सामग्री पर पहुँचे | Skip to navigation

शेयर
Views
  • अवस्था संपादित करने के स्वीकृत

महाराष्ट्र राज्य के पंचायतों की सफल कहानियाँ भाग – 6

इस भाग में महाराष्ट्र राज्य के पंचायतों की सफल कहानियाँ प्रस्तुत की गई है |

मनीयाचीबाड़ी ग्राम पंचायत, जिला सतारा, महाराष्ट्र: पर्यावरण संरक्षण

जब पर्यावरण को बचाने की बात आती है तो मनीयाचीबाड़ी जैसे छोटे गाँव, भावी भारतीय गाँव और ऐसे गाँव जिसका भविष्य उज्ज्वल हो, के रूप में उभर रहा है, गत 10 वर्षों में इस गाँव में सभी विकास कार्य पर्यावरण के मुद्दों पर नजर रखकर किए गए है | यही कारण है कि ऐसे मामले इस गाँव में जीवन का आधार बन गए है, जिनके बारे में अभी भी सोचा जा रहा है या केवल नारे दिए जा रहे है | उदाहरण के लिए:

सफाई

यह गाँव निर्मल ग्राम का स्तर प्राप्त करने वाला देश में पहला गाँव था और इसने गत 10 वर्षों में प्रत्येक को शौचालय सुलभ करा कर इस स्तर को बनाए रखा है |

बायो गैस का इस्तेमाल

ग्राम पंचायत द्वारा मनाए जाने और प्रेरित किए जाने के फलस्वरूप 16 घरों में उनके अपने बायो गैस प्लांट है | इसका मतलब है कि बहुत ही छोटे गाँव में 16 घरों से कोई धुँआ नहीं निकलता है, बेकार सामग्री का उपयोगी इस्तेमाल, लकड़ियों जैसे ईंधन का इस्तेमाल न करना और घर की महिलाओं के जीवन की गुणवत्ता में सुधार |

वृक्षारोपण

मनीयाचीबाड़ी गाँव में ‘एक वृक्ष एक व्यक्ति’ के राज्य लक्ष्य से कहीं अधिक लक्ष्य प्राप्त किया है | बेकार पानी और ठोस प्राकृतिक जैविक कूड़े से तैयार वानस्पति के इस्तेमाल से वृक्षारोपण को जारी रखा गया है और इस प्रकार 3 पर्यावरण सुधार प्रयासों को एक साथ किया गया है |

बेकार पानी प्रबंधन

घरों के बेकार पानी के निपटान के लिए दक्ष मल गड्ढों (सोक पिट) और लाइन वाले नालों का इस्तेमाल किया जाता है | 70 घर इन नालों में पानी छोड़ते है जो आगे वृक्षों की सिंचाई के लिए ‘पारस बाग़’ (समुदाय बागवानी स्थल) में चला जाता है | कुछ पानी भुगतान पर निजी वृक्षारोपणों को भी दिया जाता है | इस आय और पारस बाग़ से होने वाली आय से बेकार पानी आर्थिक परिसम्पति बन जाता है |

ठोस अपशिष्ट सामग्री प्रबंधन

अधिकांश घरेलू ठोस अपशिष्ट सामग्री जैविक अपशिष्ट सामग्री होता है | इस अपशिष्ट सामग्री का इस्तेमाल, वानस्पतिक खाद तैयार करने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत के कृमि पालन गड़ढें के आहार के रूप में किया जाता है | सभी घर अपनी ठोस अपशिष्ट सामग्री को गड़ढें में जमा करने में सहयोग कर रहे है | यह कृमि पालन गड्ढा ग्राम पंचायत के लिए राजस्व भी अर्जित करता है |

सौर ऊर्जा इस्तेमाल

सभी 9 सड़क लाइटें और प्रत्येक घर में 2 लाइटें अलग-अलग सौर पैनलों के माध्यम से सौर ऊर्जा से चलाई जाती है | साफ़ ऊर्जा होने के अलावा इससे गाँवों के बिजली के पूरे बिल में 70 प्रतिशत तक की कमी आई है | कुछेक घर, जो बिजली के अन्य उपकरणों का इस्तेमाल नहीं कर रहे है का बिजली का बिल शून्य आता है | ग्राम पंचायत को पूरी तरह मालूम है कि ईंधन आधारित ऊर्जा के इस्तेमाल मी कमी लेन से कार्बनडायक्साइड कम बनती है |

