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कर्नाटक राज्य के पंचायत की सफल कहानियाँ

इस भाग में कर्नाटक राज्य के पंचायत की सफल कहानियाँ प्रस्तुत की गई है |

उडुपी जिला पंचायत, जिला-उडुपी,कर्नाटक: जिला मानव विकास रिपोर्ट की तैयारी

कर्नाटक मानव विकास रिपोर्ट (एच डी आर) 1999 में तैयार किया गया था | अब जिला पंचायत द्वारा एक जिला मानव विकास रिपोर्ट तैयार किया गया है | उडुपी जिला पंचायत ने जिले के लिए मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) और लिंग विकास सूचकांक (जीडीआई) की तैयारी पर सराहनीय उपलब्धि के लिए 2012 के दौरान यू एन डी पी पुरस्कार (मानव विकास-मानव विकास पुरस्कार) प्राप्त किया है | यह अंतर्राष्ट्रीय रूप से स्वीकृत मानव विकास सूचकांकों के अनुसार जिले में स्थानीय निकायों के श्रेणीकरण का प्रयास है | राज्य में पहली बार मानव विकास में उपलब्धि के आधार पर जिले में 146 ग्राम पंचायतों और चार नगरपालिकाओं के श्रेणीकरण के लिए एच डी आई और जि डी आई तैयार किए गए हैं |

उडुपी जिला पंचायत, जिला-उडुपी, कर्नाटक: सार्वजनिक निजी भागीदारी

राजकीय समेकित हाई स्कूल, वोलाकाडु, उडुपी जिला को वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ा | यहाँ अधिकांश छात्र गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों से हैं और उन्हें अपनी शिक्षा जारी रखने में कठिनाई होने लगी | इस परिप्रेक्ष्य में उडुपी जिला पंचायत ने स्कूल को सहायता देना शुरू किया और अवसंरचना विकास, मध्याह्न भोजन, छात्रवृत्तियों और अध्ययन सामग्रियों के लिए सरकारी अभिकरणों और निजी व्यक्तियों सहित विभिन्न स्रोतों से निधियां एकत्रित किया | उडुपी जिला पंचायत की शिक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी स्थायी समिति ने स्कूल प्रबंधन के सहयोग से स्कूल के विकास में विशेष रूचि दिखाई | स्कूल के एक पूर्ववर्ती छात्र और उद्योगपति ने उदारता से स्कूल के विकास के लिए सहायता दिया | सरकारी और निजी अभिकरणों की सहायता से स्कूल प्रबंधन समिति ने नौ वर्ग कक्षाओं और एक पुस्तकालय का निर्माण किया | एक व्यक्ति ने दो कम्प्यूटर प्रयोगशालाओं, स्टाफ कक्ष, शौचालयों, सामान्य पुस्तकालय, 600 की क्षमता वाले प्रेक्षागृह और खेल के मैदान हेतु सहायता दिया |

यह सूचना मिली है कि समान विचारधारा के अनेक लोग स्कूल के विकास हेतु अधिक सहायता देने के लिए तैयार हैं | यह भी सूचना मिली है कि दो निजी कंपनियों ने कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सी एस आर) के तहत कम्प्यूटर प्रयोगशाला के विकास हेतु स्कूल प्रबंधन को सहायता दी है | एक व्यक्ति ने 30 गरीब छात्रों के लिए छात्रवृति हेतु भी सहायता दी है | स्कूल में 1184 छात्र हैं और सभी छात्रों को बाहरी सहायता से मध्याह्न भोजन दिया जाता है | अकादमिक वर्ष 2011-12 में 217 छात्र वरिष्ठ माध्यमिक परीक्षा में शामिल हुए और सभी पास हुए | परिणामस्वरूप उत्कृष्ट अवसंरचना सुविधाओं के कारण अधिक से अधिक छात्र सरकारी स्कूल में प्रवेश लेने के लिए तैयार हैं | स्कूल प्रबंधन कहता है या “सार्वजनिक निजी भागीदारी का युग है”|

शिकारीपुरा तालुक पंचायत, जिला – शिवमोगा, कर्नाटक: सार्वजनिक निजी भागीदारी के तहत सिलाई प्रशिक्षण केंद्र

