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एकीकृत वस्त्र पार्क योजना (एसआईटीपी) के दिशानिर्देश

इस पृष्ठ में 01.04.2017 से 31.03.2020 तक की एकीकृत वस्त्र पार्क योजना (एसआईटीपी) के दिशानिर्देश की जानकारी डी गयी है I

एकीकृत वस्त्र पार्क योजना (एसआईटीपी) के दिशानिर्देश-01.04.2017 से 31.03.2020 तक

सं. 19/2/2016-एसआईटीपी- वस्त्र क्षेत्र में निवेश बढ़ाने, रोजगार अवसरों का सृजन करने तथा निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से देश भर में वस्त्र केंद्रों में विश्व स्तरीय, उत्कृष्ट अवसंरचना के साथ वस्त्र पार्को की स्थापना के लिए सब्सिडी प्रदान करने हेतु एक योजना सरकार द्वारा क्रियान्वित की जा रही है। सरकार ने अब 01.04.2017 से 31.03.2020 तक की तीन वर्षों की अवधि के लिए परिवर्तनों के साथ एकीकृत वस्त्र पार्क योजना (एसआईटीपी) को जारी रखने का अनुमोदन प्रदान कर दिया है। योजना के संशोधित दिशानिर्देश इस प्रकार हैं-

योजना का उद्देश्य

योजना का प्रमुख उद्देश्य उद्यमियों के समूह को अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण एवं सामाजिक मानकों के अनुरूप वस्त्र इकाइयों की स्थापना के लिए एक कलस्टर में अत्याधुनिक अवसंरचना की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है ताकि वस्त्र क्षेत्र में निजी निवेश को प्रेरित और नए रोजगार के अवसरों को सृजित किया जा सके।

योजना की पात्रता

उद्योग संघ, उद्यमियों के समूह तथा राज्य सरकार की एजेंसियां एकीकृत वस्त्र पार्को (आईटीपी) के मुख्य प्रर्वतक होंगे। प्रत्येक आईटीपी में स्थानीय उद्योग, वित्तीय संस्थानों, राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचनात्मक निगमों तथा राज्य एवं केंद्र सरकारों की अन्य एजेंसियों के प्रतिनिधियों द्वारा गठित एक विशेष प्रयोजनतंत्र (एसपीवी) मौजूद होगा। यह एसपीवी अनिवार्य रूप से कंपनी अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत एक निगमित निकाय होगा। प्रत्येक प्रर्वतक की निवल संपत्ति परियोजना के अंतर्गत प्रस्तावित उसकी कुल इक्विटी के 1.5 गुणा से कम नहीं होना चाहिए। एसपीवी के लिए किसी अन्य संरचना हेतु परियोजना अनुमोदन समिति का अनुमोदन आवश्यक होगा।

संभावना एवं संघटक

यह योजना उच्च विकास क्षमता वाले ऐसे औद्योगिक कलस्टरों तथा स्थानों को लक्षित करती है जिन्हें विश्व स्तरीय अवसंरचनात्मक सहायता का विकास करने के लिए रणनीति निवेश की आवश्यकता होती है।

योजना के कार्यक्षेत्र

परियोजना लागत में आईटीपी की आवश्यकता के आधार पर उत्पादन/सहायता क्रियाकलापों (वस्त्र मशीनरी, वस्त्र इंजीनियरिंग,उपस्करों, पैकेजिंग सहित) के लिए सामान्य अवसंरचना तथा भवन शामिल होंगे। प्रत्येक परियोजना सामान्य रूप से सरकारी अनुदान की पहली किस्त के जारी होने की तिथि से 3 वर्ष के अंदर पूरी की जाएगी।

संघटक

एक आईटीपी में निम्नलिखित संघटक शामिल होंगे

भूमि का पंजीकरण एसपीवी के नाम पर होना चाहिए। एसपीवी द्वारा वस्त्र पार्को के लिए भूमि की खरीद अथवा लीज के माध्यम से व्यवस्था न्यूनतम 30 वर्ष की अवधि के लिए की जाएगी। भूमि के पंजीकृत मूल्य को परियोजना में उद्योग के इक्विटी हिस्से के रूप में माना जाएगा। भारत सरकार के अनुदान का प्रयोग भूमि की खरीद के लिए नहीं किया जाएगा तथा परियोजना लागत में भूमि की लागत शामिल नहीं होगी।

