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हमारा गाँव हमारी योजना 2016-17–बिहार ग्राम पंचायत विकास योजना

इस भाग बिहार ग्राम पंचायत विकास योजना के अंतर्गत हमारा गाँव हमारी योजना की जानकारी दी गई है ।

परिचय

विकसित भारत की परिकल्पना, बिहार के विकास के बिना अपूर्ण है। भारतीय संविधान के  73वें संशोधन के आलोक त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं को सुदृढ़ करने हेतु बिहार पंचायत राजअधिनियम, 2006 अधिनियमित किया गया है एवं स्थानीय स्वश्वासन में आम लोगों की सहभागिता बढ़ाने, पारदर्शिता लेन, अनुसूचित जातियाँ, अनुसूचित जनजातियाँ, समाज के अत्यंत पिछड़े वर्गों तथा महिलाओं की सम्मान जनक भागदारी सुनिश्चित करने हेतु निरंतर सार्थक प्रयास किए गए हैं। जब ग्रामीण क्षेत्रों के विकास का उत्तरदायित्व पंचायतों के पास है। आमजन को घर बैठे गाँव में उचित न्याय प्राप्त हो, इस हेतु ग्राम कचहरी का भी गठन राज्य में किया गया है।

राज्य में विकास और जनकल्याण से संबंधित अनेक योजनाएँ एवं कार्यक्रम एवं संचालित किए जा रहे हैं। सभी योजनाओं और कार्यक्रमों का लक्ष्य अंतत: राज्य के आमजन, विशेष हर हाशिये पर लोग हैं, अत: उनकी जागरूकता व सक्रिय भागीदारी के बिना विकास के वंचित परिणाम प्रोत नहीं किये जा सकते हैं। पंचायती राज व्यवस्था के अंतर्गत त्रिस्तरीय स्थानीय स्वशासन को सशक्त एवं प्रभावी बनाने के लिए सभी हितधारकों की भागीदारी आवश्यक है।

गहन सहभागी नियोजन अभ्यास

आई. पी. पी. ई. का शाब्दिक अर्थ – गहन सहभागी नियोजन अभ्यास है, जो मिशन अंत्योदय के नाम से प्रचलित है। विगत वर्ष भी आई. पी. पी. ई. – 1 का आयोजन किया गया था, जिसमें गहन सहभागी नियोजन अभ्यास द्वारा मनरेगा का श्रम बजट एवं वार्षिक कार्य योजना तैयार की गई थी। इस वर्ष विकास विभाग, राज्य आजीविका मिशन एवं पंचायती राज विभाग के साथ अभिसरण कर योजनाओं का निर्माण कर रहा है। ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार, द्वारा दिए गए निर्देश के अनुसार पूरे देश में चिन्हित 2500 पिछड़े प्रखंडों के लिए इस अभ्यास के द्वारा मनरेगा का श्रम बजट एवं वार्षिक कार्य योजना के अलावा राज्य ग्रामीण राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के लिए योजनाओं का सूत्रण करते हुए राज्य ग्रामीण विकास योजना की तैयारी की जानी है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मानव विकास सूचकांक के आधार पर बिहार के 300 पिछड़े के आई. पी. पी. ई. – 2 के लिए चिन्हित किया है। राज्य सरकार द्वारा इस नियोजन अभ्यास का आयोजन राज्य के सभी 534 प्रखंडों में करने का निर्णय लिया गया है। इसका उद्देश्य मनरेगा का श्रम बजट एवं वार्षिक कार्य योजना एन.आर.एल.एम्, डी.डी.जी.के.वय., एल.ए.वय., एन.एस.ए.पी. के लिए योजनाओं के चयन के उपरांत राज्य ग्रामीण विकास योजना के तैयार करना, चौदहवें वित्त आयोग की अनुशंसा के अलोक में आयोग के अनुदान प्राप्त करने हेतु पंचायती राज विभाग के लिए ग्राम पंचायत विकास तैयार  करना एवं विकसित बिहार के निश्चय तथा सभी वासवटों में पक्की गली, नाली, सभी घरों में शौचालयों, बल का स्वच्छ जल तथा बिजली को मूर्त रूप देने हेतु अपेक्षित आंकड़ों का संकलन किया जाना है ताकि गाँव के समग्र विकास के लिए ग्रामीणों की आजीविकाओं के अतिरिक्त उनके जीवन से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं जैसे स्वच्छता, पेयजल, बिजली की उपलब्धता एवं उनके सामान्य जीवन स्तर में सुधार हो।

आई. पी. पी. ई. -2 का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण संयुक्त रूप से अपने तथा समुदाय के संसाधनों एवं जरूरतों का आंकलन कर सुनियोजित तरीके से योजनाओं की प्राथमिकताओं का निर्धारण करते हुए वार्षिक विकास योजना तैयार करें। इस हेतु प्रखंड नियोजन दल का गठन किया गया है जिसमें 67288 सदस्यों को आई.पी.पी.ई. – 2 के अंतर्गत नियोजन अभ्यास के लिए प्रशिक्षित किया गया है। बी.पी.टी. दल पर टोला एवं बसावट में पंचायत प्रतिनिधियों एवं समुदाय के साथ मिलकर हर श्रेणी के लोगों की भागीदारी से योजना बनाने में सहयोग करेगी।

ग्राम पंचायत विकास की पृष्ठभूमि एवं प्रासंगिकता

त्रि – स्तरीय ग्राम पंचायतों के गठन के उपरांत राज्य के ग्रामीण विकास संबंधी फ्लैगशिप कार्यक्रमों में अपने स्तर से योजनाओं का सूत्रीकरण किया जा रहा है। इस क्रम को सशक्त बनाने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत विकास योजना के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की योजनाओं को विकेंद्रीकृत करते हुए योजनाओं के चयन एवं उनका क्रियान्वयन की जवाबदेही भी ग्राम पंचायतों ग्राम पंचायतों को हस्तगत कराये जाने की आवश्यता है। इन जिम्मेदारियों की पूरा तथा राम पंचायतों के सामेकित एवं दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु वार्षिक एवं पंचवर्षीय ग्राम पंचायत विकास योजनाएं विकास योजना का मुख्य उद्देश्य पंचायतों को समग्र एवं समेकित विकास है, जिसमें अधोसंरचना विकास के साथ ही सामाजिक एवं आर्थिक विकास भी  सम्मिलित हैं।

