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प्रधानमंत्री मुद्रा बैंक योजना

इसमें प्रधानमंत्री मुद्रा बैंक योजना के बारे में बताया गया है|

मुद्रा बैंक की परिकल्पना

वित्‍त वर्ष 2015-16 के अपने बजट भाषण में केन्‍द्रीय वित्‍त मंत्री श्री अरुण जेटली ने 20,000 करोड़ रुपये की राशि तथा 3,000 करोड़ रुपये की ऋण गारंटी राशि के साथ एक सूक्ष्‍म इकाई विकास पुनर्वित्‍त एजेंसी (मुद्रा) बैंक के सृजन का प्रस्‍ताव रखा था। मुद्रा का गठन एक कानून बनाने के जरिये किया जाना है। यह एक प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, सभी सूक्ष्‍म वित्‍त संस्‍थानों (एमएफआई)- जो विनिर्माण, व्‍यापार एवं सेवा गतिविधियों से जुड़े सूक्ष्‍म/ लघु व्‍यवसाय इकाइयों को ऋण देने के व्‍यवसाय में हैं- के जरिये विकास एवं पुनर्वित्‍त के लिए जवाबदेह होगा। मुद्रा लघु/सूक्ष्म व्‍यवसाय उपक्रमों के स्‍थानीय वित्‍तदाताओं को वित्‍त मुहैया कराने के लिए राज्‍य/ क्षेत्रीय स्‍तर के समन्‍वयकों के साथ साझीदारी भी करेगा। इसके अतिरिक्‍त, इसका उद्देश्‍य केवल ऋण के दृष्टिकोण से आगे बढ़कर देशभर में फैले इन उपक्रमों के लिए ऋण जमा समाधान प्रस्‍तुत करना भी है। मुद्रा के लिए परिकल्पित भूमिकाओं में शामिल बिन्दु हैं-

  1. सूक्ष्‍म उपक्रम वित्‍तपोषण व्‍यवसायों के लिए नीति दिशानिर्देश निर्धारित करना
  2. एमएफआई इकाइयों का पंजीकरण
  3. एमएफआई इकाइयों का प्रमाणन/ मूल्‍यांकन
  4. कर्जधारिता से मुक्ति पाने के लिए जिम्‍मेदार वित्‍तपोषण प्रचलनों का निर्धारण तथा उचित ग्राहक सुरक्षा सिद्धांतों और वसूली की पद्धतियां सुनिश्चित करना
  5. सूक्ष्‍म उपक्रमों को ऋण देने वाले स्‍थानीय वित्‍तदाताओं  को प्रशासित करने के लिए एक मानक नियम पत्रों के समूह का विकास
  6. सभी के लिए सही प्रौद्योगिकी समाधानों को बढ़ावा देना
  7. सूक्ष्‍म उपक्रमों को कर्ज देने वाले ऋणों/विभागों को गारंटी मुहैया करने के लिए एक ऋण गारंटी योजना का निर्माण एवं संचालन
  8. क्षेत्र में विकास एवं प्रवर्तन ग‍तिविधियों का समर्थन
  9. प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत सूक्ष्‍म व्‍यवसायों को स्‍थानीय ऋण आपूर्ति की एक अच्‍छी संरचना का सृजन

'मुद्रा' का उद्गम

एनसीएसबीएस में उद्यमिता-विकास की सबसे बड़ी बाधा है इस क्षेत्र के लिए वित्तीय सहायता की अनुपलब्धता। इस क्षेत्र के लिए बैंकों द्वारा उपलब्ध सहायता बहुत कम है, जिसमें से 15% से कम बैंक-ऋण सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को मिलता है।

गैर-निगमित क्षेत्र का बहुत बड़ा हिस्सा अपंजीकृत उद्यमों के रूप में काम करता है। वे विधिवत खाता-बही नहीं रखते और कराधान के क्षेत्र के अंतर्गत औपचारिक रूप से समाहित नहीं हैं। इसलिए उन्हें उधार देने में बैंकों को कठिनाई होती है।इस क्षेत्र की अधिकांश इकाइयां वित्त के संस्थागत स्रोतों तक नहीं पहुँचतीं।

इस पृष्ठभूमि में, भारत सरकार सांविधिक अधिनियम के ज़रिए माइक्रो यूनिट्स डेवलेपमेंट एंड रिफाइनांस एजेंसी लि.(मुद्रा) बैंक की स्थापना कर रही है। यह एजेंसी उन सभी अल्प-वित्त संस्थाओं के विनियमन तथा पुनर्वित्तीयन के लिए उत्तरदायी होगी, जो विनिर्माण, व्यापार तथा सेवा संबंधी कार्यकलापों में संलग्न सूक्ष्म/लघु व्यवसाय निकायों को ऋण-प्रदायगी का व्यवसाय करती हैं। लघु/सूक्ष्म व्यवसाय उद्यमों को अंतिम छोर पर वित्त प्रदान करनेवाले वित्तदाता को वित्त-प्रदायगी के लिए यह बैंक राज्य-स्तरीय/क्षेत्र-स्तरीय समन्वयकों के साथ सहभागिता करेगा।