सामान्य अवसंरचना जैसे कम्पाउंड बॉल, सड़कें, ड्रेनेज, जल आपूर्ति, कैप्टिव पॉवर प्लांट सहित बिजली, सामान्य बहिस्राव शोधन संयंत्र तथा दूरसंचार लाइनें आदि।

सामान्य सुविधाओं के लिए भवन जैसे परीक्षण प्रयोगशाला, डिजाइन केंद्र, प्रशिक्षण केंद्र, व्यापार केंद्र/प्रदर्शन केंद्र, भंडार-गृह सुविधा/कच्ची सामग्री का डिपो, पैकेजिंग इकाई, क्रेच, कैंटीन, कामगारों का होस्टल, सेवा प्रदाताओं का कार्यालय, श्रमिकों के आराम तथा मनोरंजन की सुविधाएं, विपणन सहायता प्रणाली (बैकवर्ड/फॉरवर्ड संपर्क) आदि।

फैक्ट्री भवन उत्पादन उद्देश्यों के लिए

ऊपर प्रत्येक समूह के अंतर्गत शामिल मदें केवल प्रतीकात्मक हैं तथा आईटीपी के सदस्यों की विशिष्ट उत्पादन तथा व्यापारी आवश्यकताओं के अनुरूप ऊपर उल्लिखित सभी सुविधाओं अथवा उनमें से कुछ का चयन करते हुए प्रत्येक आईटीपी का विकास किया जा सकता है। परियोजना अनुमोदन समिति (पीएसी) मामला-दर-मामला आधार पर परियोजना लागत में किसी संघटक को शामिल करने अथवा न करने के मामले में गुणदोष के आधार पर अपनी सिफारिश देगी। इस योजना के लिए कुल पात्र परियोजना लागत में ऊपर 3.2.2, 3.2.3. तथा 3.2.4 के अंतर्गत सूचीबद्ध अनुसार आईटीपी के संघटकों के लिए लागत शामिल है बशर्ते फैक्ट्री भवन का मालिकाना हक एसपीवी के पास हो। परियोजना लागत में अवसंरचना की डिजाइन तथा निष्पादन के लिए एसपीवी द्वारा नियुक्त किए गए परामर्शदाताओं का तकनीकी शुल्क शामिल नहीं होगा।

योजना के अंतर्गत प्रत्येक एकीकृत वस्त्र पार्क (आईटीपी) के अंतर्गत वरीयत: 25 एकीकृत इकाइयां होनी चाहिए। प्रत्येक आईटीपी में उद्यमियों की संख्या और परिणामरूवरूप निवेश की मात्रा अलग-अलग परियोजनाओं में अलग-अलग हो सकती है। तथापि एक पार्क में प्रर्वतकों तथा उद्यमियों द्वारा भूमि, फैक्ट्री भवन और संयंत्र एवं मशीनरी में समग्र निवेश नीचे पैरा 3.5 में उल्लिखित अनुपात के अनुसार होगा। प्रत्येक पार्क में न्यूनतम 25 एकड़ भूमि एसपीवी के नाम पर पंजीकृत होनी चाहिए अथवा एसपीवी के पास नयूनतम 30 वर्षों के लिए भूमि की पंजीकृत लीज डीड होनी चाहिए। पूर्वोत्तर राज्यों तथा अन्य विशेष श्रेणी राज्यों के मामले में 10 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी।

वस्त्र पार्को में निवेश का स्तर नीचे विनिर्दिष्टानुसार होगा -

3.5.1. एसपीवी में 8 से कम प्रर्वतकों वाले एकीकृत प्रस्ताव के मामले में परियोजना लागत और निवेश का अनुपात 1-10 होगा।

3.5.2.  एसपीवी में 8 या उससे अधिक प्रर्वतकों वाले मामले में परियोजना लागत और निवेश का अनुपात 1-6 होगा।

एकीकृत पार्क प्रस्तावों में वस्त्र मूल्य श्रृंखला के स्पिनिंग, विविंग, निटिंग, प्रसंस्करण, परिधान आदि में

से न्यूनतम 3 सेगमेंट शामिल होने चाहिए।

3.6 योजना के अंतर्गत स्थापित किए जा रहे नए आईटीपी को एसईजेड से छूट प्रदान की जा सकती है।

अन्य योजनाओं के साथ संमिलन

इस योजना के तहत पार्को में स्थापित इकाइयों को सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत योग्य लाभ प्राप्त हो सकता है, जैसा कि नीचे दर्शाया गया है- -

