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तमिलनाडु राज्य के पंचायत की सफल कहानियाँ भाग – 5

इस भाग में तमिलनाडु राज्य के पंचायत की सफल कहानियाँ प्रस्तुत की गई है |

जी. कल्लुपट्टी ग्राम पंचायत, थेणी जिला, तमिलनाडु: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन

थेणी जिले के जी. कल्लुपट्टी, तमिलनाडु ग्राम पंचायत के खाते में बहुत सी सफल कहानियाँ हैं| अपशिष्ट प्रबंधन के बारे में पंचायत द्वारा विकसित नवप्रर्वतनशील विचार सराहनीय है | ग्राम पंचायत के शहरी स्वरूप व धन की कमी ने पंचायत को नई योजना लागू करने के लिए उकसाया |

जी. कल्लुपट्टी ग्राम पंचायत, थेणी जिला, तमिलनाडु: आईइसी गतिविधियों

आईइसी गतिविधियों के माध्यम से पंचायत द्वारा ईमानदारी से किए प्रयासों ने गाँववासियों के बीच साफ-सफाई की भावना को जन्म दिया | परन्तु ठोस अपशिष्ट को इकठ्ठा करने व उसके निपटान की प्रभावी प्रणाली के अभाव में इसे सही ढंग से संबोधित नहीं किया जा सका | पंचायत एवं ग्राम सभा की बैठकों में इस समस्या पर विचार-विमर्श करने के पश्चात अध्यक्ष ने घरों से कूड़ा इकठ्ठा करने के लिए 2.5 लाख का वाहन खरीदने का प्रस्ताव रखा | प्रस्ताव से प्रेरित हो कर गाँव के चार लोगों ने 1.25 लाख रु. का दान दिया | जिला कलेक्टर ने पंचायत को वाहन खरीदने की अनुमति दी | चालक लाइसेंस प्राप्त गाँववासियों ने चक्रानुक्रम के आधार पर कूड़ा इकठ्ठा करने के लिए वाहन चलाने की स्वेच्छिक सेवाएँ देने का प्रस्ताव रखा |

इस वाहन का नाम ‘तुमाई वाहनम’ (स्वच्छता वाहन) रखा गया और उसे जन संबोधन साधनों से लैस किया गया | इसका सक्रिय समय निश्चित करते हुए सभी परिवारों को सूचित किया गया| ‘स्वच्छता वाहन’ ऐसे अर्थपूर्ण पुराने फ़िल्मी गाने बजाने के साथ-साथ घोषणा करते हुए गाँव में दौड़ने लगा जिनसे साफ़-सफाई व आरोग्य जीवन संबंधी संदेश मिलते थे | धीरे-धीरे सभी गाँववासी इस बारे में शिक्षित हो गए और घरों का कूड़ा जमा रख कर पंचायत के वाहन का इंतजार करने की उन्हें एक अच्छी आदत पड़ गई | थोड़े समय में सार्वजनिक स्थानों में जमा कूड़े का ढेर गायब होने लगा | अब पूरा गाँव साफ़-सुथरा दिखता है और आंगनबाडियों, विद्यालयों व ग्राम सभा की बैठकों में सही ढंग से साफ़-सफाई व आरोग्य जीवन का संदेश बारंबार दोहराया जाता है | पंचायत अब कूड़े को अलग करने तथा ठोस व तरल अपशिष्ट का सुरक्षित निपटान करने की योजना बना रही है | पंचायत ने अब कूड़ा अलग करने तथा उसके निपटान व पुनरावर्तन के लिए ‘नाथम पोरामपोक्की’ (पंचायती जमीन) का इस्तेमाल करने के लिए पत्राचार करना आरंभ कर दिया है |

जी. कल्लुपट्टी ग्राम पंचायत, थेणी जिला, तमिलनाडु: संसाधनों का सामाजिक लामबंदी एवं गैर-परंपरागत प्रबंधन

विकासात्मक गतिविधियों के लिए जी. कल्लुपट्टी ग्राम पंचायत, स्थानीय नागरिकों व गैर-सरकारी संस्थाओं से धन, मानव संसाधन व स्वैच्छिक दान जुटाने में सफल हो गई है | इस संबद्ध में पंचायत के पास सफलता की कई प्रमाणित कहानियाँ हैं | गाँव के समृद्ध परिवार से संबंधित एक व्यक्ति ने गाँव में उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खोलने के लिए अपनी पैतृक संपति से 10 एकड़ भूमि दान में दे दी | उसने एक इमारत भी तैयार की जिसका इस्तेमाल विद्यार्थियों के लिए होस्टल के रूप में किया जाता है | इसके अतिरिक्त यह भी सूचना मिली है कि उसने अब तक 500 विद्यार्थियों को आर्थिक संरक्षण दिया है | हाल ही में उसने समुदाय विशेष के सदस्यों के लिए शमशान घाट बनाने के लिए 8 प्रतिशत जमीन दान की है | पंचायत ने कूड़ा इकठ्ठा करने के लिए वाहन की खरीद के लिए किसी अन्य व्यक्ति से 4 लाख रु. लिए | पंचायत ने समाज के सीमांत परिवारों के लिए आवास, स्वच्छता एवं पेय जल के क्षेत्र में विकासात्मक गतिविधियों की एकसूत्रता के लिए RTU (दुर्गम स्थानों तक पहुंचना) नामक गैर-सरकारी संस्था से संपर्क किया जिसका मुख्यालय गाँव में है | पंचायत के प्रत्येक घर से ठोस अपशिष्ट इकठ्ठा करने के लिए वाहन चलाने वाले मानव संसाधनों की भी सफलतापूर्वक लामबंदी की गई | सार्वजनिक कुँए खोदने, बोर वैल, इलेक्ट्रिक पंप सैट तथा पाइप लाइन लगाने में स्थानीय नागरिकों एवं गैर-सरकारी संस्थाओं ने पंचायत की मदद की |

लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए ग्राम सभा का इस्तेमाल प्रभावी ढंग से किया जाता है और कार्रवाई योजना बनाते समय इन सुझावों को शामिल किया जाता है | सिविल सोसाइटी की मदद से असामाजिक गतिविधियों के प्रति सर्तकता बरती जाती है | इलाके की विकासात्मक जरूरतों को पूरा करने के लिए फण्ड एवं मानव संसाधन जुटाने में जी. कल्लुपट्टी ग्राम पंचायत सबसे श्रेष्ठ है | संभवत: स्थानीय संसाधनों को सफलतापूर्वक जुटाने में जी. कल्लुपट्टी ग्राम पंचायत के प्रति लोगों का भरोसा ही इसका कारण है |

नट्टारमंगलम ग्राम पंचायत, कुडालोर जिला, तमिलनाडु: सभी महिला पंचायत

नौ सदस्यीय एवं एक अध्यक्ष सहित सभी महिलाओं की पंचायत का चयन करके नट्टारमंगलम ग्राम पंचायत ने राज्य में इतिहास रच डाला है | पंचायत में 750 परिवार हैं, जिनकी आबादी 2500 है, जिनमें से अधिकांशत: दलित हैं | मतदाताओं की कुल संख्या 1250 है | सभी महिला सदस्यों का सर्वसम्मति से चयन स्वयं में महत्वपूर्ण है क्योंकि पंचायत को राज्य चुनाव आयोग द्वारा सामान्य निर्वाचन क्ष्रेत्र घोषित कर दिया गया है | सभी गाँववासियों की बैठक में महिलाओं को नामांकन पत्र भरने की अनुमति देने का निर्णय लिया गया जहाँ उपस्थित अधिकांश महिलाएं ही थीं | सभी गाँववासियों की सांझे मंच पर यही राय थी कि गाँव का चहुमुखी विकास महिलाओं द्वारा ही बेहतर ढंग से सुनिश्चित किया जा सकता है | गाँववासियों ने यह भी निर्णय लिया कि महिला उम्मीदवारों को चुनाव के लिए एक पैसा भी खर्च करने की आवश्यकता नहीं है| ग्राम समुदाय के निर्णय के अनुसार दस महिलाओं का ग्राम पंचायत में सर्वसम्मति से चयन हो गया | नट्टामंगलम ग्राम पंचायत में दस महिलाओं का निर्विरोध चयन अपने आप में एक खबर थी | राष्ट्रीय एवं स्थानीय समाचार पत्रों तथा दृश्य मीडिया ने इसका अत्याधिक प्रचार किया | चुनाव के तुरन्त बाद अध्यक्ष जो कि एक अध्यापक थी, ने मीडिया को बताया कि उसने पूर्णकालिक रूप में गाँववासियों की सेवा करने के लिए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है क्योंकि उसका चयन निर्विरोध हुआ है और उसे गाँववासियों का पूरा समर्थन भी प्राप्त है | उसने मीडिया को यह भी बताया कि प्रत्येक घर में प्रसाधन कक्ष तैयार करना उसकी प्राथमिकता है| उसने बताया कि ‘प्रसाधन कक्ष न होने के कारण महिलाओं को बहुत अधिक भुगतना पड़ता है | सभी गरीब हैं और अपने लिए प्रसाधन कक्ष बनाने में असक्षम हैं’| वह लोगों से स्वैच्छिक अंशदान जुटाने में सफल हुई और प्रसाधन कक्षों के निर्माण के लिए विभिन्न परोपकारी लोगों से धन राशि इकठ्ठा करने के लिए उसने संपर्क किया | जब उसने पंचायत कार्यालय में कदम रखा तब 750 परिवारों में से केवल तीन घरों में ही प्रसाधन कक्ष थे और अब सभी घरों में प्रसाधन कक्ष हैं | इसके अतिरिक्त गाँव में महिलाओं के लिए स्वच्छता की मुश्किलें भी है | महिला अध्यक्ष ने बताया कि “मेरी अगली योजना प्रत्येक परिवार की मौजूदा आमदनी का स्तर एक वर्ष के भीतर 2500 – 3000 रु. से बढ़ा कर 10000 रु. तक करने की है” | (25 अक्टूबर 2011) जब महिलाओं ने पंचायत के लीडर के रूप में पदभार संभाला था, उसी तारीख से ही वह संजोए हुए सपनों को साकार करने में पूरी ताकत से जूट गई हैं |

स्रोत: भारत सरकार, पंचायती राज मंत्रालय

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