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प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) – सबके लिए आवास योजना के प्रचालनात्मक दिशा-निर्देश

इस पृष्ठ में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) – सबके लिए आवास योजना के प्रचालनात्मक दिशा-निर्देश प्रस्तुत किये गए है।

मिशन के उद्देश्य हेतु परिभाषाएं

लाभार्थी

लाभार्थी परिवार में पति, पत्नी और अविवाहित पुत्र और/अथवा अविवाहित पुत्री शामिल होंगे। आय आर्जित करने वाले व्यस्क सदस्य को (वैवाहिक स्थिति पर ध्यान दिए बिना) अलग परिवार के रूप में माना जा सकता है;

बशर्ते कि लाभार्थी के पास या तो उसके नाम से भारत के किसी भी भाग में पक्का मकान (सभी मौसम वाली रिहायशी इकाई) नहीं होना चाहिए।

बशर्ते यह भी कि विवाहित जोड़े के मामले में, या तो पति/पत्नी अथवा संयुक्त स्वामित्व में दोनों एक साथ, एक आवास के लिए पात्र होंगे बशर्ते की स्कीम के तहत परिवार की आय पात्रता के अंतर्गत आती हो।

कारपेट क्षेत्र

दीवार के साथ लगा क्षेत्र, कारपेट बिछाने हेतु वास्तविक क्षेत्र। इस क्षेत्र में अंदर की दीवारों की मोटाई शामिल नहीं है।

केन्द्रीय नोडल एजेंसी

मध्यम आय वर्ग के लिए ऋण आधारित सब्सिडी घटक के कार्यान्वयन के उद्देश्य हेतु मंत्रालय द्वारा निर्धारित नोडल एजेंसी।

मध्यम आय वर्ग (एमआईजी) -।

एमआईजी-1 परिवार को 6,00,001 रु. (छ: लाख एक रु.) से 12,00,000 (बारह लाख रु.) तक की वार्षिक आय वाले परिवारों के रूप में परिभाषित किया गया है।

मध्यम आय वर्ग (एमआईजी)- ।।

एमआईजी -।। परिवार को 12,00,001 रूपए (बारह लाख एक रु.) से 18,00,000 रूपए (अठारह लाख रु.) तक की वार्षिक आय वाले परिवार के रूप में परिभाषित किया गया है।

प्राथमिक ऋणदाता संस्थान (पीएलआई)

अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, आवास वित्त कंपनियां, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी), राज्य सहकारिता बैंक, शहरी सहकारिता बैंक, लघु वित्त बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनी – माइक्रो वित्त संस्थान (एनबीएफसी – एमएफआई) अथवा मंत्रालय द्वारा निर्धारित की जाने वाली कोई अन्य संस्था।

कार्यक्षेत्र

1.1.      शहरी क्षेत्रों के लिए “प्रधानमंत्री आवास योजना – सबके लिए आवास” मिशन 17.06.2015 सेकार्यान्वित किया जा रहा है। यह मिशन सभी पात्र परिवारों/लाभार्थियों को आवास प्रदान करने के लिए राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के माध्यम से कार्यान्वयन एजेंसियों को केन्द्रीय सहायता प्रदान करेगा। केन्द्रीय क्षेत्र की स्कीम होने के नाते, मिशन के वर्तमान ऋण आधारित ब्याज स्कीम (सीएलएसएस) घटक के अंतर्गत पात्र शहरी गरीबों (आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (ईडब्ल्यूएस) निम्न आय वर्ग (एलआईजी) द्वारा आवास के अधिग्रहण/निर्माण के लिए, लिए गए गृह ऋण पर ब्याज सब्सिडी दी जायेगी।

1.2.      भारत में शहरीकरण की प्रक्षेपित वृद्धि और परिणामी आवास मांगों को देखते हुए, आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय ने एतद्द्वारा मध्यम आय वर्ग (एमआईजी) के द्वारा आवास के अधिग्रहण/निर्माण (पुनर्खरीद सहित) के लिए ब्याज सब्सिडी स्कीम आरम्भ की है जिसे ऋण आधारित सब्सिडी स्कीम (सीएलएसएस) फॉर एमआईजी कहा जायेगा और यह भी केन्द्रीय सेक्टर स्कीम के रूप में कार्यान्वित की जायेगी।

1.3.      प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) मिशन के अंतर्गत वर्तमान ऋण आधारित सब्सिडी स्कीम का, तदनुसार, नाम परिवर्तित कर “ईडब्ल्यूएस/एलआईजी के लिए सीएलएसएस” किया जाता है।

1.4.      एमआईजी के लिए सीएलएसएस के अंतर्गत केन्द्रीय सहायता प्राप्त करने की पात्रता होगी:

1.4.1.      लाभार्थी परिवार के पास या तो उसके नाम से अथवा उसके परिवार के किसी सदस्य के नाम से भारत के किसी भी भाग में पक्का मकान नहीं होना चाहिए।

1.4.2.      लाभार्थी परिवार ने भारत सरकार से किसी भी आवास स्कीम के अंतर्गत केन्द्रीय सहायता प्राप्त नहीं की होनी चाहिए।

1.5.      लाभार्थी परिवार में पति, पत्नी/और अविवाहित बेटे और/अथवा अविवाहित बेटियाँ शामिल होंगी। एक वयस्क कमाऊ सदस्य (वैवाहिक स्थिति पर ध्यान दिए बिना) को अलग परिवार समझा जा सकता है।