मनियाचीबाड़ी ने इस बात का सही प्रदर्शन किया है कि पर्यावरण संरक्षण पर लागत नहीं आती है लेकिन इसे वास्तव में आय सर्जन कार्य में बदला जा सकता है | गाँव के युवा और जुझारू सरपंच का यह कहना सही है कि “हमारा उद्देश्य सफाई और खुशहाली है|”

मनीयाचीबाड़ी ग्राम पंचायत, जिला सतारा, महाराष्ट्र: सौर ऊर्जा की चमक

तीन वर्ष पहले सौर सड़क लाइट लगाने के लिए राज्य सरकार के प्रोत्साहन से प्रेरित होकर ग्राम पंचायत की बैठक में एक योजना प्रस्तुत की गई कि अलग-अलग घरों में भी सौर लाइटें होनी चाहिए | ग्रामवासियों के सहयोग से प्रेरित होकर ग्राम पंचायत ने एक परियोजना के रूप में पूरे गाँव के लिए सौर लाइटें शुरू की | अनेक बिक्रेताओं के पास घरेलू लाइट के लिए स्वतंत्र (स्टैण्ड आलोन) प्रणालियाँ उपलब्ध थी | ग्राम पंचायत द्वारा भावी आपूर्तिकर्ताओं से बातचीत की गई और ग्राम पंचायत ने प्रत्येक प्रणाली के दाम को 9,000 से घटवाकर 5,700 करवा लिया | गाँव 15.01.2011 को सौर लाइटों से जगमगा उठा | सड़क लाइटों की लागत का भुगतान सरकार द्वारा ग्राम पंचायत को किया गया | जबकि घरों की लाइटों की लागत लोगों द्वारा ख़ुशी से वहन की गई | पूरी परियोजना की लागत 7,00,000 बैठी जबकि प्रति माह 30,000 रूपये के औसत से बिजली बिल में 60 से 70 प्रतिशत तक की कमी आई | इस प्रकार गत 2 वर्षों में इस परियोजना की लागत बिजली बिलों की बचत से लगभग पूरी हो गई है | सड़क लाइटों के भुगतान के अलावा राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त नकद प्रोत्साहन ग्राम पंचायत के लिए एक बोनस है | बिजली दरों में लगातार वृद्धि किए जाने से बिजली बिलों में बचत से लागत लाभ के उत्तोतर रूप से बढ़ने की संभावना है | कुछ घरों, जो अन्य उपकरणों का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, में पहले ही बिजली के बिल शून्य हो गए है |

सौर ऊर्जा से जीवन में बदलाव

गाँव की एक बहुत ही मुखर वृद्ध महिला ने कहा, “सौर लाइटों से गाँवों में जीवन की गुणवत्ता में बदलाव आया है | आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में अनियमित बिजली सप्लाई के कारण, जबकि पड़ोस के गाँवों में अंधेरा छाया हुआ है, हमारा गाँव दिवाली की रात जैसी लाइटों से चमक रहा है”| शब्दों से ज्यादा उस महिला की आँखों में चमक ने सब कुछ व्यक्त कर दिया | उसके कथन के बाद ये आवाजें सुनी जा सकती थी, “आमचा ग्राम सौलर ग्राम आहे” (हमारा गाँव सौर गाँव है) | उप सरपंच ने बताया कि सौर लाइटों के लाभ से प्रेरित होकर ग्राम पंचायत सौर जल होटरों और सौर पम्पों के बारे में सोच रही है |

स्रोत: भारत सरकार, पंचायती राज मंत्रालय

3.13846153846

अपना सुझाव दें

(यदि दी गई विषय सामग्री पर आपके पास कोई सुझाव/टिप्पणी है तो कृपया उसे यहां लिखें ।)

Enter the word
नेवीगेशन
Back to top

T612019/10/14 02:02:54.309644 GMT+0530

T622019/10/14 02:02:54.333620 GMT+0530

T632019/10/14 02:02:54.334373 GMT+0530

T642019/10/14 02:02:54.334664 GMT+0530

T12019/10/14 02:02:54.286989 GMT+0530

T22019/10/14 02:02:54.287198 GMT+0530

T32019/10/14 02:02:54.287356 GMT+0530

T42019/10/14 02:02:54.287507 GMT+0530

T52019/10/14 02:02:54.287596 GMT+0530

T62019/10/14 02:02:54.287666 GMT+0530

T72019/10/14 02:02:54.288465 GMT+0530

T82019/10/14 02:02:54.288665 GMT+0530

T92019/10/14 02:02:54.288886 GMT+0530

T102019/10/14 02:02:54.289116 GMT+0530

T112019/10/14 02:02:54.289169 GMT+0530

T122019/10/14 02:02:54.289266 GMT+0530