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विकलांग व्यक्तियों के अधि­­कार अधिनियम, 2011 का व्यवहार्य प्रारूप

इस लेख में विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम,2011 के बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी है।

लक्ष्य एवं कारण वत्कव्य विकलांग व्यक्तियों के अधिकार आधिनियम, 2011

भारत ने विकलांगताग्रसित व्यक्तियों के अधिकार पर संयुक्त राष्ट्र के समझौते की अभिपुष्टि की है तथा सभी विकलांगताग्रसित व्यक्तियों के सम्पूर्ण माननीय अधिकारों तथा बुनियादी स्वतंत्रताओं को विकलांगता के आधार पर बिना किसी प्रकार के भेदभाव के प्राप्त करना सुनिश्चित एवं प्रोन्नत करने की जिम्मेदारी ली है। इस अन्तरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता की पूर्ति के लिए, देश का यह कर्तव्य होता है कि संयुक्त राष्ट्र समझौता में मान्यता प्राप्त अधिकारों को प्रोत्साहित करने के लिए समुचित कानून पारित करे।

भारत ने एशिया प्रशान्त क्षेत्र में विकलांगताग्रसित व्यक्तियों की समानता तथा सम्पूर्ण सहभागिता के एक हस्ताक्षरकर्ता के रुप में अपनी जिम्मेदारियों की पूर्ति हेतु विकलांग व्यक्ति (समान अधिकार, अधिकारों का संरक्षण तथा सम्पूर्ण सहभागिता) अधिनियम 1995 पारित किया था। यह कानून 15 वर्षो से कानूनी किताबों में है तथा विकलांगताग्रसित व्यक्तियों का विधिक क्षेत्रों में सशक्तिकरण का प्रमुख आधार रहा है। यद्यपि विधि क्षेत्र के सशक्तिकरण की आवश्यकता को निसंदिग्ध मान्यता दिया जाता हे, यह भी माना जाता है कि यू.एन.सी.आर.पी.डी. द्वारा  मान्यता प्राप्त अनेक अधिकारों को विकलांग व्यक्ति अधिनियम में सम्मिलित नहीं किया गया है। यहां तक कि मान्यता प्राप्त अधिकार भी समझौते के सिद्धान्तों से पूर्ण रुप से मेल नहीं खाते हैं।

इसके साथ ही,यू.एन.सी.आर.पी.डी. की यह मान्यता है कि विकलांगता एक विकासशील  अवधारणा है तथा विकलांगता विकृति सहित व्यक्तियों एवं प्रवृतिमूलक और पर्यावरण बाधाओं के बीच अन्तर्क्रिया का परिणाम है जो दूसरों के साथ समाज में समानता के आधार पर प्रभावी सहभागिता को रोकता है। दूसरी ओर विकलांग व्यक्ति अधिनियम ने विकसांगता की विकृति आधारित विस्तृत परिभाषा उपलब्ध की है। परिणाम स्वरुप, अधिनियम में जिन विकृतियों का उल्लेख नहीं है। ऐसे लोगों को अधिनियम द्वारा प्रदत्त अधिकारों से वंचित रखा जाता है।

जहां तक वर्तमान विकलांगता अधिनियम का प्रश्न है, कहीं भी विकलांग व्यक्तियों की समानता तथा पक्षपातहीनता के अधिकार की अनिवार्यता का उल्लेख नहीं है। तथा केवल कुछ विकलांगताग्रसितों को चयन के आधार पर कुछ अधिकारों की मान्यता है। अतः  यह प्रस्ताव है कि वर्तमान विकलांगता कानूनों को ऐसे विस्तृत कानूनों से बदला जाय कि जो सभी व्यक्तियों के सभी अधिकारों को मान्यता देते हों।

इसके लिए, यह प्रस्तावित है कि नए विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम में-

क) सभी विकलांग व्यक्तियों को समानता तथा पक्षपातहीनता की गारंटी मिले,

ख) सभी विकलांग व्यक्तियों की कानूनी क्षमता को मान्यता दी जाय तथा ऐसे कानूनी क्षमता के व्यवहार जहां कही भी आवश्यक हो सहयोग दिया जाय,

ग) विकलांग महिलाओं द्वारा सामना की जा रही बहुत सारी एवं बदतर भेदभाव को ध्यान में रखते हुए लैंगिक दृष्टिकोण अधिकारों तथा कार्यक्रम हस्तक्षेप दोनों में आरंभ किया जाय,

घ) विकलांग बच्चों के विशिष्ट दुर्बलता को मान्यता देना और यह सुनिश्चित करना कि उनके साथ अन्य बच्चों जैसा ही समानता के आधार पर व्यवहार हो,

ङ) घर में पड़े रहने वाले विकलांग व्यक्तियों, संस्थानों में विकलांगताग्रसितों तथा अत्यधिक सहायता की आवश्यकता सहित व्यक्तियों के साथ भी विशेष कार्यक्रम हस्तक्षेप अनिवार्य रुप से लागू हों,

च) एक विकलांगताधिकार अभिकरण की स्थापना हो, जो विकलांगताग्रसित व्यक्तियों के साथ सक्रिय भागीदारी करते हुए विकलांगता नीति और कानूनों के निर्माण की सुविधा उपलब्ध करवाए, विकलांग व्यक्तियों के साथ भेदभाव बरतने वाले संरचनाओं को हटाए तथा इस अधिनियम के अन्तर्गत जारी किए गए मानकों तथा मार्गदर्शन के समुचित अनुपालन का नियमन करे ताकि इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त सभी अधिकारों के संरक्षण, उन्नयन तथा उपभोग की गारंटी सुनिश्चित हो सके।

छ)गलत समझे जानेवाले कार्यो तथा आचरण के विरुद्ध नागरिक एवं आपराधिक मामलों को विनिर्देशित करे।

प्रस्तावना :

भारत का संविधान अपने सभी नागरिकों के लिए न्याय, स्वतंत्रता (व्यक्तिगत), समानता तथा बन्धुत्व सुनिश्चित करता है, तथा विकलांगताग्रसित नागरिक भी भारत के मानवीय विविधता के एक अनिवार्य अंग है।

1.  यह कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र के विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों की घोषणा पर हस्ताक्षर किए हें तथा उसकी अभिपुष्टि कि है और इस प्रकार एक अन्तर राष्ट्रीय घोषणा में मान्यता प्राप्त अधिकारों को प्रोन्नत करने, संरक्षण देने के प्रति प्रतिबद्धता सुनिश्चित की है,

विकलांगताग्रसित व्यक्तियों को निम्न अधिकार प्राप्त हैं:

-   पूर्ण सहभागिता एवं समावेश सहित सत्यनिष्ठा, गरिमा, तथा सम्मान का,

-   मानवीय विविधता का उपभोग मानवीय अन्तर्निभरता का,

-  शर्मिन्दगी, अपशब्द अथवा अन्य किसी प्रकार से अशक्तिकरण तथा रूढ़िबद्धता से मुक्त जीवनयापन का,

-  अन्य के साथ समानता के आधार पर सभी नागरिक, राजनीतिक एवं सामाजिक आर्थिक अधिकार जिनकी गारंटी अन्तराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय कानूनों में दी गयी है – का उपभोगकर्त्ता होना।

भारतीय संघ ने इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु 63वें वर्ष में “विकलांग व्यक्तियों के अधिकार का अधिनियम निम्न प्रकार से पारित किया है :

परिचय

 

नए अधिनियम का शीर्षक :

  1. संक्षिप्त शीर्षक, विस्तार एवं प्रारंभ:

1.  इस अधिनियम को ”विकलांग व्यक्तियों के अधिकार का अधिनियम, 2011 कहेंगे।

2.  यह सम्पूर्ण भारत में, जम्मू एवं कश्मीर राज्य सहित लागू होगा। तथापि, जम्मू एवं कश्मीर राज्य में इसे जम्मू एवं कश्मीर सरकार द्वारा राज्य में इसके अनुपालन की स्वीकृति देने के बाद भारत के राष्ट्रपति द्वारा विनिर्देशित करने पर लागू किया जायगा।

3.  केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने के पश्चात यह उस तिथि से लागू समझा जायगा किन्तु, राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के एक वर्ष के अन्दर ही इसे लागू किया जायगा।

1.  परिभाषाएं :

इस अधिनियम में, संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो:

क)     ‘अग्रिम निर्देश’ स्वास्थ सेवा के संदर्भ में अग्रिम निर्णयों में ऐसे निर्देश सम्मिलित हो सकते हैं जिनका जीवन रक्षा में सहयोग सिस्टम तथा चिकित्सा कार्यविधि का उपयोग अथवा उनके बचने का निर्देश हो,

ख) ‘सक्षम सरकार’ का अर्थ होगा केन्द्र सरकार, किसी स्थानीय अथवा नगरपालिका प्राधिकार के संदर्भ में जिसका सरकार प्रबन्ध कर रही है अथवा कोई प्रतिष्ठान पूर्ण अथवा आंशिक रूप से सरकार द्वारा वित्त पोषित या कोई केन्टोनमेन्ट बोर्ड जिसका गठन केन्टोनमेन्ट बोर्ड  अधिनियम 1924 के अन्तर्गत हुआ हो, किसी राज्य सरकार के संदर्भ में सरकार द्वारा नियंत्रित और प्रबंधित अथवा कोई प्रतिष्ठान पूर्ण अथवा आंशिक रुप से सरकार द्वारा वित्त पोषित अथवा कन्टोनमेन्ट बोर्ड, राज्य सरकार के अतिरिक्त अन्य कोई स्थानीय प्राधिकार,

ग)  संवर्द्धी तथा वैकल्पिक संचार उपकरण ऐसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हैं जिनके विकलांग व्यक्तियों की प्रतिदिन की संचार आवश्यकताओं की क्षमतापूर्ण उपलब्धि होती है।

घ) बाधा का अर्थ है कोई ऐसा तथ्य जो बाधित करता है अथवा किसी विकलांग व्यक्ति का समाज में पूर्ण आंशिक सहभागिता को रोकता है। इसमें प्रवृत्तिमूलक, सामाजिक, आर्थिक, पर्यावरणीय, सांस्थानिक, अथवा संरचनात्मक बाधाएं सम्मिलित हैं।

ङ)  संचार’ में भाषा, पाठ का प्रदर्शन, ब्रेल, स्पर्शनीय संचार, बड़े अक्षरों में प्रिंट, मल्टीमीडिया तक पहुंच सहित लिखित, श्रवणयोग्य, सामान्य भाषा, मानव-पाठक तथा संवर्द्धी तथा वैकल्पिक तरीके, साधन तथा वैकल्पिक तरीके, साधन तथा संचार के प्रारूप जिसमें सूचना एवं विचार तकनीक सम्मिलित हों- सम्मिलित होंगे,

च) घोषणा का अर्थ लोगा संयुक्त राष्ट्र का विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों पर घोषणा,

छ) अलाभकारी’ का अर्थ है किसी अधिकार, स्वतंत्रता, अधिकार प्राप्ति, पारिश्रमिक, सामग्री, लाभ, पहुंच, सेवा, प्रावधान, अवसर, लाईसेंस अथवा अन्य किसी प्रकार से सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक सांस्कृतिक अथवा नागरिक हित से बंचित करना, इसमें किसी व्यक्ति अथवा व्यक्तियों के समूह पर किसी अन्य द्वारा एक अथवा एक से अधिक विषय में प्रतिबंधित रखा गया हो-भी सम्मिलित होगा।

व्याख्या

इस बात से कोई मतलब नहीं है कि ऐसे प्रतिबंध, अस्वीकृति अथवा अलगाव अनजाने में की गयी हो, अथवा इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को संरक्षण देना हो, जिस पर एक या एक से अधिक प्रतिबंध लागू किया गया हो।

ज) विकलांग व्यक्तियों का संगठन (DPO’s) – ऐसे संगठन है जिसका नियंत्रण बोर्ड तथा सदस्यता स्तर पर प्रमुख रुप से विकलांग व्यक्तियों द्वारा होता है जिससे समझौता प्रक्रिया, संगठनात्मक योग्यता, आपसी सहयोग, सूचना के आदान-प्रदान तथा अन्य वोकेशनल और अवसरों के प्रयोग में कुशलता के विकास का अवसर प्राप्त होता है।

झ) “प्रतिबंध के आधार” पर भेदभाव का अर्थ होगा निम्न आधार पर भेदभाव करना:

i) विकलांगता

ii) विकलांगता समझ लेना, हो सकता है यह अवधारणा सही या अन्य किसी प्रकार का हो अथवा

iii) किसी व्यक्ति का ऐसे व्यक्ति के साथ मिलन जिस पर एक या एक से अधिक प्रतिबंध लागू है, अथवा

iv) विकलांगताओ का एक ऐसा गठजोड़ तथा कोई अन्य स्वायत्तता पर अतिक्रमण करने वाली विशषता जैसे, जाति, रंग (आदमी का), जात अनुसूचित जनजातीय स्थिति, लैगिक पहचान, यौन जनित, भाषा, धर्म, गर्भावस्था, मातृत्व स्थिति, वैवाहित स्थिति, पेशागत स्थिति, राजनीतिक अथवा अन्य मत, राष्ट्रीय, जातीय, मूलवासी अथवा समाजिक मूल, परिसम्पत्ति, जन्म, उम्र आदि।

ञ)  विकलांगता के आधार पर भेदभाव का अर्थ होगा ऐसी विकलांगता के आधार पर अलगाव अथवा प्रतिबंध जिसका उद्देश्य अन्य के साथ सभी मानवीय अधिकारों तथा बुनियादी स्वतंत्रताओं का राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, नागरिक अथवा अन्य किसी क्षेत्र में मान्यता तथा उपभोग को बाधित अथवा निरस्त करता है।

ट) ‘प्रतिष्ठान’ का अर्थ एवं इसमें सम्मिलित होंगे:

i) सरकारी विभाग एवं मंत्रालय

ii) स्थानिक प्राधिकरण तथा प्राधिकरण अथवा निकाय जिन्हें केन्द्र अथवा राज्य सरकार के स्वामित्व तथा नियंत्रण में रखा गया हो अथवा सहायता प्राप्त हो,

iii) केन्द्र अथवा राज्य सरकार किसी वैधानिक अथवा रुप से सृजित निकाय, आर्थिक अथवा प्रशासनिक तौर पर जिसके स्वामी हो, या नियंत्रण में हो अथवा सहायता प्राप्त हो अथवा ऐसा कोई निकाय जो कल्याण गतिविधियों में मुख्यतः सार्वजनिक कार्यो की निष्पादन कर रहा हो, तथा कम्पनी अधिनियम 1956 की धारा 617 में परिभाषित सरकारी कम्पनी हो,

iv) कोई कांट्रैक्टर जिसे सार्वजनिक टेन्डर क्रियान्वित करने के लिए मिला हो,

v) कोई कम्पनी प्रतिष्ठान, संस्था, एजेन्सी, संस्थान, संगठन, यूनियन, भूस्वामी, उधोग, सामग्री अथवा सेवा आपूर्ति करने वाला, कारखाना अथवा कोई अन्य अवैधानिक निकाय जिसे धारा (i) से (iv) तक में सम्मिलित किया गया हो तथा ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध करवाता हो,

जब तक विकलांगता अधिकार अभिकरण द्वारा निर्मित योजना के अन्तर्गत इकाई उन आवश्यकताओं को संतुष्ट करता हो जिनके कारण गैर जरुरी कठिनाईयों से छूट मिली हुई हो, अथवा

vi) कोई प्रतिष्ठान जिसे केन्द्र अथवा राज्य सरकार के राजपत्र में अधिसूचित किया गया हो।

व्याख्या

‘उद्योग’ शब्द का अर्थ वही होगा जो औद्योगिक विवाद अधिनियम. 1947 के सेक्शन 2 (j) का है।

ठ) एर्टार्नि की टिके रहने कि क्षमता- किसी दानकर्त्ता के कार्यो के निष्पादन हेतु एक प्रतिनिधि की नियुक्ति है जो दानकर्त्ता के कार्यो का प्रबंधन करता है। जब दानकर्त्ता अपने कार्यो का प्रबंधन करने में असमर्थ होता है तब भी एर्टार्नी उसके हितों के लिए कार्य करता है।

ड) अनुभवी विशेषज्ञ - किसी विशेष प्रकार की विकृति से ग्रसित एक ऐसा व्यक्ति है जो व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर समर्थन हेतु हस्तक्षेप करता है अथवा विकृति संबंधित तथा जिसने इसके द्वारा सामना किए जाने वाले बाधाओं में सेवा के प्रावधान में विशेषज्ञता अर्जित की है अथवा एक पारिवारिक देखरेख सेवा प्रदान करने वाला जिसने अपने व्यक्तिगत अनुभव, वकालर्ता हस्तक्षेप तथा सेवा प्रावधान के माध्यम से विकृत अथवा अन्य संबंधित बाधाओं के संदर्भ में विशेषज्ञता अर्जित की है।

ढ) पारिवारिक देखरेख सेवा देने वाला- एक ऐसा व्यक्ति है जो व्यक्तिगत परिवार का सदस्य है तथा विकलांग व्यक्ति का सेवा, समर्थन एवं सहायता, प्रदान करता है।

त) निधि का अर्थ निःशक्तताग्रसित व्यक्ति यों के लिए राष्ट्रीय निधि से है जिसकी स्थापना विकलांग व्यक्तियों के लिए इस अधिनियम के अन्तर्गत की गयी है।

थ) तंग करना का अर्थ है प्रतिबंधित विषयों पर अनावश्यक आचरण जिसका उद्देश्य अथवा प्रभाव किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा की उल्लंधन करना है अथवा एक धमकी, अपमान अथवा आक्रामक वातावरण का सृजन करना है।

द)  घृणा वचन’ का अर्थ ऐसी अभिव्यक्ति से है जिसे लिखकर, प्रकाशन, भाषण के माध्यम से, व्यक्तियों के समूह के बीच विचार-विमर्श द्वारा मानसिक संताप का कारण बनकर, अथवा निःशक्तताग्रसित व्यक्तियों के विरुद्ध घृणा को बढ़ावा देना है।

ध) इन्टरनेट संचार ‘तकनीक एवं इलेक्ट्रोनिक्स’- उन तकनीकों के संदर्भ में है जिनके द्वारा टेलीकम्यूनिकेशन के माध्यम से सूचनाएं प्राप्त करना है, इसमें इन्टरनेट वायरलेस नेटवर्क, सेल फोन्स, वाशींग मशीन सम्मिलित है जहां इसमें कम्यूटर भी सम्मिलित है लेकिन उपभोक्ता इन्टरफेस सहित कम्यूटर तक ही प्रतिबंधित नहीं है।

न) उपयोगकर्त्ता के साथ अभिमुख होना:

इलेक्ट्रॉनिक तथा सूचना एवं संचार तकनीक के उस भाग के संदर्भ में है जिसके साथ उपयोगकर्त्ता अन्तरक्रिया करता है तथा यह  सॉफ्टवेयर तथा वेबसाईट तक ही सीमित नही है।

प)  “भाषा में वाणी एवं सांकेतिक भाषा के साथ वाणी रहित भाषाओं के अन्य रुप भी सम्मिलित है।

फ) निःशक्तताग्रसित वह व्यक्ति है जो किसी शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक अथवा संवेदनशीलता संबंधी विकृत से ग्रसित है जिसके कारण विभिन्न बाधाओं सहित समाज में अन्य के साथ पूर्ण प्रभावी सहभागिता में बाधा होती है।

ब)  परिसर में (i) कोई संरचना, भवन, हवाई जहाज, वाहन अथवा वाहन, तथा (ii) एक स्थल (चारों ओर से बंद अथवा निर्मित हो सकता है या नहीं भी हो सकता है) तथा (iii) परिसर का एक अंश (पाराग्राफ (i) अथवा  (ii) में वर्णित परिसर सहित) हो सकता है।

भ) निर्धारित का अर्थ है इस अधिनियम के अन्तर्गत निर्धारित नियम।

म) सार्वजनिक भवन का अर्थ है ऐसा भवन, स्वामित्व पर ध्यान दिए बिना, जिसका उपयोग एवं पहुंच सर्व साधारण द्वारा किया जाता है।

य) तर्क संगत आवास का अर्थ है:

i) यदि किसी व्यक्ति को किसी प्रावधान, वर्गीकरण अथवा परंपरा के कारण एक या एक से अधिक प्रासांगिक विषयों से लागू होने पर अन्य की तुलना में बहुत असुविधाजनक स्थिती में रहना पड़े, ऐसे तर्क संगत उपाय करने होंगे जिससे असुविधाजनक स्थिति से बचा सके।

ii) यदि किसी व्यक्ति को शारीरिक विशेषता (विकृति) के कारण एक या एक से अधिक प्रासांगिक विषयों के लागू होने पर अन्य की तुलना में बहुत असुविधाजनक स्थिति में रहना पड़े, ऐसे तर्क संगत उपाय करने होंगे जिससे असुविधाजनक स्थिति से बचा जा सके।

iii) यदि किसी व्यक्ति को मात्र किसी सहायक वस्तु (अथवा उपाय) के कारण के कारण एक या एक से अधिक प्रासांगिक विषयों के लागू होने पर अन्य की तुलना में बहुत असुविधाजनक स्थिति में रहना पड़े, ऐसे तर्क संगत उपाय करने होंगे कि सहायक वस्तु के प्रावधान में कार्य हो सके।

iv) उपरोक्त (i) अथवा (iii) सूचना के प्रावधन से संबंधित हों, ऐसे तर्कसगंत उपायों, में जिन्हें लागू करना है – यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित सूचनाओं की परिस्थितियां प्राप्ति योग्य प्रारूप में उपलब्ध करवाए जाएं।

v) बशर्ते कि, विकलांग महिलाओं के किसी भी मामलों में ये विशेष आवश्यकताएं गैर आनुपातिक रुप से जबरन लादी गयी जैसी न दिखें।

र)  निबंघित संगठन - का अर्थ किसी विकलांगताग्रसितों की संस्था, अथवा विकलांग व्यक्तियों के पेरेन्ट्स की  संस्था, अथवा विकलांग व्यक्तियों के परिवार की संस्था, अथवा एक स्वयंसेवी स्वास्थ्य मानवीय अधिकारों- जैसे भी मामले हों – के क्षेत्र में कार्यरत स्वयंसेवी संस्था से है जो उनके मानवीय अधिकारों के लिए कार्य कर रहे है।

ल) सहायक जानवर - का अर्थ होगा ऐसे श्वान अथवा नेत्रहीन से ग्रसित के अतिरिक्त विकलांग व्यक्तियों को सहायता देने के लिए विशेष रुप से प्रशिक्षित किया गया है।

व) स्व-सहायता समूह - का अर्थ ऐसे संगठन से है जिसका गठन विकलांग व्यक्तियों द्वारा संयुक्त संसाधनों द्वारा सूचना संग्रह करने, समर्थन देने, तथा सहायता तंत्र के माध्यम से आपसी सहयोग करना है।

स) सेवाएं - का अर्थ है किसी भी पेशा अथवा व्यवसाय मेंलग्न सदस्यों अथवा सरकार, स्थानीय निकाय अथवा प्रतिष्ठान द्वारा प्रदत्त सेवाएं जिसमें बैकिंग तथा अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थय, बीमा पुनर्वास, मनोरंजन तथा होटल सेवाएं परिवहन अथवा यात्रा दूर संचार के क्षेत्र में उपलब्ध करायी जा रही है सेवाएं है।

श) विशेष विषय के विशेषज्ञ - का अर्थ ऐसे व्यक्ति है जो विकलांग हो भी सकता है या नहीं भी हो सकता है तथा जिसने पढ़ लिखकर मान्यता प्राप्त शैक्षणिक अहर्ता हासिल की है तथा ऐसे ज्ञान का अर्जन व्यावहारिक अनुभव के आधार पर किया है।

ष)  सहायता नेटवर्क - विकलांगताग्रसित व्यक्ति को उसकी दिनचर्या में सहायता करने के लिए कई ग्रुप सामने आये है। यह नेटवर्क परिवार के सदस्यों, मित्रों, सेवा उपलब्ध कराने वालों तथा अन्य जिनका व्यक्तिगत संबंध है तथा जिन पर संबंध के आधार पर विकलांगताग्रसित व्यक्तियों पर विश्वास किया जा सकता है।

ह)  वैश्विक डिजाइन - का अर्थ होगा उत्पादन, वातावरण, कार्यक्रम तथा सेवाओं का अधिकतम उपयोग – वह भी बिना किसी प्रकार की सहायक वस्तु की सहायता अथवा किसी विशिष्ट डिजाइन के। वैश्विक डिजाइन में उन सहायक उपकरणों को अलग नहीं रखा जायेगा जिनका उपभोग विकलांगताग्रसित विशिष्ट समूहों द्वारा किया जाता है जहां इनकी आवश्यकता होती है।

त्र) उत्पीड़न का अर्थ होगा निम्नलिखित व्यक्तियों में से किसी को पराधीनता अथवा धमकी का शिकार बनाने हेतु किसी को अलाभकारी स्थिति में डालना।

i)  इस अधिनियम के अन्तर्गत कोई कार्रवाई लाता है, अथवा

ii)  इस अधिनियम के अन्तर्गत कार्रवाई के संबंध में सूचना देता है अथवा

iii) इस अधिनियम के उद्देश्य पूर्ति के संबंध में कोई अन्य कार्य करता है अथवा

iv) किसी अन्य व्यक्ति (अभि व्यक्ति पूर्ण हो भी सकता है या नही भी सकता है) के विरुद्ध आरोप लगाता है कि इस अधिनियम का उसने उल्लंधन किया है,

क्रियान्वयन एवं व्याख्या हेतु मार्गदर्शी सिद्धान्त:

1.  कोई भी न्यायलयों, व्यक्ति अथवा प्राधिकार जिसे इसका अर्थ समझना है इसका ध्यान रखेंकि:

क) इस अधिनियम के प्रावधानों को सभी विकलांगताग्रसित व्यक्तियों के लिए कानून के समक्ष समानता, कानून के समान संरक्षण तथा कानून की समान मान्यता तथा मानवीय प्रतिष्ठा तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकारों सहित जीवन यापन करने का अधिकार है-ऐसा समझा जायगा।

ख) इस अधिनियम में ऐसा कुछ भी नहीं समझा जायगा कि विकलांगताग्रसित व्यक्तियों को कानूनी क्षमता से वंचित, विलंबित, कमी लाने अथवा समाप्त करने की कार्रवाई अथवा प्रभाव सन्निहित है।

ग) इस अधिनियम के प्रावधान अथवा कोई भी नियम, कानून अथवा कार्यक्रम जिन्हें इस अधिनियम के अन्तर्गत निर्मित किया गया है – यह समझा जायगा कि इस अधिनियम के अधीन दी गयी गारंटियों का अघिकतम प्रभाव है।

घ) इस अधिनियम के अन्तर्गत किसी अधिकार के प्रावधानों को ऐसा नहीं समझा जायगा कि इतना उद्देश्य प्रभाव को प्रतिबंधित करना अथवा सीमित करना अथवा उनके लिए शर्तों को कड़ाई से पालन करना है – यह समझा जाएगा।

ङ) जब तक कि इस अधिनियम में अन्य कोई प्रावधान न हो, इस अधिनियम के अन्तर्गत वर्गीकरण नहीं है (उच्च अथवा कम प्राथमिकता) का प्रावधान नहीं है, उनके संबंध में प्रकाश डालने का अर्थ उनकी महत्ता का क्रम नहीं है।

च) इस अधिनियम में ऐसा कुछ भी नहीं समझा जायगा कि विकलांगताग्रसित द्वारा वर्तमान में उपभोग किए जा रहे अधिकारों, लाभ, अथवा, सुविधाओं से वंचित करने, विलंबित, कमी लाने अथवा समाप्त करने की कोई कार्रवाई हो सकती है।

2.  उपरोक्त-वर्णित व्याख्या के सामान्य सिद्धान्तों पर कोई विपरीत प्रभाव डाले बिना, इस अधिनियम के अन्तर्गत न्याय निर्णय के दौरान, इस पर भी ध्यान रखेंगे कि:

क) ऐसे न्यायिक निर्णय जिनके द्वारा “विकलांग व्यक्ति अधिनियम, 1995 के अन्तर्गत विकलांगताग्रसित व्यक्तियों, के अधिकारों का संवर्धन हुआ हो।

ख)  संयुक्त राष्ट्र के अन्तर्गत विकलांग व्यक्तियों के अधिकार समझौते पर जिसका भारत एक हस्ताक्षरकत्तॉ है तथा जिसकी अभिपुष्टि की गयी है,

3. जागृति का प्रसार:

1.  इस विधान में मान्यता प्राप्त अधिकारों का सम्मान, संरक्षण तथा प्रोन्नति सुनिश्चित करने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि राज्य एवं नागरिक समाज दोनों ही को यह समझ होनी चाहिए कि विकलांगता मानवीय परिस्थितियों का एक अभिन्न अंग है, विकलांग व्यक्तियों की योग्यता तथा योगदान को मान्यता प्रदान करें, दूसरों के साथ विकलांग व्यक्तियों को समानता के आधार पर सहभागिता में बाधा डालने की रुढ़िवादी एवं हानिकारक परंपरा से संघर्ष करना है। (और उखाड फेंकना है)।

2.  सक्षम सरकार और विकलांग अधिकार अभिकरण समुचित सूचना अभियानों तथा सुग्राह्याता कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे जो विकलांगताग्रसित व्यक्तियों विशेषकर विकलांग महिलाओं तथा बच्चो के विरुद्ध प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष भेदभाव न हो इसके प्रति जागरुकता का प्रसार करेंगे।

3.  भेदभाव को रोकने तथा गलत और निन्दा पूर्ण भाषा एवं नामावली को छोड़ने की जिम्मेदारी को विस्तार देते हुए इस विधान में विकसित एवं व्यवह्यत शब्दावली को सभी राजकीय संचारों, लेने-देन, नियमों कानूनों, अधिसूचनाओं तथा आदेशों मे लागू करेंगे।

4.  सक्षम सरकार धारा 3 की उपधारा (1) में वर्णित विकलांगताग्रसितों के अधिकार के लक्ष्य और उसकी प्राप्ति हेतु लांछन (विकलांगों के प्रति) हटाने के कार्यक्रमों, सार्वजनिक शिक्षा अभियान, सूचना एवं तकनीक आधारित सुग्राही कार्यक्रम, विकलांगता अधिकारों पर सुग्राह्यता कार्यशालाओं का आयोजन तथा चिकित्सा क्षेत्र के बन्धुओं, सरकारी पदाधिकारीयों, राजनीतिक प्रतिनिधियों एवं मीडीया तथा विधि जगत से जुड़े समुदाय में जागृति प्रसार का शुभारंभ करेगी।

5.  धारा (3) की उप-धारा (1) में वर्णित उद्देश्यों की पूर्ति हेतु सभी प्रतिष्ठान सग्राही तथा विकलांगता सूचना प्रसार के अधिकार संबंधी कार्यक्रम अपने संगठन के अन्दर आयोजित करेंगे और ‘लोछन’ हटाने के कार्यक्रमों, सामूहिक शिक्षा अभियान, सूचना एवं तकनीक से जुड़ी प्रसार कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे।

6.  धारा 3 की उपधारा (2) में सामान्य जागरुकता की जिम्मेदारियों के प्रति बिना किसी पूर्वाग्रह के ऐसे कार्यक्रमों तथा अभियान के साथ-साथ-

क)  समावेशी, सहनशीलता, सहानुभूति तथा विविधता के प्रति सम्मान के ‘मूल्यों’ को प्रोन्नत करना, विकलांगों के जीवन के मूल्य के प्रति विशेष ध्यान देना।

ख) विकलांग के जीवन के मूल्य को मान्यता देना

ग) विकलांगताग्रसित व्यक्ति द्वारा पारिवारिक जीवन संबंधित सभी विषयों, संबंधों, एक परिवार की स्थापना तथा बच्चों के पालन-पोषण जैसे निर्णयों के प्रति जागरुकता का सृजन एवं सम्मान करना,

घ) स्कूल, कॉलेज तथा विश्वविधायालय स्तर पर उन्मुखीकरण एवं सुग्राही कार्यक्रमों का आयोजन करना, विकलांगता की मानवीय परिस्थितियों तथा विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों पर प्रशिक्षण तथा पेशेवर प्रशिक्षण उपलब्ध करवाना।

7.  सक्षम सरकार, सार्वजनिक तथा निजी संस्थान सामान्यतः विकलांगता ग्रसितों के अधिकारों से संबंधित विधिक जानकारी तथा सूचना के प्रसार संबंधित कार्यक्रमों तथा विशेष रुप से इस विधान (अधिकार के कानून) के संबंध में जानकारी देंगे।

पहुँच

4A.  पहुंच:

1.  जहां तक ‘पहुंच’ का प्रश्न है, विकलांग व्यक्तियों को स्वतंत्रतापूर्वक जीवनयापन तथा जीवन के सभी पहलुओं में पूर्ण सहभागिता के योग्य बनाने के लिए ‘पहुंच’ एक आवश्यक पूर्व शर्त है, विकलांग व्यक्तियों के अधिकार पर समझौते के अनुच्छेद-9 तथा भारत के संविधान के अनुच्छेद-14 तथा 21 के समर्थन में यह मान्यता दी जाती है कि विकलांगताग्रसित व्यक्तियों को अन्य के साथ समानता के आधार पर भौतिक वातावरण, परिवहन, सूचना तथा संचार, सूचना एवं संचार तकनीक सहित और सिस्टम तथा अन्य सुविधाओं एवं सेवाओं जिन्हें जनता के उपयोग के लिए ग्रामीण एवं शहरी दोनों ही क्षेत्रों में सेवा हेतु उपलब्ध करवाया गया है-इन सुविधाओं तक ‘पहुंच’ की प्राप्ति होगी।

4B.   पहुंच के मानक:

1.  ऐसी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए “विकलांग अधिकार प्राधिकरण “पहुंच” मानक तथा मार्गदर्शन जारी करेगा।

2.  प्राधिकरण इस विषय पर तथा अनुभवी विशेषज्ञ के साथ परामर्श करने के पश्चात इन मार्गदर्शन का निर्धारण करेंगे तथा वर्तमान मानकों को अपनाएंगे अथवा व्यवहार करेंगे जो भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप होंगे। व्यवहार हेतु मानकों के लिए मानक तय करने के दौरान अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि मार्गदर्शन आयु के अनुरूप एवं निम्न पर लागू योग्य होंगेः

क)     जनता द्वारा उपयोग में लाई जा रही सभी भवनों पर।

ख)    अस्थायी अथवा आपातकालीन परिस्थितियों तथा स्थायी परिस्थितियों पर।

ग)     सभी नए सामुदायिक आवासीय स्थलों तथा निजी आवासों पर लागू होंगे ताकि उन्हे देखने योग्य एवं रहने योग्य बनाया जा सके।

