनरमंद होकर विदेश पहुंचेंगे तो उनके सामने सम्मानजनक रोजगार का संकट नहीं रहेगा।

केंद्र सरकार की ओर से प्रशिक्षण कार्यक्रम पर जोर देने के साथ स्वालंबन के लिए आजीविका प्रोत्साहन कार्यक्रम संकल्प की शुरुआत की गई है। इसके तहत साढ़े तीन करोड़ युवाओं को बाजार की मांग के अनुरुप प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्रीय वित्तीय प्रावधान के तहत स्किल अपग्रेडेशन प्रोग्राम स्ट्राइव के अगले चरण पर मौजूदा वित्त वर्ष में 2200 करोड़ रुपए खर्च किए जाने है। स्ट्राइव  के तहत व्यावसायिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता एवं बाजार में इसकी प्रासंगिकता बढ़ाने और औद्योगिक क्लस्टर के जरिए प्रशिक्षु पाठ्यक्रमों के सुदृढीकरण पर विशेष जोर है।

इन योजनाओं के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल विकास के लिए दीनदयाल अंत्योदय योजना- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के आवंटन को बढ़ाया गया है। इसके जरिए सरकार की घोषित मंशा एक करोड़ परिवारों को गरीबी रेखा से बाहर निकालना है। रोजगार सृजन के व्यक्तिगत अवसरों को संवारने की पहल युवाशक्ति को उचित दिशा  मोड़ने के लए जरुरी था। देश की कुल आबादी के 65 प्रतिशत लोग 35 साल के कम उम्र के हैं। इनकी बेरोजगारी से भारत उदय संभव नहीं है। इस विशाल आबादी को रोजगार सृजन और कौशल विकास के लाभ से जोड़ने में सफलता मिलती है तो जनसांख्यिकी लाभांश के हिसाब से भारत दुनिया प्रभावशाली देश बन सकता है।

स्टार्ट अप इंडिया और स्टैंड अप इंडिया योजना ने दी नयी उड़ान

पीएमकेवीवाई के साथ केंद्र सरकार ने स्टार्ट अप को सहुलियतों के साथ बढ़ावा देने की बात है। स्टार्ट अप इंडिया और स्टैंड अप इंडिया की नई योजना को गति देने के फैसले की यह प्रमुख वजह है। इसके तहत यूनिक बिजनेस आइडिया वाले बिजने पर सरकार 55 फीसदी तक सरकारी मदद मुहैया करा रही है।

उद्यमिता के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा बैंक योजना महत्वपूर्ण है। इसके जरिए गांव से शहरों की ओर पलायन कर रहे युवकों को उद्यमी बनाने का उपाय है। जो जहां है वह प्रधानमंत्री मुद्रा बैंक योजना  का लाभ लेकर उद्यमिता शुरु कर सकता है। मुद्रा योजना में बैंक से बिना किसी गारंटी के  10 लाख  तक की मुद्रा सहायता (ऋण मदद) का प्रावधान है। आवेदक की कुशलता, उद्योग का प्रकार और उद्योग की ज़रूरत को ध्यान मे रखते हुए ऋण दी जा रही है। मुद्रा योजना का विस्तृत अर्थ माइक्रो यूनिट डेवलोपमेंट री-फाइनेंस एजेंसी  है, जिसे संक्षिप्त नाम मुद्रा  दिया गया है।

रोजगार की समस्या से जूझते देश के छोटे और मध्‍यम उद्योग नौकरी के नए अवसर पैदा करने के सबसे बड़े स्रोत हैं। जाहिर तौर पर कौशल विकास केंद्रों से निकलने वाले प्रशिक्षितों को इन उद्योगों में जगह मिलनी है। इन उद्योंगों की पुरानी मांग रही है कि पलायन की वजह से स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित कर्मचारी मिलने में समस्या आ रही है। कौशलयुक्त कमर्चारियों की उपलब्धता से उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में स्‍तर पर मुकाबला करने में कठिनाइयां दूर होंगी।

आंकड़ों के मुताबिक लघु उद्योग कुल उद्योग के करीब 90 प्रतिशत से ज्‍यादा हैं। पीएमकेवीवाई योजना से इनको कौशलयुक्त कर्मचारियों का मिलना बिन मांगी मुराद पूरी होने जैसा है। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की ओर से उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बीते साल नवंबर से अबतक देश के अलग अलग हिस्सों में दस रोजगार मेलाओं का आयोजन किया गया है। इनमें एक लाख दस हजार आवेदक पहुंचे। जिनमें से अठारह हजार लोगों को कौशलयुक्त कर्मियों की चाहत रखने वाले साठ से ज्यादा कंपनियों ने आन स्पॉट नौकरी में बहाल कर लिया। पीएमकेवीवाई केंद्रों से निकलने वाले कौशलयुक्त कर्मियों के लिए आने वाले दिनों में और भी व्यापक पैमाने पर रोजगार मेले का आयोजन किया जाना है। जाहिर तौर पर इसकी सफलता रोजगार के समाधान की कुंजी बनने वाली है।

स्त्रोत: पत्र सूचना कार्यालय

लेखक: आलोक कुमार

 

3.16216216216

Raunak singh Feb 14, 2019 03:21 PM

हमारे पास एजुकेशन नहीं है पर अनुभव बहरपुर है हॉस्पिटल फील्ड और marketing फील्ड का पर जॉब नही

अपना सुझाव दें

(यदि दी गई विषय सामग्री पर आपके पास कोई सुझाव/टिप्पणी है तो कृपया उसे यहां लिखें ।)

Enter the word
नेवीगेशन
संबंधित भाषाएँ
Back to top

T612019/07/19 18:35:15.837701 GMT+0530

T622019/07/19 18:35:15.878310 GMT+0530

T632019/07/19 18:35:15.879178 GMT+0530

T642019/07/19 18:35:15.879497 GMT+0530

T12019/07/19 18:35:15.760105 GMT+0530

T22019/07/19 18:35:15.760305 GMT+0530

T32019/07/19 18:35:15.760477 GMT+0530

T42019/07/19 18:35:15.760633 GMT+0530

T52019/07/19 18:35:15.760729 GMT+0530

T62019/07/19 18:35:15.760822 GMT+0530

T72019/07/19 18:35:15.761669 GMT+0530

T82019/07/19 18:35:15.761889 GMT+0530

T92019/07/19 18:35:15.762123 GMT+0530

T102019/07/19 18:35:15.762384 GMT+0530

T112019/07/19 18:35:15.762435 GMT+0530

T122019/07/19 18:35:15.762537 GMT+0530