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बच्चों की भागीदारी

इस भाग में पंचायत में किस प्रकार से बच्चों की भागीदारी की जा सकती है, इसकी जानकारी दी गई है।

भूमिका

बाल भागीदारी का अर्थ है कि बच्चे तथा किशोर उनसे संबंधित क्रियाकलापों, प्रक्रियाओं और निर्णयों में भाग ले रहे हैं तथा उनकी आवश्यकताओं की अनुरूप इन्हें संचालित किया जा रहा  है।

बच्चों के पास अपने विचारों को स्वतंत्र रूप से व्यक्त करने का अधिकार और क्षमता है तथा वयस्कों का यह कर्त्तव्य है कि वे उनके विचारों को सुनें तथा परिवार, विद्यालय और समुदाय में उन्हें प्रभावित करने वाले सभी मामलों में उनकी मामलों में उनकी प्रतिभागी को मजबूत बनाएं। यदि बच्चे आज प्रतिभागिता करना सीखेंगे, तो वे भविष्य में सक्षम नागरिकों के रूप में इनमें प्रतिभागिता करने में समर्थ होंगे। जैसे – जैसे बच्चे बड़े होते जाते हैं उन्हें समाज के कार्यकलापों में प्रतिभागिता करने के लिए अधिक अवसर प्रदान किए जाने चाहिए ताकि वे वयस्कता प्राप्त करने में इनमें और बेहतर रूप से भागीदारी करने की तैयारी कर सकें। विभिन्न परिस्थितियों में संकटों के संभावित शिकार बच्चों के सशक्तिकरण के लिए बच्चों की प्रतिभागिता एक महत्वपूर्ण कदम है।

बच्चों की भागीदारी का अर्थ है –

  • उन्हें प्रभावित करने वाले निर्णयों पर उनके द्वारा बोलना और उन्हें संशोधित करना।
  • भाषण और सृजनात्मकता द्वारा अपने विचारों को अभिव्यक्त करना।
  • संगठनों और समूहों में शामिल होना तथा उनका सहयोग प्राप्त करना।
  • अपनी आस्थाओं का चयन करना तथा अपने धर्म और संस्कृति को मानना।
  • गोपिनियता और जीवन – शैली में हस्तक्षेपों से संरक्षण।
  • अपनी कुशलता के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करना।

 

भागीदारी में मुद्दे

प्राय: वयस्क लोग यह सोचते हैं कि बच्चे प्रतिभागिता नहीं कर सकते हैं। वे इस संबंध में निम्नलिखित कारण देते हैं

  • बच्चे अपरिपक्व हैं।
  • बच्चों को यह नहीं पता कि उन्हें क्या चहिए।
  • बच्चों का दृष्टिकोण व्यावहारिक नहीं होता।
  • बच्चे कोई जिम्मेदारी नहीं ले सकते।
  • यदि हम उन्हें जिम्मेदारी सौंपेगे, तो बच्चे समस्त व्यवस्था बिगाड़ देंगे।

 

मुख्य कारक जो बच्चों की भागीदारी और उनकी पसंद को प्रभावित करते हैं।

  • गरीबी
  • जाति और धर्म
  • लिंग
  • विकलांगता
  • बच्चे की संवेदनात्मक स्थिति

 

क्या अपने नहीं देखा है:

  • छोटे बच्चे विद्यालय के वार्षिक दिवस समारोह का आयोजन कर रहे हैं,
  • बच्चे सामाजिक मुद्दों के बारे में स्पष्ट रूप से बात कर रहे हैं, बच्चे ग्राम सभा का आयोजन कर रहे हैं?

ग्राम पंचायत का सदस्य होने के नाते आपको कभी यह महसूस हुआ है कि यदि आपको आपकी बाल अवस्था में अधिक प्रतिभागिता का अवसर प्राप्त होता तो आप आज की तुलना में एक बेहतर नेता, एक बेहतर आयोजक और एक बेहतर सार्वजनिक वक्ता बन सकते थे?