परिधान प्रशिक्षण और डिजाइन केन्द्र, शिकारीपुरा तालुका निजी –सार्वजनिक भागीदारी उद्यम के तहत एक सिलाई प्रशिक्षण केन्द्र है | केन्द्र की शुरुआत शिकारीपुरा तालुक पंचायत द्वारा स्वामी विवेकानंद शिक्षा न्यास के सहयोग से किया गया | न्यास ने 4.00 लाख रु. खर्च कर प्रशिक्षण केन्द्र हेतु भवन का निर्माण किया | जिला पंचायत ने स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (एसजीएसवाई) अवसंरचना स्कीम के तहत उदारतापूर्वक 13.50 लाख रु. प्रदान किया | एसजीएसवाई  अवसंरचना निधि की सहायता से केन्द्र ने प्रशिक्षण के लिए 24 मशीनीकृत और विद्युत् चालित सिलाई मशीनें खरीदी है | केन्द्र में एक प्रिंसिपल और दो अनुदेशक हैं | एक बार में 50 महिलाएं प्रशिक्षण के लिए प्रवेश प् सकती हैं | प्रशिक्षण के अवधि दो माह है और प्रशिक्षुओं को प्रतिमाह 2500/- रु. का वजीफा दिया जाता है | वजीफे की राशि हस्तकरघा और वस्त्र विभाग, कर्नाटक सरकार द्वारा प्रदान किया जाता है | अब तक केन्द्र ने 850 लोगों को प्रशिक्षित किया है | इच्छुक और सफल प्रशिक्षुओं के नियोजन की जिम्मेवारी संस्थान की है | यह सूचना मिली है कि अब तक 82 प्रशिक्षुओं को 4,800/- रु. के मासिक वेतन पर बंगलोर में नौकरी मिली है | केन्द्र ने अजा/अजजा से महिला अभ्यर्थियों और विधवाओं को भी प्रवेश में वरीयता दी है |

शिकारीपुरा तालुक पंचायत, जिला –शिवमोगा, कर्नाटक: एसजीएसवाई अवसंरचना स्कीम

शिकारीपुरा तालुक पंचायत ने एसजीएसवाई कार्यक्रम को सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया है| तालुक पंचायत ने तालुक में 731 स्वयंसेवा समूहों (एसएचजी) का गठन किया है, जिसमें से 171 को एसजीएसवाई के तहत सहायता दी गई है | सभी समूह सफल है | चूँकि महिलाओं को एसएचजी नेटवर्क में शामिल किया जाता हैं, बैंकिंग संस्थानों की वित्तीय सहायता से लघु आर्थिक उद्यमों को बढ़ावा देना आसान हो गया है | तालुक पंचायत ने तालुका मुख्यालय में विपणन केन्द्र और विभिन्न अन्य वाणिज्यिक भवनों के निर्माण हेतु एसजीएसवाई अवसंरचना स्कीम के तहत 80.72 लाख रु. भी दिया है | इस विपणन केन्द्र में 16 खरीददारी कॉम्प्लेक्स हैं | तालुक पंचायत ने अपने उत्पादों की बिक्री हेतु छह खरीददारी कॉम्प्लेक्स एसजीएसवाई समूहों को और बाकी 10 किराया पर दिया है | इन बिक्री केन्द्रों से मासिक किराया 80,000/- रु. प्रतिमाह आने की आशा है | तालुका पंचायत वित्तीय बोझ का एक भाग वहन करने के इच्छुक किसी एसएचजी को सहायता करने के लिए तैयार है | 30 एसएचजी द्वारा संचालित दुग्ध सहकारी समिति के एक कार्यालय भवन का निर्माण इसका एस अच्छा उदाहरण है | जब इन 30 समूहों ने समान राशि एकत्रित की तो पंचायत ने 47.72 लाख की सहायता दी | इसी तरह सामुदायिक केन्द्र के निर्माण हेतु एक एसएचजी को 1.5 लाख रु. इस शर्त पर स्वीकृत की गई है कि वे अपने अंशदान के रूप में इतनी ही राशि देंगे | ऐसा दूसरा उदाहरण वाणिज्यिक खरीददारी काम्पलैक्स के निर्माण हेतु बेल्लागिवि ग्राम पंचायत को 5 लाख रु. स्वीकृत करना है, जब ग्राम पंचायत भी अपने अंश के रूप में 5 लाख रु. देगा |