संयंत्र और मशीनरी

यदि एसपीवी अथवा पार्को में इकाइयों को संयंत्र और मशीनरी की खरीद के लिए सहायता की आवश्यकता हो तो वस्त्र मंत्रालय की एटीयूएफएस योजना के अंतर्गत पृथक प्रस्ताव प्रस्तुत किए जा सकते हैं। एटीयूएफएस (2022 तक) के अंतर्गत विभिन्न सेगमेंट के लिए सब्सिडी की दरें और सीमाएं नीचे दर्शाई गई हैं-

सेगमेंट

 

पूंजीगत निवेश सब्सिडी (सीआईएस)

सीआईएस प्रति व्यक्ति इकाई

 

गारमेंटिंग, तकनीकी वस्त्र

पात्रे मशीनों पर 15%

30 करोड़ रुपए

 

नए शटल रहित करघों के लिए वीविंग (वीविंग की तैयारी और निटिंग सहित) प्रसंस्करण, पटसन, रेशम और हथकरघा।

 

पात्र मशीनों पर 15%

30 करोड़ रुपए

समग्र इकाई/एकाधिक सेगमेंट - अगर परिधान और तकनीकी वस्त्र श्रेणी के संबंध में पात्र पूंजी निवेश पात्र परियोजना लागत के 50% से अधिक है

पात्र मशीनों पर 15%

30 करोड़ रुपए

समग्र इकाई/एकाधिक सेगमेंट- अगर परिधान और  तकनीकी वस्त्र श्रेणी के संबंध में पात्र पूंजी निवेश 50% से कम है।

 

पात्र मशीनों पर 10%

20 करोड़ रुपए

 

यदि आवेदक ने आरआरटीयूएफएस के तहत पहले सब्सिडी का फायदा उठाया था, तो वह केवल एक एकल इकाई के लिए निर्धारित कुल सीमा के भीतर शेष राशि के लिए पात्र होगा।

एटीयूएफएस के तहत किसी एकल इकाई द्वारा समग्र निवेश के लिए अधिकतम सब्सिडी संबंधित

सेगमेंट के लिए ऊपर उल्लिखित अनुसार सीमित होगी।

आवश्यक श्रमशक्ति को कुशल बनाने के लिए, पार्क में इकाइयां वर्ष 2017-18 से 2019-20 की अवधि के लिए "समर्थ" वस्त्र क्षेत्र में क्षमता निर्माण के लिए योजना के तहत लाभ प्राप्त कर सकती हैं। योजना के अंतर्गत, प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए वित्त पोषण एमएसडीएंडई के तहत राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ़) के प्रत्येक पाठ्यक्रम के लिए सामान्य मानकों के अनुसार प्रति घंटे की लागत पर आधारित है । प्रशिक्षण भागीदार अपने स्वयं के खर्च पर प्रशिक्षण केंद्रों को अपेक्षित बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे।

यदि पार्क को मरीन डिस्चार्ज या ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम की जरूरत होती है, तो एक एकीकृत प्रसंस्करण विकास योजना (आईपीडीएस) के तहत सहायता मांगने के लिए पार्क के आस पास चिन्हित अलग-अलग जमीन के साथ अलग-अलग डीपीआर प्रस्तुत की जा सकती है।

आईपीडीएस के दिशानिर्देशों के अंतर्गत, 75 करोड़ रुपए की सीमा के अध्यधीन पात्र परियोजना लागत

की 50% सब्सिडी प्राप्त की सकती है।

राज्य सरकारों के कार्यक्रमों और नीतियों के तहत टेक्सटाइल पार्कों के लिए राज्य सरकार से अतिरिक्त अनुदान प्राप्त किया जा सकता है।

प्रस्तावों का प्रारूप

परियोजना के प्रस्तावों को निम्नलिखित तरीके से प्रस्तुत किया जाना चाहिए

प्रस्तावों को तैयार करना

एसपीवी द्वारा मांग और विकास के लिए संभावना के आधार पर विशिष्ट क्षेत्र में सामान्य सुविधा और अवसंरचना की आवश्यकताओं के एक नैदानिक अध्ययन के आयोजन के बाद परियोजना का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। परियोजना का प्रारूप, संरचना और रूपरेखा, जिन्हें विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में शामिल किया जा सकता है, अनुलग्नक- । में दिए गए हैं। यह रूपरेखा सांकेतिक है और व्यापक नहीं है। डीपीआर के साथ संबंधित राज्य सरकार से अनापत्ति प्रमाण-पत्र’ तथा ऋणप्रदाता एजेंसी से ‘सैद्धांतिक अनुमोदन प्रस्तुत किया जाना चाहिए। यदि कुछ राज्यों अथवा ऋणप्रदाता एजेंसियों को मंत्रालय के ‘सैद्धांतिक अनुमोदन’ की आवश्यकता हो तो उसे इस शर्त के साथ जारी किया जाएगा कि राज्य सरकार गुणदोष के आधार पर अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी करेगी और ऋणप्रदाता संस्थान भी गुणदोष के आधार पर व्यवहार्यता प्रमाण-पत्र जारी करेगा जो डीपीआर में शामिल होगा।