चूंकि अधिनियमन में कुछ समय लगने की संभावना है, 'मुद्रा' को सिडबी की एक इकाई के रूप में आरंभ किया जाना प्रस्तावित है, ताकि सिडबी की पहल और विशेषज्ञता का लाभ लिया जा सके।

मुद्रा के उद्देश्य

प्रधानमंत्री मुद्रा बैंक के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैः

  1. सूक्ष्म वित्त के ऋणदाता और कर्जगृहिता का नियमन और सूक्ष्म वित्त प्रणाली में नियमन और समावेशी भागीदारी को सुनिश्चित करते हुए उसे स्थायित्व प्रदान करना।
  2. सूक्ष्म वित्त संस्थाओं (एमएफआई) और छोटे व्यापारियों, रिटेलर्स, स्वसहायता समूहों और व्यक्तियों को उधार देने वाली एजेंसियों को वित्त एवं उधार गतिविधियों में सहयोग देना।
  3. सभी एमएफआई को रजिस्टर करना और पहली बार प्रदर्शन के स्तर (परफॉर्मंस रेटिंग) और अधिमान्यता की प्रणाली शुरू करना। इससे कर्ज लेने से पहले आकलन और उस एमएफआई तक पहुंचने में मदद मिलेगी, जो उनकी जरूरतों को पूरी करते हो और जिसका पुराना रिकॉर्ड सबसे ज्यादा संतोषजनक है। इससे एमएफआई में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। इसका फायदा कर्ज लेने वालों को मिलेगा।
  4. कर्ज लेने वालों को ढांचागत दिशानिर्देश उपलब्ध कराना, जिन पर अमल करते हुए व्यापार में नाकामी से बचा जा सके या समय पर उचित कदम उठाए जा सके। डिफॉल्ट के केस में बकाया पैसे की वसूली के लिए किस स्वीकार्य प्रक्रिया या दिशानिर्देशों का पालन करना है, उसे बनाने में मुद्रा मदद करेगा।
  5. मानकीकृत नियम-पत्र तैयार करना, जो भविष्य में सूक्ष्म व्यवसाय की रीढ़ बनेगा।
  6. सूक्ष्य व्यवसायों को दिए जाने वाले कर्ज के लिए गारंटी देने के लिए क्रेडिट गारंटी स्कीम बनाएगा।
  7. वितरित की गई पूंजी की निगरानी, कर्ज लेने और देने की प्रक्रिया में मदद के लिए उचित तकनीक मुहैया कराएगा।
  8. छोटे और सूक्ष्म व्यवसायों को प्रभावी ढंग से छोटे कर्ज मुहैया कराने की प्रभावी प्रणाली विकसित करने के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत उपयुक्त ढांचा तैयार करना।

मुद्रा के प्रमुख उत्पाद

मुद्रा बैंक ने कर्ज लेने वालों को तीन हिस्सों में बांटा हैः व्यवसाय शुरू करने वाले, मध्यम स्थिति में कर्ज तलाशने वाले और विकास के अगले स्तर पर जाने की चाहत रखने वाले।

इन तीन हिस्सों की जरूरतों को पूरा करने के लिए मुद्रा बैंक ने तीन कर्ज उपकरणों की शुरुआत की हैः

  1. शिशुः इसके दायरे में 50 हजार रुपए तक के कर्ज आते हैं।
  2. किशोरः इसके दायरे में 50 हजार से 5 लाख रुपए तक के कर्ज आते हैं।
  3. तरुणः इसके दायरे में 5 से 10 लाख रुपए तक के कर्ज आते हैं।

शुरुआत में कुछ ही क्षेत्रों तक योजनाएं सीमित हैं, जैसे- “जमीन परिवहन, सामुदायिक, सामाजिक एवं वैयक्तिक सेवाएं, खाद्य उत्पाद और टेक्सटाइल प्रोडक्ट सेक्टर”। समय के साथ नई योजनाएं शुरू की जाएंगी, जिनमें और ज्यादा क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा।

स्‍वामित्‍व/साझेदारी फर्म लघु-निर्माण इकाइयों के रूप में कार्यरत, दुकानदार, फल/ सब्‍जी विक्रेता, हेयर क‍टिंग सैलून, ब्‍यूटी पार्लर, ट्रांसपोर्टर, ट्रक ऑपरेटर, हॉकर, सहकारिताएं या व्‍यक्तियों का निकाय, खाद्य सेवा इकाइयां, मरम्‍मत करने वाली दुकानें, मशीन ऑपरेटर, लघु उद्योग , दस्‍तकार, खाद्य प्रसंस्‍करण करने वाले, स्‍वयं सहायता समूह,10 लाख रुपये तक की वित्‍तीय अपेक्षा रखने वाले ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के सेवा प्रदाता आदि तथा पेशेवर व्‍यवसायों/ उद्यमों/ इकाइयों में शामिल होंगे।

शुरू में पेश किये जा रहे उत्‍पाद निम्निलिखित हैं-

भूमि परिवहन, समुदाय, सामाजिक और व्‍यक्तिगत सेवाएं, खाद्य उत्‍पाद तथा वस्‍त्र उत्‍पाद क्षेत्र में व्‍यवसाय गतिविधियां जैसी/ गतिविधि विशिष्‍ट योजनाएं। अन्‍य क्षेत्रों/ गतिविधियों में इसी प्रकार की योजनाएं शामिल की जाएंगी।