चौदहवें वित्त योग द्वारा वर्ष 2019-20 तक पांच वर्षो की वर्षो  की अवधि के लिए, राज्य में पंचायतों के विकास हेतु कुल रू. 21020.83 करोड़ की राशि का एक बड़ा अनुदान प्राप्त होना है। इन पांच वर्षों में मनरेगा निधि के अतिरिक्त राज्य वित्त आयोग द्वारा हस्तांतरित निधि, स्वयं के राजस्व स्रोत तथा केंद्र एवं राज्य प्रायोजित विभिन्न योजनाओं की निधि के साथ राज्य में ग्राम पंचायतों के वित्तीय संसाधनों का समृद्ध होना अवश्यभावी है। चौदहवें वित्त आयोग की अनुशंसा के  आलोक के प्रदत्त अनुदान की कूल राशि रू. 21020.83 करोड़ में बुनियादी अनुदान के अहार्ता कुल रू. 18919.05 करोड़ की राशि तथा कार्य निष्पादन अनुदान के तहत 2016-17 तक तक कुल रू. 2100 करोड़ की राशि सम्मिलित हैं।

अब यह अनिवार्य हो गया है कि राज्य में ग्राम पंचायतों के उच्चतम विकास के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए इस बड़े वित्तीय संसाधन का उपयोग करते हुए एकीकृत विकास योजनाएँ तैयार की जाएँ। ग्राम पंचायत स्तरीय योजनाओं के निर्माण के समय यह भी स्मरण रहना चाहिए कि संसाधनों के अभिसरण के लिए भारत सरकार की ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा 5 अगस्त 2015 दिनांकित अ.शा.सं.जे. – 11016/13/2015 के माध्यम से दिशा-निर्देश जारी किया गाय है।

चौदहवें वित्त योग अंतर्गत केंद्र प्रदत्त बुनियादी अनुदान की राशि का उपयोग ग्राम पंचायतों ग्राम पंचायतों द्वारा चिन्हित मूलभूत सेवाओं पर भी किया जाएगा। ग्रामीण अपने प्राकृतिक संसाधनों के आधार पर आजीविका संवर्धन तथा पंचायत की मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए जनोपयोगी योजनाओं का चयन कर सकते हैं, जो निम्नांकित हो सकती हैं-

कृषि

फलदार वृक्षारोपण, भूमि समतलीकरण, मेढबंदी, डोभा, , पोखर, तालाब, कुआँ, वर्मीकंपोस्ट टैंक, एजोला टैंक आदि

पेयजल व स्वच्छता व्यवस्था

पुरानी सामुदायिक नल – जल प्रणाली का रख – रखाव, घर- घर तक नल द्वारा पयेजल आपूर्ति, सामुदायिक जल – जल प्रणाली का निर्माण, समुदायिक शौचालयों का निर्माण, पक्के नालों का निर्माण, सोख्ता गड्डों का निर्माण, वर्षा जल की निकासी हेतु प्रबंध, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन आदि।

बुनियादी सुविधाएँ

सड़क, पैदल पथ, पुलिया व खेल का मैदान, टोला संपर्क पथ का निर्माण एवं रख रखाव, सड़कों पर प्रकाश की व्यवस्था, पंचायत भवन, समुदायिक भवन, स्कूल भवन, आंगनबाड़ी केंद्र आदि में प्रकाश की व्यवस्था आदि।

उद्यान

पंचायतों में उद्यानों का विकास एवं रख- रखाव

कब्रिस्तान/श्मशान

कब्रिस्तान एवं श्मशान में चबूतरा एवं चाहरदीवारी का सुदृढ़करण एवं रख – रखाव तथा अन्य आवश्यक कार्य।

ग्राम सभा व ग्राम पंचायतें अन्य विभागों की योजनाओं एवं कार्यक्रमों के अंतर्गत प्राप्त होने वाले संसाधनों के समन्वय के साथ अभिसरण कर योजनाओं का चयन करेंगी। योजनाओं का चयन करते समय यह ध्यान देना आवश्यक है कि योजनाएँ बुनियादी सुविधाएँ को सुदृढ़ करने वाली तथा छोटी हो ताकि वह योजनाएँ निर्धारित संसाधनों के तहत पूर्ण हो सकें। योजना निर्माण/ चयन के समय यह भी ध्यान में रखा जाना चाहिए कि ग्राम पंचायत विकास योजना, उपलब्ध संसाधनों से आमजन की प्राथमिकताओं के अनुरूप होने चाहिए तथा इसमें उचित, समावेशी, पारदर्शी एवं सहभागिता पूर्ण प्रक्रिया के माध्यम से स्थानीय संसाधनों का संगठन किया जाना चाहिए।

विकास की सभी योजनाओं में टोला को इकाई मान कर कार्य किया जाना होगा। एक ही गाँव के विभिन्न टोलों में से कुछ विकास से वंचित नहीं रह जाएँ, यह सुनिश्चित किया जाना होगा। विशेष कर महादलित एवं कमजोर वर्गों के टोलों/वसावटों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ते हुए उन्हें विकास की आयोजन में समुचित स्थान दिया जाना होगा।

राज्य की सभी ग्राम पंचायतें अपने क्षेत्र के विकास संबंधी आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए उपलब्ध संसाधनों को दृष्टिगत रखते हुए पांच वर्षों की योजना (वित्तीय वर्ष 2015 – 16 से 2019 -20)  (दीर्घकालिक) और वार्षिक कार्य योजना (वित्तीय वर्ष 2016-17 एवं 2016-17) का ग्रामीण विकास विभाग को आई.पी.पी.ई. – 2 (मिशन अंत्योदय) नियोजन प्रक्रिया का तहत अभिसरण विभाग आदि विभागों से संबंधित वार्ड एवं पंचयत स्तर पर व्यक्तिगत एवं समुदायिक सूचनाएं भी इस योजना की तैयारी संग्रहित की जानी हैं, जिनका उपयोग ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार करने में किया जा सकेगा।

“पंचायत सरकार भवन/ग्राम पंचायत कार्यालय” इस अभियान के कार्यालय के रूप में प्रयुक्त होगा। ग्राम पंचायत स्तरीय कर्मियों जैसे- पंचायत तकनीकी सहायक, जनसेवक, कृषि सलाहकार, विकास मित्र, सामुदायिक समन्वयक, पंचायत सचिव, प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी, आंगनबाड़ी सेविका आदि का पूर्ण सहयोग भी इस अभियान के दौरान प्राप्त किया जाए।

ग्राम पंचायत स्तर पर कार्य कर रह विभिन्न विभागों एवं आमजन की सम्पूर्ण सक्रिय सहभागिता से ही ग्राम पंचायत विकास योजना का समुचित सूत्रीकरण संभव है।

बिहार में गहन सहभागी योजना निर्माण अभ्यास

मनरेगा की मार्ग निर्देशिका 2013 चौथा संस्करण की कंडिका 2.12 के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया है कि ग्राम सभा मनरेगा अंतर्गत किए जाने वाले कार्यों का अनूमोदना करेगी और इनके कार्यान्वयन की प्राथमिकता निर्धारण हेतु अंतिम प्राधिकार होगी। ग्राम विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा निर्देशित किया गया है कि राज्य के 300 पिछड़े प्रखंडों में मनरेगा एवं जीविका के साथ अभिसरण कर आई. पी. पी. ई.- 2 के माध्यम से मनरेगा का वित्तीय वर्ष 2016-17 का श्रम बजट एवं राज्य ग्रामीण विकास योजना 2016-17 का निर्माण किया जाए।