घ)     सड़क आधारित परिवहन।

ङ)      उड्डयन:

च)     रेलवे:

छ)     पैदल यात्रियों की संरचना पर।

ज)     ग्रामीण सार्वजनिक परिवहन सिस्टम।

झ)    परिवहन के सभी तरीकों का उपयोग हो ताकि विकलांग व्यक्ति सुरक्षा और आराम से यात्रा कर सके।

4C.  संरचनाओं में ‘पहुंच’:

1.  विकलांगता अधिकार प्राधिकरण समुचित उपाय करेंगे:

क)     एक वर्ष की अवधि के अन्दर ग्रामीण एवं शहरी दोनों ही क्षेत्रों के लिए डिजाइन, मार्गदर्शन एवं पहुंच मानक को क्रियान्वित करने एवं उस पर निगरानी करने के लिए विकाससात्मक कार्रवाई जारी करना।

ख)    इन विनियमों को प्रत्येक पांच वर्षो के पश्चात संरचनात्मक पहुंच की दृष्टि, समीक्षा एवं संशोधित किया जाय ताकि उन्हें सभी परिसरों में क्रियान्वित योग्य बनाया जा सके।

2.  सक्षम सरकार तथा प्रतिष्ठान समुचित उपाय करेंगी :

क)     सक्षम सरकार विकलांगताग्रसित व्यक्तियों के लिए स्टेशनों, हवाई अड्डो पर सुविधाएं उपलब्ध करवाएगी जो पहुंच मानक के अनुरूप होंगे, जैसे, टॉयलेट विशेष ऊँचाई पर टिकट काउन्टर, सांकेतिक भाषा के दुभाषिए, ब्रेल नेवीगेशन/ गाईड मैप आदि।

ख)    सभी प्रकार परिवहन की प्राप्ति जो डिजाइन के मानकों के अनुरूप हों,

ग)     सभी नई गाड़ियां डिजाइन के मानकों के अनुरूप होंगी तथा पुरानी गाड़ियां विधान के अनुरूप उपकरण फिट करने योग्य होंगी ताकि ‘पहुंच’ उपलब्ध करवायी जा सके।

घ)     विकलांगताग्रसित व्यक्तियों को ड्राइवींग लाईसेंस देने के लिये नियमों का निर्माण करें,

ङ)      जहां कोई बदलाव लाना असंभव होगा वहां विकलांगों को सहायता प्रदान करने लिए व्यक्ति उपलद्ध करवाए जाएंगे।

च)     विकलांग व्यक्तियों को ऐसी सहायता सेवाएं उपलद्ध करवाना ताकि वे अपरिचित लोगों वातावरण तथा स्थलों में जा सके और अन्तःक्रिया कर सकें।

4D.  व्यक्तिगत आवागमन की योजनाएं:

1.  सभी सक्षम सरकार विकलांग व्यक्तियों के व्यक्तिगत आवागमन हेतु योजनाओं तथा कार्यक्रमों का विकास करेंगे ताकि सुलभ लागत पर उनके समय तथा इच्छानुसार सेवा प्रदान की जा सके।

2.  ऐसे कार्यक्रमों के साथ-साथ

क)     विकलांग व्यक्तियों को परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए परिवहन कंपनियों को प्रोत्साहन तथा छूट का प्रावधान उपलब्ध करवाना।

ख)    निर्माण कंपनियों को रेट्रोफिट वाहनों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाय ताकि विकलांग व्यक्तियों को यह सुविधा बिना अतिरिक्त मूल्य चुकाए प्राप्त हो सके।

ग)     विकलांग व्यक्तियों को ड्राइवींग लाईसेंस उपलब्ध करवाने के लिए नियम बनाए।

घ)     विकलांग व्यक्तियों को व्यक्तिगत आवागमन के लिए सहायता उपलब्ध करवाना जिन्हें इसकी आवश्यकता हो,

ङ)      ग्रामीण क्षेत्रो में विकलांग व्यक्तियों के आवागमन हेतु परिवहन के ग्रामीण उपाय उपलब्ध करवाना।

4E. सेवाओं की प्राप्ति:

1.  सभी सक्षम सरकार तथा प्रतिष्ठान यह सुनिश्चित करेंगी कि सामान्य जनता को उपलब्ध सेवा तथा सुविधाएं समानता के आधार पर विकलांगों को भी उनकी आवश्यकतानुसार प्राप्त हों।

2.  सक्षम सरकार तथा प्रतिष्ठान नियमित रुप से ‘पहुंच’ के नवीनतम सूचनाओं के बारे में जानकारी देंगे ताकि विकलांग व्यक्तियों को सेवाओं के उपभोग में कठिनाई नहीं हो।

3.  उपायुक्त अन्य तरीकों (प्रारूप) से विकलांग व्यक्तियों को सहयोग एवं सहायता प्रदान को प्रोन्नत करना ताकि उन तक सूचनाओं की पहुंच सुनिश्चित हो सके।

4.  सभी सक्षम सरकारें सुनिश्चित करेंगी कि जनता की प्रतिक्रिया के लिए की गयी घोषणाएँ सभी विकलांग व्यक्तियों तक पहुंचे। इन घोषणाओं में – आपूर्ति संबंधी घोषणाओं, रोजगार, सार्वजनिक स्वास्थ्य, आपदा हेतु तैयारी आदि सम्मिलित हो सकते हैं।

4F. सूचना एवं संचार तकनीक तक पहुंच:

1.  सभी सक्षम सरकार तथा विकलांग अधिकार प्राधिकरण ऐसे उपाय सुनिश्चित करेंगे कि:

क) सभी प्रकार की विषय सामग्रियॉ जैसे प्रकाशन, पत्र-पत्रिकाएँ, मल्टी मीडिया आदि विकलांग व्यक्तियों को इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में उपलब्ध होने चाहिए, तथा पाठ्य पुस्तकों सहित शैक्षणिक सामग्रियॉ, पहुंच योग्य (पठनीय) प्रारूप में उपलब्ध होने चाहिए।

ख) ग्रामीण तथा नगरीय क्षेत्रों में योजनाएं बनाए या संशोधित किए जाय नःशक्त व्यक्तियों तक सूचना तथा संचार तकनीक एवं इलेक्ट्रॉनिक्स की सुलभतापूर्वक पहुंच हो।

ग) उपभोक्ता सेवा देने वाली सभी सरकारी तथा निजी वेबसाईट सर्वाधिक आधुनिक के मानकों की प्राप्त के अनुरूप होने चाहिए,

घ)  विकलांग व्यक्तियों को वर्तमान वेबसाईट की सुविधा मिल सके इसके लिए इन्हे प्रोत्साहन और छूट उपलब्ध करवाया जाय,

ङ)  विकलांग व्यक्तियों के लिए विशेष रुप से उपयोग हेतु सभी कॉपीराइट प्राप्त सामग्रियों में बदलाव, पुनःउत्पादन, अपनाने तथा संचार के लिए “लाभ के लिए नही” तथा गैर-व्यावसायिक आधार स्वच्छ व्यवहार माना जायगा।

व्याख्या:

प्राप्ति योग्य रूपांतर में ऐसे रूपांतर अथवा प्रारूप होंगे जिनसे किसी विकलांग व्यक्ति को कार्य करने में उतना ही लचीलापन तथा आराम प्राप्त हो जितना किसी एवं व्यक्ति को प्राप्त हो जो विकलांग नहीं है – इनमें ये सब सम्मिलित होंगे कान्तु इतने ही तक सीमित नहीं होंगे – ऑडियो रिकॉर्डीग, श्रवण-दृश्य सामग्री, श्रवण  योग्य और / अथवा पठनीय विवरण, ब्रेल e-टेक्सट् DAISY फॉर्मेट सहित, डिजिटल कॉपी से अनुकूल सहायक तकनीक सहित अथवा नवीन ब्रेल, स्पर्शनीय, बड़े प्रिंट, अलग अलग टाईप प्रारुप, साइज तथा सांकेतिक भाषा में।

4G. उपभोक्ता उत्पाद एवं सेवा तक पहुंच:

सभी सक्षम सरकार समुचित कदम उठाएगी – प्रोन्नत करने के लिए-

क)     सामान्य उपयोग के लिए वैश्विक डिजाईन को उपभोगक्ता उत्पाद जिनकी डिजाइनींग का पहुंच योग्य, विकासशील, उत्पादन तथा वितरण हो सकेगा।

ख)    व्यक्तिगत सभी सजावट और सौन्दर्यीकरण की सेवाएं दूसरों की ही तरह समानता के आधार पर जैसे वस्त्र, कास्मेटिक तथा फिटनेस सेवाओं तक पहुंच होनी चाहिए।

4H. सहायक जानवर

1.  विकलांग व्यक्तियों को उपयुक्त सेवा योग्य जानवर उपलब्ध करवाने के लिए सक्षम जानवर सेवा ट्रेनिंग सुविधा की स्थापना करेगी,

2.  सक्षम सरकार तथा प्रतिष्ठान विकलांग व्यक्तियों को सार्वजनिक स्थलों तथा भवनों अथवा सार्वजनिक सेवाओं के उपयोग के दौरान जानवर सेवा अथवा सुविधा उपलब्ध करवाएगी,

3.  किसी विकलांग व्यक्ति को सहायता की जरुरत है, सार्वजनिक भवनों अथवा सार्वजनिक सेवा की प्राप्ति हेतू जानवर सेवा का अधिकार जानवर सेवा के लिए बिना किसी अतिरिक्त शल्क के प्राप्त होगा।

4I. पहुंच नियमों का अनिवार्य अनुपालन:

1.  किसी व्यक्ति, संगठन अथवा प्रतिष्ठान को किसी संरचना के निर्माण की स्वीकृति नहीं दी जायेंगी यदि भवन निर्माण योजना विकलांग अधिकार प्राधिकरण द्वारा निर्धारित विनियमों का पालन नहीं करता है।

2.  किसी व्यक्ति, संगठन अथवा प्रतिष्ठान को कार्यपूर्ण होने का प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किया जायेगा अथवा भवन के दखल की अनुमति नहीं दी जायेगी यदि विकलांग अधिकार प्राधिकरण द्वारा निर्धारित विनियमों के पालन में विफल हुआ हो।

3.  इसको किसी भी उल्लंधन पर धारा 3 OD के अन्तर्गत दंडित किया जायगा।

4J. वर्तमान संरचनाओं को पहुंच योग्य बनाने के लिए समय सीमा:

1.  सभी सरकार के स्वामित्व में वर्तमान निर्मित भवन, सभी निजी निर्मित अथवा संरचना के स्वामित्व वाले भवन जिनका सार्वजनिक उपयोग किया जाता है तथा सभी परिसरों को इस अधिनियम के लागू होने के दस वर्षो के अन्दर पहुंच योग्य बनाना होगा।

2.  अन्य किसी सार्वजनिक भवनों को इस अधिनियम के पारित होने के पांच वर्षों के अन्दर पहुंच योग्य बनाना होगा।

3.  इसके किसी भी उल्लंधन पर धारा 30C के अन्तर्गत दंडित किया जायेगा।

4K. सेवा प्रदान करने वाले पर कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही

1.  सभी सेवा प्रदान करने वाले विकलांग अधिकार प्राधिकरण के विनियमों के अनुरूप पहुंच के विनियमों के अनुरूप सेवा प्रदान करेंगे।

2.  इसके किसी भी उल्लंधन पर धारा 30C के अन्तर्गत दंडित किया जायेगा।

4L. नेशनल सेंटर फॉर यूनिवर्सल डिजाईन की भूमिका तथा अवरोध रहित वातावरण:

1.  “वैश्विक डिजाईन हेतु राष्ट्रीय सेंटर” तथा “अवरोधरहित वातावरण” की स्थापना भारत सरकार के आदेश से मुख्यतः राष्ट्र को वैश्विक रुप से और अधिक पहुंच योग्य तथा पहुंच के मामले में समावेशी बनाने में सहायता करना है,

2.  केन्द्र विकलांग अधिकार प्राधिकरण को पहुंच की विशेषताओं का जनसाधारण को उपलब्ध करवाए गए परिवहन के सभी तरीकों के प्रावधान के अनुश्रवण में सहयोग प्रदान करेगा – ग्रामीण एवं नगरीय दोनों ही क्षेत्रों में।

3.  उपधारा (1) में वर्णित भूमिका निभाने में केन्द्र निम्नलिखित गतिविधियों का निम्न तरीक़े से संचालन करेगा:

क)     वैश्विक डिजाईन और बाधारहित वातावरण के क्षेत्र में शोध एवं विकास,

ख)    भवन निर्माण, डिजाईन, तकनीकी, इलेक्ट्रॉनिक तथा  इन्जीनीयरींग क्षेत्रों में ऐसे पाठ्यक्रमों का विकास करे कि वैश्विक डिजाईन के सिद्धान्त और व्यवहार का उपयोग किया जा सके,

ग)     शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों को वैश्विक डिजाईन संबंधित अध्ययन की सुविधा देनी चाहिए,

बशर्ते कि, केन्द्रीय सरकार विकलांग अधिकार प्राधिकरण तथा सक्षम सरकार का सभी वैश्विक डिजाईन तथा बाधा मुक्त वातावरण के लिए स्थायी सलाहकार होगा।

4M.  क्रियान्वयन योजना:

1.  विकलांग अधिकार प्राधिकरण के सहयोग से प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक सेवा उपलब्ध करवाने वाले सभी कार्य सार्वजनिक भवनों तथा स्थलों जैसे सभी PHCs, सीवील/जिला अस्पतालों, प्राइमरी स्कूलों/ सेकेन्डेरी स्कूलों, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन आदि में, अगले 10 वर्षो में पहुंच की उपलब्धता हेतु कार्ययोजना बनाएँगे।

2.  किसी योजना में ऑडीटरों की एक अधिकृत टीम ‘पहुंच’ पर ऑडिट करेगी तथा इसके साथ पहुंच के मानक मार्गदर्शन पर आधारित पहुंच सुविधा का प्रावधान होगा।

3.  सभी योजना सार्वजनिक दस्तावेजों में होगी और उन्हे DRA के वेबसाइट पर विकलांगताग्रसित व्यक्तियों तक पहुंचने वाले प्रारुप में उपलब्ध करवाया जायगा।

4.  एक बार पहुंचने उपलब्धता को सार्वजनिक करने के पश्चात विकलांग अधिकार प्राधिकरण सभी वर्तमान संरचनाओं के अनुश्रवण के लिए एक सिस्टम की स्थापना करेगा।

5. मानवीय संसाधन का विकास

1.  सक्षम सरकारें यह सुनिश्चित करेंगी कि इस अधिनियम में दी गयी समाजिक, आर्थिक तथा नागरिक अधिकारों का विधिवत क्रियान्वयन हो तथा इसके लिए मानवीय संसाधन के विकास का कार्य हाथ में लेंगे ताकि यह उपलब्ध सेवाओं का प्रावधान करवाए जिनमें सम्मिलित है- वर्तमान कर्मचारियों के सुग्राही बनाना तथा ऐसे कार्यक्रम का सृजन करें जो विकलांगता के प्रति मित्रवत हो।

क)     धारा 5 की उपधारा (5) में वर्णित उत्तरदायित्व की पूर्ति हेतु संबंधित मंत्रालय एक आवश्यकता आधारित विश्लेषण करेगा तथा योग्य कर्मचारियों के नियोजन, प्रशिक्षण तथा प्रवेश हेतु योजना बनाएगा ताकि इस अधिनियम में वर्णित विभिन्न जिम्मेदारियों को वे संभाल सके।

ख)    धारा 5 की उपधारा (2) में वर्णित केडर के सृजन के अतिरिक्त सक्षम सरकार इस क्षेत्र में मानव संसाधन विकास को प्रोन्नत करेगी इसके साथ-साथ-

ग)     पर्याप्त संख्या में पेशेवरो की इस प्रकार प्रावधान करें कि ऐसे अधिकारी उपयुक्त अनुपात में सेव प्रदान करने के लिए सभी विकलांगताओं के क्षेत्र से केन्द्र, राज्य, स्थानीय तथा पंचायत स्तर पर उपलब्ध हो सकें,

घ)     केन्द्र, राज्य, जिला, तथा स्थानीय निकायों और पंचायत स्तर पर कर्मचारियों का प्रावधान प्रशिक्षण के संचालन के अनुश्रवण के लिए हो ताकि संस्थानों और पेशेवरों का प्रभावी कार्य सुनिश्चित हो सके,

2.  धारा (5) की उप-धारा (1) में वर्णित उत्तरदायित्व की पूर्ति हेतु सक्षम सरकार समय-समय पर एक आवश्यकता आधारित विश्लेषण करेगी तथा नियोजन, सम्मिलित करने, अभिमुखीकरण तथा उपयुक्त कर्मचारियों का प्रशिक्षण कार्य करेंगे ताकि इस अधिनियम में वर्णित विविध उत्तरदायित्व को संभाल सके,

3.  सक्षम सरकारें यह सुनिश्चित करेंगी कि विकलांगता के क्षेत्र में कार्यरत सभी कर्मचारियों तथा पेशेवरों की नियम एवं शर्तें उपयुक्त, न्यायपूर्ण तथा समान हो ताकि गुणवत्ता कर्मचारियों तथा पेशेवरों का इस क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में प्रवेश हो और उन्हें टिकाए रखा जा सके,

4.  भारतीय पुर्नवास परिषद अधिनियम में निहित भारतीय पुनर्वास परिषद के किन्हीं कार्य अधिकारों के प्रति बिना किसी पूर्वाग्रह के तथा इसके अतिरिक्त धारा (5) की उप-धारा (5) में वर्णित केडर के सृजन के उत्तरदायित्वों के लिए सक्षम सरकार इस क्षेत्र संधान विकास सुनिश्चित करने के साथ-साथ:

क) प्रशासकों, पुलिस अधिकारियों, न्यायाधीशों तथा न्यायिक पदाधिकारियां के सभी ट्रेनिंक में विकलांगों के अधिकार पर ट्रेनिंक को अनिवार्य बनाना,

ख) स्कूल, कॉलेज तथा विश्वविधालय के शिक्षको, डॉक्टरों, नर्सो, पारा-मडिकल कर्मचारियों, समाज कल्याण पदाधिकारियों, ग्रामीण विकास पदाधिकारियों, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, इन्जीनीयरों, भवन निर्माताओं, अन्य पेशेवरों तथा सामुदायिक कार्यकर्ताओं के लिए विकलांगता को एक अंश के रुप में सम्मिलित करना,

ग) देखरेख सेवा तथा सहयोग प्रारुप परिवारों तथा देखरेख सेवा देने वालों के लिए स्वतंत्रपूर्वक जीवनयापन तथा सामुदायिक संबंधों में क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का शुभारंभ करना,

घ) देखरेख सेवा प्रदताओं और विकलांगताग्रसित व्यक्ति के लिए स्वतंत्र प्रशिक्षण ताकि आपसी योगदान एवं सम्मान के आधार पर सामुदायिक संबंध का निर्माण हो सके।

ङ) विकलांगताग्रसित व्यक्तियों के खेलकूद की आवश्यकता पर ध्यान देते हुए स्पोर्ट्स शिक्षकों के प्रशिक्षण ताकि कार्यक्रमों का संचालन करना।

6. समानता एवं भेदभावहीनता का अधिकार:

1.  कानून के समक्ष सभी निःशक्तता ग्रसित व्यक्ति एक समान हैं तथा किसी प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष भेदभाव के कानून का समान संरक्षण और समान लाभ पाने के अधिकारी हैं।

क) “प्रत्यक्ष भेदभाव” जाने अथवा अनजाने में तब होता है जब:

i)  कोई व्यक्ति अथवा व्यक्तियों के समूह जिन पर एक या एक से अधिक प्रतिबंधित विषय लागू हों उनके साथ कम अनुग्रहपूर्वक व्यवहार किया जाय बनिस्पत की अन्य किन्ही व्यक्तियों के समूह के साथ उन्हीं परिस्थितियों में जैसा व्यवहार हुआ हो, अथवा

ii) किसी ऐसे कारण के लिए जो कम से कम आंशिक रुप एक या एक से अधिक प्रतिबंधित विषय से जुड़ा हो, कोई व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह को अलाभकारी स्थिति से गुजरना पड़े, अथवा

iii) समुचित निवास उपलब्ध करवाने में विफल हों,

iv) किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह को तंग किया जाय या शोषण का शिकार बनें।

ख) ‘अप्रत्यक्ष’ भेदभाव तब होता है जब कोई प्रावाधान, वर्गीकरण या व्यवहार देखने में तटस्थ लगे, (लेकिन) किसी व्यक्ति को जिस पर एक या एक से अधिक प्रतिबंधित विषय लागू हैं को अन्य की तुलना में अलामकारी स्थिति में रहना पड़े,

2.  निःशक्तताग्रसित किसी भी व्यक्ति के साथ प्रतिबंध के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता है, जब तक कि यह नहीं बताया जा सके कि संदेहात्मक कार्रवाई, प्रावधान, वर्गिकरण परंपरा, व्यवहार या छोड़ देने की कार्रवाई किसी विधि सम्मत लक्ष्य की प्राप्ति हेतु सापेक्ष उपाय हो बशर्ते कि किसी भी परिस्थिति में समुचित निवास उपलब्ध न करवाने को न्यायसंगत नही ठहराया जा सकेगा।

3.  किसी भी अवस्था में किसी निःशक्तताग्रसित व्यक्ति को समुचित निवास अथवा इस ‘धारा’ में (वर्णित) किसी अन्य जिम्मेदारी के खर्च के लिए आंशिक अथवा पूर्ण शुल्क नहीं चुकना पड़ेगा।

4.  निःशक्तताग्रसित सभी व्यक्ति भेदभाव से किसी भी प्रतिबंधित कारण पर समान एवं प्रभावी कानूनी संरक्षण पाने का अधिकार होगा।

5.  निःशक्तताग्रसित सभी व्यक्तियों की कानूनी क्षमता तथा अपनी इच्छानुसार अन्य के साथ समानता के आधार पर जीवनयापन का तरीका चुनने का अधिकार है तथा कोई भी उपाय, हस्तक्षेप, व्याख्या जिनका प्रभाव किसी निःशक्तताग्रसित व्यक्ति को कानूनी क्षमता से वंचित करने, या वापस लेने अथवा उनके समापन करने की क्रिया को भेदभाव माना जायगा।

6.  किसी भी ऐसी कार्रवाई की योजना जिसका लक्ष्य निःशक्तताग्रसित व्यक्तियों को समानता प्राप्त करने की स्वीकृति प्रदान करना है, भेदभाव नहीं माना जायगा,

7.  किसी भी मामले में यह पाये जाने पर कि किसी व्यक्ति अथवा प्रतिष्ठान ने भेदभावपूर्ण व्यवहार किया है जिसे प्रतिष्ठान न्यासंगत ठहराने में विफल रहा है,  न्यायालय अथवा निःशक्तता आयुक्त, जैसी भी स्थिति हो घोषणात्मक, अनिवार्य, आदेशार्थ, क्षतिपूर्ति योग्य, सुपरवाइज़र अथवा कोई अन्य समुचित आदेश ऐसे भेदभाव के कारण होने वाले किसी अलाभकारी स्थिति या मानसिक संताप जिसका कष्ट ऐसे भेदभाव के कारण सहन करना पड़ा हो और भविष्य में भेदभाव को शिकार को अथवा किसी व्यक्ति को समान स्थिति का सामना न करना पड़े।

8.  न्यायालय अथवा विकलांगता आयुक्त प्रतिष्ठान को कार्रवाई का व्यय वहन करना होगा तथा कुछ बकाया रहने पर ब्याज देना होगा।

6A. विकलांग अधिक संवेदनशील विकलांग व्यक्तियों के हित में सक्रिय हस्तक्षेप

1.  सक्षम सरकार उपयुक्त समय पर, प्रतिबल, सक्रिय हस्तक्षेप का सृजन अधिक संवेदनशील विकलांग व्यक्तियों द्वारा अधिकारों का पूर्ण उपभोग हेतु हस्तक्षेप की गारंटी अन्य के साथ समानता के आधार पर देंगे।

व्याख्या:

अघिक संवेदनशील विकलांग व्यक्ति का अर्थ होगा ऐसे व्यक्ति जो अपनी विकृति की प्रकृति के कारण प्रवृति, आर्थिक, अथवा स्थलीय बाधाओं के कारण पारिवारिक अथवा सामाजिक अलगाव सहन करना होता है, जो अघिक आयु वाले, अथवा घर के अन्दर रहने वाले, अथवा जिन्हे छिपाया जाता है, अवहेलना की जाती है या परित्याग कर दिया जाता है अथवा अलग कर्मचारियों दिया जाता है, अथवा संस्थानों में रहते है या अनाथ, आवासहीन होते हैं।

2.  उप-धारा (1) के उद्देश्य की पूर्ति के लिए विकलांग अधिकार प्राधिकरण ऐसे नियमों, विनियमों, मानक मार्गदर्शन अथवा अन्य किसी साधन का निर्माण करेगा, अथवा शोध कार्य का संचालन करेगा, तथा विकलांग व्यक्तियों के संरचनात्मक अधिकारों के उल्लंधनो की जांच करेंगे, अथवा अन्य कोई गतिविधि अपनाएंगे जिन्हे वे उपयुक्त समझते हो।

3.  उप-धारा (1) के लिए समक्ष सरकार एक या अधिक पदाधिकारियों का इस उद्देश्य से पदनामित करेगी।

4.  प्राधिकार अथवा पदाधिकारीगण उप-धारा (3) में जिनका उल्लेख है, विकलांग व्यक्तियों को पारिवारिक तथा सामाजिक अन्तः क्रियाओं में सार्थक सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए, सभी सेवाओं की प्राप्ति, सुविधा तथा सूचना, तथा सभी अधिकारों एवं लाभों का अन्य के साथ समानता के आधार पर उपभोग के अधिकार की गारंटी का लाभ उपलब्ध करवाने के लिए सक्रिय हस्तक्षेप करेंगे।

विकलांगताग्रसित महिलाएं और लड़कियां

7A.  विकलांगताग्रसित महिलाएं और लड़कियां

1.  सभी महिलाएं और लड़कियां कानून के समक्ष एवं अन्तर्गत समान है तथा बिना भेदभाव के कानून के समान संरक्षण एवं लाभ के अधिकारी है।

2.  सक्षम सरकार तथा प्रतिष्ठान सभी उपयुक्त उपाय, निर्माण प्रक्रिया सहित, लैंगिक संवेदनशील कार्यक्रमों तथा योजनाओं के विस्तारीकरण तथा क्रियान्वयन करेंगे ताकि सभी विकलांग महिलाएं और लड़कियों को सभी अधिकारों का पूर्ण एवं समान उपभोग सुनिश्चित हो।

3.  इस अधिनियम के अन्तर्गत वर्तमान में जारी किसी अन्य कानून के अन्तर्गत किसी भी विकलांग महिलाएं अथवा लड़की को लिंग के आधार पर पूर्ण अथवा आंशिक रुप से किसी भी अधिकार प्राप्ति या कार्यक्रम से वंचित नहीं किया जा सकेगा।

4.  विकलांग महिलाओं तथा लड़कियों के लिए विशिष्ट उपाय करने, अथवा विशेष अधिकारों के प्रावधान हेतु उनके द्वारा उपभोग को प्रोन्नत करने से इस धारा में ऐसा कुछ नहीं है जो सरकार या अन्य किसी प्रतिष्ठान को इन अधिकारों का उपभोग करने से रोके।

7B.  विकलांग महिलाओं तथा लड़कियों की शिक्षा का प्रसार

1.  विकलांग लड़कियों और महिलाओं कों लिंग और विकलांगता के आधार प्रारूप सामान्य शिक्षा प्रणाली से वंचित नहीं किया जा सकेगा।

2.  सक्षम सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए सभी उपयुक्त उपाय करेगी कि सभी विकलांग लड़कियों और महिलाओं को शिक्षा प्रणाली तक बिना किसी भेदभाव के अन्य के साथ समानता के आधार प्रारूप सभी स्तरों में “पहुंच” हो।

3.  उप-धारा (1) की व्यापकता के प्रति बिना किसी पूर्वाग्रह के,समक्ष सरकार उपाय करेगी कि:

क)     लडकी के परिवार को विशेष भत्ता का भुगतान करेगी ताकि शिक्षा-व्यय को वहन कर्मचारियों सके,

ख)    शिक्षण संस्थानों को सार्वजनिक तथा निजी दोनों क्षेत्रों में प्रोत्साहन प्रदान करना, ताकि विकलांग लड़कियां प्रवेश के लिए नामांकन करवाएं तथा शिक्षा के पूरा होने तक नामांकन को बरकरार रखे।

ग)     विकलांग व्यक्तियों की आवश्यकता हेतु शिक्षा प्रणाली के सभी स्तरों में लड़कियों को ठहरने के लिए विशेष एवं समुचित व्यवस्था प्रदान करें।

घ)     सुनिश्चित करें कि सभी विकलांग लड़कियों को प्राईमरी, सेकेन्डेरी तथा उच्च शिक्षा पूरा करने के लिए आवश्यक, पर्याप्त तथा समुचित सहायता प्राप्त हो।

ङ)      सुनिश्चित करें कि सभी स्कूल भवन विकलांग लड़कियों के पहुचने लायक हो।

7C. विकलांगताग्रसित महिलाओं और लड़कियों को कार्य एवं नियोजन का अधिकार:

1.  किसी भी विकलांगता महिला को किसी भी प्रतिष्ठान में नियोजन की पूरी अवधि के दौरान, नियोजन, पदोन्नति, तथा अन्य संबंधित मामलों में भेदभाव का सामना नहीं करना पड़े।

2.  सक्षम सरकार सभी प्रणाली तथा उपयुक्त उपाय योजनाओं और कार्यालयों की निर्माण प्रकिया सहित सुनिश्चित करेंगे ताकि विकलांग महिलाओं को नियोजन के अवसरों की प्राप्ति अन्य के साथ समानता के आधार पर हो।

3.  उप-धारा (1) की व्यापकता के प्रति बिना किसी प्रतिकूल पूर्वाग्रह के ऐसे सभी उपायों में :-

क) विकलांगता महिलाओं की आवश्यकतानुसार समुचित निवास सुनिश्चित करें तथा सभी प्रतिष्ठानों में नियोजन हेतु सहायक तंत्र की व्यवस्था का प्रावधान मातृत्व अवकाश, लचीले कार्य अवधि एवं क्रेशे के प्रारुप में करें।

ख) सुनिश्चित करें कि सभी प्रतिष्ठान तक विकलांग महिलाएं पहुंच सके।

ग) विकलांग महिलाओं को कुशलताओं के विकास हेतु ट्रेनिंग और सहायता, स्व-नियोजन, वोकेशन ट्रेनिंग ग्रामीण तथा नगरी परिवेश दोनों में ही सुविधा उपलब्ध करवाएं, तथा यह सुनिश्चित करें कि ऐसी ट्रेनिंग तक विकलांग महिलाओं की पहुंच हो।

घ) विकलांग महिलाओं को नियोजन देने के लिए प्रतिष्ठानों को प्रोत्साहन का प्रावधान करें।

ङ) सुनिश्चित करें कि विकलांग महिलाओं को गरीबी उन्मूलन तथा जीवनयापन ती योजनाओं तथा कार्यक्रमों का लाभ प्राप्त हो।

7D. सभी प्रकार की हिंसा, दुर्व्यवहार तथा उत्पीड़न से विकलांग महिलाओं को संरक्षण का अधिकार

1.  प्रत्येक विकलांग महिला को शारीरिक, मानसिक, यौन, तथा भावनात्मक उत्पीड़न, दुर्व्यवहार तथा हिंसा से सभी प्रकार की स्थितियों में घर, सेवा-केन्द्रों, शैक्षणिक संस्थानों, कार्यक्रमों तथा अन्य स्थानों में जहां सह-निवास तथा किसी भी प्रारूप में नियोजन है तथा विकलांग महिलाएं स्थायी अथवा अस्थायी तौर पर रहती है- में उन्हें संरक्षण का अधिकार होंगे:

2.  सक्षम सरकार विकलांग लड़कियों और महिलाओं को ग्रामीण अथवा नगरीय क्षेत्रों में, सभी प्रकार के उत्पीड़न, दुर्व्यवहार तथा हिंसा से संरक्षण हेतु समुचित उपाय करेंगी। ऐसे उपायों में सम्मिलित होगा:

क)  विकलांग महिलाओं द्वारा उत्पीड़न, दुर्व्यवहार तथा हिंसा की घटनाओं की रिपोर्टिंग के लिए एक पहुंचने योग्य, सुरक्षित, तथा गोपनीय शिकायत प्रणाली का प्रावधान होगा।

ख)  विकलांग लड़कियों और महिलाओं को ऐसे दुर्व्यवहार हिंसा या उत्पीड़न के शिकार होते है तथा उनके परिवार अथवा, देखरेख सेवा देने वाले, संज्ञान तथा मनोवैज्ञानिक ईलाज तथा विकास, पुनर्वास एवं सामाजिक पुनर्मिलन, को एक ऐसे वातावरण में जहां स्वास्थ, कल्याण, आत्म-सम्मान, प्रतिष्ठा तथा व्यक्ति की स्वायत्तता को लिंग, विकलांगता तथा आयु के प्रति संवेदनशील संरक्षण सेवाएं, सहायता एवं समर्थन का प्रावधान होना चाहिए।

ग)  हिंसा दुर्व्यवहार तथा उत्पीडन घटनाओं की रिपोर्ट देने, मान्यता देने तथा उनसे बचने के संबंध में सूचनाओं का प्रसार हो।

3.  इस धारा के उद्देश्य हेतु “हिंसा”, “दुर्व्यवहार” तथा उत्पीड़न शब्दों का वही अर्थ है होगा जैसा धारा कि 13 के अन्तर्गत है।

7E. विकलांगताग्रसित महिलाओं का स्वास्थ के प्रति अधिकार

1.  सभी विकलांग महिलाओं को सर्वोच्च मानक के स्वास्थ्य के उपयोग तथा प्राप्ति योग्य वातावरण में तथा प्राप्ति योग्य कार्यविधि में समुचित समायोजन सहित लिंग अथवा विकलांगता के आधार पर बिना भेदभाव के स्वास्थ्य सेवा पाने का अधिकार होगा।

2.  सक्षम सरकार सभी समुचित उपाय यह सुनिश्चित करने के लिए करेंगे कि विकलांग महिलाओं को पूरा और प्रभावी स्वास्थ्य के अधिकार का उपभोग प्राप्त हो, इसके साथ ही यह उपाय भी होंगे:

क) सुनिश्चित करें कि सभी स्वास्थ्य सेवाएं, परिवार नियोजन कार्यक्रम सहित, लिंग संवेदनशील हो तथा विकलांग महिलाओं ग्रामीण तथा नगरीय क्षेत्रों में उपलब्ध और प्राप्ति योग्य हों,

ख) विकलांग महिलाओं स्वास्थ्य सेवा के सभी क्षेत्रों, यौन तथा प्रजजन सेवा सहित जानकारी उपलब्ध हों,

7F. विकलांगताग्रसित महिलाओं को गृह एवं परिवार के प्रति अधिकार

1.  विकलांग महिलाओं को अन्य के साथ समानता के अधिकार के साथ स्वतंत्रतापूर्वक तथा पूर्ण सहमति के विवाह करने तथा एक परिवार बसाने का अधिकार होगा।

2.  प्रत्येक विकलांग महिला को अपनी प्रजनन क्षमता बनाए रखने का अधिकार होगा तथा इसे किसी ऐसी मेडिकल कार्यविधि से गुजरना नहीं होगा जिसके कारण प्रजनन क्षमता समाप्त हो जाय अथवा बिना उसकी सहमति के गर्भपात न हो।

3.  किसी भी विकलांग महिला को विवाह संबंधित भूमिका, परिवार, बच्चों के पालन पोषण तथा संबंध की जिम्मेदारी वहन करने से विकलांगता के आधार पर वंचित नही किया जायगा अथवा इसके लिए बल प्रयोग नहीं होगा।

4.  सक्षम सरकार ऐसे सभी समुचित उपाय करेगी ताकि विकलांग महिलाओं के वि☺ विवाह, परिवार, बच्चों के पालन-पोषण तथा संबंधों के प्रति भेदभाव समाप्त हों। ऐसे उपायों में सम्मिलित होंगे।

क)     विकलांग महिलाओं तथा उनके परिवारों को गृह तथा पारिवारिक जीवन से छिपाने, परित्याग करने, अवहेलना तथा अलग रखने संबंधी सूचनाओं की सेवा तथा सहायता शीध्रतापूर्वक तथा संपूर्ण रुप से उपलब्ध हों।

ख)    विकलांग महिलाओं प्रजनन स्वास्थ्य और परिवार नियोजन संबंधी सूचनाएं प्राप्त हों ताकि प्रजनन के अधिकार और परिवार नियोजन के संबंध में स्वतंत्रतापूर्वक जिम्मेदारी के साथ निर्णय ले सकें।

7G. न्याय प्राप्ति

1.  सक्षम सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए उपाय करेगी कि सभी थानों, न्यायालयों,ट्रिब्यूनल, अथवा मध्यस्थता की शक्ति सहित विधि-प्रणाली जिनका संबंध न्याय प्रदान प्रकिया से है - विकलांग महिलाओं के प्राप्ति योग्य हो।

विकलांगता ग्रसित बच्चे

 

8A. विकलांगताग्रसित बच्चें

1.  विकलांगताग्रसित बच्चों के अधिकार:

2.  विकलांग बच्चों को वही मानवीय अधिकार तथा बुनियादी स्वतंत्रताएं मिलेंगी जो अन्य बच्चों को प्राप्त है,

3.  उन्हें इन अधिकारों तथा बुनियादी अधिकारों को स्वतंत्रताएं अन्य बच्चों की ही तरह समानता के आधार पर उपभोग करने का अधिकार होगा तथा किसी भी अधिकार से वंचित रखना भेदभाव माना जायगा।

4.  सक्षम सरकार तथा प्रतिष्ठान यह सुनिश्चित करेंगे कि विकलांग बच्चों को उन्हें प्रभावित करने वाले सभी विषयों पर अपने विचार स्वतंत्रतापूर्वक अभिव्यक्त करने के अधिकार प्राप्त हो।

5.  विकलांग बच्चों की राय को बच्चे की विकासशील क्षमता के अनुरूप महत्व देना चाहिए,

6.  सक्षम सरकार ऐसी विघि का विकास करेगी कि ऐसे अधिकारों के उपयोग के लिए बच्चे को समुचित मार्गदर्शन तथा सूचनाएं प्राप्त हों,

7.  सभी सक्षम सरकार तथा प्रतिष्ठान यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी विकलांगताग्रसित बच्चों के जन्म का निबंधन जन्म तथा मृत्यु निबंधन अधिनियम – 1969 के अनुरूप हों|

8B. बच्चों को हिंसा, दुर्व्यवहार तथा उत्पाद उत्पीड़न से सरंक्षण का अधिकार

1.  सभी विकलांग बच्चों को सभी प्रकार की स्थितियों में गृह, परिवार, स्कूल, संस्थान तथा “किशोर न्याय प्रणाली” में सभी प्रकार के शारीरिक या मानसिक हिंसा, चोट अथवा दुर्व्यवहार, अवहेलना युक्त व्यवहार, दुर्व्यवहार अथवा उत्पीड़न सभी स्थितियों में यौन दुर्व्यवहार के संरक्षण का अधिकार है।

2.  सभी विकलांग बच्चों को प्राप्ति योग्य, सुरक्षापूर्ण तथा गोपनीय शिकायत प्रणाली की उपलब्धि का अधिकार है। ऐसी शिकायतों को समय सीमा के अन्तर्गत संबोधित करने की व्यवस्था होनी चाहिए|

3.  सक्षम सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी संस्थान जो विकलांग बच्चों को सेवा उपलब्ध कर रहा है, उनके स्टाफ विशेष रुप से प्रशिक्षित कर्मचारी होंगे तथा किसी भी व्यक्ति को जो विकलांग बच्चों को सहायता या सेवा उपलब्ध करवा रहा है उन्हें इस प्रकार से प्रशिक्षित किया जाय कि वे बच्चे की निष्ठा, प्रतिष्ठा तथा अधिकारों को संरक्षण कर सके।

4.  सक्षम सरकार तथा प्रतिष्ठा उपयुक्त कर्मचारी तथा विकलांग बच्चों के लिए जागरुकता तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाएगी ताकि उन्हें हिंसा तथा दुर्व्यवहार के संकेतों को समझने योग्य बनाया जा सके तथा शिकायत प्रणाली का उपयोग कर सकें।

5.  इस धारा के उद्देश्य में , हिंसा, दुर्व्यवहार तथा उत्पीड़न का वही अर्थ होगा जो इस अधिनियम की धारा 13 में अन्तर्गत है।

8C. बच्चों का गृह और परिवार के प्रति अधिकार

1.  सक्षम सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि विकलांगताग्रसित बच्चों को पारिवारिक जीवन के संदर्भ में समान अधिकार प्राप्त हों। सक्षम सरकार सहायता प्रदान के उपाय करेगी जैसे विकलांग बच्चों तथा उनके परिवार को सम्पूर्ण सूचनाएं तथा सहायता प्रदान करना ताकि यह सुनिश्चित हो कि उन्हें छुपाया, परित्याग, अवहेलना अथवा अलग नहीं किया जा सके।

8D. बच्चों के लिए न्याय की प्राप्ति

1.  सभी विकलांग बच्चों को न्यायालय तथा वैधानिक प्रतिनिधित्व की प्राप्ति और न्यायालय की उन कार्रवाईयां में सहभागिता करने का अधिकार होगा जो उनके जीवन को प्रभावित करते हों, उस अधिकार सहित जिससे उनसे संबंधित कार्रवाई की सूचना अनिवार्य रुप से उन्हें प्राप्त होनी चाहिए।

2.  सभी विकलांग बच्चों को विकलांगता तथा आयु के अनुरूप राष्ट्रीय आयुक्त के न्यायालय द्वारा निर्मित नियमों के आधार पर उपयुक्त निवास प्राप्त करने का अधिकार होगा।

8E. संस्कृति, अवकाश तथा खेलकूद का अधिकार

1.  सभी विकलांग बच्चों को खेलने तथा खेलकूद, मनोरंजन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अन्य बच्चों के साथ समानता के आधार पर सहभागिता करने का अधिकार है।

2.  सभी सक्षम सरकार एवं प्रतिष्ठान विकलांगता एवं आयु के अनुरूप विकलांग बच्चों को खेलकूद में सहभागिता करने का अवसर दिलवाएगी तथा अन्य बच्चों के साथ खेल के मैदान में पहुंच सकेंगे।

वैधानिक योग्यता और नागरिक राजनीतिक अधिकार

9A.  वैधानिक योग्यता और विधि के समक्ष समान मान्यता का अधिकार

1.  किसी अन्य कानून में कुछ विपरीत (कथन) होने पर भी, विकलांगताग्रसित व्यक्ति अन्य के साथ जीवन की सभी पक्षों में समानता के आधार पर वैधानिक योग्यता का उपभोग कहीं भी विधि के समक्ष एक व्यक्ति कि तरह कर सकता है।

2.  विकलांगताग्रसित किसी व्यक्ति को किसी कानून, नियम, अध्यादेश, आदेश, बाई लॉ, परंपरा, व्यवहार के कारण उसके अधिकारों से वंचित रखें जाय, वह इस अधिनियम के विपरीत होगा और आज के बाद निरस्त समझा जायगा।

सभी विकलांग व्यक्तियों यदि वे ऐसा चाहें, कानूनी योग्यता के उपभोग के लिए सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

3.  सभी विकलांग व्यक्तियों को भी वैधानिक योग्यता प्राप्ति हेतु सभी व्यवस्था तथा आवश्यक सहायता उनकी इच्छा और प्राथमिकता के अनुसार अधिकार होगा।

4.  विकलांगता अधिकार प्राधिकरण (DRA) उपयोगी योजना बनाने के लिए समुचित उपाय करेंगे। ये लैंगिक रुप से संवेदनशील होंगे ताकि विकलांग व्यक्ति को आवश्यकता होने पर उसके वैधानिक योग्यता के उपयोग में सहयोग प्रदान किया जा सके।

5.  सहायता की सीमा अथवा गंभीरता पर ध्यान दिए बिना किसी भी अवस्था में विकलांग व्यक्ति की वैधानिक योग्यता पर सवाल नहीं किया जायगा न ही उसे वंचित किया जायगा क्योंकि ऐसा विकलांग व्यक्ति सहयोग की प्राप्ति इस प्रकार की वैधानिक योग्यता प्राप्त करने के लिए ही करता है।

6.  यदि सहायता प्रदान करने वाले तथा किसी विकलांग व्यक्ति के बीच हित के लिए कोई किसी विशेष लेने-देन में विवाद उत्पन्न होने पर ऐसे सहायता देने वाले व्यक्ति द्वारा विकलांग व्यक्ति को उस विशेष लेन-देन पर सहायता देने पर रोक लगा देनी चाहिए।

व्याख्या:

सामान्य तौर पर ऐसा नहीं समझा जाना चाहिए कि सहायता प्राप्त व्यक्ति का निःशक्तताग्रसित व्यक्ति के साथ रक्त, आकर्षण अथवा लेने देने के आधार पर संबंध है जिसके कारण स्वार्थ का संघर्ष हो रहा है।

7.  कोई भी व्यक्ति चाहे वह व्यक्ति रुप से अथवा किसी नेटवर्क के एक भाग के रुप में सहायक उपलब्ध क्यों न करवा रहा हो, निःशक्त व्यक्ति पर अनावश्यक प्रभाव नहीं डालेगा। किसी व्यक्ति अथवा नेटवर्क द्वारा इस प्रकार से सहायता प्रदान किया जाय कि वह निःशक्त व्यक्ति की स्वायत्तता, प्रतिष्ठा और निजता का सम्मान करें।

8.  किसी निःशक्त व्यक्ति को सहायता की व्यवस्था में बदलाव लाने, सुधार करने अथवा समाप्त करने तथा किसी अन्य से बदलने का अधिकार होगा, बशर्ते कि, ऐसा बदलाव सुधार अथवा समापन अग्रगामी व्यवस्था की प्रवृति का होगा तथा निःशक्त व्यक्ति द्वारा किसी तीसरे पक्ष के साथ सौदा को सहायता व्यवस्था के साथ निरस्त नहीं करेगा।

9.  निःशक्त व्यक्ति को सहायता उपलब्ध करवाने की अपनी जिम्मेदारी की पूर्ति हेतु,निःशक्तता अधिकार प्राधिकरण मागदर्शन निर्धारित करेंगे ताकी निम्न कार्रवाई कर्मचारियों सके:

i) अग्रिम आदेशों का रजिस्ट्रेशन,

ii) सहायता नेटवर्क को मान्यता प्रदान करना,

iii) एटॉर्नी के enduring Power का रजिस्ट्रेशन

iv) किसी व्यक्तिगत सहायक की नियुक्ति की शर्तें, अथवा

v) कोई अन्य समुचित पारंपरिक कानूनी तंत्र अथवा सामुदायिक व्यवहार द्वारा निःशक्त व्यक्ति को प्रभावी ढंग से सहायता प्रदान की जा सके।

कोई भी निःशक्त व्यक्ति उपरोक्त मार्गदर्शन का उपयोग करते हुए अपनी सहायता व्यवस्था को अधिष्ठापित कर सकता है तथा निर्धारित प्राधिकरण में इसे दर्ज करवा सकता है।

9B. सहायता की प्राप्ति

1.  निःशक्त अधिकार प्राधिकरण अथवा कोई अन्य प्राधिकरण जिससे विशेष रुप इसी उद्देश्य से स्थापित किया गया है वैधानिक योग्यता के क्रियान्वयन हेतु समुचित सहायता प्राप्ति के लिए तुरंत कार्रवाई करेंगे, विशेष कर संस्थान में रहने वालों के लिए तथा गंभीर रुप से जिन्हें सहायता होगी।

2.  पूर्ण अभिभावकता समाप्त कर दी गयी है। पूर्ण अभिभावकता का पालन अथवा पूर्ण अभिभावकता मानने के लिए कोई सिस्टम कानून, नियम, अधिनियम और परंपरा अब से निरस्त समझे जाएंगे।

3.  निःशक्त अधिकार प्राधिकरण अथवा कोई अन्य प्राधिकरण जिसकी स्थापना विशेष रुप से इसी उद्देश्य से की गयी है समुचित कार्रवाई करेंगे जहां उपयुक्त, मध्यस्थता कार्रवाई निःशक्त व्यक्ति को पूर्ण अभिभावकता से निकलने के लिए सहयोग करेंगे तथा निःशक्त व्यक्ति की इच्छा पर अपने वैधानिक योग्यता के क्रियान्वयन हेतु समुचित सहायता की व्यवस्था करेंगे।

9C. संस्थान में निःशक्त व्यक्ति के लिए सहायता का सृजन

1.  मनोनीत अधिकारी शीध्रतापूर्वक कार्रवाई करते हुए निःशक्त व्यक्ति द्वारा वैधानिक योग्यता के पालन के लिए सहायता का उपाय करेगा विशेषकर संस्थान में रहने वाले निःशक्त व्यक्ति के लिए तथा जिन्हें गंभीर सहायता की आवश्यकता है।

2.  अधिकारी विकलांगता ग्रसित व्यक्तियों के लिए उपयुक्त नीतियों तथा योजनाओं का निर्माण विशेषरुप से उन विकलांग व्यक्तियों के लिए करेंगे जिन्हें अधिक सहायता की आवश्यकता है ताकि वे कन्वेशन के अन्तर्गत गारंटी प्राप्त अपनी सामाजिक, राजनीतिक तथा संस्कृति अधिकारों को प्राप्त कर सकें।

3.  इस अधिनियम के क्रियान्वित होने के पश्चात पदनामित व्यक्ति या कमिटियां उन व्यक्तियों को जो सामान्य अभिभावकता से निकले हैं – विकलांग को जहां से चाहते हैं उन स्थानों पर विकलांग व्यक्ति को सहायता हेतु समुचित सहायक व्यवस्था स्थापित करेंगे। व्यक्तियों अथवा कमिटियों की ये समीक्षात्मक गतिविधियाँ सुविधा देने की प्रकृति की है तथा किसी भी विकलांग व्यक्ति को समीक्षा गतिविधि में विलम्ब के कारण वैधानिक योग्यता से वंचित नहीं किया जा सकेगा|

9D. सहायक नेटवर्क का सृजन

1.  पदनामित अधिकारी नए प्रकार की सहायता का कार्य लेंगे तथा पूर्व से सम्मिलित सहायता पर मार्गदर्शन का निर्माण विकलांग व्यक्तियों, के संगठनों, विकलांग व्यक्तियों, के संगठनों, पेरेन्ट्स संगठनों, विकलांग व्यक्तियों के लिए कार्यरत् संगठनों तथा अन्य संबधित नागरिक समिति के सदस्यों के परामर्श पर करेंगे।

2.  अधिकारी सहायता प्राप्त करने वालों के विचार से अवगत होने के लिए उपयुक्त तंत्र का उपयोग करेंगे – दी गयी सहायता की उपयुक्तता तथा उपयोगिता ज्ञात करने के लिए, कि क्या उन्हें इसमें किसी और बदलाव भी करने की इच्छा है।

3.  विकलांग व्यक्ति की वैधानिक योग्यता का सम्मान करते हुए सहायता सुनिश्चित करने के लिए विकलांगता अधिकार प्राधिकरण सहायता प्रदान करने की जरुरत तथा आवश्यकता एवं भूमिका पर नियमित रुप से जागरुकता का सृजन करने तथा सहायता कार्यालयों का संचालन करेंगे।

9E. वैधानिक योग्यता के वंचित करना

1.  कोई भी विकलांग व्यक्ति जिसे वैधानिक योग्यता से वंचित किया जाता है अथवा किसी व्यक्ति द्वारा वैधानिक योग्यता के उपयोग से वंचित किया जाता है जिला विकलांगता आयुक्त के पास इसकी शिकायत कर सकता है जो यथासंभव शीघ्रतापूर्वक समुचित राहत का प्रावधान करेंगे।

जीवन और जीवनयापन का अधिकार

1.  प्रत्येक विकलांग व्यक्ति को जीवन का जन्मजात अधिकार है। राज्य विकलांग व्यक्तियों द्वारा अन्य के साथ समानता के आधार पर इसके प्रभावी उपभोग सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपाय करेगा।

व्याख्या:

यहां राज्य शब्द की वही अर्थ है जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 12 के अधीन ‘राज्य’ शब्द है।

2.  जीवन यापन के अधिकार में सम्मानपूर्वक जीवन यापन सन्निहित है, जिसमें सन्निहित है किन्तु निम्न तक ही सीमित नहीं है

क) उपयुक्त पोषक तत्व, वस्त्र तथा आश्रय,

ख) पढ़ने, लिखने, स्वयं को किसी भी प्रारूप अथवा भाषा-लिखित, बोलकर या बिना बोले, अथवा सांकेतिक भाषा में अथवा सांकेतिक भाषा में अभिव्यक्ति करने, और

ग) आवागमन, संघ निर्माण सहभागिता तथा अन्य लोगों एवं समुदाय के साथ रहने और हिस्सा बाँटने तक

घ) व्यक्तिगत, सामाजिक, शैक्षणिक तथा वोकेशनल कुशलताएं अर्जित करने की जिनकी आवश्यकता एक निःशक्त व्यक्ति की तरह कार्य करने में हो सकती है,

ङ) वैधानिक योग्यता की जीवन के सभी पक्षों में दूसरों के साथ समानता के आधार पर अधिकार तथा वैधानिक योग्यता के उपयोग हेतुं कोई सहायता अथवा इसके लिए आवश्यक कोई व्यवस्था,

3. कोई भी कार्य या विलोपन जो किसी निःशक्त व्यक्ति के कसी अंग अथवा कार्यशक्ति के क्षतिग्रस्त अथवा चोट अथवा उपयोग में स्थाई अथवा अस्थायी अवरोध उत्पन्न करता है, इस अधिनियम के अन्तर्गत दंडनीय होंगे।

इस धारा का कोई उल्लंधन धरा-30F के अन्तर्गत दण्डनीय होगा।

जोखिम की स्थितियों में निःशक्तताग्रसित व्यक्ति की सुरक्षा और संरक्षण

1.  सभी निःशक्त व्यक्ति को जोखिम भरी स्थितियों में समुचित संरक्षण तथा सुरक्षा प्राप्त करने का अधिकार होगा इसमें सशस्त्र संघर्ष, मानवीय आपदाएं और प्राकृतिक त्रासदी भी सम्मिलित है।

2.  उपधारा (1) में मान्यता प्राप्त अधिकार की संवृद्धि हेतु (1) सक्षम सरकार तथा स्थानीय निकाय प्रभावी और समुचित उपाय करेंगे ताकि इन परिस्थितियों में निःशक्त व्यक्तियों का संरक्षण और सुरक्षा अन्य लोगों कि तरह समानता के आधार पर हो सके।

3.  उप-धारा (2) में वर्णित जिम्मेदारी की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना सक्षम सरकार तथा स्थानीय निकाय निःशक्त अधिकार प्राधिकरण के परामर्श पर भी सभी वर्तमान तथा प्रस्तावित योजनाओं तथा हस्तक्षेप का आवश्यकतानुसार सूचीकरण अथवा बदलाव निःशक्त व्यक्तियों को सम्मिलित करने के लिए करेंगे।

4.  आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अन्तर्गत S2(e) में परिभाषित के अन्तर्गत  राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण निःशक्त व्यक्तियों को प्रत्येक योजना, कार्यक्रम, मिशन में सम्मिलित करने के लिए समुचित उपाय सुनिश्चित करेंगे तथा आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005  में परिभाषित S2(d) के अन्तर्गत निःशक्त व्यक्तियों की सुरक्षा तथा संरक्षण करेंगे।

5.  सक्षम सरकार तथा स्थानीय निकाय सुरक्षा तथा संरक्षण हेतु समुचित उपाय करेंगे और साम्प्रदायिक दंगों अथवा आन्तरिक उपद्रव की स्थिति में शीध्रतापूर्वक राहत तथा पुनर्वास की व्यवस्था करेंगे।

6.  सशस्त्र संघर्ष की सभी स्थितियों में सशस्त्र सेनाएं अन्तर्राष्ट्रीय मानवीय अधिकार कानून तथा अन्तर्राष्ट्रीय मानवीय कानून सहित जेनेवा समझौते की I-IV, 1949 एवं अतिरिक्त प्रोटोकल I& II, 1977 के अन्तर्गत निःशक्त व्यक्तियों की सुरक्षा तथा संरक्षण हेतुं समुचित उपाय सुनिश्चित करेंगे।

1.  उपयुक्त प्राधिकरण द्वारा सशस्त्र संधर्ष, मानवीय आपदाओँ अथवा प्राकृतिक आपदाओँ के आलोक में प्रत्येक पुनर्निमाण गतिविधियों में निःशक्त व्यक्तियों की ‘पहुंच’ संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जायगा। इसे निःशक्त अधिकार प्राधिकरण की सलाह के अनुरूप होना चाहिए। (Disability Rights Authority) की स्थापना इस अधिनियम के अन्तर्गत गयी है।

2.  सक्षम सरकार तथा संबंधित अधिकारी DRA के साथ मिलकर निम्न कार्य करेंगे:

क)     जोखिम की स्थितियों में निःशक्त व्यक्तियों के संरक्षण, राहत, बचाव अथवा सुरक्षा से संबंधित विषयों पर शोध एवं विकास का कार्य हाथ में लेंगे,

ख)    जोखिम की स्थितियों में प्रभावी तरीके से समुचित प्रतिक्रिया कार्रवाई करने के लिए निःशक्त व्यक्तियों को सक्षम अधिकारियों द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जायगा,

ग)     निःशक्त व्यक्तियों को संभालने वाले कर्मचारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जायगा ताकि जोखिम की स्थितियों में उन्हें प्रभावी सहायता देने वाले बनाया जा सके तथा उन्हे निःशक्त व्यक्तियों की जरूरतों तथा आवश्यकताओं से परिचित कराया जा सके।

स्वतंत्रता का अधिकार

1.  किसी भी निःशक्त व्यक्ति को बिना अधिष्ठापित वैधानिक कार्रवाई के उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नही किया जा सकता।

2.  कानून द्वारा अधिष्ठापित ऐसी न्यायपूर्ण, पक्षपातरहित तथा तर्क संगत होनी चाहिए और मनमाना निर्णय नहीं होना चाहिए।

3.  निःशक्त के आधार पर किसी व्यक्ति को उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता के वंचित नहीं किया जा सकता।

4.  निःशक्तताग्रशित सभी व्यक्ति –

क)     व्यक्तिगत स्वतंत्रता तथा सुरक्षा का उपयोग दूसरों के साथ समानता के आधार पर करेंगे।

ख)    यदि निःशक्त व्यक्तियों को उनकी स्वतंत्रता से किसी प्रक्रिया के तहत वंचित किया जाना है, उन्हें उपयुक्त निवास तथा उन सभी गारंटियां को पाने का अधिकार होगा जो ऐसी परिस्थितियों में उनकी स्वतंत्रता के अधिकार तथा प्रभावपूर्ण व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक होंगे।

5.  निःशक्त व्यक्तियों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार में सम्मिलित है-

क)     स्वतंत्रता पर प्रतिबंध अथवा (अधिकार) पर अतिक्रमण, भले ही ये प्रतिबंध अथवा अतिक्रमण प्रत्यक्ष लागू की गयी हों या अप्रत्यक्ष रुप में उठी हों,

6.  निःशक्त व्यक्तियों को गैर-धमकी, गैर-प्रतिबंधित तथा सहयोगात्मक वातावरण का अधिकार है जो उनके स्थल, सुरक्षा तथा संरक्षण की भावना का पूरा सम्मन करते हों।

7.  इस धारा की उप-धारा (3) तथा (4) में दी गयी स्वतंत्रता की गारंटी को संरक्षित तथा प्रोन्नत करने के लिए DRA सक्षम सरकारी तथा गैर सरकारी सहभागियों के साथ कार्यक्रम की लांचींग के साथ-साथ:-

क) शान्ति, प्रेम, अहिंसा तथा मतभेद और स्कूलों में विविधता के मूल्यों को प्रोन्नत करना,

ख) सुरक्षापूर्ण आश्रय, परिवार में संधर्ष तथा हिंसा की स्थिति को शान्त करने के लिए सभी अवसरों पर राहत पाने के लिए स्थान उपलब्ध है,

ग) मतभेद के महत्व को समझा जाय और “विविधता से निपटने के लिए नेताओं को ऐसा प्रशिक्षण दिया जाय कि संघर्ष की स्थिति को विचार-विमर्श तथा मध्यस्थता द्वारा समुदाय के बीच एवं परिवार के अंदर ही सुलझा लिया जाय ताकि सभी निःशक्त व्यक्तियों विशेषकर महिलाओं, बच्चों और वयोवृद्ध की स्वतंत्रता की रक्षा हो सके।

न्याय प्राप्ति

1.  निःशक्तताग्रसित सभी व्यक्तियों अथवा निःशक्तों के अधिकार के क्षेत्र में कार्यरत संगठन को अधिकार प्राप्त है कि वे किसी न्यायालय, ट्रिव्यूनल, कोई प्राधिकरण, आयोग, अथवा विवादों पर निर्णय देने के लिए अधिकृत किसी अन्य निकाय के पास जा सकते है ताकि किसी अवैधानिक अथवा मनमाना हस्तक्षेप के विरुद्ध अपने हक के लिए दबाब बनाने अथवा वर्तमान में जारी इस अधिनियम किसी अन्य कानून के अन्तर्गत उन्हें दिए गए अधिकार की गारंटी का उपयोग दिलाया जा सके।

2.  निःशक्तताग्रसित सभी व्यक्तियों को वैधानिक कार्रवाई आरंभ करने का अधिकार प्राप्त होगा ताकि उनके अधिकारों का बचाव अथवा क्रियान्वय किया जा सके अथवा बतौर एक एडवोकेट, गवाह, अथवा विशेषज्ञ अथवा ‘न्याय-मित्र’ विवाद पर किसी न्यायालय, ट्रिव्यूनल, आयोग, प्राधिकरण अथवा अन्य कोई निकाय जिसे निःशक्त व्यक्तियों के अधिकार को प्रभावित करने वाले विवादों में, फैसला लेने का अधिकार को प्राप्त हो- को न्याय-निर्णय लेने में सहायता दे सकते हैं।

3.  प्रत्येक निःशक्त व्यक्ति को संचार के किसी माध्यम का उपयोग करने का अधिकार होगा जिसे ऐसा व्यक्ति उपर्युक्त वैधानिक कार्रवाई के लिए समुचित अथवा उपर्युक्त समझता है,

4.  उप-धारा (3) के अन्तर्गत सभी संचार Code of criminal Provedure (Avt. No 8 of 1908 तथा Indian Evidence Act (No. 1 of 1872) के प्रयोजन हेतु मौखिक संचार का उपयोग हुआ माना जायगा।

5.  किसी निःशक्तताग्रसित व्यक्ति धारा(2) के अन्तर्गत कार्य के निष्पादन पर व्यक्तियों की केवल निःशक्तता के आधार पर प्रश्न नहीं उठाए जाएंगे। निःशक्तताग्रसित व्यक्ति के साक्ष्य, मत अथवा तर्क के आधार पर अन्य के साथ समानता के आधार पर मूल्यांकन किया जायगा और केवल इस तथ्य पर रद्द, डिसमिस अथवा अनादर नहीं किया जायगा कि ऐसे कथन, मत या तर्क देने वाला व्यक्ति निःशक्तताग्रसित है।

6.  निःशक्तताग्रसित प्रत्येक व्यक्ति को किसी राष्ट्रीय वैधानिक सेवा प्राधिकरण तथा अपेक्षित राज्त्य के (राज्य वैधानिक सेवा प्राधिकरण)(The National Legal Services Authority & the State Legal Services Authority of the respective state) द्वारा सृजित किसी योजना कार्यक्रम, सुविधा अथवा सेवा पाने का अधिकार होगा।

7.  राज्य वैधानिक सेवा प्राधिकरण तथा सभी राज्यों के राज्य राज्य वैधानिक सेवा प्राधिकरण ऐसी योजनाओं, कार्यविधि, सुविधा, सहयोग सिस्टम और व्यवस्था का निर्माण करेंगे ताकि निःशक्त व्यक्तियों को अपने अधिकार का उपयोग इस धारा की उप-धारा (1), (2) तथा (3) के अन्तर्गत कर सकें।

8.  राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए सभी उपाय करेगी कि निःशक्त व्यक्तियों के लिए सभी पुलिस स्टेशन थाना “पहुंच योग्य” हो तथा यह कि निःशक्त व्यक्तियों को F.I.R अपनी उपस्थिति देने अथवा वक्तव्य दर्ज करवाने के लिए आवश्यक उपकरण सहयोग अथवा व्यवस्था उपलब्ध हो।

8.वैधानिक सेवा प्राधिकरण, बार काउन्सील ऑफ इंडिया, सभी राज्य की बार काउन्सीलें तथा सभी न्यायालयों के बार संघ एवं संरचना के लिए जिम्मेवार अधिकारी सभी न्यायालयों तक सभी निःशक्तताग्रसित व्यक्तियों को पहुंचाने योग्य बनाने के लिए कार्रवाई करेंगे।

9.  उप-धारा (9) में उल्लेखित संगठन, अधिकारी तथा संस्थान आवश्यक कदम उठाएंगे:

क) यह सुनिश्चित करने के लिए कि न्यायालय के सभी दस्तावेज प्राप्ति प्रारूप में हो,

ख) यह सुनिश्चित करने के लिए कि फाइलींग विभाग, निबंधन अथवा कोई अन्य कार्यालय अथवा रिर्कार्ड आवश्यक उपकरणों से लैस हो ताकि फाइलींग भंडारण एवं दस्तावेजों तथा अन्य प्रमाण को देखने के लिए पहुंच योग्य प्रारूप उपलब्ध हों।

ग)  निःशक्त व्यक्तियों द्वारा उनकी मनपसंद भाषा तथा संचार के माध्यम द्वारा प्रमाण, तर्क, अथवा अभिमत को दर्ज करने के लिए सुविधाएं तथा उपकरण एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाए।

10. सभी न्यायिक एकादेमी, पुलिस एकादिमी तथा कार पदाधिकारियों के लिए ट्रेनिंग संगठन तथा वैधानिक सेवा प्राधिकरणों को निःशक्तता अधिकार पर ट्रेनिंग को उनके प्रवेश तथा लगातार जारी कार्यक्रमों का अनिवार्य अंग बनाया जाय।

सम्पूर्णता का अधिकार

1.  विकलांगताग्रसित व्यक्तियों को विकलांग व्यक्ति के रुप में अपनी पहचान के सम्मान तथा ऐसे व्यक्ति की तरह सुरक्षापूर्वक कार्य सम्पन्न करने का अधिकार है।

2.  प्रत्येक विकलांग व्यक्ति को अपने शारीरिक तथा मानसिक पूर्णता का दूसरों के साथ समानता के आधार पर सम्मान पाने का अधिकार है।

3.  सम्पूर्णता के अधिकार में स्वयं की प्रतिष्ठा का अधिकार तथा समाज में इसकी सराहना सम्मिलित है तथा ऐसे सम्बोधन जो विकलांग व्यक्ति की विकृत की पहचान है दृष्टि से करे उनका परित्याग करें और सम्मानपूर्वक संबोघन का व्यवहार करें।

उदाहरण के तौर पर पहचान का निम्नीकरण तब होता है जब किसी विकलांगताग्रसित व्यक्ति को गाली से संबोधित किया जाता है, विशेष शब्द का प्रयोग किया जाता है, उसके वजूद को नकारा जाता है अथवा किसी कृपापूर्ण तरीके से संबोधित किया जाता है।

4.  इस अधिकार के सम्मान को विकलांग व्यक्ति के निवास की व्यवस्था से किसी भी तरीके से प्रभावित नहीं होने दिया जाना चाहिए। आवासहीन विकलांग व्यक्ति तथा संस्थान में रहने वाले विकलांग व्यक्तियों का दूसरों के साथ समानता के आधार पर सम्मान होना चाहिए।