परन्तु यह कि उसके पास भारत के किसी भी भाग में पक्का मकान नहीं होना चाहिए।

परन्तु यह भी कि विवाहित दम्पत्ति के मामले में, स्कीम के अंतर्गत परिवार आय की पात्रता के अधीन पति/पत्नी दोनों में से किसी एक के नाम से अथवा दोनों के संयुक्त स्वामित्व में एक अकेला आवास प्राप्त करने का पात्र होगी।

1.6.      सीएलएसएस फॉर एमआईजी प्रारंभ में वर्ष 2017 में 01.01.2017 से एक वर्ष की अवधि के लिए कार्यान्वित की जायेगी।

कवरेज

2.1.      जनगणना 2011 के अनुसार, सभी सांविधिक कस्बे और बाद में अधिसूचित कस्बे सीएलएसएस फॉर एमआईजी के अंतर्गत शामिल होने के पात्र होंगे।

नोट: सांविधिक कस्बों से संबंधित अधिसूचित योजना क्षेत्र और जो संबंधित नगर निगम क्षेत्र के चारों ओर होते हैं, भी इस स्कीम के अंतर्गत कवर होंगे।

स्कीम का ब्यौरा

3.1.      मध्यम आय वर्ग के वो लाभार्थी जो बैंकों, आवास वित्त कंपनियों अन्य ऐसे अधिसूचित संस्थानों से आवासों की अधिप्राप्ति/निर्माण (पुनर्खरीद सहित) हेतु आवास ऋण लेना चाहते हैं, निम्नलिखित विशिष्टियों के साथ ब्याज सब्सिडी प्राप्त करने के पात्र होंगे:

विवरण

एमआईजी 1

एमआईजी ।।

पारिवारिक आय (रु./प्रति वर्ष)2

12,00,000

18,00,000

ब्याज सब्सिडी (% प्रतिवर्ष)

4.00%

3.00%

अधिकतम ऋण अवधि (वर्ष में)

20

20

ब्याज सब्सिडी के लिए पात्र आवास ऋण राशि (रु.)

9,00,000

12,00,000

आवासीय इकाई फर्शी क्षेत्र

90 Sq.m.

110 Sq.m.

ब्याज सब्सिडी परिकलन के लिए निवल वर्तमान मूल्य (एनपीवी) पर छुट दर (%)

9.00%

9.00%

3.2.      सीएलएसएस फॉर एमआईजी आवास की अधिप्राप्ति/निर्माण (पुनर्खरीद सहित) के लिए जल, शौचालय, स्वच्छता, सीवरेज, सड़क, बिजली आदि जैसी बुनियादी नगर अवस्थापनाओं के साथ आय की पात्रता के अनुसार 90 वर्ग मीटर और 110 वर्ग मीटर फर्शी क्षेत्र का समर्थन करेगी।

3.3.      सीएलएसएस फॉर एमआईजी के अधीन निर्मित आवास देश में निर्माण और संरचनात्मक सुरक्षा संबंधी वर्तमान दिशानिर्देशों में दिये गए मानकों और मानदंडों के अनुरूप होने चाहिए।

कार्यान्वयन प्रक्रिया

4.1.   ऋण आधारित सब्सिडी ऊपर पैरा 3.1 में दर्शाये गए ऋण पर 20 वर्ष की अवधि अथवा ऋण की अवधि, जो भी कम हो, के लिए ही उपलब्ध होगी। अतिरिक्त ऋण, उपरोक्त विनिर्दिष्ट सीमा से इतर, यदि कोई हो, गैर-सब्सिडीकृत दर पर होगा।

4.2.   ब्याज सब्सिडी प्राथमिक ऋणदाता संस्थाओं के माध्यम से लाभार्थियों के ऋणखाते में अग्रिम रूप से जमा कर दी जायेगी, इससे प्रभावी आवास ऋण और समान मासिक क़िस्त (ईएमआई) कम हो जायेगी।

4.3.   आवास और शहरी विकास कारपोरेशन (हुडको) और राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी) को ऋणदाता संस्थाओं को इस सब्सिडी का वितरण और इस घटक की प्रगति की निगरानी करने के लिए केन्द्रीय नोडल एजेंसियों (सीएनए) के रूप में निर्धारित किया गया है। मंत्रालय भविष्य में अन्य संस्थाओं को सीएनए के रूप में अधिसूचित कर सकता है।

4.4.   प्राथमिक ऋणदाता संस्थान (पीएलआई), अनुसूचित वाणिज्यक बैंक, आवास वित्त कंपनियां, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, राज्य सहकारी बैंक, शहरी सहकारी बैंक, लघु वित्त बैंक, गैर-बैंकिंग वित्त कम्पनियां – सूक्ष्म वित्त संस्थान (एनबीएफसी/एमएफआई) अथवा अन्य कोई संस्थान, जैसा मंत्रालय द्वारा पता लगाए गए हों, समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करके सीएलएसएस फॉर एमआईजी के लिए केवल किसी एक सीएनए के साथ पंजीकरण कर सकते हैं।

4.5.   उन प्राथमिक ऋणदाता संस्थानों को (पीएलआई) जिन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) मिशन के विद्यमान सीएलएसएस घटक (जिसे अब सीएलएसएस-ईडब्ल्यूएस/एलआईजी कहा जायेगा) सीएनए के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हुए हैं, विकल्प होगा कि वे अपने समझौता ज्ञापन के अधिदेश को सीएलएसएस फॉर एमआईजी तक विस्तार कर लें।