प्रस्ताव प्रस्तुत करना

पात्र एसपीवी परियोजना प्रस्तावों को वस्त्र मंत्रालय के अवसंरचना प्रभाग में ऊपर उल्लिखित प्रपत्र में सभी संगत सहायक दस्तावेजों के साथ प्रस्तुत करेगा।

मूल्यांकन प्रक्रिया

विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की जांच और मूल्यांकन तकनीकी व्यवहार्यता और वित्तीय व्यवहार्यता के दृष्टिकोण से परियोजना मॉनीटरिंग इकाई (पीएमयू) की सहायता से अवसंरचना प्रभाग द्वारा की जाएगी। पीएमयू का चयन सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। पीएमयू के रूप में चयनित की गई एजेंसी के पास परियोजना वित्त में घरेलू विशेषज्ञता, अवसंरचना विकास, परियोजना प्रबंधन, आईटी समाधान विकसित करने की क्षमता आदि होगी। पीएमयू वस्त्र मंत्रालय के अवसंरचना प्रभाग के प्रत्यक्ष प्रशासनिक नियंत्रणाधीन होगी। पीएमयू मंत्रालय को प्रस्तुत की गई डीपीआर पर अथक परिश्रम करेगी और अपनी सिफारिशें अवसंरचना प्रभाग, जो बदले में परियोजना अनुमोदन समिति को प्रस्ताव प्रस्तुत करेगा, को प्रस्तुत करेगी।

परियोजना अनुमोदन

माननीय वस्त्र मंत्री की अध्यक्षता में परियोजना अनुमोदन समिति(पीएसी) द्वारा परियोजनाएं अनुमोदित की जाएंगी। पीएसी में सदस्य के रूप में संबंधित राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ सचिव (वस्त्र), अपर सचिव एवं वित्तीय सलाहकार (वस्त्र), अवसंरचना प्रभाग के प्रभारी संयुक्त सचिव (वस्त्र), वस्त्र आयुक्त तथा डीआईपीपी, एमओईएफ, मएसएमई और एमएसडीई के संयुक्त सचिव शामिल होंगे। वस्त्र अनुसंधान संघ जैसे सिटरा, अटिरा, टेक्सप्रोसिल, एसआरटीईपीसी तथा उद्योग निकाय जैसे सीआईटीआई अथवा एसआईएमए के प्रतिनिधि, यदि आवश्यक समझा गया, ‘विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में संबद्ध हो सकते हैं।

वित्तीय पैटर्न

वित्त पोषण पैटन तथा निधियों को निम्नलिखित अनुसार जारी किया जाएगा-

वित्त पोषण पैटर्न

कुल परियोजना लागत, पैरा 3.3 में विनिर्दिष्ट अनुसार का वित्त पोषण वस्त्र मंत्रालय (भारत सरकार), राज्य सरकारों, राज्य औद्योगिक विकास निगम से अनुदान, उद्योग से इक्विटी और बैंकों/वित्तीय संस्थाओं से ऋण के माध्यम से किया जाएगा। योजना के अंतर्गत अनुदान के रूप में भारत सरकार की सहायता 40 करोड़ रुपए की सीमा के अध्यधीन पात्र परियोजना लागत के 40% तक सीमित होगा। भारत सरकार की सहायता अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, जोरम, नागालैंड, त्रिपुरा, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड तथा जम्मू एवं कश्मीर राज्यों में पहली दो परियोजनाओं (प्रत्येक) के लिए 40 करोड़ रुपए की सीमा के अध्यधीन परियोजना लागत के 90% की दर से दी जाएगी। केंद्र सरकार पार्क के एसपीवी के बोर्ड में एक नामिति रखने के लिए पात्र होंगे।

