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समेकित बाल संरक्षण योजना

इस भाग में समेकित बाल संरक्षण योजना की व्याख्या इसके उपभागों के संदर्भ में की गई है।

परिचय

समेकित बाल संरक्षण योजना (आईसीपीएस) महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार की एक विस्तृत योजना है जिसका उद्देश्य देश में बच्चों के लिए एक संरक्षणकारी वातावरण तैयार करना है। यह एक केंद्रीय रूप से प्रायोजित योजना है जो न केवल गलीकूचों और कामकाजी बच्चों के लिए योजना, किशोर न्याय का प्रशासन, आदि जैसी, मंत्रालय की मौजूदा सभी बाल संरक्षण योजनाओं को एक छत्र के अंतर्गत लाती है, बल्कि केंद्रीय बजट में बाल संरक्षण कार्यक्रमों के लिए अधिक आवंटन भी प्रस्तावित करती है।

उद्देश्य

इस योजना का उद्देश्य बच्चों को कार्यक्षम और प्रभावकारी रूप से संरक्षण प्रदान करने वाली व्यवस्था के निर्माण के सरकार/राज्य के दायित्व को पूरा करने में योगदान करना है। यह ''बाल अधिकारों की रक्षा'' और ''बच्चे के सर्वोत्ताम हित'' के आधारभूत सिद्धांतों पर तथा किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2000, संशोधित अधिनियम, 2006 और उसमें दी गई नियमावली पर आधारित है। यह देखरेख और संरक्षण के ज़रूरतमंद बच्चों और विधि का उल्लंघन करने वाले किशोरों का समग्रतापूर्ण विकास, देखरेख, संरक्षण और उपचार के प्रति बाल-मैत्रीपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने पर ध्यान केंद्रित करते हुए किशोर न्याय अधिनियम और उसकी नियमावली को प्रोन्नत करती है।

लक्ष्य

समेकित बाल संरक्षण योजना (आईसीपीएस) के लक्ष्य इस प्रकार हैं:

कठिन परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों के कल्याण में सुधार हेतु योगदान करना और साथ ही ऐसी असुरक्षाओं, स्थितियों और कार्रवाइयों में कमी लाना जिनकी वजह से बच्चे की उपेक्षा, शोषण और अलगाव जन्म लेते हैं। समेकित बाल संरक्षण योजना का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण बाल संरक्षण सेवाओं में सुधार ला कर; बाल अधिकारों के बारे में जन जागरूकता पैदा करके; बाल संरक्षण के लिए जवाबदेही को लागू करके, आवश्यक सेवाओं का संस्थाकरण करके और वर्तमान ढांचों को मजबूत बना कर; कठिन परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों के लिए सांविधिक और सहायता सेवाएं प्रदान करने हेतु सरकार के सभी स्तरों पर कार्यशील ढांचों की स्थापना करके; साक्ष्य-आधारित अनुश्रवण और मूल्यांकन, सभी स्तरों पर क्षमताओं को बढ़ा कर; ज्ञान-आधार का निर्माण करके; और परिवार एवं समुदाय के स्तर पर बाल संरक्षण के कार्य का सुदृढ़ीकरण करके इन लक्ष्यों को प्राप्त करना है।
कार्यान्वयन स्थिति।

लक्ष्य समूह


समेकित बाल संरक्षण योजना (आईसीपीएस) देखरेख और संरक्षण के ज़रूरतमंद बच्चों और विधि का उल्लंघन करने वाले किशोरों पर अपने कार्यकलापों को संकेंद्रित करती है। साथ ही यह योजना अन्य असुरक्षित बच्चों को रोकथामकारी, सांविधिक और देखरेख एवं पुनर्वास सेवाएं प्रदान करती है। इनमें इन वर्गों के बच्चे शामिल हैं: असुरक्षित और जोखिम में पड़े परिवारों के बच्चे; प्रवासी परिवारों, अत्यधिक निर्धनता की हालत में रहने वाले परिवारों के बच्चे, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के बच्चे; भेदभाव से पीड़ित या प्रभावित परिवारों, अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चे या एचआईवी/एड्स से संक्रमित और प्रभावित बच्चे, अनाथ बच्चे, नशीली दवाओं और नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले बच्चे, भिक्षावृत्तिा करने वाले बच्चे, यौन रूप से शोषित बच्चे, कैदियों के बच्चे और गलीकूचों में रहने वाले बच्चे।

चाइल्डलाइन

चाइल्डलाइन एक चौबीसों घंटे की आपात्कालीन फ़ोन सेवा है जिसका मुसीबत में पड़े बच्चे प्रयोग कर सकते हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का यह कार्यक्रम मुम्बई-आधारित चाइल्डलाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है। यह सेवा बच्चों को दुराचार और शोषण की स्थितियों से बचाने में मदद करती है और उन्हें आश्रय गृहों, चिकित्सा, परामर्श और पुनर्वास सेवाएं प्रदान करने में मदद करती है।

मुसीबत या कठिनाई की स्थितियों में पड़े बच्चे और वयस्क भी 1098 डायल करके यह सेवा प्राप्त कर सकते हैं। भारत सरकार द्वारा 1999 में स्थापित की गई यह सेवा देश के 83 शहरों में कार्य कर रही है। इस सेवा का मुख्य लक्ष्य संकट की स्थिति में पड़े बच्चों की समस्या को हल करना और देखरेख तथा पुनर्वास के लिए उन्हें संबंधित सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों के पास भेजना है। यह सेवा बाल कल्याण के क्षेत्र में सरकारी और गैर-सरकारी सेवाओं के बीच नेटवर्किंग करने और बच्चों के पुनर्वास के लिए अस्पताल, पुलिस, रेलवे आदि सहायता सेवाओं को मज़बूती प्रदान करती है।

यह पुलिस, न्यायपालिका, अस्पतालों आदि में कार्यरत लोगों को बाल संरक्षण के मुद्दों के बारे में संवेदनशील बनाने हेतु एक मंच का कार्य करती है।

स्त्रोत : महिला और बाल विकास मंत्रालय,भारत सरकार

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ओम प्रकाश पाठक Aug 24, 2019 02:33 PM

जैसे ही किसी संस्था का बाल गृह ( बालक/बालिका/शिशु) के रूप में पंजीकरण प्रमाण पत्र निर्गत किया जाय उसी के साथ संस्था को अनुमन्य शासकीय सहाXता/अXुXाX देने की व्यवस्था की जानी चाहिए ।

अंजना singh Oct 21, 2017 05:45 PM

किसी माँ बाप में डाइवोर्स चल रहा है और माँ उसके बच्चे का सही से देख भल नहीं रक रही हो तो उसका क्या किया जाये बच्चा अभी १.५ का ही है

अनिल सिंह रावत Aug 19, 2017 02:57 PM

मै अनिल सिंह रावत विहान में परियोजना समन्वयक हूँ माता पिता से एड्स संक्रमित बच्चो के केयर एंड सपोर्ट का कार्य करते है जो भी बच्चै इस तरह किसी परेशानी मै हो तो हमें संप्रग कर सकतये हे संपर्ग सूत्र 89XXX93 94XXX5

Priyanka Kumari Jul 04, 2017 01:00 PM

Yojna to theek hai par ye lagu kaise hoga des je bhbisy ko bachana hai tho un bachho ko bchaeye jinhe jnm lene ke saath hi log bhikh mangbate hain

बृजेश कुमार Sep 17, 2016 02:25 PM

श्रीमान यह फार्म कहाँ जमा होता है। क्या यह फार्म आनलाइन भी कर सकते है।

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