सूक्ष्‍म ऋण योजना (एमसीएस)

  • क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी)/ अनसूचित सहकारी बैंकों के लिए पुनर्वित्‍त योजना
  • महिला उद्यमी योजना
  • व्‍यापारियों और दुकानदारों के लिए व्‍यवसाय ऋण
  • मिशिंग मध्‍य ऋण योजना
  • सूक्ष्‍म इकाइयों के लिए उपकरण वित्‍त

ऋण जमा धारणा

मुद्रा ऋण जमा अवधारणा योजना को भी अपनाएगा तथा समस्‍त लाभार्थी वर्गों की विकास जरूरतों के लिए योजनाएं बनाएगा। ऐसी प्रस्‍तावित योजनाओं/ पहलों की मुख्‍य विशेषताएं इस प्रकार हैं-

  • वित्‍तीय साक्षरता को समर्थन
  • जमीनी स्‍तर के संस्‍थानों को समर्थन एवं संवर्द्धन
  • 'लघु व्‍यवसाय वित्‍त इकाइयों' के लिए संरचना का सृजन
  • राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ समन्‍वय
  • राष्‍ट्रीय कौशल विकास निगम के साथ समन्‍वय
  • ऋण ब्‍यूरो के साथ काम करना
  • साख निर्धारण एजेंसियों के साथ काम करना

अन्‍य प्रस्‍तावित पेशकश: भविष्‍य के लिए इन पेशकशों की परिकल्‍पना की गई है:

  • मुद्रा कार्ड
  • पोर्टफोलियो ऋण गारंटी
  • ऋण बढ़ोत्‍तरी

मुद्रा कुछ वर्तमान कंपनियों के अनुभवों का लाभ उठाएगा जिन्‍होंने उद्यमियों एवं स्‍थानीय वित्‍त प्रदाताओं दोनों के लिए एक वित्‍त पोषण ढांचा और सही वित्‍त प्रणाली के निर्माण के लिए गैर कॉरपोरेट लघु व्‍यवसाय वर्ग की जरूरतों की पूर्ति में सफलता प्रदर्शित की है। विवेकपूर्ण मूल्‍य के साथ वित्‍त की सुविधा मुद्रा का अनोखा ग्राहक मूल्‍य प्रस्‍ताव साबित होगा। मुद्रा का गठन न केवल बैंक सुविधा विहिन लोगों को वित्‍त की सुविधाएं बढ़ाने में मददगार होगा बल्कि यह अनौपचारिक, सूक्ष्‍म/ लघु उद्यम क्षेत्र को स्‍थानीय वित्‍त दाताओं के वित्‍त की लागत को कम करने में भी सहायक साबित होगा। इसका उद्देश्‍य केवल ऋण के दृष्टिकोण से आगे बढ़कर देशभर में फैले इन उपक्रमों के लिए ऋण जमा समाधान तथा एक पूर्ण वित्‍तीय प्रणाली प्रस्‍तुत करना है।

मुद्रा से लाभ

शीर्षस्थ पुनर्वित्त-प्रदाता

  • मुद्रा की संरचना- भारत के परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए स्वदेशी संकल्पना
  • अन्तिम बिन्दु के वित्तदाताओं का समावेशन- पासा पलटने वाला विचार
  • सूक्ष्म उद्यमों के लिए वित्त तक पहुँच को विस्तार देने में मददगार
  • कम लागत वाला वित्त
  • ऋण से अधिक प्रदायगी का दृष्टिकोण
  • जन-जनव्यापी उद्यमिता विकास एवं संवृद्धि
  • रोज़गार सृजन, सकल घरेलू उत्पाद में उच्चतर वृद्धि