इस क्रम में विभाग द्वारा निर्णय लिया गया है। कि राज्य के सभी 534 प्रखंडों में आई. पी. पी. ई.- 2 के तहत जाए ग्रामीण विकास योजना का निर्माण किया जाएगा।

राज्य सरकार के निर्देशानुसार ग्रामीण विकास विभाग, जीविका, मनरेगा तथा पंचायती राज विभाग के अभिसरण से मौड्यूल (मिशन अंत्योदय) द्वारा वित्तीय वर्ष 2016 – 17 का मनरेगा अंतर्गत श्रम बजट, वार्षिक कार्य योजना, एस.आर.डी.पी. तथा पंच वर्षीय एवं वार्षिक ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार किया जाएगा। इसके अलावा एन.आर.एल.एम्., डीडीयुजीकेवाय. आईएवाय, एनएसएपी से संबंधित योजना भी तैयार की जाएगी।

योजनाओं का संक्षिप्त विवरण निम्नवत है :-

क. मनरेगा : प्रत्येक ग्रामीण परिवार जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम कार्य करना चाहते हैं। इस अभियान के तहत ऐसे परिवारों के लिए सहभागी नियोजन एवं मांग अनुमान के आधार पर ग्राम पंचायत श्रम बजट का निर्माण करना है।

ख. एनआरएलएम: इसे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के नाम से जाना जाता है। इस योजना के तहत ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर एवं उन्हें प्रशिक्षित कर स्थायी जीविकोपार्जन गतिविधियों से जोड़ा जाता है। इस अभियान के तहत एसईसीसी सूची के आधार पर सभी अति संवेनशील परिवारों के जीविकोपार्जकन की योजना तैयार करनी है।

ग. दीन दयाल उपाध्याय कौशल विकास योजना: यह गरीबी निवारण का एक महत्वपूर्ण प्रयास है जिसका उद्देश्य 15-35 वर्ष का ग्रामीण युवाओं, जिन्होनें मनरेगा में कम से कम पंद्रह दिनों का कार्य किया  हो उन्हें सकुशल एवं अत्यधिक कामगार के रूप में तैयार करना है। इस अभ्यास के तहत मनरेगा श्रमिकों के लिए कौशल विकास के अवसरों की सूचना एवं सभी पात्र परिवारों की कौशल विकास संबंधी प्राथमिकता सूची तैयार की जानी है।

घ. इंदिरा आवास योजना: बी.पी.एल परिवार के सशक्तिकरण की दिशा में गरीबी रेखा से नीचे रह रहे परिवारों को अपना पक्का मकान बनाने हेतु वित्तीय एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। अभ्यास के तहत वर्तमान हितग्राहियों का सत्यापन एवं छूट रहे पात्र हितग्राहियों का समावेश करते हुए पंचायत स्तर पर सूची तैयार करना है।

ङ. एनएसएपी: राष्ट्र के नीति निर्देशिक सिद्धांत के तहत राज्यों के द्वारा गरीब वंचित एवं निराश्रित के सशक्तिकरण हेतु सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं। इसके अंतर्गत लाभूकों के आर्थिक सहायता दिए जाने का प्रावधान है जो तीन तरह के हैं 1. वृद्धा पेंशन, 2. विधवा पेंशन एवं 3. विकलांग पेंशन। इस अभ्यास के तहत वर्तमान हितग्राहियों का सत्यापन एवं छूट रहे पात्र हितग्राहियों को शामिल करते हुए ग्राम पंचायत स्तर पर सूची तैयार करना है।

प्रशिक्षण एवं क्षमता वर्धन

राज्य के सभी प्रखंडों में आई. पी. पी. ई.- 2 के तहत विभिन्न योजनाओं का निर्माण करने हेतु 21 सदस्यीय राज्य स्तरीय दल (चार सदस्य ग्रामीण विकास विभाग, चार सदस्य जीविका एवं तेरह सदस्य जो राज्य के विभिन्न स्वयं सेवी संस्थानों से जुड़े हैं) का गठन किया गया। राज्य स्तरीय दल को पश्चिम बंगाल के बाकुड़ा एवं एनआईआरडी हैदराबाद प्रशिक्षण दिया गया। राज्य स्तरीय प्रशिक्षण दल द्वारा राज्य के सभी जिलों में 6 सदस्यीय जिला संसाधन दल, जिसमें प्रत्येक जिले में 2 से कार्यक्रम पदाधिकारी 2 आजीविका विशेषज्ञ  (जीविका) एवं 2 गैर सरकारी संस्थान के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित किया गया। जिला संसाधन दल द्वारा जिलें के प्रत्येक प्रखंड में 7 सदस्यीय प्रखंड संसाधन दल जिसमें मनरेगा के दो सदस्य, जीविका के  दो सदस्य (बी.पी.एम. और आजीविका विशेषज्ञ) तथा सरकारी  तथा गैर सरकारी संस्थान से दो सदस्यों को प्रशिक्षित किया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम 2016-17

क्र.स.

टीम का नाम

प्रशिक्षण का दिन

प्रशिक्षण का स्थान

योजना अभ्यास हेतु प्रशिक्षित सदस्यों की संख्या

1.

राज्य स्तरीय संसाधन दल का प्रशिक्षण

21 से 24 जूलाई और 28 से 31 जुलाई 2015

बंकूडा (पश्चिम बंगाल) और एनआईआरडी (हैदराबाद)

21 (राज्य के विभिन्न संस्थानों से)

2.

जिला स्तरीय संसाधन दल का प्रशिक्षण

18 सितंबर से 28 नवंबर 2015

प्रत्येक प्रमंडल

228

(प्रत्येक जिला में 6 व्यक्ति)

3.

प्रखंड स्तरीय संसाधन दल का प्रशिक्षण

01 से 12 दिसंबर 2015

जिला मुख्यालय

3738 (प्रत्येक प्रखंड में 7 व्यक्ति)

4.