हिंसा, दुर्व्यवहार तथा उत्पीड़न से संरक्षण का अधिकार

1.  इस अध्याय में,

क)     “हिंसा” का अर्थ यों ही अथवा बिना कारण ऐसे कृत्य अथवा ऐसे कृत्य की धमकी की किसी विकलांग व्यक्ति पर अथवा उसकी सम्पत्ति को हानि, चोट बर्बाद करने, क्षतिग्रस्त करने अथवा उन्हें अपमानित करने के उद्देश्य से किए जाय या कोई कृत्य अथवा निम्न गलती सहित,

i) जो पीड़ित व्यक्ति के स्वास्थ्य, सुरक्षा, जीवन, अंग अथवा मानसिक या शारीरिक कुशलताओं को हानि या क्षति पहुंचाए अथवा ऐसा करने की मंशा हो,

ii) पीड़ित व्यक्ति या उससे संबंधित किसी अन्य व्यक्ति को बाध्य करने के उद्देश्य से जो तंग करे हानि पहुंचाए, चोट अथवा खतरों में डाले ताकि गैर कानूनी मांगों की पूर्ति हो,

iii) जो पीड़ित व्यक्ति को किसी संस्थान में डालें, किसी हस्तक्षेप, निषेधाज्ञा, अथवा बिजली या रेडिएशन अथवा रासायनिक या कोई अन्य तकनीक से चिकित्सा के लिए विवश करें,

iv) पीड़ित की (क), (ख) और (ग) में उल्लेखित आचरण से भयभीत करें।

ख) दुर्व्यवहार का अर्थ है किसी मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक तथा सामाजिक दुर्व्यवहार जिसका परिणाम गंभीर भावनात्मक, मानसिक, शारीरिक, और / अथवा यौन जनित चोट, सहित शारीरिक, यौन मौखिक अथवा भावनात्मक दुर्व्यवहार तथा आर्थिक दुर्व्यवहार जिनका अर्थ निम्न प्रकार से होगा:

i) “शारीरिक दुर्व्यवहार” का अर्थ कोई ऐसा कृत्य या आचरण है जिसकी प्रकृति शारीरिक कष्ट, हानि, जीवन का खतरा, अंग अथवा स्वास्थ्य अथवा पीड़ित व्यक्ति के स्वास्थ्य को विकृत करने के साथ हमला करना, आपराधिक धमकी और आपराधिक बल का प्रयोग इनमें सम्मिलित हैं-किसी अवांछित स्थान पर ले जाना, और अनिच्छापूर्वक कुछ देखने, अनुभव करने, खाने, पीने अथवा सूंधने के लिए किसी विकलांग व्यक्ति को विवश करना।

ii) यौन दुर्व्यवहार में ऐसे आचरण है जिनकी संबंध यौन प्रवृति से दुर्व्यवहार, अपमानित, नीचा दिखाना अथवा पीड़ित के सम्मान का उल्लंधन करना है।

iii) मौखिक और भावनात्मक दुर्व्यवहार में, अपमानित करना, गाली देना, विकलांगता के आधार पर प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रुप से किसी विकलांगताग्रसित व्यक्ति को अपमानित करना सम्मिलित है।

iv) “आर्थिक दुर्व्यवहार” में सम्मिलित है किसी विकलांगताग्रसित व्यक्ति को सभी अथवा पर्याप्त रुप से आर्थिक अथवा वित्तीय संसाधनों से वंचित करना, अथवा संसाधनों और सुविधाओं की किसी उपलब्धि से प्रतिबंधित अथवा इस प्रकार वंचित करना कि पीड़ित के लिए सम्मानपूर्वक जीवनयात्रा करना अवास्तविक हो जाता है।

v) “दुर्व्यवहार” में यह भी सम्मिलित है किसी विकलांगताग्रसित व्यक्ति ने जिस की मांग की थी जिसके तर्क संगत रुप से यह समझा जा सकता है कि उसकी मांग की गयी होगी,-जिसे पाने से विकलांग को वंचित रखा गया अथवा आवश्यक सहायता को अप्राप्य (मांग पूरी होने में सहायता को) रखा गया, और किसी अनावश्यक प्रभाव दबाव देकर अथवा किसी विकलांग व्यक्ति को इच्छापूर्वक बहकावे में रखा गया ताकि वह ऐसे कार्य करे अथवा नहीं करे जिन्हें सामान्य अवस्था में वह नही करता।

vi) “उत्पीड़न” का अर्थ किसी ऐसे कार्य से है जिसका उद्देश्य एवं प्रभाव पीड़ित की किसी प्रतिबंधन का नाजायज लाभ उठाना है। किसी व्यक्ति का पीड़ित के साथ चाहे व्यक्तिगत, पेशेवर अथवा न्यास-संबंधी अथवा किसी अन्य प्रकार से शोषण हो, जिस पर पीड़ित भरोसा तथा विश्वास करता हो वह उत्पीड़न का दोषी होगा यदि वह व्यक्ति जानबूझ कर धोखा देकर, धमका कर, पीड़ित व्यक्ति की निधि, परिसम्पत्तियों अथवा जायदाद का स्थायी अथवा अस्थायी उपयोग अथवा उपभोग का प्रयास करता है अथवा विकलांग व्यक्ति को उसकी निधि, परिसम्पत्ति, अथवा जायदाद, अथवा लाभ से वंचित करता है, अथवा पीड़ित को छोड़कर किसी अन्य व्यक्तियों को उसकी (पीड़ित) वैध सहमति के बिना लाभ पहुंचाता है।

व्याख्या:

कोई भी ऐसा कार्य जिसे स्वेच्छापूर्वक, असावधानी से, लापरवाही के साथ, विद्धेशपूर्वक अथवा इसके परिणाम से अवगत रहते हुए विकलांग व्यक्तियों को खतरे में डालता हो, अथवा गलत तरीके से उसे चोट पहुंचाने, खतरा अथवा उपरोक्त व्याख्या में जिन्हें विशेष रुप से सम्मिलित नहीं किया गया – विकलांग व्यक्ति का उत्पीड़न माना जायगा।

उत्पीड़न, दुर्व्यवहार और हिंसा से संरक्षण

1.  प्रत्येक विकलांग व्यक्ति को सभी प्रकार के उत्पीड़न, दुर्व्यवहार तथा हिंसा सहित शारीरिक, मानसिक यौन और भावनात्मक उत्पीड़न से ऐसे व्यक्ति को सभी प्रकार के उत्पीड़न से संरक्षण पाने का अधिकार सभी स्थितियों, सभी स्थानों, घर, देख-रेख केन्द्रों, शिक्षण संस्थानों, संस्थानों, कार्यस्थलों, तथा अन्य किसी भी स्थान पर होगा जहां विकलांगताग्रसित व्यक्ति स्थायी अथवा अस्थायी तौर पर निवास करते है, सह-निवास करते है, निवास के लिए उपयोग करते है और अन्य किसी भी तरीके से निवास करते है।

2.  केन्द्र तथा राज्य सरकार समुचित प्रशासनिक, सामाजिक, शैक्षणिक तथा अन्य विकलांगों को घर के अन्दर और बाहर दोनों में ही सभी प्रकार के उत्पीड़न, हिंसा, दुर्व्यवहार से संरक्षण देंगे और यह भी ध्यान रखेंगे कि विकलांगताग्रसित व्यक्तियों को एक से अधिक कारणों से जैसे लिंग, धर्म, जाति, यौन उन्मुखीकरण के आधार पर भी विकलांगता के साथ भेदभाव का सामना करना पड़ सकता है।

3.  विकलांग व्यक्ति के साथ कार्य कर रहे किसी संगठन अथवा व्यक्ति जिसे ऐसा आभास हो कि किसी विकलांग व्यक्ति के विरुद्ध उत्पीड़न, हिंसा तथा दुर्व्यवहार किया गया है, अथवा किया जा रहा है अथवा किए जाने की संभावना है, इसकी सूचना पुलिस अधिकारी, मैजिस्ट्रेट जिसकी सीमा क्षेत्र में घटना घटित हुई हो या घटित होने की संभावना है, अथवा राज्य विकलांगता न्यायालय को इसे रोकने के लिए सूचना दें तथा इसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाय तथा यदि घटना घटित नहीं हुई हो तो इसे घटित होने से रोका जाय।

4.  उप-धारा (3) के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु भरोसे के साथ सूचना उपलब्ध करवाने वाले व्यक्ति पर कोई सिविल अथवा आपराधिक आरोप नहीं लगाया जायगा,

i) कोई भी विकलांग व्यक्ति जिसे किसी प्रकार के उत्पीड़न, हिंसा अथवा दुर्व्यवहार को झेलना पड़ा हो अथवा ऐसा समझने का कारण हो (कि उसे झेलना पड़ेगा), ऐसी अवस्था में वह राज्य विकलांगता न्यायालय से संरक्षण हेतु आवेदन कर सकता है।

ii) राज्य विकलांगता न्यायालय इस पर संतुष्ट होने के पश्चात उत्पीड़न, हिंसा अथवा दुर्व्यवहार का कृत्य हुआ है, अथवा हो रहा है तथा यदि रोका नहीं गया तो ऐसी संभावना है किसी विकलांग व्यक्ति के विरुद्ध यह होगा – ऐसी स्थिति में आवश्यक आदेश देंगे, अथवा ऐसे निर्देश देंगे कि विकलांग उप-धारा (3) के अन्तर्गत प्राप्त सूचना अथवा उप-धारा (5) के अन्तर्गत प्राप्त आवेदन के आधार पर व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जाय।

5.  राज्य विकलांगता न्यायालय आयोग यदि इससे संतुष्ट होता है कि संदेहास्पद कार्य किया गया है अथवा वास्तव में किया जा रहा है, अपनी जानकारी और कारणों को दर्ज करने के बाद निम्न सहित आदेश पारित कर सकता हैं:

क) किसी विकलांग व्यक्ति के साथ उत्पीड़न हिंसा अथवा दुर्व्यवहार का कारण बनने वाले किसी व्यक्ति को पुलिस में भेजकर समुचित आपराधिक कार्रवाई ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध आरंभ करे।

ख) यदि ऐसा व्यक्ति सामान्य आदमी नहीं हो, तो ऐसे कृत्रिम व्यक्ति को पुलिस गिरफ्तार कर आपराधिक कार्रवाई आरंभ कर सकती है।

ग) यह कम्पनी अधिनियम के अन्तर्गत कोई कम्पनी हो, यह कम्पनी के रजिस्ट्रार को कम्पनी अधिनियम के अन्तर्गत आरोपित कम्पनी के विरुद्ध कार्रवाई आरंभ करने की अनुशंसा कर सकता है।

घ) पुलिस अथवा निःशक्तग्रसित किसी व्यक्ति के साथ कार्यरत अन्य किसी विश्वसनीय संगठन को संरक्षण प्रदान करना अथवा ऐसे व्यक्ति की पुनर्वास की व्यवस्था अथवा दोनों के लिए पीड़ित को बचाने के लिए आदेश पारित करना।

ङ) यदि निःशक्त व्यक्ति ऐसा चाहता है तब निःशक्त व्यक्ति को संरक्षण देने हेतु आदेश निर्गत करना ताकि सुरक्षित रखने के लिए प्रावधान हो सके।

च) धारा (क) से (घ) तक (दोनों सहित) में उल्लेखित उपायों के अतिरिक्त वे अपराधी व्यक्ति अथवा संगठन अथवा कम्पनी से आर्थिक मुआवजा ऐसे व्यक्ति के रखरखाव के लिए मांगा सकते हैं।

छ) उपरोक्त में से एक या एक से अधिक का संयोग भी हो सकता है।

6.  राज्य विकलांगता न्यायालय अपने निर्णय के अनुसार निःशक्त व्यक्ति के साथ उत्पीड़न, हिंसा अथवा दुर्व्यवहार के लिए आरोपित व्यक्ति की उपस्थिति में इसके कथन को दर्ज करेंगे, अथवा उप-धारा (6) के अन्तर्गत कोई आदेश निर्गत करने के दौरान सजा के लिए नरम रुख अख्तियार करेंगे।

7.  कोई पुलिस अधिकारी, राज्य विकलांगता न्यायालय अथवा मैजिस्ट्रेट जिसने किसी निःशक्त व्यक्ति के साथ उत्पीड़न, हिंसा अथवा दुर्व्यवहार की शिकायत प्राप्त की है, अन्यथा उस घटना स्थल पर उपस्थित रहा हो अथवा जब ऐसी घटना की उसे रिपोर्ट दी गयी है, पीड़ित व्यक्ति को वह सूचित करेगा:

क) निःशक्तता अधिकार आयोग की उप-धारा (5) के अन्तर्गत संरक्षण प्राप्त करने के लिए आवेदन दिया जा सकता है,

ख) निःशक्तताग्रसित व्यक्ति जिन्हें उत्पीड़न, हिंसा तथा दुर्व्यवहार से गुजरना पडा हो, के पुनर्वास हेतु कार्यरत निकटतम संगठन (नों) अथवा संस्थान (नों) से सम्पर्क के संबंध में,

ग) शिकायतकर्ता को इस अधिनियम के अन्तर्गत सहायता कर सकने वाले निकटतम कार्यालय (यों) से सम्पर्क कर सकना,

घ) निःशक्त व्यक्ति की सुविधा के लिए लीगल सर्विसेस अर्थारिटि एक्ट, 1987 (39 of 1987) के अन्तर्गत अथवा नेशनल लीगल सर्विसेस अर्थारिटि अथवा स्टेट लीगल सर्विसेस अर्थारिटि के अन्तर्गत वैधानिक सेवा निःशुल्क प्राप्त करने के उसके अधिकार के बारे में।

ङ) भारतीय दंड संहिता (IPC) के प्रावधानों के अन्तर्गत शिकायत दर्ज करवाने के उसके अधिकार के बारे में।

बशर्ते कि इस अधिनियम का ऐसा कोई भी अर्थ नहीं समझा जायगा जो संज्ञान अपराध की सूचना मिलने पर किसी पुलिस अधिकारी को विधि के अनुसार कार्य करने से किसी भी प्रकार से उसे छुटकारा दे।

8.  निःशक्तता अधिकार प्राधिकारण जन साधारण को उन तरीकों तथा उपायों की जानकारी देने का उपक्रम करेगा जिनके द्वारा निःशक्तताग्रसित व्यक्ति को उत्पीड़न, हिंसा तथा दुर्व्यवहार से गुजरना पड़ता है, साथ ही उन्हें लिंग और आयु के आधार पर पक्ष एवं ऐसे कृत्यों के लिए जुर्माना के बारे में बताया जायगा।

9.  निःशक्त अधिकार प्राधिकरण सुनिश्चित करेंगे कि सभी प्रकार के उत्पीड़न, हिंसा तथा दुर्व्यवहारों की रोकथाम हेतु उपाय करेंगे साथ ही ये भी सुनिश्चित करेंगे कि उपयुक्त तरीकों से लिंग तथा आयु का संज्ञान लेते हुए निःशक्त व्यक्तियों तथा उनके परिवार तथा देखरेख सेवा देने वाले को सहायता प्रदान की जाय, जिसके साथ उन्हें सूचना तथा शिक्षा संबंधी जानकारी दी गयी है जिसके साथ सूचनाएं तथा शिक्षण तथा निम्न पर जागरुकता लाई जाय:

क)     उत्पीड़न, हिंसा और दुर्व्यवहार की घटनाओं की पहचान करना,

ख)    ऐसी घटनाओं के विरोध में उपलब्ध कानूनी समाधान,

ग)     ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए की जाने वाली कार्रवाई के सम्बन्ध में

घ)     ऐसी घटनाओं के संबंध में रियोर्ट लिखवाने के लिए कार्रवाई के संबंध में,

10. निःशक्तता अधिकार प्राधिकरण लिंग और आयु के प्रति संवेदनशील सहयोग तथा प्रबंधन के विकास हेतु सभी उपाय करेंगे ताकि विधि सम्मत सुधार की प्राप्त हो, किसी पदाधिकारी, संगठन, पुलिस अफसर सहित अधिकारी से सम्पर्क करें जब कभी भी कोई व्यक्ति जिसे गवाह के समक्ष प्रस्तुत होना है अथवा हिंसा, उत्पीड़न अथवा दुर्व्यवहार की आकांक्षा हो, तथा वे सभी सूचनाएं जिन्हें उप-धारा (ii) में उल्लिखित किया गया है।

11. केन्द्र तथा राज्य सरकार निःशक्तता अधिकार के क्षेत्र में कार्यरत संगठनों के साथ निःशक्त व्यक्तियों के शारीरिक, संज्ञानता एवं मनोः चिकित्सा द्वारा ठीक होने, पुनर्वास करने तथा समाज में फिर से सम्मिलित होने के लिए समुचित कार्रवाई को पीड़ितों के लिए प्रोन्नत करेंगे जिन्हें उत्पीड़न, हिंसा अथवा दुर्व्यवहार सहित संरक्षण सेवाओं के प्रावधानों के माध्यम से किसी भी रुप में पीड़ित होना पडा था। ऐसा स्वास्थ्य लाभ, पुनर्वास तथा पुनर्मिलन ऐसे वातावरण में होगा जो व्यक्ति के स्वास्थ्य, कल्याण, आत्म-सम्मान, प्रतिष्ठान तथा स्वायत्तता के प्रति लिंग तथा आयु के संदर्भ में आवश्यकता पर ध्यान रखते हुए किया जाता है।

निजता का अधिकार

1.  किसी भी निःशक्त व्यक्ति को उसकी निजता, परिवार, घर अथवा पत्राचार अथवा अन्य किसी प्रकार के संचार अथवा उसके सम्मान तथा प्रतिष्ठा पर मनमाने तथा अवैधानिक आक्रमण का शिकार नहीं होना चाहिए।

2.  निःशक्त व्यक्तियों को ऐसे हस्तक्षेप अथवा आक्रमण से विधि सम्मत संरक्षण का अधिकार प्राप्त है।

3.  ऐसे संरक्षण सभी स्थलों सहित अन्य के साथ आवास, संस्थान अथवा अन्य किसी प्रकार के रहने की व्यवस्था सम्मिलित होगी तथा उन सभी क्षेत्रों तक विस्तारित होगी जिसमें सम्मिलित होंगे मीडिया, रोजगार तथा स्वास्थ्य सेवाएं।

व्याख्या:

निजता में सभी को सम्मिलित करने के अर्थ में लिया जायगा तथा इसमें सूचना को गोपनीयता (किसी की सूचना पर नियंत्रण का अधिकार), निर्णय लेने की गोपनीयता (अपना निर्णय स्वयं करने का अधिकार), शारीरिक /भौतिक गोपनीयता, संचार की गोपनीयता तथा यौन गोपनीयता सम्मिलित समझें जाएंगे।

4.  सक्षम सरकार तथा निःशक्तता अधिकार प्राधिकारण यह सुनिश्चित करेंगे कि निःशक्त व्यक्तियों के व्यक्तिगत स्वास्थ्य तथा पुनर्वास संबंधी सूचनाओं का अन्य के साथ समानता के आधार पर संरक्षण हो।

5.  सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के परिभाषा के अनुरूप सभी सार्वजनिक प्राधिकरण इस अधिनियम के अन्तर्गत स्थापित निःशक्तता अधिकार प्राधिकरण के सहयोग से ऐसे आचरण संहिता का निर्माण करेंगे जो लिंग के प्रति संवेदनशील हों तथा विभिन्न क्षेत्रों में निःशक्तताग्रसित व्यक्तियों को निजता के संरक्षण हेतु मार्गदर्शन दे सकें। संबंधित प्राधिकरण मार्गदर्शन का निर्माण करते समय निम्नलिखित प्रासंगिक (विषयों पर) पर विचार करेंगे:

क)     निजता की जरुरतों पर ध्यान देने के दौरान अकेले रहने की आवश्यकता तथा सहयता की आवश्यकता के संतुलन की जरुरत पर ध्यान रखेंगे,

ख)    रहने के लिए समुचित स्थान तथा आवश्यक सहयोग निजता की व्यक्तिगत आवश्यकताओं का एक तथ्य होना चाहिए,

ग)     गोपनीयता तथा प्रगटीकरण के संतुलन का निर्धारण निःशक्त व्यक्ति ही करेंगे।

उदाहरण:

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा मंत्रालय के अधीन अन्य संबंधित एजेन्सी विकलांगता अधिकार प्राधिकरण के साथ मिलकर एक आचार संहिता तथा मार्गदर्शन लेकर आएँगे ताकि सभी प्रकार की मीडिया (इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट,वेबसाइट अथवा कोई अन्य) विकलांग व्यक्ति के निजी जीवन, आवास, स्वास्थ्य तथा पत्राचार का सम्मान करें। मार्गदर्शन यह सुनिश्चित करेंगे कि मीडिया विकलांग व्यक्ति की सहमति के बिना कोई पूर्वाग्रही अथवा निन्दात्मक व्यक्तिगत जानकारी प्रकाशित नहीं करे।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, इससे संबंधित एजेन्सी तथा इसके अधीन कार्यरत स्वायत्त संस्थाएं जैसे डेन्टल काउंसील ऑफ इंडिया और “नर्सीग काउंसील ऑफ इंडिया” विकलांगता अधिकार प्राधिकारण के सहयोग से एक आचार संहिता मार्गदर्शन का निर्माण करें ताकि सभी मेडिकल और इससे संबंधित सूचनाओं का संरक्षण हो सके तथा ऐसी सूचनाओं का प्रगटीकरण विकलांग व्यक्ति की सहमति के बिना न हो सके।

नगरीय विकास मंत्रालय विकलांगता अधिकार प्राधिकरण के सहयोग से मार्गदर्शन, संहिता तथा भवन ‘बाई-लॉ’ द्वारा यह सुनिश्चित करें की व्यक्तिगत निजता का अधिकार, संचार में गोपनीयता तथा प्रत्येक निवासी का व्यक्तिगत रिकॉर्ड और सूचनाओं की गोपनीयता सभी आवासीय प्रतिष्ठापन चाहे वह आवास हो या संस्थान, बनाए रखें। इसे ऐसी कार्रवाई करनी चाहिए कि आवासीय विकल्प गैर-राजकीय भूमिका निभाने वालों द्वारा विकलांग व्यक्तियों की निजता का सम्मान सुनिश्चित करें।

व्यूरो ऑफ सीवील एविएशन विकलांगता अधिकार प्राधिकरण के सहयोग से विकलांग मार्गदर्शन का विकास करें ताकि उनकी भौतिक गोपनीयता एवं शारीरिक शीलता पर कभी भी आंच नहीं आए तथा ग्राउंड स्टाफ को इसके अनुरूप समुचित प्रशिक्षण दिया जाय।

श्रम एवं नियोजन मंत्रालय विकलांगता अधिकार प्राधिकरण के सहयोग से उद्योग हेतु विकलांग व्यक्तियों की निजता तथा व्यक्तिगत सूचनाओं के संरक्षण (मेडिकल सूचनाओं सहित) के लिए मार्गदर्शन निर्धारित करें।

6.  किसी विकलांग व्यक्ति के संबंध में कोई भी सूचना केवल उन सूचनाओं को छोड़कर जिन्हें कानूनन जनसाधारण में प्रगट किया जाना है- को छोड़कर विकलांग व्यक्ति की बिना लिखित सहमति के सार्वजनिक क्षेत्र में नहीं रखे जाएंगे।

7.  किसी भी व्यक्ति को नियोजन पूर्व स्वास्थ्य जांच में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष विकलांगता के आधार पर भेदभाव नहीं किया जायगा।

वाणी, अभिव्यक्ति तथा सूचनाओं की स्वतंत्रता

1.  मतों की बहुलता तथा विचारों में विविधता को प्रोन्नत करने के उद्देश्य से विकलांग व्यक्तियों को वाणी की स्वतंत्रता तथा दूसरों के साथ समानता के आधार अभिव्यक्ति का अधिकार प्राप्त होगा।

2.  किसी विकलांग व्यक्ति के साथ कोई भी सेन्सरशीप अथवा विचार, वाणी, अभिव्यक्ति और संचार को सीमित करने की प्रकिया भेदभाव तथा गैर अनुमति योग्य होगी।

3.  विकलांगताग्रसित व्यक्ति द्वारा विरोधी मत की अभिव्यक्ति को वैसा ही संवैधानिक सम्मान प्राप्त होगा जैसा कि अन्य विरोधी स्वरों को प्राप्त है तथा विकलांगों की विरोधी आवाज को दबाना भेदभाव होगा।

4.  घृणापूर्ण वाणी की अभिव्यक्ति इस अधिनियम की धारा 30L के अन्तर्गत एक दंडनीय अपराध होगा।

स्वतंत्रतापूर्वक तथा समुदाय में रहने का अधिकार

1.  विकलांगताग्रसित सभी व्यक्तियों को स्वतंत्रतापूर्वक तथा समुदाय में अन्य के साथ समानता के आधार पर रहने का अधिकार होगा ताकि वे प्रगति तथा विकास कर सकें और एक सार्थक जीवन व्यतीत कर सके,

2.  उप-धारा (1) में मान्यता प्राप्त अधिकारों की उपलब्धि हेतु सक्षम सरकार समुचित योजनाओं तथा कार्यक्रमों शुभारंभ करेगी जो विकलांग व्यक्तियों को अपनी इच्छानुसार किसी स्थान में या किसी विशेष तरीके से जीवनयापन उपलब्ध कराएगा-राज्य अथवा किसी अन्य इकाई द्वारा किसी विशेष व्यवस्था के अनुसार रहने के निर्देश या आदेश के बिना ऐसा होगा।

3.  सक्षम सरकार पर्याप्त रुप से स्वतंत्र तथा सामुदायिक आवास के वातावरण की स्थापना विकलांग व्यक्तियों की आयु तथा लिंग की आवश्यकता पर ध्यान रखते हुए, करेगी।

4.  ऐसे स्वतंत्रतापूर्वक जीवनयापन विकलांग व्यक्तियों को ऐसी सहायता उपलब्ध कराएगी जो उन्हें अन्य के साथ समानता के आधार पर उनकी आयु तथा लिंग की जरुरतों के आधार पर रहने के चयन का अनुमति प्रदान करेगा।

5.  सक्षम सरकार तथा विकलांगता अधिकार प्राधिकरण ऐसे सामुदायिक आवास वातावरण सुनिश्चित करेंगे जहां ऐसी सेवा सहायता तथा सिस्टम, तथा ऐसे प्रावधानों की प्राप्ति हेतु सहायक सेवा तथा सिस्टम हो, जो व्यक्ति के सामान्य समाज में समावेश तथा सहभागिता को बिना भेदभाव के उपलब्ध करवाए।

20.   घर और परिवार का अधिकार:

3.  वर्तमान में जारी कानून में किसी प्रावधान के बावजूद, प्रत्येक विकलांगताग्रसित व्यक्ति को अपनी पसंद के जोड़े वह स्वयं अथवा कन्या) के साथ विवाह करने का अधिकार होगा।

4.  धारा 1 के अन्तर्गत यदि निम्नलिखित शर्तों की पूर्ती हो तो कोई विवाह सम्पन्न हुआ माना जायगा।

i)  विवाह के समय किसी भी पक्ष का “जोड़ा” (पति या पत्नी) नही होना चाहिए,

ii) विवाह के समय वर को 21 वर्ष की तथा कन्या को 18 वर्ष आयु पूरा किया हुआ होना चाहिए,

iii) कि अन्य पक्ष को विकलांग व्यक्ति की विकलांगता के संबंध में जानकारी होनी चाहिए,

iv) दोनों ही पक्ष विवाह के लिए राजी हों,

5.i) धारा-1 के अन्तर्गत कोई विवाह अमान्य होगा यदि धारा 2 (i), 2(ii) तथा (iv) की शर्तो की पूर्ती विवाह के समय नहीं हुई हो।

ii)  धारा 1 के अन्तर्गत कोई विवाह अमान्य होगा यदि विवाह के समय धारा 2 (iii), की पूर्ति नहीं हुई हो।

  • बशर्ते कि धारा 1 के अन्तर्गत विवाह अमान्य अथवा नहीं मानने योग्य केवल इसलिए नहीं होगा कि जोड़े में से एक या दोनों ही व्यक्ति विकलांगताग्रसित थे।

6.i)  इस अधिनियम के अन्तर्गत समपन्न विवाह को, पति अथवा विधिवत समर्पित आवेदन पर मतभेद पर समझौता नहीं होने के आधार पर विवाह को भंग किया जा सकता है,

ii)  इस अधिनियम के अन्तर्गत सम्पन्न विवाह को, तलाक की डिग्री के आधार पर पति तथा पत्नी के संयुक्त आवेदन पर विधिवत प्रक्रिया के अनुरूप पक्षों की आपसी सहमति से भंग किया जा सकता है।

iii) वर्तमान में जारी कानून में किसी प्रावधान के बावजूद, विवाह के किसी भी पक्ष को तलाक की मंजूरी मात्र इसी आधार पर नहीं हो सकेगी कि अन्य पक्ष एक विकलांगताग्रसित व्यक्ति है।

 

7.i) जहां धारा 4 की उप-धारा (i) के अन्तर्गत सम्पत्तियों का बंटवारा निम्नलिखित आधार पर होगा।

क) पति तथा पत्नी सभी अचल सम्पति तथा पैसे जो उन्हें विवाह के पर्व प्राप्त हुए थे अपने पास रखेंगे,

ख) अचल सम्पत्ति, चल सम्पत्ति तथा पैसे जिन्हें उन्होंने विवाह सम्पन्न होने के बाद सम्पत्ति होने बाद अर्जित की थी। पति-पत्नी के बीच समानरुप से विकलांग व्यक्ति की विकलांगता संबंधी विशेष आवश्यकताओं पर विशेष विचार करते हुए बांटे जाएंगे।

8.i) जहाँ धारा A की उप-धारा (i) तथा (ii) के अन्तर्गत तलाक की डिग्री मिल हो, विवाह के कारण हुए किसी बच्चे संरक्षण के जिम्मेदारी ऐसे बच्चों के श्रेष्ठ हित के आधार पर निर्णीत होगा।  बशर्ते कि, पति-पत्नी में से किसी एक की केवल विकलांगता के आधार पर विवाह के कारण हुए बच्चे के संरक्षण के अधिकार से वंचित नही किया जायगा।

ii) ऐसे सभी मामलों में न्यायलय बच्चे की राय पर भी (यदि संभव हो तो) विचार करने का प्रयास करेगा।

9. विकलांगताग्रसित सभी व्यक्तियों को यह निर्णय लेने का अधिकार होगा कि-

क) उन्हें कितने बच्चे चाहिए।

ख) प्रत्येक बच्चे के (जन्म के) बीच की अवधि।

i)  सक्षम सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि विकलांगताग्रसित व्यक्तियों को परिवार एवं प्रजनन योजना के संबंध में जानकारी हो ताकि वे धारा 30H में उल्लेखित निर्णय ले सके।

10.i) विकलांग महिलाओं तथा बच्चों सहित सभी विकलांग व्यक्तियों को अपनी प्रजनन क्षमता रखने का अधिकार होगा।

ii) विकलांगग्रसित किसी की व्यक्ति को उनकी पूर्ण सहमति के बिना किसी ऐसे प्रक्रिया से नही गुजरना होगा जिसके कारण वे प्रजनन क्षमता रहित हो जाय या होने वाले हों।

  • बशर्ते कि, मेडिकल (चिकित्सा) की आवश्यकता के मामलों में ऐसे मेडिकल विधि को किसी अवयस्क पर उसके अभिभावक की सहमति से सम्पन्न किया जा सकता है,
  • बशर्ते और भी कि, ऐसी मेडिकल आवश्यकता की घोषणा कोई अहर्ता प्राप्त पेशेवर ही कर सकता है।

इस प्रावधान के किसी उल्लंधन पर धारा ....... के अन्तर्गत दंडित किया जायगा।

11. गार्जीयन एण्ड वार्ड्स एक्ट (No. 08 of 1890) के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक विकलांग व्यक्ति को अभिभावकता (गार्जीयनशीप) के आदेश हेतु आवेदन करने का अधिकार प्राप्त है।

  • बशर्ते, कि ऐसे आवेदन व्यक्ति की विकलांगता के आधार पर रद्द न कर दिया जाय।

12.क) वर्तमान में जारी कानून में किसी प्रावधान के बावजूद, सभी विकलांगताग्रसित व्यक्तियों के कोई बच्चा गोद लेने का अधिकार होगा यदि ऐसे गोद लेने से बच्चे के हित की अनदेखी ना हो।

ख) वर्तमान में जारी कानून में किसी प्रावधान के प्रतिकूल के प्रभाव के   बावजूद, सभी विकलांगताग्रसित व्यक्तियों को अपने बच्चे को गोद में देने (किसी अन्य को) का अधिकार होगा यदि ऐसे गोद में देने से बच्चे के हित में अनदेखी ना हो।

13.क) किसी भी विकलांगता बच्चे को उसके माता-पिता से तब तक अलग नहीं किया जा सकेगा जब तक कि कम से कम एक अभिभावक द्वारा ऐसे अलगाव की सहमति ना हो तथा ऐसे अलगाव को किसी सक्षम न्यायालय द्वारा बच्चे के हित में घोषित न कर दिया हो।

ख) किसी भी बच्चे को उसके अभिभावक से केवल उसकी विकलांगता के आधार पर अथवा माता-पिता दोनों या किसी एक की विकलांगता के आधार पर अलग नहीं किया जा सकेगा।

इस प्रावधान के किसी उल्लंधन पर धारा 30J के अन्तर्गत दंडित किया जायगा।

14. सक्षम सरकार विकलांग बच्चों तथा उनके परिवारों को सूचना, सेवाएं तथा सहयोग देने के कार्यक्रमों का शुभारंभ करेगी।

15. किसी भी विकलांगताग्रसित महिला को उसकी विकलांगता के आधार पर विवाह, परिवार, अभिभावकता तथा संबंध की स्थापना से वंचित नहीं किया जा सकेगा।

मत देने, चुनाव लड़ने तथा सार्वजनिक कार्यालय में कार्य करने का अधिकार

 

1.  जन प्रतिनिघित्व अधिनियम (Representation of People Act) (No.43 of 1950), जन प्रतिनिघित्व अधिनियम (No. 43 of 1951) अथवा वर्तमान में जारी कोई अन्य कानून में निहित होते हुए भी प्रत्येक विकलांग व्यक्ति जो 18 वर्ष से कम आयु का नहीं हो – को निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता के रुप में उस निर्वाचन क्षेत्र में रजिस्टर्ड होने का अधिकार होगा जहां का वह सामान्यतः निवासी है और उस निर्वाचन क्षेत्र में होने वाले सभी चुनाव में मत देने का (उसे) अधिकार होगा।

2.  वर्तमान में जारी कानून में किसी प्रावधान के प्रतिकूल प्रभाव के बावजूद, कोई भी विकलांग व्यक्ति व्यक्तिगत रुप से अपनी विकलांगता के कारण वोट देने के योग्य नही है अथवा चूंकि उसे मानसिक विकलांगता के कारण पूर्णरूप से अथवा मुख्यतः चिकित्सा पाने के लिए चुनाव के दौरान प्रवेश दिलाया गया है, उसे पोस्टल बैलेट अथवा अनुपस्थिति में मत देने का अधिकार होगा तथा जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (No.43 of 1951), के  नियम के अन्तर्गत इसका प्रावधान करना होगा।

3.  वर्तमान में जारी कानून में किसी प्रावधान के प्रतिकूल प्रभाव के बावजूद किसी भी विकलांगताग्रसित व्यक्ति को लोक सभा (House of People), राज्य के मंत्रिमंडल, किसी राज्य के विधान सभा तथा राज्य के विधान परिषद तथा स्थानीय प्रशासनिक संस्थानों में पूर्णतः विकलांगता के आधार पर प्रतिनिधि की तरह चुने जाने के अयोग्य ठहराया नहीं जा सकेगा।

