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उपभोक्ता एवं सौन्दर्य-प्रसाधन

इस भाग में सौंदर्य-प्रसाधनों के संदर्भ में उपभोक्ता अधिकारों की जानकारी दी गई है।

सौंदर्यता का ऐतहासिक परिप्रेक्ष्य

प्राचीन काल से ही मानव के मन और मस्तिष्क को सौन्दर्यता आकर्षित करती रही है। वैदिक कालीन सभ्यता में मनुष्य द्वारा सौन्दर्य प्रसाधन के रूप में विभिन्न जड़ी-बूटियों के प्रयोग का वर्णन मिलता है। आदि काल से ही भारतवर्ष में हल्दी, चन्दन, केसर, तुलसी, गेंदा के फूल और पत्तियां, नीम, नीबू, शिरीष के फूल, आंवला और पीपल इत्यादि का सौन्दर्य प्रसाधनों के रूप में इस्तेमाल होता रहा है। महाकवि कालिदास ने भी अपने ग्रन्थ ''अभिज्ञान-शाकुन्तलम्‌'' में शकुन्तला के सौन्दर्य को चित्रांकित करते हुए विभिन्न प्रकार के प्राकृतिक सौन्दर्य-प्रसाधनों का उल्लेख किया है। आज के इस भौतिकवादी युग में तो हर आदमी सुन्दर दिखना चाहता है। समाज में यह आम धारणा है कि सौन्दर्य प्रसाधनों का प्रयोग केवल महिलाएं करती हैं। आधुनिक युग में यह धारणा बदलती दिख रही है।

सौन्दर्यता का वर्तमान परिप्रेक्ष्य

आज सौन्दर्य प्रसाधन केवल महिलाओं के उपयोग की वस्तु नहीं रही, अब तो पुरुष भी महिलाओं की तरह सौन्दर्य प्रसाधनों का प्रयोग करने लगे हैं। महिलाओं की ही तरह पुरुषों के लिए भी ब्यूटी पार्लर खुल चुके हैं, उन्हें भी गोरा बनाने वाले विशेष क्रीम और लोशन दुकानों पर मौजूद हैं। बाजार में हर उम्र और व्यक्ति की जरूरत को पूरा करने के लिए सौन्दर्य प्रसाधन के उत्पाद उपलब्ध हैं। सौन्दर्य प्रसाधन बनाने वाली कंपनियों द्वारा प्राकृतिक तत्वों एवं जड़ी-बूटियों से तैयार उत्पादों के नाम पर लोगों से मुंहमांगी कीमत वसूली जा रही है। कंपनियों द्वारा करोड़ों रुपये उत्पादों के विज्ञापन पर खर्च किए जाते हैं और इनमें एक से बढ़कर एक दावे किए जाते हैं। किसी कंपनी का दावा होता है कि उसके क्रीम आप लगाएंगे तो सप्ताह भर बाद ही काले से गोरे होने लगेंगे, तो किसी का दावा होता है कि उसके द्वारा बनाए गये तेल को लगाने से आप के सफेद बाल काले हो जाएंगे। जागरूक उपभोक्ता को इन बातों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए तथा इस तरह के बेबुनियाद और भ्रामक प्रचारों से बचना चाहिए। क्योंकि अभी तक के किसी भी वैज्ञानिक शोध में इन बातों की पुष्टि नहीं हो पायी है। भारत में सौन्दर्य प्रसाधन के व्यापार का विस्तार काफी तेजी हो रहा है। इसके पीछे के कारणों को हम निम्नलिखित चार्ट के माध्यम से समझ सकते हैं :

Consumer and Cosmatics

औषधि और कॉस्मेटिक्स अधिनियम, 1940 और नियमावली 1945 के अन्तर्गत कॉस्मेटिक्स को ऐसा पदार्थ बताया गया है जो सफाई करने, सुन्दरता व आकर्षण बढ़ाने आदि के उद्देश्य से मानव शरीर पर मलने, उडे़लने, छिड़कने या फुहारने या उसमें सन्निविष्ट करने या अन्यथा उस पर लगाने के लिए बनाई गई वस्तुओं के रूप में परिभाषित किया गया है।

कॉस्मेटिक उत्पादों का सुरक्षित होना एक उपभोक्ता के लिए बहुत आवश्यक है। कॉस्मेटिक उत्पादों को निम्नलिखित निकायों के मार्गनिर्देषों के अनुसार बनाया जाना चाहिए :

  • औषधि एवं कॉस्मेटिक्स अधिनियम, 1940 की अनुसूची एम-II और नियमावली, 1945
  • भारतीय मानक ब्यूरो, नई दिल्ली द्वारा जारी मानकों के अनुसार
  • यू. एस. एफ. डी. ए. के सी. जी. एफ. पी. के मार्गनिर्देश के अनुसार
  • कॉस्मेटिक टॉयलेटरीज एण्ड फ्रैंग्रैंस एसोसिएषन के मार्गनिर्देश के अनुसार
  • इण्टरनेशनल फ्रैंग्रैंस एसोसिएशन तथा इसी तरह के निकायों के मार्गनिर्देशों के अनुसार।
  • औषधि एवं कॉस्मेटिक्स अधिनियम, 1940 उपभोक्ताओं को संरक्षण देने वाला ऐसा कानून है जो मुखय रूप से भारत में बनाए जाने वाले और बेचे जाने वाले कॉस्मेटिक्स और औषधियों के स्तर और गुणवत्ता से सम्बन्धित है।

