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अमृत मिशन विवरण और दिशानिर्देश

इस लेख में अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) मिशन विवरण और दिशानिर्देश जानकारी दी गई है|

परिचय

राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में शहरों में परिवारों को बुनियादी सेवाएं (अर्थात् जलापूर्ति, सीवरेज, शहरी परिवहन) मुहैया कराने और सुख-सुविधाएँ मुहैया कराने के उद्देश्य से अवसंरचना का सृजन करना है, जिससे विशेषतया गरीबों और वंचितों सभी के जीवन स्तर में सुधार होगा| उच्चधिकार प्राप्ति विशेषज्ञ समिति (एचपीईसी) द्वारा वर्ष 2011  के दौरान वर्ष 2009-10  की कीमतों पर 20 वर्ष की अवधि के लिए अपेक्षित धनराशियों का एक आकलन किया गया था| समिति ने यह आकलन किया कि शहरी अवसंरचना के निर्माण के लिए 39.2 लाख करोड़ रु० की राशि अपेक्षित थी| जिसमें शहरी सड़कों के लिए 17.3 लाख करोड़ रु० और जलापूर्ति, सीवरेज, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और वर्षा जल निकासी जैसी सेवाओं के लिए 8 लाख करोड़ रु० शामिल हैं| इसके आलावा, प्रचालन और अनुरक्षण (ओएंडएम) के लिए 19.9 लाख करोड़ रु०  का अलग  से अनुमान लगाया गया था|

पूर्ववर्ती मिशन से प्राप्त अनुभव से यह पता चला है कि अवसंरचना सृजन का सभी परिवारों को जल और शौचालय कनेक्शन की सुलभता जैसी लोगों की वास्तविक आवश्यकताओं पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा| इसका तात्पर्य यह है कि अवसंरचना सृजन पर मुख्य जोर हो जो लोगों को बेहतर सेवाएं मुहैया करने से सीधे तौर पर जुडा हुआ है और इसका भारत के राष्ट्रपति द्वारा दिनांक 09 जून, 2014 और 23 फरवरी, 2015 को संसद के संयुक्त सत्र के अपने अभिभाषण में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया|

अतः अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (अम्रृत) का उद्देश्य i) यह सुनिश्चित करना है किप्रत्येक परिवार को निश्चित जलापूर्ति और सीवरेज, कनैक्शन सहित नल सुलभ हो ii) हरित क्षेत्र और सुव्यवस्थित खुले मैदान (अर्थात पार्क) विकसित करके शहरों की भव्यता में वृद्धि करना और iii) गैर-मोटरीकृत परिवहन (अर्थात पैदल चलना और साईकिल चलाना) के लिए सुविधाओं के निर्माण अथवा सार्वजनिक परिवहन को अपनाकर प्रदूषण को कम करना| ये सभी परिणाम नागरिकों विशेषतया महिलाओं के लिए महत्ता रखते हैं और शहरी विकास मंत्रालय द्वारा सेवा स्तरीय बैंचमार्क (एसएलबी) के रूप में संकेतक और मानक निर्धारित किये गये हैं|

तथापि, बेहतर परिणामों का प्रयास सभी को नल और सीवरेज कनैक्शन (सभी को शामिल करते हुए) प्रदान करने में नहीं रुकेगा| सभी को सेवाएं प्रदान करने के बेंचमार्क का लक्ष्य प्राप्त करने के बाद क्रम दर क्रम प्रकिया का अनुसरण करके अन्य बेंचमार्क का लक्ष्य बनाया जायेगा| बेंचमार्क प्राप्त करने की ऐसी उत्तरोत्तर प्रक्रिया को उत्तरोत्तर वृद्धि प्रक्रिया में सेवा स्तरीय बेंचमार्क राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुसार धीरे-धीरे प्राप्त किये जाते हैं| शहरी परिवहन के क्षेत्र में, बैंचमार्क का उद्देश्य निर्माण करते समय शहरों में प्रदूषण को कम करना है और वर्षा जल निकासी की अनुरक्षण लागत कम होने की आशा है और अंततः शहरों में बाढ़ की समस्या को समाप्त करता है जिससे शहरों को अधिक लचीला बनाया जा सकेगा|

पहले, शहरी विकास मंत्रालय परियोजना-दर-परियोजना स्वीकृति प्रदान करता था| अमृत में इसका, शहरी विकास मंत्रालय द्वारा वर्ष में एक बार राज्य वार्षिक कार्य योजना के अनुमोदन द्वारा प्रतिस्थापन किया गया है और राज्यों को अपने स्तर पर परियोजनाएं को स्वीकृति और अनुमोदन प्रदान करना होगा| इस प्रकार, अमृत राज्यों को परियोजनाओं की आयोजन और कार्यान्वयन में राज्यों को समान भागीदार बनाता है, अतः सहकारी एकीकरण की भावना झलकेगी|

मिशन को सफल बनाने के लिए एक सुदृढ़ संस्थानिक संरचना मूल आधार है| अतः क्षमता निर्माण और सुधारों को मिशन में शामिल कर लिया गया है| सुधारों से सेवा सुलभता और संसाधन जुटाने में वृद्धि होगी और नगरपालिका के संचालन को अधिक पारदर्शी बनाएगा और पदाधिकारियों को अधिक जबावदेही बनाएंगे जबकि क्षमता निर्माण नगरपालिका पदाधिकारियों को अधिकार प्रदान करेगा और परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जा सकेगा|

प्रमुख क्षेत्र

मिशन में निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगाः:

  1. जलापूर्ति,
  2. सीवरेज सुविधाएँ और सेप्टेज प्रबंधन
  3. बाढ़ को कम करने के लिए वर्षा जल नाले,
  4. पैदल मार्ग, गैर-मोटरीकृत और सार्वजनिक परिवहन सुविधाएँ, पार्किंग स्थल, और
  5. विशेषतः बच्चों के लिए हरित स्थलों और पार्कों और मनोरंजन केन्द्रों का निर्माण और उन्नयन करके शहरों की भव्यता बढ़ाना|

कवरेज

अमृत के अंतर्गत पांच सौ शहरों को शामिल किया जायेगा| शहरों की सूची की अधिसूचना उपयुक्त समय पर जाती की जाएगी| उन शहरों की श्रेणी जिन्हें अमृत में शामिल किया जायेगा,  ब्यौरा नीचे दिया गया है:

  1. छावनी बोर्ड (सिविलयन क्षेत्र) सहित अधिसूचित नगरपालिकाओं सहित एक लाख से अधिक जनसंख्या वाले सभी शहर और कस्बे|
  2. 2.1(i) में शामिल नहीं किये गए सभी राजधानी शहर/राज्यों के कस्बे/संघ राज्य क्षेत्र
  3. हृदय स्कीम के अंतर्गत शहरी विकास मंत्रालय के द्वारा विरासत शहरों के रूप में वर्गीकृत सभी शहर/कस्बे,
  4. 75000 से अधिक और 1 लाख से कम जनसंख्या वाले 13 शहरों और कस्बों जो मुख्य नदियों के किनारे पर हैं और,
  5. पर्वतीय राज्यों, द्वीप समूहों और पर्यटन स्थलों से दस शहर (प्रत्येक राज्य) से एक से अधिक शहर नहीं)

मिशन घटक

अम्रत के घटकों में क्षमता निर्माण, सुधार कार्यान्वयन, जलापूर्ति, सीवरेज और सेफ्टेज प्रबधन, वर्षा जल निकासी, शहरी परिवहन हरित स्थल और पार्क शामिल हैं| आयोजन के दौरान, शहरी स्थानीय निकायों को भौतिक अवसंरचना घटकों में कुछ स्मार्ट विशेषताओं को शामिल करने का प्रयास करना होगा| मिशन घटकों का ब्यौरा नीचे दिया गया है:-

3.1 जलापूर्ति

  1. मौजूदा जलापूर्ति में वृद्धि करने जल शोधन संयंत्रों अरु सभी जगहों पर मीटर लगाने सहित वर्षा जल आपूर्ति प्रणाली,
  2. शोधन संयंत्रों सहित पुरानी जलापूर्ति प्रणालियों का पुनर्स्थापन
  3. विशेषतया पेयजल आपूर्ति और भूमिगत जल पुनःभरन के लिए जलाशयों क पुनरुद्धार
  4. उन क्षेत्रों सहित जिनमें जल की गुणवत्ता सम्बन्धी समस्याएँ है (उदाहणार्थ आरसेनिक, फ्लोराइड) दुर्गम क्षेत्रों, पहाड़ी और तटीय शहरों के लिए विशेष जलापूर्ति प्रबंधन|

सीवरेज

  1. मौजूदा सीवरेज प्रणालियों और सीवरेज शोधन संयंत्रों के संवर्द्धन सहित विकेंद्रीकृत, नेटवर्कबद्ध भूमिगत  सीवरेज प्रणालियाँ
  2. पुरानी सीवरेज प्रणालियों और शोधन संयंत्रों का पुनर्स्थापन,
  3. लाभकारी प्रयोजनों के लिए जल का पुनचक्रण और अपशिष्ट जल का पुनः उपयोग

सेफ्टेज

  1. मल गाद प्रबंधन-कम लागत पर सफाई, परिवहन और शोधन
  2. सीवर और सेफ्टिक टैंकों की यांत्रिकी और जैविक सफाई और प्रचालन की पूरी लागत वसूली

वर्षा जल निकासी

  1. बाढ़ को कम करने और समाप्त करने के उद्देश्यों से नालों और वर्षा जल नालों का निर्माण और सुधार

शहरी परिवहन

  1. अंतर्देशीय जल मार्ग (पोत/खाड़ी अवसंरचना के छोड़कर) के लिए जलयान और बस
  2. गैर मोटरीकृत परिवहन (जैसे साईकिलों) के लिए फुटपाथ/पथ, पटरी, फुट ओवरब्रिज
  3. बहुस्तरीय पार्किंग
  4. द्रुत बस परिवहन प्रणाली (बीआरटीएस)

हरित स्थल और पार्क

  1. बच्चा हितैशी घटकों के लिए विशेष प्रावधान के साथ हरित स्थल और पार्कों का निर्माण करना|

सुधार प्रबंधन और सहायता

  1. सुधार कार्यान्वयन के लिए सहायता संरचना, कार्यकलाप और वित्तपोषण सहायता
  2. स्वतंत्र सुधार मोनिटरिंग एजेंसियां

क्षमता निर्माण

इसके दो घटक हैं –व्यक्तिगत और सांस्थानिक क्षमता निर्माण

  1. क्षमता निर्माण मिशन शहरों तक सिमित नहीं होगा बल्कि अन्य शहरी अन्य शहरी स्थानीय निकायों तक भी इसका विस्तार किया जाएगा|
  2. नये मिशनों के साथ इसके रिएलायनमेंट के बाद व्यापक क्षमता निर्माण कार्यक्रम (सिसिबीपी)

अस्वीकार्य घटकों की सांकेतिक सूची (सम्पूर्ण नहीं )

  1. परियोजनाओं अथवा परियोजना सम्बन्धित कार्यों के लिए भूमि की खरीद
  2. राज्य सरकारों/शहरी स्थानीय निकायों दोनों के लिए स्टाफ के वेतन
  3. विद्युत
  4. दूरसंचार
  5. स्वास्थ्य
  6. शिक्षा
  7. मजदूरी रोजगार कार्यक्रम और स्टाफ घटक

धनराशि का आबंटन

41 वित्त वर्ष 2015 –16  से 5 वर्ष के लिए अमृत के लिए कुल परिव्यय 50,000  करोड़ रु० है और मिशन को केन्द्रीय प्रायोजित स्कीम के रूप में संचालित किया जायेगा| इसके बाद अमृत  को शहरी विकास मंत्रालय द्वारा किये गये मूल्यांकन के आलोक में और मिशन में मिले अनुभव शामिल करते हुए जारी रखा जाएगा|

मिशन निधियो में निम्नलिखित चार भाग शामिल होंगे|

  1. परियोजना निधि-वार्षिक बजटीय आवंटन  के 80%
  2. सुधारों के लिए प्रोत्साहन- वार्षिक बजटीय आवंटन  के 10%
  3. प्रशासनिक और कार्यालयी व्यय (ए एंड ओई) के लिए राज्य की निधि-वार्षिक बजटीय आवंटन  के 80%
  4. प्रशासनिक और कार्यालयी व्यय (ए एंड ओई) के लिए शहरी विकास मंत्रालय राज्य की निधि-वार्षिक बजटीय आवंटन  के 80%

तथापि, वित्तीय वर्ष वर्ष 2015 –16  के लिए परियोजना निधि-वार्षिक बजटीय आवंटन  के 90% होगी क्योंकि  सुधारों के लिए प्रोत्साहन वित्तीय वर्ष 2016-17से ही दिया जायेगा| मिशन निधियां राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों को निम्नलिखित सिद्धांतों के आधर पर आवंटित की जाएगी|

4.2 परियोजना निधि

प्रत्येक वर्ष के शुरुआत में परियोजना मिशन निधि राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों के बीच विभाजित की जाएगी| वार्षिक बजटीय आवंटन की संवितरण के लिए एक समान फार्मूला का उपयोग किया जाएगा जिसमें प्रत्येक राज्य/संघ राज्य क्षेत्र  (जनगणना 2011) के शहरी आबादी  और राज्य/ संघ राज्य क्षेत्रों के सांविधिक कस्बों की संख्या राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा अधिसूचित किया जाता है और मिशन अवधि के दौरान परिवर्तित किया जाएगा, प्रत्येक वर्ष इस संख्या में परिवर्तन के फार्मूले  को ध्यान में रखा जाएगा| आवंटित परियोजना निधि की राशि के बारे में  राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों को उपयुक्त समय सूचित किया जाएगा| परियोजना के लिए केन्द्रीय सहायता (सीए) अनुमोदित लागत (पैरा 9) के 20:40:40  की तीन किश्तों में होंगी|

 

4.3 सुधार के लिए प्रोत्साहन

मिशन का एक उद्देश्य सुधारों  के माध्यम से शासन में सुधार लाना है| मिशन अवधि के दौरान 11 सुधारों का कार्यान्वयन किया जायेगा| सूची अनुलग्नक 1 में दी गई है| राज्यों के लिए प्रोत्साहन के अनुदान निम्न सिद्धांतों से शामिल होंगे|

पिछला अनुभव दर्शाता है कि यदि परियोना निधि जारी करना अपूर्ण सुधारों से जुड़ जाता है तो परियोजना में विलंब हो जाता है| इसलिए अमृत देने के बजाय प्रोत्साहन प्रदान करता है| वार्षिक बजट आबंटन के 10% को अलग रखा जायेगा और सुधारों को प्राप्त करने हेतु राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों को प्रोत्साहन के रूप में दिया जायेगा मिशन अनुवर्ती वित्तीय वर्ष (एफवाई) के शुरुआत में पूर्व वर्ष के लिए प्रोत्साहन देगा| राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों अनुलग्नक 2 के तालिका 5.5 में दिए गे निर्धारित प्रक्रिया में स्व-आकलन करेंगें| राष्ट्रीय मिशन निदेशालय स्व-आकलन की प्राप्ति होने पर राज्यों को प्रोत्साहन के पुरस्कार की घोषणा करेंगे|

  1. प्रोत्साहन निधि एक अतिरिक्त धनराशि के रूप में है जो शहरी विकास मंत्रालय द्वारा मुहैया किया जायेगा और राज्य/शहरी स्थानीय निकाय द्वारा कोई समान निधि दिए जाने की आवश्यकता नहीं होगी|
  2. राज्य उच्च अधिकार प्राप्त समिति (एसएचपीएससी) प्रोत्साहन राशि के उपयोग का निर्णय करेगी| प्रोत्साहन आवार्ड का उपयोग नयी परियोजनाओं सहित अमृत के स्वीकार्य घटकों पर मिशन शहरों में किया जायेगा| एसएचपीएससी शहरी विकास मंत्रालय  को परियोजनाओं पर प्रोत्साहन निधि के उपयोग के बारे में सूचना प्रदान करेगी|
  3. प्रोत्साहन राशि को अमृत में परियोजना के राज्य अंश के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता लेकिन शहरी स्थानीय निकायों द्वारा उनके परियोजना वित्तपोषण के लिए उपयोग किया जा सकता है|
  4. सुधार हेतु अनुपयुक्त निधियों को प्रत्येक वर्ष में परियोजना निधि में परिवर्तित किया जायेगा|

 

4.4 राज्य निधि (प्रशासनिक एवं कार्यालयी व्यय)

  1. निधियां सभी राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों को पैरा 4.2 में दिए गए समान सूत्र के आधार आवंटित किये जायेंगे|
  2. इन निधियों के उपयोग की सिफारिश एसएचपीएससी द्वारा की जाएगी और राज्य वार्षिक कार्य योजना (एसएएपी) का एक भाग तैयार किया जायेगा|
  3. इस निधि को क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के लिए उपयोग किया जायेगा और वाहनों की खरीद, भवनों का निर्माण और रखरखाव, पदों के सृजन, वेतन का भुगतान और साज-समान के खरीद आदि के लिए उपयोग नहीं किया जायेगा|
  4. सभी स्तरों पर मिशन के कार्यान्वयन में सहायता के लिए संविदा पर व्यावसायिकों तथा सहायक दलों की भर्ती स्वीकार्य होगी जैसा कि दिशा-निर्देशों तथा निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रियाओं को अपनाने के पश्चात निर्धारित किया जाए|
  5. क्षमता निर्माण के लिए निधियां उपर्युक्त परियोजना निधियों के लिए दिए गए समान किश्तों में जारी की जाएगी|
  6. सेवा के रूप में ई-म्युनिसिपल्टी (ई-मास) से सम्बन्धित गतिविधियाँ आरंभ करना|
  7. अमृत मिशन के लोगों और टैगलाइन को सभी परियोजनाओं पर प्रमुखता से प्रदर्शित करना|
  8. चालू व्यापक क्षमता निर्माण कार्यक्रम (सीसीबीपी) और स्वतंत्र समीक्षा और निगरानी एजेंसियों (आईआरएमए) शती मिशन  कार्यान्वयन में सहायता प्रदान करने वाली संस्थागत व्यवस्थाएं इस निधि से वित्तपोषण किये जाने हेतु पात्र होंगी|

 

4.5 शहरी विकास मंत्रालय की निधि (प्रशासनिक एवं कार्यालयी व्यय)

  1. निधि राष्ट्रीय मिशन निदेशालय स्तर (शहरी परिवहन प्रभाग सहित) पर क्षमता निर्माण मिशन निदेशालय राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय कार्यशालाओं के आयोजन, पुरस्कार प्रदान करने और उत्तम व्यवहार के पहचान, उत्तम व्यवहारों का उन्नयन और पुनः प्रयोग अरु स्मार्ट समाधान, क्षमता निर्माण और प्रोद्योगिकीय विकास हेतु उत्कृष्टता केन्द्रों और अन्य संस्थाओं एवं अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से अनुसंधान और संबद्ध अध्ययन प्रारंभ करना आदि के लिए उपयोग किया जायेगा|
  2. ई-मास से सम्बन्धि गतिविधियाँ आरंभ करना|
  3. किसी भी अन्य उद्देश्यों के लिए इन निधियों के उपयोग के सम्बन्ध में शीर्ष समिति द्वारा निर्णय लिया जायेगा|

वित्तपोषित  लिए जाने वाले घटक

क्र.सं.