4.1. चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करेगा कि सभी निर्वाचन केन्द्र विकलांगताग्रसित व्यक्तियों द्वारा ‘पहुंच’ योग्य है तथा चुनावी प्रक्रिया से संबंधित सामाग्रियां विकलांग व्यक्तियों द्वारा आसानी से समझने योग्य है।

2. उप-धारा (1), में निहित प्रावधानों की व्यापकता पर बिना प्रतिकूल प्रभाव डाले उस उपलब्ध-धारा को लागू करने हेतु चुनाव आयोग द्वारा किए गए उपायों में सम्मिलित होंगे,

i) सभी निर्वाचन केन्द्र में रैंप का निर्माण तथा उसकी उपलब्धता,

ii) सभी निर्वाचन केन्द्र में विकलांगों के लिए अलग लाईन की व्यवस्था,

iii) बैलॉट पेपर की उपलब्धि अथवा प्रत्याशी के सम्बन्ध में ब्रेल में सूचना सहित इलेक्ट्रॉनिक वोटींग मशीन,

iv) विकलांगताग्रसित व्यक्तियों की स्पेशल जरुरतों के प्रति चुनाव केन्द्र अधिकारियों को जानकारी प्रदान करने के लिए ट्रेनिंग कार्यक्रमों का संचालन।

3.  यदि चुनाव केन्द्र का प्रभारी अधिकारी इससे संतुष्ट है कि उसकी विकलांगता के कारण, कोई विकलांग व्यक्ति चुनाव चिन्ह को पहचानने में असमर्थ हो अथवा बिना सहायता के अपना मत दर्ज करवाने के अयोग्य हो, तब, प्रभारी अधिकारी मतदाता को अपने साथ एक साथी को मतदान स्थल तक मत दर्ज करवाने के लिए ले जाने की अनुमति प्रदान करेगा जिसकी आयु 18 वर्ष से कम ना हो।

4.  प्रत्येक विकलांगताग्रसित व्यक्ति को कोई संगठन अथवा संस्थान स्थापित करने अथवा अपनी इच्छानुसार उनका सदस्य बनने का अधिकार होगा।

विकलांगताग्रसित व्यक्तियों की परिभाषा और कार्यक्रमवद्ध अधिकार

 

1.  अधिनियम के इस भाग के लिए “विकलांगताग्रसित व्यक्ति” के कार्यक्रमवद्ध अधिकारों का अर्थ होगा – स्व-परायणता विस्तार की स्थितियां, नेत्रहीनता, प्रमस्तिष्कघात, श्रवण-नेत्रहीन, डिसलेक्सीया, कम-दिखाई देना, हेमोफीलीया, थैलीसीमीया, कुष्ठ रोग ग्रसित, श्रवण-विकृति, वाणी विकृति, सीखने की विशेष आयोग्यता, लोकोमोटर, विकृति, मानसिक बीमारी, क्रोनीक न्यूरो-लॉजीकल, स्थिति मानसिक मंदता, मांसपेशियों में डिस्ट्रॉफी, बहु स्लेरोसीस बहु-अशक्तता जिसके विविधि बाधाओं के साथ अन्तःक्रिया के कारण समाज में पूर्ण एवं प्रभावी, अन्य के साथ समानता के आधार पर सहभागिता करने में रोक लगे,

बशर्ते कि केन्द्र सरकार अध्यादेश के माध्यम से अन्य किसी विकृति को उपरोक्त सूची में इस उद्देश्य से गठित विशेषज्ञ कमिटि की अनुशंसा पर विषय तथा अनुभवी विशेषज्ञों के प्रत्येक 5 वर्षो की समीक्षा के माध्यम से समान प्रतिनिधित्व के आधार पर सम्मिलित न कर लें,

2.  इस अधिनियम के क्रियान्वित होने के बाद, केन्द्र सरकार एक विशेषज्ञ समूह का गठन करेगी अनुभवी विशेषज्ञों के प्रतिनिधित्व में ताकि एक उपयुक्त सामाजिक-मेडिकल पैमाने का निर्घारण विकलांग व्यक्तियों की पहचान के लिए हो जो इस भाग में निहित विशेष गारंटी प्राप्त अधिकारों का दावा कर सके। विशेषज्ञ समुह की नियुक्त तथा इसके रिपोर्ट के समर्पण को इस प्रकार नियोजित किया जाना चाहिए कि अधिनियम के लागू होने के साथ सामाजिक-मेडिकल पैमाना उपलब्ध हो,

3.  इस विशेष अधिकार के निर्माण में, सक्षम सरकार विकृति कि गंभीरता को उपयुक्त महत्व देंगे तथा व्यक्ति द्वारा अनुभव की जा रही विशिष्ट विकृति के पैमाने का निर्धारण किया जा सके।

4.  सक्षम सरकार प्रत्येक पंचायत, नगरपालिका, अधिसूचित समिति, विकलांगता प्रमाणपत्र निर्गत करने के अधिकार सहित होगे जो निर्धारित कार्यविधि के अनुरूप हो।

5.  निर्धारित कार्यविधि इस प्रकार निर्मित होगी कि विकलांगताग्रसित व्यक्ति को प्रमाणपत्र मिलने में सुविधा हो। विकृति की प्रकृति पर प्रमाणपत्र की अवधि ज्ञात की जायेगी।

6.  उपरोक्त उप-धारा में उल्लेखित मानक तथा कार्यविधियां किसी भी अवस्था में विकलांग व्यक्ति द्वारा विकलांग व्यक्ति अधिनियम, 1995 के अन्तर्गत प्राप्त किए गए प्रमाणपत्र की वैधता पर प्रभाव नहीं डालेंगे।

शिक्षा का अधिकार

23A. परिभाषा

1.  इस अध्याय में, जब तक कि प्रसंग की कोई अन्य आवश्यकता ना हो,

क)  “कैपिटेशन शुल्क” का अर्थ होगा एक प्रकार का अनुदान अथवा शुल्क यह स्कूल द्वारा अधिसूचित शुल्क से भिन्न होता है।

ख)  “बच्चे” का अर्थ होगा 18 वर्ष से कम आयु का कोई विकलांग बच्चा।

ग) ‘गार्जीयन’ (अभिभावक) का अर्थ है, कोई व्यक्ति जिसे किसी बच्चे की देखरेख तथा संरक्षण का कार्य मिला हुआ है, इसमें प्राकृतिक अभिभावक, किसी न्यायालय द्वारा नियुक्त अभिभावक अथवा कोई विधान हो सकता है,

घ) पड़ोस का स्कूल  कोई ऐसा शिक्षण संस्थान है जहां एक किलोमीटर के क्षेत्र में प्राइमरी शिक्षा तथा तीन किलोमीटर के क्षेत्र में सेकेंडेरी शिक्षा का प्रावधान हो और जहां विकलांगताग्रसित बच्चों को समुचित शिक्षा देने की व्यवस्था हो तथा इसमें ऐसे स्कूल भी सम्मिलित होंगे जो विशेषतः अथवा प्रमुख रुप से विकलांग बच्चों की आवश्यकताओं पर ध्यान देता है।

कठिनाई भरे भूभागों में जहां भूस्खलन, बाढ़, सड़क का अभाव अथवा अन्य कोई खतरा अथवा घर से बच्चों को पहुंचने में अन्य कोई अवरोध हो,

उपरोक्त सीमाओं को घटा कर ऐसे खतरों तथा अवरोधों से बचा जा सकेगा अथवा अन्य ऐसी रणनीति तथा कार्यविधि बनानी होगी जैसे घर अथवा छात्रावास आधारित शिक्षा जहां बिना किसी बाधा में शिक्षण हो सके।

ङ)      पेरेन्ट्स (माता-पिता) का अर्थ होगा किसी बच्चे का प्राकृतिक माता-पिता या अपनाए हुए अथवा सौतेली मां अथवा पिता,

च)     ‘प्राइमरी शिक्षा’ का अर्थ होगा पहले वर्ग से आठवें वर्ग तक की शिक्षा,

छ)     “छंटनी की कार्यविधि” (screening Procedure) का अर्थ होगा प्रवेश हेतु दूसरों को हटाकर किसी बच्चे के चयन का तरीका, यह यों ही (Random) अचानक चुनाव प्रणाली से अलग है,

ज)     “सेकेंन्डेरी शिक्षा” का अर्थ है, नवें वर्ग से 12 वें वर्ग तक की शिक्षा,

झ)    शिक्षक (Educator) के अर्थ में सम्मिलित है – शिक्षक, प्रशिक्षक, रिसोर्स पर्सन, ऐसे व्यक्ति जिन्हे सामान्य तथा सीखने की विशेष जरुरतों सहित विकलांग बच्चों के लिए प्रशिक्षण किया गया है,

ञ)     विशेष स्कूल का अर्थ ऐसे स्कूल से है जिसकी स्थापना तथा संचालन केवल विकलांग विद्यार्थियों के लिए होगा।

ट)      सहायता का अर्थ

i)       एजुकेटरों द्वारा सूचना की उपयुक्त साधन तथा प्रणाली द्वारा शैक्षणिक निर्देश, जिन्हे आवश्यक अहर्ताएंओ प्रशिक्षण प्राप्त है,

ii)       निःशुल्क पुस्तकों की आपूर्ति, प्रवेश परीक्षाओं के लिए तैयारी की सामग्री एवं संचार के उपयुक्त साधन, ऐसे प्रारूप में जिन्हें बच्चे समझ सकें जैसे, ब्रेल सामान्य भाषा, बडे़ प्रिंट वगैरह,

iii)       सहायक उपकरणों की निःशुल्क आपूर्ति जिसकी जरुरत बच्चे को अपनी प्राइमरी तथा सेकेंन्डरी शिक्षा पूरी करने में होगी,

iv)       लिपिक अथवा अन्य तकनीक सहायता जिनकी बच्चे की विकृति के कारण आवश्यकता होगी,

v)       बच्चे को परिवहन की सुविधाएं अथवा देना अथवा विकल्प के तौर पर माता-पिता अथवा अभिभावकों को आर्थिक प्रोत्साहन देना ताकि बच्चों को स्कूल भेजा जा सके,

vi)       विकलांग विद्यार्थियों का छात्रवृत्ति, विकलांग लड़कियों को प्राथमिकता के साथ उपलब्ध करवाना,

vii)       जैसा भी उपयुक्त हो टेस्ट अथवा परीक्षाओं में अतिरिक्त समय देना,

viii)       लिखित कार्य सामग्री, टेस्ट तथा परिक्षा में हिज्जा (Spelling) में छूट देना,

ix)       यदि बच्चे के माता-पिता ऐसा चाहे तथा स्कूल प्रशासन ऐसा जरुरी समझें तब दूसरी तथा तीसरी भाषा के कोर्स से छूट दिया जाय,

x)       सभी विषयों को सीखने में सहायता करने वाले उपयुक्त तकनीकी उपकरण जिसमें सम्मिलित हैं किन्तु गणित, भूगोल, अर्थशास्त्र तथा विज्ञान कोर्स तक ही सीमित नहीं है।

xi)       क्लास रूम में आवश्यक भौतिक स्थापन,

xii)       प्राइमरी सेकेन्डरी तथा उच्च शिक्षा पूरा करने के लिए अन्य कोई आवश्यक सहायक वस्तु,

23B. उपयुक्त शिक्षा की प्राप्ति

1.  विकलांगताग्रसित व्यक्तियों को विकलांगता के आधार पर सामान्य शिक्षा सिस्टम से अलग नहीं रखा जा सकता है तथा सक्षम सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सभी विकलांग व्यक्तियों को, विकलांगताग्रसित महिलाओं तथा लड़कियो सहित-को उपयुक्त शिक्षण सिस्टम तक पहुंच हो, अन्य के साथ समानता के आधार पर, सभी स्तरों में।

2.  सक्षम सरकार तथा प्रतिष्ठान सभी विकलांग बच्चों को निःशुक्ल तथा अनिवार्य प्राइमरी एवं सेकेन्डेरी शिक्षा सुनिश्चित करेगी।

3.  सक्षम सरकार तथा प्रतिष्ठान यह सुनिश्चित करेगी कि समावेशी शिक्षा जीवन-पर्यंत शिक्षण पर आधारित होगा तथा जिसका उद्देश्य होगा;-

क)     मानवीय संभावनाओं तथा सम्मान की भावना तथा स्वयं के मूल्य, और मानवीय अधिकारों के सम्मान को बल प्रदान करने, बुनियादी स्वतंत्रताओं तथा मानवीय विविधता का पूर्ण विकास,

ख)    विकलांग व्यक्तियों द्वारा अपने व्यक्तित्व, प्रतिभाओँ, सृजनशीलता साथ ही मानसिक एवं शारीरिक योग्यताओं का पूर्ण संभावनाओं तक विकास,

ग)     विकलांगताग्रसित व्यक्तियों को एक स्वतंत्र समाज में प्रभावी तरीके से सहभागिता करने में।

23C. शिक्षा में समुचित समायोजन

1.  सक्षम सरकार तथा व्यवस्था यह सुनिश्चित करेंगी कि व्यक्तिगत आवश्यकताओं का समुचित समायोजन शिक्षा के सभी स्तरों पर हो, विशेष जरुरतों पर ध्यान रखते हुए उनके लैगिक विशिष्ट जरुरतों पर विचार किया जायगा।

2.  सक्षम सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि विकलांगताग्रसित व्यक्तियों को व्यक्तिगत सहायता प्राप्त हो, सामान्य शिक्षा प्रणाली के ही अन्तर्गत ताकि उन्हें प्रभावी शिक्षा ऐसे वातावरण में मिले जो उनके अध्ययन तथा सामाजिक विकास को अधिकतम कर सके, तथा पूर्ण समावेश के लक्ष्य के अनुकूल हों,

3.  विकलांग व्यक्तियों को समावेशी शिक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, सक्षम सरकार समुचित कार्रवाई करेगी तथा जिसमें होंगे:-

क)     ब्रेल, वैकल्पिक लिपी, संवर्द्धन योग्य तथा वैकल्पिक तरीके, संचार के साधन और प्रारुप तथा आवागमन का अभिमुखीकरण, तथा प्रमुख, लोगों के समर्थन तथा परामर्श देने के सुविधायुक्त होना,

ख)    सांकेतिक भाषा सीखने तथा श्रवणहीन समुदाय की भाषाई पहचान को प्रोन्नत करना।

ग)     विकलांग शिक्षकों सहित, शिक्षकों को नियोजित करना, जो सांकेतिक भाषा और/ अथवा ब्रेल में अहर्ता प्राप्त है, तथा पेशेवरों और स्टाफ को प्रशिक्षण देना जो शिक्षण के प्रत्येक स्तर पर कार्य करते है।

23D. बच्चों के अधिकार

1.  प्रत्येक बच्चे को निःशुक्ल तथा अनिवार्य, उपयुक्त निकटवर्ती स्कूल में शिक्षा का अधिकार होगा, जिसे उसके अभिभावक अथवा माता-पिता चयनित करें। यह शिक्षा 6 वर्षो से 18 वर्षो की आयु अथवा उसके सेकेन्डेरी शिक्षा के पूरा होने तक जो भी विलम्ब से हो – तक चलेगी।

2.  किसी भी बच्चे को किसी प्रकार की फीस, शुल्क अथवा व्यय का भुगतान नही करना होगा जो उसे उसके प्राथमिक तथा सेकेन्डेरी शिक्षा से वंचित करे।

23E. प्रवेश अधिकार

1.  यदि किसी बच्चे ने किसी स्कूल में समुचित आयु में प्रवेश नहीं लिया हो अथवा प्रवेश करवाया गया है, लेकिन अपनी शिक्षा स्वयं की विकलांगता के कारण पूरा करने में विफल रहा हो तब ऐसे बच्चे को उसके आयु के अनुरुप किसी क्लास में प्रवेश दिलाया जायगा।

बशर्ते कि, जहां किसी बच्चे को उसकी आयु के अनुरुप सीधे किसी क्लास में प्रवेश कराया जाता है, उसे यह अधिकार प्राप्त है कि उसकी आयु के अन्य विद्यार्थियों के स्तर पर उसे लाने के लिए समुचित प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाय।

बशर्ते यह भी कि, उपरोक्त उल्लेखित प्रशिक्षण ऐसी भाषा के माध्यम से दी जाय जिसे बच्चा समझता हो तथा शिक्षक ऐसा प्रशिक्षण देने के लिए उपकरणों से लैस एवं प्रशिक्षित हों।

23F. अन्तरण (ट्रान्सफर) का अधिकार

किसी ऐसे स्कूल में जहां प्राइमरी और सेकेंडरी शिक्षा पूरी करने की सुविधा न हो, ऐसे बच्चे को यह अधिकार होगा कि किसी दूसरे स्कूल में जाने दिया जाय जहां ऐसी सुविधाएं उपलब्ध हों।

जहां किसी बच्चे को उसकी विकलांगता अथवा अन्य किसी कारण से एक स्कूल से दूसरे स्कूल में जाने की आवश्यकता होगी, ऐसे बच्चे को इस प्रकार के अन्तरण का अधिकार होगा तथा जिस स्कूल में बच्चे ने पूर्व में प्रवेश लिया था वह इसके लिए शीध्रतापूर्वक अन्तरण हेतु प्रमाण पत्र निर्गत करेगा।

बशर्ते कि, अन्तरण प्रमाण पत्र की आपूर्ति अथवा प्रस्तुति में विफलता बच्चे को उस स्कूल में प्रवेश में विल्म्ब अथवा वंचित करने का कारण नहीं बन सकेंगे।

23G. सहयोग का अधिकार:

1.  प्रत्येक बच्चे को उसकी प्राइमरी तथा सेकेन्डेरी शिक्षा पूरा करने में आवश्यक, पर्याप्त तथा समुचित सहयोग पाने का अधिकार होगा।

2.  विकलांगताग्रसित प्रत्येक व्यक्ति को उसकी उच्च शिक्षा पूरा करने के लिए आवश्यक, पर्याप्त तथा समुचित सहयोग पाने का अधिकार है।

3.  प्रत्येक बच्चे को सभी स्कूल भवनों में पहुंचने का अधिकार है तथा सक्षम सरकार का यह कर्तव्य है कि स्कूल भवनों में पहुंचने योग्य बनाएँ।

4.  उपलब्ध-धारा (1) की व्यापकता पर बिना कोई प्रतिकूल प्रभाव के ‘सहयोग’  में सम्मिलित होंगे तथा निम्न तक सीमित नहीं रहेंगे:

23H. स्कूल पूर्व शिक्षा

6 वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों को निःशुल्क शिशु सेवाएं तथा स्कूल पूर्व शिक्षा का अधिकार है।

23I.  उच्च शिक्षा का अधिकार

1.  विकलांग महिलाओं सहित किसी भी विकलांग व्यक्ति को उच्च शिक्षा संस्थाओं में उनकी विकलांगता के आधार पर यदि वे ऐसे प्रवेश के शभी आवश्यकताओं की पूर्ति करते हों जिन्हें इस अधिनियम अथवा इसके अधिन नियमों में संशोधित किया गया है। प्रवेश से वंचित नहीं किया जायगा।

बशर्ते कि, यदि कोई विकलांग व्यक्ति उच्च शिक्षण संस्थान में निर्धारित आयु में अथवा उसके पर्व ऐसे प्रवेश लेने में असमर्थ रहा हो, उसे ऐसे संस्थानों में प्रवेश दिया जायगा यदि वह अन्य सभी शर्तों की पूर्ति करता हो।

2.  सभी सक्षम सरकारें तथा शैक्षणिक संस्थान यदि वे ऐसा उचित समझते हों, विविधता में वृद्धि कर सकते है तथा अवसरों की समानता को प्रोन्नत करने के लिए निर्घारित कार्यविधि के अनुरुप किसी  विकलांग व्यक्ति के लिए जो उच्च शिक्षण संस्थान में प्रवेश लेने का इच्छुक है – के लिए आवश्यक न्यूनतम अंकों में छूट दे सकते है।

23J.  उच्च शिक्षा संस्थानों में आरक्षण –

सभी उच्च शिक्षा संस्थान प्रत्येक कोर्स में विकलांगताग्रसित व्यक्तियों के लिए 6 प्रतिशत सीट आरक्षित रखेंगे।

23K. उच्च शिक्षा में सहायता:

1.  विकलांगताग्रसित प्रत्येक व्यक्ति को जिसे उच्च शिक्षण संस्थान में प्रवेश प्राप्त हुआ है, पर्याप्त, आवश्यक तथा उपयुक्त लैंगिक संवेदनशील, गतिविधि में जिनमें वह ऐसे संस्था का प्रतिनिधित्व करता है ऐसी परीक्षाओं में सहायता प्राप्त होगी।

2.  किसी उच्च शिक्षण संस्थान में प्रवेश प्राप्त प्रत्येक विकलांगताग्रसित व्यक्ति को समुचित, आवश्यक, तथा उपयुक्त लैंगिक सहायता कोर्स को पूरा करने के लिए ऐसे प्रवेश तथा अन्य अतिरिक्त पाठ्यक्रम तथा सहायक पाठ्यक्रम गतिविधियों में संस्थान का प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्राप्त होगा।

23L. शिक्षकों की अहर्ताएं:

1.  प्रत्येक स्कूल तथा उच्च शिक्षण संस्थान में आवश्यक अहर्ता तथा प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों का स्टाफ होना चाहिए ताकि विकलांग विद्यार्थियों की आवश्यकताओं की वे पूर्ति कर सकें।

2.  सभी शिक्षकों को विकलांग विद्यार्थियों को एक समावेशी क्लास रुम में शिक्षा देने की ट्रेनिंग प्राप्त होनी चाहिए।

23M. स्कूल में सुविधाएं

i)         प्रत्येक स्कूल विद्यार्थी – शिक्षक का अनुपात विकलांग विद्यार्थियों तथा शिक्षकों के बीच बनाए रखेंगे जिन्हें आवश्यक अहर्ता तथा निर्घारित प्रशिक्षण प्राप्त है। इस अनुपात को ज्ञात करने के लिए सक्षम अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि विनिर्देशित अनुपात ऐसा हो कि विकलांग व्यक्ति इस अध्याय में विनिर्देशित शिक्षा के लक्ष्यों की प्राप्ति कर सके।

23N. स्थानीय सर्वेक्षण

i) इस अधिनियम को पारित करने तथा इसके क्रियान्वयन के पूर्व सक्षम सरकार पूरे देश में स्थानीय सर्वेक्षण का संचालन करेगी ताकि विकलांगताग्रसित बच्चों की भौतिक उपस्थिति ज्ञात हो सके तथा पास-पडो़स में रिसोर्स केन्द्र अथवा स्पेशल स्कूल, जो भी मामले हों, तथा उपयुक्त स्कूल की स्थापना एवं समुचित शिक्षा योजना लागू की जा सके।

23O. आस-पास में स्कूल रीसोर्स केन्द्र तथा स्पेशल स्कूल की स्थापना

i)         इस अधिनियम के प्रावधानों को संचालित करने के लिए सक्षम सरकार ऐसे क्षेत्रों के अन्तर्गत अथवा आस-पास की सीमा में जैसा कि निर्धारित किया जायगा, स्पेशल स्कूल ऐसे क्षेत्रों में स्कूल की स्थापना की जायेगी तथा ऐसे आस-पास के स्कूल सभी विकलांग व्यक्तियों को शिक्षा प्रदान हेतु सुसज्जित किए जाएंगे तथा स्कूल की स्थापना के साथ सक्षम सरकार निम्न की व्यवस्था करेगी:-

ii)       विकलांग बच्चों को शिक्षा प्रदान करने हेतु शिक्षकों की ट्रेनिंग के लिए मानकों विकास तथा उन्हें लागू करेगी, सभी विकलांग विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त पडो़सी स्कूलों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी,

iii)      संरचना सहित स्कूल भवन का प्रावधान करना, विकलांग बच्चों को शिक्षा प्रदान करने लायक आवश्यक अहर्ता तथा प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षक, शिक्षण सामग्री तथा अन्य कोई सामग्री जिसकी आवश्यकता विकलांग बच्चों को प्राइमरी तथा सेकेन्डेरी शिक्षा पूरा करने में होगी,

iv)     प्रत्येक विकलांग बच्चे के प्रवेश, उपस्थिति तथा प्राइमरी और सेकेन्डेरी शिक्षा पूरा करने पर अनुश्रवण सुनिश्चित करना,

v)       शिक्षकों को ऐसी ट्रेनिंग की सुविधा उपलब्ध करवाना ताकि वे विकलांग बच्चों की आवश्यकताओं की पूर्ति कर सके,

vi)     पर्याप्त संख्या में शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना करना तथा राष्ट्रीय एवं अन्य स्वंयसेवी संस्थाएं शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विकास कर सकें जिसे स्पेशल एजूकेटर की ट्रेनिंग में विशेषज्ञता प्राप्त हो ताकि विकलांग विद्यार्थियों के लिए आवश्यक स्पेशल एजुकटर्स, शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान जो स्पेशल एजुकेटरों की ट्रेनिंग के लिए सुसज्जित हों, उपलब्ध हो सके,

vii)    पर्याप्त संख्या में एजुकेटरों की उपलब्धता सुनिश्चित किया जाय जिन्हें विकलांग व्यक्तियों को पढ़ाने के लिए आवश्यक अहर्ता तथा ट्रेनिंग प्राप्त हो।

viii)  एक ऐसे समावेशी B.Ed कोर्स का विकास और स्थापना करें जिसके माध्यम से उन सभी शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जा सके जिन्हें समावेशी क्लास रुम में विकलांग बच्चों की आवश्यकता की पूर्ति करनी है,

ix)     पदाधिकारियों तथा गैर-सरकारी एजन्सियों द्वारा शोध प्रारंभ किए जाये अथवा शोध के प्रारंभ की व्यवस्था की जाय ताकि शिक्षा में सहायक, विशेष शिक्षण सामग्री, तथा ऐसी चीजें जिनकी जरुरत विकलांग बच्चों को उनकी शिक्षा पूरा करने में हो सकती है – के लिए नए सहायक उपकरण की डिजाइनींग तथा विकास हो।

23P. माता-पिता का कर्तव्य:

i)  प्रत्येक माता-पिता अथवा अभिभावक का यह कर्तव्य होगा कि अपने बच्चे अथवा आश्रित का, जो भी मामला हो, किसी निकटवर्ती स्कूल या स्पेशल स्कूल में प्रवेश करवाए अथवा प्रवेश की व्यवस्था करवाए, जिन्हे बच्चे की प्राइमरी और सेकेन्डेरी शिक्षा पूरा करने के लिए माता-पिता अथवा अभिभावक द्वारा चयनित किया गया है।

23Q. स्कूल का कर्तव्य:

कोई भी स्कूल अथवा व्यक्ति, किसी बच्चे के प्रवेश के दौरान कोइ कैपीटेशन फीस नही वसूलेगा तथा किसी बच्चे अथवा उसके लिए माता-पिता अथवा अभिभावक को किसी स्क्रीनींग प्रक्रीया से नही गुजरना होगा।

23R. रोकने की मनाही

किसी स्कूल में प्रवेश प्राप्त किसी बच्चे को क्लास में रोककर नही रखा जा सकेगा अथवा प्राइमरी और सेकेन्डेरी शिक्षा पूरा होने के पहले ही स्कूल से निकाला नहीं जायगा।

23S.  कैपिटेशन फीस

कोई भी स्कूल अथवा व्यक्ति, किसी बच्चे के प्रवेश के दौरान कोई कैपिटेशन फीस नहीं वसूलेगा।

23T. शारीरिक कष्ट की सजा पर प्रतिबंध

किसी भी बच्चे को शारीरिक दंड अथवा मानसिक रुप से निःशक्तता के आधार पर तंग नहीं किया जायगा अथवा उपयुक्त निवास की व्यवस्था से वंचित नहीं किया जायगा अथवा किसी अन्य प्रकार से प्रत्यक्ष भेदभाव नहीं किया जायगा।

23U. अवकाश आराम, सांस्कृति, स्पोर्ट्स।

सभी स्कूल यह सुनिश्चित करेंगे कि विकलांग बच्चों को खेलकूद, मनोरंजन तथा आराम अवकाश की गतिविधियों में अन्य के साथ समान्ता के आधार पर सहभागिता का अवसर प्राप्त हो।

23V. स्कूल प्रबंधन कमिटि

1.  बच्चों की निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम, 2009 की धारा 21 के अन्तर्गत स्थापित स्कूल प्रबंधन कमिटियों में निःशक्त बच्चों के माता-पिता या अभिभावक सदस्य होंगे।

2.  ऐसे सभी निकटवर्ती स्कूलों में स्कूल प्रबंधन कमिटियां स्थापित की जाएंगी तथा माता-पिता या अभिभावकों का ऐसी कमिटियों में (माता-पिता या अभिभावकों की संख्या का प्रतिशत) प्रतिशत स्कूल में ऐसे विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में निर्धारित की जायगी।

बशर्ते कि, किसी भी मामले में पेरेन्ट्स तथा अभिभावकों की संख्या, कमेटी में दो से कम होगी।

23W. स्कूल विकास योजना

बच्चों की निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम, 2009 की धारा-22 की उप-धारा (1) के अन्तर्गत सभी स्कूल विकास प्रबंधन कार्यक्रम उन आवश्यकताओं को संबोधित करेंगे जिनकी जरुरत निम्न के लिए होगी:-

i)         स्कूल भवन को पहुंच योग्य बनाने में,

ii)       बच्चों को धारा 23-G (धारा संख्या जोड़े) के प्रावधान के अनुरूप सहायता करे,

iii)      अन्य कोई आवश्यकता जिनकी विकलांग बच्चों के जरुरत होगी।

23X. शिक्षा सुधार आयोग की स्थापना

 

एक शिक्षा सुधार आयोग की स्थापना ऐसी अवधी के लिए होगी, तीन वर्षो से कम नहीं, जैसा कि केन्द्र सरकार अध्यादेश द्वारा प्रावधान करेगी।

1.  आयोग, यथासंभव अधिक से अधिक हितधारकों को पाठ्यक्रमों के निर्माण, क्रियान्वयन तथा अनुश्रवण तथा संबंधित कार्यक्रमों एवं नीतियों में निःशक्त, गैर निःशक्त बच्चों, शिक्षकों तथा पेरेन्ट्स को प्रभावी सहभागिता में संलग्न करेगा।

2.  शिक्षा सुधार आयोग के संगर्भ में निम्नलिखित शर्तें होंगी:-

क)     स्कूल द्वारा अपनायी गयी वर्तमान पाठ्यक्रम की समीक्षा निःशक्त  व्यक्तियों तथा उनके जीवन के अनुभवों के आधार पर की जायेगी,

ख)    एक समावेशी पाठ्यक्रम का भेदभावरहित एवं विविधता तथा सहनशीलता के सिद्धान्त पर विकास किया जायगा,

ग)     शिक्षा-शास्त्र की जिस प्रणाली को शिक्षा तथा निःशक्त व्यक्तियों के ऐसे समावेशी पाठ्यक्रमों के लिए अपनाना है, उनकी अनुशंसा करना,

घ)     समावेशी पाठ्यक्रमों को मुख्यधारा शिक्षा में अपनाने तथा समेकित करने के लिए तथा प्रगति अनुश्रवण हेतु सुझाव देना,

ङ)      ऐसे सुझाव देना जिन्हें आयोग आवश्यक समझे।

3.  आयोग अपने शर्तों के संदर्भ के किसी कार्य के अनुरूप निष्पादन के संबंध में अध्ययन तथा विश्लेषण प्रारंभ कर सकता है अथवा अन्य कोई उपाय भी कर सकता है।

नियोजन, कार्य और पेशा

24A. नियोजन में पक्षपातहीनता

1.  किसी भी निःशक्त व्यक्ति के साथ भर्ती, प्रोन्नति तथा नियोजन के दौरान किसी प्रतिष्ठान में पक्षपात नहीं होगा।

2.  किसी भी व्यक्ति को निःशक्तता से ग्रसित होने पर, अथवा इसके परिणाम के कारण सेवा समापन अथवा केवल निःशक्तता के कारण पदावनति किए जाने का कष्ट नही झेलना होगा।

3.  सभी प्रतिष्ठान में निःशक्त व्यक्तियों को ठहरने की सुविधआ पर्याप्त तरीकों से करने की गारंटी देनी होगी ताकि निःशक्त व्यक्तियों को असुविधा का सामना नहीं करना पड़े।

व्याख्या:

1.  “पर्याप्त सुविधाओं” में सम्मिलित है तथा इतने ही तक सीमित नहीं है – आवश्यक सहायक वस्तुओं तथा उपकरणों के प्रावधान, पर्याप्त स्वास्थ्य सेवा की सुविधाएं भवनों में आवश्यक भौतिक सुधार ताकि कार्यस्थल तक पहुंचा जा सके, कार्यस्थलों तक पहुंच तथा लचीली कार्य की अवधि एवं आवश्यक सहायता के संदर्भ में लगातार अनुश्रवण, अथवा अन्य कोई व्यवस्था अथवा सुविधा का सृजन जिससे लोक सेवा परिक्षाओं में प्रतियोगिता अथवा ऐसे किसी अन्य सेवाओं से संबंधित परीक्षाओं के संदर्भ में समानता हो।

2.  कोई भी निःशक्त व्यक्ति, यदि किसी पद के योग्य है जिसे भरा जाना है, उसे यह अधिकार होगा कि चयन के लिए उसमें सम्मिलित हो सके तथा यदि चयनित हो जाय तब उस पद पर सुशोभित हो सके।

3.  सभी प्रतिष्ठान यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी निःशक्त व्यक्ति को नियोजन के दौरान ट्रान्सफर होने की स्थिति में, इस अधिनियम की विधि सम्मत प्रक्रिया तथा क्रियान्वयन योग्य किसी श्रम कानून के अनुसार ऐसे ट्रान्सफर को मानने में निःशक्तता के कारण अथवा अन्य किसी सुविधा के कारण विफलता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर सेवा से बर्खास्तगी, पदावनति या वेतन रोकने की प्रतिक्रिया का कारण नही बनेगा।

4.  सक्षम सरकार उपरोक्त लक्ष्य की प्राप्ति के लिए समय-समय पर ऐसे नियम एवं कानून बनाएगी जो आवश्यक है।

24B. आरक्षण

1.  सभी प्रतिष्ठान, सभी पदों की रिक्तियों के संदर्भ में निःशक्त व्यक्तियों के लिए पदों का आरक्षण करेंगे जो 6 प्रतिशत से कम नहीं होगे तथा निम्न वर्गीकरण के अनुसार प्रत्येक वर्ग में 1% का अधिकार होगा:

क)     नेत्रहीन तथा कम देखने वालों के लिए,

ख)    मूक-बधिर व्यक्तियों के लिए,

ग)     अंग प्रचालन की निःशक्तता से ग्रसित तथा कुष्ठ रोग से मुक्त,

घ)     प्रमस्तिष्कघात से ग्रसित तथा Muscular dystrophy.