4.6.   प्राथमिक ऋणदाता संस्थान, आवास ऋण आवेदन पत्रों में, स्कीम पात्रता की पारदर्शिता का प्रकटन करेंगे और सीएलएसएस फॉर एमआईजी के अंतर्गत आवेदकों की इच्छा और पात्रता का पता लगायेंगे।

4.7.   सीएनए स्कीम का उचित कार्यान्वयन और निगरानी सुनिश्चित करेंगी और इस उद्देश्य के लिए उचित तंत्र को अपनाएंगी। सीएनए आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय को नियमित मासिक और तिमाही रिपोर्टों के माध्यम से आवधिक निगरानी सूचना मुहैया करेंगी जैसा कि मिशन निदेशालय द्वारा निर्णय लिया गया है।

4.8.   प्राथमिक ऋणदाता संस्थाएं (पीएलआई) सीएनए को दावा जमा करने से पहले दोहरीकरण से बचने के लिए लाभार्थी के परिवार के आधार नंबरों का ब्यौरा लिंक करेंगे।

4.9.   स्कीम के अंतर्गत प्राथमिकता, एमआईजी श्रेणी के लाभार्थी होने के अध्यधीन, महिलाओं (विधवा, एकल कामकाजी महिलाओं की प्राथमिकता को ओवरराइट करते हुए) अनुसूचित जाति/जनजाति/अन्य पिछड़े वर्ग के व्यक्तियों नि:शक्त और ट्रांसजेंडर को दी जाएगी।

4.10.              ऐसे मामलों में जहां एक ऋणी ने एक प्राथमिक ऋणदाता संस्था से आवास ऋण लिया है तथा एमआईजी के लिए सीएलएसएस के अंतर्गत ब्याज सब्सिडी का लाभ लिया है, शेष राशि अंतरण के लिए अन्य पीएलआई के पास जता है, ऐसा लाभार्थी आगे ब्याज सब्सिडी के लाभ का दावा करने का पात्र नहीं होगा।

मध्य आय वर्ग (एमआईजी) के लिए ऋण आधारित ब्याज सब्सिडी स्कीम के विभिन्न चरण :

  • किसी व्यक्ति द्वारा गृह ऋण आवेदन
  • प्राथमिक ऋणदाता संस्था
  • ऋण राशि पर निर्णय (एमआईजी-1-90 वर्ग मी. का फर्शी क्षेत्र एमआईजी-।।-110 वर्ग मी. का फर्शी क्षेत्र) (संदर्भ पैरा 3.1)
  • गृह ऋण ब्याज सब्सिडी की स्वीकृति
    • 9 लाख रु. तक के ऋण के लिए 4% और केवल 12 लाख रु. के ऋण के लिए केवल 3% की दर से। इस राशि से अधिक राशि का कोई ऋण मौजूदा ब्याज दरों पर होगा तथा सरकार द्वारा सब्सिडी नहीं दी जाएगी।
    • ब्याज सब्सिडी की गणना 9 प्रतिशत की छुट दर से एनपीवी आधार पर की जाएगी
    • पीएलआई, सीएनए को दावा प्रस्तुत करते हैं
    • सीएनए द्वारा दावों का अनुमोदन
    • सीएनए संवितरित कुल ऋण पर प्रस्तुत दावा के आधार पर पीएलआई की सीधे सब्सिडी राशि जारी करेगा।
    • सीएनए को भारत सरकार से धनराशि:

-       अग्रिम सब्सिडी स्कीम प्रत्येक सीएनए के लिए जारी की जाएगी

-       अनुवर्ती राशि पूर्ववर्ती जारी राशि के 70 प्रतिशत उपयोग के बाद जारी की जाती है।

पीएलआई द्वारा लाभार्थी के ऋण खाते में ऋण आधारित ब्याज सब्सिडी जमा की गई

केन्द्रीय सब्सिडी जारी करने की प्रणाली

5.1.   प्रत्येक सीएनए को अग्रिम सहायता जारी की जायेगी। ऋण सम्बद्ध सब्सिडी की बाद की राशि सीएनए को पूर्व की राशि के 70 प्रतिशत उपयोग के पश्चात, तिमाही आधार पर और मिशन निदेशालय द्वारा निर्णय किए गए फ़ॉर्मेट के अनुसार सीएनए द्वारा किए गए दावों के आधार पर जारी की जायेगी।

5.2.   पीएलआई द्वारा एमआईजी लाभार्थियों को वितरित ऋण के आधार पर सीएनए कुल वितरित ऋण पर प्रस्तुत दावों के आधार पर सब्सिडी की राशि सीधे पीएलआई को जारी करेगी।

5.3.   सीएनए द्वारा पीएलआई को वितरित कुल निधि का 0.1% सीएनए को उनके प्रशासनिक व्ययों के लिए भुगतान किया जायेगा।

5.4.   पीएलआई द्वारा सहायता राशि, सीएनए से सब्सिडी प्राप्त होने पर सीधे ऋणी के खाते में ऋणी के ऋण की मूल राशि से घटा कर अग्रिम रूप से जमा की जाएगी। ऋणी, ऋण की मूल राशि में से शेष बची राशि पर, सहमत डाक्यूमेंट दर, पर ईएमआई का भुगतान करेगा।