घटक

वित्तपोषण

1

जलापूर्ति

  • नये, जलापूर्ति प्रणाली का संवर्द्धन और पुर्स्थापन
  • जलापूर्ति के लिए जल निकायों का नवीकरण और भू-जल के पुनर्भरण
  • दुर्गम क्षेत्रों, पहाड़ी और तटीय शहरों हेतु विशेष प्रबंधन
  • 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए भारत सरकार से अनुदान के रूप में परियोजना लागत की एक-तिहाई
  • 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों/कस्बों के लिए अनुदान के रूप में परियोजना लागत का आधा
  • राज्य सरकारों/शहरी स्थानीय निकायों अथवा निजी निवेश के माध्यम से शेष राशि वित्तपोषण

निविदा में उपयोक्ता प्रभारों के आधार पर पांच वर्ष के लिए प्रचालन और अनुरक्षण लागत शामिल होंगे| परियोजना  लागत के आकलन के लिए प्रचालन और अनुरक्षण लागत छोड़ दी जाएगी, तथापि राज्य/शहरी स्थानीय निकाय, अपने को आत्मनिर्भर और लागत प्रभावी बनाने के लिए उचित लागत वसूली तंत्र के माध्यम से प्रचालन और अनुरक्षण का वित्तपोषण करेंगे|

एसएलआईपी  में सभी परिवारों के जल और सीवरेज कनेक्शन का प्रावधान पहले प्रदान किया जायेगा|

2

सीवरेज

  • नए सीवरेज प्रणालियों और शोधन संयंत्रों का संवर्धन और पुनर्स्थापन
  • लाभकारी उद्देश्यों के लिए जल का पुनः चक्रण और
  • अपजल का पुनःउपयोग

3

सेफ्टेज

  • मल गाद प्रबंधन (सफाई, ढुलाई और शोधन) सेप्टिक टैंकों और सीवरों का विशेषतः यांत्रिक और  जैविक सफाई |

4

वर्षा जल नाले

  • नालियों और वर्षा जल नालों का निर्माण और सुधार

5

शहरी परिवहन

  • साईड बॉक्स, फुट ओवरसीज़, गैर-मोटरीकृत परिवहन बसें, बीआरटीएस, बहु-स्तरीय पार्किंग, जल मार्ग और नौका वाहिकाओं

6

  • हरित स्थान और शिशु-अनुकूल घटकों हेतु विशेष प्रावधान के साथ पार्कों का विकास/पार्कों के लिए शहरी स्थानीय निकायों को स्थानीय निवासी भागीदारी के साथ-रखरखाव हेतु प्रणाली का स्थापना करना होगा|

भारत सरकार द्वारा परियोजना लागत का आधा और इन परियोजनाओं पर कुल व्यनय राज्य वार्षिक कार्य योजना (एसएएपी) के 25% से अधिक नहीं होंगी|

7

  • क्षमता निर्माण और सुधारों का समर्थन

शीर्ष समिति द्वारा निर्धारित मौजूदा मानदंडों और इकाई लागतों के आधार पर भारत सरकार द्वारा पूरा (100%)

8

  • ए एंड ओई (पीएमयू/पीआईयु/डीपीआर लागत आदि)

 

 

सेवा स्तरीय सुधार योजनाओं (एसएलआईपी) की तैयारी

  1. जलापूर्ति और सीवरेज (सेप्टेज सहित) के साथ सभी परिवारों को शामिल करना इसका प्राथमिक उद्देश्य है| इसके लिए अनुलग्नक 2 के भाग 2 में दिए गये अनुसार सेवा स्तरीय सुधार योजनाओं (एसएलआईपी)  प्रत्येक यूएलबी को तैयार करने हैं और कार्यनीतिक कदम नीचे दिए गए हैं|
  2. सेवा स्तरीय अंतराल का मूल्यांकन करना: अमृत राज्य/शहरी स्थानीय निकायों के साथ जलापूर्ति तथा सीवरेज पर उपलब्ध आंकड़ों, सूचनाओं तथा योजनाओं पर तैयार की गई है| यदि हम इस जोन को जलापूर्ति तथा सीवरेज की सीमा के वर्तमान स्तर के लिए आधार इकाई के रूप में लेते हैं तो इस जोन में परिवारों की संख्या, जिनका पास नल टोंटी/सीवरेज कनेक्शन है तथा जिनके पास ये सुविधाएँ नहीं है, को जनगणना (2011) अथवा शहरी विकास मंत्रालय द्वारा कराये गए आधारभूत सर्वेक्षण से लिया जाएगा| (कोई नया बेसलाइन सर्वेक्षण नहीं किया गया है तथा  राज्य/शहरी स्थानीय निकाय पूर्ववर्ती बेसलाइन को स्वीकार/संलग्न करे) क्षेत्र-वार अंतरालों को युएलबी में जलापूर्ति तथा सीवरेज में सेवा स्तरीय अंतरालों तक पहुँचने के लिए जोड़ा जायेगा|
  3. अन्तराल को भरना: जल तथा सीवरेज/सेफ्टेज कनेक्शन वाले परिवारों की वर्तमान संख्या की तुलना में कुल परिवारों की संख्या के बीच के अन्तराल की एक बार गणना हो जाने पर, जलापूर्ति तथा सीवरेज के शीर्ष के अतर्गत पैरा 3 में वर्णित घटकों के एक या अधिक का प्रयोग करते हुए अंतरालों को भरने के लिए योजनाओं को तैय्रार किया जायेगा| एक क्षेत्र में सभी परिवारों को शामिल किया जायेगा तथा जलापूर्ति और सीवरेज के लिए यह कार्य पृथक रूप से किया जाये तथा यह एसएलआईपी का भाग होगा
  4. विकल्पों का मूल्यांकन: शहरी स्थानीय निकाय को उनके पास उपलब्ध विकल्पों की जाँच करनी होगी| उदाहरण  के लिए, एक राज्य/शहरी स्थानीय निकाय की वितरण में अन्तराल को भरने की आवश्यकता हो सकती है| अन्य राज्य/शहरी स्थानीय निकाय के पास दूरस्थ जल स्रोतों तक अनके समुदायों को जोड़ने के लिए सार्वजनिक ग्रिड की आवश्यकता हो सकती है| सीवेरेज में, कुछ राज्य/शहरी स्थानीय निकाय केंद्रीकृत एवं विकेंद्रीकृत प्रणालियों के योग का चयन कर सकते हैं| इसलिए, सभी के लिए एक समान दृष्टिकोण उपयुक्त नहीं होगा तथा कम संसाधनों के साथ अधिक करने के लिए विकल्पों का सृजन किया जाये और इसे प्रकार किया जाए कि यह लाभ लोगों तक नल और शौचालय के रूप में पहुंचे|
  5. लागत का अनुमान : प्रत्येक परियोजना की लागत (पूंजीगत तथा प्रचालन और अनुरक्षण दोनों) ऑन-लाइन (या सार) अनुमानों के आधार पर तैयार की जाएगी| प्रत्येक युएलबी जेएनएनयूआरएम में निर्धारित सभी प्रासंगिक तथा उपयुक्त तकनीकी तथा वितीय मानक अमृत मिशन में लागू होंगे; कोई भी आकस्मिकताएँ अथवा लागत वृद्धि स्वीकार्य नहीं होगी तथा किसी भी अपूर्ण अथवा पहले से चालू परियोजनाओं को इसमें शामिल नहीं किया जायेगा|
  6. प्राथमिकीकरण: केंद्र सर्कार अधिकतम धनराशि उपर्युक्त पैरा 5 में दी गई परियोजना वित्तपोषण haके अनुसार देगी| यदि एक वर्ष के भीतर सार्वभौमिक कवरेज को प्राप्त करने के संसाधन उपलब्ध हैं तब शहरी स्थानीय निकाय ऐसा प्रस्ताव करेगी| तथापि, यदि यूएलबी में सार्वभौमिक कवरेज को प्राप्त करने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं और मिशन को अनेक वर्षों में कार्यान्वत किया जाना है तो यूएलबी मिशन के प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ तथा पांचवें वर्ष में शुरू किया जाने वाले क्षेत्रों की प्राथमिकता तय करेगा| सार्वभौमिक कवरेज को सीवरेज के बाद जलापूर्ति के साथ शुरू किया जायेगा| निधियों की उपलब्धता के आधार पर जलापूर्ति तथा सीवरेज की सार्वभौमिक कवरेज साथ-साथ भी की जा सकती हैं| सार्वभौमिक व्याप्ति के प्राप्त हो जाने के पश्चात राज्य/यूएलबी अगली प्राथमिकता का निर्णय करेंगें-शहरी स्थानीय निकाय वर्षा जल निकासी के निर्माण अथवा शहरी परिवहन के निधियन का निर्णय कर सकता है जो इस पर निर्भर करेगा कि स्थानीय प्राथमिकता क्रमिक बाढ़ को कम करना है अथवा वाहन-जनित प्रदूषण को घटाना है| कुल मिलकर, जल और सीवरेज की सार्वभौमिक कवरेज एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है तथा राज्यों/शहरी स्थानीय निकायों द्वारा प्राप्त किया जाने वाला प्रथम लक्ष्य है|
  7. तथापि, उपर्युक्त पैरा 5 में दिए गए अनुसार वार्षिक आंवटन का 2.5 प्रतिशत तक बच्चों के अनुकूल  विशेषताओं वाले उद्यानों के विकास में प्रयोग किया जाए जिसमें साथ ही साथ स्थानीय इच्छुक हितधारकों को निधियों तथा पदाधिकारियों के साथ उद्यान अनुरक्षण सौपने का दिशा-निर्देश तैयार करना हो| अम्रत में यह भी एक सुधार है|
  8. लीक से हटकर सोच: यूएलबी द्वारा एसएलआईपी तैयार करने के दौरान पूर्व के निर्णयों में बदलाव किया जाना चाहिए| उदाहरण स्वरुप भारी पूंजी तथा विद्युत लागत लगाकर लम्बी दूरी से पानी पंप करने के स्थान पर, राज्य/शहरी स्थानीय निकाय विकल्पों, जैसे कि-जल पुनचक्रण तथा पुनः उपयोग की जाँच की जानी चाहिए| मानदंड यह है कि शहरी स्थानीय निकायों में जनित अपशिष्ट जल का कम से कम 20% पुनः चक्रित की जाये तथा अपेयजल के प्रयोग हेतु जल पुनचक्रण के मानक पहले ही निर्धारित कर दिए गए हैं| अधिक कुशल जल प्रणाली का अन्य माध्यम बेहिसाब जल (गैर-राजस्व जल) को 20% से कम तक कम करना है जो राज्यों/यूएलबी द्वारा किये जाने वाले सुधारों का एक अंग है तथा अम्रत में इसे सहायता प्राप्त है|
  9. तकनीक अनुमानों के डिजाईन व तैयारी के दौरान, निम्न लागत विकल्पों (किफायती अभियांत्रिकी) को प्राथमिकता की जायगी| तथा स्मार्ट समाधानों का प्रयोग लागतों को घटाने तथा सेवा को बेहतर बनाने के लिए  किया जाए| प्रगत संगणन विकास केंद्र (सी-डैक) द्वारा विकसित स्मार्ट समाधानों की सूची अनुलग्नक-3 में दिए गये हैं|
  10. शर्तें: भूमि की अनुउपलब्धता अथवा विलम्ब से उपलब्धता पूर्ववर्ती मिशन में परियोजनाओं के विलम्ब के प्रमुख कारकों में से एक थे| एक अन्यन सम्बद्ध मामला अन्य विभागों से स्वीकृति प्राप्त करना रहा है| इसलिए, अमृत परियोजना में उन परियोजनाओं को शामिल नहीं किया जाए जिनमें भूमि उपलब्ध न हो तथा कोई भी परियोजना कार्य आदेश जारी नहीं किये जाए यदि सभी विभागों से सभी स्वीकृतियां उक्त तिथि तक प्राप्त नहीं कर ली गई हैं| इसके अतिरिक्त राज्य/शहरी स्थानीय निकाय भूमि खरीद की लागत को वहन करेंगे| अंततः अम्रत निधि का प्रयोग जेएनएनयूआरएम के कुछ घटकों को पूर्ण करने हेतु न किया जाए  जिन्हें प्रस्तुत किये गए परियोजना रिपोर्ट में अपुन्र के रूप में दिखाया गया था जिन्हें शहरी विकास मंत्रालय ने अनुमोदन प्रदान किया था| उदाहरण स्वरुप यदि  जेएनएनयूआरएम अनुदानों का प्रयोग करते हुए मुख्य लाइनें बिछाई गई हैं वो नलों की व्यवस्था करना इस परियोजना का भी एक भाग थी परन्तु शहरी स्थानीय निकाय द्वारा उपलब्ध नहीं कराई गई है तब ऐसे रह गये भाग अम्रत में वित्तपोषण के पात्र नहीं हैं|
  11. लचीलापन: आपदाओं के विरुद्ध लचीलेपन को समाविष्ट करना तथा परियोजनाओं को सुरक्षित करना इसके एसएलआईपी को तैयार करने के चरण विशेषतः उपेक्षित तथा गरीबों के लिए, और परियोजना विकास चरण में किया जायेगा आपदा-रोधी अभियन्त्रिकी तथा संरचनात्मक मानकों को डिजाईन में शामिल किया जायेगा| इसे राज्यों/यूएलबी एसएएपी तैयार करते समय पुनः सुनिश्चित करेंगे|
  12. वित्तपोषण: प्रचालन और अनुरक्षण लागत सहित परियोजनाओं का वित्तपोषण एसएलआईपी का एक प्रमुख पहलू है| प्रत्येक विकल्प के लिए पूंजी लागत तथा प्रचालन और अनुरक्षण लागत का अनुमान लगाया जाए| वित्त के अन्य स्रोतों की भी पहचान की जाए| यूएलबी स्तर पर आंतरिक स्रोतों (अर्थात् करों, शुल्कों, अन्य) bhbhbhबाह्य स्रोतों (अर्थात् राज्यों से अंतरण, केंद्र/राज्य सरकारों से परियोजना धनराशि अन्य) तथा ऋण, बांडों तथा अन्य की सम्भावनाओं का भी मूल्यांकन किया जाना आवश्यक है| अतिरिक्त लागत का भार वहन करने के लिए नागरिकों को प्रेरित करना एक चुनौती है| एक रास्ता एक रिहायशी क्षेत्र के लिए परियोजना निधियन हेतु ऋण लेना है तथा सम्पत्ति कर में वृद्धि करके ऋण का भुगतान करना है अर्थात् केवल उसी रिहायशी क्षेत्र में 10 वर्ष में इसे कर संवर्द्धन वित्तपोषण (टीआईएफ)कहा जाता है|
  13. अम्रत के साथ अन्य केंद्रीय और राज्य सरकार कार्यक्रमों/स्कीमों के साथ मिलाकर निधियों का समांजस्य स्थापित करना वित्तपोषण का एक और स्रोत भी है| एसएलआईपी को स्वयं के तैय्रार करने के चरण पर शहरों को, नगरों को स्मार्ट सिटी मिशन,स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम), राष्ट्रीय विरासत नगर विकास और संवर्द्धन योजना (एचआरआईडीएवाई), डिजिटल भारत, कौशल विकास, नमामी गंगे, सब के लिए आवास आदि के साथ सम्मेलन करना चाहिए|
  14. सुधार: सुधारों का कार्यान्वयन एसएलआईपी का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है| यूएलबी को सुधारों का एक खाका तैयार करना होगा जिसे राज्य मिशन निदेशालय द्वारा समेकित करके एसएपी को एक भाग के रूप में शामिल  किया जायेगा| कुछ सुधारों की अपेक्षा अधिक धनराशि की आवश्यकता होती है| प्रयोक्ता प्रभारों, सम्पत्ति कर, शुल्क इत्यादि का मूल्यांकन और संग्रहण ऐसे कार्यकलापों के उदाहरण हैं जिनके लिए अतिरिक्त निधियों की बहुत कम मामलों में आवश्यकता होती है| यदि सुधारों के कार्यान्वयन के लिए निधियों की जरूरत पड़ती है तो उनका निर्धारण i) अमृत के अनुमत संघटकों, ii)  राज्य ए एन्ड ओई  निधियां, अथवा iii) विश्व बैंक द्वारा वित्तपोषित शहरी विकास के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम से किया जा सकता है| ये सभी एसएएपी का एक भाग होने चाहिए. लेकिन एसएलआईपी और एसएएपी तैयार करते समय दोहराव और अत्याधिकता से बचना चाहिए|

 

राज्य वार्षिक कार्य योजना (एसएएपी)

1. एसएएपी के लिए बुनियादी बिल्डिंग ब्लॉक यूएलबी द्वारा तैयार की गई एसएलआईपी होगी | राज्य स्तर पर, सभी मिशन शहरों के एसएलआईपी को एसएएपी में एकीकृत कर दिया जायेगा| इसलिए बुनियादी तौर पर एसएएपी राज्य स्तरीय सुधार योजना है जो परिवारों को जलापूर्ति और सीवरेज कनेक्शनों में वर्ष-वार सुधार को दर्शायेगा |

2. प्राथमिकीकरण के सिद्धांत : राज्य अंतर विश्लेषण और यूएलबी की वित्तीय स्थिति के आधार पर अंतपर-युएलबी आबंटन के बारे में भी निर्णय करेंगे और पहले वर्ष में उन युएलबी का चयन करेंगे जहाँ जलापूर्ति और सीवरेज के प्रावधानों में काफी अंतर होगा| वित्तपोषण के लिए यूएलबी की प्राथमिकता का निर्धारण स्थानीय संसद  सदस्यों, महापौरों और सम्बन्धित युएलबी के आयुक्तों से परामर्श करने के बाद किया जाएगा| वित्तीय रूप से कमजोर यूएलबी का काफी हद तक वित्तपोषण किया जा सकता है| शहरी गरीबों के अधिक अनुपात वाले शहरी स्थानीय निकायों को अधिक अंश मिलेगा| इसके अतिरिक्त, सम्भावित स्मार्ट सिटीज को प्रथम प्राथमिकता दी जायेगी क्योंकि स्मार्ट सिटी मिशन अम्रत एक-दूसरे के अनुपूरक हैं| राज्यों द्वारा प्राथमिकता और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर, रजी एसएएपी को 2015-16  के दौरान राज्य को आबंटित  केन्द्रीय सहायता (सीए) का तीन गुणा (क्योंकि परियोजना को पूरा होने में तीन वर्ष लगने की संभावना है और वित्तपोषण भी तीन किस्तों में किया जाना है) और पिछले वर्ष की बकाया सीए तथा बाद के वर्षों में वर्ष का वार्षिक आबंटन जारी करेंगे| परिणामस्वरुप, राज्य के भीतर विभिन्न यूएलबी भिन्न-भिन्न वित्तपोषण प्रतिमान के पात्र होंगे, परन्तु केंद्र का हिस्सा नियत रहेगा जैसा कि इन दिशानिर्देशों में दिया गया है|

3. प्रचालन और अनुरक्षण का महत्व : पिछले कार्यक्रमों के अनुभवों ने दर्शाया है कि, एक बार परियोजना पूरी हो जाने पर, यूएलबी सृजित अवसंरचनात्मक परिसम्पत्तियों का प्रचालन और अनुरक्षण करने की ओर बहुत कम ध्यान देते हैं| इसलिए एसएएपी में शहरी विकास मंत्रालय के लिए प्रस्तावित की जा रही परियोजनाओं में कम से कम पांच वर्षों तक ओ एन्ड एम का वित्तपोषण शामिल है और इसे प्रयोक्ता प्रभारों अथवा अन्य राजस्व साधनों की उगाही से पूरा किया जाएगा| राज्य/यूएलबी उपयुक्त लागत वसूली तंत्र के माध्यम से ओ एन्ड एम का वित्तपोषण करेंगे ताकि उन्हें आत्मनिर्भर और किफायती बनाया जा सके|
4.परियोजनाओं का वित्तपोषण: वित्तपोषण एसएएपी का एक महत्वपूर्ण तत्व है| पैरा 5 में दी गई तालिका दर्शाती है कि केंद्र सरकार द्वारा अधिकतम अंश दिया जायेगा| राज्यों/यूएलबी एसएएपी की तैयारी के समय शेष संसाधनों का सृजन करना पड़ेगा| नगरों का वित्तीय अश राज्य भर में अलग-अलग होगा| कुछ राज्यों में, यूएलबी अन्य राज्यों के यूएलबी की तुलना में परियोजना लागत में महत्वपूर्ण योगदान देने की स्थिति में होते हैं| तदनुसार, राज्यों को एसएएपी बनाते समय यह निर्णय लेना होगा कि शेष वित्तपोषण (केंद्र सरकार के अंश के अतिरिक्त) राज्य, यूएलबी और स्टेट/यूएलबी द्वारा पता लगाये गए अन्य स्त्रोतों (अर्थात् पीपीपी, बाजार ऋण) में कैसे बांटा जायेगा| लेकिन, एसएएपी में राज्य का योगदान कुल परियोजना लागत का 20% से कम नहीं होगा|

5. महत्वपूर्ण है कि राज्य स्तर पर एसएएपी में केवल वही परियोजनाएं शामिल की जाएँगी जहाँ सम्पूर्ण परियोजना लागत पुर्णतः राजस्व स्रोतों से संबद्ध होगी| इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के अन्य क्षेत्रों और वित्तीय कार्यक्रमों का जोड़ा जाना भी शामिल होगा| वित्तीय मध्यस्थ सृजित करना एक लाभदायक और अम्रत में सुधार भी है, जिससे सभी स्रोतों से निधियों को जुटाया जा सके और यूएलबी को समय पर निधियां जारी की जा सकें| ऐसा मध्यस्थ, वित्त के बाहरी स्रोतों, जैसे ऋण और बांड, पर पहुँच बनाने में भी सक्षम हो, क्योंकि छोटे और वित्तीय रूप से कमजोर यूएलबी वहाँ पहुँचने में असमर्थ होते हैं| म्युनिसिपल-बांडों के लिए सेबी द्वारा विनियमों के प्रख्यापित करने से सम्भावित स्रोतों का ऐसे शासित प्रदेश को सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के प्रयोग की सम्भावनाओं का पता लगाना चाहिए, कि क्या यह अधिमानतः निष्पादन मॉडल होना चाहिए| पीपीपी को सुदृढ़ नागरिक फीडबैक के साथ उपयुक्त सेवा स्तरीय करारों (एसएलए) को इसमें शामिल करनी चाहिए| यह जन-सार्वजनिक भागीदारी (पीपीपी) मॉडल की अगुवाई करेगा|

6. एसएएपी का अनुमोदन: . एसएएपी का अनुमोदन शहरी विकास मंत्रालय द्वारा वर्ष में एक बार शीर्ष समिति द्वारा दिये गए कार्यक्रम एक अनुसार किया जायेगा| शीर्ष समिति . एसएएपी  को संशोधित कर सकती है और शर्तों के साथ अनुमोदित या अंतरों को पाटने के लिए लौटा भी सकती है| अमृत राज्यों के माध्यम से यूएलबी को परियोजना राशि उपलब्ध कराएगा| शहरी विकास मत्रालय द्वारा . एसएएपी के मूल्यांकन की कुछेक मानदंड निम्नवत हैं:-

  1. राज्य सरकार ने सेवा स्तरीय अंतरालों का किस निपुणता से पता लगाया है?
  2. राज्य ने पूंजीगत व्यवय का किस निपुणता से नियोजन और vittp किया है?
  3. राज्य कितनी भली-भांति जलापूर्ति और सीवरेज/सैफ्टेज के सार्वभौम कवरेज की उपलब्धि और तत्पश्चात इन दोनों क्षेत्रों और शहरी परिवहन तथा वर्षा जल निकास निर्माण के अन्य मानकों की ओर बढ़ा है?
  4. केंद्र सरकार से वित्तीय समर्थन का प्रत्याशित स्तर क्या है और राज्य/यूएलबी ने कितनी अच्छी तरह से वित्तपोषण के अन्य स्रोत्तों का पता लगाकर उन तक पहुँच बनायीं है?
  5. यूएलबी के जरूरतों की कैसे निष्पक्षता और समानता से  विधिवत विचार किया गया है?
  6. क्या नागरिकों, स्थानीय संसद सदस्यों और अन्य जन प्रतिनिधियों सहित सभी हितधारकों के साथ पर्याप्त परामर्श किया गया है?