मेलिना बेसिजे ग्राम पंचायत, जिला शिवमोगा, कर्नाटक: लोगों तक पहुंचना

मेलिना बेसिजे ग्राम पंचायत ने जनवरी 2013 में पंचायत समिति के निर्णय के अनुसार ‘लोगों के लिए पंचायत’ नामक कार्यक्रम कार्यान्वित किया है | इस कार्यक्रम के महत्वपूर्ण उद्देश्य इस प्रकार है:

  • कर का भुगतान करने के लिए लोगों को प्रेरित करना,
  • अपने आसपास के क्षेत्रों तथा पानी के स्त्रोतों को साफ़ करने के लिए लोगों को प्रेरित करना,
  • स्वास्थ्य, पानी एवं स्वच्छता के मुद्दों पर जागरूकता पैदा करना,
  • लोगों के सामने मौदूद सामान्य एवं विशिष्ट समस्याओं को समझना,
  • ग्राम पंचायत से सार्वजनिक सेवाओं की सुपुर्दगी की गुणवत्ता में सुधार करना, और
  • सरकार द्वारा प्रायोजित विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में लोगों में जागरूकता पैदा करना |

इस कार्यक्रम के अंग के रूप में, ग्राम पंचायत के सभी सदस्यों ने समस्याओं का निदान करने के लिए ग्राम प्रधान के नेतृत्व में वार्ड के अनुसार पंचायत क्षेत्र का दौरा किया | स्वयं जनवरी के महीने में उन्होंने पाँच वार्डों का दौरा किया | इस दौरे के दौरान जिन समस्याओं का समाधान किया गया उनमें से कुछ प्रमुख समस्याएं इस प्रकार हैं:

  • ग्राम पंचायत की आंगनवाडियों में से एक आंगनवाड़ी में उपस्थिति बहुत कम थी | अभिभावक अपने बच्चों को आंगनवाड़ी भेजने में कोई वास्तविक रूचि नहीं लेते थे | संभवत: उनका साक्षर न होना तथा खराब आर्थिक स्थिति इसकी वजह थी | कार्यक्रम के दौरान टीम ने अभिभावकों को आंगनवाड़ी में जाने के महत्व तथा इसके लाभों के बारे में अच्छी तरह से अवगत कराया, जिसके फलस्वरूप आंगनवाड़ी में उपस्थिति में सुधार हुआ|
  • ग्राम पंचायत ने नोटिस किया कि कुछ परिवार शौचालय का प्रयोग नहीं कर रहे हैं तथा अपने घर के आसपास के क्षेत्रों की सफाई भी नहीं कर रहे हैं | दौरे के दौरान, टीम ने ऐसे परिवारों के सदस्यों को शौचालयों का प्रयोग करने, स्वच्छता एवं सफाई के महत्व के बारे में अच्छी तरह से अवगत कराया, जिसके फलस्वरूप शौचालयों का प्रयोग बढ़ गया तथा आसपास के क्षेत्र साफ़ हो गए |
  • एस सी कालोनी के नागरिकों ने पानी की आपूर्ति के समय तथा बारम्बारता के बारे में शिकायत की | दौरे के दौरान, कालोनी के लोगों ने वर्तमान में 45 मिनट की आपूर्ति की बजाय प्रतिदिन 1 घंटा 45 मिनट पानी की आपूर्ति की मांग की | टीम द्वारा उनकी मांग को पूरा किया गया |
  • एस सी कालोनी के नागरिकों ने कालोनी में एक सामुदायिक शौचालय की भी मांग की | दौरे के दौरान ही उनकी मांग को स्वीकार कर लिया गया तथा 13वें वित्त आयोग के अनुदान से इस शौचालय के लिए सहायता प्रदान की जाएगी |

परिवारों के दौरे के दौरान टीम ने स्वच्छता, सफाई के महत्व तथा किचन गार्डन के महत्व के संबंध में स्कूल के छात्रों को बताया | इसके फलस्वरूप छात्रों में स्वच्छता की अच्छी आदतें विकसित हो रही हैं तथा छात्रों ने स्कूल परिसर में एक किचन गार्डन भी शुरू कर दिया है |