5.5.   स्कीम के अंतर्गत, उधारकर्ता के आवासीय ऋण के लिए प्रक्रिया शुल्क के स्थान पर पीएमएवाई को स्वीकृत प्रत्येक आवेदन के लिए एकमुश्त 2000/- रूपए (मात्र दो हजार रु.) का भुगतान दिया जायेगा। इस स्कीम के अंतर्गत आय वर्ग के अनुसार पात्र आवासीय ऋण राशि के लिए पीएमएवाई लाभार्थी के कोई प्रक्रिया शुल्क नहीं लेगा। पैरा 3.1 में यथा निर्दिष्ट विवरण के अनुसार, ब्याज सब्सिडी के लिए पात्र ऋण राशि से अधिक अतिरिक्त ऋण राशि के लिए पीएलआई सामान्य प्रक्रिया शुल्क वसूल सकते हैं।

स्कीम की निगरानी और कार्यान्वयन

6.1.      संयुक्त सचिव और मिशन निदेशक (एचएफए) की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) मिशन के कार्यान्वयन के लिए आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय के अधीन गठित मिशन निदेशालय द्वारा मध्य आय वर्ग (एमआईजी) के लिए सीएलएसएस का कार्यान्वयन और निगरानी की जाएगी।

6.2.      राज्य स्तरीय बैंकर समिति (एसएलबीसी) अपने विद्यमान सांस्थानिक प्रणाली के माध्यम से स्कीम की निगरानी करेगी।

6.3.      इस स्कीम के अंतर्गत लाभार्थी द्वारा किसी गलत घोषणा के मामले में, वह (लाभार्थी) लागू विधि के अंतर्गत कानूनी कार्रवाई के लिए पात्र होगा/होगी।

अनुलग्नक 1

(दिशानिर्देशों का पैरा 4.4 देखें)

समझौता-ज्ञापन (एमओयू)

इस समझौता-ज्ञापन को ..............(तारीख शब्दों में) को ................. (स्थान का नाम) में राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी)/आवास और शहरी विकास निगम लिमिटेड (हुडको), ........................................ भारत पर्यावास केंद्र, (आईएचसी), लोदी रोड, नई दिल्ली-110003, इसके श्री ............................... (नाम और पदनाम) (इसके पश्चात इनकों “प्रथम पक्ष” कहा जाएगा, जो, जब तक कि इस संदर्भ में असंगत नहीं होगा, का अर्थ उनके उत्तराधिकारी प्रतिनिधि और प्रशासक से होगा) के माध्यम से प्रथम भाग में

और

मैसर्स .......................... (प्राथमिक ऋणदाता संस्था का नाम) ................................ (पता) इसके श्री............. (नाम और पदनाम) (इसके पश्चात इनको द्वितीय पक्ष/ऋणदाता जो जब तक कि संदर्भ में असंगत नहीं होगा, का अर्थ उनके उत्तराधिकारी, प्रतिनिधि और प्रशासक से होगा, कहा जाएगा) और वे इसमें शामिल होंगे, के माध्यम से द्वितीय भाग में निष्पादित किया गया है।

जबकि ............ (प्राथमिक ऋणदाता संस्था का नाम और पता) ................................ ने पहले ही ईडब्ल्यूएस/एलआईजी के लाभार्थियों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-ऋण आधारित सब्सिडी स्कीम (पीएमएवाई –सीएलएसएस) के कार्यान्वयन के लिए एनएचबी/हुडको के साथ समझौता-ज्ञापन को निष्पादित कर दिया है।

जबकि आवास और शहरी गरीबी उपशमन (हुपा) मंत्रालय, भारत सरकार “प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) – सबके लिए आवास मिशन” के भाग के रूप में मध्य आय वर्ग (एमआईजी) की जरूरत को पूरा करने के लिए “ऋण आधारित सब्सिडी स्कीम” (सीएलएसएस) (इसके पश्चात इसे “स्कीम” कहा जाएगा) नामक ऋण आधारित सब्सिडी स्कीम (सीएलएसएस) को कार्यान्वित कर रहा है ताकि शहरी क्षेत्रों में एमआईजी वर्ग की आवास संबंधी जरूरतों को पूरा किया जा सके।

जबकि इस स्कीम में एमआईजी-1 और एमआईजी-।। वर्गों को अलग-अलग ब्याज सहायता के प्रावधान की परिकल्पना है ताकि ऋणी/लाभार्थी पक्के आवास का क्रयनिर्माण कर सके।

जबकि आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय, भारत सरकार ने इस स्कीम को कार्यान्वित करने के लिए प्रथम पक्ष को केन्द्रीय नोडल अभिकरण (सीएनए) के रूप में नामित किया है। सीएनए द्वारा ब्याज सहायता द्वितीय पक्ष ऋणदाता को, इसके द्वारा विभिन्न ऋणियों/लाभार्थियों को स्वीकृत आवास ऋण के लिए, जारी किया जाएगा जैसा कि इस समझौता-ज्ञापन में विवरण दिया गया है।

जबकि द्वितीय/ऋणदाता पक्ष, अन्य बातों के साथ-साथ, आस्थगित भुगतान के आधार पर अलग-अलग लाभार्थियों को आवास ऋण देने के व्यवसाय में है और पात्र ऋणियों/लाभार्थियों को इस स्कीम के अनुसार उनके आवास ऋण खाते में पात्र सब्सिडी की राशि जो जमा करके इस स्कीम का लाभ प्रदान करने का इच्छुक है।