कार्य निष्पादन

  1. परियोजनाओं का निष्पादन यूएलबी द्वारा किया जाएगा| यूएलबी के पास परियोजना के कार्यान्वयन की पर्याप्त क्षमता न होने की सूरत में यूएलबी द्वारा एक संकल्प पारित करने पर राज्य सरकार एसएएपी में यह सिफारिश कर सकती है कि परियोजना का निष्पादन राज्य अथवा केंद्र सरकार की विशिष्ट पैरास्टेटल  एजेंसियों द्वारा किया जायेगा| ऐसी व्यवस्था राज्य सरकार, विशिष्ट पैरास्टेटल एंजेंसी और सम्बन्धित नगरपालिका के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता करार (एमओयू) के माध्यम से निष्पादित की जानी चाहिए| ऐसे मामले में, यूएलबी की क्षमता को अमृत के क्षमता निर्माण संघटक द्वारा बढ़ाया जा सकता है| इस प्रकार सृजित परिसम्पत्तियों का अनुरक्षण और रखरखाव की जिम्मेदारी यूएलबी और राज्य सरकार की होगी|
  2. शहरी विकास मत्रालय, परियोजना-दर-परियोजना अनुमोदन अथवा परियोजना डीपीआर को तकनीकी मंजूरी नहीं देगा, इन कार्यकलापों के लिए राज्य/संघशासित प्रदेश ही उत्तरदायी होंगे| शहरी विकास मंत्रालय ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सीवरेज, जलापूर्ति, शहरी परिवहन आदि पर व्यापक मैनुअल तैयार किया है, और दिशानिर्देश तथा परामर्शीकाएं जारी की हैं| राज्य स्तरीय तकनीकी समिति (एसएलटीसी) इन तकनीकी दस्तावेज का अनुपालन सुनिश्च्ति करेगी| नीचे दिया गया अनुक्रम चार्ट अम्रत की आयोजन, अनुमोदन और कार्यान्वयन की पूरी प्रक्रिया का ब्यौरा देता है|
  3. शीर्ष समिति राज्यों को वार्षिक बजट आबंटित करती है|
  4. एसएचपीएससी शहर में सभी को जलापूर्ति और सीवरेज कनेक्शन प्रदान करने हेतु शहर स्तरीय सेवा स्तर सुधार योजनायें (एसएलआईपी) तैयार करवाएगी
  5. एसएलआईपी को राज्य वार्षिक कार्य योजनायें (एसएएपी) बनाने के लिए एकत्र किया गया है|
  6. शीर्ष समिति एसएएपी का मूल्यांकन और अनुमोदन करती है|
  7. निष्पादन शुरू होता है|
  8. शहरी स्थानीय निकाय एसएचपीएससी द्वारा पहचान की गई परियोजनाओं के लिए डीपीआर को अनुमोदित करवाते हैं, जिनका एसएलटीसी द्वारा तकनीकी रूप से मूल्यांकन किया जाता है|
  9. विस्तृत परियोजना रिपोर्टों के विस्तृत तकनीकि और वित्तीय मूल्याकंन के पश्चात कार्यान्वयन शुरू होता है|
  10. परियोजनाओं के धीमे कार्यान्वयन के लिए पता लगाये गए कुछेक घटक परियोजना के डिज़ाइन, निविदा की प्रक्रिया विलम्ब के कारण, लागत में वृद्धि और निविदा मांगने तथा उनकी तय करने तथा अनुमोदित लागत में भिन्नता और विस्तृत परियोजना रिपोटों में दर्शाई गई लागत से सम्बन्धित है| इन कठिनाईयों पर काबू पाने के लिए राज्यों/शहरी स्थानीय निकायों को एक दृष्टिकोण का अनुपालन करना चाहिए जिसमें विदेशी संस्थाओं द्वारा शहरी स्थानीय निकायों/राज्यों को परियोजना डिज़ाइन, विकास कार्यान्वयन और प्रबंधन के लिए आद्योपांत सहायता प्रदान की जाती है| विशिष्ट तौर से यह सहयता एसएलआईपी, एसएएपी, डीपीआर इत्यादि को तैयार करने के लिए दी जाएगी| विदेशी संस्थाओं को परियोजना विकास और प्रबंधन परामर्शदाता (पीडीएमसी) कहा जाएगा| विदेशी संस्थाओं द्वारा आद्योपांत सहायता प्रदान करने के लिए कार्य के एक मॉडल क्षेत्र का ब्यौरा अनुलग्नक 8 में दिया गया है यह राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों पीडीएमसी क्रय करने के लिए समर्थ बनाएगा| इस मिशन टूलकिट में प्रस्तावों के लिए मॉडल अनुरोध (आरएफपी) भी उपलब्ध हैं|

 

निधियां जारी करना

1. निधियों को 20:40:40 की तीन किस्तों में जारी किया जायेगा| इन निधियों को कार्यान्वयन एंजेसी द्वारा पृथक खाते में रखा जाएगा जैसा कि पहले के मिशन में किया गया था| अम्रत की घोषणा के तत्काल पश्चात्, प्रत्येक मिशन शहर को एसएलआईपी/व्यक्तिगत क्षमता निर्माण तैयार करने के लिए 25 लाख रूपये का अग्रिम दिया जायेगा जो प्रशासनिक और कार्यालय व्यय की निधियों के शहरी स्थानीय निकाय के हिस्से से आयेग और उसको पहली क़िस्त को जारी करने के समय पर इसके हिस्से में समायोजित किया जायेगा|

2. शीर्ष समिति द्वारा एसएएपी के अनुमोदन के तत्काल पश्चात पहली क़िस्त जारी की जाएगी| दूसरी और तीसरी क़िस्त 1) प्रप्प्तांक कार्ड 2) उपयोग प्रमाण-पत्र 3) परियोजना की निधियों हेतु अनुरोध प्राप्त होने पर जारी की जाएँगी| शहरी स्थानीय निकायों द्वारा राज्य मिशन निदेशकों को अनुलग्नक 6.1 और  7.3 (क्षमता निर्माण प्रगति) में दिए गए अनुरोध प्रपत्र भेजे जायेंगे| क्रय में राज्य मिशन निदेशक इनके अनुरोशों को समेकित करेंगे और अनुलग्नक अनुलग्नक 6.2 और  7.4 (क्षमता निर्माण प्रगति) में दिए गए प्रपत्रों में उनकी रिपोर्ट भेजेंगे और वे शहरी विकास मत्रालय को अनुलग्नक 4 और 5 में दिए गए क्रमशः प्राप्तांक और उपयोग प्रमाण-पत्र भी भेजेंगे|

3. इन दस्तावेजों को 1) केंद्र और राज्य द्वारा पैरा 5 में दिए गए निधिकरण पैटर्न के अनुसार पहले से जाती की गई 75% धनराशि का उपयोग, 2)राज्यों/शहरी स्थानीय निकाय/निजी क्षेत्र के अंशों के उपयोग और 3) एसएएपी में अंतवृर्ष्ट रोड मैप में यथा आश्वस्त और स्वतंत्र समीक्षा और निगरानी एंजेसी (आईआरएमए) की रिपोर्ट में प्रमाणित सेवा स्तरीय लक्ष्यों को पूरा करने के विवरण को दर्शाना चाहिए| महत्वपूर्ण बात यह है की केन्द्रीय सहायता की दूसरी और तीसरी किश्तें जारी करना निम्नलिखित के अधीन होगा क) राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा एसएएपी में दिए गये आश्वस्त संसाधनों के अनुसार उनको जुटाना, और ख) एसएचपीएससी और शीर्ष समिति द्वारा लगाई गई कोई अन्य शर्त| इस तथ्य को मानते हुए कि सभी अनुमोदित परियोजनायें समान गति से नहीं चल रही  हैं, राज्य असाधारण परिस्थितियों में, जब भी 75% उपयोग और अन्य शर्तें पूरी कर ली जाएँ, यूएलबी/परियोजनाओं के के सेट हेतु दूसरी और तीसरी किश्तें जारी करने के लिए अपने प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकते हैं|

4. शीर्ष समिति प्रत्येक वर्ष की तीसरी तिमाही के अंत में राज्यों राज्यों द्वारा आबंटनों के उपयोग की समीक्षा करेगी और गैर-कार्यनिष्पादन से कार्य निष्पादन करने वाले राज्यों/शहरी स्थानीय निकायों को उनके कार्य निष्पादन और निधियों का उपयोग करने की क्षमता के आधार पर निधियों को पुनः आबंटित करेगी| अनुमानित लागत के आधार पर जारी पहली क़िस्त के 20% से अधिक अथवा कम राशि की केन्द्रीय सहायता की दूसरी क़िस्त को जारी करते समय समायोजित किया जायेगा जो अनुमोदित लागत पर आधारित होगी| अनुमोदित लागत परियोजना की मूल्यांकित लागत अथवा निविदा में प्रस्तुत की गई लागत (जो कम हो) है और उस को एसएचपीएससी द्वारा ध्यान में रखा जाना होगा| मिशन परियोजनाओं  के प्रयोजनों के आलावा अन्य प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय अनुदानों को व्यय करने के लिए उस धनराशि पर दांडिक ब्याज लगाया जायेगा और शीर्ष समिति द्वारा कोई अन्य कार्रवाई की जाएगी तथा अनुदान जारी करने पर प्रतिकूल प्रभाव शामिल हो सकता है|

5. पहले के कार्यक्रमों से प्राप्त अनुभवों ने इस तथ्य को स्पष्ट किया है कि राज्य सरकारों द्वारा परियोजना निधियों को समय पर जारी करना परियोजना को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण है| अंतः राज्यों को शहरी विकास मंत्रालय द्वारा केन्द्रीय अंश को जारी करने के सार कार्य दिवसों के भीतर शहरी स्थानीय निकायों को राज्य के अंश सहित केन्द्रीय सहायता निधियों को जारी करना चाहिए अन्यथा  वित्त मंत्रालय द्वारा राज्य पर सात दिनों से आगे की किसी देरी के लिए विनिदिष्ट दर पर ब्याज लगाया जाएगा और भावी किस्तों से समुचित कटौतियां की जायेंगी|

6. नीचे का अनुक्रमक चार्ट धन को जारी करने के कदमों का ब्यौरा देता है:

 

शीर्ष द्वारा एसएएपी पर केन्द्रीय सहायता की पहली क़िस्त (२०%) जारी की जाती है|

राज्य अप्रैल, अगस्त, नवम्बर और फरवरी के दौरान सभी शहरी स्थानीय निकायों के लिए परियोजनाओं हेतु केन्द्रीय सहायता की दूसरी अथवा तीसरी क़िस्त को जारी करने के अपने दावे प्रस्तुत करेंगें जिन्होंने क़िस्त जारी करने की अम्रत की शर्तें पूरी कर ली है और अनुलग्नक 4.5 और 6 दिए गे दस्तावेज़ भेजेंगें|

उपयोग प्रमाण-पत्रों, परियोजना निधियों के लिए अनुरोध अनुलग्नक 6.2 में केवल सार रिपोर्ट) और परिणाम सूचकों पर प्रगति को दर्शाने वाले अंक कार्ड को प्रस्तुत करने के पश्चात प्रत्येक के लिए अनुमोदित लागे हेतु 40% दूसरी और तीसरी किस्तों को जारी किया जाता है|

कार्यक्रम प्रबंधन संरचना

1. राष्ट्रीय स्तर

सचिव, शहरी विकास मंत्रालय की अध्यक्षता में और सम्बन्धित मंत्रालयों और संगठनों के प्रतिनिधियों से बनी शीर्ष समिति इस मिशन का पर्यवेक्षण करेगी| शीर्ष समिति की संरचना इस प्रकार होगी:-

i) सचिव, (शहरी विकास मंत्रालय)                    अध्यक्ष

ii) सचिव (व्यय विभाग)                            सदस्य

iii) सचिव (आर्थिक कार्य विभाग)                     सदस्य

iv) प्रधान सलाहकार (एचयूड़ी) निति आयोग            सदस्य

v) सचिव (पेयजल एवं स्वच्छता )                    सदस्य

vi) सचिव (आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय)   सदस्य

vii) सचिव (पर्यावरण एवं वन)                        सदस्य

viii) संयुक्त सचिव एंव एफए, शहरी विकास मंत्रलय      सदस्य

ix) ओएसडी (यूटी) शहरी विकास मंत्रालय             सदस्य

x) सलाहकार (सीपीएचईओ)                         सदस्य

xi) टीसीओ                                       सदस्य

xii) निदेशक एनाईयुए                     सदस्य

xiii) मिशन निदेशक (शहरी विकास मंत्रालय)             सदस्य

 

शीर्ष समिति किसी भी सरकारी विभाग या संगठन के प्रतिनिधि को सदस्य के रूप में सहयोजित कर सकती है आय विचार विर्मश में किसी विशेषज्ञ को आमत्रित कर सकती है| शीर्ष समिति के कार्य इस प्रकार हैं|

i) राज्यों के क्षमता निर्माण बढ़ाने के लिए वार्षिक व्यापक कार्रवाई योजना सहित एसएएपी उच्चाधिकार प्राप्त राज्य संचालन समिति द्वारा प्रस्तुत एसएएपी और एसएएपी में सुधार खाके का अनुमोंदन

ii) राज्य/संघ शासित प्रदेशों/मिशन निदेशालय को निधियों का आबंटन और उनको जारी करना|

iii) मिशन की समग्र निगरानी और पर्यवेक्षण

iv) संसाधन जुटाने, निजी वित्तपोषण और भूमि लिवरेजिंग के लिए नये साधनों के सम्बन्ध में राज्य/संघ शासित क्षेत्र/कार्यान्वयन एंजेसियों को सलाह देना|

v) तृतीय पक्ष निगरानी (आईआरएमए) के लिए संगठनों, संस्थानों अथवा एजेंसियों की नियुक्ति की पुष्टि करना|

vi) मिशन का शीघ्र कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए शीर्ष समिति मिशन निदेशक को एक निर्धारित  सीमा के भीतर, कुछेक कार्यों को, जैसा वह उचित समझे, प्रत्योजित कर सकती है|

vii) परियोजना की वास्तविक प्रगति का सीमांकन करना जिसके आधार पर राज्यों को निधियां जारी की जायेंगी|

 

शीर्ष समिति आवश्यकतानुसार किन्तु तीन माह में कम से कम एक बार बैठक अवश्य करेगी| एक राष्ट्रीय मिशन निदेशक होगा जो भारत सरकार के संयुक्त सचिव के पद के स्तर का होगा, जो मिशन सम्बन्धी गतिविधियों के लिए सर्व-कार्य प्रभारी होगा| आवश्यकता पड़ने पर मिशन निदेशक विषय से सम्बन्धित विशेषज्ञों एंव कर्मचारियों से सहायता लेगा| राष्ट्रीय मिशन निदेशक शीर्ष समिति एक सदस्य-सचिव होंगे|

2. राज्य स्तर

राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय उच्च शक्ति प्राप्त संचालन समिति, (एसएचपीएससी) अपनी सम्पूर्ण हैसियित में इस मिशन के कार्यक्रम का संचालन करेगी| एसएचपीएससी की निर्देशात्मक संरचना इस प्रकार है:

  1. मुख्य-सचिव                                अध्यक्ष
  2. प्रधान सचिव                                सदस्य
  3. प्रधान सचिव  (वित्त)                         सदस्य
  4. प्रधान सचिव  (आवास)                       सदस्य
  5. प्रधान सचिव (पर्यावरण एवं वन)                सदस्य
  6. शहरी विकास मंत्रालय के प्रतिनिधि              सदस्य
  7. मिशन निदेशक (यदि नीचे viii  से भिन्न हो, तो)   सदस्य
  8. प्रधान शहरी विकास                          सदस्य सचिव

 

एसएचपीएससी अन्य राज्य सरकार के विभागों/सरकारी संगठनों से सदस्य (सदस्यों ) को सहयोजित कर सकती है और इसके विचार-विमर्श में भाग लेने के लिए इस क्षेत्र में विशेषज्ञों को भी आमंत्रित कर सकती है| एक राज्य मिशन निदेशक होगा जो राज्य सरकार के सचिव के स्तर  का ही  एक अधिकारी होगा जिसे राज्य सरकार द्वारा नामित किया जाता है और जो के कार्यक्रम प्रबंधन यूनिट (पीएमयू) और एक परियोजना विकास और प्रबंधन परामर्शदाता (पीडीएमसी) के साथ कार्य करेगा| परियोजना विकास और प्रबंधन परामर्श दाता की स्थापना के साथ अमृत पूर्वमिशन के अंतर्गत स्थापित कार्यक्रम प्रबंधन यूनिटों और परियोजना कार्यान्वयन यूनिटों को सहायता प्रदान नहीं करेगा| इसके अतिरिक्त, राज्य यह सुनिश्चत करेंगे कि मिशन सहायता की इन संरचनाओं के कार्यों में कोई अतिव्यापन नहीं होगा| यदि किसी पीएमयू को पहले ही सीसीबीपी के अंतर्गत स्थापित कर दिया गया हो तो किसी अन्य पीएमयू की मिशन की निधियों से सहायता नहीं की जायेगी|  एसएचपीएससी के कार्य इस प्रकार है:-

i. एसएलबी के आधार पर अस्थापना में कमियों का पता लगाना, व्यक्तिगत और संस्थागत  क्षमता निर्माण की आवश्यकता, शहरी सुधार के लक्ष्य प्राप्त करने के उपाय, मिशन के शहरों/कस्बों के वित्तीय परिव्ययों इत्यादि को अंतिम रूप देना|
ii. प्रत्येक वर्ष उपलब्ध संसाधनों के आधार पर राज्य के प्राथमिकता वाले शहरों और परियोजनाओं के शहरी स्थानीय निकायों की एसएलआईपी के आधार पर  एसएएपी तैयार करना जैसा कि मिशन के विवरण और दिशानिर्देशों में निर्धारित किया गया है|
iii. राज्य स्तरीय तकनीकी समिति (एसएलटीसी) द्वारा तकनीकी रूप से आंकलित और  संस्वीकृत करने के पश्चात् परियोजनाओं को अनुमोदित करना| सभी परियोजना अनुमोदन, राज्य एचपीएससी द्वारा प्रदान  किये जायेंगे बशतें कि की ये परियोजनाएं अनुमोदित एसएएपी में शामिल हों| शहरी विकास मंत्रालय को किसी भी परियोजना को संस्वीकृति हेतु नहीं भेजा जाएगा| सम्पूर्ण परियोजना अनुमोदन, अधिप्रमाण और निष्पादन प्रक्रिया में राज्य एचपीएसपी यह सुनिश्चित करेगा कि राज्य वित्तीय नियमावली के सभी प्रावधानों का अनुपालन हो|
iv. लघु, मध्यम और दीर्घावधि प्रवाह की योजना बनाना| परियोजनाओं के निधिकरण के लिए संसाधन जुटाने, निजी वित्तपोषण और भूमि बढ़ाने हेतु नवीन तरीकों का पता लगाना|
v. इन दिशानिर्देशों के पैरा 5 में विनिदिष्ट केंद्र सरकार के अनुदान के अतिरिक्त परियोजनाओं हेतु राज्य और शहरी स्थानीय निकाय के अंश के हिस्से को तय करना|
vi. ख़राब गुणवत्ता, पर्यवेक्षण की कमी और अन्य उल्लंघनों की शिकायतों की जाँच-पड़ताल करना| तृतीय पक्ष आकलन कर्त्ताओं और अन्यों के द्वारा कार्य की गुणवत्ता मूल्यांकन की रिपोर्टों को मोनीनिटर करना और अपने स्तर पर कार्रवाई करना\
vii. राष्ट्रीय मिशन निदेशालय को चल रही परियोजनाओं के लिए निधियों की क़िस्त जारी करने हेतु प्रस्ताव संस्तुत करना|
viii. एक वित्तीय मध्यवर्ती संस्था स्थापित करने के लिए अनुवर्ती कार्रवाई, परियोजनों के निष्पादन के लिए केन्द्रीय और राज्य के हिस्से की निधियों को समय पर आबंटित करना और उनको जारी करना|
ix. शीर्ष समिति के अनुमोदनार्थ राज्य/शहरी स्थानीय निकायों में सुधारों के कार्यान्वयन के लिए रोडमैप और उपलब्धियों की सिफारिश करना| राज्य शहरी स्थानीय निकाय स्तर पर प्रतिबद्ध शहरी सुधारों की प्रगति को समीक्षा करना|
x. शहरी स्थानीय निकायों में परियोजना के कार्यान्वयन समेत इस मिशन के कार्यान्वयन की प्रगति को मानीटर करना|
xi. इस मिशन के अंतर्गत स्वीकृत  और पूरी की गई परियोजनाओं के परिणाम और ओएंडएम व्यवस्थाओं को मोनीटर करना|
xii. समय-समय पर क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यकलापों की प्रगति की समीक्षा करना|
xiii. जारी की गई निधियों की समय पर लेखा परीक्षा आयोजित करना और पहले के मिशन तथा नए मिशन से सम्बन्धित विभिन्न लेखा परीक्षा की रिपोर्टों तथा तीसरे पक्ष, परियोजना विकास और प्रबंधन परामर्शदाताओं तथा शहरी स्थानीय निकायों के चुने गए प्रतिनिधियों की रिपोर्टों समेत अन्य रिपोर्टों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्टों की समीक्षा करना|
xiv. इस मिशन के कार्यक्रम के बहेतर नियोजन और कार्यान्वयन के लिए अंतर-संगठन समन्वय और सहयोग स्थापित करना|
xv. राष्ट्रीय मिशन निदेशालय द्वारा उल्लिखित अथवा मिशन के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए किसी भी प्रकार का अन्य प्रासंगिक मामला|
xvi.  न्यायालयों में क़ानूनी मुद्दे/मामले, यदि कोई तो तो उनकी निगरानी करना|

 

3 शहर स्तर

शहरी स्तर पर यूएलबी मिशन के कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायी होंगे| म्युनिसिपल आयुक्त एसएलआईपी को समय पर तैयार करने को सुनिश्चित करेंगे| युएलबी एसएएपी में अनुमोदित परियोजनाओं के लिए डीपीआर तथा बोकी से सम्बन्धित दस्तावेज तैयार करेंगे| युएलबी डीपीआर और एसएलटीसी/एचपीएससी को अग्रेषित करेंगे| शहरी स्थानीय निकाय वित्तीय नियमों और विनियमों के आधार पर कार्यान्वयन एजेसियों नियुक्त करेंगी तथा उन्हें कार्य सौंपने के बाद इसे समय पर पूरा करना सुनिश्चित करेगी| इसके लिए, युएलबी पीडीएमसी से खंड 8 के आधार पर इन क्रियाकलापों को करने के लिए सहयता लेगा| यूएलबी परियोजना लागत में वृद्धि के बिना परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए हितधारकों के बीच समन्यव और सहयोग बनाने के लिए भी जिम्मेदार होगा|

परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्टों का मूल्यांकन

एसएचपीएससी एक राज्य स्तरीय तकनीकी समिति (एसएलटीसी) का गठन करेगा जिसमें सम्बन्धित विभागों/संगठनों के प्रतिनिधि होंगे जो डीपीआर का तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन करेगा| एसएलटीसी की संरचना नीचे दिए गये अनुसार है:

  1. प्रधान सचिव (शहरी विकास)  सचिव (शहरी विकास)     अध्यक्ष
  2. जल-संसाधन /जल विभाग                           सदस्य
  3. राजस्व/भूमि विभाग                                सदस्य
  4. नगर विकास बोर्ड                                  सदस्य
  5. स्लम विकास बोर्ड                                  सदस्य
  6. विद्युत विभाग                                     सदस्य
  7. सीपीएचईईओ, शहरी विकास मंत्रालय  के प्रतिनिधि      सदस्य
  8. वित्त विभाग                                      सदस्य
  9. मिशन निदेशक (यदि अध्यक्ष/सदस्य-सचिव नहीं हैं)      सदस्य
  10. तकनीकी प्रमुख (अर्थात् मुख्य अभियंता) शहरी-जल बोर्ड/ परिवहन परियोजनाओं-सड़क परिवहन निगम के लिए प्रबंध निदेशक. कार्यकारी निदेशक सदस्यसचिव

 

2 एसएचपीएससी यदि आवश्यक समझा जाएँ तो अन्य सम्बन्धित राज्य सरकार के विभागों/सरकारी संगठनों से एसएलटीसी में और अधिक सदस्यों को नामित कर सकता है| एसएलटीसी के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं;

i) तकनीकी मानदंडों जैसे इस परियोजना के कार्यक्षेत्र, उद्देश्य और अंतिम कार्य, आंतरिक बेंचमार्क (आइबीएम) निर्णायक मूलभूत मानदंडों/बोली दस्तावेजों/मूल्यांकन मानदंड  और भुगतान कर्यक्रम का अनुमोदन करना| इस उद्देश्य से एसएलटीसी सम्बन्धित क्षेत्र शहरी विकास मंत्रालय द्वारा जारी नियम पुस्तिकाओं, दिशानिर्देशों और सलाहों पर विचार करेगा और डीपीआर में उसका अनुपालन सुनिश्चित करेगा|

ii) लचीलेपन को शामिल करना और आपदाओं से परियोजनों को सुरक्षित रखना तथा यह सुनिश्चित करना की डिजायन में आपदा सुरक्षा इंजीनियरिंग और संरचनात्मक मानदंड शामिल हों|

iii) तकनीकी स्वीकृति देते समय, एसएलटीसी यह सुनिश्चित करेगा की आकस्मिक निधि अथवा लागत में वृद्धि अनुमान में शामिल न हों और जेएनएनयूआरएम के सभी तकनीकी और वित्तीय मानदंडों का अनुमान तैयार करने, परियोजना की तकनीकी स्वीकृति निविदा स्वीकार करने, विस्तार आदि का पालन किया जाएँ|

iv) तकनीकी स्वीकृति देते समय, एसएलटीसी रिटर्न की आंतरिक दर (आईआरआर)-दोनों एफआईआरआर और ईआईआरआर एंव पूंजीगत व्यय की आवर्ती लागत (आरसीसीई) की भी जाँच करेगा|

v) निविदाओं की स्वीकृति देना|

vi) आईआरएम की रिपोर्टों और अन्य गुणवत्ता रिपोर्टों पर सुधारात्मक कार्रवाई करना|

vii) अनुलग्नक 6.1 में दी गई परियोजना निधि अनुरोध रिपोर्ट का विश्लेषण करना अरु लागत में बिना किसी वृद्धि के परियोजनाओं को समय पर पूरा करना सुनिश्चित करने के लिए सुधारात्मक कार्रवाई करना|

viii) पीडीएमसी नियुक्त करना|

शहरी सुधार

  1. राज्यों/संघ शासित प्रदेशों के आवास एवं शहरी विकास मंत्रियों के साथ दिनांक 2 और 3 जुलाई 2014 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया था| राष्ट्रीयसम्मेलन के दौरान  शहरी शासन और सभी के लिए आवास पर राष्ट्रीय  घोषणा को अपनाना गया| सेवा प्रदायगी में सुधार, संसाधन जुटाना और नगरपालिका के कामकाज को अधिक पारदर्शी बनाना और अधिकारीयों को और जवाबदेह बनाने सम्बन्धी सुधार राष्ट्रीय घोषणा की भावना पर आधारित हैं|
  2. विशेष रूप से मिशन 11 सुधारों को अधिदेषित करता है जिन्हें सभी राज्यों और 500 मिशन शहरों को चार वर्ष की अवधि के अंदर कार्यन्वित करना होगा| राज्य एसएएपी के एक भाग के रूप में कार्यान्वयन का खाका प्रस्तुत करना होगा| जिसमें राज्य aruऔर यूएलबी दोनों स्तरों पर कार्यान्वित किये जाने वाले सुधार शामिल होंगे|
  3. पहले मिशन के दौरान, सुधारों के पूरा न करने पर 10% एसीए रोक लिया जाता था लेकिन, अमृत में राज्यों/यूएलबी के लिए प्रोत्साहन के रूप में 10% निधियां अलग से रखकर सुधार कार्यान्वयन को प्रोत्साहित किया गया है| प्रोत्साहन निधि वार्षिक आवंटित केन्द्रीय अंश के अतिरिक्त होगी| प्रोत्साहन यूएलबी द्वारा किये गए स्व-मूल्यांकन एसएएपी का एक भाग होगा और इसकी विधि अनुलग्नक 2 (सारणी 5.5)  में ही गई है|

क्षमता निर्माण

1. मिशन मोड में परियोजनाओं के कार्यान्वयन और शहरी सुधार को प्राप्त करने के लिए यूएलबी हेतु राज्यों द्वारा व्यापक क्षमता निर्माण कार्यकलाप आयोजित जाएँगी| वे एसएएपी के भाग के रूप में वार्षिक क्षमता निर्माण योजना शहरी विकास मंत्रालय  के अनुमोदनार्थ प्रस्तुत करेंगे| मिशन निदेशक द्वारा शहरी विकास मंत्रालय  के नये मिशों की प्राथमिकताओं के लये व्यापक क्षमता निर्माण कार्यक्रम (सीसीबीपी) पुनः शुरू किया जायेगा| इस योजना के दो संघटक होंगे- व्यक्तिगत एवं संस्थागत क्षमता निर्माण
2. व्यक्तिक क्षमता निर्माण: मुख्या विशेषताएं मांग आधारित आवधिक प्रशिक्षण, व्यवसायों और पदाधिकारियों की पहचान, प्रशिक्षण परिणामों का स्वतंत्र मूल्यांकन तथा निगरानी और पीयर नेटवर्किंग हैं| व्यक्तिगत क्षमता निर्माण में निम्नलिखित प्रकार के कार्यकलाप शामिल होंगे:

  • प्रशिक्षण आवश्यकता मूल्यांकन (टीएनए) पर आधारित कार्यनीतिक प्रशिक्षण
  • प्रदर्शित दौरे
  • कार्यशालाएं, सेमिनार, अनुसंधान अध्ययन और प्रलेखीकरण
  • कोचिंग पर आधारित व्यक्तिगत क्षमता निर्माण और पियरों तथा परामर्शदाताओं (मेंटर) से कार्य- सम्बद्ध सहयता|
  • आईईसी सामग्री तैयार करने सहित स्पष्टता

3. संस्थागत क्षमता निर्माण : परामर्शदाता फर्मों और अन्य संस्थाओं की सहायता लेते हुए यूएलबी के संस्थागत क्षमता निर्माण

परियोजनाओं की निगरानी

राज्य और यूएलबी स्तर पर मिशन की वास्तविक निगरानी की जाएगी| इसके अतिरिक्त, सूचना और डाटा को पब्लिक डोमेन में नागरिकों के साथ साझा किया जायेगा तथा तृतीय पक्ष निगरानी तथा समीक्षा को बढ़ावा दिया जायेगा| आईआरएमए) तिमाही रिपोर्ट यूएलबी/पैरास्तेटल तथा एसएलटीसी को प्रस्तुत करेगा| यूएलबी अरु एसएलटीसी की टिप्पणियों को एसएचपीएससी द्वारा जाँच की जाएगी| राज्य मिशन निदेशक अमृत में निधियों का दावा करते समय आईआरएमए की रिपोर्ट पर की गई कार्रवाई प्रस्तुत करेगा| इसी प्रकार, आईआरएमए सुधार कार्यान्वयन का छिमाही मूल्यांकन करेगा| निश्चित ही निगरानी में निम्नलिखित तत्व शामिल रहेंगे:

  1. शीर्ष समिति द्वारा सभी परियोजनाओं की आवधिक निगरानी और समीक्षा की जाएगी| यह विभिन्न बाह्य और पैनलबद्ध एजेंसियों, आंतरिक लेखापरीक्षाकोण के साथ-साथ सी एन्ड एजी और राज्य एजी द्वारा की जाने वाली लेखापरीक्षाओं के अधीन होगी|
  2. शहरी विकास मंत्रालय, राज्यों और यूएलबी द्वारा सूचना प्रोद्योगिकी आधारित समाधानों का प्रयोग करते हुए आवधिक लक्ष्यों और अन्य मुख्य संकेतकों का पता लगाना जायेगा तथा निधियां जारी करने को एसएएपी में दिए गए मुख्य निष्पादन लक्ष्यों की उपलब्धि के साथ जोड़ा जायेगा| नेट आधारित ऑन लाइन वास्तविक निगरानी, निर्माण स्थल के साइबर दौरे की सहयता से, अधिमानतः मोबाइल के कैमरों का प्रयोग करके की जाएगी तथा तृतीय पक्ष समीक्षा और वास्तविक मूल्यांकित भी किया जायेगा|
  3. राज्य स्तर पर, एचपीएससी प्रताव स्तर पर परियोजनाओं की विस्तृत संवीक्षा और निष्पादन के दौरान निगरानी करेगा|
  4. राज्य एचपीएससी अनुलग्नक 4 में दिया गया तिमाही स्कोर कार्ड प्रस्तुत करेगा|
  5. मिशन, शहरी बुनियादी सेवाओं में एसएलबी के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए राष्ट्रीय निष्पादन निगरानी कक्ष की सहायता करेगा|
  6. यूएलबी अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों और यूएलबी निकायों तथा मोबाइल और ई-ग्रुपों का प्रयोग करते हुए प्रत्यक्ष नागरिक फीडबैक के माध्यम से परियोजनाओं के निकट निगरानी करेगा| वेबसाइट के माध्यम से लोक प्रकटीकरण का एक ठोस संघटक भी निर्मित किया जायेगा|
  7. परियोजनाओं के लिए और सुधारों के लिए आईआरएमए द्वारा तृतीय पक्ष समीक्षा की जाएगी| इस एजेंसी का चयन विशेषज्ञ/तकनीकी एजेंसियों में से किया जायेगा|

 

जिला स्तरीय समीक्षा और निगरानी समिति (डीएलआरएमसी)

  1. जिला स्तरीय समीक्षा और निगरानी समिति (डीएलआरएमसी) का गठन किया जायेगा तथा संसद सदस्य जिला क्लैक्टर के साथ सह-अध्यक्ष होंगे| डीएलआरएमसी अमृत परियोजनाओं की निगरानी व समीक्षा

 

लेखापरीक्षा और मुकदमें सम्बन्धी मामलें

1. राज्य मिशन निदेशालय सी एन्ड एजी लेखापरीक्षा और न्यायलयों/अधिकरणों और मध्यस्थों के समक्ष मामलों सहित मुकदमेबाजी के सभी मामलों के लिए उत्तरदायी होगा| राज्य मिशन निदेशालय/शहरी विकास मंत्रालय की ओर से केंद्र सरकार के हितों की रक्षा करने के लिए राज्य मिशन निदेशालय उत्तरदायी होगा|

 

जेएनएनयूआरएम की अपूर्ण परियोजनाएं

1. अम्रत के अंतर्गत कवर की जाने वाली जेएनएनयूआरएम की अपूर्ण परियोजनाओं की कवरेज के बारे में विस्तृत अनुदेश शहरी विकास मंत्रालय द्वारा अलग से जारी किये जायेंगे|

अनुलग्नक और तालिकाएँ

अनुलग्नक 1; अम्रत शहरों के लिए सुधार उपलब्धि और समय सीमा

क्र सं,

प्रकार

उपलब्धियां

कार्यान्वयन की समय सीमा

1

ई-शासन

डिजिटल शहरी स्थानीय निकाय

1. शहरी स्थानीय निकाय

बेबसाईट का निर्माण

2 ई-समाचार पत्र का प्रकाशन डिजिटल इंडिया पहल

3डिजिटल इंडियाको सहायता प्रदान करना (डक्टिंग पीपीपी मोड अथवा यूएलबी द्वारा स्वयं किया जा सकता है|

 

 

6 महीने

 

 

 

 

6 महीने

 

 

6 महीने

 

 

ई-मास के साथ कवरेज (सॉफ्टवेयर की शुरुआत करने की तारीख से)

  • जन्म, मृत्यु और विवाह का पंजीकरण
  • जल एंव सीवरेज प्रभार
  • शिकायत निवारण
  • सम्पत्ति कर,
  • विज्ञापन कर,
  • लाइसेंस जारी करना
  • भवन निर्माण के अनुमति
  • परिवर्तन
  • वेतन
  • पेंशन

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

24 महीने

 

 

  • ई-प्रमाण
  • कार्मिक कर्मचारी प्रबंधन और
  • परियोजना प्रबंधन

 

 

36 महीने

2

म्युनिसिपल संवर्ग की संविधान और व्यावसायिकता

  • म्युनिसिपल संवर्ग की स्थपाना
  • संवर्ग से जुड़ा प्रशिक्षण
  • यूएलबी में प्रशिक्षुओं को लगाने लगाने और कार्यान्वयन के लिए निति
  • राज्य यूएलबी की आबादी, वेतन  सम्बन्धी आतंरिक संसाधनों और व्यय के आधार पर म्युनिसिपल पदाधिकारियों की संख्या की ठीक करने के लिए निति तैयार करेगी

24 महीने

24 महीने

12 महीने

36 महीने

3

दोहरी प्रविष्ट लेखा में वृद्धि

  1. पूर्णतः दोहरी प्रविष्ट लेखा प्रणाली में परिवर्तन  करना और वित्तीय वर्ष 2012-13  से लेखा परीक्षा –पत्र प्राप्त करना
  2. आंतरिक लेखा परीक्षा की नियुक्ति
  3. वेबसाइट पर वार्षिक विवरण को प्रकशित करना

 

12 महीने

 

 

 

 

24 महीने प्रति वर्ष

 

4

शहरी आयोजना और शहरी स्तरीय योजनायें

  1. जीआईएस का उपयोग करके मास्टर प्लान तैयार करना
  2. सेवा स्तर सुधार योजनाएं (एसएलआईपी), राज्य वर्षिक कार्य योजनायें (एसएएपी) तैयार करना
  3. शहरी विकास प्राधिकरणों की स्थपाना
  4. 5 वर्षो में शहरों के हरित क्षेत्र को 15% तक उत्तरोत्तर वृद्धि करने के लिए कार्य योजना तैयार करना|
  5. अम्रत शहरों में प्रत्येक वर्ष कम से कम एक शिशु पार्क का विकास करना
  6. जन सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपीपी) पद्धति आधार पर पार्कों, खेल मैदानों और मनोरंजन क्षेत्रों के रखरखाव के लिए प्रणाली स्थापित करना|
  7. सुस्थिर आवास के लिए राष्ट्रीय मिशन में दिए गए मानदंडों का कार्यान्वयन करने के लिए एक राज्य स्तरीय नीति तैयार करना

48 महीने

 

6 महीने

 

 

 

 

 

36 महीने

 

6 महीने

प्रति वर्ष

 

 

12 महीने

 

 

24 महीने

 

 

5

निधियों और कार्यों का हस्तांतरण

  1. 14वें वित्त आयोग की निधियों और कार्यों का अंतरण सुनिश्चित करना|
  2. राज्य वित्त आयोग (एसएफसी) की नियुक्ति करना अरु निर्णय लेना
  3. समय-सीमा के अतर्गत एसएफसी के सिफारिशों का कार्यान्वयन करना|
  4. सभी 18कार्यों यूएलबी को आंतरिक करना|

6 महीने

 

 

 

12 महीने

 

 

18 महीने

 

 

 

12 महीने

 

6

भवन उप-नियमों की पुनरीक्षा

  1. समय-समय पर भवन उप-नियमों का संसोधन
  2. 500 वर्ग में सौर छत बनाने के लिए के नीति और कार्य योजना तैयार करें
  3. 300 वर्ष मी. और उससे अधिक क्षेत्र वाले प्लोटों पर निर्मित सभी वाणिज्यिक, सार्वजनिक भवनों और नए भवनों में वर्षा जल संचयन संरचनाओं के निर्माण के लिए एक नीति और कार्य योजना तैयार करें
  4. निर्माण अनुमति के लिए एकल खिड़की मंजूरी सृजित करना

12 महीने

 

 

12-24 महीने

 

 

12-24 महीने

 

 

 

 

 

 

 

 

12 महीने

 

7

राज्य स्तर पर मध्यस्थ संस्था की व्यवस्था करना

  1. वित्तीय मध्यस्थ संस्था की स्थापना और उसका संचालन-पूल वित्त, बाह्य निधियां प्राप्त करना, म्युनिसिपल बांड जारी करना

12-18 महीने

 

 

 

क्र सं,

प्रकार

उपलब्धियां

कार्यान्वयन की समय सीमा

8 क)

म्युनिसिपल कर और  शुल्क में सुधार

  1. कम से कम 90% कवरेज
  2. कम से कम 90% एकत्रीकरण
  3. समय-समय पर सम्पत्ति कर का संशोधन, प्रभार और अन्य शुल्क लगाने के लिए नीति बनाना
  4. बेवसाइट पर कर ब्यौरों की मांग एकत्रीकरण पुस्तिका (डीसीबी) डालना
  5. गतिशीलता मूल्य निर्धारण मोडूयल के साथ विशेष क्षमता को प्राप्त करना|

 

 

 

 

 

 

12 महीने

 

ख)

उपभोक्ता प्रभार लगाने और एकत्रित करने में सुधार

  1. व्यक्तिगत और संस्थागत आकलनों के लिए उपभोक्ता प्रभार पर निति को अपनाना जिसमें जल के उपयोग हेतु कमजोर वर्गों के हितों पर ध्यान देने के लिए शामिल किये गए उपायों हेतु भिन्न दर लगाई जाती है|
  2. जल हानि को २०% तक कम करने के लिए कार्य योजना बनाना और बेवसाइट पर प्रकाशित करना
  3. उपभोक्ता प्रभारों के लिए पृथक खाते
  4. कम से कम 90% बिलिंग
  5. कम से कम 90% एकत्रीकरण

 

 

12 महीने

 

9

क्रेडिट रेटिंग

यूएलबी की  क्रेडिट रेटिंग पूरा करना

18 महीने

10

उर्जा और जल लेखा परीक्षा

  1. उर्जा (स्ट्रीट लाईट) और जल लेखा परीक्षा (गैर राजस्व जल अथवा हानि लेखा परीक्षा सहित)
  2. एसटीपी और डब्ल्यूटीपी को अधिक उर्जा सक्षम बनाना
  3. उर्जा सक्षम लाइटों का उपयोग स्ट्रीट लाइटों को उर्जा खपत के अनुकूल बनाना और नवीकरणीय उर्जा पर निर्भरता बढ़ाना |
  4. हरित भवनों के लिए प्रोत्साहन देना (उदाहरणार्थ, भवन अनुमति विकास प्रभारों के सम्बन्ध में सम्पत्ति कर अथवा प्रभारों में छुट)

12 महीने

 

 

 

12 महीने

 

 

12 महीने

 

 

11

स्वच्छ भारत मिशन

  1. खुले में शौच का उन्मूलन
  2. अपशिष्ट एकत्रीकरण (100%)
  3. अपशिष्ट को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना (100%)
  4. वैज्ञानिक निपटान (100%)

36 महीने

 

 

अनुलग्नक 2, राज्य वार्षिक कार्य योजना का प्रारूप

अटल नवीनकरण और शहरी परिवर्तन मिशन

राज्य का नाम -----------

समय अवधि (वित्त वर्ष )-----

इस रिपोर्ट में शामिल है:

  1. सार: राज्य की समेकित अपेक्षित राशि और प्रत्येक हितधारक का अंश
  2. सेवा स्तरीय सुधार योजना
  3. एसएलआईपी से तैयार की गई राज्य वार्षिक कार्य योजना (एसएएपी)
  4. प्रशासनिक और कार्यलय व्यय (ए एंड ओई) के लिए कार्य योजना
  5. सुधार कार्यान्वयन के लिए कार्य योजना
  6. राज्यों के लिए मूल्यांकन

 

राज्य वार्षिक कार्य योजना(एसएएपी) का सार

राज्य की समेकित अपेक्षित राशि और प्रत्येक हितधारक का अंश

 

तालिका संख्या

विषय-वस्तु

1.1

अमृत में शहरी विकास मंत्रालय का कुल आबंटन का ब्यौरा

1.2.1

क्षेत्रावार प्रस्तावित कुल परियोजना धनराशि और हिस्सेदारी पद्धति

1.2.2

कुल धनराशि हिस्सेदारी पद्धति का ब्यौरा

1.3

परियोजनाओं पर धनराशियों का उपयोग: चालू और नई

1.4

सेवा स्तर बेंचमार्क प्राप्त करने के लिए योजना

 

राज्य का नाम ----------- वित्त वर्ष ------

तालिका 1.1: अमृत में शहरी विकास मंत्रालय का कुल आबंटन का ब्यौरा

राज्य को आबंटित कुल केन्द्रीय धनराशि

प्रशासनिक कार्यालय व्यय (कॉलम 1 में दिए गये कुल के 8 प्रतिशत की दर से) के लिए केन्द्रीय निधियों का आबंटन

अमृत  के लिए निधियों  का आबंटन  (केन्द्रीय अंश)

कॉलम 4 में अमृत  के लिए कॉलम 3 को 3 से गुणा करना (वार्षिक आबंटन-केन्द्रीय अंश का तीन गुना किये जाने का परियोजना प्रस्ताव)

समान (कॉलम 4) राज्य/यूएलबी का अंश जोड़ना

कुल लागत वार्षिक आकार

(कॉलम- 2+3+4+5)

1

2

3

4

5

6

 

 

 

 

 

 

 

राज्य का नाम ----------- वित्त वर्ष ------

तालिका 1.2.1: क्षेत्रावार प्रस्तावित कुल परियोजना धनराशि और हिस्सेदारी पद्धति

 

क्र.सं.

क्षेत्र

परियोजनाओं की संख्या

केंद्र

राज्य

यूएलबी

अभिसरण

अन्य

कुल

1.

जलापूर्ति

 

 

 

 

 

 

 

2.

