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बैकिंग एवं उपभोक्ता

इस भाग में बैंकिग एवं उपभोक्ता की जागरुकता के संबंध में जानकारी दी गई है।

सामान्य बैंकिग

वर्तमान में लगभग प्रत्येक व्यक्ति प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बैंक की सेवाएँ लेता है। चाहे किसान हों या व्यापारी, नौकरीपेशा हों या सेवानिवृत्त कर्मचारी, विद्यार्थी हों या फिर अध्यापक किसी न किसी रूप में सभी बैंक की सेवाएँ प्राप्त करते हैं।

बैंकिंग संस्थान ग्राहकों की आवश्यकताओं एवं उपलब्धता के आधार पर अपनी सेवाएँ प्रदान करते हैं। अपने द्वारा उपलब्ध करायी गयी सेवाओं के बदले, बैंक ग्राहकों से कुछ शुल्क लेते हैं। यह शुल्क अलग-अलग बैंकों द्वारा ग्राहकों को प्रदान की जाने वाली सेवाओं के लिए भिन्न-भिन्न हो सकता है।

खुली अर्थव्यवस्था और बैंकिंग विस्तार

आज खुली अर्थव्यवस्था के युग में सार्वजनिक बैंकों के साथ ही प्राइवेट बैंकों का तीव्र गति से विस्तार हो रहा है। प्रत्येक बैंकिंग संस्थान दूसरे संस्थानों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है। ऐसे में ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए विज्ञापनों का सहारा लिया जा रहा है। इन विज्ञापनों के माध्यम से एक से बढ़कर एक दावे किये जाते हैं। लेकिन कई बार यह दावे गलत साबित होते हैं और उपभोक्ता ठगा सा महसूस करता है। ऐसे में वह न्याय पाने के लिए इधर-उधर भटकने को विवश होता है। इसका प्रमुख कारण उपभोक्ताओं में जागरूकता की कमी हैं। अतः ग्राहकों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए तथा किसी भी बैंकिग संस्थान के साथ व्यवहार करते समय सचेत रहते हुए नियम एवं शर्तो को अच्छी तरह से पढ़-समझ कर ही किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करना चाहिए।

बैकिंग सेवाएँ क्या होती हैं?

सामान्यतः बैंकिग सेवाओं का आशय ऐसी सेवाओं से होता है, जो किसी बैंक/वित्तीय संस्थान द्वारा ग्राहकों की जरूरत एवं सेवाओं की उपलब्धता के आधार पर मुहैया करायी जाती हैं।

प्रमुख बैकिंग सेवाएँ

बैकों/बैंकिंग संस्थाओं द्वारा ग्राहकों/उपभोक्ताओं को उपलब्ध करायी जाने वाली प्रमुख सेवाएँ निम्नलिखित होती हैं :

  • चालू जमा खाता
  • बचत जमा खाता
  • मियादी जमा खाता
  • आवर्ती जमा खाता
  • पीपीएफ तथा अन्य जमा खाते
  • पेंशन भुगतान
  • मांग ड्राफ्ट
  • भुगतान आदेश
  • वायर ट्रांसफर
  • सरकारी लेन-देन से संबंधित बैंकिंग सेवाएं
  • डीमेट खाते
  • इक्विटी
  • सरकारी बांड
  • भारतीय करेंसी नोट विनियम सुविधा
  • चेकों की वसूली
  • सुरक्षित जमा लाकर सुविधा
  • ऋण तथा ओवर ड्राफ्ट
  • मुद्रा परिवर्तन सहित विदेशी मुद्रा सेवाएँ
  • बैंकों की शाखाओं के माध्यम से बेचे गए तृतीय पार्टी बीमा तथा निवेश उत्पाद
  • क्रेडिट कार्ड
  • डेबिट कार्ड सहित अन्य कार्ड उत्पाद

नोटः यह जरूरी नहीं है, कि सभी उत्पाद एवं सेवाएँ सभी बैंकों में उपलब्ध हों।

ग्राहक और उपभोक्ता में अन्तर

बैंकिंग सेवाओं के संदर्भ में ग्राहक और उपभोक्ता में भेद होता है, जिसे निम्नलिखित परिभाषाओं से समझा जा सकता है।

ग्राहक

कोई व्यक्ति बैंक का ग्राहक तभी माना जाता है, जब संबंधित बैंक में उसका खाता खुला हो।

उपभोक्ता

उपभोक्ता होने के लिए बैंक में खाता होना आवश्यक नहीं है। उपभोक्ता की श्रेणी में वह व्यक्ति भी आता है, जिसका खाता तो बैंक में नहीं होता है, लेकिन बैंक उसे सेवाएँ प्रदान करते हैं। उदाहरण के लिए-बैंक ड्राफ्ट, क्रेडिट कार्ड सुविधा आदि।

भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय बैकिंग कोडे एवं मानक बोर्ड

भारतीय रिजर्व बैंक ग्राहकों /उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए समय-समय पर बैंकों/वित्तीय संस्थानों को दिशा-निर्देश जारी करता रहता है, जिसका अनुपालन करना सभी बैंकों/वित्तीय संस्थानों के लिए आवश्यक है। भारतीय रिजर्व बैंक केवल दिशा-निर्देश ही नहीं जारी करता बल्कि बैकों/वित्तीय संस्थानों के क्रिया-कलापों की समय-समय पर समीक्षा एवं निगरानी भी करता है।

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा स्थापित भारतीय बैंकिंग कोड एवं मानक बोर्ड ने बैंकों के लिए कुछ स्वैच्छिक आचार संहिता निर्धारित किए हैं। यह स्वैच्छिक आचार संहिता अलग-अलग ग्राहकों के साथ बैंकों द्वारा व्यवहार करते समय न्यूनतम मानक निर्धारित करते हैं।

स्वैच्छिक कोड के उदेश्य

भारतीय बैंकिंग कोड एवं मानक बोर्ड द्वारा तैयार किए गए इन स्वैच्छिक आचार संहिताओं का विशेष उद्‌देश्य है। एक जागरूक ग्राहक/उपभोक्ता को इन आचार संहिताओं की जानकारी रखनी चाहिए ताकि बैंक/वित्तीय संस्थान के साथ व्यवहार करते समय उनके हितों की सुरक्षा हो सके। ये स्वैच्छिक आचार संहिता निम्नलिखित हैं :

  • ग्राहकों को सुरक्षा प्रदान करना
  • ग्राहकों के साथ बैंकों के व्यवहार के न्यूनतम मानक का निर्धारण करना
  • 82 उपभोक्ता के अधिकार - एक विवेचन
  • अच्छी व निष्पक्ष बैंकिंग प्रथाओं को बढ़ावा देना
  • बैंकों के काम-काज में पारदर्शिता लाना
  • स्वस्थ्य प्रतिस्पर्धा के माध्यम से बाजार को शक्तिशाली बनाना
  • ग्राहकों एवं बैंकों के बीच निष्पक्ष एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण कायम करना
  • बैंकिंग प्रणाली में लोगों का विश्वास बढ़ाना

नोटः (जब तक कि अलग से उल्लेख न हो, यह कोड बैंकों के सभी उत्पादों एवं सेवाओं पर लागू होता है। चाहे वे बैंकों के शाखाओं या सहायक संस्थाओं द्वारा बैंक के काउंटर पर, फोन पर, डाक द्वारा, फैक्स द्वारा इंटरनेट से या अन्य किसी विधि से दी गयी हों।

भारतीय बैकिंग बोर्ड एवं मानक बोर्ड द्वारा निर्धारित आचार संहिता

भारतीय बैंकिंग बोर्ड एवं मानक बोर्ड द्वारा निर्धारित आचार संहिता निम्नलिखित हैं :

ग्राहकों के प्रति बैंकों की प्रतिबद्धताएं : ग्राहकों के प्रति बैंकों की कुछ प्रतिबद्धताएं होती हैं जिसे सुनिश्चित करते हुए बैंकों को अपने ग्राहकों के साथ निष्पक्ष एवं न्यायसंगत व्यवहार करना चाहिए। ये प्रतिबद्धताएं निम्नलिखित हैं :