मुद्रा की प्रक्रियाएं

  • मुद्रा के ऋण वितरण के संबंध में यह परिकल्पना की गई है कि यह बैंकों, प्राथमिक ऋणदात्री संस्थाओं सहित अन्य मध्यवर्ती संस्थाओं के साथ-साथ मूलतः गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों / अल्प वित्त संस्थाओं को पुनर्वित्त के माध्यम से होगा।
  • इसके साथ ही यह आवश्यकता भी है कि जमीनी स्तर पर ऋण वितरण के चैनलों का विकास और विस्तार किया जाए। इस परिप्रेक्ष्य में, पहले से ही बड़ी संख्या में अंतिम स्तर के वित्तपोषक विद्यमान हैं, जैसे – कंपनियाँ, ट्रस्ट, सोसायटियाँ, संघ आदि। ये छोटे व्यवसायों को अनौपचारिक वित्त प्रदान कर रहे हैं।
  • हितधारकों के साथ परामर्श के फलस्वरूप यह जरूरत सामने आई है कि जमीनी स्तर पर विद्यमान इस अनौपचारिक ऋण वितरण चैनल, जिसमें लक्षित वर्ग को ऋण वितरण और वसूली की क्षमता है, को औपचारिक रूप प्रदान किया जाए और उसका लाभदायक ढंग से उपयोग किया जाए।
  • इस प्रकार मुद्रा बैंक के लिए जिस वित्तपोषण संरचना की परिकल्पना की गई है, उसका यह लक्ष्य भी होगा कि गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों / गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी - अल्प वित्त संस्थाओं तथा गैर निगमित अल्प वित्त संस्थाओं जैसी मध्यवर्ती संस्थाओं का उपयोग करते हुए इन "अंतिम स्तर के वित्तपोषकों" का औपचारिक ऋण वितरण चैनल के रूप में एकीकरण किया जाए।
  • ऐसे वित्त्पोषकों की पहचान करना भी जरूरी है जो भारत के छोटे-छोटे कस्बों और शहरों में कार्य करते हुए स्थानीय ऋण आवश्यकताओं की पूर्ति कर रहा है. इनके क्षमता निर्माण हेतु प्रयास करना आवश्यक है ताकि समय बीतने के साथ-साथ यह अपने आकार को बढ़ा सकें, अपने परिचालन क्षेत्र का विस्तार कर सकें तथा अपनी निधि की लागत में भी कमी ला सकें।
  • ऐसा करने से ये वित्तीयक इस क्षेत्र को ऋण प्रदायन की अपनी क्षमता को बढ़ा सकेंगे तथा निधियों की लागत को भी कम कर सकेंगे। अत : मुद्रा के सामने एक प्रमुख मुद्दा यह होगा कि वह इन वित्त पोषकों को अपने वित्तीय ढांचे में शामिल करे तथा स्थानीय बाजारों में लंबे समय से ऋण उपलब्ध कराने में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करे|
  • यही नहीं मुद्रा का एकप्रमुख दृष्टिकोण यह होना चाहिए कि वह वित्तीय क्षेत्र में ऐसी संस्स्थाओं को परिपोषित करे जो पात्र उद्यमियों को बिना किसी जटिल औपचारिकताओं के सुगम तथा नवोन्मेषी तरीकों से ऋण उपलब्ध करा सके ताकि उद्यमिता की ज्योति फिर से उज्ज्वलित हो सके|
  • यह बहुस्तरीय व्यवस्था / मध्यवर्तन की प्रकृति का होगा और इस माध्यम के लिए उपयुक्त ऋण वितरण संरचना विकसित करने का कार्य किया जाएगा, जिसमें अंतिम स्तर के वित्तपोषकों के पंजीकरण की व्यवस्था, उनमें उत्तरदायित्वपूर्ण ऋण वितरण और वसूली पद्धतियों का प्रसार, विभिन्न स्तरों पर ऋण वितरण की लागत में दक्षता बनाए रखना और अंतिम स्तर के ऋण वितरण को शासित करने वाली मानक प्रसंविनदाओं का विकास जैसी आवश्यकताओं का समावेश होगा।
  • प्रारंभ में मुद्रा बैंक द्वारा पुनर्वित्तपोषित की जाने वाली मध्यवर्ती संस्थाएँ मौजूदा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ / अल्प वित्त संस्थाएं होंगी। तथापि आगे चल कर जैसे-जैसे यह क्षेत्र औपचारिक होता जाएगा और इसलिए संभवतः अधिक पूंजी आकर्षित करेगा, वैसे-वैसे यह आशा की जाती है कि यह चैनल नए प्रकार के मध्यवर्तियों – "लघु व्यवसाय वित्तीय कंपनियों" (जिनकी इस क्षेत्र में विशेषज्ञता होगी) के लिए समर्थकारी परिवेश निर्मित करेगा।
  • मुद्रा द्वारा मध्यवर्तियों के सहयोग से जो ऋण वितरण प्रणाली लागू की जाएगी, उसका मेरुदण्ड होगा – प्रौद्योगिकी का लाभदायक उपयोग। अंतिम स्तर पर ऋण वितरण के लिए मोबाइल प्रौद्योगिकी में असीम संभावनाएं हैं।
  • प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्म –

अंतिम स्तर के लिए सही प्रौद्योगिकी समाधान देने के लिए एक उपयुक्त प्लेटफॉर्म लागू करना होगा। ऐसे सिस्टम की आवश्यकता होगी, जो निम्नलिखित कार्य कर सके-

  • गैर-औपचारिक इकाइयों का पंजीकरण
  • अल्प वित्त संस्थाओं/ मध्यवर्तियों द्वारा मुद्रा बैंक के लिए लाभार्थी डाटा अपलोड किया जाना, जिसमें ऋण प्रवाह तथा लाभार्थी विवरण, जैसे – क्षेत्र, गतिविधि का प्रकार, सीजनलिटी, उत्पाद का प्रकार, समुदाय आदि का समावेश हो।
  • व्यवसाय / बैंकिंग प्रतिनिधि द्वारा निविष्टियों हेतु सुविधा
  • निम्नलिखित से संबद्धता की सुविधा-
    1. यूआईडी / आधार डाटाबेस / सिस्टम
    2. प्रधानमंत्री जनधन योजना बैंक खाता
    3. ऋण ब्यूरो
    4. मिक्स मार्केट जैसी संस्थाएं
    5. अनौपचारिक क्षेत्र को प्रौद्योगिकी प्रवाह