निधियों की रीलिज

एसपीवी को भारत सरकार की सहायता की रीलिज 30-40-30 के अनुपात में 3(तीन) किस्तों में की जाएगी। निधियों को जारी करने संबंधी निबंधन एवं शर्तों का ब्यौरा अनुबंध-|| में दिया गया है। एसपीवी अपने दावे वस्त्र मंत्रालय को अग्रेषित करेगा। अवसंरचना प्रभाग, मंत्रालय द्वारा प्राप्त किए गए दावों की जांच पीएमयू की सहायता से करेगा और सरकारी नियमों एवं दिशानिर्देशों के अंतर्गत अपेक्षित अनुसार जीएफआर-12ए (जीएफआर 2017) के प्रपत्र में उपयोगिता प्रमाणपत्र रसीद पूव बिल, जमानत बंध-पत्र आदि सहित सभी अपेक्षित दस्तावेजों के सत्यापन के पश्चात दावों की सिफारिश करेगा। भारत सरकार द्वारा जारी की गई निधियों के लिए एसपीवी द्वारा पृथक खाता रखना होगा जो भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा लेखा-परीक्षा के अध्यधीन होगा।

प्रशासनिक/विविध व्यय के लिए बजट

प्रशासनिक व्यय, मूल्यांकन, अध्ययन, अनुसंधान एवं संगोष्ठियों, सूचना के प्रचार-प्रसार, विज्ञापन तथा आईटी समर्थित मॉनीटरिंग तंत्र में रखने आदि के लिए एक बजट प्रावधान जो वार्षिक बजट का 2% से अधिक नहीं होगा, किया जाएगा।

परियोजना निष्पादन

विशेष प्रयोजन तंत्र (एसपीवी) परियोजना के निष्पादन के लिए केंद्र बिंदु होगा और निम्नलिखित भूमिका अदा करेगा -

  • परियोजना की अवधारणा तैयार करना, वित्तीय समाप्ति प्राप्त करना, परियोजना क्रियान्वयन और अवसंरचना का प्रबंधन करना।
  • भूमि की खरीद, जिसकी लागत परियोजना लागत में शामिल नहीं की जाएगी।
  • पार्क को समय से पूरा करने और सरकारी अनुदानों के उचित उपयोग के लिए वस्त्र मंत्रालय के साथ करार करना।
  • निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से ठेकेदारों/परामर्शदाताओं की नियुक्ति। परियोजना को समय से पूरा सुनिश्चित करने के लिए एसपीवी परामर्शदाताओं और ठेकेदारों से उपयुक्त निष्पादन गारंटी प्राप्त करेगा।
  • इकाइयों के स्थापना के लिए अवसंरचना का विकास और उद्योग के लिए स्थलों का आवंटन।
  • आईटीपी में इकाइयों की स्थापना के लिए अपेक्षित सुरक्षित बैंक वित्त की सुविधा।
  • आईटीपी के लिए सृजित की गई जनउपयोगी सुविधाओं और अवसंरचना के रखरखाव के लिए

सेवा और प्रयोक्ता प्रभारों के संग्रह की जिम्मेदारी।

  • एसपीवी द्वारा प्रदान की गई विभिन्न सुविधाओं और सेवाओं के लिए प्रयोक्ता प्रभार निर्धारित करना। संचालन और रखरखाव (ओएंडएम) लागतों की पूरी वसूली प्रयोक्ता प्रभारों के माध्यम से की जाएगी।

मॉनीटरिंग

वस्त्र मंत्रालय पीएमयू और वस्त्र आयुक्त का कार्यालय की सहायता से योजना के अंतर्गत परियोजनाओं की समय-समय पर मॉनीटरिंग करेगा -