अत: अब वचनों और पारस्परिक प्रसंविदाओं को ध्यान में रखते हुए अब दोनों पक्ष इस प्रकार सहमत हुए है:

(क)      आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय, भारत सरकार ने इस स्कीम की व्यापक विशेषताएँ, ऋण की शर्ते और सहायता प्रतिपूर्ति, लाभार्थियों का चयन, इस स्कीम के अंतर्गत विभिन्न एजेंसियों की भूमिकाएँ और दायित्व तथा इसकी निगरानी इत्यादि निर्धारित करके इस स्कीम के प्रचालनात्मक दिशानिर्देश (इसके पश्चात स्कीम के दिशानिर्देश कहा जाएगा) जारी किए हैं। इस स्कीम के दिशानिर्देशों को इस समझौता-ज्ञापन का अनिवार्य अंग माना जाएगा और उनको सभी प्रयोजनों के लिए एक साथ पढ़ा जाएगा।

(ख)   आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय, भारत सरकार इस स्कीम के दिशानिर्देशों को संशोधित करने/असंशोधित करने/समाप्त करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र होगा।

(ग)   यह कि भारत सरकार द्वारा इस स्कीम के अंतर्गत प्रथम पक्ष को जारी की गई सहायता में से द्वितीय पक्ष/ऋणदाता को ब्याज सहायता प्रदान करने के लिए हूपा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा नियुक्त सीएनए प्रथम पक्ष है।

(घ) प्रथम पक्ष के दायित्व और बाध्यताएं

  1. प्रथम पक्ष आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा इस स्कीम के दिशानिर्देशों के अनुसार जारी की गई निधियों में से द्वितीय पक्ष/ऋणदाता को ब्याज सहायता जारी करने के लिए उत्तरदायी होगा। पात्र उधारकर्ता/लाभार्थी को द्वितीय पक्ष/ऋणदाता द्वारा संवितरित ऋण के संबंध में सूचना प्राप्त होने पर प्रथम पक्ष द्वितीय पक्ष/ऋणदाता को सीधे सहायता धनराशि जारी करेगा।
  2. ब्याज सहायता एमआईजी-1 और एमआईजी-।। वर्ग के ऋणी/लाभार्थी दोनों के लिए ऋण की मूलधन धनराशि पर क्रमश: 4.0 (चार) प्रतिशत और 3.0 (तीन) प्रतिशत की दर पर होगी जो 20 (बीस) वर्षो अथवा ऋण की पूरी अवधि, जो भी कम हो, के लिए कुल ऋण की धनराशि को ध्यान में रखे बिना, जो भी मामला हो, एमआईजी-1 के लिए पहले 9.00 (नौ) लाख रूपए और एमआईजी-।। के लिए 12.00 (बारह) लाख रूपए की अधिकतम ऋण धनराशि के लिए स्वीकार्य होगी। तथापि, यदि ऋण की धनराशि एमआईजी-1 के लिए 9.00 (नौ) लाख रूपए और एमआईजी-।। के लिए 12.00 (बारह) लाख रूपए से कम है, तो इस सहायता का ऋण की वास्तविक धनराशि तक के आधार पर हिसाब लगाया जाएगा। सहायता के निवल वर्तमान मूल्य (एनपीवी) का 9 (नौ) प्रतिशत की सैधान्तिक छुट के आधार पर गणना की जाएगी और ऋणदाता/द्वितीय पक्ष को अग्रिम सहायता जारी की जाएगी। ऋणदाता/द्वितीय पक्ष को दी गई एनपीवी सहायता को ऋणी/लाभार्थी की मूल ऋण धनराशि से काटा जाएगा जिसको तब ऋण की सम्पूर्ण अवधि के लिए कारगर ढंग से कम किए गए आवास ऋण पर सहमत प्रलेखन दर पर ब्याज का भुगतान द्वितीय पक्ष/ऋणदाता को करना होगा।