प्रखंड स्तरीय नियोजन दल का प्रशिक्षण

15 से 26 दिसंबर और 04 से 08 जनवरी 2016

प्रत्येक प्रखंड

67288 (प्रत्येक पंचायत में 6-8 व्यक्ति)

योजना अभ्यास हेतु कुल प्रशिक्षित सदस्यों की संख्या = 71262

 

सभी छूटे हुए बीपीटी सदस्य एवं वैसे प्रखंड जहाँ प्रशिक्षण नहीं हुआ है अथवा बीपीटी सदस्यों  की उपस्थिति काफी कम रही थी वहाँ अभियान चलाकर दिनांक – 04.01.16 से 08.01.16 तक पूरे राज्य में प्रखंड स्तर पर प्रशिक्षण कराया गया है। ब्लॉक् प्लानिंग टीम में पंचायत सचिव को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है एवं उन्हें भी प्लानिंग एक्सरसाइज का प्रशिक्षण दिया गया है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का अनुश्रवण राज्य स्तर से भी किया जा रहा है।

गहन सहभागी योजना अभ्यास की प्रक्रिया

प्रशिक्षित ब्लॉक प्लानिंग टीम दो भागों में बंटकर 3 व 4 की संख्या में दो दल बना लेगी। ये दल वार्ड में जाकर पीआरए टूल्स के माध्यम से प्लानिंग एक्सरसाइज करते हुए उपलब्ध कराये गए विभिन्न प्रपत्रों में सूचना संग्रहित करेंगे तथा योजनाओं का चयन करेंगे। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन वार्ड के आंकलित श्रम बजट के अनुसार वार्षिक कार्य योजना, वित्तीय वर्ष 2016 – 17 स्टेट रूरल डेवलपमेंट प्लान  एवं 14वें वित्त आयोग के तहत प्राप्त होने वाली राशि से ली जाने वाली योजनाओं का चयन कर जी.पी.डी.पी.पंचवर्षीय पर्सपेक्टिव प्लान, 2015-20 एवं वर्ष 2015-17 का वार्षिक प्लान तैयार कर वार्ड सभा से अनुमोदन प्राप्त करेंगे।

गहन सहभागी योजना अभ्यास के अंर्तगत वार्ड स्तर पर किए जाने वाले कार्यों का विवरण :-

पहला दिन

  • पंचायत के सभी वार्डों में प्रचार-प्रसार।
  • पद यात्रा – गाँव मर बीपीटी सदस्यों का परिचय सामाजिक मानचित्र  (पेयजल की सुविधा, विद्यालय, आंगनबाड़ी जैसे संसाधन एवं आवश्यकतानुसार नयी संभावना।
  • संसाधन मानचित्र – जल श्रोत (नहर, नदी, पोखरा कुआँ, आहार –पाईन) को उनकी उपयोगिता में मानचित्र में कृषि योग्य भूमि, बंजर भूमि वृक्षारोपण इत्यादि को नक्शे में दर्शाना।

सामाजिक मानचित्रण के दौरान ग्रामीण जीवन तथा समुदाय से संबंधित मुद्दों को समझना (खुली बात – चीत) इस क्रम में आईपीपीई – 1 के तहत निर्मित संसाधन एवं सामाजिक मानचित्र को अद्यतन करते हुए उपयोग किया जा सकता है।

  • मानचित्रण करने के पश्चात् संसाधनों का पड़ – यात्रा कर सत्यापन।

 

  • सामुदायिक प्रापत्र तैयार करना एवं ली गयी योजनाओं का संकलन।

दूसरा दिन

  • घर – घर जाकर व्यक्तिगत एस.ई.सी.सी डाटा के साथ सर्वे करना एवं प्रपत्र ए, बी, सी, डी, ई एवं एफ भरना।
  • मनरेगा अंतर्गत व्यक्तिगत योजनाओं के लिए आवेदन पत्र प्राप्त करना।
  • मनरेगा अंतर्गत लोगों द्वारा प्रस्तावित व्यक्तिगत योजनाओं का संकलन।
  • 14 वीं वित्त आयोग से प्राप्त होने वाली राशि के तहत जी.पी.डी.पी के लिए योजनाओं का संकलन।

तीसरा दिन

  • वार्ड सभा कर मनरेगा योजनाओं का अनुमोदन एवं प्राथमिकता सूची तैयार करना।
  • व्यक्तिगत योजनाओं का आवेदन प्राप्त करना एवं प्राप्त आवेदन का संकलन।
  • ग्राम पंचायत विकास योजना की योजनाओं को अलग सूची बद्ध करना।
  • सभी योजनाओं को संकलित करना ताकि ग्राम सभा में अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किया जा सके।

 

समयावधि

10 जनवरी 2016 से 11 फरवरी, 2016 तक सभी वार्डों में निम्न निर्धारित तालिका के अनुसार पी.आर.ए टूल्स का उपयोग कर वार्ड वार योजनाओं का चयन वार्ड सभा द्वारा किया जाएगा एवं इस पूरी प्रक्रिया को जिले द्वारा तैयार किए गए ब्लॉक प्लानिंग टीम के सदस्यों के देख – रेख में वार्ड सदस्य की अध्यक्षता एवं ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता से संपन्न कराया जाएगा।

वार्ड सभा की अध्यक्षता संबंधित वार्ड सदस्य करेगें। सभी पंचायतों की वार्ड सभा अग्रलिखित कार्यक्रम के अनुसार की जाएगी।

वार्ड स्तर पर वार्ड के सक्रिय युवा सदस्य स्वयं सेवी संस्थान के सदस्य, स्वयं सहायता समूह के महिलाओं की भागदारी सुनिश्चित किया जाएगा।

गहन सहभागी योजना अभ्यास कार्यक्रम समय सारिणी

क्र. सं.

प्रत्येक ग्राम पंचायत का वार्ड संख्या

नियोजन समयावधि

वार्ड सभा की तिथि

1

1 एवं 2

10 जनवरी से 12 जनवरी 2016

12 जनवरी 2016

12򢼃 जनवरी 2016 को वार्ड संख्या 1 एवं 2 से चुने गए कार्य एवं सर्व किए गए आंकड़ों का तकनीकी विश्लेषण और संकलन

2

3 एवं 4

14 जनवरी से 16 जनवरी 2016

16 जनवरी 2016

 

 

17 जनवरी से 19 जनवरी 2016

19 जनवरी 2016

 

 

20 जनवरी से 22 जनवरी 2016

22 जनवरी 2016

23 जनवरी 2016 को वार्ड संख्या 9 एवं 10 से चुने गए कार्य एवं सर्व किए गए आंकड़ों का तकनीकी विश्लेष्ण और संकलन

5

9 एवं 10

24 जनवरी से 30  जनवरी 2016

27  जनवरी 2016

26 जनवरी 2016 को वार्ड संख्या 9 एवं 10 से चुने गए कार्य एवं सर्व किये गए आंकड़ों का तकनीकी विश्लेषण और संकलन

6

11 एवं 12

28 जनवरी से 30 जनवरी 2016

30 जनवरी 2016

 

13 एवं 14

31 जनवरी से 2 फरवरी  2016

2 फरवरी 2016

 

15 एवं उससे ज्यादा वार्ड संख्या

3 जनवरी से 5 फरवरी 2016

5 फरवरी 2016

सभी सर्वे  किए गए आंकड़ों का तकनीकी विश्लेषण एवं संकलन तथा वार्ड सभा द्वारा पारित कार्यों की सूची तैयार करना (6 फरवरी से 8 फरवरी)

9,10 एवं 11 फरवरी को सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम सभा (पंचायत सचिव की उपस्थिति  अनिवार्य )