  1. योजना के अंतर्गत परियोजनाओं की वास्तविक मॉनीटरिंग को समर्थ बनाने के उद्देश्य से पीएमयू द्वारा एक वस्त्र पार्क सूचना प्रणाली (टीपीआईएस) का विकास और रखरखाव किया जाएगा। टीपीआईएस वस्त्र पार्क के संघटकों की प्रगति पर निगाह रखने के लिए कोष के रूप में सेवा भी करेगा। पीएमयू, एक उपयुक्त वेब आधारित वास्तविक मॉनीटरिंग प्रणाली तैयार करने के अलावा, मंत्रालय द्वारा समय-समय पर अपेक्षित अनुसार विशिष्ट रिपोर्टों का संग्रह करेगा और प्रस्तुत करेगा।
  2. वस्त्र आयुक्त का कार्यालय वस्त्र मंत्रालय द्वारा अपेक्षित अनुसार निरीक्षण रिपोर्ट प्रदान करेगा। डीपीआर की प्रतियां और पीएसी का अनुमोदन वस्त्र आयुक्त के कार्यालयों को परियोजनाओं की फील्ड स्तर की मॉनीटरिंग करने में समर्थ बनाने के लिए अग्रेषित किया जाएगा।
  3. जिला स्तरीय समन्वय समिति - जिला कलक्टर की अध्यक्षता में वस्त्र मंत्रालय और अन्य हितधारकों के प्रतिनिधियों के साथ पार्क की प्रगति के समन्वय और मॉनीटरिंग के लिए एक जिला स्तरीय समन्वय समिति स्थापित की जा सकती है।
  4. उपयुक्त के अलावा प्रत्येक एसपीवी को एक पार्क वेबसाइट बनानी होगी और वस्त्र पार्क की बेहतर दृश्यता और प्रचार-प्रसार के लिए नियमित आधार पर इसे अद्यतन करेगा। वे वस्त्र पार्क को गूगल-अर्थ थ्रीडी व्यू के साथ लिंक करने के प्रयास भी करेंगे।

राज्य सरकारों से सहायता

परियोजना के निष्पादन के लिए मंत्रालय, एसपीवी और राज्य सरकार के मध्य (पीएमयू और वस्त्र आयुक्त का कार्यालय के माध्यम से) निकट समन्वय किया जाएगा। राज्य सरकारें संबंधित विभागों के मुख्य सचिव/सचिव/कार्यालय प्रमुख स्तर के अधिकारियों की अधिकार प्राप्त समिति का गठन करके निम्नलिखित के लिए विशिष्ट समय-सीमा के साथ एक एकल खिड़की क्लियरेंस तंत्र प्रदान करेंगे -

• आईटीपी की स्थापना के लिए, जहां कहीं आवश्यकता है, अनुदान की सभी अपेक्षित सांविधिक और अन्य क्लियरेंस।

• आईटीपी को बिजली, पानी, क्लियरेंस और अन्य जनउपयोगी सुविधाओं के लिए सहायता।

• उपयुक्त भूमि की पहचान और खरीद में संभावित प्रमोटरों के लिए सहायता।

• राज्य सरकार की एजेंसियों जैसे अवसंरचना और आद्योगिक विकास निगमों द्वारा परियोजनाओं में

भागीदारी; अथवा एसपीवी की इक्विटी की सदस्यता लेने के माध्यम से अथवा अनुदान प्रदान करके।

• श्रम अनुकूल नीतियों और पर्यावरण का प्रावधान; और निवेश आकर्षित करने के लिए

आईटीपी में स्थित इकाइयों के लिए विशेष सुविधाओं जैसे स्टाम्प ड्यूटी की छूट का विस्तार।

वस्त्र आयुक्त के कार्यालय के क्षेत्रीय अधिकारी अनुमोदन और निष्पादन चरणों में बेहतर समन्वय के

लिए अधिकार प्राप्त समिति की सहायता करेंगे।

क्रियान्वयन में विलंब के परिणाम और दुरूपयोग बाहर हो जाना

परियोजना के पूरा होने से पूर्व किसी परियोजना के निष्पादन से बाहर होने वाली एसपीवी के मामले में, एसपीवी को अर्जित ब्याज के साथ सरकारी सहायता और 10% दंडात्मक ब्याज तत्काल लौटाना चाहिए।

परियोजना अवधि का विस्तार

क्रियान्वयन की अवधि में किसी संशोधन के लिए पीएसी का अनुमोदन चाहिए होगा। पीएसी द्वारा अनुमोदित अनुसार सहमत समय कार्यक्रम के आगे परियोजना के क्रियान्वयन में विलंब के मामले में, एसपीवी को अवधि समाप्ति की तिथि ने 3 महीने पहले अवधि समय के विस्तार के लिए अनुरोध प्रस्तुत करना होगा। यदि पीएसी इस आवेदन पर अनुमोदित परियोजना अवधि की समाप्ति तक आदेश पारित नहीं करती है, तो इसे विस्तार की मंजूरी माना जाएगा।

परियोजना का विलंब

अनुमोदित अवधि के आगे परियोजना को पूरा करने में विलंब परियोजना के निरस्तीकरण के लिए एसपीवी जिम्मेदारी होगी।