मुद्रा - घटक साझीदारों का पर्यवेक्षण

  • वर्तमान में अल्प वित्त क्षेत्र भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विनियमित है।
  • पुनर्वित्त के लिए मुद्रा के साथ साझेदारी की आशा कर रही सभी संस्थाओं को मुद्रा के पास पंजीकरण कराना होगा।
  • यदि मुद्रा के साथ पंजीकृत इकाइयां किसी वर्तमान विनियामक के साथ विनियमित नहीं हैं तो मुद्रा उनके लिए विनियामक प्रसंविदा निर्धारित करेगा।
  • मुद्रा के लिए विनियमन के जिन प्रावधानों की परिकल्पना की गई है, वे यथासमय मुद्रा के गठन हेतु सांविधिक अधिनियमन पर सामने आएंगे। मुद्रा की गतिविधियों के प्रयोजन के लिए सूक्ष्म इकाइयों की परिभाषा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम अथवा अन्य किसी अधिनियम से संबद्ध नहीं होनी चाहिए। मुद्रा के प्रयोजन के लिए  10 लाख से कम की वित्तीय आवश्यकताओं को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लघु विनिर्माण इकाइयों के रूप में चल रहे पूर्ण स्वामित्व वाले / साझेदारी प्रतिष्ठान, दुकानदार, फल / सब्जी विक्रेता, हेयर कटिंग सैलून, ब्यूटी पार्लर, ट्रांसपोर्टर, ट्रक परिचालक, हॉकर, सहकारी संस्थाएं या व्यक्तियों का कोई निकाय, खाद्य सेवा इकाइयाँ, मरम्मत की दुकानें, मशीन परिचालक, लघु उद्योग, कारीगर, खाद्य प्रसंस्करणकर्ता, स्व सहायता समूह, प्रोफेशनल्स तथा सेवा प्रदाता आदि को सूक्ष्म इकाइयां कहा जा सकता है।

मुद्रा का भावी परिदृश्य

  • मुद्रा की स्थापना न केवल बैंक सुविधा से वंचितों तक वित्त की पहुंच बढ़ाने में मदद करेगी, अपितु अंतिम स्तर के वित्तपोषक से सूक्ष्म/लघु उद्यमों (जिनमें से अधिकांश अनौपचारिक क्षेत्र में हैं) तक वित्त की लागत कम करेगी।
  • इसके अतिरिक्त, यह दृष्टिकोण केवल ऋण प्रदान करने से आगे तक जाता है और देश भर में फैले हुए इन असंख्य सूक्ष्म उद्यमों को क्रेडिट प्लस समाधान प्रदान करता है।
  • मुद्रा: भारतीय तरीका
    1. शीर्ष पुनर्वित्तपोषक के रूप में संरचित
    2. मुद्रा सूक्ष्म उद्यमों का वित्तपोषण करेगा
    3. मुद्रा मार्क्स और मार्केट से परे
    4. मुद्रा की संरचना भारतीय आवश्यकताओं के लिए स्वदेशी तरीके से तैयार की गई है।
    5. अंतिम स्तर के वित्तपोषकों का समावेश एक नवोन्मेषी तथा पासा पलटने वाला विचार है।

'मुद्रा' बैंक की भूमिका और दायित्व

माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी लिमिटेड (मुद्रा) बैंक प्रमुखतया निम्नलिखित बातों के लिए उत्तरदायी रहेगाः

  • सूक्ष्म उद्यम वित्तपोषण व्यवसाय के लिए नीतिगत दिशा-निर्देशों का निर्धारण
  • अल्प वित्त संस्था निकायों का पंजीकरण
  • अल्प वित्त संस्था निकायों का पर्यवेक्षण
  • अल्प वित्त संस्था निकायों को मान्यता/रेटिंग प्रदान करना
  • वित्तीयन की उत्तरदायित्वपूर्ण कार्य-पद्धतियों का निर्धारण, ताकि अति ऋणग्रस्तता से बचा जा सके और ग्राहक संरक्षण के उचित सिद्धान्त व वसूली-पद्धतियाँ सुनिश्चित की जा सकें
  • अल्प उद्यमों को अंतिम बिन्दु पर ऋण प्रदायगी के अभिशासन के लिए मानक सिद्धान्तों का विकास
  • अंतिम बिन्दु के लिए सटीक प्रौद्योगिकी समाधानों को बढ़ावा देना
  • सूक्ष्म उद्यमों को उपलब्ध कराए जा रहे ऋणों/संविभागों को गारंटी प्रदान करने के लिए ऋण गारंटी योजना बनाना और चलाना
  • क्षेत्र में विकास एवं संवर्द्धनपरक गतिविधियों को सहायता प्रदान करना
  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत सूक्ष्म व्यवसायों को अंतिम बिन्दु पर ऋण प्रदायगी के उद्देश्य से अच्छी व्यवस्था निर्मित करना।
  • अल्प वित्त आर्थिक विकास का साधन है, जिसका उद्देश्य पिरामिड के निचले स्तर पर अवस्थित लोगों के लिए आय-अर्जन के अवसर उपलब्ध कराना है। इसमें कई प्रकार की सेवाएं समाहित हैं, जिनमें ऋण के प्रावधान के साथ-साथ, ऋण से बढ़कर कई अन्य सेवाएँ जैसे बचत, पेंशन, बीमा, धन-अन्तरण, परामर्श, वित्तीय साक्षरता और सामाजिक सहायता की अन्य सेवाएँ आदि भी समाविष्ट हैं।
  • अल्प वित्त क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं को मुख्यतः 3 समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता हैः
    1. स्व-सहायता समूह- बैंक लिंकेज मॉडल, वाणिज्य बैंकों तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकिंग के माध्यम से,
    2. गैर-बैंकिंग वित्त कंपनी तथा
    3. अन्य- जिनमें धारा 8 (पुरानी धारा 25) की कंपनियाँ, न्यास, समितियाँ आदि समाहित हैं।