बच्चों की नेतृत्वकारी क्षमताओं का उपयोग केवल तभी किया जा सकता है जब उन्हें भागीदारी करने का अवसर प्राप्त हो।

बच्चों की प्रतिभागिता निम्न में सहायता करती है -

  • उन सेवाओं में सुधार करती है जो वे विद्यालयों, आंगनवाड़ियों और पंचायतों आदि से प्राप्त करते हैं।
  • बच्चों के ज्ञान, वैयक्तिक और सामाजिक कौशलों का निर्माण करती है तथा नागरिकता और निर्णय लेने के प्रति सकारात्मक अभिवृत्ति तैयार करती है।
  • उनके आत्म – सम्मान और आत्मविश्वास में वृद्धि करती है।
  • बच्चों के लिए एक सुरक्षित स्थान का निर्माण करती है तथा संकटों के संभावित शिकार बच्चों के विरूद्ध भेदभाव को कम करती है।
  • अपने सहयोगियों के निर्णय के प्रति अधिक सम्मान की भावना का निर्माण करती है। बच्चे यह समझने लगते हैं कि उनके बड़े – बूढों ने किस निर्णय – विशेष को क्यों किया है।

बच्चे ग्राम सभ, बाल सभा जैसे मंचों में सक्रिय नागरिकता के विषय में जानने लगते हैं।

विद्यालयों में बच्चों की प्रतिभागिता

विद्यालय ऐसी संस्थाएँ हैं जो मुख्य रूप से बच्चों की विकास संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति करती हैं तथा उनके व्यक्तित्व का निर्माण करती है। ग्राम पंचायतों की विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका है क्योंकी सुनीता ग्राम बालगढ़ में 9वीं कक्षा की छात्रा है। उसके गाँव के सरपंच ने, जो बाल दिवस में अतिथि थे, विद्यालय प्राचार्य को बाल क्लब आरंभ करने का परामर्श दिया तथा उन्हें ग्राम पंचायत से भी आवश्यक सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया। सुनीता के विद्यालय में अब निम्नलिखित क्लब हैं –

  • परिस्थिति विज्ञान क्लब
  • विज्ञान क्लब
  • कला क्लब
  • कृषि क्लब
  • साक्षरता/ पाठक क्लब
  • समाज सेवा क्लब

प्रत्येक छात्र इनमें से किसी न किसी क्लब का सदस्य है तथा वह क्लब किस सभी क्रियाकलापों में सक्रियता से भाग लेता है। सुनीता के अभिभावकों ने उसे पुस्तकालय क्लब में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया। इस नेतृत्व के लिए सरपंच को धन्यवाद।

विभिन्न विद्यालय क्रियाकलापों में बच्चों की प्रतिभागिता उनकी शिक्षा में रुचि बढ़ाती है। ऐसे दो क्षेत्र विद्यालय क्लब तथा विद्यालय संसद हो सकते है।

विद्यालय क्लब

विद्यालय क्लबों में छात्र शामिल होते हैं तथा शिक्षक उनके परामर्शदाता सदस्य अथवा संरक्षक होते हैं। ये क्लब कला, विज्ञान, साहित्यिक, व्यवसायिक और सामाजिक क्षेत्रों से संबंधित होते हैं। विद्यालय के बच्चे अपने मन – पसंद क्रियाकलाप को करने के लिए इनमें शामिल होते हैं। विद्यालय क्लबों में शामिल होने के लिए कोई शुल्क नहीं हैं।

किसी विशेष क्लब के विद्यार्थी सामान्यत: एक ही रुचि वाले होते हैं अत: वे अपने विचारों का आदान – प्रदान करने में समर्थ रहते हैं इसके फलस्वरूप, विद्यालय में बच्चों की विभिन्न क्रियाकलापों में संवर्धित प्रतिभागिता सुनिश्चित की जाती है।

विद्यालय संसद

अनेक विद्यालयों में, विद्यालय संसद अथवा छात्र संसद होती है जो विद्यालय के छात्रों का निर्वाचित निकाय है। विद्यालय संसदों के माध्यम से बच्चे सिविल और सामाजिक कौशलों को सीखते हैं जिनमें नेतृत्व, प्रतिभागिता, निर्णय लेना और संप्रेषण कौशल भी शामिल हैं। विद्यालय संसद छात्रों को ग्राम पंचायत क्षेत्र में निर्वाचन प्रक्रियाओं को समझने तथा यह जानने में मदद करती नहीं कि लोकतंत्र किस प्रकार कार्य करता है।