परियोजना का निरस्तीकरण

पीएसी द्वारा किसी कारण से, जो भी हो, पार्क को निरस्त किया जाता है, ऐसे मामलों में एसपीवी को सरकारी सहायता उस पर अर्जित ब्याज सहित, यदि कोई, तत्काल लौटाना होगा। इसके अतिरिक्त एसपीवी को प्रति वर्ष 10% की दर से दंडात्मक ब्याज भी अदा करना होगा।

दुरुपयोग

यदि यह पाया जाता है कि एसपीवी द्वारा अनुदान का उपयोग परियोजना के अपात्र संघटकों के लिए किया गया है, तो वस्त्र मंत्रालय के पास अनुदान और उस पर अर्जित ब्याज की वसूली का अधिकार होगा और एसपीवी पर 10% दंडात्मक ब्याज लगाने का भी अधिकार होगा।

वसूली

निरस्तीकरण और अन्य कारणों की वजह से बकायों/दंडात्मक वसूलियों की वसूली मंत्रालय द्वारा भूमि राजस्व की बकाया के रूप में की जा सकती है।

इन सभी प्रावधानों पर पीएसी का निर्णय एसपीवी पर अंतिम और बाध्यकारी होगा।

विवेचन

जहां तक इन दिशानिर्देशों के किसी प्रावधान के विवेचन का संबंध है, परियोजना अनुमोदन समिति (पीएसी) का निर्णय अंतिम होगा। पीएसी को योजना के क्रियान्वयन के लिए विस्तृत संचालन प्रक्रियाओं और पूरक दिशानिर्देशों को तैयार करने के लिए अधिकार प्रदान किया गया है।

अनुबंध- 1

एकीकृत वस्त्र पार्क योजना (एसआईटीपी) की परियोजना रिपोर्ट में शामिल किए जाने वाले बिंदु

1. सिंहावलोकन -

(i) उद्देश्यों के साथ प्रस्ताव के संक्षिप्त उद्देश्य और संगतता

(ii) प्रस्ताव का औचित्य और स्थान की उपयुक्तता, आस-पास के क्षेत्रों मौजूदा क्रियाकलापों की

मात्रा और अन्य योजनाएं (राज्य/केंद्र)

(iii)  वर्तमान स्थिति - भूमि की उपलब्धता और अधिग्रहण की स्थिति; अपेक्षित स्वीकृतियां

की उपलबधता; और लाभार्थी इकाइयों के साथ पहचान, करार/समझौता ज्ञापन

2 .प्रमुख सुविधाओं के ब्यौरे के साथ परियोजना की कुल लागत।

3 .अनुमानित लागत की मुख्य तारीख और आधार।

4 .निधिकरण का तरीका और व्यय की चरणबद्धता अर्थात, विभिन्न स्टेकहोल्डरों का अंशदान

(भारत सरकार, राज्य सरकार और अन्य एजेंसियां)।

5 .भूमि की आवश्यकता और इसका वितरण (सुविधा-वार)।

6. बनाई जा रही भौतिक सुविधाएं (क्षमता- बैकवर्ड और फारवर्ड लिंकेज)।

7. क्रियान्वयन और प्रबंधन एजेंसी/एसपीवी का नाम, जिम्मेदारियों/बाध्यताओं का संक्षिप्त विवरण (क्रियान्वयन और भविष्य के दौरान)।

8.पूर्ण होने की अवधि, क्रियाकलाप का चार्ट (पीईआरटी/सीपीएम), मुख्य उपलब्धियां/लक्ष्य और कार्य शुरू होने की तारीख।

9. उत्पादन, रोजगार, निर्यात और निवेश बढ़ जाने पर लाभ की मात्रा।

10.संपोषणीयता के मुद्देः अनुमानित ओएंडएम व्यय और उन्हें पूरा करने के माध्यम।

11. यथा उपलब्ध वित्तीय उपलब्धता- अनुमानित वार्षिक अधिशेष, यदि कोई हो, आंतरिक

प्रतिफल की दर (आईआरआर); और अर्थक्षमता प्राप्त होने की प्रतिशतता।

12. विभिन्न स्टेकहोल्डरों के साथ हुई चर्चा की सिनोप्सिस।

13. क्षेत्र का मास्टर प्लान, उन संघटकों की माप जिनके लिए सहायता मांगी जारी रही है