ङ)      स्व-परायणता, बौद्धिक निःशक्तता तथा मानसिक बीमारी से पीड़ित,

च)     बहु-अशक्ता, नेत्रहीन

बशर्ते कि, उपलब्ध-धारा (1) (a) में प्रावधान किए गए आरक्षण नेत्रहीन तथा कम दृश्यता वालों के बीच समानता के आधर पर बांटे जाएंगे।

2.  प्रत्येक 3 वर्षो में उपरोक्त श्रवणहीन वक्तव्य (प्रतिशत का) का नवीकरण तथा वर्गीकरण समीक्षा के दौरान किया जा सकता है।

3.  यदि किसी विशेष वर्ष में पर्याप्त संख्या में विकलांग व्यक्ति उपलब्ध न हों, तब आरक्षण बाद वाले वर्ष के लिए लेकर रखा जायगा, और यदि बाद वाले वर्ष में भी कोई उपयुक्त विकलांग व्यक्ति नहीं मिले तब पद को पहले वर्गो के बीच आपसी आदान-प्रदान द्वारा भरा जायगा, और यदि रिक्त स्थान तब भी नहीं भरा गया तब व्यवस्था किसी विकलांग व्यक्ति का चयन कर प्रशिक्षित करके नियोजित किया जायगा। किसी भी अवस्था में किसी पद को जिस पर विकलांग व्यक्ति की नियुक्ति का अधिकार है, रद्द नहीं होने दिया जायगा।

व्याख्या:

यह प्रावधन नियोजन गारंटी योजनाओं में भी विस्तारित की जाती है, सक्षम सरकार द्वारा किसी विधि, अध्यादेश अथवा नियम बनाकर, अथवा नियोजन के लिए पदों का सृजन करके, इसमें नरेगा (NREGA) अधिनियम, 2005 भी सम्मिलित है लेकिन केवल उस तक ही सीमित नहीं है।

4.  इस अधिनियम के क्रियान्वित होने के पश्चात, सक्षम सरकार विकलांगताग्रसित व्यक्तियों को प्राथमिकता के आधार पर धारा-32 के निःशक्त व्यक्ति अधिनियम (समान अवसर, अधिकरों का संरक्षण तथा पूर्ण सहभागिता) 1995 के अन्तर्गत चिन्हित पदों पर नियुक्त करेगी।

24C. निःशक्तता के आधर पर पदोन्नति में भेदभाव नहीं हों

1.  निःशक्तता के कारण किसी व्यक्ति को प्रदोन्नति से वंचित नही किया जा सकेगा।

2.  निःशक्तता के आधार पर पदोन्नति रोकना भेदभाव माना जायगा।

24D. समान अवसर की नीतियां

1.  इस अधिनियम की धारा 62 के शर्तो के अधीन इस कानून के क्रियान्वित होने के 6 महीनों के अन्दर, सभी प्रतिष्ठान समान अवसर की नीतियों (Equal Opportunity Policies) को इस अनुच्छेद के प्रावधानों तथा अन्य किसी ऐसे नियमों के अनुपालन में किए गए उपायों तथा प्रारंभ की गयी प्रतिबद्धता को क्रियान्वित करेंगे।

2.  समान अवसर नीति की –

क)     इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुपालन हेतु किए गए उपायों की रुपरेखा प्रस्तुत करेंगे,

ख)    रोजगार के अवसरों की वृद्धि हेतु क्रियान्वित रणनीति- विशेष ध्यान उन सभी योजनाओं के समुचित समायोजन के उपायों पर होगा।

3.  निःशक्तता अधिकार प्राधिकरण (DRA) यदि यह सही समझे, समान अवसर की नीतियों के आकार और संरचना का निर्माण कर्मचारियों सकता है।

4.  समान अवसर नीति एक बार बन जाने के पश्चात इसकी एक प्रतिलिपि प्रत्येक जिला के जिला निःशक्तता न्यायालय के कार्यालय में जमा और निबंधित किया जायगा।

24E. रिकॉर्ड रखना

1.  प्रत्येक प्रतिष्ठान नियोजन, उपलब्ध सुविधाओं तथा अन्य आवश्यक सूचनाएं जिनका संबंध अनुच्छेद के प्रावधानों के अनुपालन से है सक्षम सरकार द्वारा निर्धारित प्रारूप प्रणाली से उनका रिकॉर्ड रखेंगे।

2.  प्रत्येक नियोजन कार्यालय (employment exchange) निर्धारित कार्यविधि के अनुरूप विकलांग व्यक्तियों द्वारा नियोजन की इच्छा रखने वालों का रिकॉर्ड रखेंगे।

3.  ऐसे रिकॉर्ड नियोजन चाहनेवाले विकलांग व्यक्तियों के प्रासंगिक और वास्तविक प्रमाण होंगे जो इस अधिनियमों के अधीन बेराजारी भत्ता लेना चाहते है।

4.  विकलांगता अधिकार प्राधिकरण द्वारा अधिकृत कोई भी अधिकारी प्रतिष्ठान के कार्यक्रम में इन रिकार्डो का निरीक्षण कर सकता है।

24F. निःशक्तता की अवस्था प्राप्त होने पर हटाने पर या पदावनति की प्रक्रिया लागू नहीं करना:

1.  सभी प्रतिष्ठान और नियोजक किसी कर्मचारी के द्वारा सेवाकाल में निःशक्तता की अवस्था प्राप्त होने पर उसके पुनर्वास की व्यवस्था करेंगे,

2.  किसी कर्मचारी द्वारा सेवाकाल में निःशक्तता की अवस्था प्राप्त करने पर उसे हटाया नहीं जायगा अथवा पदावनति नहीं की जायगी।

3.  प्रतिष्ठान कर्मचारी को निःशक्त होने के पूर्व लगे कार्य पर ही कार्य करने योग्य उसे बनाने के लिए समुचित समायोजन का प्रावधान करेगा।

4.  यदि कर्मचारी समायोजन के पश्चात भी उसी पद पर कार्य करने में असमर्थ हो, तब प्रतिष्ठान कर्मचारी को किसी अन्य पद पर स्थापित करेगा जिसे भले ही कर्मचारी समुचित समायोजन के साथ या उसके बिना ही करने योग्य हो।

5.  उपलब्ध-धारा (3) तथा (4) में वर्णित कार्यविधि द्वारा स्थापित अथवा पुनर्वासित करना असफल प्रमाणित हो तब कर्मचारी को किसी अनावश्यक पद पर तब तक रखा जायगा जब तक उसके योग्य कोई पद उपलब्ध नही होता है या उसके अवकाश ग्रहण करते तक, जो भी पूर्ववर्ती हो।

24G. वोकेशनल ट्रेनिंग, पुनर्वास तथा स्व-नियोजन:

1.  सक्षम सरकार निःशक्त व्यक्ति के नियोजन की सुविधा तथा सहायता के प्रावधान हेतु सभी आवश्यक कार्रवाई करेगी, विशेषतः स्व-नियोजन तथा निःशक्त व्यक्ति के वोकेशनल ट्रेनिंग को ध्यान में रख कर।

2.  उपलब्ध-धारा (1) में वर्णित सामान्य उत्तरदायित्व के प्रति बिना किसी पूर्वाग्रह के, सक्षम सरकार प्रत्येक जिला में कर्म केन्द्रों की स्थापना करेगी जहां ग्रामीण क्षेत्रों के विकलांग व्यक्तियों को आवश्यक कुशलताओं (ग्रामीण दस्तकारी व्यवसायिक तथा धरेलू पेशों में) का प्रशिक्षण दिया जा सकता है तथा उधान कार्यो / दस्तकारी/ कृषि संबंधी उपकरण आदि में कार्य उपलब्ध करवाए जा करते है।

3.  उपलब्ध-धारा (1) में वर्णित सामान्य उत्तरदायित्व के प्रति बिना किसी पूर्वाग्रह के सक्षम सरकार कुशलताओं में प्रशिक्षित करने के लिए वर्तमान केन्द्रों में लाकर तथा जहां केन्द्र नहीं है वहां केन्द्र स्थापित करके ग्रामीण क्षेत्रों के विकलांग व्यक्तियों को आवश्यक कुशलताएं दस्तकारी, व्यवसाय तथा धरेलू पेशों में कार्य उपलब्ध करवाए जा सकते है।

4.  सक्षम सरकार कम दर पर वर्तमान सूक्ष्म क्रेडिट तथा ऋण योजनाओं के माध्यम से विकलांग व्यक्तियों को ऋण उपलब्ध करवाएगी ताकि स्व-रोजगार योजनाओं को प्रोत्साहन मिले,

5.  यदि नियोजित व्यक्ति की यह राय हो कि नियोजन के पूर्व विशेष ट्रेनिंग की आवश्यकता है तब यह सुनिश्चित करने के लिए कि निःशक्त व्यक्ति को पर्याप्त सहायता मिले, ऐसी सुविधाएं उसे उपलब्ध होनी चाहिए।

6.  सक्षम सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के विकलांग व्यक्तियों को सृजनशीलता की सहायता एवं प्रोन्नति के लिए समुचित योजनाओं का निर्माण कारीगरों तथा विपणन संधों एवं प्रोन्नति के लिए समुचित योजनाओं का निर्माण कारीगरों तथा विपणन संधों एवं दस्तकारी बोर्ड के बीच नेटवर्क की स्थापना के माध्यम से करेगी।

24H. प्रतिष्ठान को प्रोत्साहन

1.  सक्षम सरकार इस अधिनियम के लागू के एक वर्ष के अन्दर सभी प्रतिष्ठान को प्रोत्साहन को सुनिश्चित करेगी ताकि यह सुनिश्चित हो कि कार्य दल का कम से कम दश प्रतिशत विकलांग व्यक्तियों को हो।

24I.  शिकायत का समाधान

1.  प्रत्येक प्रतिष्ठान अपनी नियोजन नीति एक भाग के तौर पर एक शिकायत समाधान कक्ष की स्थापना करेंगे। ऐसे शिकायत समाधान कक्ष के अधिकारी को शिकायत समाधान पदाधिकारी (Grievances Redressal Officer) कहेंगे, तथा इसे प्रत्येक जिला के विकलांगता न्यायालय में निबंधित करवाना होगा।

2.  कोई भी व्यक्ति शिकायत समाधान पदाधिकारी के पास शिकायत दर्ज करवा सकता है, जो सक्षम सरकार द्वारा निर्धारित तरीके एक शिकायत रजिस्टर रखेगा, तथा किसी भी ऐसे शिकायत पर शिकायत दर्ज करवाने के दो सप्ताह के अन्दर कार्रवाई करेगा।

3.  उपरोक्त उत्तरदायित्व के सामान्य प्रवृति के प्रति बिना किसी पूर्वाग्रह के शिकायत निवारण पदाधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रत्येक प्रतिष्ठान धारा 19A की उपलब्ध-धारा (3) में वर्णित उत्तरदायित्व की पूर्ति करें। इस उत्तरदायित्व की पूर्ति में किसी प्रकार की गलती होने की स्थिति में शिकायत निवारण पदाधिकारी को जिम्मेदारी लेनी होगी, जब तक कि वह बताने में सफल न हो कि, उसके प्रयासों के बावजूद प्रतिष्ठान ने गलती की है।

4.  यदि शिकायत समाधान पदाधिकारी शिकायत दर्ज करवाने के दो सप्ताह के अन्दर कार्रवाई करने में विफल रहे, तब निःशक्त व्यक्ति जिला निःशक्तता आयुक्त को ऐसी लापरवाही के विरुद्ध कारवाई की मांग कर सकता है।

24J.  विशेष नियोजन कार्यालय

1.  विशेष नियोजन कार्यालय जिन्हें निःशक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण तथा पूर्ण सहभागिता) अधिनियम, 1995 के अन्तर्गत स्थापित किया गया था, सक्षम सरकार के निर्णय के अधीन बने रह सकते है,

2.  इस अधिनियम के क्रियान्वित होने के पश्चात सक्षम सरकार द्वारा निःशक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण तथा पूर्ण सहभागिता) अधिनियम, 1995 की धारा 34 (1) के अन्तर्गत निगत कोई अधिसूचना प्रभावी रहेगा तथा प्रतिष्ठान इस संबंध में सक्षम सरकार द्वारा निर्गत किसी अन्य अधिसूचना से भी संलग्न होंगे।

सामाजिक सुरक्षा का अधिकार

 

1.  इस अधिनियम की धारा 10 में वर्णित जीवन एवं जीवनयायपन के अधिकार तथा धारा 19 के स्वतंत्रतापूर्व जीवन के अधिकार को विस्तार देते हुए, सभी निःशक्त व्यक्तियों को सामाजिक सुरक्षा का अधिकार है जिसमें सम्मिलित है तथा इतने ही तक सीमित नहीं है-निःशक्त व्यक्ति के लिए पर्याप्त सुरक्षा सहित मानक जीवनयापन का अपने परिवार सहित भोजन, सुरक्षा आश्रय, आवास, सामाजिक सेवा, पेन्शन, बेरोजगार भत्ता तथा बीमा आदि।

2.  सक्षम सरकार तथा स्थानीय पदाधिकारी आवश्यक कार्यक्रम और/अथवा योजनाओं की घोषणा करेंगे ताकि निःशक्त व्यक्ति के अधिकारों की सुरक्षा तथा प्रोन्नति हो सके जिन्हें उप धारा (1) में उपयुक्त जीवन स्तर उपलब्ध करवाने तथा उनकी जीवनयापन की परिस्थितियों में सुधार लाकर उन्हें स्वतंत्रतापूर्वक तथा समुदाय में रहने योग्य बनाने के लिए समुचित प्रावधान किए जाएंगे। इन योजनाओं तथा कार्यक्रमों को निर्माण में निःशक्तता की विविधता, लिंग, आयु, तथा सामाजिक आर्थिक स्थिति प्रासंगिक विषय होंगे।

3.  इन योजनाओं के साथ-साथ इनके लिए भी प्रावधान होंगे:

क)     सुविधा एवं स्वास्थ्यपरक सामुदायिक केन्द्र जिनमें रहने की उत्तम व्यवस्था शक्तिवर्द्धक योजना, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवा एवं परामर्श की सुविधाएं हो,

ख)    ऐसे निःशक्त व्यक्तियों के लिए सुविधाएं जिनका न तो परिवार, आश्रय या आजीविका का उपाय है,

ग)     प्राकृतिक अथवा मानव निर्मित आपदाओं तथा संघर्ष को क्षेत्रों में सहायता की आवश्यकता,

घ)     ऐसे निःशक्त महिलाओं को सामाजिक सेवाएं जिनके पास आजीविका, के साधन न हो उन्हें बच्चों के पालन-पोषण के लिए पारिवारिक सहयोग,

ङ)      भोजन प्राप्ति  योजना की लाभ की पुष्टि हेतु किसी विकलांग व्यक्ति को एकल इकाई माना जायगा।

च)     सुरक्षित पेयजल की प्राप्ति तथा समुचित स्वच्छता सुविधाएं विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में ।

4.  सक्षम सरकार सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान हेतु योजना बनाएगी तथा निःशक्त व्यक्तियों को जो समाज के आर्थिक दृष्टिकोण से कमजोर वर्ग के है उन्हे सहायक वस्तुएं उपकरण निःशुक्ल उपलब्ध करवाएगी जिन्हें इनकी अधिक आवश्यकता होगी।

5.  निःशक्तता के आघार पर बीमा के लिए किसी प्रकार से इन्कार करना गैर कानूनी है। मानक प्रारूप में कोई भी नियम जिससे निःशक्त व्यक्ति का सम्पर्क होता है गंभीर अथवा अस्वीकार योग्य खतरा होता है तथा यह भेदभाव ही है तथा इस अवैध माना जाता है,

6.  स्वतंत्रतापूर्वक तथा समुदाय में रहने के अधिकार को विस्तार देने के लिए, सक्षम सरकार,

क)     विकलांगता पेन्शन योजना के निर्माण में सभी विकलांग व्यक्तियों के सम्मिलित किया जायगा जिन्हें सहायता की आवश्यकता है, एकल विकलांग व्यक्तियों को विकलांगता पेंशन का लाभ प्राप्त करने से ‘एक इकाई’ होगा।

ख)    सरकारी कर्मचारियों के पेन्शन के लाभ को उनके विकलांग बच्चों के नाम स्थानान्तरित करने के प्रावधान हेतु नियम का निर्माण हो,

ग)     बहुअशक्तता तथा वद्धिति सहायता की आवश्यकता सहित महिलाओं तथा बुजुर्ग विकलांग व्यक्तियों के लिए विशेष पहलों का जैसे बढ़ी हुई विकलांगता पेंशन का प्रावधान करना,

घ)     अधिक सहायता की आवश्यकता सहित विकलांग व्यक्तियों को देखरेख सेवा प्रदान हेतु उपयुक्त भत्ता का प्रावधान हो,

ङ)      विकलांगताग्रसित व्यक्तियों को अवकाश प्राप्ति के पश्चात वर्द्धित अवकाश ग्रहण-लाभ उपलब्ध कराए जाय?

च)     ग्राम पंचायत स्तर पर वर्ष में कम से कम एक बार विशेष शिविर का आयोजन होना चाहिए ताकि विभिन्न सरकारी योजनाओं की सूचना दी जा सके तथा विकलांग लोगों को इनकी जानकारी दी जा सके।

7.  सक्षम सरकार सुयोग्य बनने तथा पुनर्वास के अधिकार तथा स्वतंत्रतापूर्वक रहने के अधिकार का संबर्द्धन करते हुए निःशक्तताग्रसित व्यक्तियों को आरक्षण तथा प्राथमिकी के आधार पर आवंटन उपलब्ध करवाएगी,

क)     सभी सरकारी योजनाओं और/अथवा नागरिक या ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में विकलांग व्यक्तियों को कम से कम 6 प्रतिशत आरक्षण तथा प्राथमिकता के आधार पर भूमि तथा आवास का आवंटन हो तथा विकलांग बुजुर्गो व्यक्तियों को विशेष प्राथमिकता प्राप्त हो।

ख)    सभी गरीबी उन्मूलन तथा विभिन्न विकास कार्यक्रमों के लाभुकों में कम से कम 6 प्रतिशत विकलांग हों तथा विकलांग महिलाओं और  विकलांग बुजुर्गो को प्राथमिकता दी जाय।

ग)     भूमि के आवंटन में कम से कम 6 प्रतिशत आरक्षण कम दुर्व्यवहार पर हो, जहां ऐसी भूमि का उपयोग आवास, आश्रय, पेशे की स्थापना हेतु, मनोरंजन केन्द्र, उत्पादन स्थल विशिष्ट रुप से विकलांग व्यक्तियों के लिए होना चाहिए भले ही ऐसी सुविधाएं विकलांग व्यक्तियों द्वारा प्रबंधित एवं उनके स्वामित्व में हों या नहीं हों।

घ)     उन गृह-स्वामियों को सम्पति कर्मचारियों में छूट देकर प्रोत्साहन देना चाहिए जो परिसरों को विकलांग व्यक्तियों को आवासीय अथवा व्यावसायिक उद्द्देश्य से पट्टे पर देते है,

8.  किसी भी विकलांग को जो रोजगार गारंटी योजना के अन्तर्गत कार्य करने की इच्छा

जाहिर करता हे ऐसे अन्य विकासशील योजनाओं में कार्य करने से वंचित नहीं किए जाएंगा।

26.   स्वास्थ्य का अधिकार

1.  विकलांगताग्रसित सभी व्यक्तियों को स्वास्थ्य की उच्चतम स्तर के प्राप्ति योग्य मानक का विकलांगता के आधार पर बिना किसी भेदभाव के उपभोग करने का अधिकार है,

2.  विकलांगताग्रसित सभी व्यक्तियों को स्वास्थ्य सेवा की प्राप्ति योग्य वातावरण में पहुंच योग्य कार्यविधि से तथा समुचित समायोजन का अधिकार है।

3.  सक्षम सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि स्वास्थ्य सेवा अधिकार, तथा लाभ व्यापकता से लिंग, आयु तथा सामाजिक – आर्थिक स्थिति पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए उपलब्ध करवाएगी।

4.  सक्षम सरकार तथा प्रतिष्ठान यह सुनिश्चित करेंगे कि विकलांग व्यक्तियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा निःशुल्क अथवा सुलभतापूर्वक उनके समुदायों के निकट, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध हों।

5.  सक्षम सरकार तथा प्रतिष्ठान यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी स्वास्थ्य सेवाएं जिनकी विकलांग व्यक्तियों को आवश्यकता होती है, विशेषकर उनकी विकलांगता के कारण उन्हें उपलब्ध हों। ऐसी सेवाएं आरंभिक पहचान और हस्तक्षेप का प्रवधान करेंगी।

6.  इस भाग के अन्तर्गत अपनी जिम्मेदारियों की पूर्ति हेतु सक्षम सरकार योजनाओं तथा कार्यक्रमों का निर्माण सेवा का उपयोग करने वालों, तथा उनके सेवा-प्रदाताओ के साथ मिलकर करेंगे तथा साथ-साथ निम्न प्रावधान करवाएं जाएंगे:

क)     आवश्यक शिक्षा और सूचना के द्वारा विकलांगता समाप्त को करने तथा और अधिक बढ़ने से रोकने के लिए,

ख)    प्राकृतिक आपदाओं तथा अन्य जोखिम भरी स्थितियों में विकलांग व्यक्तियों की स्वास्थ्य सेवा में,

ग)     सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में विकलांगता क्षेत्र हेतु उपकरण तथा प्राप्ति योग संरचना महत्वपूर्ण सार्वजनिक भवनों तथा स्थलों, तथा और सभी दूसरे ऐसे स्थलों के लिए जिन्हें सक्षम सरकार समय-समय पर अधिसूचित करेगी,

घ)     सभी जीवन रक्षक आपातकालीन चिकित्सा तथा कार्यविधियाँ हेतु “आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं” के लिए।

ङ)      यौन तथा प्रजनन संबंधित स्वास्थ्य हेतु, विशेषकर निःशक्त महिलाओं के लिए,

च)     सभी प्राथमिक देखरेख सेवा की प्राप्ति के लिए, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में,

छ)     कम दर पर और जहां आवश्यक हो, कमजोर तथा गरीब वर्ग के लिए निःशुल्क इलाज तथा चिकित्सा सुविधाएं,

ज)     चिकित्सा खर्चो के वहन, यात्रा भत्ता, थेरापी- निःशक्त व्यक्तियों के लिए सम्पूर्ण बीमा योजना के भाग की तरह,

 

मार्गदर्शक

26A. बीमा

1.  सभी प्रतिष्ठान निःशक्त व्यक्तियों को अन्य के साथ समानता के आधार पर (मेडिकल बीमा) स्वास्थ्य एवं जीवन उपलब्ध करवाएंगे,

2.  ऐसी बीमा तथा इसके प्रावधानों से वंचित करना अथवा गैर अनुपातिक प्रीमीयम या अन्यायपूर्ण शर्तो को भेदभाव समझा जायगा।

26B. नीतिपूर्ण मार्गदर्शन

1.  निःशक्त व्यक्तियों के प्रति सभी स्वास्थ्यकर्मी निःशक्तताग्रसित व्यक्तियों को स्वास्थ्य एवं अन्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के दौरान पूर्व-सूचित स्वीकृति तथा गोपनीयता के मार्गदर्शन का पालन करेंगे।

2.  उप-धारा (1) में वर्णित सामान्य जिम्मेदारी के प्रति बिना किसी पूर्वाग्रह के-सभी स्वास्थ्य सेवा देने वाले पेशेवर विकृति संबंधी विशेष हस्तक्षेप के समय निःशक्त व्यक्तियों को सेवा देने के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखेंगे कि प्राप्ति तरीकों, प्रणाली तथा प्रारूप के माध्यम से पूर्ण सूचना प्रदान करें।

3.  मार्गदर्शन (Guidelines) से हटकर थोड़ी सी भी लापरवाही पेशेवरों के विरुद्ध गलत आचरण अथवा निम्न दर्ज की अपर्याप्त सेवा देने के एवज में कार्रवाई की जायगी।

4.  चिकित्सा संबंधी मार्गदर्शन को निःशक्त व्यक्तियों के साथ संचार हेतु समुचित रुप से संशोधित किया जा सकता है। तथा किसी पूर्वाग्रही वर्णन को विलोपित किया जा सके।

26C. जागरुकता प्रसार की जिम्मदारीयां

1.  सक्षम सरकार तथा प्रतिष्ठान निकलांग अधिकार प्राधिकरण के सहयोग से देखरेख सेवा प्रदान करने वालों, सेवा का उपभेग करने वालों, तथा जन-साधारण में मानवीय अधिकारों, प्रतिष्ठान, स्वायत्तता-तथा विकलांग व्यक्तियों की आवश्यकताओं के प्रति सुग्राही बनाने तथा जागरुकता का प्रसार करेंगे।

2.  सक्षम सरकार तथा प्रतिष्ठान निम्न के लिए:

1. विकलांगताग्रसित व्यक्तियों को सर्वेक्षण करने या सर्वेक्षण करवाने, जांच तथा स्वास्थ्य की स्थिति एवं आवश्यकता पर शोध कार्य,

2. विकलांग व्यक्तियों की आवश्यकताओं के समाधान हेतु प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा केन्द्रों में प्रशिक्षण की सुविधा का प्रावधान करना,

3. माता एवं शिशु का गर्भ पूर्व, गर्भावस्था के दौरान तथा शिशु के जन्म के पश्चात सेवा प्रदान के उपायों का प्रावधान,

4. सामान्य स्वच्छता, स्वास्थ्य और सफाई, का विकलांग व्यक्तियों के स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता अभियान तथा उसका प्रसार करने या प्रसार करवाने हेतु प्रोन्नत करेंगे या प्रोन्नत करवाएंगे।

26D. भोजन एवं तरल एवं से वंचित रखने पर प्रतिबंध

1.  विकलांग व्यक्तियों सहित शिशुओं को उनकी विकलांगता के कारण भोजन अथवा तरल पदार्थ से वंचित करना अब प्रतिबंधित है।

2.  इस अधिनियम के अन्तर्गत किसी व्यक्ति द्वारा किसी विकलांग व्यक्ति को भोजन या  तरल पदार्थ से वंछित नहीं किया जायगा, अथवा  वंचित करने के ऐसे कार्य में सहायता को बढ़ावा देने वाले पर आपराधिक कार्रवाई हेतु दंडित किया जायगा।

योग्यता अर्जन और पुनर्वास

योग्यता अर्जित करने और पुनर्वास का अधिकार :

1.  इस अधिनियम की धारा 53 में सामान्य रुप से तथा उपलब्ध-धारा-2 के खंड (d)  में विशेष रुप से वर्णित जीवनयापन के अधिकार को विस्तार देते हुए, विशेषतः विकलांग व्यक्तियों को योग्यता अर्जित करने तथा पुनर्वास का इस अधिनियम के अन्तर्गत दिए गए अधिकार प्राप्त होंगे।

1. व्याख्या:

योग्यता अर्जन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा विकृति के साथ जन्म लेने वाले व्यक्ति जीवनयापन की कुशलता सीखते है, जबकि, पुनर्वास सामान्यतः उसे कहते हैं जब विकृति हो जाती है उसके बाद समाज में स्वंय को रहने योग्य बनाना है।

2.  उप-धारा (1) में मान्यता प्राप्त अधिकारों में प्रगति के उद्देश्य से सक्षम सरकार एवं प्रतिष्ठान विकलांग व्यक्तियों की शारीरिक, मानसिक, व्यक्तिगत, समाजिक, शैक्षणिक वोकेशनल तथा पेशेवर योग्यताओं को प्रभावी बनाने के लिए समुचित उपाय उठएंगे ताकि वे एक सम्पूर्ण तथा समावेशी जीवन जी सके। इन उपायों को क्रियान्वित करने में विकलांगता की विविधता, लिंग, आयु, सामाजिक- आर्थिक स्थिति प्रासंगिक चिन्तन के विषय होंगे।

3.  उप-धारा (2) की जिम्मेदारियों की व्यापकता के प्रति बिना किसी पूर्वाग्रह के विकलांग बच्चों को जीवन के विकास के वही अवसर प्राप्त हों जो दूसरे बच्चों को उपलब्ध हैं, सक्षम सरकार तथा स्थानीय अधिकारी विकलांग बच्चों की योग्यता निर्माण हेतु ऐसी रणनीतियों बनाएंगे जो यह सुनिश्चित करेंगे कि ये योजनाएं यथासंभव शीध्रतापूर्वक आरंभ हो सके।

4.  इन योजनाओं में उपलब्ध होंगे

i)         विकलांग शिशुओं तथा छोटे बच्चों के माता-पिता को समुचित सहायता तथा मार्गदर्शन ताकि वे स्वयं माता-पिता की जिम्मेदारी संभालने योग्य हो सके,

ii)       विकलांग बच्चे और युवाओं का स्वयं की देखभाल तथा आत्म निर्भरता प्रशिक्षण विकृति की प्रकृति पर निर्भर होगा।

iii)      विभिन्न प्रकार की विकृतियों से ग्रसित बच्चों तथा वयस्कों के बीच सम्पूर्ण संचार प्रोन्नत करना।

iv)     विकलांग बच्चों, अन्य बच्चों विस्तारित परिवार तथा वृहत समुदाय के बीच सामाजिक कुशलताओं की ट्रेनिंग और नेटवर्क का प्रावधान करना,

v)       थिरापी, सर्जिकल अथवा अन्य सुधार हेतु हस्तक्षेप के साथ सहायक वस्तुओं और उपकरणों के लिए भी गुंजाइश रखें।

vi)     गतिशीलता की ट्रेनिंग और वातावरण के प्रति उन्मुखीकरण, सहायक वस्तुओं के उपयोग और तकनीक के क्रियान्वयन के लिए प्रावधान सुनिश्चित करें।

5.  प्रत्येक विकलांग बच्चे को सुयोग्य बनाना सुनिश्चित करने के लिए प्रारंभ से ही प्रयास शुरु करने के लिए सक्षम साकार और अधिकारी निम्न व्यवस्था करेंगे:-

i)         विकलांग शिशुओं और बच्चों की उपस्थिति का सक्रिय रुप से आकलन करे,

ii)       विकलांगता की प्रकृति तथा सुयोग्य बनाने की योजना के विषय में समुदाय में सामान्य, तथा सामुदायिक कार्यकर्त्ताओं डॉक्टरों, शिक्षकों को अधिक विशेष रुप से जानकारी दें।

6.  सुयोग्य योजना का एक गतिशील तरीका होगा और आयु, लिंग, स्थानीय वातावरण तथा विकलांग व्यक्तियों को क्रियात्मक लक्ष्य के अनुरूप इसके हस्तक्षेप और परिणाम के स्वरूप में परिवर्तन होगा।

7.  प्रत्येक विकलांग व्यक्तियों को स्वयं की सुयोग्यता योजना पर निर्णय लेने का अधिकार होगा तथा बच्चों की विकास परक क्षमता को सहायता तथा उनकी सहभागिता प्राप्त करने के लिए समुचित ध्यान देना होगा।

27A. पुनर्वास का अधिकार:

1.  आयु, जिस स्थान पर जिन परिस्थितीयों में विकृति आई हो, तथा विकृति की प्रकृति पर ध्यान दिए बिना सभी व्यक्तियों को संपूर्ण एवं सार्थक, स्वतंत्र जीवन जीने का अधिकार होगा।

2.  सभी विकलांग व्यक्तियों को जीवन के अधिकार तथा जीवन यापन की प्रगति के लिए अन्य के साथ समता के आधार पर आदर्श पुरुष, पेशेवर, समुदाय एवं राज्य का सहयोग अपने व्यक्तिगत, सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक सहभागिता के लिए अधिकार होगा।

3.  उपरोक्त सुयोग्यता के अधिकार के क्रियान्वयन हेतु सक्षम सरकार तथा स्थानीय अधिकारी उपयुक्त आदर्श आधारित तथा पेशेवर हस्तक्षेप की व्यवस्था करेंगे ताकि विकलांग व्यक्ति अपने मन और शरीर के बदले हुए स्वरूप को स्वीकार कर सकें।

4.  सभी विकलांग व्यक्तियों को मान्यता प्राप्त गुणवत्ता की सुलभ मूल्य पर सहायक वस्तु तथा उपकरण के उपयोग हेतु आवश्यक ट्रेनिंग के साथ अधिकार होगा।

5.  प्रत्येक विकलांग व्यक्ति को पुनर्वास के विभिन्न विकल्पों की जानकारी का अधिकार होगा यद्यपि, पुनर्वास के तरीके का निर्णय विकलांग व्यक्ति ही करेगा।

27B. शोध एवं विकास

1.  सक्षम सरकार और विकलांगता अधिकार प्राधिकार व्यक्ति अथवा संस्थान के माध्यम से शोध एवं विकास प्रारंभ करेंगे या प्रारंभ करने का प्रयत्न उन विषयों पर करेंगे जिनसे विकलांग व्यक्ति की सुयोग्यता निर्माण और पुनर्वास की प्रक्रिया में वृद्धि हो।

28.सांस्कृतिक जीवन, अवकाश-आराम मनोरंजन तथा खेलकूद में सहभागिता

1.  विकलांग व्यक्तियों को भी, समानता के आधार पर, सांस्कृतिक जीवन, अवकाश,-आराम, मनोरंजन तथा खेलकूद में दूसरों के साथ सहभागिता का अधिकार होगा।

2.  किसी भी व्यक्ति को उसकी विकलांगता के आधार पर खेलकूद, सांस्कृतिक, आराम-अवकाश तथा  पाठ्यक्रम संबंधित और गैर पाठ्यक्रम संबंधित गतिविधियों में सहभागिता करने से रोका नही जायगा।

3.  सक्षम सरकार और स्थानीय अधिकारी विकलांगताग्रसित व्यक्ति को सांस्कृतिक जीवन, खेलकूद तथा  मनोरंजन की गतिविधियों में प्रभावी सहभागिता की गारंटी हेतु समुचित उपाय करेंगे ।

4.  सक्षम सरकार और विकलांग व्यक्तियों के लिए मुख्यधारा स्पोर्ट्स मनोरंजन तथा सांस्कृतिक गतिविधियों में सहभागिता को प्रोत्साहित एवं प्रोन्नत करने के लिए उपयुक्त उपाय करेंगे ताकि उनकी सांस्कृतिक, कलात्मक तथा बौद्धिक संभावनाओं का विकास एवं उपयोग हो सके।

5.  उप-धारा (2) तथा (3) में वर्णित सामान्य जिम्मेदारी के प्रति बिना किसी पूर्वाग्रह के सक्षम सरकार सांस्कृतिक जीवन, आराम, अवकाश तथा स्पोर्ट्स में प्रभावी सहभागिता हेतु विशिष्ट उपाय करेंगी इनमें सम्मिलित होंगे:

क)     सांस्कृतिक तथा कला के विषयों के प्रारूप में संशोधन का प्रावधान करना ताकि विकलांग व्यक्ति भी इनमें सहभागिता कर सके ।

ख)    विकलांग व्यक्तियों से संबंधित साहित्य एवं कला जैसे संगीत, नाटक, थियेटर तथा भाषा के प्रोत्साहन एवं विकास को प्रोत्साहित तथा विकसित करने के प्रयास।

ग)     विकलांग व्यक्तियों को भी समाविष्ट करने के लिए संरचना, स्पोर्ट्स सुविधाओं कार्यक्रमों, मनोरंजन गतिविधियों, खेलकूद आदि के कार्यक्रमों को आकार देने के लिए डिज़ाइनिंग, प्रोन्नत तथा कार्यक्रमों का आयोजन और विकास करना,

घ)     विकलांग व्यक्तियों का मनोरंजन तथा स्पोर्ट गतिविधियों को उनके पहुंच योग्य तथा समावेशी बनाने की गारंटी देना और तकनीक का विकास करना।

ङ)      सभी स्पोर्ट्स तथा मनोरंजन संबंधी गतिविधियों में बहु-संवेदनशील आवश्यक वस्तुओं तथा विशेषताओं को सम्मिलित करना ।

च)     निधि का विशेष आवंटन वर्तमान सुविधाओं के विकास एवं बेहतर उपयोग के लिए किया जाय ताकि विकलांग व्यक्तियों को सम्मिलित किया जा सके ।

छ)     विकलांगता की विशिष्टता सहित कार्यक्रमों का विकलांग व्यक्तियो के लिए आयोजन और उपयुक्त उपायों को प्रोन्नत करना।

1. कोचींग सुविधा के साथ ऐसे स्पोट्सॅ शिक्षको की सेवाएं उपलब्ध करवाना जो विकलांग व्यक्तियों की आवश्यकताओं को समझते है, तथा

2. यह सुनिश्चित करना कि विकलांग बच्चों को खेलकूद, सांस्कृतिक, मनोरंजन तथा आराम-अवकाश की गतिविधियों में अन्य के साथ समानता के आधार पर भाग लेने का अधिकार है।

6.  विकलांग बच्चों को अन्य के साथ खेलकूद, मनोरंजन तथा आराम-अवकाश की गतिविधियों में स्कूल में आयोजित गतिविधियों सहित भाग लेने का समान अधिकार प्राप्त होगा।

नियामक और निर्णायक प्राधिकरण

“विकलांगता अधिकार प्राधिकरण”

1.  सभी विकलांगताग्रासित व्यक्तियों द्वारा सभी माननीय अधिकारों को प्रोन्नत, संरक्षण तथा बुनियादी स्वतंत्रताओं द्वारा उपभोग सुनिश्चित करने के लिए एक प्राधिकरण की स्थापना की जायगी जिसे “विकलांगता अधिकार प्राधिकरण” (Disability Rights Authority) कहेंगे,

2.  “विकलांगता अधिकार प्राधिकरण” इस उल्लेखित नाम से कार्पोरेट निकाय होगा, निरंतर उत्तराधिकाय और एक सामान्य मोहर सहित जिसके अधिकारों में, इस अधिनियम के प्रावधानों के अन्तर्गत, परिसम्पत्ति अधिग्रहण कहने, संभालने चल एवं अचल दोनों को, तथा संविदा करने, मुकदमा दायर करने तथा मुकदमा दायर होने पर (किसी अन्य पक्ष द्वारा) मुकदमा लड़ने का अधिकार होगा,

3.  विकलांगता अधिकार प्राधिकरण का मुख्य कार्यालय तथा स्थल नई दिल्ली होगी,

4.  विकलांगता अधिकार प्राधिकरण भारत के अन्य स्थानों पर भी कार्यालय स्थापित कर सकता है।

29A. प्राधिकरण की संरचना तथा प्रबंधनः

1.  विकलांगता अधिकार प्राधिकरण में एक अध्यक्ष (Chair-person) तथा अधिशासी मंडल (Governing Board) होंगे,

क)     14 सदस्य जो विकलांगताग्रासित व्यक्ति होगा तथा इनकी नियुक्ति एक निर्वाचक मंडल द्वारा निर्वाचन के आधार पर होगा – तथा इसमें विकलांगताग्रासित व्यक्तियों के संगठन, विकलांगताग्रासित व्यक्तियों के परिवारों के संगठन, तथा विकलांगताग्रासित व्यक्तियों के अधिकारों के लिए कार्य रहे संगठन होंगे जिन्हें इन अधिनियम अथवा राष्ट्रीय न्यास अधिनियम, 1999 (National Trust-1999) के अन्तर्गत विनिर्देशित कार्यविधि द्वारा निबंधित किए गए है।

ख)    5 सदस्य जो भारत के संयुक्त सचिव के नीचे पदाधिकारी व्यक्ति नहीं होंगे तथा इनका मनोनयन भारत सरकार द्वारा किया जाएगा, प्रत्येक मंत्रालय से एक प्रतिनिधि यथा, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (विकलांगता प्रभाग), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, नागरीय विकास, ग्रामीण विकास तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय,

ग)     2 सदस्य जिन्हें फेडरेशन ऑफ इन्डियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इन्डस्ट्री तथा भारतीय उद्योग परिसंघ मनोनीत करेंगे, और

घ)     सक सदस्य सचिव जिन्हें विकलांगता क्षेत्र का आवश्यक ज्ञान तथा अनुभव प्राप्त होगा, उनकी नियुक्ति विनिर्देशित कार्यविधि के अनुरुप होगी।

2.  यदि ऐसी आवश्यकता का अनुभव हो कि विकलांगता अधिकार प्राधिकरण के साथ किसी विषय पर विचार-विमर्श के उद्देश से किसी अन्य मंत्रालय अथवा विभाग के प्रतिनिधि को बुलाना पड़े, तब अध्यक्ष उन्हें आमंत्रित कर सकता है,

3.  राष्ट्रीय न्यास के अध्यक्ष तथा भारत के पुनर्वास परिषद (Rehabilitation council of India) के अध्यक्ष अधिशाली मंडल (Governing Body) के पदेन (Ex-Office) सदस्य होंगे,

4.  अधिशाली मंडल की कार्यावधि 5 वर्षो की अवधि होगा तथा कोई भी व्यक्ति विकलांगता अधिकार प्राधिकरण का लगातार दो पदावधि से अधिक सदस्य नहीं बन सकता है,

5.  विकलांगता अधिकार प्राधिकरण एक कार्यकारिणी मंडल द्वारा संचालित होगा जिसका गठन अधिशासी मंडल के सदस्यों के बीच से ऐसी कार्यविधि द्वारा होगा जैसा कि विनिर्देशित किया जाएगा।

6.  कार्यकारिणी मंडल में अध्यक्ष तथा 9 अन्य सदस्य होंगे। अधिशासी मंडल का अध्यक्ष पदेन कार्यकारिणी मंडल का अध्यक्ष होगा, 9 अन्य सदस्य में से, 4 सदस्य चयनित सदस्यों के प्रतिनिधि होंगे, 2 सदस्य सरकार के प्रतिनिधि होंगे, दो सदस्य राष्ट्रीय संस्थान (National Institute) के सदस्य तथा एक सदस्य वाणिज्य और उद्योग का प्रतिनिधि होगा।

7.  कार्यकारिणी मंडल एक सदस्य की नियुक्ति प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के तौर पर कर सकता है, जो अध्यक्ष के अधिकारों तथा कार्यो का वहन करेगा जिन्हें अध्यक्ष निर्धारित करे या निभाने को कहे।

8.  विकालांगता अधिकार प्राधिकरण  के मामलों के पर्यवेक्षण, निर्देशन तथा प्रबंधन का अधिकार कार्यकारिणी मंडल के सदस्यों पर होगा जो सभी अधिकारी का प्रयोग एवं ऐसे सभी कार्य करेगा जिन्हें विकलांगता अधिकार प्राधिकरण करता अथवा किया जाता।

9.  अध्यक्ष तथा अधिशासी मंडल के सदस्य पूर्णकालिक सदस्य होंगे।

29B. अधिशासी मंडल के चयनित सदस्यों के लिए आरक्षणः

1.  अधिशासी मंडल के 14 विकलांगताग्रासित सदस्यों में से, निम्नलिखित आरक्षण का प्रावधान होगाः

क)     एक सीट स्व-परायणता, बौध्दिक विकलांगता तथा मानसिक मंदताग्रसित व्यक्तियों के लिए आरक्षित होगा,

ख)    एक सीट मानसिक बीमारियों से पीड़ितों के लिए आरक्षित होगा,

ग)     एक सीट बहु–विकलांगता श्रवण–नेत्रहीन एवं बहु Sclereosis से पीड़ित व्यक्तियों के लिए आरक्षित होगा,

घ)     दो सीटें विकालांगताग्रसित महिलाओं के लिए आरक्षित होगा।

2.  उप–धारा (1) के प्रावधान केवल तभी तथा उसी सीमा तक लागू होंगे कि जिन व्यक्तियों का उल्लेख है उनके प्रतिनिधित्व सामान्य निर्वाचन में नही मिल पाएं,

3.  उस स्थिति पर जब उप–धारा (1) के अन्तर्गत खंड (क) में अथवा उप–धारा (1) के खण्ड (b) में  विकलांगताग्रासित व्यक्ति चुनाव के खड़े होने के लिए उपलब्ध न हो, तब इस प्रकार से आरक्षित सीटें विकलांगताग्रासित व्यक्तियों को देखरेख सेवा प्रदान करने वालों के लिए छोड़ दिया जायगा।

29C. अध्यक्ष के लिए चयन समिति

1.  अध्यक्ष की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति के आदेश एवं मोहन के अन्तर्गत होगा, बशर्ते कि प्रत्येक नियुक्ति चयन समिति की अनुशंसा पर होगी- जिसमें (चयन समिति में) होंगोः-

क)     भारत के प्रधान मंत्री,

ख)    लोक सभा में विपक्ष के नेता,

ग)     राज्य सभा में विपक्ष के नेता,

घ)     सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के केन्द्रीय मंत्री,

ङ)      कार्पोरेट मामलों के केन्द्रीय मंत्री

च)     दो ऐसे व्यक्ति जिनकी निष्ठावान तथा सम्मानित हो, जिन्हें विकलांगता के क्षेत्र, विधि, स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रबंधन, उद्योग, अर्थशास्त्र, व्यवसाय, वाणिज्य तथा सार्वजनिक मामलों के क्षेत्र में विशेष अनुभव और जानकारी हो।

29D. अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों को इस्तीफा हटाया जाना तथा निलंबन

1.  अध्यक्ष भारत के राष्ट्रपति को लिखित इस्तीफा देकर पदमुक्त हो सकता है।

2.  कोई अन्य सदस्य अध्यक्ष को लिखित रूप से इस्तीफा देकर पदयुक्त हो सकता है।

3.  भारत के राष्ट्रपति अध्यक्ष को उसके पद से हटा सकते है यदि उसेः

क)     दिवालिया घोषित किया गया है, अथवा

ख)    उस पर ऐसे अपराध के आरोप लगे हों, जो अधिशासी मंडल के विचार से नैतिक चरित्रहीनता हो, अथवा

ग)     ऐसे आर्थिक अथवा अन्य हित का अधिग्रहण किया हो, जो पूर्वाग्रह पूर्वक ऐसे व्यक्ती द्वारा सदस्य की तरह कार्य करने पर विपरीत प्रभाव डालें,

घ)     अपने पद का ऐसा दुरूपयोग किया हो कि उसका पद पर बने रहना जनता के हित में न हो।

4.  अधिशासी मंडल, विशिष्ट बहुमत द्वारा प्रस्ताव पारित कर किसी सदस्य को पद से हटाया जा सकता है, जिसे:

क)     दिवालिया घोषित किया गया है, अथवा

ख)    उस पर ऐसे अपराध के आरोप हो, जो अधिशासी मंडल के विचार से नौतिक चरित्रहीनता हो, अथवा

ग)     ऐसे आर्थिक अथवा अन्य हित का अधिग्रहण किया हो, जो पूर्वाग्रहपूर्वक ऐसे व्यक्ती कारा सदस्य की तरह कार्य करने पर विपरीत प्रभाव डाले, अथवा

घ)     अपने पद का ऐसा दुरूपयोग किया हो कि उसका पद पर बने रहना जनता के हित में न हो।

5.  किसी भी सदस्या को पद से उप-धारा (3) के खंड (c) खंड (d) तथा उप-धारा (4) के खंड (c) अथवा खंड (d) खंड के अन्तर्गत तक तक हटाया नहीं जा सकेगा जब तक कि उसकी बात सुने जाने का उसे समुचित अवसर नहीं दिया गया हो।

6.  अध्यक्ष की मृत्यु, इस्तीफा, निलंबन अथवा हटाए जाने के कारण पद रिक्त होने की अवस्था में, उपाध्यक्ष, अध्यक्ष की तरह कार्य करेगा जब तक कि इस अधिनियम की प्रावधानों के अनुसार ऐसे रिक्त पद को भरा नहीं जाता, कार्यालय में प्रवेश नहीं हो जाता।

7.  जब अध्यक्ष अपने कार्यलय के कार्यो को अनुपस्थिति, बीमारी, अथवा अन्य किसी कारण से पद के अनुरूप कार्य करने में असमर्थ हो तब उपाध्यक्ष उनके कार्यो का तक निर्वहन करेगा जब तक कि अध्यक्ष अपना पदभार संभाल नहीं लें।

29E. विकलांगताग्रसित व्यक्तीयों के लिए राष्ट्रीय निधि की स्थापना:

1.  इस अधिनियम के उद्देश्य की पूर्ति हेतु एक निधि का गठन होगा जिसे विकलांगताग्रसित व्यक्तीयों का राष्ट्रीय निधि कहेंगे और इसमें ऐसे सब रखे जाएंगे:

क)     उच्चतम न्यायालय के दिनांक 16.04.2004 की अपील संख्या वर्ष 2000 का 4655 तथा 5218 के निर्णय के परिणाम स्वरूप बैंको तथा कार्पोरेशंस द्वारा भुगतान किए गए सभी पैसों को,

ख)    केन्द्रीय सरकार द्वारा योगदान किए जाने वाले धन के समकक्ष खंड (a) के अन्तर्गत संग्रहित धन,

ग)     अनुदान, उपहार, दान, लाभ, अन्तरण के परिणाम स्वरूप प्राप्त तथा

घ)     वे सभी धन (पैसा) जिन्हें अन्य किसी तरीके अथवा स्त्रोत से प्राप्त किया गया है।

2.  (धारा 29E की उप-धारा खंड (a) तथा (b) के अन्तर्गत प्राप्त पैसे निधि का कॉर्पस माना जायगा जिसे विकलांगता अधिकार प्राधिकरण द्वारा ट्रस्ट के रूप में रखा जायगा। इस कॉर्पस से प्राप्त आय को ही केवल DRA के विभिन्न कार्यो के लिये खर्च किया जायगा।

29F.  पूर्व में विकलांगताग्रसित व्यक्तीयों की निधि का समापन तथा उनके अधिकार, परिसम्पत्तियों एवं देनदारियों को विकलांगताग्रसित व्यक्तीयों की राष्ट्रीय निधि में स्थानान्तरित करना।

धारा 29E के अनुरूप विकालांगताग्रसित व्यक्तीयों की राष्ट्रीय निधि के गठन की तिथि पर तथा उसके पश्चात् से, पूर्व की विकलांग व्यक्तीयों की निधि विघटित समझी जायगी तथा ऐसे विघटन पर:

क)     सभी परिसम्पत्तियां तथा चल एवं अचल धन-सम्पत्ति जो विघटित निधि की थी या में थी सभी विकलांगताग्रसित व्यक्तीयों की राष्ट्रीय निधि में सम्मिलित समझे जाएंगे,

ख)    विधटित निधि के सभी अधिकार तथ देनदारियॉ विकलांगताग्रसित व्यक्तीयों की राष्ट्रीय निधि में स्थानान्तरित कर दिए जाएंगे,

ग)     खंड वाक्य  (b) के प्रावधानों के प्रति बिना किसी पूर्वाग्रह के – सभी देनदारियों, सभी संविदाओं जिन पर समझौता हुआ है, तथा वे सभी विषय और वस्तुएं जिन्हें संलग्न किया गया है अथवा जिन पर विघटित निधि के लिए कार्य हुआ है-उन्हें जैसे भी मामले हों, खर्च की गई, संविदा पर समझौता, अथवा राष्ट्रीय निधि से साथ या, के लिए संलग्न किए गए समझे जाएंगे।

29G. केन्द्र सरकार द्वारा अनुदान:

1.  केन्द्र सरकार इसके पक्ष में विधि सम्मत समुचित विनियोजन के पश्चात् प्राधिकरण के लिए अनुदान द्वारा इतनी राशि की व्यवस्था करेगा जितना इस अधिनियम की आवश्यकता हेतु उपयोग में लायी जाएगी।

2.  सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों तथा सार्वजनिक लिमिटेड कम्पनियों द्वारा राष्ट्रीय विकलांगता निधि में उनकी “कार्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी” की पूर्ति हेतु योगदान माना जायगा।

29H. आय और सम्पत्ति कर से छूट

1.  सम्पत्ति कर अधिनियम, 1957 (1957 का 27) में कुछ निहित के बावजूद, आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) या वर्तमान में जारी अन्य किसी सम्पत्ति, आय लाभ अथवा अर्जन से संबंधित कर, उनकी सम्पत्ति से होने वाले आय, लाभ अथवा अर्जन से DRA को सम्पत्तिकर, आयकर अथवा अन्य कोई कर नहीं देना पड़ेगा।

29I.  प्राधिकार के कार्य:

1.  इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार DRA का यह कर्त्तव्य होगा कि विकलांगलाग्रसित व्यक्तियों के अधिकारों के क्रियान्वयन को प्रोन्नति, संरक्षण तथा अनुश्रवण करने के लिए ऐसे कदम उठाए जिन्हें वे सही समझते हों।

2.  पूर्व में जारी प्रावधानों की व्यापकता के प्रति बिना किसी पूर्वग्रह के, यहां उल्लेखित उपायों में निम्न प्रावधान किए जाएंगे –

क)     विकलांगताग्रसित लोगो द्वारा जिन विषयों का सामना करना पड़ता उनके समाधान हेतु एक प्रभावी एवं सम्पूर्ण राष्ट्रीय निति का विकास, वैधानिक तथा नियामक ढांचा का विकास करना,

ख)    केन्द्र, राज्य तथा स्थानीय स्तर पर, नियमित अवधि के अन्तराल में विकलांगता अधिकारों की अनुरूपता हेतु विधानों, नीतियों, नियमों, कानूनों, उप-बन्धों, कार्यक्रमों अधिसूचना तथा अन्य वैधानिक साधनों की समीक्षा की जायगी।

ग)     DRA के गठन के 6 महीनों के अन्दर एक कार्य योजना का निर्माण और प्रकाशन किया जायगा जिनसे सिद्धान्तों एवं प्राथमिकताओं, DRA द्वारा की गयी गतिविधियों को दो वर्षो की अवधि हेतु सूचीबद्ध करना तथा जब और जैसे आवश्यकता होने पर समीक्षा करना तथा संशोधित करना सम्पन्न होगा।

घ)     अधिनियम तथा DRA की भूमिका एवं गतिविधियों को जन साधारण द्वारा समझने तथा मागदर्शन हेतु सूचना कार्यक्रमों का विकास और संचालन किया जायगा, ताकि पूरे समाज में विकलांगताग्रस्त व्यक्तीयों के अधिकारों तथा प्रतिष्ठा को परिवार स्तर तक की सम्मान देने के प्रति सग्राही बनाया जा सके।

ङ)      जनसाधरण तथा निजी क्षेत्र के सार्वजनिक संगठनों, नियोजकों, तथा सेवा उपलब्ध कराने वालों, एन.जी.ओ. तथा जन सेवा के प्रेरित व्यक्तीयों के साथ समझदारी को प्रोन्नत, क्षमता निर्माण तथा अच्छे व्यवहारों को प्रोत्साहित करने के लिए आपसी सहभागिता एवं सद्व्यवहारों का विनियम एंव विकास किया जायगा।

च)     शोध कार्य करना, आंकड़े और विकलांगताग्रसित व्यक्तीयों से सम्बन्धित विषयवस्तु एकत्रित करना तथा उनके प्रसार को विकलांगता अधिकारों को प्रोन्नत करने के लिए प्रमाण आधारित समझदारी द्वारा प्रोन्नत करना,

छ)     विकलांग व्यक्तीयों के अधिकारों के किसी सर्वांगी उल्लंधन का स्वयं जांच-पड़ताल करना,

ज)     विकलांग व्यक्तीयों के अधिकारों की पूर्ण एवं प्रभावी प्राप्ति से संबंधित विषयों को उठाने के लिए शिकायतों पर कार्रवाई करना,

झ)    किसी न्यायालय में लम्बित विकलांगता अधिकारों के उल्लंधन अथवा तथाकथित किसी कार्रवाई में ऐसे न्यायलाय की स्वीकृति से हस्तक्षेप करना,

ञ)     व्यवहार के मानकों पर नियामक की बाध्यता निर्गत करना, और

ट)      उपरोक्त कार्रवाई को क्रियान्वित करने हेतु अन्य कोई सहायक कार्य करना जिनसे ऐसे कार्यो के कर्त्तव्य निर्वहन में सुविधा हो।

29J.  विकलांगता अधिकार प्राधिकरण (DRA) की समीक्षा तथ परामर्श का अधिकार

1.  जहां DRA को ज्ञात हो कि कोई कानून, नीति, अथवा परंपरा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों के प्रति भेदभाव करते हों, यह धारा 2 (ff) (i) के अन्तर्गत संदर्भित सक्षम सरकार या प्रतिष्ठान को तथाकथित भेदभाव अथवा उल्लंधन पर कार्रवाई करने के उपाय करेंगे।

2.  सक्षम सरकार अथवा उपरोक्त उल्लेखित प्रतिष्ठान DRA को दिए गए सलाह के बारे में परामर्श कर सकता है।

3.  सक्षम सरकार अथवा उपरोक्त उल्लेखित प्रतिष्ठान संसद अथवा राज्य विधान सभा, जैसे भी मामले हों, दिए गए सलाह के अनुरूप उप-धारा................ के अन्तर्गत कार्रवाई कर सकते हैं।

29K. समीक्षा करने, सलाह देने एवं रिपोर्ट करने का अधिकार

1.  जहां DRA को यह ज्ञात हो कि कोई व्यवहार प्रत्यत्क्ष या अप्रत्यतक्ष रूप से विकलांग जनों के अधिकार के विरूद्ध भेदभाव अथवा उल्लंधन कर रहे हैं, यह धारा 2 के (ff) (ii), (iii). (iv), (v) तथा (vi) के अन्तर्गत प्रतिष्ठान को समय-सीमा के अन्दर तथाकथित भेदभाव अथवा उल्लंधन का समाधान करने के लिए सलाह देंगे।

2.  विकलांग अधिकार प्राधिकरण DRA उपरोक्त प्रतिष्ठान द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किए जाने पवर प्रतिष्ठान पक्ष को को सुनाई का अवसर देगा।

3.  सुनवाई के पश्चात्, विकलांग अधिकार प्राधिकरण राष्ट्रीय विकलांगता आयुक्त के न्यायालय को प्रतिष्ठान द्वारा तथाकथित भेदभाव अथवा उल्लंधन पर कार्रवाई करने में विफलता की रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए प्रेषित करेगा।

29L. विकलांग व्यक्तीयों के अधिकारों की योजनाबद्ध उल्लंधन के मामलों को ज्ञात करने के लिए प्रेरित       जांच/पूछ-ताछ संचालित करने का अधिकार।

1.  विकलांग अधिकार प्राधिकरण एवं विकलांगता भेदभाव एवं उत्पीड़न जांच-पड़ताल का संचालन विकलांगता के अधिकार योजनाबद्ध उल्लंधन विभिन्न हितधारकों द्धारा किए जाने के प्रमाण की मांग करेगा।

2.  विकलांग अधिकार प्राधिकरण सभी प्रासंगिक हितधारकों से लिखित रिपोर्ट लेकर तथा बैठकों तथा जन-सुनवाई का विकलांगता अधिकार विषयों में संलग्न व्यक्तीयों तथा संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ परामर्श करेंगे।

3.  विकलांगता अधिकार प्राधिकरण प्रश्नावली के माध्यम से समझने योग्य प्रारूप में एक सर्वेक्षण संचालित करेगा तथा वादियों से विकलांगता अधिकार से वंचित कैसे किया गया इस की जानकारी प्राप्त करेगा।

4.  विकलांग अधिकार प्राधिकरण जांच-पड़ताल तथा सर्वेक्षण के आधार पर क्षेत्रों की पहचान, उन संगठनों तथा नीतियों जिनके कारण योजनाबद्ध तरीके से अधिकार से वंचित किए जाने की क्रिया हो रही है की पहचान करेगे तथा भेदभावपूर्ण व्यवहार एवं नियमों पर एक रिपोर्ट दर्ज करेंगे।

5.  विकलांग अधिकार प्राधिकरण जांच-पड़ताल आयोजित करने के उद्देश्य से केन्द्र अथवा राज्य सरकार की स्वीकृति केन्द्र अथवा राज्य जैसे भी मामले हों से किसी पदाधिकारी अथवा जांच एजेन्सी की सेवाओं का उपयोग करेगा।

6.  किसी विषय पर जांच के उद्देश्य से पूछ-ताछ के संबंध में कोई पदाधिकारी अथवा एजेन्सी जिसकी सेवाएं उप-धारा (1) के अन्तर्गत ली जा रहीं है, विकलांग अधिकार प्राधिकरण के निर्देश एवं नियंत्रण के अधीन:

क)     किसी भी व्यक्ती को सम्मन देकर उपस्थिति के लिए बाध्यकर सकता है,

ख)    किसी दस्तावेज की खोज एवं प्रस्तुत करवा सकता है,

ग)     किसी भी कार्यालय से किसी नागरिक रिकॉर्ड अथवा प्रतिलिपि प्राप्त कर सकता है,

7.  जहां विकलांग अधिकार प्राधिकरण जांच उपरान्त यह पाता है कि योजनाबद्ध तरीके से विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों का उल्लंधन किया गया है, इसे यह अधिकार होगा कि जिन पक्षों को ऐसे अधिकारों के उल्लंधन में लिप्त पाया गया है उन्हें अनुपालन नोटिस जारी करें।

8.  एक नोटिस की और भी आवश्यकता विकलांग अधिकार प्राधिकरण के अनुपालन के आकलन हेतु सूचना ज्ञात करने के लिए होगी।

9.  विकालांग अधिकार प्राधिकरण पक्षों के साथ परामर्श के आधार पर एक लिखित वचन का विकास करेंगे जो अनुपालन सुनिश्चित करने के उपायों का प्रावधान करें।

10. उपरोक्त वचन के अनुपालन में विफलता का परिणाम सजा तथा जुर्माना लगाने के रूप में हो सकता है।

11. ऐसे पक्ष जिनके विरूद्ध कोई सजा अथवा जुर्माना उप-धारा (4) के अन्तर्गत लगाई गयी हैं, वे इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार राष्ट्रीय विकलांगता आयुक्त के न्यायालय में अपील कर सकता है।

12. विकलांग अधिकार प्राधिकरण, जहां यह संभव समझे, भेदभावपूर्ण आधार पर समाप्त करने का प्रयास कर सकता है।

29M. मध्यस्थता और समझौते का अधिकार:

1.  विकलांग अधिकार प्राधिकारण ‘पहुंच-योग्य’ मध्यस्थता तथा समझौता केन्द्रों का रिकॉर्ड रखेगा और अपने इस कर्तव्य को सुनिश्चिचत करेगा कि कोई निकलांगता व्यक्ति जो इस प्रक्रिया के माध्यम से विवाद का समाधान करना चाहता है।

2.  विकलांग अधिकार प्राधिकरण को यह अधिकार प्राप्त होगा कि देश के सभी भागों में समझौते तथा मध्यस्थता केन्द्र की स्थापना हो तथा उन्हें विकलांग व्यक्ति हो तथा उन्हे विकलांग व्यक्ति के अधिकारों के विषय तथा इस अधिनियम के प्रावधानों के लिए नियुक्त करने का अधिकार हो।

3.  विकलांग अधिकार प्राधिकरण को विकलांगजनों से संबंधित विवादों के समाधान हेतु अध्यस्थता एवं समझौता करवाने वालों के लिए ट्रेनिंग कार्यक्रमों का आयोजन करने, कार्यशाला तथा सेमिनार के आयोजन का अधिकार होगा।

29N. व्यक्तियों तथा संगठनों के साथ संस्था निर्माण एवं समन्वय का अधिकार:

विकलांग अधिकार अधिनियम, समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर द्वारा संधियों, सक्रिय भागीदारी में संलग्न होकर अथवा किसी अन्य कार्यविधि के माध्यम से किसी व्यक्ति, संगठन नियामक अधिकारी अथवा ऐसे प्राधिकरण / अधिकारियों से सहयोगिता स्थापित कर सकते हैं जिनकी सहायता तथा परमर्श इस अधिकारियों से सहयोगिता स्थापित कर सकते हैं जिनकी सहायता तथा परमर्श इस अधिनियम के उद्देश्य की पूर्ति के लिए वांछित होंगे।

विकलांग अधिकार प्राधिकरण देश के विशिष्ट क्षेत्रों में कार्यक्षेत्रों में कार्यदलों का संगठन इसके कार्यो तथा कर्तव्यों की पूर्ति के लिए कर सकता है।

29O. कमिटियों की स्थापना:

1.  विकलांग अधिकार प्राधिकरण ऐसी कमिटियों की स्थापना कर सकता है जिन्हें यह सही समझता हो, ताकि इस अधिनियम के अन्तर्गत प्रभावी तरीके के अपने कार्यो को कर सके तथा इस तथा इस अधिनियम के अन्तर्गत ऐसे अधिकारों का उपयोग जिन्हें इसे सौपा जाता है तथा कार्य जिन्हे इसे दिया जाता है के कर्तव्यों का वहन कर सके।

2.  संरचना, सदस्यता, योग्यताएं नियुक्ती की नियम एवं शर्ते, विरमित करना, कार्यावधि, बैठक, करम तथा कमिटि के इस्तीफा विनियमन के आधार पर ज्ञात किए जाएंगे।

29P. लेखा और अंकेक्षण:

1.  विकलांग अधिकार प्राधिकरण समुचित लेखों तथा अन्य प्रासगिक रिकाँर्ड रखेंगे और राष्ट्रीय निधि का वार्षिक लेखा के साथ आय एवं व्यय लेखा ऐसे प्रारूप मं करेंगे जैसा कि भारत के नियंत्रक एवं महा अंकेक्षण (Comntroller & Auditor General of India) चाहते है।

2.  राष्ट्रीय निधि के लेखों का अंकेक्षण भारत के नियंत्रक एवं महालेखाकार ऐसे अंतराल पर करेंगे जिन्हें विनिर्देशित किया गया गया हो, तथा ऐसे अंकेक्षण से संबंधित सभी व्यय विकलांग अधिकार प्राधिकरण द्वारा भारत के नियंत्रक एवं महालेखाकार को देय होगा।

3.  भारत के नियंत्रक एवं महालेखाकार तथा अन्य किसी को व्यक्ति को जिन्हें अंकेक्षण में राष्ट्रीयनिधि के संबंध में नियुक्त किया गया है को वही सुविधाएं तथा अधिकार ऐसे अंकेक्षण के संबंध में प्राप्त होगे जैसा कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखाकार को सरकारी लेखो के अंकेक्षण संदर्भ में प्राप्त रहता है, तथा विशेष रूप से उन्हें लेखा पुस्तकों, संबंधित वाउचन, अन्य दस्तावेजों तथा कागजों को प्रस्तुत करने की मांग का अधिकार तथा DRA के किसी भी कार्यालय के निरीक्षण का अधिकार प्राप्त होगा ।

4.  भारत के नियंत्रक एवं महालेखाकार अथवा अन्य कोई व्यक्ति जिसे इस कार्य हेतु नियुक्त किया गया है द्वारा प्रमाणित राष्ट्रीय निधि के लेखों को इसके अंकेक्षण रिपोर्ट के साथ प्रति वर्ष केन्द्रीय सरकार को अग्रसारित किया जायगा, जो इसे संसद के प्रत्येक पटल पर प्रस्तुत करेंगे।

29Q. विकलांग अधिकार प्राधिकरण का वार्षिक रिपोर्ट

1.  विकलांग अधिकार प्राधिकरण केन्द्र अथवा राज्य सरकार को अपना वार्षिक रिपोर्ट, जैसे भी मामले हों, सौपेंगा, तथा किसी भी समय किसी विषय के संदर्भ में जिसे यह अपने विचॉरों से आवश्यक एवं महत्वपूर्ण समझता है, को वार्षिक रिपोर्ट के समर्पण तक समर्पित करने से पीछे नहीं हटना चाहिए।

2.  केन्द्र सरकार अथवा राज्य सरकार, जो भी हों, आयोग के वार्षिक रिपोर्ट तथ विशेष रिपोर्ट को संसद के प्रत्येक पटल अथवा राज्य विधान सभा को गयी कार्रवाई के ज्ञापन अथवा DRA प्रस्तांवित कार्रवार की अनुशंसा के साथ समर्पित करना होगा साथ ही यदि किसी अनुशंसा को अस्वीकृत किया गया हो तो, अस्वीकृति के कारणों को भी उसके साथ समर्पित करना होगा।

29R. राष्ट्रीय नि:क्तता आयुक्त का न्यायालय

1.  केन्द्र सरकार राष्ट्रीय नि:शक्तता आयुक्त के एक न्यायालय की स्थापना करेगा।

2.  राष्ट्रीय नि:शक्तता आयुक्त के न्यायालय के तीन पूर्णकालिक सदस्य होंगे साथ ही:

क)     एक अध्यक्ष न्यायाधीश कोई ऐसा होगा जिसे उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश होने की योग्यता प्राप्त होगी,

ख)    दो ऐसे व्यक्ति जिन्हें विकलांगता कानूनों की जानकारी होगी तथा विकलांग व्यक्तियों के मानवीय अधिकारों पर विशेषज्ञता तथा अनुभव होगा।

3.  इस धारा के अन्तर्गत नियुक्ती एक कमिटि की अनुशंसा प्राप्त होने पर होगी जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश, उच्चतम न्यायालय के एक वरीय न्यायाधीश तथा विकलांगता कानून के एक विशेषज्ञ होंगे।