सीवरेज और सेफ्टेज प्रबंधन

 

 

 

 

 

 

 

3.

जल निकास

 

 

 

 

 

 

 

4.

अन्य परिवहन

 

 

 

 

 

 

 

5.

अन्य

 

 

 

 

 

 

 

6.

सकल योग

 

 

 

 

 

 

 

 

 

तालिका 1.2.2: कुल धनराशि हिस्सेदारी पद्धति का ब्यौरा

 

क्र.सं.

क्षेत्र

केंद्र

राज्य

यूएलबी

समाभिरूपता

अन्य

कुल

 

 

मिशन

14वां   वित्त आयोग

अन्य

कुल

14वां   वित्त आयोग

अन्य

कुल

 

 

 

 

जलापूर्ति

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

सीवरेज और सेफ्टेज प्रबंधन

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

जल निकास

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अन्य परिवहन

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अन्य

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

सकल योग

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

तालिका 1.3: परियोजनाओं पर धनराशियों का उपयोग: चालू और नई

 

क्र.सं.

क्षेत्र

कुल परियोजना

विगत वर्ष से प्रतिबद्ध व्यय (यदि कोई हो)

चालू वित्त वर्ष दौरान प्रस्तावित व्यय


 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

राज्य

यूएलबी

राज्य

यूएलबी

राज्य

यूएलबी

 

 

 

14वां   वित्त आयोग

अन्य

कुल

14वां   वित्त आयोग

अन्य

कुल

14वां   वित्त आयोग

अन्य

कुल

14वां   वित्त आयोग

अन्य

कुल

14वां   वित्त आयोग

अन्य

कुल

14वां   वित्त आयोग

अन्य

कुल

1

जलापूर्ति

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

2

सीवरेज और सेफ्टेज प्रबंधन

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

3

जल निकास

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

4

अन्य परिवहन

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

5

अन्य

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

6

सकल योग

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

तालिका 1.4 सेवा स्तर बेंचमार्क प्राप्त करने के लिए योजना

 

प्राथमिकता वाली परियोजनाएं

कुल परियोजना लागत

संकेतक

आधार रेखा

मास्टर प्लान पर आधारित वार्षिक लक्ष्य (आधार रेखा कीमत से वृद्धि)

वित्त वर्ष 2016

वित्त वर्ष 2017

वित्त वर्ष 2018

वित्त वर्ष 2019

वित्त वर्ष 2020

एच 1

एच 2




 

जलापूर्ति

 

1.प्रत्यक्ष जलापूर्ति कनेक्शनों की पारिवारिक स्तर कवरेज

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

2जलापूर्ति की प्रति व्यक्ति मात्रा

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

3.आपूर्ति किये गए जल की गुणवत्ता

 

 

 

 

 

 

 

 

सीवरेज और सेफ्टेज प्रबंधन

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

शौचालयों की कवरेज (व्यक्तिगत एवं समुदाय)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

5.सीवरेज नेटवर्क सेवाओं की कवरेज

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

6सीवरेज संग्रहण की क्षमता

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

7.शोधन की क्षमता

 

 

 

 

 

 

 

 

जल विकास

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

8.जल निकास नेटवर्क कवरेज

 

 

 

 

 

 

 

 

शहरी परिवहन

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

9.शहर में शहरी परिवहन  की सेवा कवरेज

 

 

 

 

 

 

 

 

अन्य

 

10. प्रति हजार जनसंख्या शहरी परिवहन की उपलब्धता

 

 

 

 

 

 

 

 

 

शहरी स्थानीय निकाय स्तर

  1. सेवा स्तर सुधार योजना (एसएलआईपी)

तालिका

विषय-वस्तु

2.1

वर्तमान मिशन अवधि (वित्त विर्ष 2015-16 से  2019-20  तक) के दौरान सभी को जलापूर्ति सीवरेज का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए सभी परियोजनाओं की मास्टर प्लान

2.2

वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान अम्रत के अंतर्गत प्रस्तावित और नियोजित प्राथमिकता प्राप्त परियोजनाओं का ब्यौरा क्षेत्रावार

2.3

प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के लिए प्रस्तावित वित्तपोषण और हिस्सेदारी पद्धति : क्षेत्रावार

2.3.2

भारत सरकार/राज्य/शहरी स्थानीय निकाय से धनराशि स्त्रोत (सभी क्षेत्रों के लिए)

2.4

निवेशों का वर्षवार ब्यौरा (सभी क्षेत्रों के लिए)

2.5

सेवा स्तर बेंचमार्क प्राप्त  करने के लिए योजना

2.6

पिछले वर्ष के दौरान मिशन के अंतर्गत परियोजनाओं की वास्तविक और प्रगति की सूचना  देना

 

तालिका 2.1 वर्तमान मिशन अवधि (वित्त विर्ष 2015-16 से  2019-20  तक) के दौरान सभी को जलापूर्ति सीवरेज का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए सभी परियोजनाओं की मास्टर प्लान

 

क्र.सं.

परियोजना का नाम और कोड (शहर में सभी को जलापूर्ति और सीवरेज अलग से मुहैया कराने का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए सभी परियोजनाओं की सूची )

अवसंरचनात्मक सुधार

 

 

सेवा स्तरों पर परिवर्तन

 

 

प्राथमिकता संख्या

वर्ष जिसमें कार्यान्वयन किया जाना है

जिसमें पूर्ण किये जाने का प्रस्ताव

अनुमानित लागत (राशि रूप में)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

सकल योग

 

 

 

 

2.2  एसएलआईपी - चालू वित्त वर्ष के दौरान अम्रत के अंतर्गत प्रस्तावित प्राथमिकता वाली   परियोजनाओं का ब्यौरा क्षेत्रा-वार

विवरण/क्षेत्र

परियोजना का नाम और कोड

भौतिक घटक

अवसंरचनात्मक सुधार

 

 

 

सेवा स्तरों पर परिवर्तन

 

 

 

संकेतक

मौजूदा (जैसा है)

बाद में (होना है)

अनुमानित लागत (राशि रु०)

जलापूर्ति

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

सीवरेज और सेफ्टेज प्रबंधन

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

जल निकास

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

शहरी परिवहन

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अन्य

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

सकल योग

 

 

 

 

 

 

 

तालिका:2.3.1 एसएलआईपी-  प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के लिए प्रस्तावित वित्तपोषण और हिस्सेदारी पद्धति : क्षेत्रावार

क्षेत्र

कुल परियोजना

अंश



भारत सरकार

राज्य

यूएलबी

अन्य

कुल

जलापूर्ति

 

 

 

 

 

 

सीवरेज और सेफ्टेज प्रबंधन

 

 

 

 

 

 

जल निकास

 

 

 

 

 

 

शहरी परिवहन

 

 

 

 

 

 

अन्य

 

 

 

 

 

 

सकल योग

 

 

 

 

 

 

 

तालिका 2.3.2 एसएलआईपी- भारत सरकार/राज्य/शहरी स्थानीय निकाय से धनराशि स्त्रोत (सभी क्षेत्रों और प्राथमिकता प्रदत्त परियोजनाओं के लिए)

स्रोत

अनुदान(केंद्र/राज्य)

स्वनिधि (राज्य/यूएलबी)





 

 

 

 

14वां वित्त आयोग (राज्य

ऋण(केंद्र/राज्य/अन्य)

अन्य (सार्वजानिक निजी भागीदारी पीपीपी)

समाभिरूपता केंद्र/राज्य/राज्य यूएलबी)

कुल

भारत सरकार

 

 

 

 

 

 

 

राज्य

 

 

 

 

 

 

 

शहरी स्थानीय निकाय

 

 

 

 

 

 

 

कुल

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

तालिका: 2.4 एसएलआईपी -निवेशों का वर्षवार ब्यौरा (सभी क्षेत्रों के लिए)

क्षेत्र

अंश

भारत सरकार

राज्य

यूएलबी

अन्य

कुल

पिछले वर्ष तक अनुमोदित परियोजनाओं की कुल लागत (क)

 

 

 

 

 

पिछले वर्ष के दौरान प्रस्तावित परियोजनाओं की लागत (ख)

 

 

 

 

 

प्रतिबद्ध व्यय (घ) = (क+ ख +ग)

 

 

 

 

 

चालू वित्त वर्ष के दौरान प्रस्तावित व्यय (नई और पुरानी परियोजना) (ड.)

 

 

 

 

 

शेष राशि को अगले वित्तीय वर्ष में लिया जाएगा  (च) = (घ)- (ड.)

 

 

 

 

 

 

तालिका: 2.5 एसएलआईपी - सेवा स्तर बेंचमार्क प्राप्त  करने के लिए योजना

प्रतावित  परियोजनाएं

कुल परियोजना लागत

संकेतक

आधार रेखा

मास्टर प्लान पर आधारित वार्षिक लक्ष्य (आधार रेखा कीमत से वृद्धि)

वित्त वर्ष 2016

वित्त वर्ष 2017

वित्त वर्ष 2018

वित्त वर्ष 2019

वित्त वर्ष 2020

एच 1

एच 2




 

जलापूर्ति

 

 

1.प्रत्यक्ष जलापूर्ति कनेक्शनों की पारिवारिक स्तर कवरेज

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

2जलापूर्ति की प्रति व्यक्ति मात्रा

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

3.आपूर्ति किये गए जल की गुणवत्ता

 

 

 

 

 

 

 

 

सीवरेज और सेफ्टेज प्रबंधन

 

 

शौचालयों की कवरेज (व्यक्तिगत एवं समुदाय)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

5.सीवरेज नेटवर्क सेवाओं की कवरेज

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

6सीवरेज संग्रहण की क्षमता

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

7.शोधन की क्षमता

 

 

 

 

 

 

 

 

जल विकास

 

 

8.जल निकास नेटवर्क कवरेज

 

 

 

 

 

 

 

 

शहरी परिवहन

 

 

9.शहर में शहरी परिवहन  की सेवा कवरेज

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

10. प्रति हजार जनसंख्या शहरी परिवहन की उपलब्धता

 

 

 

 

 

 

 

 

अन्य

 

तालिका 2.6 एसएलआईपी- गत वर्ष के दौरान अम्रत के अंतर्गत परियोजनाओं की भौतिक तथा वित्तीय प्रगति की सुचना देना

परियोजना का नाम

पिछले वर्ष का लक्ष्य

पिछले वर्ष के उपलब्धि

अन्तर

अंतर का कारण


भौतिक %

वित्तीय %

भौतिक %

वित्तीय %

भौतिक %

वित्तीय %

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

राज्य स्तरीय

  1. एसएलआईपीएस से प्राप्त की गई राज्य वार्षिक कार्य योजना (एसएएपी)

 

तालिका संख्या

विषय

3.1

तालिका 2.1 के आधार पर वर्तमान मिशन अवधि के दौरान सार्वभौमिक कवरेज प्राप्त करने के लिए सभी परियोजनाओं का मास्टर प्लान ( 2015-16  से 2019-20 तक )

3.2

राज्य में प्रत्येक शहरी स्थानीय निकाय के लिए संक्षिप्त  निवेशों का क्षेत्र वार व्यौरा

3.3

सभी क्षेत्रों के लिए निधियों का शहरी स्थानीय निकाय-वार स्रोत

3.4

सभी क्षेत्रों के लिए निवेशों का वर्षवार अंश (यूएलबी-वार)

3.5

सेवा-स्तरीय मानदंडों को प्राप्त करने के लिए राज्य-स्तरीय योजना

3.6

भौतिक और वित्तीय प्रगति के लिए राज्य –स्तरीय कार्य योजना

 

तालिका 3.1 के आधार पर वर्तमान मिशन अवधि दौरान सार्वभौमिक कवरेज को प्राप्त करने के लिए सभी परियोजनाओं के ब्यौरे का मास्टर प्लान ( 2015-16  से 2019-20 तक )

क्र. सं.

शहरी स्थानीय निकाय

सार्वभौमिक कवरेज को प्राप्त करने के लिए सभी परियोजनाओं की कुल संख्या

अनुमानित लागत

सार्वभौमिक कवरेज को प्राप्त किये जाने वाले वर्षों की संख्या

1

2

3

4

5

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

तालिका 3.2 एसएएपी –राज्य में सभी शहरी स्थानीय निकायों के लिए समेकित निवेशों का क्षेत्रावार ब्यौरा

शहर का नाम

जलापूर्ति

सीवरेज और सेफ्टेज प्रबंधन

जल विकास

शहरी परिवहन

अन्य

सुधार

कुल

1

2

3

4

5

6

7

8

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

कुल परियोजना निवेश

प्रशासनिक और अन्य व्यय

सकल योग

 

तालिका : 3.3 एसएएपी – सभी क्षेत्रों के लिए निधियों शहरी स्थानीय निकाय क्षेत्रावार ब्यौरा

क्र.सं.

केंद्र

राज्य

यूएलबी

अभिसरण

अन्य (अर्थात् प्रोत्साहन

कुल

 

14वां   वित्त आयोग

अन्य

कुल

14वां   वित्त आयोग

अन्य

कुल

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

कुल

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

सकल योग

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

तालिका 3.4 एसएएपी- सभी क्षेत्रों के लिए निवेशों का वर्ष-वार अंश (यूएलबी-वार)

क्र.सं.

शहर का नाम

कुल परियोजना

विगत वर्ष से प्रतिबद्ध व्यय (यदि कोई हो)

चालू वित्त वर्ष दौरान प्रस्तावित व्यय

अगले वित्तीय वर्षों के लिए शेष धन अग्रेनीत किया जाए

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

राज्य

यूएलबी

राज्य

यूएलबी

राज्य

यूएलबी

 

 

 

14वां   वित्त आयोग

अन्य

कुल

14वां   वित्त आयोग

अन्य

कुल

14वां   वित्त आयोग

अन्य

कुल

14वां   वित्त आयोग

अन्य

कुल

14वां   वित्त आयोग

अन्य

कुल

14वां   वित्त आयोग

अन्य

कुल

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

तालिका 3.5 एसएएपी –सेवा स्तरीय मानदंडों को प प्राप्त करने के लिए राज्य स्तरीय योजना

प्राथमिकता वाली परियोजनाएं

कुल परियोजना लागत

संकेतक

आधार रेखा

मास्टर प्लान पर आधारित वार्षिक लक्ष्य (आधार रेखा कीमत से वृद्धि)

वित्त वर्ष 2016

वित्त वर्ष 2017

वित्त वर्ष 2018

वित्त वर्ष 2019

वित्त वर्ष 2020

एच 1

एच 2

 

 

 

 

जलापूर्ति

 

 

1.प्रत्यक्ष जलापूर्ति कनेक्शनों की पारिवारिक स्तर तक कवरेज

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

2जलापूर्ति की प्रति व्यक्ति मात्रा

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

3.आपूर्ति किये गए जल की गुणवत्ता

 

 

 

 

 

 

 

 

सीवरेज और सेफ्टेज प्रबंधन

 

 

4.शौचालयों की कवरेज (व्यक्तिगत एवं समुदाय)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

5.सीवरेज नेटवर्क सेवाओं की कवरेज

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

6सीवरेज संग्रहण की क्षमता

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

7.शोधन की क्षमता

 

 

 

 

 

 

 

 

जल विकास

 

 

8.जल निकास नेटवर्क कवरेज

 

 

 

 

 

 

 

 

शहरी परिवहन

 

 

9.शहर में शहरी परिवहन  की सेवा कवरेज

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

10. प्रति हजार जनसंख्या शहरी परिवहन की उपलब्धता

 

 

 

 

 

 

 

 

अन्य

 

तालिका 3.6 एसएएपी –भौतिक और वित्तीय प्रगति के लिए राज्य स्तरीय कार्य योजना

शहर का नाम

निष्पादन

आधार रेखा (दिनाँक के अनुसार

मिशन लक्ष्य

वित्तीय वर्ष के लिए





अर्द्धवार्षिक 1 के लिए

अर्द्धवार्षिक 2 के लिए





प्राप्त की जाने वाली भौतिक  प्रगति

उपयोग की जाने वाली धनराशि

भौतिक और वित्तीय प्रगति

उपयोग की जाने वाली धनराशि

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

तालिका 4: एसएएपी - प्रशासनिक और व्यय के लिए व्यापक प्रस्तावित आबंटन

क्र.स.

प्रशासनिक और व्यय के लिए व्यापक प्रस्तावित मद

कुल आबंटन

पिछले वर्ष के लिए प्रस्तावित व्यय

वर्तमान वित्त वर्ष के लिए प्रस्तावित व्यय

अगले ले जाने हेतु शेष राशि







वित्त वर्ष 2017

वित्त वर्ष 2018

वित्त वर्ष 2019

1.

एसएलआईपी  और एसएएपी की तैयारी

 

 

 

 

 

 

 

2.

पीडीएमसी

 

 

 

 

 

 

 

3.

तृतीय पक्ष स्वतंत्र समीक्षा और निगरानी  एजेंसी लेना

 

 

 

 

 

 

 

4.

प्रकाशन (ई-पत्रिका दिशानिर्देश विवरणिका आदि)

 

 

 

 

 

 

 

5.

क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण-सीसीबीपी, यदि लागू हो-अन्य

 

 

 

 

 

 

 

6.

सुधार कार्यान्वयन

 

 

 

 

 

 

 

7.

अन्य

 

 

 

 

 

 

 

कुल


 

 

 

 

 

 

 

 

5 सुधार कार्यान्वयन के लिए कार्य योजना

तालिका संख्या

विषय-वस्तु

5.1

वित्त वर्ष 2015-16  के लिए अम्रत शहरों के लिए सुधारों की प्रकृति उपाय और लक्ष्य

5.2

वित्त वर्ष 2016-17 के लिए अम्रत शहरों के लिए सुधारों की प्रकृति उपाय और लक्ष्य

5.3

वित्त वर्ष 2017-18 के लिए अम्रत शहरों के लिए सुधारों की प्रकृति उपाय और लक्ष्य

5.4

वित्त वर्ष 2018-19 के लिए अम्रत शहरों के लिए सुधारों की प्रकृति उपाय और लक्ष्य

5.5

सुधार कार्यान्वयन पर प्रगति की रिपोर्ट हेतु स्व-मूल्यांकन

 

 

 

 

 

 

तालिका 5.1 एसएएपी - अमृत शहरों के लिए सुधारों के प्रकार, कदम और लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2015-16

 

क्र.स.

प्रकार

उपाय

कार्यान्वयन समय-सीमा

एसएएपी राज्यों द्वारा निर्धारित किय जाने वाले लक्ष्य

 

 

 

 

 

अप्रैल से सितम्बर, 2015

अक्तूबर, 2015 से मार्च, 2016

1

ई-गवर्नेस

डिजिटल शहरी स्थानीय निकाय

1. शहरी स्थानीय निकायकी वेबसाइट तैयार करना

2.ई-न्यूजलेटर का प्रकाशन, डिजिटल इंडिया पहल

3.डिजिटल इंडिया को समर्थन देना डक्टिंग, पीपीपी मोड पर अथवा स्वयं शहरी स्थानीय निकाय द्वारा की जाएगी)

6 महीने

 

 

6 महीने

 

6 महीने

 

 

2

नगर संवर्ग का गठन और व्यवसायीकरण

1. शहरी स्थानीय निकाय में इंटरस को लगाने हेतु निति और कार्यान्वयन

12 महीने

 

 

3

दोहरी प्रवृष्टि लेखांकन को बढ़ाना

  1. दोहरी प्रवृष्टि लेखांकन प्रणाली में सम्पूर्ण अंतरण और  वित्त वर्ष 2012-13से प्रभावी एक लेखा परीक्षा प्रमाण पत्र प्राप्त करना
  2. वेबसाइट पर वार्षिक वित्तीय विवरण का प्रकाशन

12 महीने

 

 

प्रत्येक वर्ष

 

 

4

शहरी नियोजन और सिटी विकास योजनायें

  1. सेवा स्तरीय सुधार योजना (एसएलआईपी) राज्य वार्षिक कार्रवाई योजना (एसएएपी) की तयारी
  2. 5 वर्षों  में, सिटीज में 15% तक हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए एक प्रगतिशील कार्रवाई योजना तैयार करना|
  3. एएमआरयूटी सिटीज में प्रत्येक वर्ष कम से कम एक बाल  उद्यान का विकास करना
  4. जन सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर आधारित पार्कों, खेल मैदानों और मनोरंजन क्षेत्रों के रखरखाव हेतु एक प्रणाली स्थापित करना

6 महीने

 

 

6 महीने

 

 

 

 

प्रत्येक वर्ष

 

 

12 महीने

 

 

 

 

 

 

5

निधियों और कृत्यों का हस्तातंरण

  1. शहरी स्थानीय निकाय को 14वें वित्त आयोग के कार्यों के हस्तांतरण को सुनिश्चित करना
  2. राज्य वित्त आयोग (एसएफसी) की नियुक्ति करना और निर्णय लेना
  3. सभी 18 कृत्यों को शहरी स्थानीय निकायों को हस्तांतरित करना|

6 महीने

 

 

 

12 महीने

 

12 महीने

 

 

 

6

भवन उप-नियमों की समीक्षा

  1. भवन उप-नियमों की आवधिक रूप से समीक्षा करना
  2. भवन अनुमतियाँ देने के लिए सभी अनुमोदनों हेतु एकल खिड़की स्वीकृति तैयार करना

 

 

 

7 क)

नगर कर और शुल्क सुधार

  1. कम से कम 90% कवरेज
  2. कम से कम 90% संग्रहण
  3. सम्पत्ति कर, उगाही प्रभार और अन्य शुल्कों को आवधिक रूप से संशोधित करने के लिए निति तैय्रार करना|
  4. बेवसाइट पर कर विवरणों  की मांग एकत्रीकरण पुस्तिका (डीसीबी) डालना
  5. डेस्टिनेशन स्पेशिफिक पोंटेशिएल के लिए डानेमिक प्रासेसिंग मोडयुल वाली एक निति बनाकर विज्ञापन राजस्व की पूर्ण क्षमता को प्राप्त करना

12 महीने

 

 

 

7ख)

उगाही और उपयोगकर्ता प्रभारों के संग्रहण में सुधार

1         व्यक्तिगत और संस्थानिक  आकलनों के लिए उपयोगकर्ता प्रभारों  पर निति को अपनाना जिसमें जल के उपयोग के लिए एक परिकलित दर ली जाती है और कमजोर वर्गों के हितों पर ध्यान रखने के लिए पर्याप्त  सुरक्षा उपाय शामिल किया जाना है|