प्रधानमंत्री मुद्रा बैंक योजना की विशेषताएँ

  1. इस योजना के तहत छोटे उद्यमियों को कम ब्याज दर पर 50 हजार से 10 लाख रुपये तक का कर्ज दिया जाएगा।
  2. केंद्र सरकार इस योजना पर 20 हजार करोड़ रुपये लगाएग। साथ ही इसके लिए 3000 करोड़ रुपये की क्रेडिट गारंटी रखी गई है।
  3. मुद्रा बैंक छोटे फाइनेंस संस्थानों (माइक्रो फाइनेंस इंस्टिट्यूशन) को री-फाइनेंस करेगा ताकि वे प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत छोटे उद्यमियों को कर्ज दे सकें।
  4. मुद्रा बैंक के तहत अनुसूचित जाति/जनजाति के उद्यमियों को प्राथमिकता पर कर्ज दिए जाएंगे।
  5. इसकी पहुंच का दायरा बढ़ाने के लिए डाक विभाग के विशाल नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाएगा।
  6. मुद्रा बैंक देश भर के 5.77 करोड़ छोटी व्यापार इकाइयों की मदद करेगा। इन्हें अभी बैंक से कर्ज लेने में बहुत मुश्किल होती है।
  7. इस व्यवस्था के तहत तीन तरह के कर्ज दिए जाएंगे : शिशु, किशोर और तरुण।
  8. व्यापार शुरू करने वाले को 'शिशु' श्रेणी का ऋण दिया जाएगा। 'किशोर' श्रेणी के तहत 50 हजार से 5 लाख रुपये तक का ऋण दिया जाएगा। वहीं 'तरुण' श्रेणी के तहत 5 लाख से 10 लाख रुपये का कर्ज दिया जाएगा।

मुद्रा बैंक किस तरह अर्थव्यवस्था में अंतर पैदा कर सकता है?

ज्यादातर लोग, खासकर भारत के ग्रामीण और दूरस्थ हिस्सों में रहने वाले, औपचारिक बैंकिंग प्रणाली के लाभों के दायरे से बाहर हैं। इस वजह से वे छोटे व्यापार शुरू करने या उन्हें बढ़ाने में मदद के लिए बीमा, कर्ज, उधार और अन्य वित्तीय उपकरणों तक पहुंच ही नहीं पाते। उधार के लिए ज्यादातर लोग स्थानीय साहूकारों पर निर्भर रहते हैं। कर्ज पर बहुत ज्यादा ब्याज चुकाना होता है। अक्सर परिस्थितयां असहनीय हो जाती हैं। इस वजह से पीढि़यों तक यह गरीब लोग कर्ज के तले दबे रहते हैं। जब व्यापार में नाकामी हाथ लगती है तो यह साहूकार अपनी ताकत और अन्य अपमानजनक तरीकों से कर्ज लेने वालों का जीना दूभर कर देते हैं।

एनएसएसओ के 2013 के सर्वे के मुताबिक, तकरीबन 5.77 करोड़ लघु व्वयसायिक इकाइयां हैं। इनमें से ज्यादातर एकल स्वामित्व के तहत चल रही हैं। इनमें व्यापार, निर्माण, रिटेल और छोटे स्तर की अन्य गतिविधियां शामिल हैं। आप इसकी तुलना संगठित क्षेत्र और बड़ी कंपनियों से कीजिए जो 1.25 करोड़ लोगों को रोजगार देते हैं। स्पष्ट तौर पर इन लघु व्यवसायों के पोषण और दोहन की विशाल संभावनाएं हैं और सरकार भी इसे अच्छे-से समझती है। आज, इस क्षेत्र में न तो कोई नियामक है और न ही संगठित वित्तीय बैंकिंग प्रणाली से वित्तीय सहयोग या सहारा मिलता है।