शासन में बच्चों की प्रतिभागिता

बच्चे ग्रामीण जनसंख्या का एक बड़े भाग होते है परन्तु वे मतदान नहीं कर सकते, पंचायत चुनावों में भाग नहीं ले सकते और वे ग्राम सभा के सदस्य भी नहीं होते। इसलिए यह आवश्यक है कि बच्चों की विशेष समस्याओं और आवश्यकताओ की विवरणों सहित समुचित रूप से पहचान करने और उनका समाधान करने के लिए एक वैकल्पिक मंच का निर्माण किया जाए।

शासन में उनकी प्रतिभागिता को विभिन्न मंचों द्वारा सुनिश्चित किया जा सकता है, जैसे बाल ग्राम सभा और तथा ग्राम स्तरीय बालक संरक्षण समिति (वीसीपीसी)।

बाल – ग्राम सभा

बाल ग्राम सभा का उद्देश्य ग्राम पंचायत की स्थानीय आयोजन प्रक्रिया में बच्चों की लोकतांत्रिक भागदारी को सुदृढ़ बनाना है।

बाल ग्राम सभा 10-18 वर्ष की आयु के बच्चों का वार्ड स्तरीय समूह है जिसका उद्देश्य बाल विकास, आयोजन  क्रियान्वयन कार्यक्रमों में विद्यमान कमियों की पहचान करना और उन पर चर्चा करना है तथा साथ ही ग्राम पंचायत क्षेत्र में बाल – हितैषी विकास कार्यों को प्रारंभ करना है। इन मंचों में खतरों के संभव शिकार बच्चों जैसे लड़कियों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और निर्धन परिवार के बच्चों तथा भिन्न रूप से असमर्थ बच्चों को भी अवश्य शामिल किया जाना चाहिए।

बच्चों के लिए विशेष ग्राम सभा: ग्राम पंचायत माला सीखे गए सबक –

केरल के थ्रिसूस जिले में ग्राम पंचायत माला का वर्ष 2011 से वर्ष में दो बार – ग्राम सभा नियमित रूप से आयोजित करने का एक अनूठा रिकार्ड है। 10-18 वर्ष की आयु के बच्चे कल्याण स्थायी समिति, के अध्यक्ष, संबंधित वार्ड सदस्यों और ग्राम पंचायत के सभी 22 वार्डों में आईसीडीएस पर्यवेक्षकों के नतृत्व में एक स्थान पर एकत्र होते हैं तथा अपने दैनिक जीवन से जुड़े मुद्दे उठाते हैं और उन पर चर्चा करते हैं जिनमें बुनियादी सुविधाएँ, व्यक्तिगत समस्याएँ, लिंग भेदभाव, नि: शक्तता: बाल श्रम आदि शामिल होते हैं। वार्ड के निर्वाचित प्रतिनिधि बाल ग्राम सभा के संयोजक होते हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को बाल ग्राम सभा के समन्वय का उत्तरदायित्व सौंपा जाता है। यह बैठक किसी शनिवार अथवा किसी अन्य अवकाश दिवस को सामान्यत 3-4 घंटे तक चलती है। ग्राम सभा के आयोजन पर व्यय ग्राम पंचायत निधि से किया जाता है।

बच्चों के लिए ग्राम पंचायत के क्रियाकलापों पर 30 मिनट के प्रारंभिक स्तर के उपरांत बच्चों को 4-5 समूहों में बाँटा जाता है। प्रत्येक समूह निम्न में से किसी एक विषय पर विचार – विमर्श करता है:-

  • बच्चों के लिए ग्राम पंचायत की सेवाएँ
  • बच्चों के प्रमुख स्वास्थय – संबंधी मुद्दे तथा सुझाव
  • बच्चों के प्रमुख शिक्षा – संबंधी मुद्दे तथा सुझाव
  • बच्चों के प्रमुख संरक्षण – संबंधी मुद्दे तथा सुझाव

समापन सत्र में चर्चा के दौरान उठे मुद्दे प्रस्तुत किए जाते हैं। अनुवर्ती कार्रवाई के लिए सुझाव ग्राम पंचायत को प्रस्तुत किए जाते हैं।

माला ग्राम पंचायत के बच्चे प्रसन्न हैं क्योंकि उनकी ग्राम पंचायत ने उन्हें अपने विचारों को व्यक्त करने के लिए 18 वर्ष की आयु तक प्रतीक्षा करने के लिए नहीं कहा।