2         जल हानि को २०% तक कम करने के लिए कार्य योजना बनाना और बेवसाइट पर प्रकाशित करना

3         उपयोगकर्ता प्रभारों के लिए पृथक लेखा

4          कम से कम 90% बिल तैयार करना

  1. कम से कम 90% संग्रहण

 

 

12 महीने

 

 

 

 

 

 

 

8

उर्जा और जल लेखा परीक्षा

  1. उर्जा (स्ट्रीट लाईट) और जल लेखा परीक्षा (गैर राजस्व जल अथवा हानि लेखा परीक्षा सहित)
  2. एसटीपी और डब्ल्यूटीपी को अधिक उर्जा सक्षम बनाना
  3. उर्जा सक्षम लाइटों का उपयोग  करके और नवीकरणीय उर्जा पर निर्भरता बढ़ाकर  स्ट्रीट लाइटों को इष्टतम उर्जा खपत
  4. हरित भवनों के लिए प्रोत्साहन देना (उदाहरणार्थ, भवन अनुमति विकास प्रभारों के सम्बन्ध में सम्पत्ति कर अथवा प्रभारों में छुट)

12 महीने

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

तालिका 5.2 एसएएपी -अमृत शहरों के लिए सुधारों के प्रकार, कदम और लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2015-16

क्र सं,

प्रकार

कदम

कार्यान्वयन की समय सीमा

एसएएपी राज्यों द्वारा निर्धारित किय जाने वाले लक्ष्य

 

 

 

 

अप्रैल से सितम्बर, 2015

अक्तूबर, 2015 से मार्च, 2016

अप्रैल से सितम्बर, 2016

अक्तूबर, 2016 से मार्च, 2017

1

ई-शासन

ई-एमएएएस सहित कवरेज (सॉफ्टवेयर की होस्टिंग  की तारीख से)

  • जन्म, मृत्यु और विवाह का पंजीकरण
  • जल एंव सीवरेज प्रभार
  • शिकायत निवारण
  • सम्पत्ति कर,
  • विज्ञापन कर,
  • लाइसेस जारी करना
  • भवन अनुमतियां
  • परिवर्तन
  • वेतन-पत्रक
  • पेंशन  और ई-प्रापण

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

24 महीने

 

 

 

 

2

म्युनिसिपल संवर्ग की संविधान और व्यावसायिकता

  • म्युनिसिपल संवर्ग की स्थपाना
  • संवर्ग से जुड़ा प्रशिक्षण

 

24 महीने

 

 

 

 

 

3

दोहरी प्रविष्ट लेखांकन का संवर्धन

  1. आंतरिक लेखा परीक्षा की नियुक्ति

 

 

24 महीने

 

 

 

 

 

4

शहरी आयोजना और शहरी स्तरीय योजनायें

  1. सुस्थिर आवास के लिए राष्ट्रीय मिशन में दिए गए मानदंडों का कार्यान्वयन करने के लिए एक राज्य स्तरीय नीति तैयार करना

 

 

24 महीने

 

 

 

 

 

 

5

निधियों और कार्यों का हस्तांतरण

  1. 14वें वित्त आयोग की निधियों और कार्यों का
  2. समय-सीमा के अतर्गत एसएफसी के सिफारिशों का कार्यान्वयन करना|

 

6 महीने

 

 

24 महीने

 

 

 

 

 

6

भवन उप-नियमों की पुनरीक्षा

 

  1. राज्य 500 वर्ग से अधिक क्षेत्र वाले सभी भवनों और सभी सार्वजनिक भवनों में छत  सौर प्रणाली सम्बन्धी नीति और कार्यवाई  योजना तैयार करें
  2. राज्य 300 वर्ष मी. और उससे अधिक क्षेत्र वाले प्लोटों पर सभी व्यावसायिक,, सार्वजनिक भवनों और नए भवनों में वर्षा जल संचयन संरचनाओं के निर्माण के लिए एक नीति और कार्य योजना तैयार करें

 

24 महीने

 

 

 

 

 

7

राज्य स्तर पर मध्यस्थ संस्था की व्यवस्था करना

  1. वित्तीय मध्यस्थ संस्था की स्थापना और उसका संचालन-पूल वित्त, बाह्य निधियां प्राप्त करना, म्युनिसिपल बांड जारी करना

24 महीने

 

 

 

 

 

8

क्रेडिट रेटिंग

यूएलबी की  क्रेडिट रेटिंग पूरा करना

24 महीने

9

उर्जा और जल लेखा परीक्षा

  1. उर्जा (स्ट्रीट लाईट) और जल लेखा परीक्षा (गैर राजस्व जल अथवा हानि लेखा परीक्षा सहित)
  2. एसटीपी और डब्ल्यूटीपी को अधिक उर्जा सक्षम बनाना
  3. उर्जा सक्षम लाइटों का उपयोग स्ट्रीट लाइटों को उर्जा खपत के अनुकूल बनाना और नवीकरणीय उर्जा पर निर्भरता बढ़ाना |
  4. हरित भवनों के लिए प्रोत्साहन देना (उदाहरणार्थ, भवन अनुमति विकास प्रभारों के सम्बन्ध में सम्पत्ति कर अथवा प्रभारों में छुट)

 

तालिका 5.3. एसएएपी - अमृत शहरों के लिए सुधारों के प्रकार, कदम और लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2017-18

 

क्र सं,

प्रकार

कदम

कार्यान्वयन की समय सीमा

एसएएपी राज्यों द्वारा निर्धारित किय जाने वाले लक्ष्य

 

 

 

 

अप्रैल से सितम्बर, 2015

अक्तूबर, 2015 से मार्च, 2016

अप्रैल से सितम्बर, 2016

अक्तूबर, 2016 से मार्च, 2017

1

ई-शासन

  1. कार्मिक स्टाफ प्रबंधन
  2. परियोजना प्रबंधन

36 महीने

 

 

 

 

2

शहरी नियोजन और नगर विकास योजनायें

  1. शहरी विकास प्राधिकरणों की स्थपाना करना

36 महीने

 

 

 

 

3

स्वच्छ भारत मिशन

  1. खुले में शौच का उन्मूलन
  2. अपशिष्ट एकत्रीकरण (100%)
  3. अपशिष्ट को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना (100%)
  4. वैज्ञानिक निपटान

(100%)

  1. राज्य, शहरी स्थानीय निकाय की जनसंख्या, आंतरिक संसाधनों के सृजन और वेतन पर होने वाले व्यय के आधार पर नगर अधिकारियों की संख्या के उचित आकार  के लिए एक निति तैयार करेंगे|

 

36 महीने

 

 

 

 

 

 

तालिका 5.4 एसएएपी –राज्य वार्षिक योजना (एसएएपी) सुधारों के प्रकार, कदम और वित्त वर्ष 2018-19 में अमृत शहरों हेतु लक्ष्य

क्र सं,

प्रकार

कदम

कार्यान्वयन की समय सीमा

एसएएपी राज्यों द्वारा निर्धारित किय जाने वाले लक्ष्य

 

 

 

 

अप्रैल से सितम्बर, 2015

अक्तूबर, 2015 से मार्च, 2016

अप्रैल से सितम्बर, 2016

अक्तूबर, 2016 से मार्च, 2017

1

शहरी आयोजना और नगर विकास योजनायें

1.जीआईएस क उपयोग करके मास्टर प्लान तैयार करना

48 महीने

 

 

 

 

 

तालिका 5.5 एसएएपी – सुधार कार्यान्वयन पर प्रगति की रिपोर्ट करने के लिए स्व-मूल्यांकन

वित्तीय वर्ष के लिए -----                           (पिछला वित्तीय  वर्ष)

 

शहरी विकास मंत्रालय द्वारा निर्धारित किये गए लक्ष्यों के सामने पूरे किये गए प्रत्येक सुधार की उपलब्धि के लिए 10 अंक आबंटित करते हुए किये गए सुधारों को वित्तीय वर्ष के अंत के पश्चात प्रत्येक वर्ष मापा जायेगा

 

क्र.सं.

वर्ष

उपलब्धियों की संख्या

अधिकतम स्कोर

1.

प्रथम वर्ष

28

280

2.

द्वितीय वर्ष

13

130

3.

तृतीय  वर्ष

8

80

4.

चतुर्थ वर्ष

3

30

 

प्रोत्साहन आधारित जारी अनुदान की गणना

राज्यों को निम्नलिखित स्व-मूल्यांकन फॉर्म भरने के आवश्यकता होगी

चरण 1. निम्न तालिका भरें

क्र.सं.

शहरी स्थानीय निकायों का नाम

वर्ष के दौरान अधिकतम प्राप्तांक संभव

शहरी स्थानीय निकाय-वार प्राप्त प्राप्तांक

(1)

(2)

(3)

(4)

1

 

 

 

2

 

 

 

3

 

 

 

3 शहरी स्थानीय निकायों का उप-योग

 

 

 

राज्य

 

 

1

 

 

 

2

 

 

 

3

 

 

 

राज्य का उप-योग

 

 

कुल योग

 

 

चरण: राज्य द्वारा प्राप्त प्रतिशत में समग्र प्राप्तांक की गणना ( राज्य प्राप्तांक+ शहरी स्थानीय निकाय प्राप्तांक)

चरण: केवल उन राज्यों पर प्रोत्साहन के लिए विचार किया जायेगा जिहोंनें समग्र सुधार प्राप्तांक 70% और उससे अधिक प्राप्त किया होगा|

चरण: यदि समग्र सुधार प्राप्तांक 70% से अधिक प्राप्तांक हासिल करने वाले शहरी स्थानीय निकायों की संख्या के आधार पर राज्यों के बीच वितरित किया जायेगा |

6.राज्यों के लिए मूल्यांकन रूप रेखा

तालिका सं.

विषय-सूची

6.1

राज्य एचपीएससी के समाने रखे जाने वाले राज्य मिशन निदेशालय द्वारा एसएलआईपी का मूल्यांकन

6.2

शहरी विकास मंत्रालय द्वारा मूल्यांकन के लिए भेजी जाने वाली समेकित राज्य वार्षिक कार्य योजना

6.3

शहरी विकास मंत्रालय द्वारा राज्य स्तरीय कार्य योजनाओं का अंतिम मूल्यांकन

 

तालिका 6.1:जाँच सूची- राज्य एचपीएससी के समाने रखे जाने वाले राज्य मिशन निदेशालय द्वारा एसएलआईपी का मूल्यांकन

क्र स.

मूल्यांकन का क्षेत्र

हाँ/नहीं

सहायक दस्तावेज़

टिप्पणियाँ


1. क्या शहर के सेवा कवरेज सूचक के लिए आधारभूत (बेसलाइन) का आकलन किया गया है?

 

 

 

 

2. क्या एसएलआईपी विकसित करने तथा शहर विकास योंजना टीयर करने के लिए नागरिक परामर्श किये गए हैं

 

 

 

 

3. क्या परियोजनाओं को दी गई प्राथमिकता नागरिक परामर्शों के आधार पर दी गई है?

 

 

 

 

4. क्या शहर के कम लागत या बिना लागत सुधारों का आकलन किया गया  है जो सेवा स्तर में सुधार कर सकते हैं?

 

 

 

 

5. क्या सेवा स्तर में सुधार करने के लिए पहचान की गई पूंजी निवेश, प्रबंधन सुधारों के साथ है?

 

 

 

 

6. क्या प्रतावित निवेश स्लम.  शहरी गरीब क्षेत्रों के लिए सेवा स्तर को सुनिश्चत करेगा?

 

 

 

 

7. क्या प्रतावित परियोजना राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को शनील करने के पश्चात सुधार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता की जरूरत को सम्बोधित करते है?

 

 

 

 

8. क्या प्रतावित निवेश, सूचक परिकल्पित सुधार के स्तर के अनुरूप है?

 

 

 

 

9. क्या शहर के लिए निवेश की लागत कम करने हेतु स्मार्ट समाधान का प्रस्ताव किया गया है?

 

 

 

 

10.  शहर द्वारा प्रतावित स्मार्ट समाधान के प्रकार

 

 

 

 

11.  क्या शहर के लिए यह सुनिश्चित किया गया है कि निवेश प्रताव उचित लागत मानदंडों के आधार पर है?

 

 

 

 

12.  क्या शहर के लिए निम्नलिखित संसाधनों आवश्यकताओं की पहचान करने हेतु वित्तीय पूर्वानुमान किया गया है
क)   पूंजीगत लागत
ख)   प्रचालन एवं अनुरक्षण
ग)    ऋण की चुकौती/पीपीपी द्वारा वित्तपोषण योगदान

 

 

 

 

13.  क्या शहर के लिए स्टाफ और लागत सहित वृद्धिशील प्रचालन और अनुरक्षण आवश्यकताओं की पहचान की गई है?

 

 

 

 

14.  क्या शहर के लिए निवेश की जरूरत को पूरा करने हेतु फंड के विभिन्न स्रोतों पर विचार किया गया है?

 

 

 

 

15.  क्या शहर के लिए अभिनव वित्तपोषण के विकल्प सहित अतिरिक्त राजस्व जुटाने के लिए सभी सम्भावित राजस्व सुधारों पर विचार किया गया है?

 

 

 

 

16.  क्या शहर के लिए बाजार ऋण सहित वित्त के सबी स्रोतों का पता लगाया गया है?

 

 

 

 

17.  क्या शहर के लिए विभिन्न पीपीपी विकल्पों पर विचार किया गया है?

 

 

 

 

18.  क्या शहर के लिए सुधारों के कार्यान्वयन हेतु स्पष्ट स्थिति अरु रोडमैप को प्रधान किया गया है?

 

 

 

 

19.  क्या शहरों के लिए प्रस्तावित परियोजनाओं और सुधारों की शुरुआत हेतु कार्यान्वयन योजना तैयार की गई है?

 

 

 

 

20.  क्या पैरा 7.2 के अनुसार अम्रत में वित्तपोषण के लिए शहरी स्थानीय निकायों को प्राथमिकता दी गई है?

 

 

 

 

तालिका 6.2 जाँच सूची- शहरी विकास मंत्रालय द्वारा मूल्यांकन के लिए भेजी जाने वाली समेकित राज्य वार्षिक कार्य योजना

क्र स.

विचारार्थ विन्दु

हाँ/नहीं

विस्तृत जानकारी दें

 

1. क्या सभी शहरों ने प्रतावित दृष्टिकोण के अनुसार एसएलआईपी तैयार की गई है?

 

 

 

2. क्या एसएएपी ने शहरों में प्रस्तावित निवेश को प्राथमिकता दी है?

 

 

 

3. क्या राज्य द्वारा प्रतावित सुधारों (निवेश और सुधारों (निवेश और प्रबंधन सुधार दोनों) का सूचक-वार सारांश स्थान पर है?

 

 

 

4. क्या मिशन के अतर्गत सभी शहरों के लिए कवरेज संकेतक के आधारभूत आकलन की पहचान कर ली गई/को कर लिया गया है?

 

 

 

5. क्या एसएएपी  प्रत्येक सेक्टर के लिए मंत्रालय द्वारा सहमत सेवा स्तर मानकों को प्राप्त करने की ओर उस दृष्टिकोण के अनुकूल है?

 

 

 

6. क्या प्रतावित निवेश, सूचक में परिकल्पित सुधार के स्तर के अनुरूप है?

 

 

 

7. क्या राज्य शेयर एंव शहरी स्थानीय निकाय शेयर प्रतावित मिशन दृष्टिकोण के साथ लाइन में हैं?

 

 

 

८. क्या अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत है और राज्य ने अतिरिक्त संसाधन (राज्य कार्यक्रम, सहायता प्राप्त परियोजनाएँ, शहरों के लिए अतिरिक्त हस्तांतरण, 14वां वित्त आयोग, बाहरी स्रोत) जुटाने पर विचार किया गया है?

 

 

 

9. क्या राज्य वार्षिक कार्य योजना यह सत्यापित करती है कि शहरों के लिए प्रचालन एवं अनुरक्षण तथा चुकौती हेतु राजस्व आवश्यकताओं  की पहचान करने के लिए वित्तीय अनुमानों को लगाया गया है?

 

 

 

10.  क्या राज्य वार्षिक कार्य योजना में प्रत्येक शहरी स्थानीय निकाय के संसाधन जुटाने की क्षमता पर यह सुनिश्चित करने के लिए शहरी स्थानीय निकाय शेयर जुटाया जा सकता है, विचार किया गया है?

 

 

 

11.  क्या पीडीएमसी की स्थापना की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है?

 

 

 

12.  क्या शहरी स्थानीय निकाय की संसाधन क्षमता को समझने के लिए एक रोडमैप तैयार किया गया है?

 

 

 

13.  क्या परियोजनाओं और सुधारों के लिए कार्यान्वयन योजना स्थान पर है? (समय- सीमा और वर्षिक उपलब्धियां)

 

 

 

14.  क्या दिशानिर्देशों के पैरा 7.2 के अनुसार शहरी स्थानीय निकायों में परियोजनाओं को प्राथमिकता दी गई है?

 

 

 

तालिका 6.3 जाँच सूची- शहरी विकास मंत्रालय द्वारा राज्य स्तरीय कार्य योजनाओं का अंतिम मूल्यांकन

 

क्र स.

मूल्यांकन का क्षेत्र

हाँ/नहीं

समर्थित  दस्तावेज़

टिप्पणियाँ


1. क्या राज्य ने आधारभूत डाटा के आधार पर शहरों और क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है?

 

मूल्यांकन रिपोर्ट

 


2. क्या राज्य ने यह सुनिश्चित किया है कि प्रत्येक शहर द्वारा कम लागत या बिना लागत सुधारों की पहचान की गई है?

 

मूल्यांकन रिपोर्ट

 


3. क्या राज्य ने अच्छी तरह से पूंजीगत व्यय की योजना बनाई गई वित्तपोषण किया है?

 

 

 


4. केद्र सरकार से वित्तीय सहायता का अपेक्षित स्तर क्या है और कितनी अच्छी तरह से राज्य/ शहरी स्थानीय निकाय एवं वित्त के अन्य स्रोतों की पहचान की गई है और उन तक पहुँच बनाई गई है?

 

 

 


5. क्या राज्य ने यह सुनिश्चित किया है कि राज्य अंश का बजट पर्याप्त रूप से दिया गया है?

 

 

 


6. क्या राज्य ने यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त उपाय किये हैं कि शहरों को परियोजना लागत के अपने हिस्से को जुटाने के लिए सहायता की जाए, यदि आवश्यक हो?

 

 

 


7. क्या राज्य ने परियोजनाओं और सुधारों का प्रबंधन करने के लिए परियोजना विकास एंव प्रबंधन सलाहकार नियुक्त किया है?

 

 

 


8. क्या एफ.एफ.सी. अनुदान राज्य में शहरी स्थानीय निकायों की जारी किया गया है?

 

 

 


9 . क्या एफ.एफ.सी.की अन्य निष्पादन आवश्यकताओं का पालन किया गया है?

 

 

 

 

10. राज्य ने कितनी अच्छी तरह से जलापूर्ति, सीवरेज/सेफ्टिक टैंक से निकलने वाले अपशिष्ट, शहरी परिवहन और वर्षा जल में सार्वभौमिक कवरेज और मानक की उपलब्धि की दिशा में कदम के लिए योजना बनाई है|

 

 

 

 

11. क्या सुधारों के लिए लक्ष्य (समय- सीमा और उपलब्धियां) विकसित किये गए हैं?

 

 

 

 

12. क्या राज्य ने प्रतावित परियोजनाओं में पीपीपी के लिए क्षमता का पता लगाया है?

 

 

 

 

13. क्या एक वित्तीय मध्यस्थ की स्थापना की गई है?

 

 

 

 

14. राज्य स्तर पर अन्तराल विशलेषण के लिए मूल्यांकन कितनीं अच्छी तरह से किया गया है?

 

 

 

 

15. परियोजनाओं का तकनीकी वित्तीय विवरण कितना अच्छा है?

 

 

 

 

16. क्या राज्य ने पैरा 7.2 में दी गई प्राथमिकता की निति का पालन किया है?