मारावंते ग्राम पंचायत, जिला – उडुपी, कर्नाटक: समग्र स्वच्छता

मारावंते ग्राम पंचायत ने समग्र स्वच्छता अभियान (टी एस सी) के तहत 2005 में पंचायत में शत-प्रतिशत स्वच्छता कवरेज प्राप्त करने के लिए एक नीति बनाई | उस समय 905 परिवारों में से 602 के पास अपना शौचालय था | पंचायत ने शौचालय के निर्माण हेतु बाकी 303 परिवारों को सहायता देने का निर्णय किया | 303 परिवारों में से 223 बी पी एल और 180 ए पी एल परिवार है | 2005-2007 के दो वर्ष के भीतर ग्राम पंचायत 254 परिवारों में शौचालय के निर्माण में सफल रहा | शौचालयों के लिए अभियान स्थानीय स्वयंसेवी संगठनों, शिक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की सहायता से पंचायत समिति की अगुवाई में चलाया गया | पंचायत ने घर-घर दौरा करके कार्य की प्रगति का निकटता से मॉनिटर किया| पंचायत द्वारा निम्नलिखित कार्यक्रमों का आयोजन किया गया:-

  1. जागरूकता सृजन के लिए छोटे समूहों की बैठक;
  2. घर-घर अभियान और पैम्पलेट का वितरण;
  3. शौचालयों के निर्माण हेतु बी पी एल परिवारों को वित्तीय सहायता;
  4. अजा/अजजा परिवारों को शौचालयों के निर्माण हेतु अतिरिक्त सहायता अनुदान;
  5. बैंकों और सहकारी समितियों के जरिए जरूरतमंद परिवारों को ऋण सुविधा देना |

दो वर्ष के सघन अभियान से पंचायत कुछ अच्छा परिणाम प्राप्त कर सका, लेकिन 49 परिवारों में अभी भी शौचालय बनना बाकी था | ग्राम पंचायत समिति ने गाँव में राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों के एक शिविर के आयोजन का निर्णय लिया | बायनडूर प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज के स्वयंसेवकों को आमंत्रित किया गया और उन्होंने बिना शौचालय वाले परिवारों को प्रेरित किया और उन्हें शौचालयों के निर्माण में सहायता किया | जब शिविर समाप्त हुआ सभी बाकी 49 परिवारों ने शौचालयों का निर्माण कर लिया | इसके परिणामस्वरूप मारावंते ग्राम पंचायत को समग्र स्वच्छता के लिए निर्मल ग्राम पुरस्कार (एनजीपी) प्राप्त हुआ और इन्होंने जिले में अपने समकक्ष पंचायतों को प्ररित भी किया |

मारावंते ग्राम पंचायत, जिला-उडुपी, कर्नाटक: जनजातीय आबादी से विभेद की रोकथाम

मारावंते ग्राम पंचायत की सामाजिक न्याय संबंधी स्थायी समिति गाँव में सामाजिक और न्यायिक जिम्मेवारियों को पूरा करने में सक्रियता से लगी हुई है | समिति ने ग्रामीणों के बीच अनेक विवादों के समाधान में सफलता प्राप्त की है | हाल ही में सामाजिक न्याय समिति कोरागा नामक जनजातीय समुदाय के खिलाफ विभेद के मुद्दे में शामिल था | कोरागा समुदाय परंपरागत ढोलवादक हैं और उन्हें ‘अछूत’ माना जाता था | त्योहार के मौसम में उनकी सेवाओं की बहुत आवश्यकता थी, लेकिन उन्हें मंदिर में प्रवेश करने या उसके नजदीक जाने की अनुमति नहीं थी, जबकि दूसरे समूह को ऐसी अनुमति थी | कर्नाटक पंचायत राज अधिनियम के अनुसार इस तरह का विभेद दंडनीय अपराध है और इसे ‘अजालू’ माना जाता है | इस परिप्रेक्ष्य में सामाजिक न्याय समिति ने एक बैठक बुलाई और अपने गाँव में अजालू प्रथा को रोकने का निर्णय लिया | उन्होंने कोरागा समुदाय के नेताओं और तीनों मंदिर के प्रबंधन प्रतिनिधियों की बैठक भी बुलाई और मामले पर विस्तार से विचार-विमर्श किया | अंतत: मारावंते ग्राम पंचायत की सामाजिक न्याय समिति ने कोरागा समुदाय के विरुद्ध भेदभाव के रोकने का निर्णय लिया और उन्हें गाँव के स्थानीय नागरिक के बराबर माना |