29 फरवरी 2016 तक सभी आंकड़ों को नरेगा सॉफ्ट पर अपलोड किया जाना है।

10 मार्च 2016 तक राज्य पर आकड़ों का संकलन

10 मार्च 2016 तक राज्य ग्रामीण विकास योजना एवं ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार

 

वार्ड सभा से पारित श्रम बजट एवं कार्यों की सूची को ग्राम पंचायत की कार्यकारिणी के समक्ष प्रस्तुत जाएगा। जिसमें वार्डों द्वारा पारित श्रम बजट/योजनाओं पर विचार कर ग्राम पंचायत का समेकित श्रम बजट एवं प्रारूप की प्राथमिकता सूची तैयार की जाएगी। इस क्रम में यह प्रयास किया जाना चाहिए। कि हर वार्ड की योजनाएँ समान आधार पर समावेशित हों।

ग्राम सभा का आयोजन

ग्राम सभा 09 फरवरी, 2016 से 11 फरवरी के बीच सभी ग्राम पंचायतों के आयोजित की जाएगी। प्रतिदिन एक प्रखंड के सामान्यत: एक चौथाई पंचायतों में ग्राम सभा आयोजित की जाए। इन ग्राम सभाओं में एक मनरेगा कर्मी यथा कार्यक्रम पदाधिकारी/कनीय अभियंता/पंचायत तकनीकी सहायक अवश्य उपस्थित रहेंगे साथ ही जीविका के प्रतिनिधि तथा पंचायती राज विभाग के पंचयत सचिव निश्चित रूप से उपस्थित रहेगें।

आई.पी.पी.ई – 2 के अंतर्गत मनरेगा के तहत ली जाने वाली योजनाओं की प्राथमिकता तैयार की जाएगी। लोगों के द्वारा चयनित उयोजना क्रमशः तीन प्रकार से संकलित कर सूचीबद्ध की जाएगी (क) मनरेगा के अंतर्गत ली जाने वाली योजना (ख) मनरेगा एवं अन्य विभागों से संबंधित अभिसरणयुक्त योजना (ग) अन्य विभाग की योजना।

ग्राम पंचायत की कार्यकारिणी द्वारा ग्राम सभा द्वारा पारित अंतिम प्राथमिकता सूची  को अनुमोदित कर विधिवत कार्यक्रम पदाधिकारी को दिनांक – 12.02.16 तक उपलब्ध कराया जाएगा।

कायर्क्रम पदाधिकारी प्राप्त कार्य योजना की सूची को सामेकित कर पंचायत समिति को प्रखंड विकास पदाधिकारी के माध्यम से दिनांक – 13.02.16 उपस्थित करेंगे । समयाभाव के कारण प्रखंड क्षेत्र की कार्य योजना पर विचार हेतु पंचायत समिति की बैठक दिनांक – 29.02.16 तक जिला परिषद की बैठक आयोजित कराकर जिले की कार्य योजना एवं श्रम  की कार्य योजना पर विचार हेतु पंचायत समिति की बैठक दिनांक – 16.02.2016 तक आयोजित करा ली जाएगी।

पंचायत समीति द्वारा अनुमोदित कार्य योजना की प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं कार्यक्रम पदाधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षरोपरांत जिला कार्यक्रम समन्वयक की दिनांक - - 20.02.2016 तक भेजी जाय। जिला कार्यक्रम समन्वयक यथासंभव दिनांक – 29.02.16 तक जिला परिषद की बैठक आयोजित कराकर जिले की कार्य योजना एवं श्रम बजट को अनुमोदित करायेंगे।

तकनीकी विश्लेषण में मुख्य रूप से वार्ड में हो रहे सामाजिक और संसाधन मानचित्रण, सर्वे आदि क्यों की समीक्षा होगी। यह तकनीकी विश्लेषण बी.आर.टी. के सदस्य की अध्यक्षता में सभी वार्ड में कार्यरत बी.पी.टी. के साथ किया जाएगा।

योजना अभ्यास का अनुश्रवण

आईपीपीई-2 का प्रशासनिक नेतृत्व प्रखंड स्तर कार्यक्रम पदाधिकारी करेंगे एवं वे सभी पंचायत के लिए चयनित बी.पी.टी. के सदस्यों का पूर्व निर्धारित तिथियों में वार्डों में उपस्थिति सुनिश्चित करायेंगे।

बी.पी.टी. के किसी भी सदस्य के अनुपस्थित होने पर विकास आयुक्त उन पर कार्यवाई करेंगे कार्यक्रम पदाधिकारी  आईपीपीई-2 कार्यक्रम के अंतर्गत वार्डसभा द्वारा पारित योजनाओं को प्रपत्र में संकलित कर एवं वार्डसभा, सामाजिक मानचित्र से संबंधित छायांकन को वेब साईट पर अपलोड कराना सुनिश्चित करेंगे।

प्रखंडो में पदस्थापित कार्यक्रम पदाधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि आईपीपीई-2 के सभी प्रक्रियाओं का पालन नियमानुसार हो रहा है ताकि पंचायत के सभी वार्डों में यह कार्यक्रम  गुणवत्तापूर्ण तरीका से संपन्न करायी जा सके। कार्यक्रम पधाधिकारी बी.पी.टी. के सदस्यों का स्थल पर मार्गदर्शन भी करेंगे। सभी जिला यह सुनिश्चित करेंगे कि वार्डवार कार्यक्रम सुबह 8 बजे से शुरू हो जाए ।

सभी जिला जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में इस पूरी नियोजन प्रक्रिया के अनुश्रवण हेतु जिले में जिला अनुश्रवण कोषांग का गठन  करेंगे। जिला अनुश्रवण कोषांग का गठन करते हुए सूचना विभाग को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे।

जिला अनुश्रवण कोषांग प्रतिदिन नियोजन प्रक्रिया की प्रगति प्रतिवेदन से जिला पदाधिकारी को अवगत करायेंगे। संबंधित जिला के जिला पदाधिकारी/उप विकास आयुक्त, राज्य अनुश्रवण कोषांग को नियोजन प्रक्रिया की प्रगति प्रतिवेदन rirsed.bih@nic.in, secy-panchayat-bih@nic.in, misrdbihar@gmail.com एवं ippebhihar@gmail.com पर ई मेल के सदस्य के माध्यम से उपलब्ध  करायेंगे।

जिला पदाधिकारी/उप विकास आयुक्त डी. आर. टी. लिए के सदस्य जो पंचायत अनुश्रवण के लिए जाएगें उनके लिए एक वाहन की व्यवस्था निश्चित रूप से करेंगे।

कार्यक्रम पदाधिकारी/प्रखंड परियोजना प्रबंधक (जीविका) यह सुनिश्चित करेंगे कि वे बी.आर.टी. सदस्यों को चिन्हित कर प्रखंड स्तर पर एक अनुश्रवण कोषांग बनाएंगे। यह कोषांग जिला अनुश्रवण कोषांग को प्रतिदिन कायर्क्रम की प्रगति का रिपोर्ट देंगे।