 

 

 

 

 

अनुलग्नक3: सी –डैक द्वारा विकसित स्मार्ट समाधान की सूची

घटक

स्मार्ट समाधान

सीवरेज एंव ड्रेनेज प्रणाली

  • सीवर पाइप नेटवर्क में महत्वपूर्ण स्थानों पर मैनहोल में सीवरेज के स्तर की निगरानी
  • जब मेनहोल में स्तर वर्तमान निर्धारित मान से अधिक हो जाये तक केन्द्रीय निगरानी स्टेशन में अलार्म बजना
  • सभी उल्ल्लिखित मापदंडों के लिए दैनिक, साप्ताहिक और मासिक रिपोर्ट
  • एकीकृत जीएसएम म़ोडम के साथ के अल्ट्रासोनिक स्तर सेंसर का विकास

जलापूर्ति प्रणाली

  • स्मार्ट पानी के मीटर और बिलिंग प्रणाली
  • दूर से संचालित स्वचालित वितरण मान
  • जल गुणवत्ता निगरानी

उर्जा प्रणाली

  • स्मार्ट होम उर्जा नेटवर्क प्रणाली: लोड के विभिन्न प्रकार की पहचान करना तथा तदनुसार लोड संतुलन की योजना बनाना
  • आईईसी 61850 पर आधार्रित स्मार्ट सब=स्टेशन स्व-चालन प्रणाली

 

  • वितरण प्रणाली के लिए उर्जा संरक्षण हेतु नवीकरणीय उर्जा स्रोतों का एकीकरण

नागरिक सुरक्षा प्रणाली

  • शहर व्यापक बुद्धिमतापूर्ण वितरित वीडियों निगरानी नेटवर्क की स्थापना
  • चेहरे की पहचान भीड़-भीड़ वाले क्षेत्रों, हवाईअड्डे, रेलवे स्टेशनों और  बस स्टेशनों पर आपराधिक संदिग्धों की पहचान करने और नजर रखने को सक्षम बनाता है
  • नोड से विशलेषण केंद्र तक विश्वसनीय और सुरक्षित डाटा/वीडियों प्रसारण बनाने को सुनिश्चित करना

आपातकालीन  प्रतिक्रिया प्रणाली

  • जीपीएस सक्षम एम्बुलेंस के साथ मापनीयता को दर्शाने का सिमित सीमा तक कार्यान्वयन
  • गतिशील नियमित मानचित्र के लिए मोबाइल एप
  • लिखित मानकों के सन्दर्भ में रुपरेखा
  • आपातकालीन वाहनों के साथ मापनीयता को दर्शाने का सिमित सीमा तक सिमुलेशन कार्यान्वयन

स्वच्छ वातावरण

  • प्रदूषण निगरानी प्रणाली
  • निगरानी और नियंत्रण के लिए एप्लीकेशन सोफ्टवेयर
  • शहर के भीतर विभिन्न स्थानों में वायु प्रदूषण के स्तर का संकेत करते हुए प्रदूषण मानचित्र के रूप में वायु गुणवत्ता निगरानी उपकरण
  • वायु प्रदूषण पूर्वानुमान के लिए कलन विधि
  • उच्च सवेंदनशील ध्वनि सेंसर के साथ वारलेस नेटवर्क एंड नोड
  • इंटरनेट क्लाउड को डाटा स्थान्तान्तरित करने के लिए वारलेस गेटवे
  • ध्वनि सम्बन्धी आंकड़ों पर आंकड़ा विश्लेषिकी

 

अनुलग्नक4: शहरों/राज्यों के लिए अंक सूची

(प्रति तिमाही प्रस्तुत किया जाये )

मिशन उद्देश्यों की प्रगति (राज्य स्तरीय)

क्षेत्र

एसएलबी

बेसलाइन

मिशन लक्ष्य

अब तक लक्ष्य

उपलब्धि

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

संसाधन जुटाव (शहर-वार)

शहर का नाम

स्रोत

मिशन लक्ष्य

अब तक लक्ष्य

उपलब्धि

शहर का नाम

भारत सरकार

 

 

 

राज्य

 

 

 

यूएलबी

 

 

 

अन्य

 

 

 

शहर का नाम

भारत सरकार

 

 

 

राज्य

 

 

 

यूएलबी

 

 

 

अन्य

 

 

 

 

 

 

 

 

 

कार्यान्वयन की स्थिति (परियोजना-वार)

परियोजना का नाम (क्षमता निर्माण भी)

वास्तविक प्रगति

इकाई

मिशन लक्ष्य

अब तक लक्ष्य

उपलब्धि

परियोजना 1

वास्तविक प्रगति

%

 

 

 

वित्तीय प्रगति

%

 

 

 

अब तक संवितरण की गई धनराशि

करोड़ रु० में

 

 

 

परियोजना 1

वास्तविक प्रगति

%

 

 

 

वित्तीय प्रगति

%

 

 

 

अब तक संवितरण की गई धनराशि

करोड़ रु० में

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

निधि प्रवाह (शहर वार)

शहर का नाम

भारत सरकार वित्तपोषण

बजट

स्वीकृत

संवितरण

उपार्जित

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अनुलग्नक 5: उपयोग प्रमाण-पत्र का प्रारूप (शहर-वार)

उपयोग प्रमाण-पत्र का प्रापत्र

क्र.सं.

पत्र सं. और तारीख

राशि (रु०)

प्रमाणित किया जाता है कि हासिए में दिए गए पत्र संख्या के तहत इस मंत्रालय/विभाग के अंतर्गत ----के पक्ष में वर्ष -------के दौरान स्वीकृत ------रु० के सहयता अनुदान में से तथा पूर्व वर्ष की अव्ययित शेष राशि -----------रु० के कारण ----- रु०  की राशि का उपयोग उसी प्रयोजन के लिए किया गया है जिसके लिए यह स्वीकृत की गई थी और यह है कि वर्ष के अंत में उपयोग नहीं की गई-----रु० के शेष राशि सरकार को लौटा (दिनांक -------की संख्या ----के तहत) दी गई है, अगले वर्ष --------के दौरान देय सहायता अनुदान के लिए समायोजित की जाएगी|

 

कुल

 

 

 

 

 

 

 

प्रमाणित किया जाता है कि मैं इस बात से संतुष्ट हूँ कि जिन पर सहायता अनुदान स्वीकृत किया गया था, उन्हें विधिवत रूप से पूरा कर लीया गया है/पूरा जा रहा है और यह कि यह देखने के लिए निम्नलिखित जाँच की है कि कर ली है कि धनराशि का उपयोग वास्तव में उसी प्रयोजन हेतु किया गया है जिस प्रयोजन के लिए स्वीकृत किया गया था |

की गई जाँच के प्रकार

1.

2.

(म्युनिसिपल आयुक्त/यूएलबी के प्रमुख)

दिनांक -----

  1. भारत सरकार द्वारा एसीए  जारी करने की तारीख
  2. शहरी स्थानीय निकायों को एसीए जारी करने की तारीख
  3. शहरी स्थानीय निकायों को राज्य अंश जारी करने की तारीख
  4. शहरी स्थानीय निकायों को एसीए जारी करने में विलंब हेतु

कटौती किये जाने वाली जी-सैक दर पर गणना किया गया ब्याज

अनुलग्नक 6: परियोजना निधि हेतु अनुरोध

6.1     परियोजना-वार किश्त जारी करने हेतु अनुरोध यूएलबी द्वारा राज्य को प्रस्तुत किया जाये

1

परियोजना का नाम

 

2

एचएसपीएसपी द्वारा अनुमोदन की तिथि

 

3

पूर्णता की तिथि

प्रारंभ तिथि

 

 

संशोधित तिथि, यदि कोई हो,

4a

अनुमोदित लागत

 

4b

निविदा लागत

 

5

अनुमोदित लागत पर आधारित स्वीकार्य एसीए

 

6

केंद्र/राज्य/यूएलबी का अंश जारी करना (लाख रु० में)

कुल अंश

देय

जारी

 

 

एसीए+ राज्य+ यूएलबी

 

 

 

किश्त

केन्द्रीय अंश

राज्य अंश

यूएलबी

अन्य अंश

 

 

देय

जारी

देय

जारी

देय

जारी

देय

जारी

 

प्रथम

 

 

 

 

 

 

 

 

 

द्वितीय

 

 

 

 

 

 

 

 

 

तृतीय

 

 

 

 

 

 

 

 

 

कुल

लाख रु०

लाख रु०

लाख रु०

लाख रु०

लाख रु०

लाख रु०

लाख रु०

लाख रु०

 

7

कार्यान्वयन एंजेसी द्वारा प्रस्तुत उपयोग प्रमाण पत्र

 

 

------- लाख रु०

 

8

कार्यान्वयन एंजेसी द्वारा उपयोग की  धनराशि का प्रतिशत

 

 

 

 

 

 

 

9

वास्तविक प्रगति

 

 

 

 

 

 

 

10

एचएसपीएसपी द्वारा परियोजना की स्वीकृति और अगली किश्त जारी करते समय लगाई गई शर्तें

 

 

 

 

 

 

 

11

क्या एचएसपीएसपी द्वारा लगाई गई शर्तें पूरी की गई हैं

 

 

 

 

 

 

 

12

सुधारों का कार्यान्वयन

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

वित्त वर्ष

वित्त वर्ष में सुधारों की संख्या

लक्ष्य गतिविधियों की संख्या

अब तक लक्ष्य

अब तक उपलब्धि

 

 

1

 

 

 

 

 

 

 

 

2

 

 

 

 

 

 

 

 

3

 

 

 

 

 

 

 

 

4

 

 

 

 

 

 

 

13

क)   अंतिम तिमाही के लिए प्राप्तांक पत्र की स्थिति

प्रस्तुत/प्रस्तुत नहीं

 

 

 

 

 

 

 

ख)   आईआरएमए रिपोर्ट की स्थिति एवं उसकी सिफारिशें

क्या तिमाही आईआरएमए निरीक्षण किया गया हाँ/नहीं

आईआरएमए द्वारा की गई टिप्पणी

राज्य /राज्य/यूएलबीद्वारा की गई कार्रवाई

14

एचएसपीएसपी द्वारा किश्त जारी करने हेतु प्रस्ताव

 

 

 

 

 

 

 

 

(म्युनिसिपल आयुक्त/यूएलबी पैरास्टेटल  प्रमुख)

दिनांक -----

 

क्र.सं.

शहर का नाम

परियोजना का नाम

निर्धारित पूर्णता तिथि

अनुमोदित लागत लाख रु० में

स्वीकार्य एसीए लाख रु० में

आज तक जारी धनराशि

प्राप्त यूसी के अनुसार उपयोग की गई धन राशि का

आज तक वास्तविक प्रगति

आज तक उपलब्ध सुधार का %

प्राप्तांक पत्र प्रस्तुति की स्थिति

क्या आईआरएमए की टिप्पणियों पर कार्रवाई की गई

अपेक्षित किश्तों की क्रम संख्या

अपेक्षित किश्त की धनराशि

एसीएका %

इस किश्त के बाद जारी कुल एसीए

 

 

 

 

 

 

केन्द्रीय

राज्य

अन्य

कुल

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अनुलग्नक 7: वार्षिक क्षमता निर्माण योजना

वर्तमान में, शहरी विकास मंत्रालय दो स्कीमों-व्यापक निर्माण कार्यकम (सी सी बी पी) तथा शहरी विकास के लिए क्षमता निर्माण (सीबीयूडी) के माध्यम से राज्यों तथा शहरी स्थानीय (यूएलबी) को क्षमता निर्माण गतिविधियों में सहयोग कर रहा है स्मार्ट सिटीज मिशन तथा अमृत पुनः संरेखण करने के पश्चात, कार्यनीति तथा कार्य योजना निम्नलिखित हैं:

कार्यनीति

विभिन्न रिपोटों तथा अध्ययनों में नगर पालिका पदाधिकारियों तथा नगरपालिका संस्थाओं दोनों के क्षमता निर्माण की सिफारिश की गई है| तदनुसार, पुनः संस्स्थानिक क्षमता निर्माण| व्यक्तिगत प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रकार्यात्मक ज्ञान को बढ़ाना, कार्य से सम्बन्धित योग्यताओं को सुधारना तथा नगरपालिका पदाधिकारियों के दृष्टिकोण को बदलना है| नगरपालिका की पदाधिकारियों को एक वर्ष का प्रशिक्षित संस्थाओं (कक्षा) में दिया जायेगा जिसकों उनके कार्यस्थल में भी लागू किया जायेगा| इसके अतिरिक्त, एक वर्ष की प्रशिक्षण अवधि के दौरान उनके कार्य स्थल पर उनका मार्ग दर्शन किया जायेगा तथा कोचिंग सेवाएँ प्रदान की जाएँगी| अमृत (ए एम आर यू टी) सुधार एजेंडा के अनुसार, संस्थानिक क्षमता का उद्देश्य परिणाम परिणामों को सुधारना है|

कार्य योजना (पी ओ ए)

वैक्तिक क्षमता निर्माण: प्रशिक्षित मांग विशलेषण(टीएनए) के आधार पर शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) में निम्नलिखित चार विभागों पर ध्यान होगा|

  • वित्त और राजस्व: वित्त आयोजना और प्रबंधन, राजस्व जुटाना
  • अभियन्त्रिकी तथा लोक स्वास्थ्य: जल और स्वच्छता वर्षा जल निकास ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
  • नगरयोजना: गरीब अनुकूल योजना दृष्टिकोण सहित शहरी योजना
  • प्रशासन:ई-शासन, कम्प्युटर तथा व्यावहारिक कौशल

शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) प्रत्येक वर्ष चार विभागों तथा सभी चुने हुए प्रतिनिधियों में से कम से कम 30 कार्यकारिणी को प्रशिक्षित करने की योजना बनायेंगे| चयनित प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित संस्थाओं  में एक बार प्रशिक्षित प्रदान किया जायेगा, जिसमें भारत में सर्वोत्तम कार्य पद्धति से सीखने के लिए कार्य स्थल का दौरा करना शामिल होगा| जहाँ तक नगरपालिका पदाधिकारियों का सम्बन्ध है, 500 शहरी स्थानीय निकायों में से 45000  अधिकारियों को जून 2018 तक प्रशिक्षित किया जायेगा| एक वर्ष के इस प्रशिक्षण में तीन खंड शामिल होंगे| प्रत्येक खंड में प्रशिक्षण संस्थान में तीन दिन का प्रशिक्षण शामिल होगा जिस में चार माह का प्रशिक्षण शामिल होगा जिसके दौरान नगरपालिका पदाधिकारी उनके कार्य में प्रशिक्षण को लागू करेंगे| अतः एक वर्ष की अवधि के दौरान एक नगरपालिका पदाधिकारियों को प्रशिक्षण संस्थान में 9 दिनों का प्रशिक्षण दिया जायेगा|

केंद्र, राज्य तथा नगरपालिका सेवाओं से कई सेवानिवृत्त अधिकारी हैं जो यूएलबी में कार्यरत हैं| चार माह के दौरान, जब प्रशिक्षार्थी अपने कार्य स्थल पर लौटते है तो ऐसे अधिकारी उनके मार्गदर्शक के रूप में कार्य कर सकते हैं| इसके लिए प्रशिक्षण एंजेंसियों नगरपालिका पदाधिकारियों के साथ मार्गदर्शकों की नियुक्ति करेंगे| अंतः वर्ष बार के प्रशिक्षण में सर्वोत्तम कार्यपद्धति के रूप में अभिज्ञात भारत में एक पहल का एक दौरा और एक अन्तर्राष्ट्रीय/राष्ट्रीय कार्यशाला में एक बार भाग लेना भी निधित होगा| इन सभी गतिविधियों के लिए सीसीबीपी टूलकिट में दिए गए मानदंडों के अनुसार भुगतान किया जायेगा| तीन वर्ष के लिए सम्भावित लागत लगभग 100 करोड़ रु० होगी|

यह प्रशिक्षण सूची में सम्मलित प्रशिक्षण एजेंसियों, शैक्षिणक संस्थाओं तथा लाभ प्राप्त करने वाले अन्य संगठनों (भविष्य में इकाइयों खी जाएँगी) द्वारा आयोजित किया जायेगा| उन्हें राज्यों/प्रदेशों/क्षेत्रों में स्थित यूएलबी आबंटित किये जायेंगे| यूएलबी द्वारा प्रत्येक खंड की समाप्ति के बाद इकाइयों को भुगतान किया जायेगा, यह भुगतान प्रशिक्षण के इसके उद्देश्यों को पूरा करने के अधीन होगा जिसका मूल्यांकन एनआईयूए (अथवा इस के नामिती) ने स्वतंत्र रूप से किया हो| यदि एनआईयूए प्रशिक्षण में अन्तराल पाता है तो प्रशिक्षण इकाइयों को अपनी लागत पर पुनः प्रशिक्षण आयोजित करना होगा|

एनआईयूए क्षमता निर्माण में शहरी विकास मंत्रालय का निति भागीदार होगा था शहरी विकास मंत्रालय. राज्यों/यूएलबी को एकल खिड़की सेवा प्रदान करेगा| एनआईयूए प्रशिक्षण मोड्यूल की सूचना के प्रसारण, सर्वोत्तम व्यवहारों का दस्तावेजीकरण, प्रशिक्षण की प्रगति की निगरानी तथा अतिअवश्यक, चार माह के प्रत्येक प्रशिक्षित खंड की समाप्ति के पश्चात प्रशिक्षण के लाभों के मूल्यांकन में शामिल होगा| मूल्यांकन एक वर्ष लम्बी प्रशिक्षण अवधि के बाद सभी व्यक्तिगत नगरपालिका पदाधिकारियों के लिए किया जायेगा तथा प्रशिक्षण इकाइयों के साथ इन परिणामों को उनकी प्रशिक्षण पद्धतियों तथा मोड्यूलों की समीक्षा हेतु साझा की जाएगी, यदि आवश्यक हो, जिससे प्रशिक्षण को नगरपालिका पदाधिकारियों के लिए अधिक उपयुक्त तथा प्रासंगिक बनाया जा सके|

उदाहरण के लिए, प्रशिक्षण इकाईयों द्वारा कक्षा में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की समाप्ति के बाद निर्धारित मानक प्रारूपों में प्रशिक्षण का पधिकारी स्व-मूल्यांकन करेंगे| चार माह के बाद उनके कार्यस्थल से लौटने के पश्चात कार्यकारिणी पुनः स्व-मूल्यांकन करेंगे| स्व-मूल्यांकन तथा पर्यवेक्षक के मूल्यांकन से एनआईयूए तथा प्रशिक्षित प्रतिष्ठान को 1) व्यक्तिगत पदाधिकारियों कार्यकारिणी के उनके मौजूदा स्तरों (आधार-रेखा) पर ज्ञान, कौशल तथा अभिवृति में प्रशिक्षण के प्रभाव तथा 2) कार्य के सम्बन्धित कार्य निष्पादन में सुधार की सूचना प्राप्त होगी| महत्वपूर्ण रूप से, ऐसे वास्तिवक मूल्यांकन से प्राप्त शिक्षा को यूएलबी /राज्यों के लिए शिक्षा के प्रसार तथा भविष्य के गतिविधियों को डिजायन करने में एनआईयूए द्वारा प्रयोग में लाया जायेगा|

राष्ट्रीय मिशन निदेशक से परामर्श करके एनआईयूए सीसीबीपी के सभी अन्य घटकों (उदाहरण-कार्यशालाएं, सेमीनार, आगमन इत्यादि) को शुरू करने की जाँच करेगा तथा अनुमोदन देगा| एनआईयूए क्षमता निर्माण योजना के पाठ्यक्रम में सुधार करने के उद्देश्य से एक वार्षिक क्षमता निर्माण तथा मानव संसाधन उपलब्ध कराए जायेंगे| वैयक्तिक क्षमता निर्माण के लिए निधियां राज्य के प्रशासनिक तथा अन्य व्यय/सीबीयूड़ी की निधियों में से उपलब्ध कराई जाएगी|

संस्थागत क्षमता निर्माण: इसका लक्ष्य बहरी विशेषज्ञों तथा प्रोफेशनल की सहायता से संस्थागत परिणामों में (उदाहरणार्थ उत्तरदायित्व तथा पारदर्शिता, सेवाप्रदायगी, नागरिकों का सशक्तिकरण, संसाधन जुटाना) सुधार लाना है| बाहरी संसाधन दो तरह से जुटाए जा सकते हैं 1) कार्यों की आउटसोर्सिंग तथा 2) पदाधिकारियों की आउटसोर्सिंग के द्वारा|  पदाधिकारियों की आउटसोर्सिंग में कोई कार्यकलाप/कार्य बाहरी कम्पनी, संगठन अथवा संस्था को दे दिया जाता है| दोनों मामलों में, लक्ष्यों और परिणामों की उपलब्धियों के आधार पर भुगतान किया जाता है| राष्ट्रीय मिशन निदेशक के द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार एवं ओई निधि/सीसीबीपी/सीबीयूडी के माध्यम से निम्नलिखित कार्यों की आउटसोर्सिंग तथा उनका वित्तपोषण किया जायेगा:

  1. स्मार्ट सिटी चयन स्पर्धा के लिए स्मार्ट सिटी के प्रस्ताव की तैयारी के लिए हैडहोल्डिंग एजेंसियों और/अथवा परामर्शदात्री फर्मों को सूचीबद्ध करना|
  2. एसएलआईपी की तैयारी, परियोजना विकास (उदाहरणार्थ डिजायन, अनुमान) तथा प्रबंधन के लिए अमृत में प्रारंभ से अंत तक सहायता पूरा करने के लिए हैडहोल्डिंग एजेंसियों और/अथवा परामर्शदात्री फर्मों को सूचीबद्ध करना|
  3. अमृत सुधारों तथा सीसीबीपी टूलकिट में अभिज्ञान संकेतकों के अनुसार परिणाम पर ध्यान केन्द्रित करते हुए सुधार कार्यसूची के कार्यान्वयन में सहायता करना
  4. व्यवसायियों तथा प्रबंधकों को उपलब्ध कराकर स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत स्थापित किये जाने वाले विशिष्ट उद्देश्यीय वाहनों के लिए मानव संसाधन तथा सभी अन्य प्रकार की सहयता प्रदान करना |
  5. यूएलबी के बाहरी संसाधनों को जुटाना तथा आंतरिक संसाधन सृजन में सुधार लाना| उदाहरण के लिए, भूमि को मुद्रा के रूप में चलाने तथा कर वृद्धि वित्तपोषक प्रस्ताव तैयार करने के लिए यूएलबी के सहायता उपलब्ध कराकर यूएलबी क्रेडिट रेटिंग के द्वारा म्युनिसिपल बांडों को सुगमता पूर्वक उपलब्ध कराना, निजी वित्तपोषण प्राप्त करना इत्याद|
  6. निर्णय लेने में जीआईएस के उपयोग करने में युएलबी को सक्षम बनाने के लिए आंकड़ों (प्रतीकात्मक तालिका) से सम्बन्धित बहुस्तरीय जीआईएस मानचित्र तैयार करना|
  7. अम्रत सुधार एजेंडा को कार्यन्वित करने के लिए कानून और अन्य नई मदें भी शामिल की जाएगी|

यह सम्पूर्ण सूची नहीं है तथा इसमें मिशन के कार्यान्वयन में समय अन्य नई मदें भी शामिल की जाएगी|

पीएमयू, पीआईयु, आरपीएमसी इत्यादि जैसी राज्य तथा यूएलबी स्तरों पर अनेक संस्थाएं उपलब्ध हैं| इस समय, मिशन द्वारा केवल राज्य स्तरीय सुधार तथा कार्यनिष्पादन प्रबंधन प्रकोष्ठ (आरएमपीसी) को सहायता उपलब्ध कराई जाएगी| वे सीसीपीबी टूलकिट में दिए गए कार्यों को निष्पादित करेंगे, लेकिन उनका ध्यान

क)   एसएएपी, सुधार कार्यान्वयन को तैयार करने में मिशन निदेशक की सहायता करना ताकि सुधार प्रोत्साहन के लिए अहर्ता-प्राप्त करने के लिए कम से कम 70& सुधार लाया जा सके तथा ख) एएमआरयूटी में निर्धारित सुधारों के कार्यान्वयन में उन्हें सहायता देने के लिए मिशन के सभी शहरों का दौरा करना| शहरी प्रबंधन प्रकोष्ठ (यूएमसी) की भी मिशन द्वारा सहायता की जाएगी तथा राज्य मिशन निदेशक को रिपोर्ट करेंगे| सीसीपीबी टूलकिट में दिए गए कार्यों के आलावा वे 1) अलग-अलग प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए एटीआई, सूचीबद्ध प्रशिक्षण एजेंसियों तथा यूएलबी के मध्य समन्यव और सहयोग स्थापित करने 2) प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण चलाने, 3) सूचीबद्ध एजेंसियों के सहयोग से म्युनिसिपल पदाधिकारियों के लिए पूरे वर्ष हेतु कार्यान्मुखी कोचिंग प्रदान करने, तथा 4) सूचीबद्ध प्रशिक्षण संस्थाओं तथा एटीआई के मध्य भागीदारी और नेटवर्किंग को प्रोत्साहित करने पर ध्यान केन्द्रित करेंगे|

राज्य/यूएलबी शहरी विकास मंत्रालय के अनुमोदन के लिए एसएएपी के साथ निम्नलिखित फार्मों में एक क्षमता विकास प्रस्तुत करेंगें|

तालिका 7.1यूएलबी स्तरीय व्यक्तिगत क्षमता विकास योजना

(यूएलबी द्वारा राज्य सरकार को भेजे जाने हेतु)

यूएलबी का नाम -----               वित्त वर्ष ---

क्र.स.

