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जम्मु और कश्मीर राज्य के पंचायतों की सफल कहानियाँ

इस भाग में जम्मु और कश्मीर राज्य के पंचायतों की सफल कहानियाँ प्रस्तुत की गई है |

कूटाह ग्राम पंचायत, कठुआ जिला, जम्मु और कश्मीर समाज संघटन

पंचायत ने गाँव के लोगों से सफलतापूर्वक निधि जमा कर विकास कार्यों में लगायी है | पंचायत ने दो कुँए और एक अत्यविधि शेड का निर्माण जनता के योगदान से किया है | पंचायत ने एक सार्वजनिक स्नानघर का निर्माण ग्रामनिवासियों के रु. 8 लाख की निधि से किया है जिसमें 200 मीटर गहरे कुँए का भी समावेश है | इस कुँए से पानी निकालकर सार्वजनिक स्नानघर के पास स्थित टंकी में जमा किया जाता है और इस टंकी से सुरक्षित पेय जल की आपूर्ति की जाती है |

सार्वजनिक स्नानघर में पुरुषों एवं स्त्रियों के लिये अलग अलग स्नानघर है | पंचायत ने नई स्कूल बिल्डिंग के निर्माण के लिये भी रु. 8 लाख की निधि जमा की है | इस के अलावा, पंचायत ने गाँव की सड़कों के निर्माण का भी लक्ष्य केंद्रित किया है | गाँव में एक भी कच्ची सड़क नही है | हाल ही में, एमजीएनारईजीए पंचायत ने इंटरलोकिंग टाईल्ससे 2 किमी लंबी और 10 फूट चौड़ी सड़क बनाई है |

नागरोटा ग्राम पंचायत, कठुआ जिला, जम्मु और कश्मीर: स्त्री भ्रूण हत्या के खिलाफ अभियान और सुविधा निर्माण

पंचायत ने एक प्रस्ताव स्वीकार किया है कि उन के गाँव में लिंग परीक्षण निषिद्ध हो और ऐसे अपराध के लिये रु. 20,000 क दण्ड हो | इस पहल की शुरुआत की गई क्योंकि बालक लिंगानुपात में स्त्री बालकों की संख्या गिर रही थी | ग्रामपंचायत ने सभी सदस्यों को उन के संबंधित वार्ड से आवश्यक लिंग विशिष्ट जानकारी लाने को कहा और तब पता चला कि हर 10 लड़कों के पीछे केवल 7-8 लड़कियां है | इस के बाद पंचायत ने स्त्री भ्रूणहत्या विरोधी प्रस्ताव स्वीकृत किया | अगली ग्रामसभा के लिये उन की योजना है, ऐसा प्रस्ताव पास करना जिससे बरात का आकार कम कर शादी का खर्चा कम किया जाय और दहेज की व्यवस्था का बहिष्कार कर बालक लिंगानुपात संतुलित किया जा सके |

पंचायत में ड्रेनेज व्यवस्था

पंचायत ने गाँव के ड्रेनेज व्यवस्था में भी सुधार किया है | पंचायत ने एक किमी लंबी सीमेंट की गटर बनाई है जिस में गाँव के सभी नाले मिलते है | यह गटर गाँव का सभी कूड़ा पानी गाँव के बाहर ले जाता है | गाँव के अंदर छोटे नाले बनाए गये है जिससे पानी जमा न हो | इस निर्माण के लिये ग्राम पंचायत ने स्थानिक जानकारी के अनुसार विभिन्न तकनीकों का एक साथ इस्तेमाल किया है | नालों के साथ, उन्होंने सड़कों का भी निर्माण किया है और ग्रामवासियों को घर के पास की सड़कें साफ़ सुथरी रखने का जिम्मा दिया है | इससे ग्रामवासियों में सार्वजनिक संपत्ति के प्रति स्वामित्त्व की भावना को प्रोत्साहन मिलता है |

 

स्रोत: भारत सरकार, पंचायती राज मंत्रालय

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