भविष्य में युवा व रोजगार सृजन में मुद्रा की भूमिका

भारत दुनिया के उन सबसे युवा देशों में से है जहां 25 वर्ष से कम लोगों की कुल आबादी 54 प्रतिशत से अधिक है। हमारे युवाओं को इक्‍कसवीं शताब्‍दी की नौकरियों के लिए शिक्षित और नौकरियों के लायक बनना चाहिए। हमारे यहां काम करने लायक 5 प्रतिशत से भी कम लोगों को औपचारिक कौशल प्रशिक्षण मिलता है जिससे वे नौकरी के लायक बन सकें और नौकरियां कर सकें। भारत की आबादी का करीब 70 प्रतिशत गांवों में रहता है जिसके कारण नौकरी करने लायक इन युवाओं की संख्‍या बढ़ रही है।

वर्ष 2022 में भारत की आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर महोत्‍सव होगा। राज्‍यों के नेतृत्‍व और केंद्र सरकार के निर्देशन में टीम इंडिया के बारे में प्रधानमंत्री की दूरदर्शिता में अन्‍य उद्देश्‍यों के अलावा युवाओं को शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण देना शामिल है ताकि उन्‍हें रोजगार मिल सके। इस उद्देश्य से स्किल इंडिया और मेक इन इंडिया कार्यक्रम शुरू किए गए हैं और हमें भी भारत में उद्ममिता की भावना को प्रोत्‍साहित करना चाहिए और नए उद्ममों को शुरू करने के लिए सहयोग करना चाहिए तभी हमारी युवा रोजगार ढूंढने वालों से रोजगार सृजक बन सकते हैं।

हालांकि कारपोरेट और व्‍यावसायिक संस्‍थाओं की भी भूमिका है, अनौपचारिक क्षेत्र के उद्यमों द्वारा इसकी सराहना की जानी चाहिए जिससे अधिक से अधिक संख्‍या में लोगों को रोजगार मिलेगा। कुल मिलाकर 5.77 करोड़ लघु व्‍यावसायिक इकाईयां हैं, जिनमें से अधिकतर एकल स्‍वामित्‍व वाली हैं जो लघु निर्माण, ट्रेडिंग या सेवा व्‍यवसाय चलाती हैं। इनमें से 62 प्रतिशत का स्‍वामित्‍व अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति/ओबीसी के पास है। निचले स्‍तर के कठोर परिश्रम करने वाले उद्यमियों की ऋण तक औपचारिक पहुंच कठिन हो गई है। इस दिशा में हाल के बजट में एक प्रमुख पहल करने की घोषणा की गई है‍ जिसका नाम मुद्रा बैंक है।

माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट रिफाईनेंस एजेंसी (मुद्रा) बैंक की घोषणा 2015 के बजट में की गई है जिसके लिए 20,000 करोड़ रुपये का कोष निर्धारित किया गया है और इसमें 3,000 करोड़ रुपये की ऋण गारंटी राशि की घोषणा की गई है। मु्द्रा बैंक प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के जरिए सूक्ष्‍म वित्‍त संस्‍थानों का पुनर्वित्‍तीयन करेगा। कर्ज देते समय अनुसूचित जाति/जनजाति उद्ममों को प्राथमिकता दी जाएगी। इन उपायों से युवाओं, शिक्षित अथवा कौशल प्राप्‍त श्रमिकों का आत्‍मविश्‍वास बढ़ेगा जो पहली पीढ़ी के उद्यमी बनने की आकांक्षा रखते हैं; साथ ही इसमें वर्तमान लघु उद्यमी भी शामिल हैं जो अपनी गतिविधियों का विस्‍तार कर सकेंगे।

सरकार का एक वैधानिक अध्‍यादेश के जरिए मुद्रा बैंक बनाने का प्रस्‍ताव है। यह बैंक निर्माण, ट्रे‍डिंग और सेवा गतिविधियों में लगे सूक्ष्‍म/लघु व्‍यावसायिक संस्‍थाओं को ऋण देने के कार्य में लगे सभी सूक्ष्‍म वित्‍तीय संस्‍थानों के नियमन और पुनर्वित्‍तीयन के लिए जिम्‍मेदार होगा।

मुद्रा बैंक की भूमिका से न केवल उन लोगों को कर्ज मिल सकेगा जिनकी पहुंच बैंकों तक नहीं है साथ ही अनौपचारिक क्षेत्र से जुड़े अधिकतर सूक्ष्‍म/लघु उद्यमों को निचले स्‍तर तक कर्ज वितरित किया जा सकेगा।

इस बैंक के जरिए दलितों और आदिवासी उद्यमियों को प्राथमिकता दी जाएगी जिससे सामाजिक न्‍याय को बढ़ावा मिले। उद्योग में अधिकतर कुशल श्रमिक दलित समुदायों से हैं। उनमें अपनी सूक्ष्‍म इकाइयां शुरू करने की संभावना है बशर्तों उन्‍हें आसान शर्तों पर कर्ज मिल सके। हालांकि अधिकतर कौशल प्राप्‍त हैं और अपने काम की तकनीकी बारीकियों को समझते हैं, लेकिन बहुत कम धन अथवा संपत्ति नहीं होने के कारण उनकी पहुंच वित्‍तीय सुविधाओं तक नहीं है। ऐसे में जब अनुसूचित जाति के छात्रों के बीच शिक्षा का प्रसार हो रहा है सूक्ष्‍म इकाइयों की पुनर्वित्‍तीयन सेवा उनके लिए उत्‍साहवर्द्धक हो सकती है।