पंचायतों की ग्राम सभा से पारित योजनाओं की सूची निर्धारित प्रारूप में संकलित कर मनरेगा वेब साईट एवं फोटोग्राफ आईपीपीई के वेबसाइट पर अपलोड करना सुनिश्चित करेंगे एवं इसकी जिम्मेवारी संबंधित प्रखंड के कार्यक्रम पदाधिकारी की होगी। ग्राम सभा की वीडियो रिकार्डिंग अनिवार्यता की जाए। इसकी Non Edited DVD  बना कर प्रतियाँ जिला स्तर पर संधारित की जाएगी।

किसी के द्वारा इनकी प्रति मांगे जाने पर उचित शुल्क प्राप्त कर प्रति देने की व्यवस्था जिला स्तर पर की जाएगी। ग्राम सभा में माइक इत्यादि का इंतजाम निश्चित रूप से किया जाए।

आईपीपीई-2 के लिए विभाग स्तर पर एक फेसबुक पेज बनाया गया है जिसका ID  है – https://www.facebook.com/missionantyodayaजिसमें कोई भी किसी कार्यक्रम के दौरान  लिए कगे अच्छे फोटो को सभी के जानकारी के लिए भेज सकता है।

गहन सहभागी अभ्यास की विभिन्न गतिविधियाँ एवं मुख्य बातें

1) सभी वार्डों में प्रचार – प्रसार तथा माइकिंग, सार्वजनिक स्थल पर बैनर आदि लगाकर किया जाना चाहिए ताकि इस कार्यक्रम में ज्यादा से ज्यादा लोगों की उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके स्थानीय समाचार पत्र में ससमय विज्ञापन देकर इसका प्रचार – प्रसार किया जाए।

2) सभी जिला/प्रखंड इस बात पर विशेष ध्यान देंगे कि इस वर्ष मनरेगा में चयन किए जाने वाले योजनाओं में कम से कम 60% योजना कृषि, कृषि आधारित योजना जो भूमि, जल एवं वृक्षों के विकास से संबंधित, जैसे – भूमि समतलीकरण, वृक्षारोपण, खेती के लिए नाला का निर्माण नर्सरी आदि कामों से संबंधित होगी साथ ही नियोजन का प्राथमिक उद्देश्य ऐसे संसाधनों का निर्माण करना है जो समुदाय में कृषि आधारित, गैर कृषि आधारित या अन्य प्रकार की आजीविका में वृद्धि करे तथा यह प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ – साथ उन्हें बढ़ाने में भी सहयोगी हो।

3) वार्ड में आईपीपीई-2 के तहत एसईसीसी डाटा के अनुसार परिवारों को चिन्हित करते हुए  कार्क्रम परिवारों का सर्वेक्षण किया जाना हैं। बी.पी.टी. को पंचायत के संबंधित वार्ड का एसईसीसी का सूची प्रखंड के कार्यक्रम पदाधिकारी पहले से ही उपलब्ध करा देना सुनिश्चित करेंगे।

4) आईपीपीई-2 के तहत बी.पी.टी. के टीम मनरेगा में कार्यरत जॉब कार्ड न हो को चिन्हित करेंगे एवं संबंधित कार्यक्रम पदाधिकारी को नये जॉब कार्ड बनाने के लिए सूची उपलब्ध कराएंगे।।

5) उल्लेखनीय है कि अन्य कार्यान्वयन निकायों यथा पंचायत समिति, जिला पार्षद, सरकार के विभिन्न लाइन विभागों यथा पर्यावरण एवं विभाग, जल संसाधन विभाग, पथ निर्माण विभाग, कृषि विभाग, पशु एवं मतस्य संसाधन विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, लघु झाल संसाधन विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग आदि से भी योजनाएँ प्राप्त कर समय ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराया जाना है ताकि 9 फ़रवरी से 11 फरवरी 2016 के बीच निर्धारित ग्राम सभा में इन पर विचार हो सके। जिला पदाधिकारी-सह-जिला समन्वयक मनरेगा योजनांतर्गत प्रस्ताव लाइन विभागों के जिलास्तरीय पदाधिकारी से 01.02.2016 के पहले बैठक कर प्राप्त कर पंचायतों को कार्यक्रम पदाधिकारी के माध्यम से हस्तगत करा देंगे ताकि ग्राम सभा की बैठक में उन पर विचार हो सके।

6) जिला पदाधिकारी सुनिश्चित करेगें कि सभी संबंधित सरकारी विभागों से अनिवार्य रूप से प्रस्ताव प्राप्त कर ग्राम सभा में रखे जाने हेतु ससमय भेज दिए जाएँ। लाइन विभाग के क्षेत्रीय पदाधिकारी को परामर्श कडिय जाय कि वे सुविधानुसार स्वयं ग्राम सभा में भाग लेकर अपनी महत्वपूर्ण योजनाओं को वार्षिक कार्य योजना में शामिल करायें।

7) जिला परिषद एवं पंचायत समिति के सदस्य सुविधानुसार वार्ड सभा/ग्राम सभा की बैठकों में भाग ले सकते हैं। इसके अलावा इनके क्षेत्र की आवश्यकताओं को समावेशित करने हेतु प्रखंड विकास पदाधिकारी – सह – कार्यपालक पदाधिकारी, पंचायत समिति एव उप विकास आयुक्त सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद क्रमश: पंचायत समिति सदस्य एवं जिला परिषद सदस्यों से उनके क्षेत्र में पड़ने वाली पंचायतों की महत्वपूर्ण योजनाओं की सूची लेकर कार्यक्रम पदाधिकारी के माध्यम से संबंधित पंचायत रोजगार सेवक को अनिवार्य रूप से दिनांक – 04.02.2016 तक उपलब्ध करा देंगे।

8) ग्राम सभा, पंचायत के मुख्यालय में ही आयोजित की जाए। ग्राम पंचायत के मुख्यालय से अलग स्थान पर ग्राम सभा आयोजन की सूचना मिलने पर संबंधित मुखिया एवं पंचायत सचिव दोषी माने जाएंगे एवं विधि सम्मत कार्रवाई के पात्र होंगे। ग्राम सभा की वीडियो रिकार्डिंग अनिवार्यत रूप से की जाए। इसकी डी.वी.डी. बनाकर प्रतियाँ जिला स्तर पर संघारित की जाए। ग्राम सभा में माइक इत्यादि का इंतजाम निश्चित रूप से किया जाए।