विभाग का नाम/स्थिति

मिशन (2015) के प्रारंभ से चिन्हित कर्मचारियों (सरकारी/निर्वाचित प्रतिनिधियों) की कुल संख्या

पिछले वित्त वर्ष के दौरान प्रशिक्षित किये जाने वालों की संख्या

वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान प्रशिक्षित किये जाने वालों की संख्या

वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान प्रशिक्षण संस्थानों की संख्या

वर्तमान वित्त वर्ष के समापन के बाद प्रशिक्षितों की संचयी संख्या

1

निर्वाचित प्रतिनिधि

 

 

 

 

 

2

वित्त विभाग

 

 

 

 

 

3

अभियन्त्रिकी विभाग

 

 

 

 

 

4

नगर नियोजन विभाग

 

 

 

 

 

5

प्रशासन विभाग

 

 

 

 

 

 

कुल

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

प्रपत्र 7.1.2 वित्तीय

यूएलबी का नाम -----               वित्त वर्ष ---

क्र.स.

विभाग का नाम

वर्तमान वित्त वर्ष तक जारी संचयी धनराशि

वर्तमान वित्त वर्ष तक कुल व्यय

पूर्व में जारी धनराशि से उपलब्ध अव्ययित

प्रपत्र; प्रपत्र 7.1.1 में दिए गये लोगों की संख्या के प्रशिक्षण हेतु वर्तमान वित्त वर्ष के लिए अपेक्षित धनराशि

1

निर्वाचित प्रतिनिधि

 

 

 

 

2

वित्त विभाग

 

 

 

 

3

अभियन्त्रिकी विभाग

 

 

 

 

4

नगर नियोजन विभाग

 

 

 

 

5

प्रशासन विभाग

 

 

 

 

 

कुल

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

तालिका; 7.2 क्षमता निर्माण हेतु वार्षिक कार्य योजना

(राज्यों  द्वारा शहरी विकास मंत्रालय को भेजे जाने हेतु)

राज्य का नाम:----

अम्रत में मिशन शहरों की संख्या

वित्त वर्ष—

प्रपत्र 7.2.1 यूएलबी स्तर पर  व्यक्तिगत क्षमता निर्माण हेतु अपेक्षित धनराशि

क्र.स.

यूएलबी का नाम

वर्तमान वित्त वर्ष में विभाग-वार प्रशिक्षित किये जाने वालों की कुल संख्या

निर्धारित प्रशिक्षण संस्थानों की संख्या

संचालित किये जाने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों की संख्या

मौजूदा वित्त वर्ष में अपेक्षित धनराशि

 

 

निर्वाचित प्रतिनिधि

वित्त विभाग

अभियन्त्रिकी विभाग

नगर नियोजन विभाग

प्रशासन विभाग

कुल

 

 

 

1

यूएलबी 1

 

 

 

 

 

 

 

 

 

2

यूएलबी2

 

 

 

 

 

 

 

 

 

3

यूएलबी3

 

 

 

 

 

 

 

 

 

4

यूएलबी4

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

कुल

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

प्रपत्र 7.2.2  राज्य स्तरीय गतिविधियों के लिए अपेक्षित धनराशि

क्र.स.

राज्य स्तरीय गतिविधि

वर्तमान वित्त वर्ष तक जारी संचयी धनराशि

वर्तमान वित्त वर्ष तक कुल व्यय

पूर्व में जारी धनराशि से उपलब्ध अव्ययित

वर्तमान वित्त वर्ष के लिए अपेक्षित धनराशि

1

आरपीएमसी

 

 

 

 

2

यूएलसी

 

 

 

 

3

अन्य (जैसे कार्यशाला, सेमीनार इत्यादि) जो एनआईयू के द्वारा अनुमोदित हों|

 

 

 

 

4

संस्थानिक

 

 

 

 

कुल

 

 

 

 

 

 

प्रपत्र 7.2.3  क्षमता निर्माण हेतु अपेक्षित कुल धनराशि

क्र स.

अपेक्षित धनराशियां


व्यक्तिगत

संस्थानिक

आरपीएमसी एंव यूएमसी

अन्य

कुल

1

मिशन में प्रारंभ से कुल जारी धनराशि (2015)

 

 

 

 

 

2

कुल प्रयुक्त-केन्द्रीय अंश

 

 

 

 

 

3

उपलब्ध बकाया- केन्द्रीय अंश

 

 

 

 

 

4

अपेक्षित धनराशि- केन्द्रीय अंश

 

 

 

 

 

 

5

वर्तमान वित्त वर्ष में क्षमता निर्माण के लिए अपेक्षित धनराशि

 

 

 

 

 

 

 

प्रपत्र 7.2.4 संस्थानिक  क्षमता निर्माण का ब्यौरा

क)   क्या भूमि एकीकरण को शामिल करने के लिए राज्य अपने शहरी योजना कानूनों एंव विनियमों में संशोधन के इच्छुक हैं?

------------- ---------------

ख)   शहरी स्थानीय निकायों की सूची, जो बांड को जारी करने के लिए प्रथम कदम के रूप में क्रेडिट रेटिंग कराने के इच्छुक हैं?

------- --- --  --  --  -  --

ग)    क्या राज्य शहरी स्थानीय निकायों में निर्णयन के लिए जीआईएस को उपयोगी बनाने हेतु जीआईएस में किये गए सभी कार्यों को एकीकृत करने के इच्छुक हैं?

------   -- --- - - -- -- - - -- - -- - --

घ)    क्या राज्य शहरी स्थानीय निकायों में वित्तीय उपकरण के उपकरण के रूप में भूमि के उपयोग के लिए सहायता लेने के इच्छुक हैं?

--- --- --- -  ---------  ------  --------- --------- ---

ङ)     क्या राज्य को म्युनिसिपल कैडर के व्यवसायीकरण हेतु सहायता की आवश्यकता है?

--------- ---- --------- ----------------  -------

च)    क्या राज्य शहरी स्थानीय निकायों में गैर-राजस्व जल को कम करने हेतु सहायता की आवश्यकता है?

------------ ----------------- ----------------- ----------------

छ)   क्या राज्य शहरी स्थानीय निकायों में सम्पत्ति कर मूल्यांकन एवं संचयन में सुधार हेतु सहायता की आवश्यकता है?

----------------- ----------------- ------------- ------------- ---------

ज)   क्या राज्य को एक वित्तीय मध्यस्थ की स्थापना हेतु सहायता की आवश्यकता है?

------------------ --------------- --------------- ---------------

झ)   अमृत सुधार एजेंडा के कार्यान्वयन की अन्य कोई क्षमता सहायता जो इन दिशानिर्देश में निर्धारित हों?

तालिका 7.3 राज्यों के लिए तिमाही अंक सूची

क्षमता निर्माण पर वित्तीय और भौतिक प्रगति (यूएलबी स्तर)

(शहरी स्थानीय निकायों द्वारा राज्य को भेजे जाने हेतु )

शहरी स्थानीय निकाय का नाम

विभाग का नाम/स्थिति

भौतिक

वित्तीय

 

 

 

 

आनुपातिक यूएलबी लक्ष्य

आनुपातिक लक्ष्य के सम्बन्ध में यूएलबी की उपलब्धि

मौजूदा वित्त वर्ष में आबंटित आनुपातिक धनराशि

आनुपातिक लक्ष्य की तुलना में उपयोग की गई धनराशि

वर्तमान वित्त वर्ष में उपलब्ध शेष  धनराशि

आनुपातिलक्ष्य से  आगे (+) अथवा पीछे (-)

यूएलबी-1

निर्वाचित प्रतिनिधि

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

वित्त विभाग

 

 

 

 

 

 

अभियन्त्रिकी विभाग

 

 

 

 

 

 

नगर नियोजन विभाग

 

 

 

 

 

 

प्रशासन विभाग

 

 

 

 

 

 

 

 

यूएलबी-२

निर्वाचित प्रतिनिधि

 

 

 

 

 

 

वित्त विभाग

 

 

 

 

 

 

अभियन्त्रिकी विभाग

 

 

 

 

 

 

नगर नियोजन विभाग

 

 

 

 

 

 

प्रशासन विभाग

 

 

 

 

 

 

 

तालिका 7.4: राज्यों के लिए तिमाही अंक सूची

क्षमता निर्माण सम्बन्धी वित्तीय एंव वास्तविक प्रगति (राज्य स्तरीय)

(राज्यों द्वारा शहरी विकास मंत्रालय को भेजे जाने हेतु)

यूएलबी की कुल संख्या ----

समाप्त तिमाही;-----

अनुपातिक लक्ष्य से ऊपर/नीचे यूएलबी की संख्या (तालिका 7.3 से)

विभाग का नाम/स्थिति

भौतिक


वित्तीय

 

 

 

 

 

वित्त वर्ष में कूल लक्ष्य

तिमाही तक अनुपात लक्ष्य

वर्तमान वित्त वर्ष में आबंटित धनराशि

तिमाही तक अनुपात लक्ष्य

तिमाही तक प्रशिक्षितों की कुल संख्या, यदि संगत हो

तिमाही तक उपयोग की गई कुल धनराशि

ऊपर

------

 

 

 

 

 

 

 

 

नीचे

-----

व्यक्तिगत प्रशिक्षण

 

 

 

 

 

 

संस्थानिक क्षमता निर्माण

 

 

 

 

 

 

आरपीएमसी और यूएमसी

 

 

 

 

 

 

अन्य-स्पष्ट करें

 

 

 

 

 

 

अन्य-स्पष्ट करें

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अनुलग्नक 8; आद्योपान्त सहयता का क्षेत्र

  1. प्रत्येक पीडीएमसी को राज्य के सम्बन्धित शहर में एक कार्यालय (जिसमें परियोजना प्रबंधन और डिजायन व्यवसायियों शामिल होंगे) और बहुक्षेत्रीय कार्यालय (जिसमें परियोजना कार्यान्वयन व्यवसायी शामिल होंगे) पीडीएमसी के प्रबंधन और डिज़ाइन व्यवसायी राज्य कार्यालय में होंगे और वे कार्य की आवश्यकतानुसार परियोजना शहरों में यात्रा करेंगें|
  2. 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में परियोजना कार्यान्वयन व्यवसायी होंगे और पांच लाख से कम आबादी वाल्व सभी आस-पास अम्रत शहरों की सेवा करेंगे| असाधारण मामलों में राज्य तीन लाख आबादी वाले शहरो के आस-पास कई शहरों के लिए  पीडीएमसी नियुक्त कर सकते हैं| संघ राज्यों क्षेत्रों, पूर्वोत्तर और पर्वतीय राज्यों में प्रचलित विशेष परिस्थितियों के आधार पर वे कार्यान्वयन व्यसायियों का पता लगाने के लिए एक भिन्न संरचना पर निर्णय ले सकते हैं|
  3. प्रस्तावित मिशन के अतर्गत पीडीएमसी के क्षेत्र को चार व्यापक घटकों अर्थात् आयोजना, डिजायन, पर्यवेक्षण और परियोजना प्रबंधन में विभाजित किया जायेगा| पीडीएमसी के क्षेटर्म में नगर-व्यापी संकल्पना योजना, सेवा-स्तरीय सुधार योजना (एसएलआईपी) राज्य वार्षिक कार्य योजना (एसएएपी) शामिल हैं| पीडीएमसी एसएलआईपी के ढांचे के आधार पर परियोजनाओं का पता लगायेंगे और अपेक्षित जाँच, डिज़ाइन, क्रय. अधिप्रापण और कार्यान्वयन करेंगे| पीडीएमसी पीएमआईएस/अद्यतन आइटी साधनों तथा साइबर साधनों/उपकरणों की सहायता से कार्य स्थलों की ऑन-लाइन निगरानी जैसी तकनीकों का उपयोग करते हुए परियोजना के कार्यकलापों की निगरानी और अनुपालनों को भी सुनिश्चित करेंगे|
  4. पीडीएमसी “शहर-व्यापी संकल्पना योजना” को विकसित करेंगे जो पुर्णतः नगर विकास योजना (सीडीपी) नहीं है| यह पुराणी अथवा संशोधित नगर विकास योजना पर आधारित हो सकती है| शहर-व्यापी संकल्पना योजना में नगर विजन, विवरण, स्थिति विशलेषण/जल आपूर्ति का वही विवरण, वर्षा जल निकासी, सीवरेज और सेफ्टेज प्रबंधन और खुले स्थान (उदाहरणार्थ नगर सफाई योजना, नगर गतिशीलता योजना, मास्टर प्लान और अन्य योजनायें ) की सेवा स्तरीय मानदंडों (एसएलबी) की उपलब्धि पर ध्यान केन्द्रित करने वाली एक समग्र कार्यनीति तैयार करने के लिए भी समीक्षा की जाएगी| नगे के लोगों को बेहतर और उन्नत बुनियादी सेवाएं प्रदान करने के लिए स्मार्ट प्रौद्योगिकियों  को लागू करने की सम्भावनाओं को इस कार्यनीति में शामिल किया जायेगा|
  5. पीडीएमसीजल आपूर्ति और सीवरेज की कवरेज मौजूदा स्तरों का मूल्यांकन करने के लिए उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर जानकारी और योजनायें बनायेगे| लगभग सभी मिशन शहरों में कुछ आंकड़े, सूचना और योजानाएँ होंगी| उदाहरणार्थ आपूर्ति और सीवरेज में जमीनी रुपरेखा के आधरभूत यूनिट जों (अथवा समकक्ष) है| जों में जल कनेक्शनों वाले परिवारों की संख्या और जिनके पास ये कनेक्शन नहीं हैं, उनकी संख्या जनगणना (2011) अथवा शहरी विकास मंत्रालय द्वारा किये गए आधारभूत सर्वेक्षण से ली जाएगी| योजना अवस्था पर किसी नये आधारभूत सर्वेक्षण की परिकल्पना नहीं की गई है|
  6. एक बार जल सीवरेज/सेफ्टेज कनेक्शनों वाले परिवारों की मौजूदा संख्या और परिवारों की कुल संख्या की बीच के अंतर का हिसाब लगा लिया जाता है तो मिशन दिशानिर्देशों में निर्धारित एक अथवा इससे अधिक घटकों का उपयोग करके इस अंतर को पूरा करने के लिए योजनायें तैयार की जाएगी|
  7. इससे आगे किसी जों में जल आपूर्ति और सीवरेज और सीवरेज/सेफ्टेज कनेक्शनों से सभी परिवारों को कवर करने के लिए विभिन्न तरीकों, तकनीकी और वित्तीय दोनों तरीकों को दर्शाते हुए विकल्प तैयार करने के लिए तकनीकी जाँच की जाएँगी|
  8. पीडीएमसी अन्य स्कीमों से अंतर-सम्पर्कों, मुख्यतः कवरेज, प्रभाव, परिणामों इत्यादि, परिणामों में समाभिरूपता के सन्दर्भ में जाँच और उनका उपयोग करेंगे तथा निधियों के प्रवाह के लिए भी कार्य किया जायेगा| यहाँ कम साधनों से अधिक कार्य करने के नवीन तरीकों, स्मार्ट हलों के प्रयोग और नागरिक जनित नवीन तरीकों का पता लगाया जायेगा| इस परियोजना की प्रत्येक वैकल्पिक लागत (पूंजीगत औरप्रचालन एवं अनुरक्षण दोनों) के लिए ऑन-लाइन (अथवा सार) अनुमानों के आधार पर तैयार किये जायेंगे| इस जाँच के पश्चात, सेवा स्तरीय सुधार योजना (एसएलआईपी) तैयार की जाएगी जिसमें उनकी पूंजीगत और प्रचालन एंव अनुरक्षण लागतों के साथ वाले विकल्प समाहित होंगे|
  9. अगले पांच वर्षों के लिए एसएलआईपी में परियोजनाओं का कार्यक्रम जोनों/शहरी निकायों में सभी परियोजनाओं की सम्भावित लागतों के बारे में उनको सूचित करने के पश्चात नागरिकों से परामर्श लेते हुए बनाया जाएगा| शहर आयोजना और एसएलआईपी विकास लोक-चालित होगा उसकों आवासी कल्याण संघों, कर दाता संघों, वरिष्ठ नागरिकों, वाणिज्य एवं उद्योग मंडलों, स्लम वासी संघ समूहों जैसे विविध लोगों और लोगों के समूहों को शामिल करते हुए नागरिक परामर्श बैठकों के माध्यम से किया जायेगा| इन परामर्शों के दौरान उत्तम पद्धियों और समुचित स्मार्ट हलों के विवरणों को नागरिकों के साथ उनको सोचे-समझे निर्णय तथा नवीन हल सृजित करने के लिए सक्षम बनाने के लिए भी साझा किया जायेगा| नागरिक सहभागिता उत्तरोत्तर आईसीटी, विशेषतौर से मोबाइल-आधारित साधनों पर निर्भर करेगी|
  10. एक वित्तीय योजना भी तयारी की जाएगी| परामर्शों के दौरान नागरिकों  को लागत और निधियों के बाह्य स्रोतों की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी जाएगी| नवीन वित्तपोषण मॉडलों और तंत्रों का पूरी तरह से वर्णित किया जाएग| बेंचमार्क स्तरों, कम लागतों और कम संसाधनों का उपभोग करके मूलभूत सेवाएँ प्रदान करने में चुनौती को नागरिकों के साथ साझा किया जायेगा|
  11. एसएएपी को विकसित करने की प्रक्रिया के दौरान, पीडीएमसी को सार्वजनिक-निजी भागीदारियों (पीपीपी) का उपयोग करने की सम्भावना का पता लगाना चाहिए जो वरीय निष्पादन मॉडल होना चाहिए|
  12. एसएएपी के अंतर्गत पता लगाई गई और अनुमोदित की गई परियोजना के लिए, पीडीएमसी विस्तृत परियोजना रिपोर्टें और बोली दस्तावेज तैयार करेंगे| सेवा स्तरीय सूचकों के सन्दर्भ में अवस्थापना स्थिति, अंतर और मांग अनुमान की समीक्षा चिन्हित परियोजनाओं के लिए की जाएगी| परियोजना घंटक की समाभिरूपता को अन्य क्षेत्रीय अरु शहर में क्षेत्रीय कार्यक्रमों के अनुसार सुनिश्चित किया जायेगा|
  13. क्षेत्रीय/प्रयोगशाला जाँचों, सर्वेक्षणों, तकनीकी विकल्पों का निर्माण, डिजायन, लागत अनुमान और पुनर्वास एवं पर्यावरणिक मुद्दों के हलों को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट का एक भाग बनाया जाएगा| इस परियोजना के जीवन चक्र की पूरा करने के लिए प्रचालन एंव अनुरक्षण कार्यनीति समेत वित्त योजना विस्तृत परियोजना रिपोर्ट का एक अभिन्न अंग होगी|
  14. विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करते समय नागरिकों को बेहतर और उन्नत आधारभूत सेवाएं प्रदान करने के लिए समार्ट प्रौद्योगिकियां लागू करने की संभावनाओं का पता लगाया जाएगा| प्रारूप डीपीआर के स्तर पर, पीडीएमसी द्वारा नागरिकों को लगाने और फीडबैक प्राप्त करने तथा आवश्यक हो, तो मध्यवर्ती सुधार की प्रक्रिया अपनाने के लिए पहले स्तर के परामर्शों को सुकर बनाया जायेगा|
  15. डीपीआर, पीपीपी/सेवा स्तरीय करारों अथवा प्रत्यक्ष संविदा के विकल्पों का पता लगाने समेत संविदा अवसरों का पता लगाएगी और तदनुसार सदृश बोली दस्तावेज प्रदान करेगी| बोली दस्तावेज के आधार पर, पीडएमसी राज्यों/शहरी स्थानीय निकायों की उनके कानूनों और नियमों के अनुसार संविदा फर्मों के अधिप्रमाण में सहायता करेंगे|
  16. पीडीएमसी शहरी स्थानीय निकार्यों/राज्यों पैरास्टेटल को परियोजना निष्पादन में व्यापक सहायता प्रदान करेंगे| ये लागत, समय और गुणवत्ता अनुपालनों को सुनिश्चित करने में सहायता करेंगे जैसी कि संविदा करार में परिकल्पना की गई है|  राज्य और  शहर की सरकारों द्वारा तेजी से निर्णय करने के लिए पीडीएमसी की फर्मों की सुविज्ञता का उपयोग किया जायेगा ताकि अनुमानों के भीतर परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जाना सुनिश्चित किया जा सके|
  17. पीडीएमसी, प्रस्तावित अवस्थापना परियोना और सेवाओं की प्रदानगी में सम्पर्क को भी सुनिश्चित करेंगे| ये सेवा स्तरीय सूचकों में सुधार की निगरानी करेंगे जैसा कि राज्य वार्षिक कार्य योजना (एसएएपी) में निहित है| कार्यान्वन के चरण के दौरान पीडीएमसी द्वारा लाभदायक फीडबैक लेने के लिए समय-समय पर द्वितीय स्तर परामर्श को भी सुकर बनाया जायेगा|
  18. सभी कार्यों को मिशन विवरण और शहरी विकास मंत्रालय द्वारा जारी किये गए अम्रत (एएमआरयूटी) के दिशानिर्देशों के अनुसार किया जाना होगा|
  19. कार्य के विशिष्ट क्षेत्र, व्यावसायिक स्टाफ की आवश्यकता, भुगतान कार्यक्रम और कार्यान्वयन व्यवस्था सहित विस्तृत विचारार्थ विषय सम्बन्धित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र द्वारा परामर्शी फर्मों को जारी किये जाने वाले प्रस्ताव हेतु अनुरोध (आरएफपी) में प्रदान किये जायेंगे|


स्रोत: शहरी विकास मंत्रालय, भारत सरकार|

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