सरकार के मुद्रा बैंक प्रस्‍ताव से इन संस्‍थाओं के लिए समान नियामक और आचरण संहित स्‍थापित हो सकेगी जिससे सभी कर्जदाताओं को जिम्‍मेदार कर्ज सिद्धान्‍त अपनाने होंगे और बदले में कर्जदारों के फायदा उठाने के मुद्दों से बचा जा सकेगा। यह गैर बैंकिंग वित्‍तीय कम्‍पनियों-सूक्ष्‍म वित्‍तीय संस्‍थाओं और इस क्षेत्र से जुड़े अन्‍य उद्यमियों को आर्थिक मदद और नगदी का प्रमुख स्रोत हो सकता है। 3000 करोड़ रुपये का ऋण गारंटी कोष सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्य‍म क्षेत्र को बढ़ावा दे सकता है। एमएसएमई क्षेत्र ने मुद्रा बैंक की स्‍थापना की सराहना की है। एमएसएमई क्षेत्र के प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि इसे सही तरीके से लागू किया गया तो एनडीए सरकार की पहल से दोहरे अंकों में विकास दर हासिल करने में मदद मिलेगी और हम चीन से भी आगे निकल जाएंगे।

इसके अलावा बजट में पीपीएफ में करीब 3000 करोड़ रुपये और ईपीएफ कोष में पड़ी 6000 करोड़ रुपये की बिना दावे वाली जमा राशि का उपयोग करते हुए वरिष्‍ठ नागरिक कल्‍याण कोष बनाने का भी प्रस्‍ताव किया गया है जिसका इस्‍तेमाल बुजुर्ग पेंशनरों, बीपीएल कार्ड धारकों, लघु और सीमान्‍त किसानों और अन्‍य कमजोर समूहों के प्रीमियम के लिए आर्थिक सहायता देने के लिए किया जाएगा।

देश में करीब 10.5 करोड़ वरिष्‍ठ नागरिकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए नई योजना शुरू की गई है जिसके अंतर्गत गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले वरिष्‍ठ नागरिकों को विभिन्‍न सहायता यंत्रों के लिए सहायता दी जाएगी। इनमें से करीब एक करोड़ वरिष्‍ठ नागरिक 80 वर्ष से अधिक उम्र मे हैं जिनमें 70 प्रतिशत ग्रामीण इलाकों से और अधिकतर बीपीएल श्रेणी के हैं।

सामाजिक सुरक्षा की ये योजनाएं सरकार की जन-धन मंच का इस्‍तेमाल करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं ताकि कोई भी भारतीय नागरिक बीमारी, दुर्घटना अथवा बुढ़ापे में अभाव को लेकर चिंतित न हो। गरीबों, सुविधाओं से वंचित लोगों और शोषितों की जरूरतों को लेकर संवेदनशील सरकार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए वर्तमान कल्याणकारी योजनाओं को लेकर प्रतिबद्ध है।

सुकन्या समृद्धि योजना युवा महिलाओं के विवाह और शिक्षा के लिए सहायता प्रदान करेगी।

अल्‍पसंख्‍यक युवाओं के लिए समेकित शिक्षा और आजीविका योजना नई मंजिल इस वर्ष शुरू की जाएगी।

योजना की अधिक जानकारी के लिए कृपया क्लिक करें 

स्रोत: भारत सरकार का मुद्रा बैंक, पत्र सूचना कार्यालय, उद्योग जगत समाचार व भारत सरकार का वित्त मंत्रालय|

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नितिन सिंह Jun 07, 2016 11:59 AM

जो बैंक लोन देने से मना करे आप वकील से मिलकर उसकी शिकायत RBO में क़र सकते हैं।

Mohan prasad Jun 06, 2016 02:11 PM

मोदी जी मेरा नाम किशन कुमार सोनी है मै सिकX्XरXुर जिला ballia का निवासी हु mughe वाटर बैंक की कंपनी खोलनी है mughe ५००००० लाख की जरूरत है लेकिन बैंक मैनेजर लोन देने से मना कर दिया '

गोरख.नाथ.गुप्ता Jun 05, 2016 11:33 PM

माXXीX.X्रXामंत्री.जी.Xारत.सरकार सर.Xै.शिछित.Xेरोजगार.हु.Xैंक.से,लोX.XहींXिलरहा.है, मुझे.मुX्रा.XोजXा.के,अंतर्गत×तरुण.श्रेणी.का.लोX.चाहिए(10)लाख.रु0का.मै,व×मेरा.Xरिवार.तथा.Xच्चे आपके.सXा.आXारी.रहेंगे

MD.DILZAR HUSSAIN Jun 05, 2016 02:49 AM

E A M/के उपर घर लेना हे आपका मधत छाहीये 97XXX52

निखिल खिंची Jun 04, 2016 12:48 PM

हम लोन लेने के लिय गीते बैक ओप बडोदा ने यह कहा हे की हम ने लोन देना बंद कर देया हे हम लोन लेने के लिय किस्से संप्रग करे मो.XX८XXXXXXX निखिlkhinchi24@जीमेल.com

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