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ठेका वर्कर - समान काम का समान वेतन

ठेका वर्कर - समान काम का समान वेतन

भूमिका

आज से करीब 47 साल पहले ठेका मजदूर (संचालन एवं उन्मूलन) कानून 1970, देश की संसद ने बनाया था। कानून बनाते समय सरकार ने यह माना था कि ठेका मजदूरों को रोजगार के लिए रखे जाने के चलते कई समस्याएं सामने आ रही हैं। इसके पूर्ण रूप में खात्मे के लिए ही संसद में काफी सोच विचार के बाद उपरोक्त कानून बनाया गया था। दूसरी पंच वर्षीय योजना में योजना आयोग ने त्रिपक्षीय कमेटियों (सरकार-मालिक-मजदूर) की सिफारिश व आम राय से यह माना था कि-
1 जहां कहीं भी सम्भव है ठेका मजदूरों द्वारा किए जा रहे काम को ही समाप्त कर दिया जाए।
2 जहां कहीं यह सम्भव न हो वहां ठेका मजदूर के काम को संचालित कर उन्हें वेतन अदायगी व अन्य जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
इन दोनों कामों को लागू करवाने की जिम्मेदारी केन्द्र व राज्य सरकारों के तहत चल रहे श्रम विभाग की थीI

प्रमुख बातें

 

इंडियन स्टफिंग फैडरेशन के रिर्पोट के अनुसार आज पूरे देश में लगभग 1 करोड 25 लाख लोग सरकारी विभाग में कार्यरत है, जिसमें 69 लाख लोग केवल ठेके पर काम कर रहे हैं। सरकार मानती है कि ठेका वर्कर को समान काम करने के वावजूद समान वतन का भुगतान नही किया जा रहा है।
मारुति कार मेकर कम्पनी, गुडगॉवा में एच।आर। एक्जकयुटिव की मौत इसी का परिणाम है। उसके बाद संसद में हंगामे के बाद तत्काल सरकार ने कड़ा फैसला लिया। जिसके बाद चीफ लेबर कमीश्नर (सेन्ट्रल) ने सर्कुलर नं। office Memorandum दिनांक- 23 जनवरी 2013, fileNo14(113) Misc RLC (Cood)/2012 सरकार के सभी मिनिस्ट्री को जारी किया। जिसके तहत -
ठेका कानून के तहत प्रावधान

"अगर कोई ठेकेदार के द्वारा न्युक्त ठेका वर्कर अपने प्रधान नियोक्ता द्वारा न्युक्त वर्कर के बराबर कार्य करता है, तो ठेकेदार के द्वारा काम करने वाले ठेका वर्कर का वेतन, छुटटी और सेवा शर्ते उस संस्था के प्रधान नियोक्ता के वर्कर के बराबर होगा"।
माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी 26 अक्टूबर 2016 को ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ के सिद्धांत पर मुहर लगाते हुए कहा अस्थायी कामगार भी स्थायी की तरह मेहनताना पाने के हकदार हैं।

आज से करीब 47 साल पहले ठेका मजदूर (संचालन एवं उन्मूलन) कानून 1970, देश की संसद ने बनाया था। कानून बनाते समय सरकार ने यह माना था कि ठेका मजदूरों को रोजगार के लिए रखे जाने के चलते कई समस्याएं सामने आ रही हैं। इसके पूर्ण रूप में खात्मे के लिए ही संसद में काफी सोच विचार के बाद उपरोक्त कानून बनाया गया था। दूसरी पंच वर्षीय योजना में योजना आयोग ने त्रिपक्षीय कमेटियों (सरकार-मालिक-मजदूर) की सिफारिश व आम राय से यह माना था कि-

1 जहां कहीं भी सम्भव है ठेका मजदूरों द्वारा किए जा रहे काम को ही समाप्त कर दिया जाए

2 जहां कहीं यह सम्भव न हो वहां ठेका मजदूर के काम को संचालित कर उन्हें वेतन अदायगी व अन्य जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।इन दोनों कामों को लागू करवाने की जिम्मेदारी केन्द्र व राज्य सरकारों के तहत चल रहे श्रम विभाग की थी।