9) ग्राम सभा में बैठने की व्यवस्था इस प्रकार से की जाए कि मुख्य, उनकी कार्यकारिणी के सदस्य एक साथ बैठें, उनके निकट ही परंतु अलग सरपंच एवं पंच तथा संबंधित पंचायत समिति के सदस्य के बैठने की व्यवस्था हो तथा ग्राम के लोग इनके आमने - सामने बैठें। प्रखंड विकास पदाधिकारी/कार्यक्रम पदाधिकारी सुनिश्चित करेगे कि सदस्यों को लिखित आमंत्रण कम से कम सात दिन पूरे अवश्य मिल जाए। ग्राम सभा की कार्यवाही को देखने हेतु आमंत्रित प्रभारी मंत्री, माननीय संसद, विधायक, विधान पार्षद, जिला परिषद अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष, प्रमुख एवं उप प्रमुख तथा पर्यवेक्षण हेतु नियुक्त पदाधिकारियों के बैठने की व्यवस्था ऐसे स्थान पर हो कि पूरी सभा की कार्रवाई दिखे।

10) ग्राम सभा किसी योजना को जोड़ने, हटाने, संशोधित करने एवं उनकी प्राथमिकता बदलने हेतु सर्व सक्षम है ग्राम सभा का बहुमत से समर्थन मिलने पर प्रस्ताव मान्य हो जाएगा एवं वह वार्षिक कार्य योजना का भाग हो जाएगा। ग्राम सभा के निर्णय के अनुसार प्रारूप प्राथमिकता सूची को संशोधन कर ग्राम सभा की अंतिम प्राथमिकता सूची ग्राम सभा में ही पारित की जाएगी।

11) आईपीपीई- 2 के तहत पंचायतों की ग्राम सभा से पारित मनरेगा अंतर्गत एक वर्ष में पूरे किए जाने वाले योजनाओं को है पारित किराया जाएगा। साथ ही पूरी प्रक्रिया के दौरान 14वें वित्त आयोग के तहत उपलब्ध होने वाली राशि के विरूद्ध चिन्हित प्रक्षेत्रों की योजनाओं का भी चयन करेंगे और पंचवर्षीय जीपीडीपी प्रेस्पेक्टिवे प्लान 2015-20 तैयार करेंगे। एक वर्ष 2015-16  एवं 2016-17 का वार्षिक योजना तैयार कर वार्ड सभा से अनुमोदन प्राप्त करेंगे।

12) ग्राम सभा में सभी वार्डों की चयनित योजनाओं की प्राथमिकता निम्न अनुसार तय की जाएगी :- जैसे, दस वार्डों के किसी पंचायत में दसों वार्डों की क्रमांक - 01 वाली योजना का प्रथम खंड बनेगा तथा सभी वार्डों में क्रमांक – 02 वाली योजना का दूसरा खंड बनेगा, इसी प्रकार क्रमांक – 03 का .........।

ग्राम सभा क्रमानुसार खण्डों के योजनाओं की प्राथमिकता तय करेगी, जैसे – अगर खंड 01 में  योजना है तो ग्राम सभा इन दसों योजनाओं की प्राथमिकता तय करेगी।

13) आईपीपीई- 2 तहत श्रम बजट मनरेगा में ली जाने वाली योजनाओं का एक वर्ष के ली ही बनेगा। कार्यक्रम पदाधिकारी निर्धारित प्रपत्र में मनरेगा के लिए चयनित योजनाओं के अनुरूप श्रम बजट तैयार कर mgnrega में अपलोड करना सुनिश्चित करेंगे

14) प्रत्येक वार्ड सभा, वार्ड में ही उपलब्ध किसी सार्वजनिक स्थल पर किया जाएगा। प्रत्येक ग्रामसभा की कार्रवाई उक्त पंचायत के मुख्यालय में ही आयोजित की जाएगी।

वार्ड सभा/ग्राम सभा आयोजन स्थल एवं आयोजन की तिथि का व्यापक प्रचार-प्रसार कार्यक्रम पदाधिकारी कराना सुनिश्चित करेंगे।

पंचायत मुख्यालय से अलग स्थान पर ग्राम सभा आयोजन की सूचना मिलने पर संबंधित मुखिया एवं पंचायत सचिव दोषी माने जाएंगे तथा विधि सम्मत कार्रवाई के पात्र होंगे।

15) आईपीपीई- 2 को सफलतापूर्वक कराने के लिए विभाग स्वयंसेवी संस्थाओं को सम्मलित करने के लिए संकल्पित है।

सभी जिला अपने यहाँ कार्यरत स्वयं सेवी संस्थाओं से इस दिशा में सहयोग ले सकते हैं। राज्यस्तर पर कुछ संस्था जैसे – PACS, PRADAN  आदि आईपीपीई- 2 में अपने कार्यक्षेत्र  में सहयोग करने हेतु इच्छुक हैं। इनका सहयोग प्राप्त किया जा सकता है।

मनरेगा अंतर्गत अनुमेय कार्यों की सूची

(i) कंटूर ट्रेंच (सामान गहराई वाली खाई), समोच्च बांध पत्थर के रोक बांध , बेलनाकार संरचनाएं भूमिगत बांध, मिट्टी के बांध, रोक बांध तथा स्पिरिंग शेड विकास सहित जल संरक्षण एवं जल संचय.

(ii) सूखे से बचाव के लिए वनरोपण और वृक्षारोपण.

(iii) सिंचाई के लिए सूक्ष्म और लघु सिंचाई परियोजनाओं सहित नहरों का निर्माण.

(iv) अनुसूची – 1  के पैराग्राफ 1 ग में निर्दिष्ट परिवारों द्वारा स्वामित्वाधीन भूमि पर सिंचाई सुविधाओं, खेत में बनाए गए तालाब, बागवानों, पौधारोपण, खेत बांध और भूमि विकास का प्रावधान,

(v) परंपरागत जल निकायों के पुनर्जिवीकरण सहित जलाशयों की माद निकालना,

(vi) भूमि विकास

(vii) बाढ़ नियंत्रण एवं सुरक्षा परियोजनाएँ जिनमें जलभराव से ग्रस्त इलाकों में पानी की निकासी, बाढ़ नालों को गहरा करना, मरम्मत करना, चौर नवीकरणी, तटीय संरक्षण के लिए स्टॉर्मवाटर ड्रेनों का निर्माण शामिल हैं।

(viii) ग्रामों के भीतर जहाँ भी आवश्यक हो, पुलियों और सड़कों की व्यवस्था सहित बारहमासी सड़क संपर्कता मुहैया कराने के लिए ग्रामीण सड़क संपर्कता,

(ix) ब्लॉक स्तर पर ज्ञान संसाधन केंद्र के रूप में भारत निर्माण राजीव गाँधी सेवा केंद्र तथा ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम पंचायत भवन का निर्माण

(x) कृषि से संबंधित कार्य जैसे की एनएडीईपी कम्पोस्टिंग वर्मी - कम्पोस्टिंग तरल – जैव खाद,

(xi) पशुधन संबंधी कार्य जैसे कि मुर्गीपालन शेल्टर, बकरी शेल्टर, पक्की पर्श निर्माण, यूरिन टैंक तथा पशुओं के लिए चारे की गाद, पशु आहार पूरक के रूप में अजोला