(ङ) द्वितीय पक्ष के दायित्व और बाध्यताएं

  1. ऋणदाता/द्वितीय पक्ष एतद्द्वारा अपने ऋणियों/लाभार्थियों को इस स्कीम का सम्पूर्ण लाभ देने की वचनबद्धता देता है।
  2. ऋणदाता/द्वितीय पक्ष एतद्द्वारा इस स्कीम को इस स्कीम के दिशानिर्देशों के अंतर्गत इसके निबंधन और शर्तों के अनुसार कार्यान्वित करने का वचन देता है।
  3. ऋणदाता/द्वितीय पक्ष एतद्द्वारा वचन देता है कि वह इस स्कीम को कार्यान्वित करने के लिए ऋण देने की उत्तम पद्धतियों का अनुपालन और भरतीय रिजर्व बैंक/राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी) के समय-समय पर जारी किए गए स्कीम के दिशानिर्देशों और विनियमों का अनुपालन करेगा।
  4. ऋणदाता/द्वितीय पक्ष जोखिम मूल्यांकन में अपेक्षित उचित कर्मिष्ठता और ईमानदारी से पालन करेगा और उधारकर्ता/लाभार्थी की ऋण पात्रता और पुनर्भुगतान क्षमता के मूल्यांकन समेत कर्मिष्ठ मूल्यांकन और स्वीकृति की क्रियाविधियों को अपनाएगा।
  5. ऋणदाता/द्वितीय पक्ष हुपा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर दिशानिर्देशों में संशोधनों/आशोधनों समेत स्कीम के दिशानिर्देशों के अंतर्गत जारी किए सभी वर्तमान दिशानिर्देशों का पालन करेगा।
  6. ऋणदाता/द्वितीय पक्ष प्रथम पक्ष को तिमाही आधार पर उपयोगिता/अंतिम उपयोग-प्रमाण-पत्र के साथ-साथ आवास इकाई के पूर्ण होने तक की निर्माण की वास्तविक प्रगति के संबंध में प्रमाण-पत्र भी प्रदान करेगा। ऋणदाता/द्वितीय पक्ष निर्माण के पूरा होने से एक वर्ष की अवधि के भीतर आवास इकाई के पूरा होने पर अथवा ऋणराशि की पहली क़िस्त के संवितरण की तारीख से अधिक से अधिक 36 महीने की अवधि के भीतर एक समेकित उपयोगिता प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करेगा। उपयोगिता/अंतिम उपयोग प्रमाण-पत्र प्रदान करने में चूक के मामले में ऋणदाता/द्वितीय पक्ष, प्रथम पक्ष को सहायता की धनराशि वापिस करेगा। इसके अतिरिक्त, सहायता की उपयोग नहीं की गई धनराशि को द्वितीय पक्ष द्वारा प्रथम पक्ष को तत्काल वापिस किया जाएगा।
  7. ऋणदाता/द्वितीय पक्ष भवन डिजाईन, अवस्थापना सुविधाओं इत्यादि के लिए अनुमोदनों सहित इस स्कीम के अंतर्गत वित्त-पोषित रिहायशी इलाकों के निर्माण की गुणवत्ता की भी निगरानी करेगा तथा स्थल दौरों इत्यादि के माध्यम से निर्माण के विभिन्न स्तरों तक किए गए व्यय की भी जांच करेगा।
  8. द्वितीय पक्ष को उधारकर्ता/लाभार्थी द्वारा ऋण की वापिसी की चूक और ऋण की गैर-कार्य निष्पादित परिसम्पत्तियां (एनपीए) बनने की दशा में ऋणदाता/द्वितीय पक्ष कानून के अनुसार, सम्पत्ति के मोचन-निषेध समेत ऐसे उपायों, जैसे समुचित समझे जाएं, के माध्यम से देय राशियों की वसूली के लिए कार्यवाही करेगा। ऐसे सभी मामलों में वसूलियों की धनराशि को आनुपातिक आधार पर (ऋण की बकाया राशि और संवितरित सब्सिडी के अनुपात में) सब्सिडी की राशि को प्रथम प्रभार आधार पर वसूल और विनियोजित किया जाएगा।
  9. ऋणदाता/द्वितीय पक्ष प्रत्येक उधारकर्ता/लाभार्थी को एक विवरण प्रदान करेगा जो उसको सहायता के रूप में दी गई धनराशि की जानकारी देगा कि इस सहायता को कैसे समायोजित किया गया है और उसकी समान मासिक किस्तों (ईएमआई) पर सहायता का क्या प्रभाव पड़ा है।
  10. ऋणदाता/द्वितीय पक्ष ऐसी सभी अन्य सूचनाएं विवरण और ब्यौरे प्रदान करेगा जो प्रथम पक्ष अथवा आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा इस स्कीम के अंतर्गत समय-समय पर यथावश्यक हों।
  11. द्वितीय पक्ष/ऋणदाता, निर्धारित प्रपत्र के अनुसार, ऋण सूचना कंपनियों को एमआईजी लाभार्थियों के लिए सीएलएसएस के संबंध में समय-समय पर ऋण की सूचना देगा।
  12. ऋणदाता/द्वितीय पक्ष ऋणियों/लाभार्थियों को ब्याज की नियत/चालू दरों पर ऋण का लाभ उठाने के परिणामों को स्पष्ट रूप से समझाएगा।

(च) लागू नियम, विवाद और क्षेत्राधिकार

इस समझौता-ज्ञापन पर भारत के कानून लागू होंगे तथा इन प्रस्तुत दस्तावेजों के भाग के रूप में प्रथम पक्ष और द्वितीय पक्ष/ऋणदाता के मध्य उठने वाले सभी विवादों और मतभेदों को यथासंभव बातचीत के माध्यम से हल किया जाएगा। तथापि, यदि कोई मतभेद/विवाद तब भी बना रहता है, तो उसको मध्यस्थता और सुलह, अधिनियम, 1996 के उपबंधों के अंतर्गत मुख्य कार्यकारी अधिकारी/अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, राष्ट्रीय आवास बैंक/हुडको द्वारा नियुक्त किए गए एकल मध्यस्थ को ही भेजा जाएगा। एकल मध्यस्थ (पंच) का निर्णय अंतिम होगा और पक्षों पर बाध्य होगा। मध्यस्थता का मुकदमा दिल्ली में चलाया जाएगा।

उपर्युक्त में उल्लिखित के अनुसार दिल्ली में इस तारीख को हस्ताक्षर किए गए।

कृते और की ओर से                             कृते और की ओर से

(प्रथम पक्ष/सीएनए)                                   (द्वितीय पक्ष/ऋणदाता)

अनुलग्नक 2

(दिशानिर्देश का पैरा 4.7)

सीएनए द्वारा एमआईएस/निगरानी के लिए पीएलआई से एकत्रित किए जाने वाले वृहद आंकड़े

1. पीएलआई का विवरण

(क)  पीएलाई का नाम*:

(ख)  पीएलाई कोड*:

(ग)   पीएलाई की श्रेणी (बैंक/एचएफसी/एनबीएफसी-एमएफआई/अन्य)*:

2. ऋणी का विवरण

(क)  ऋणी का नाम (हूबहू वहीनाम होना चाहिए जो आवास ऋण खाता सं. में हो):

(ख)  पैन कार्ड सं.:

(ग)   ऋणी का पता (आवास/फ़्लैट/द्वारा सं., गली, शहर/गाँव, जिले, राज्य का नाम तथा पिन कोड):

(घ)   ऋणी का मोबाइल नंबर:

(ङ)    परिवार की श्रेणी (मध्यम आय वर्ग-।/मध्यम आय वर्ग -।।):

(च)   परिवार की वार्षिक आय (रूपए में):

(छ)  धर्म (हिन्दू-01, मुस्लिम-02, इसाई-03, सिख-04, जैन-05, बौद्ध-06, पारसी-07, अन्य-08)*:

(ज)  जाति (सामान्य-01, अनु.जाति-02, अनु.जनजाति-03, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी)-04)*:

(झ)  वरीयता की श्रेणी: विकलांग-01, कार्यरत महिला-02, विधवा-03 और अन्य-04 (कृपया विनिर्दिष्ट करें)*

(ञ)   लिंग: पुरुष/स्त्री/उभयलिंगी*

(ट)    विशिष्ट पहचान (आधार कार्ड पहचान पत्र संख्या)*:

3. सह-ऋणी का विवरण

(क)  सह-ऋणी का नाम (हूबहू वही नाम होना चाहिए जो आवास ऋण खाता सं. में हो)*

(ख)  पैन कार्ड सं.:

(ग)   लिंग: पुरुष/स्त्री/उभयलिंगी*

(घ)   विशिष्ट पहचान (आधार कार्ड पहचान पत्र संख्या)*

अविवाहित पुत्र/पुत्रियों की संख्या (4 तक): वयस्क का नाम, विशिष्ट पहचान सहित (आधार कार्ड पहचान पत्र संख्या)*:
संपत्ति का प्रकार* (01 – फ़्लैट, 02-स्वतंत्र आवास)
आवास का प्रकार: नया (01), पुन: खरीदा हुआ (02)
मकान का कारपेट क्षेत्र (वर्ग मी. में)* [डालें√ ]

  • 90 वर्ग मी. तक
  • 110 वर्ग मी. तक

पिन कोड के साथ संपत्ति का पूर्ण डाक पता* (आवास/फ़्लैट/द्वारा सं., गली, शहर/गाँव, जिले, राज्य का नाम तथा पिन कोड, नगर कोड):
स्वीकृत ऋण धनराशि (रु. में)*

आवास ऋण खाता संख्या*

ऋण लेने का प्रयोजन* (खरीद/पुन: खरीद)-01/निर्माण-02):

ऋण की अवधि* ऋण-स्थागन अवधि सहित (महीना में):

आवास ऋण ब्याज*:

ऋणस्थागन अवधि, यदि कोई हो* (महीनों में):

पुनर्भुगतान शुरू किए जाने की तिथि* (दिन/मास/वर्ष):

सब्सिडी दावा संख्या (एकल क़िस्त-00, बहु –किस्तें-संबंधित संख्या)

(क)  इस दावे के लिए संवितरित ऋण धनराशि (रूपए में)*

(ख)  ऋण धनराशि संवितरित किए जाने की तारीख (दिन/मास/वर्ष)*

(ग)   सब्सिडी दावा संख्या (00-एकल क़िस्त, बहु-क़िस्त-संबंधित संख्या)*

(घ)   दावा की गई ब्याज सहायता धनराशि*

(ङ)    एनपीवी सब्सिडी

(च)   सब्सिडी के क्रेडिट की तिथि (दिन/मास/वर्ष प्रपत्र)

जमा की गई सब्सिडी की संचयी राशि

(चूँकि सहायता वितरित ऋण के अनुपात में किस्तों में जमा की जानी है)

क्या ट्रंक और लाइन अवस्थापना विद्यमान है अथवा उसकी व्यवस्था की जा रही है

(क)  जलापूर्ति (हाँ/नही)

(ख)  विद्युत् आपूर्ति (हाँ/नही)

(ग)   जल निकास/सफाई (हाँ/नही)

स्वीकृति की तारीख (दिन/महीना/वर्ष)*

अनुलग्नक 3

 

(दिशानिर्देश का पैरा 5.1 देखें)

केन्द्रीय नोडल एजेंसी हेतु उपयोग प्रमाण पत्र के लिए प्रारूप

आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय, भारत सरकार के एमआईजी के लिए ऋण आधारित सब्सिडी स्कीम (सीएलएसएस) के अंतर्गत सब्सिडी का दावा करने हेतु प्रारूप

(केन्द्रीय नोडल एजेंसियों (एनएचबी/हुडको) द्वारा आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय को प्रस्तुत किया जाए)

सार

क्र.सं.