इंडियन स्टफिंग फैडरेशन के रिर्पोट के अनुसार आज पूरे देश में लगभग 1 करोड 25 लाख लोग सरकारी विभाग में कार्यरत है, जिसमें 69 लाख लोग केवल ठेके पर काम कर रहे हैं। सरकार मानती है कि ठेका वर्कर को समान काम करने के वावजूद समान वतन का भुगतान नही किया जा रहा है। 
मारुति कार मेकर कम्पनी, गुडगॉवा में एच।आर। एक्जकयुटिव की मौत इसी का परिणाम है। उसके बाद संसद में हंगामे के बाद तत्काल सरकार ने कड़ा फैसला लिया। जिसके बाद चीफ लेबर कमीश्नर (सेन्ट्रल) ने सर्कुलर नं। office Memorandum दिनांक- 23 /1 /2013, fileNo 14(113) Misc RLC (Cood)/2012 सरकार के सभी मिनिस्ट्री को जारी किया। जिसके तहत -


"अगर कोई ठेकेदार के द्वारा न्युक्त ठेका वर्कर अपने प्रधान नियोक्ता द्वारा न्युक्त वर्कर के बराबर कार्य करता है, तो ठेकेदार के द्वारा काम करने वाले ठेका वर्कर का वेतन, छुटटी और सेवा शर्ते उस संस्था के प्रधान नियोक्ता के वर्कर के बराबर होगा"।

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी 26 अक्टूबर 2016 को ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ के सिद्धांत पर मुहर लगाते हुए कहा अस्थायी कामगार भी स्थायी की तरह मेहनताना पाने के हकदार हैं।

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Satyam mhaskar Jul 01, 2018 02:23 PM

Itne sal hue Mai Mumbai University me temparary Kam kar Raha hu Lekin saman Kam saman vetan lagu karke hame vaha lagu nahi Kiya ulta hame kamese nikala aur phir se kampeLiya Janki University me aur kamgaron ki jaroorat hai use ajj hamara vetan sirf 8000 Hajar RS hai ESI aur pf kat hoke 6700 ATI hai jab ki University me Kam karne vale temparary kamgaron Ko Kam karke jo Raha Gayehai utne kamgaron me he Kam karna pad Raha hai Lekin kamgaron ko nahi bada rahe kyu ki use pareshan hoker kamgar Kam chodkar jayenge aur is hisab se vo kamgaron Ko pareshan kar rahe hai university me private security Ko 18000 salary ek mahina he hua aur University me 10 sal 15 sal Kam karke University ke security Ko 8200 salary di jati hai yaha konsa nyay hai hamari halat bahut kharab hai hamare saman Kam saman vetan Laguna hona chahiye Mai isse sehamat hu Lekin aise sarkari vibhago me aise koi samjkantak jinke vajah se ye Milne Vali suvidhaye hame. Nahi mil pati kyonki ham garib hai imandari se Kam karte AJ tak ye bat kisi Ko Batana chahta that jo app ke samne Mai Bata Raha hu

Deepak kumar Jun 16, 2018 07:27 PM

Mai berojgar hu jibika me koyi rojgar milega Mai karne ke liye taiyar hu mera contact number hai 62XXX41

Devendra Jun 10, 2018 09:58 AM

Sirf order hi nikalte unhe manta kon h or sarkar bhi koi sakht kadam nahi uthati h isi vajah se sarkari or private vibhag me sab apni manmani krte h koi sman vetan nahi mil pata h

सुरेन्द्र कुमार सोनी Jun 09, 2018 03:16 PM

सर मैं बिजली विभाग में कुशल श्रमिक के रूप में कार्यरत हूँ ,सर मैं समान कार्य समान वेतन से सहमत हूँ,आैर हमें ऐ हक मिलना चाहिए। धन्यवाद सुरेन्द्र कुमार सोनी ३३/११ के.बी substation utraula thshil balrampur

Satyam yadav May 03, 2018 11:30 PM

Me taiyaar hoon

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