और दूसरे संघटकों की शिकायतों को कैसे दूरी किया जाएगा।

14. इसके समर्थन में सभी दस्तावेजों को संलग्न किया जाना है।

अनुबंध- 2

योजना के तहत भारत सरकार की अनुदान जारी करने केलिए निबंधन और शर्ते

योजना के तहत भारत सरकार की अनुदान, आवश्यकताओं को पूरा करने और नीचे दी गई

शर्तों के अध्यधीन तीन किस्तों में जारी की जाएगी -

1.0 पहली किस्त - निम्नलिखित पात्रता मानदंडों को पूरा किए जाने के अध्यधीन भारत

सरकार के कुल हिस्से के 30% के रूप में एसपीवी को पहल किस्त का भुगतान किया

जाएगा -

क) एसपीवी, मंत्रालय को समान राशि की बैंक गारंटी देगा।

ख) एसपीवी की स्थापना।

ग) भूमि, एसपीवी के कब्जे में हो।

घ) परियोजना शुरू किए जाने के लिए आवश्यक सभी सांविधिक स्वीकृतियों की उपलब्धता।

ङ) निदेशक मंडल में भारत सरकार और राज्य का एक-एक प्रतिनिधि शामिल करना।

च) सदस्यों को आवंटित क्षेत्र के अनुपात में एसपीवी द्वारा उन्हें शेयर जारी करना।

छ) शेयर धारकों का करार निष्पादित करना।

ज) किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में दो एस्क्रो खाते (ट्रस्ट और रिटेंशन खाते) योजना त्रिपक्षीय

करार की शर्तों के अनुसार वस्त्र आयुक्त के संबंधित अधिकारी द्वारा एस्क्रो खाते

परिचालित किए जाएंगे।

झ) परियोजना अनुमोदन समिति का अनुमोदन।

2.0 दूसरी किस्त- निम्निलखित पात्रता मानदंडों को पूरा किए जाने के अध्यधीन भारत सरकार के

कुल हिस्से के 40% के रूप में एसपीवी को दूसरी किस्त का भुगतान किया जाएगा -

क) एसपीवी ने अपने आनुपातिक अंशदान अर्थात सभी स्रोतों से एसपीवी के कुल हिस्से का

70% व्यय कर दिया हो।

ख) पहली किस्त का उपयोग प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना।

ग) इक्विटी अंशदान का ब्यौरा।

घ) यदि एसपीवी सावधि ऋण ले रही हो तो ऋण संघटक के लिए मंजूरी पत्र।।

ङ) भूमि की लागत को छोड़कर कुल परियोजना लागत के 100% मूल्य की संविदा प्रदान

करना।

च) यदि भारत सरकार के अनुदान पर कोई ब्याज अर्जित किया हो तो किसत का दावा करते

समय उसे लौटाया जाएगा/सममायोजित किया जाएगा। दावे के साथ बैंक से प्रमाणपत्र

प्रस्तुत किया जाएगा।

छ) वस्त्र आयुक्त के क्षेत्रीय कार्यालय के प्रभारी अधिकारी से प्रगति रिपोर्ट।

मंत्रालय द्वारा अनुदान की दूसरी किस्त मंजूरी कर दिए जाने के पश्चात एसपीवी द्वारा दी गई

बैंक गारंटी तभी लौटाई जाएगी जब एसपीवी तीसरी किस्त के समान राशि के साथ अपने शेष

अंशदान को जुटा देगी।

3.0 तीसरी किस्त - निम्नलिखित शर्तों के अध्यधीन भारत सरकार के कुल हिस्से के 30% के रूप में

अंतिम किस्त जारी की जाएगी -

क) एसपीवी ने सभी स्रोतों से 100% एसपीवी के हिस्से का व्यय कर दिया है।

ख) संपूर्ण अवसंरचना पूरी होनी चाहिए।

ग) 80% रोजगार सृजन के किए गए वायदे के साथ 80% प्रतिबद्ध इकाइयों की अवसंरचना

और परिचालनात्मक कार्य सफलतापूर्वक पूरा होना चाहिए।

घ) अंतिम किस्त का दावा करते समय दूसरी किस्त का उपयोग प्रमाणपत्र (यूसी) प्रस्तुत करना।

ङ) यदि भारत सरकार के अनुदान से कोई ब्याज अर्जित हुआ हो तो किस्त का दावा करते समय उसे

लौटाया जाएगा/समायोजना किया जाएगा। दावे के साथ बैंक से प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया जाएगा।

च) अंतिम किस्त जारी किए जाने के दावे के साथ वस्त्र आयुक्त के क्षेत्रीय कार्यालय के प्रभारी

अधिकारी द्वारा प्रगति रिपोर्ट।

 

स्रोत: अधिक जानकारी लिए भारत सरकार वस्त्र मंत्रालय के इस लिंक पर जायें

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