विवरण

करोड़ रु. में

1

आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय से प्राप्त कुल संचयी सब्सिडी

 

2

केन्द्रीय नोडल एजेंसी के पास उपलब्ध धनराशि पर अर्जित ब्याज

 

3

अब तक प्राथमिक ऋणदाता संस्था को जारी सब्सिडी की धनराशि (कृपया संलग्न प्रारूप के अनुसार राज्य-वार और बैंक-वार ब्यौरे दें)

 

4

सीएनए के पास उपलब्ध ब्याज सहित शेष सब्सिडी

 

5

आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय से अपेक्षित सब्सिडी

 

यह प्रमाणित किया जाता है कि

(1)               जैसा कि प्राथमिक ऋणदाता संस्था द्वारा प्रमाणित किया गया है कि आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय, भारत सरकार के एमआईजी के लिए सीएलएसएस हेतु मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार ऋण स्वीकृत और संवितरित किया गया है।

(2)               आगे यह उदघोषण की जाति है कि उपरोल्लिखित ऋण खातों के प्राथमिक ऋणदाता संस्था को दावों का सत्यापन करने और धनराशि स्वीकृत करने में केन्द्रीय नोडल एजेंसी अथवा इसके किसी अधिकारी की ओर से कोई उपेक्षा नहीं की गई है और इसे दिशानिर्देश के अनुसार स्वीकृत किया गया है।

(3)               उपरोक्त किसी भी खाते के लिए सब्सिडी का दोबारा दावा नहीं किया गया है।

 

(अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता)

दिनांक:

स्थान:                                                 (नाम एवं पदनाम)

अनुलग्नक-3 का सहपत्र

(दिशानिर्देश का पैरा 5.1)

राज्य-वार जारी धनराशि

राज्य

लाभार्थियों की संख्या

जारी सब्सिडी की धनराशि

 

 

 

 

 

 

 

 

 

कुल

 

 

प्राथमिक ऋणदाता संस्था-वार जारी धनराशि

प्राथमिक ऋणदाता संस्था

लाभार्थियों की संख्या

प्राथमिक ऋणदाता संस्था को जारी सब्सिडी की धनराशि

 

 

 

 

 

 

 

 

 

कुल

 

 

एमआईजी के लिए सीएलएसएस की विशेषताएँ – एक दृष्टि में

क्र.सं.

ब्यौरा

एमआईजी-

एमआईजी-।।

1

पारिवारिक वार्षिक आय (रु.)

 

 

 

न्यूनतम

6,00,001

12,00,001

 

अधिकतम

12,00,000

18,00,000

2

सब्सिडी की मांग हेतु आय प्रमाण

स्व- घोषणा

3

संपत्ति फर्शी क्षेत्र (वर्ग मी.) तक

90

110

4

संपत्ति स्थल

जनगणना 2011 और उसके बाद अधिसूचित कस्बों के अनुसार सभी सांविधिक कस्बे

5

पक्का घर न होने की प्रयोज्यता

हाँ

6

महिला स्वामित्व/सह –स्वामित्व

नहीं

7

पूर्ण निष्ठा प्रक्रिया

प्राथमिक ऋणदाता संस्थान की प्रक्रिया के अनुसार

8

पात्र ऋण धनराशि

प्राथमिक ऋणदाता संस्थान द्वारा आवेदित नीति के अनुसार

9

पहचान पत्र

आधार सं.

10

आवास ऋण स्वीकृति और संवितरण अवधि

 

से

1.01.2017

 

तक

यथा निर्दिष्ट

11

ब्याज सब्सिडी पात्रताएं

i

ऋण राशि (रु.)             न्यूनतम

0

0

ii

ऋण राशि (रु.)           अधिकतम

9,00,000

12,00,000

iii

ऋण अवधि (वर्ष)         अधिकतम

20

20

iv

ब्याज सब्सिडी (% प्रति वर्ष)

4.00

3.00

v

एनपीवी छुट दर (%)

9.00

9.00

vi

अधिक ब्याज सब्सिडी राशि (रु.)

2,35,068

2,30,156

12

सब्सिडी जमा करने के समय में ऋण वर्ग

मानक परिसंपत्ति

 

13

प्रक्रिया शुल्क के स्थान पर प्रति स्वीकृत ऋण आवेदन पर दी गई एक मुश्त धनराशि (रु.)

2,000

2,000

14

मकान/फ़्लैट निर्माण की गुणवत्ता

राष्ट्रीय भवन निर्माण कोड, बीआईएस कोड और अपनाई गई एनडीएम दिशानिर्देशों के अनुसार

15

भवन डिजाईन के लिए अनुमोदन

अनिवार्य

16

बुनियादी नागरिक अवसंरचना (जल, स्वच्छता, सीवरेज, सड़क, विद्युत् इत्यादि)

अनिवार्य

17

संपत्ति निर्माण की निगरानी और समापन का रिपोर्ट

प्राथमिक ऋणदाता संस्था का उत्तरदायित्व है

18

ऋण का पूर्व निर्धारित पुनर्भुगतान

वसूली और आनुपातिक आधार पर सीएनए को सब्सिडी की भुगतान वापसी

19

आंकड़ों की प्रस्तुति और सटीकता तथा रिकॉर्ड रखना और अनुरक्षण

प्राथमिक ऋणदाता संस्था का उत्तरदायित्व है

 

नोट: सीएनए को दावे/भुगतान वापसी के लिए आंकड़ों की प्रस्तुति डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहित करने के लिए केवल ऑनलाइन होटल के माध्यम से की जाएगी।

 

स्त्रोत: आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय, भारत सरकार

3.0

Geeta Jun 21, 2018 11:36 AM

HFA 1155661 Room no 37444

सूरज कुमार May 17, 2018 03:21 PM

क्या इस स्कीम में महिला के नाम से रेजिस्टरेशX करवाना जरुरी है क्या

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