(xii) मत्स्यपालन संबंधी कार्य जैसे की सार्वजनिक भूमि पर मौसमी जल निकायों में मछली पालन

(xiii) तटवर्ती क्षेत्रों में कार्य जैसे कि सार्वजनिक भूमि पर मौसमी जल निकायों में मछली पालन,

(xiv) ग्रामीण पेयजल संबंधी कार्य जैसे की सोख्ता गड्ढा, रिचार्ज पिट्स,

(xv) ग्रामीण स्वच्छता संबंधी कार्य जैसे कि वैयक्तिक पारिवारिक शौचालय- विद्यालय शौचालय, आंगनबाड़ी शौचालय, ठोस व तरल अपशिष्ट सामग्री प्रबंधन

(xvi) आंगनबाड़ी केन्द्रों का संनिर्माण,

(xvii) खेल के मैदानों का निर्माण

(xviii) राज्य सरकार के परामर्श से केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने वाले कोई कार्य।

शिकायत एवं सुझाव

ग्राम सभा से संबंधित शिकायत/सूचना टोलफ्री दूरभाषा सं.- 1800-120-8001 पर अथवा लिखित शिकायत/सूचना ग्रामीण विकास विभाग के नियंत्रण कक्ष के फैक्स सं. – 0612-2217857 अथवा संबंधित जिला पदाधिकारी/ उप विकास आयुक्त/अनु.मंडल पदाधिकारी/प्रखंड विकास पदाधिकारी/कार्यक्रम पदाधिकारी को दी जा सकती है। ग्राम सभा के आयोजन के संबंध में किसी संशय के समाधान के लिए अथवा इसे और प्रभावी बनाने से संबंधित सुझाव देने के लिए सभी संबंधित पदाधिकारियों/कर्मियों/ जन प्रतिनिधियों को प्रोत्साहित किया जाए।

प्रपत्रों की सूची

क्र. सं.

विवरण

पृष्ठ सं.

1.

 

फॉर्म

एसईसीसी बेस फॉर्म पन्ने का  19.

19

2.

ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार से श्रम बजट एवं एसआरडीपी तैयार करने हेतु निर्गत प्रपत्र।

A

मनरेगा अंतर्गत जॉब कार्डधारकों द्वारा की गयी माहवार अनुमानित मांग कम की मांग

20

3.

B

(पेज -1) मनरेगा अंतर्गत – व्यक्तिगत पारिवारिक जीविकोपार्जन योजना हेतु योजनाओं का चयन।

(पेज – 2) मनरेगा अंतर्गत व्यक्तिगत पारिवारिक जीविकोपार्जन योजना हेतु चयनित योजनाओं का प्राथमिकता निर्धारण।

(पेज – 3) उद्योग संबंधी जीविकोपार्जकन की गतिविधियाँ कर्ज /ऋण का आंकलन।

(पेज-4) कृषि एवं पशुपालन की सेवा प्रसार।

21-24

4.

C

कौशल विकास की आवश्यकताओं पर आधारित जानकारी।

25-26

5.

D

इंदिरा आवास योजना का पारिवारिक सर्वेक्षण।

27

6.

E

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (सभी पेंशन राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय) परिवार सर्वेक्षण

28

7

 

F

व्यक्तिगत सूचना संकलन प्रपत्र।

29

8

G

 

पंचायत स्तरीय संसाधनों की सूची।

30-32

9

 

वार्ड स्तर पर सूचना संकलन प्रपत्र।

33-34

10

 

मनरेगा अंतर्गत आईपीपीई-2 के तहत ग्राम स्तर पर होने वाले सभी कार्यों के लिए समाहित समग्र प्रारूप।

35-44

11

 

पंचायत स्तर पर ग्राम विकास योजना (फॉर्म जी) को समाहित करने के लिए एक समग्र प्रारूप।

45-50

12

 

 

बीपीटी केआईटी   के लिए आवश्यक जानकारी और बीपीटी केआईटी  में शामिल जरूरी सामान की सूची।

51

 

 

कुल पृष्ठ =

31

 

स्त्रोत: ग्रामीण विकास विभाग, पंचायती राज विभाग, जीविका, बिहार सरकार

2.94366197183

Madan jha Nov 17, 2018 10:03 AM

Sir bihar sarkar me panchayat me kaun -Kaun se yojna se karya Ho raha hai ya Ho sakta hai uska pura suchi mere mail I'd XXXXX@gmail.com .par bhejen.....

zulfakar Aug 09, 2018 08:37 PM

isi youjna keliy ward sachib ko chainit kiya jata h plz sir reply

आनंद प्रकाश Jun 28, 2018 09:16 AM

गली-नाली पक्कीकरण को तरस रहा अमोरजा बाजार,पहली बारिश में ही गलियों में जम गया पानी। चरपोखरी । प्रखंड के पसौर पंचायत के अमोरजा बाजार पर विकास कार्य के लाले पड़े है।जहाँ एक तरफ बिहार सरकार नली गली पक्कीकरण करने का मुहिम चला रही है लेकिन आजतक अमोरजा बाजार पर ये मुहिम विफल साबित हो रहा है । बता दे कि पसौर पंचायत में कुल 14 वार्ड है जिसमें अमोरजा गांव एवं बाजार एक ही वार्ड में आता है कितने वर्ष गुजर जाने के बाद भी बाजार पर ग्रामीण विकास विभाग या जनX्रतिनिXि का कार्XX्XवX से कोई विकास का कार्य नही किया गया है ऐसे में बरसात के मौसम में गली में जलजमाव होने से ग्रामीणों को काफी परेशाXिXों का सामना करना पड़ता है। जिससे आने जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है और गली में पानी जमने से तरह तरह की बीमारी फैलने का आंशका बनी रहती है । गली पक्कीकरण कराने के लिए कई बार वार्ड सदस्य और मुखिया से कहा गया लेकिन हमेसा टाल मटोल दिया जाता है जैसे कि ये उनके पंचायत क्षेत्र में आता ही ना हो ऐसे में बाजारवासी नाली गली का निर्माण कार्य करने का अधिकारिXों एवं जनX्रतिनिXXों से अपील की है ।

अजय कुमार Apr 25, 2018 12:07 PM

अजय कुमार मेरे मैं गांव ग्रामीण स्वच्छता संबंधी कार्य जैसे कि वैयक्तिक पारिवारिक शौचालय- विद्यालय शौचालय, आंगनबाड़ी शौचालय,के नाम पर बिचौलिया सब रुपया मांगता है ग्राम -खड़ी ,पोस्ट -परमानदपुर, पंचायत -नाढ़ी थाना मुरलीगंज जिला-XXेXुरा बिहार ८५२१४ अतः नम्रःनिवेXन है की इस पर जल्द ही कार वाही करे

Dayanand mandal Apr 17, 2018 12:50 PM

Hamare panchayat me sarkari paisa km luta Jan raha hai.

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