कॉस्मेटिक्स को बेचने के लिए किसी लाइसेंस की जरूरत नहीं है। यदि भारतीय मूल का कॅास्मेटिक्स किसी लाइसेंसषुदा निर्माता द्वारा बनाया गया हो। कॉस्मेटिक्स बनाने के लिए लाइसेंस जरूरी है तथा ऐसे व्यक्ति को औषधि और कॉस्मेटिक्स अधिनियम, 1940 की अनुसूची एम-II तथा नियमावली 1945 में दी गयी शर्तों का पालन करना आवश्यक है, जो कि निम्नानुसार है :

  • कॉस्मेटिक्स बनाने के कारखाने का अहाता स्वास्थ्यकर वातावरण में होना चाहिए तथा उसे साफ-सुथरा रखना आवश्यक है।
  • वह आवासीय उदेश्य के लिए प्रयोग किए जा रहे अहाते से अलग होना चाहिए
  • लाइसेंसधारी व्यक्ति के पास पर्याप्त जगह, भवन आदि होना चाहिए
  • सक्षम तकनीकी स्टाफ के पर्यवेक्षण और निर्देषन में कॉस्मेटिक्स का उत्पादन किया जाना चाहिए जिनमें अग्रलिखित योग्यता होनी चाहिएः
  1. जिनके पास भारतीय फार्मेसी परिषद द्वारा अनुमोदित फार्मेसी में डिप्लोमा हो
  2. रसायन विज्ञान के साथ इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण होना चाहिए

सजा का प्रावधान

अधिनियम एवं नियमावली का उल्लंघन करके कॉस्मेटिक्स के निर्माण करने वाले व्यक्ति को -

  • पहली बार दोषी होने पर : एक साल की कैद या एक हजार रुपये जुर्माना या दोनों हो सकती है।
  • नकली कॉस्मेटिक बनाने पर : तीन साल तक की कैद और जुर्माने की सजा हो सकती है।

दोनों मामलों में दुबारा अपराध करने पर दो साल की कैद या दो हजार रुपये तक के जुर्माने या दोनों की सजा हो सकती है।

आयात किए जाने वाले कॉस्मेटिक्स के लिए यह आवश्ययक है कि भेजे जा रहे माल के साथ एक इनवायस या विवरण जरूर होना चाहिए जिसमें भेजे गए माल में शामिल किए गए कॉस्मेटिक्स की प्रत्येक वस्तु का नाम व मात्रा तथा निर्माता का नाम व पता दिखाया गया हो।

कॉस्मेटिक्स उत्पादों पर जो लेबल लगाया जाय वह अन्दर व बाहर इस प्रकार का हो कि उसमें कॉस्मेटिक्स का नाम, निर्माता का नाम, निर्माण किए जाने वाले परिसर का पता हो। वस्तु का आकार छोटा होने पर निर्माता कानाम, प्रमुख स्थान व पिनकोड अवश्यय हो। अंदर लगाए जाने वाले लेबल में खतरे वाली चीज के लिए सुरक्षित प्रयोग किए जाने के निर्देष/चेतावनी या सावधानी का उल्लेख होना जरूरी है। बाहरी लेबल पर वजन/माप, संख्या आदि होना चाहिए।

कॉस्मेटिक्स का प्रयोग महिलाओं द्वारा ही नहीं, बल्कि पुरुषों और बच्चों द्वारा भी किया जाता है। औषधि एवं कॉस्मेटिक्स नियमावली, 1945 की अनुसूची 'घ' में सूचीबद्ध कॉस्मेटिक्स अग्रलिखित हैं :

पिछले कुछ दिनों से देखने में आ रहा है, कि कॉस्मेटिक्स उत्पादों को 'प्राकृतिक तत्वों से बना हुआ या हर्बल' उत्पादों के रूप में विज्ञापित किया जा रहा है। इसमें यह देखने की बात है कि उपभोक्ताओं को प्राकृतिक के नाम पर शोषित तो नही किया जा रहा है। आमतौर पर यह विश्वास किया जाता है कि 'प्राकृतिक' उत्पाद प्रकृति से लिए जाते हैं। किसी उत्पाद को प्राकृतिक के रूप में विज्ञापित करने का तात्पर्य यह नहीं है कि यह उत्पाद ग्राहकों के लिए सुरक्षित और अहानिकर है। प्राकृतिक के लेबल लगे उत्पादों को खरीदते समय उपभोक्ता इन बातों का अवश्य ध्यान दें :