4.  राष्ट्रीय नि:शक्तता आयुक्त का वेतन तथा भत्त्ता और राष्टीय नि:शक्तता आयुक्त अन्य नियम एवं शर्ते तथा न्यायालय के अन्य पदाधिकारियों अथवा न्यायालय के कर्मचारियों का एसा होगा जैसा कि केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित कीए गए हों।

29S.  राष्ट्रीय नि:शक्तता आयुक्त के न्यायालय के कार्य

1.  राष्ट्रीय नि:शक्तता आयुक्त का न्यायालय निम्न (कार्य) करेंगे:

क)     विकलांगता अधिकार प्राधिकरण के सभी मूल आदेशों के लिए अपीलीय प्राधिकार का कार्य करेगा,

ख)    विकलांगता अधिकार प्राधिकरण द्वारा संदर्भित विषयों पर निर्णय देगा,

ग)     विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों के हनन पर स्वयं संज्ञान लेगा तथा उपयुक्त आदेश या निर्देश पारित करेगा”

2.  कोई भी पीड़ित व्यक्तियों विकलांगता संबंधित भेदभाव के विषयों पर न्याय हेतु राष्ट्रीय नि:शक्तता आयुक्त के न्यायालय में सीधे जा सकता है।

29T. राष्ट्रीय नि:शक्त आयुक्तों के न्यायालय के अधिकार

1.  राष्ट्रीय नि:शक्तता आयुक्त के न्यायालय का इस धारा के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु, वही अधिकार प्राप्त होंगे जैसा कि निम्न वॉषयों से संबंधित मुकदमों की सुनवाई के दौरान सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 (Code of Civil Procedure) में अन्तर्गत सिविल न्यायालय को प्राप्त रहता है, यथा –

क)     किसी भी व्यक्ति को शपथ के अन्तर्गत जिरह हेतु सम्मान देने तथा उपस्थिति निश्चित करने के लिए,

ख)    दस्तावेजों की खोज ओर प्रस्तुतीकरण,

ग)     प्रमाण के शपथ पत्र,

घ)     भारतीय साक्षय अधिनियम, 1872 (1 of 1982) की धारा 123 एवं 124 के अघीन किसी सार्वजनिक रिकाँर्ड अथवा दस्तावेज अथवा ऐसे रिकाँड का दस्तावेजों की प्रतिलिपियों को किसी भी कार्यालय से मंगाया जा सकता,

ङ)      गवाहों अथवा दस्तावेजों के परीक्षण हेतु आदेश निर्गत करना,

च)     अपने निर्णयों की समीक्षा करना,

छ)     अनुपस्थिति की वजह से कीसी आवेदन को बर्खास्त अथवा एक पक्षीय निर्णय देना,

ज)     अपने द्वारा किसी एक पक्षीय आवेदन की अनुपस्थित के आधार पर पारित

झ)    बर्खास्तगी आदेश को निष्क्रिय करना, और

ञ)     कोई अन्य विषय जिसे संबंधित सरकार द्वारा निर्धारित किया गया हो ।

29U. राष्ट्रीय नि:शक्त आयुक्त के न्यायालय के आदेशों का क्रियान्वयन

1.  राष्ट्रीय नि:शक्तता आयुक्तता आयुक्त के न्यायायल द्वारा पारित किसी निर्णय या आदेश का वही बल प्रभाव होगा जैसा किसी सिविल न्यायालय के निर्णय या आदेश का होता हे तथा उसी तरीके से क्रियान्वित किया जायगा जैसा कि सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 में निर्णय या आदेश को या तो राष्ट्रीय नि:शक्तता आयुक्त के न्यायालय अथवा किसी अन्य न्यायालय द्वारा क्रियान्वित किया जा सकता जहां इसे क्रियान्वयन के लिए भेजा जाता है ।

29V. राष्ट्रीय नि:शक्तता आयुक्त के न्यायालय में कार्यविधि:

1.  कोई भी पीड़ित व्यक्ति विकलांगता के आधार पर किसी भेदभाव के मामले में राष्ट्रीय नि:शक्तता आयुक्त के पास जा सकता है।

2.  राष्ट्रीय नि:शक्तता आयुक्त का न्यायालय शिकायत मिलने पर शिकायत की एक प्रतिलिपि शिकायत में उल्लेखित विरोधी पक्ष को उपलब्ध करवाएगा तथा ऐसे पक्ष का 30 दिनों के अन्दर उत्तर देने के लिए निर्देश देगा।

3.  राष्ट्रीय नि:शक्तता आयुक्त का न्यायालय दोनों पक्षों को अथवा अधिवक्ता के माध्यम से अपने-अपने पक्ष प्रस्तुत करने का समुचित अवसर प्रदान करेगा।

4.  राष्ट्रीय नि:शक्तता आयुक्त के न्यायालय के प्रत्येक कार्यवाही में, यह ऐसे न्यायालयों से किसी विकलांगता विशेषज्ञ की सेवाएं लेने के लिए स्वतंत्र होगा, जिन कार्यो के निर्वहन हेतु अधिनियम के अन्तर्गत उसे न्यायालय की सहायता देने के उद्देयय से लाया गया है।

5.  राष्ट्रीय नि:शक्तता आयुक्त का न्यायालय इसे आवेदित प्रत्येक मामले की यथाशीध्र दस्तावेजों, शपथ पत्रों तथा लिखित प्रतिनिधित्व और मौखिम तर्को को जिन्हें प्रस्तुत किया जायगा, के पठन के बाद निर्णय केरेगा।

6.  राष्ट्रीय नि:शक्त आयुक्त के प्रत्येक कार्यवाही को भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) की धारा 193 तथा 228 अर्थो के अधिक न्यायिक कार्यवाही समझे जाएंगे तथा न्यायाला को सिविल प्रक्रिया संहिता के उद्देश्यों के लिए एक सिविल न्यायालय की तरह माना जायगा।

29W. राष्ट्रीय नि:शक्तता आयुक्त के न्यायालय के निष्कर्ष

1.  राष्ट्रीय नि:शक्तता आयुक्त का न्यायालय कानून तथा तथ्य जिन्हें इसके समक्ष प्रस्तुत किया जायगा दोनों प्रश्नों पर यदि यह संतुष्ट होता है कि इस अधिनियम के अन्तर्गत दी गयी अधिकारों की गारंटी का उल्लंधन हुआ है अथवा इस अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंधन हुआ है, जिन्हें इसके समक्ष उठाया गया है, यह विरोधी पक्ष को एक या अधिक निम्नलिखित विषयों के लिए आदेश देगा –

क)     भेदभाव के व्यवहार अथवा योजना के हटाकर उल्लंधन को सुधारा जाय,

ख)    इस अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंधन करने वाली गतिविधियों को रोका जाय,

ग)     पीड़ित व्यक्ति को किसी हानि अथवा चोट के कष्ट की क्षतिपूर्ति हेतु ऐसी राशि का भुगतान हो जिसका निर्णय दिया गया हो,

घ)     पक्षों को पर्याप्त व्यय की पूर्ति उपलब्ध करायी जाय।

2.  राष्ट्रीय नि:शक्तता आयुक्त के न्यायालय द्वारा जारी प्रत्येक आवेदश को कार्यवाही का संचालन करने वाले सदस्य हस्ताक्षरित करेंगे तथा इसके वेबसाइट में नियमित रूप से प्रकाशित किया जायगा।

29X. राज्य विकलांगता न्यायालय

1.  राज्य सरकार एक “राज्य विकलांगता आयुक्त का न्यायालय” की स्थापना करेगी जिसे राज्य विकलांगता न्यायालय (State Disability Court) कहेंगे।

2.  राज्य सरकार जन सांख्यिकी एवं भोगौलिक आवश्यकता का सम्मान करते हुए राज्य के विभिन्न भागों में आवश्यक संख्या में राज्य विकलांगता न्यायालय की ‘पीठ’ (Banches) की स्थापना कर सकती है।

3.  किसी राज्य विकलांगता न्यायालय में दो पूर्णकालिक सदस्यों के साथ होगे:

क)     एक व्यक्ति अध्यक्ष न्यायाधीश होगा तथा कोई ऐसा होगा कि उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने की योग्यता हो,

ख)    एर व्यक्ति जिसे विकलांगता कानूनों का ज्ञान हो तथा विकलांग व्यक्तियों माननीय अधिकारों के संदर्भ में अनुभ एवं विशेषता हो।

4.  इस धारा के अधीन सरकार द्वारा नियुक्ती एक चयन कमिटि की अनुशंसा प्राप्त करने पर होगी। चयन समिति में अपेक्षित राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, उसी उच्च न्यायालय के एक वरीय न्याशधीश तथा विकलांगता कानूनों के क्षेत्र से एक विशेषज्ञ होंगे। इस धारा के अन्तर्गत नियुक्ती करने के दौरान चयन समिति राष्टीय विकलांगता आयुक्त के न्यायालय से परामर्श कर सकती है।

5.  राज्य विकलांगता आयुक्त तथा राज्य विकलांगता न्यायालय के अन्य पदाधिकारियों या कर्मचारियों को देय वेतन तथा भत्ते तथा सेवा की अन्य नियम ओर शर्ते ऐसी होंगी जिन्हें राज्य सरकार निर्धारित करेगी।

29Y. राज्य विकलांगता न्यायालय के अधिकार:

1.  इस धारा के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए, राज्य विकलांगता न्यायालय को वैसा ही अधिकार प्राप्त होगा जैसा कि किसी सिविल न्यायालय को सिविल कार्यविधि संहिता 1908 (Code of Civil Procedure 1908) के अन्तर्गत किसी मुकदमें की सुनवाई के दौरान निम्नलिखित विषयों में होती है, यथा –

क)     किसी व्यक्तियों सूचना देकर बुलाना तथा उपस्थिति देने के लिए बाधित करना तथा शपथ के अधीन उससे जिरह करना,

ख)    दस्तावेजों को प्रस्तुत करने के लिए उन्हें खोज निकालना,

ग)     शपथ पत्र के अधीन प्रमाण प्राप्त करना,

घ)     भारतीय गवाह अधिनियम (Indian Evidence Act, 1872), [1 of 1873] की धारा 123 तथा 124 के प्रावधानों के अधीन किसी सार्वजनिक रिकाँर्ड अथवा दस्तोज अथवा ऐसे रिकाँर्ड अथवा दस्तावेजों की प्रतिलिपि की मांग किसी भी कार्यालय से करना,

ङ)      गवाहों अथवा दस्तावेजों की परीक्षण हेतु अधिकारिक पत्र देना,

च)     अपने निर्णयों की समीक्षा करना,

छ)     किसी आवेदन को अनुपस्थित रहने के कारण रद्द करना अथवा एक-पक्षीय निर्णय देना,

ज)     अपने द्वारा किसी आवेदन को अनुपस्थित रहने के कारण रद्द करने अथवा एक-पक्षीय निर्णय को निरस्त, और

झ)    कोई अन्य विषय जिसे संबंधित सरकार निर्धारित करे।

29Z. राज्य विकलांगता न्यायालय के आदेशों का अनुपालन

राज्य विकलांगता न्यायालय द्वारा पारित किसी डिग्री अथवा आदेश का उतना ही बल और प्रभाव होगा जितना किसी सिविल न्यायालय का होता है तथा उसी प्रकार डिग्री तथा आदेशों को क्रियान्वित किया जायगा जैसा कि कोड आँफ सिविल प्रोसीड्योर 1908 मं निर्धारित है।

किसी डिग्री अथवा आदेश को या तो राज्य विकलांगता न्यायालय जिसने इस पारित किया है क्रियान्वित करेगा या किसी अन्य न्यायालय द्वारा जहां इसे क्रियान्वयन के लिए भेजा जायगा।

29AA. राज्य विकलांगता न्यायालय की कार्यविधि:

1.  इस अधिनियम के किसी प्रावधान के तथा कथित उल्लंधन पर कोई पीड़ित व्यक्ति राज्य विकलांगता न्यायालय में शिकायत कर सकता है।

2.  शिकायत की प्राप्ति पर यह न्यायालय शिकायत की एक प्रतिलिपि शिकायतवाद में उल्लेखित विरोधी पक्ष को उपलब्ध करवाएगा तथा 30 दिनों के अन्दर उससे प्रत्युत्तर मांगेगा।

3.  यह न्यायालय दोनों ही पक्षों को समुचित अवसर व्यक्तिगत एवं विधिक सलाहकार के माध्यम से देने का अवसर देगा।

4.  राज्य विकलांगता न्यायालय के समक्ष प्रत्येक कार्यवाही में, ऐसे न्यायालय को यह स्वतंत्रता होगी कि किसी विकलांगता विशेषज्ञ की सेवाएं इस अधिनियम की अनुपालन में न्यायालय की उद्देश्यों की पूर्ति में सहायता के लिए होगी।

5.  राज्य विकलांगता न्यायालय इसे आवेदित प्रत्येक आवेदन को यथासंभव शीध्रतापूर्वक दस्तावेजों, शपथपत्र, तथा लिखित वक्तव्यों और ऐसे तर्कों को मौखिक रूप से सुनने के बाद निर्णय देगी ।

6.  राज्य विकलांगता न्यायालय के समक्ष प्रत्येक कार्रवाई भारतीय दंड संहिता की धारा 193 तथा 228 के अर्थो के अन्तर्गत न्यायिक कार्रवाई माने जाएंगे तथा न्यायालय को सिविल न्यायालय, सिविल कार्यविधि की संहिता की उद्देश्य हेतु माना।

29AB. राज्य विकलांगता न्यायालय का निष्कर्ष –

1.  राज्य विकलांगता न्यायालय इसके समक्ष उठाए गए दोनों, विधि तथा तथ्य के प्रश्न पर निर्णय देगा ओर यदि यह इससे संतष्ट होता है कि इस अधिनियम के अन्तर्गत दी गयी अधिकारों की किसी गारंटी का उल्लंधन हुआ है, यह विपक्ष को नोटिस जारी करेगा तथा एक या अधिक निम्नलिखित के संबंध में आदेश निर्गत करेगा।

क)     भेदभाव पूर्ण व्यवहार अथवा योजना को हटाकर उल्लंधन को सुधार जाय,

ख)    इस अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंधन कर रही गतिविधियों को जारी रहने से रोका जाय,

ग)     पीड़ित को किसी क्षति अथवा चोट की क्षतिपूर्ति हेतु इसके द्वारा निर्धारित राशि भुगतान की जाय, अथवा

घ)     राज्य विकलांगता न्यायाल के प्रत्येक आदेश पर कार्यवाही को संचालित करने वाले सदस्य हस्ताक्षर करेंगे तथा इसे वेबसाई पर वियमित रूप से प्रकाशित किया जायेगा।

2.  राज्य विकलांगता न्यायालय द्वारा प्रारित प्रत्येक आदेश को कार्यवही संचालित करने वाले सदस्य हस्ताक्षरित करेंगे तथा इसकी कार्यवाही को नियमित रूप से वेबसाइट में प्रकाशित किया जायगा।

29AC. जुर्माना

राष्टीय विकलांगता आयुक्त के न्यायालय अथवा राज्य विकलांगता न्यायालयों द्वारा दिए गए आदेशों का अनुपालन करने में विफल रहता है-जैसे भी मामले हों, उसे कारावास की सजा जिसकी अवधि 3 वर्षो की हो सकती है अथवा जुर्माना जिसकी सीमा 10 लाख तक हो सकती है अथवा दोनों हो सकते हैं।

अपराध और जुर्माना

30A. जहां इस अधिनियम के अन्तर्गत कोई अपराध किसी प्रतिष्ठान द्वारा की गयी हो,

1.  अपराध घटित होने के समय वह प्रत्येक व्यक्ति जिसकी नियुक्ति प्रमुख के तौर पर हुई थी अथवा प्रत्यक्ष रुप से प्रभारी रहा हो, और प्रतिष्ठान के कार्य प्रंचालन तथा प्रतिष्ठान हेतु जिम्मेदार रहा हो, वह अपराध का दोषी माना जायगा। तथा उनके विरुध्द कार्रवाई होगी तथा उपर्युक्त सजा होगी।

बशर्ते कि, इस उप-धारा के अन्तर्गत निहित ऐसा कुछ भी नही हो जा किसी ऐसे व्यक्ति को किसी दण्ड के लिए जिम्मेदार बनाते हों, यदि वह यह प्रमाणित करता है कि अपराध उसके बगैर जानकारी के हुआ हो या ऐसे अपराध को रोकने के लिए कार्रवाई की गयी हो।

2.  उपधारा (1), में निहित पर ध्यान दिये बिना, इस अधिनियम के अन्तर्गत किसी प्रतिष्ठान द्वारा अपराध किया गया है तथा यह प्रमाणित हुआ है कि अपराध सहमति अथवा मिलीभगत से किया गया है या प्रतिष्ठान के किसी अन्य पदाधिकारी कि लापरवाही की भूमिका का परिणाम है, ऐसे व्यक्ति को दोषी का अपराध माना जायगा और उसके विरुध्द कार्रवाई होगी तथा तदनुसार दंडित किया जाएगा।

30B. अपराधों के लिए सामान्य जुर्मानाः

1.  इस अधिनियम के अन्तर्गत नियमों अथवा आदेशों अथवा निर्देशों का के प्रत्येक अनुपालन में विफलता अथवा उल्लंधन पर दो वर्षो की अवधि अथवा जुर्माना, जिसकी सीमा पचास हजार तक हो सकती है, और यदि यह उल्लंधन जारी रहता है जब अतिरिक्त जुर्माना एक हजार रुपये प्रतिदिन से, दोष सिध्द होने की तिथि से ऐसी विफलता पर दंडनीय होगा,

2.  यह उप-धारा (1) में उल्लेखित विफलता अथवा उल्लंधन एक वर्ष से अधिक की अवधि तक जारी रहता है, अपराधी को 4 वर्षो की सीमा तक कारवास की सजा हो सकती है।

30C. धारा 4K के उल्लंधन के लिए जुर्मानाः

1.  धारा 4K के अन्तर्गत प्रावधानों के अनुपालन में विफल रहने वाले किसी भी सेवा प्रदान करने वाले को सेवा हेतु सर्विस लाईसेंस अथवा उत्पादन को निरस्त किए जाने, प्रतिसंहरण अथवा निलंबन, अथवा जुर्माना-यह एक लाख रुपये तक हो सकता है या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

2.  यदि आरोपित धारा 4K के प्रावधानों का दोष सिध्द होने की तिथि से 6 महीनों के अन्दर, अनुपालन में विफल हो तब, आरोपित को पांच हजार रुपए प्रतिदिन अतिरिक्त जुर्माना से प्रथम दोष सिध्दि की विफलता के जारी रहने के दौरान दंडित किया जाएगा।

30D. धारा 4I के उल्लंधन के लिए जुर्मानाः

1.  किसी व्यक्ति अथवा संगठन अथवा प्रतिष्ठान धारा 4I के अन्तर्गत प्रावधानों के अनुपालन में विफल रहने पर निम्न से दंडित किया जायगाः

क)     जल तथा बिजली की आपूर्ति का ‘प्राप्ति’ की आवश्यकताओं की पूर्ति होने तक निलंबन, अथवा,

ख)    बिल्डर के लाइसेंस का निरस्तीकरण, प्रतिसंहरण अथवा निलंबन, अथवा

ग)     भवन के बाजार मूल्य या आकलित बाजार मूल्य, जैसे भी मामले हों, के पांच प्रतिशत की सीमा तक जुर्माना, अथवा

घ)     उपरोक्त के एक या अधिक के संयोग होने पर।

2.  यदि आरोपी दोष सिध्द होने के पश्चात् 6 महीनों के अंदर 4I के अन्तर्गत प्रावधानों के अनुपालन में विफल रहता है तब उसे प्रतिदिन एक लाख रुपये की सीमा तक, ऐसी विफलता के जारी रहने के दौरान दोष सिध्दि के पश्चात् पहली ऐसी विफलता के लिए दंडित किया जा सकता है।

30E. धारा 4J उल्लंधन के लिए जुर्मानाः

1.  कोई भी व्यक्ति अथवा कोई संगठन अथवा प्रतिष्ठान जो धारा 4J के अन्तर्गत 6 महीनों के अंदर प्रावधानों के अनुपालन में विफल रहता है, जब तक ‘पहुच’ की आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं हो जाती पानी तथा बिजली की आपूर्ति के निलंबन से दोष सिध्दि की तिथि से दंडित किया जायगा अथवा भवन के बाजार मूल्य के पांच प्रशित तक, जो भी मामले हों, या दोनों से दंडित किया जा सकता है,

2.  यदि आरोपी दोष सिध्द होने के पश्चात् 6 महीनों के अन्दर धारा 4J के अन्तर्गत प्रावधानो के अनुपालन में विफल रहता है तब उसे प्रतिदिन एक लाख रुपये की सीमा तक ऐसी विफलता के जारी रहने के दौरान दोष सिध्दि के पश्चात् पहली ऐसी विफलता के लिए दंडित किया जा सकता है।

30F. धारा 10(3) के उल्लंधन पर दण्डः

कोई भी स्वेच्छापूर्वक किसी विकलांग व्यक्ति को चोट पहुंचाता है, किसी व्यक्ति के द्वारा किसी अंग और गुण को स्थायी या अस्थायी रुप से क्षतिग्रस्त करता है या अंग के उपयोग में हस्तक्षेप करता है, उसे कारावास की सजा दी जा सकती है जो 6 महीनों से कम नही होगी, लेकिन आठ वर्षो तक की हो सकती है, अथवा दंड या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

30G. भारतीय दंड संहिता के अन्तर्गत-दोष के लिए सजा में वृध्दिः

भारतीय दंड संहिता (45 of 1860)  के अन्तर्गत किसी व्यक्ति या किसी विकलांग व्यक्ति की परिसंपत्ति के विरुध्द इस आधार पर अपराध किया हो कि ऐसा व्यक्ति एक विकलांग व्यक्ति है, भारतीय दंड संहिता के प्रासंगिक प्रावधानों के अन्तर्गत अधिकतम निर्धारित कारावास को ऐसे प्रासंगिक प्रावधानों हेतु निर्धारित सजा पर ध्यान रखते हुए दो वर्षो की अवधि तक बढ़ाई जा सकेगी,

बशर्ते कि, उन मामलों में किसी अपराध में दी गयी सर्वाधिक सजा दो वर्षो से कम हो अथवा समान हो, वृध्दि के फलस्वरुप भा0 दं0 सं0  में दिए गए सर्वाधिक सजा में उसके दोगुने से अधिक नहीं होगी।

उदाहरणः

क)     धारा 325 के अन्तर्गत, स्वेच्छापूर्वक गंभीर चोट पहुंचाने की सजा सात वर्ष है। तथापि, यदि ऐसा अपराध किसी विकलांग व्यक्ति के विरुध्द होता है, इस तथ्य के आधार पर कि ऐसा व्यक्ति विकलांग है, तब न्यायाधीश सजा की किसी भी अवधि में दो वर्षो तक की वृध्दि कर सकता है, इस प्रकार की अधिकतम कारावास सात वर्ष 6 महीनों, आठ वर्ष 6 महीनों और इस प्रकार अधिकतम 9 वर्षो तक हो सकती है। तथापि, किसी भी अवस्था में कुल 9 वर्षो से अधिक नहीं होगी।

ख)    यदि किसी व्यक्ति या परिसम्पत्ति के विरुध्द भा0 दं0 सं0 के अन्तर्गत अधिकतम 6 महीनों के लिए होगी, यदि ऐसा अपराध किसी विकलांग व्यक्ति के विरुध्द इस तथ्य के आधार किया गया हो कि व्यक्ति विकलांग है, तब न्यायाधीश कारावास की सजा में एक माह अथवा तीन माह या पांच महीनों, अधिकतम 6 महीनों तक की वृध्दि कर सकता है, इस प्रकार की कुल अधिकतम 12 महीनों के लिए दंडित किया जा सकेगा।

30H. धारा 20 (8) (ii) तथा धारा 7F (2) के उल्लंधन के लिएः

1.  किसी विकलांग व्यक्ति के विरुध्द कोई भी मेडिकल प्रक्रिया किसी महिला पर निष्पादित, संचालित अथवा निर्देशित करता है जिसके परिणाम स्वरुप बिना उसकी सहमति के धारा 16(8)(ii) के उल्लंधन के कारण प्रजनन क्षमता समाप्त हो जाय (उसे) जुर्माना सहित सात वर्ष से या जुर्माना दोनों से सात वर्ष तक या उससे अधिक नहीं, जुर्माना सहित दंडित किया जायगा।

2.  किसी विकलांग व्यक्ति की देखरेख सेवा देने वाले, चाहे पेरेन्ट अथवा अभिभावक की तरह अथवा अन्य किसी योग्यता के आधार पर, कानूनी या गैर कानूनी, किसी ऐसे कार्य की सुविधा प्रदान करता है, अथवा लापरवाही के कारण ऐसी मेडिकल प्रक्रिया को अथवा निष्पादन को रोकने में असफल होने पर, पांच वर्षो की सीमा तक जुर्माना सहित कारावास की सजा हो सकती है।

30I.  गर्भ का जबरन समापन पर जुर्मानाः

1.  किसी विकलांग महिला पर कोई भी ऐसी मेडिकल प्रक्रिया का निष्पादन, संचालन अथवा निर्देशन करता है जिसके परिणाम स्वरुप गर्भ का समापन हो जाय या समाप्त होने की स्थिति आ जाय बिना उसकी (महिला) स्पष्ट सहमति के, इसे दस वर्षो की अवधि के कारावास अथवा जुर्माना सहित दंडित किया जायगा।

बशर्ते कि, मेडिकल आवश्यकता के कारण ऐसी मेडिकल प्रक्रिया का निष्पादन किसी अवयस्क पर उसके पेरेन्ट अथवास अभिभावक की सहमति से किया गया हो।

बशर्ते और भी कि ऐसी मेडिकल आवश्यकता की घोषणा किसी अहर्ता प्राप्त मेडिकल पेशेवर ने की हो।

2.  किसी विकलांग व्यक्ति की देखरेख सेवा देने वाले, चाहे पेरेन्ट अथवा अभिभावक की तरह अथवा अन्य किसी योग्यता के आधार पर, कानूनी या गैर कानूनी, किसी ऐसे कार्य की सुविधा प्रदान करता है, अथवा लापरवाही के कारण ऐसी मेडिकल प्रक्रिया को अथवा निष्पादन को रोकने में असफल होने पर, पांच वर्षो की सीमा तक जुर्माना सहित कारावास की सजा हो सकती है।

30J.  धारा 20(ii) के उल्लंधन पर सजाः

3.  किसी विकलांग बच्चे को उसके पेरेन्टस अथवा अभिभावक से कोई स्वेच्छापूर्वक अथवा जानबूझकर कर अलग करता है या अलग करने की प्रक्रिया धारा 20(ii) के उल्लंधन का कारण बनता है, (उसे) सात वर्षो की सीमा तक जुर्माना के साथ कारावास की सजा सहित दंडित किया जा सकता है।

30K. धारा 21D (2) के उल्लंधन पर जुर्माना :

किसी विकलांग व्यक्ति को कोई स्वेच्छापूर्वक अथवा जानबूझकर भोजन या तरल पदार्थ से वंचित करता है या ऐसे वंचित करने की कार्यवाई का सहायता या बढ़ावा देता है तब (उसे) कारावास से दंडित किया जा सकता है जिसकी अवधि 6 महीनों से कम नहीं होगी, लेकिन यह – जुर्माना सहित तीन वर्षो तक भी बढ़ाया जा सकता है

30L. घृणापूर्ण वचन हेतु जुर्माना:

यदि कोई स्वेच्छापूर्वक अथवा जानबूझकर घृणापूर्ण वचन बोलने का अपराध करता है (उसे) एक या एक से अधिक सामुदायिक सेवा कार्यक्रमों में उसे लगाया जाएगा, अथवा जुर्माना सहित अथवा दोनों से दंडित किया जायगा।

व्याख्या:

सामुदायिक कार्यक्रमों का अर्थ हैं, सक्षम सरकार द्धारा विकसित एसे कार्यक्रम जिनमें सम्मिलित होंगे पर सीमित नहीं होंगे- लोगों को विकलांग व्यक्तीयों सहित आवास कर रहे संस्थानों के कार्य संलग्न करना तथा विकलांग व्यक्तीयों से संबंधित कार्यक्रमों में सहभागिता करना।

विविध

31.   नियम बनाने का अधिकार

1.  सक्षम सरकार को इस अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन तखा उद्देश्य की पूर्ति हेतु नियम बनाने का अधिकार होगा,

2.  उप-धारा (1) की व्यापकता के प्रति किसी पूर्वाग्रह के, सक्षम सरकार निम्न से संबंधित नियमों का निर्माण करेगीः

क)     विकलांग व्यक्तियों का इस अधिनियम के अन्तर्गत धारा 4C (2) (d) के अधीन विचार करते हुए उनकी “पहुंच” की आवश्यकता हेतु ड्राइवींग लाईसेस जारी करने के संबंध में,

ख)    इस अधिनियम की धारा 19 C (1) के अधीन व्यवस्खा द्वारा ‘समान अवसर नीति’ से संबंधित उपायों और शर्तौ का निर्माण करना करना,

ग)     इस अधिनियम की धारा 18 H (2) के अन्तर्गत विकलांग व्यक्तियां को उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश हेतु न्यूनतम योग्यता का निर्धार करना,

घ)     विकलांग अधिकार प्राधिकरण की सदस्यों का वेतन तथा भत्ता निश्चित करना,

ङ)      विकलांग अधिकार प्राधिकरण की सदस्यता हेतु किसी व्यक्ति द्वारा चुनाव लङने के लिए योग्यता का निर्धारण ऐसे पदों के लिए आवश्यक अनुभव और योगदान पर ध्यान रखते हुए करना,

च)     विकलांग अधिकार प्राधिकरण में विभिन्न प्रकार की विकलांगता के प्रतिनिधित्व में विविधता सुनिश्चित करने के लिए पदों को आरक्षित करना,

छ)     विकलांग की विविधता तथा वैश्विक डिजइन को ध्यान में रखते हुए संरचना तक पहुंच, सुविधा, सेवाएं, सूचना तथा संचार तकनीक तथा व्यक्तिगत आवागमन की सुविधा की उपलब्धि, और

ज)     इस अधिनियम के क्रियान्वयन हेतु कोई अन्य कारक अथवा सहायक सामग्री।

3.  सक्षम सरकार के नियमों के निर्माण के पूर्व सार्वजनिक क्षेत्र के सदस्यों को नियमों को समझने योग्य प्रारुप में उपलब्ध करवाएगी तथा उनसे इसके प्रति सुझाव तथा आपत्ति आमंत्रित करेगी।

32.   विनियमों के निर्माण का अधिकार

1.  इस अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन तथा उद्देश्य की पूर्ति हेतु सक्षम सरकार अथवा “विकलांगता अधिकार प्राधिकरण”, जैसे भी मामले हों, विनियमों का निर्माण करेगी।

2.  उप-धारा (1) की व्यापकता के प्रति बिना किसी पूर्वाग्रह के, सक्षम सरकार तथा विकलांगता अधिकार प्राधिकरण, जैसे भी मामले हों, निम्न से संबंधित विनियमों का निर्माण करेगीः

क)     विकलांगता की विविधता तथा वैश्विक डिजाइन को ध्यान में रखते हुंए संरचनाओं में मानक ‘पहुंच’, सुविधा, सेवा, सूचना तथा संचार तकनीक एवं व्यक्तिगत आवागमन,

ख)    धारा 7A (12) के अधीन विषय, कार्यविधि, सक्षम पदाधिकारी तथा अन्य आवश्यकताओं सें संबंधित विषय,

ग)     विकलांगताग्रसित व्यक्तियों के संदर्भ में शिक्षकों की ट्रेनिंग तथा शैक्षणिक योग्यताएं जिनकी जरुरत उनके सहयक आवश्यकतओं में होगी,

घ)     धारा 16 के अन्तर्गत विषयों से संबंधित कार्यविधियां

ङ)      विकलांगता अधिकार प्राधिकरण का वार्षिक रिपोर्ट तैयार करना और प्रकाशित, करने के संबंध में कार्यविधि,

च)     विकलांगता अधिकार प्राधिकरण द्वारा गठित कमिटि की संचारना सदस्यता, योग्यता, नियुक्ति की नियम और शर्ते हटाने, अवधि, बैठक कोरम तथा इस्तीफा, और

छ)     इस अधिनियम के क्रियान्वयन हेतु कोई अन्य संबंधित कार्य।

3.  सक्षम सरकार तथा विकलांगता अधिकार प्राधिकरण जैसे भी मामले हों, विनियमों के निर्माण के पूर्व विनियमों को समझने योग्य प्रारुप में सार्वजनिक क्षेत्र के सदस्यों को उपलब्ध करवाएगी तथा उनसे इसके प्रति सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित करेगी।

 

स्त्रोत: इंटरनेट, विकलांग अध्ययन केन्द्र

 

2.96842105263

Dharam singh Sep 29, 2018 12:37 PM

Phical handicapped employees Bina type test incarimant&aqs dene bare

लल्लुराम गेंड रें Sep 26, 2018 08:57 PM

किसी दिव्यांग कर्मचारी को अधिकारी द्वारा शारिरिक व मानसिक रूप से परेशान किया जाता हैं एवम् आपत्ति जनक शब्दों का इस्तेमाल की या जाता है तो कहा शिकायत करे।

Madhu Aug 21, 2018 05:51 PM

Sir I am divyang women right foot (OBC) sir my residence Alwar Rajasthan sir I am BA MA BED Passed candidate sir me pichle 7th year se state govt me Teacher ke liye exam de Rahi hu jisme meri category (LD/CP) ki cutt off meri Caste category (OBC) ki hamesa disabled ki high cutt off jati Rahi Hai sir hall he me RPSC me school lecturer 2015 me Maine pol. Science subject se exam diya tha jisme OBC Mahila ki cutt off 325 Rahi thi or LD/CP divyang ke cutt off 332 Rahi Thi sir me ye nivden karti hu ki divyang candidate cutt off sabhi reserve category se kum honi chaiye jabki sabhi reserve category me MALE or FEMALE ki cutt off Alag Alag jari ki jati hai jabki Divyang Mahilao ke sath kaisa badbhav ye Reservation bhi Lengik Adhar par hona chaye

डॉ वसीम खान Aug 18, 2018 11:20 AM

विकलांग पदस्थापना स्थल भर्ती नियम है क्या कोई? की विकलांग लोगो को निवास के पास बाधा मुक्त स्थान में पदस्थ किया जाय ? कृपया मार्गXर्शX करें

पवन कुमार मेरठ U.प Jun 13, 2018 03:14 PM

दिव्यांग जन कल्याण समिति मेरठ ९९XX९XXXXX एकता मे

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