वीसीपीसी में बाल प्रतिनिधि

वीसीपीसी के प्रावधानों के अनुसार, समिति में दो बाल प्रतिनिधि होने चाहिए। उदहारण के तौर पर उत्तर प्रदेश के जिला चंदौली की ग्राम पंचायतों में इस समिति में दो बाल प्रतिनिधि शामिल किए जाते हैं जो 14 वर्ष से ऊपर का एक बालक और एक बालिका होती है। वे वीसीपीसी की चर्चा निर्णयों में भाग लेते हैं।

बाल – हितैषी सार्वजनिक स्थल

सार्वजनिक स्थल ऐसे सामान्य स्थल हैं जो बच्चों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति के भेदभाव के बिना सभी बच्चों के लिए पहुँच योग्य हैं। इन आम स्थलों में शामिल हैं – खेल के मैदान, उद्यान, पुस्तकालय आदि। बालक – हितैषी बनने के लिए इन स्थानों को सुरक्षित और भयमुक्त होना चाहिए ताकि बच्चों इन स्थलों का संपुर्ण उपयोग कर सकें।

गांवों के खेल के मैदान मनोरंजन तथा खेल – कूद के स्थान का कार्य करते हैं। बालकों और बालिकाओं, दोनों ही के गांवों में स्थित इन खेल के मैदानों तक पहुँच होनी चाहिए। बच्चों द्वारा  प्रयोग किए जा रहे समस्त सरकारी खेल के मैदान समतल होने चाहिए तथा उनमें गड्ढे, पत्थर, कांच के टुकड़े, रद्दी धातु, कांटेदार झाड़ियाँ, आदि नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा, यह स्थान नालियां तथा कूड़े – कर्कट से मुक्त होना भी चाहिए।

मवेशियों के प्रवेश को रोकने के लिए इसमें बाड़ होना भी आवश्यक है। यह स्थान शराबियों, नशाखोरों, जुआरियों तथा असामाजिक तत्वों से संरक्षित भी होना चाहिए।

खेल के मैदानों का विकास स्थानीय युवाओं के श्रमदान (स्वैच्छिक श्रम), क्षेत्र में कार्य करने वाले एनजीओ/सीबीओ को शामिल करते हुए सरकारी – निजी भागीदारी अथवा ग्राम पंचायत की निधि से किया जा सकता है। खेल के मैदान का विकास राजीव गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की सहायता से भी किया जा सकता है।

युवक कार्यक्रम और खेल मंत्रालय द्वारा खेल उपकरणों और खेल के मैदान के लिए ग्रामीण विद्यालयों को अनुदान प्रादान करने की स्कीम के अंतर्गत, ग्रामीण क्षेत्रों में माध्यमिक तथा उच्चतर माध्यमिक विद्यायल खेल के मैदानों के विकास तथा खेल उपकरणों की खरीद के लिए 1.5 लाख रूपए की सहायता के पात्र हैं।

बच्चों के लिए पुस्तकालय आरंभ करना अथवा पुस्तकालय में बच्चों का एक कोना तैयार करना बच्चों में पढ़ने की आदतें डालने में सहायता करता है। पुस्तकालय में बच्चों की पुस्तकें, पत्रिकाएँ, कॉमिक्स, चार्ट, मानचित्र, ग्लोब, शैक्षणिक खिलौने, सीखने वाले खेल, दृश्य – श्रव्य सामग्री, केवल टीवी कनेक्शन आदि उपलब्ध कराए जा सकते हैं। बच्चों द्वारा प्रयोग किए जा सकने वाले पुस्तक – रैक, वाचन टेबलें, स्टूल, कुर्सियों आदि इन सेवाओं को बच्चों के लिए प्रयोग योग्य बनाएंगी। पुस्तकालय का प्रबंधन करने के लिए बाल समिति का गठन किया जा सकता है। ग्राम पंचायत सरकारी पुस्तकालय परिषदों से संपर्क कर सकती है अथवा राजा राम मोहन राय पुस्तकालय प्रतिष्ठान (आरआरआरएलएफ), कोलकाता द्वारा संचालित वित्तीय सहायता की नॉन – मैचिंग स्कीम के अंतर्गत आवेदन कर सकती है।