  • यदि किसी उत्पाद पर प्राकृतिक का लेबल लगा है तो उपभोक्ता को इस बात का भरोसा नहीं होना चाहिए कि यह उत्पाद सदैव अच्छा ही होगा। प्रयोग से पहले लेबल का उचित ढंग से अध्ययन करना चाहिए।
  • प्राकृतिक का लेबल लगी सभी चीजें सुरक्षित नहीं होती हैं।
  • यह देखें कि लेबल पर प्राकृतिक होने का दावा वास्तव में बढ़ा-चढ़ा कर किया गया है या विज्ञापन वास्तव में प्रभावशाली है।
  • किसी संदेह की स्थिति में किसी फार्मासिस्ट या डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए।
  • किसी शिकायत की स्थिति में, उपभोक्ता के पास या तो औषधि नियंत्रक कार्यालय में या उपभोक्ता मंच में शिकायत दायर करने का साहस होना चाहिए।
  • सामान्य समझ-बूझ और कुछ अहतियात बरतकर कॉस्मेटिक्स के दुरुपयोग से बचा जा सकता है:
  1. कॉस्मेटिक्स अनेक प्रकार के रसायनों और द्रव्यों से बनाया जाता है।
  2. सोने से पूर्व दिन में किए जाने वाले पूरे मेकअप को साफ कर दें
  3. मेकअप का साझा इस्तेमाल न करें विशेषरूप से आँख के मेकअप या लिप्सटिक आदि का।
  4. उत्पाद का मूल गाढ़ापन वापस लाने के लिए उसमें कभी भी कोई तरल पदार्थ न मिलाएं, क्योंकि इससे बैक्टीरिया पैदा हो सकते है।
  5. जिससे एलर्जी हो उस उत्पाद का इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें।
  6. मेकअप का रंग बदलने या दुर्गंध आने पर उसे नष्ट कर दें।
  7. आँखों में संक्रमण होने पर किया जाने वाला मेकअप नष्ट कर दें।
  8. यात्रा के दौरान आँखों में मेकअप न लगाएं क्योंकि चोट लगने की दषा में अंधेपन जैसी बीमारी हो सकती है।
  9. कॉस्मेटिक उत्पादों को सूर्य की रोशनी से दूर रखें।
  10. प्रयोग न किए जाने पर मेकअप कंटेनर को बंद कर दें।
  11. कॉस्मेटिक को बच्चों की पहुंच से दूर रखें।
  12. धूम्रपान करते समय हेयर स्प्रे जैसे उत्पादों का प्रयोग न करें क्योंकि इससे आग लग सकती है।
  13. हेयर स्प्रे और पाउडर के सांस द्वारा अन्दर जाने पर सांस की बीमारी हो सकती है।

औषधि और कॉस्मेटिक्स अधिनियम, 1940 स्वतंत्रता से पहले का एक कानून है और इससे यह अपेक्षा की जाती है, कि यह भारत में दो सबसे अधिक लाभ कमाने वाले उद्योगों अर्थात औषधि और कॉस्मेटिक्स उद्योगों को विनियमित करेगा। चूंकि निम्न स्तर की औषधियों से जीवन को खतरा होता है इसलिए औषधि विनियामक निकाय अधिक सतर्कता रखते हैं और नियमित मॉनीटरिंग करते है। दुर्भाग्य से कॉस्मेटिक्स के विनियमों का कठोरता से पालन नहीं होता है परन्तु यह नहीं भूलना चाहिए कि नकली और असंगत ढंग से बनाए गए कॉस्मेटिक्स उत्पाद, मानव शरीर के विभिन्न अंगों को गंभीर क्षति पहुँचा सकते हैं।

कॉस्मेटिक उत्पादों के प्रयोग से होने वाली समस्या के लिए उपभोक्ता को अनेकों अधिकार हैं। अक्सर उपभोक्ता की ओर से उत्पाद की खरीद उसकी माता या अन्य व्यक्ति द्वारा की जाती है। किसी शिकायत के होने पर उपभोक्ता निम्नलिखित में से किसी की सहायता ले सकता है

  • सरकार-केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के औषधि नियंत्रक प्राधिकारी कोर-उपभोक्ता ऑनलाइन संसाधन और सशक्तिकरण केन्द्र (राष्ट्रीय उपभोक्ता सहायता लाइन), नई दिल्ली।
  • उपभोक्ता विवाद निवारण एजेंसियां (उपभोक्ता न्यायालय)
  1. जिला स्तर पर जिला फोरम (जिला-उपभोक्ता विवाद निवारणमंच)
  2. राज्य स्तर पर राज्य आयोग (राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग)
  3. राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय आयोग (राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग)
  4. गैर-सरकारी निकाय

कोर-उपभोक्ता ऑनलाइन संसाधन और सशक्तीकरण केंद्र

(राष्ट्रीय उपभोक्ता सहायता लाइन), नई दिल्ली

सी. सी. सी.-उपभोक्ता समन्वय परिषद, नई दिल्ली।

सी. सी. आर. एस. - शिक्षा और अनुसंधान सोसाइटी, अहमदाबाद।

  • डॅाक्टर/ फार्मासिस्ट
  • इलैक्ट्रानिक या प्रिंट मीडिया

स्त्रोत: भारतीय लोक प्रशासन संस्थान,नई दिल्ली।

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