कोडम्बाला ग्राम पंचायत, जिला –बीदर, कर्नाटक: दुग्ध शीतन संयंत्र की स्थापना

कोडम्बाला ग्राम पंचायत की बड़ी संख्या में आबादी दुधारू पशुओं के पालन में लगी हुई है | किसान दूध बेचने के लिए मुख्यत: दुग्ध सहकारी सोसाइटी पर निर्भर करते है | परन्तु सोसाइटी के पास कोडम्बाला में भंडारण सुविधा नहीं थी | सोसाइटी सामान्यतया अत्यंत सुबह किसानों से दूध एकत्रित करती थी और इसे हुमनाबाद स्थित तालुक मुख्यालय भेजती थी, जो कोडम्बाला से काफी दूर है | जब तक दूध हुमनाबाद पहुंचता था, यह खट्टा हो जाता था | किसानों ने इस मामले पर ग्राम पंचायत के साथ विचार-विमर्श किया | किसान और पंचायत समिति जिला प्राधिकारियों से मिले और जिला स्तर के अधिकारियों ने ग्राम पंचायत को सलाह दी कि वे स्वच्छ दुग्ध उत्पादन योजना के अंतर्गत कोडम्बाला में दुग्ध शीतन संयंत्र शुरू करने हेतु वित्तीय सहायता के लिए भारत सरकार को आवेदन करें | ग्राम पंचायत समिति ने दुग्ध शीतन संयंत्र शुरू करने हेतु वित्तीय सहायता के लिए भारत सरकार को आवेदन दिया और प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई तथा 17 लाख रु. स्वीकृत हुआ | इस सहायता से अगस्त 2012 में एक दुग्ध शीतन संयंत्र की स्थापना की गई | प्रारंभ में संयंत्र में केवल 70 लीटर दूध एकत्रित किया गया और इससे 57 किसान सम्बद्ध थे | वर्तमान में दूध का दैनिक एकत्रीकरण बढ़कर 1700 लीटर हो गया है और इससे 573 किसान लाभान्वित होते हैं | यह भी सूचना है कि संयंत्र शुरू होने से पहले दूध का मूल्य लगभग 20/- रु. प्रति लीटर थी, जो अब लगभग 37/- रु. प्रति लीटर है, जिससे मुनाफ़ा में वृद्धि हुई है | यह भी सूचना है कि कोडम्बाला के किसानों के अलावा कोडम्बाला के आस-पास के 16 गाँवों के लगभग 540 किसान इससे लाभान्वित होते हैं | ग्राम पंचायत की समय पर की गई पहल ने पिछड़े गाँव की अर्थव्यवस्था को बदल दी है |

कोडम्बाला ग्राम पंचायत, जिला-बीदर, कर्नाटक: किसान क्लब की स्थापना

कोडम्बाला में अधिकांश लोग किसान हैं और वे अपनी जीविका के लिए खेती पर निर्भर करते है| इस स्थिति में ग्राम पंचायत ने 26 सदस्यों के साथ किसान क्लब का आयोजन किया | क्लब के मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं:

  • कृषि कार्यकलापों का मशीनीकरण
  • किसानों के लिए प्रशिक्षण और प्रदर्शन दौरे
  • जैव कृषि कार्यकलाप की शुरुआत
  • ड्रिप सिंचाई प्रणाली की शुरुआत
  • बीजों के उच्च प्रजनक किस्म की शुरुआत
  • ग्राम पंचायत में वर्मिंन कम्पोस्ट इकाई की शुरुआत
  • कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा प्रणाली की शुरुआत
  • खेती की लागत में कमी करना, और ‘जीरों’ बजट कृषि की शुरुआत

किसान क्लब पाँच एकड़ भूमि में जैव कृषि शुरू कर चुकी है और यह सूचना दी है कि जैव कृषि उत्पादों की बड़ी मांग है | ग्राम पंचायत सिंचाई सुविधाएँ देकर और मनरेगा के तहत खुले कुएं का निर्माण करके किसान क्लब को सहायता दी है | किसान क्लब के सदस्यों से विचार-विमर्श के बाद उन्होंने सूचना दी है कि सिंचाई सुविधा और उच्च किस्म के बीजों के प्रयोग द्वारा गन्ना का उप्तादन 200 प्रतिशत, सोयाबीन की खेती 150 प्रतिशत और सब्जी की खेती 50 प्रतिशत बढ़ गई है | सदस्यों ने यह भी सूचना दी है कि बैंकों और कृषि विभाग से अच्छी सहायता मिली है| ग्राम पंचायत ने किसानों को अधिक सहायता प्रदान करने हेतु किसान क्लब को नाबार्ड से जोड़ने का निर्णय लिया है |

स्रोत: भारत सरकार, पंचायती राज मंत्रालय

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