बच्चों की भागदारी सुनिश्चित करने के लिए ग्राम पंचायत की भूमिका

ग्राम सभा, वार्ड सभा तथा अन्य सामान्य मंचों पर बाल प्रतिभागिता के महत्व पर चर्चा ग्राम पंचायत क्षेत्र में बच्चों की सक्रिय प्रतिभागिता वाले परिवेश का निर्माण करने में सहायता करेगी।

ग्राम पंचायत क्षेत्र में बच्चों की प्रतिभागिता को प्रोत्साहित करने के लिए ग्राम पंचायतों की कुछ विशिष्ट भूमिकाओं का उल्लेख नीचे किया गया है:

  • बाल सभा, बाल ग्राम सभा के आयोजन में निर्वाचित प्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता, ग्राम पंचायत की योजना में चिन्हित मुद्दों को शामिल करना बच्चों द्वारा उठाए गए मुद्दों का समाधान करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • ग्राम पंचायत को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि उद्यान, खेल के मैदान तथा पुस्तकालय जैसे सुविधाएँ का समुचित रख – रखाव किया जाए और वे ठीक प्रकार से कार्य करें। यह ग्राम पंचायत क्षेत्र में खेल के मैदानों तथा उद्यानों का निर्माण और अनुरक्षण करने के लिए समुदाय की सहभागिता द्वारा प्राप्त कर सकती है। ग्राम पंचायत को कड़ाई से यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उद्यान, खेल के मैदान तथा बाल पुस्तकालय तंबाकू – मुक्त हों।
  • ग्राम पंचायत सरकारी पुस्तकालय परिषदों से संपर्क कर सकती है अथवा राजा राम मोहन राय पुस्तकालय प्रतिष्ठान (आरआरआरएलएफ), कोलकाता द्वारा संचालित वित्तीय सहायता की नॉन – मैंचिंग स्कीम के अंतर्गत आवेदन कर सकती है।
  • ग्राम पंचायत विद्यालयों को अनेक विशेष महत्व के दिवस विद्यालय में मनाने के लिए प्ररेणा और सहायता प्रदान कर सकती है जैसे बाल दिवस, स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस आदि। ग्राम पंचायत बच्चों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन भी कर सकती है जैसे खेलकूद प्रतिगोगिताएं।
  • ग्राम पंचायत को यह देखना चाहिए की समस्त सार्वजनिक स्थल भेदभाव – रहित हैं तथा प्रत्येक बच्चा उसकी जाति, वर्ग, लिंग, और विकलांगता के भेदभाव के बिना सार्वजनिक स्थलों का प्रयोग कर सकता है। ग्राम पंचायत को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए की ग्राम पंचायत क्षेत्र में सभी सार्वजनिक स्थल बाधारहित व विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए पहुँच योग्य हैं। इन सार्वजनिक स्थलों को विकलांगता – हितैषी बनाने के लिए ग्राम पंचायत की पहल और सहायता से हैण्ड – रेलों और रैंपो का निर्माण किया जाना चाहिए।

हमने किया सीखा

  • बच्चों को अपने विचार स्वतंत्रतापूर्वक व्यक्त करने का अधिकार और उनमें यह क्षमता है। वयस्कों का यह कर्त्तव्य है कि वे बच्चों के विचारों को सुनें तथा उन्हें प्रभावित करने वाले सभी मामलों में उनकी प्रतिभागिता को सुनिश्चित करें।
  • विद्यालयों में बच्चों की प्रतिभागिता के मंचों के रूप में विद्यालय क्लबों और बाल संसदों को प्रोत्साहित किया जा सकता है।
  • शासन में बच्चों की प्रतिभागिता को ग्राम पंचायत के सदस्यों की सक्रिय भागीदारी और प्रोत्साहन के साथ बाल सभा और बाल ग्राम सभा का आयोजन करने के माध्यम से सुनिश्चित किया जा सकता है।
  • बाल – हितैषी स्थलों का सृजन करने तथा उनका रख – रखाव करने जैसे – खेल के मैदान, उद्यान तथा बच्चों के लिए पुस्तकालय आदि में ग्राम पंचायत की एक महत्वपूर्ण भूमिका है।

स्त्रोत: पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार

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