  • बैंक के काउंटर पर नकदी एवं चेक की प्राप्ति तथा भुगतान की न्युनतम बैंकिंग सेवाएँ उपलब्ध कराना।
  • बैंकों द्वारा प्रस्तुत उत्पादों एवं सेवाओं के लिए तथा बैंकों के स्टाफ द्वारा अपनायी जा रही क्रियाविधियों तथा प्रथाओं में इस कोड की प्रतिबद्धताओं तथा मानकों को पूरा कराना।
  • यह सुनिश्चित करना कि बैंक के उत्पाद तथा सेवाएं संबंधित कानूनों तथा नियमों का पूरी तरह से पालन करती हैं।
  • ग्राहक के साथ बैंक के व्यवहार ईमानदारी तथा पारदर्शतिा के नैतिक सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए।
  • बैंकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी शाखाओं में सुरक्षित तथा भरोसेमंद बैंकिंग तथा भुगतान प्रणालियां चलती रहें।
  • उत्पाद एवं सेवा के बारे में ग्राहकों को स्पष्ट रूप से सूचना देना। इसके लिए हिन्दी, अंग्रेजी या स्थानीय भाषा का प्रयोग किया जाना चाहिए। बैंक के विज्ञापन तथा संवर्धन संबंधी साहित्य स्पष्ट होने चाहिए। यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि विज्ञापन किसी प्रकार से भ्रामक न हों।
  • बैंक के उत्पादों एवं सेवाओं के संबंध में, उन पर लागू शर्तों तथा ब्याजदरों और सेवा प्रभारों के संबंध में ग्राहकों को स्पष्ट सूचना दिया जाना चाहिए।
  • ग्राहकों को कैसे लाभ हो सकता है, उसके वित्तीय निहितार्थ क्या हैं, आदि बातों की जानकारी देना तथा किसी प्रकार की समस्या होने पर ग्राहक किससे संपर्क करें, इन सब बातों की जानकारी दी जानी चाहिए।
  • ग्राहकों के खाते तथा सेवा के उपयोग के बारे में नवीनतम जानकारी उपलब्ध कराना बैंकों का कर्तव्य है।
  • कुछ गलत हो जाने पर शीघ्र तथा सहानुभूतिपूर्वक कार्रवाई करना।  गलती को तुरंत सुधारना तथा बैंक की गलती के कारण लगाए गए बैंक प्रभारों को रद्‌द करना।
  • ग्राहकों की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करना।  तकनीकी असफलता के कारण उत्पन्न हुई किसी समस्या को दूर करने के लिए वैकल्पिक उपाय उपलब्ध कराना।
  • ब्याज दरों, प्रभारों या शर्तों में समय-समय पर होने वाले परिवर्तनों से ग्राहकों को अवगत कराना।
  • ग्राहकों की व्यक्तिगत सूचना को गोपनीय रखना।
  • खाता खोलते समय ग्राहकों को उत्पाद या सेवा से संबंधित सभी नियम एवं शर्तों की जानकारी देना।
  • बैंक की प्रत्येक शाखा में शुल्क एवं प्रभार की सूची लगाना।
  • ग्राहक को यदि बैंक से कोई शिकायत है तो, उसे कैसे, कहाँ तथा किससे शिकायत करनी है, इसकी जानकारी उपलब्ध कराना।
  • कोई भी बैंक बिना ग्राहक की लिखित अनुमति के, टेलीफोन, एसएमएस, ईमेल आदि द्वारा नए उत्पादों या सेवा के बारे में अतिरिक्त जानकारी नहीं देगा।
  • बैंक को ग्राहक के जमा व ऋण खातों पर लगने वाले ब्याज की सूचना देनी चाहिए।
  • ग्राहक की जमाराशियों पर ब्याज, कितना और कब देंगे या ऋण खातों पर प्रभार कब लगाया जाएगा इसकी सूचना बैंक को देनी चाहिए।
  • किसी उत्पाद के ब्याज दर पर होने वाले परिवर्तनों की सूचना ग्राहक को दी जानी चाहिए।
  • बैंक को अपनी शाखाओं में सूचना पट्‌ट लगाना आवश्यक है तथा उस पर निःशुल्क सेवाओं की सूची, बचत खाते में न्यूनतम जमाराशि न रखने पर लगने वाला प्रभार, बाहरी चेक की वसूली, मांग ड्राफ्ट, चेक बुक जारी करने पर, खाता विवरण, खाता बंद करने तथा एटीएम में राशि जमा करने एवं निकालने पर लगने वाले प्रभार की सूचना लिखना अनिवार्य है।
  • ग्राहकों द्वारा चुने गए उत्पाद या सेवा की शर्तों के उल्लंघन या अनुपालन न करने पर दंड के बारे में भी बैंक को सूचित करना चाहिए।  यदि बैंक किसी प्रभार में वृद्धि करते हैं या नया प्रभार लागू करते हैं, तो इसके प्रभावी होने की तारीख से एक माह पूर्व उन्हें अधिसूचित किया जाना चाहिए।
  • बैंक ग्राहक की वैयक्तिक सूचना को गोपनीय रखने के लिए प्रतिबद्ध होता है, लेकिन कुछ अपवादात्मक मामलों में उसे छूट है, जो निम्न हैं:
  • बैंक को कानूनी तौर पर देनी पड़े।
  • सूचना देना जनहित में जरूरी हो।
  • बैंक के हितों के लिए सूचना देना आवश्यक हो, उदाहरण के लिए- धोखाधड़ी रोकने के लिए
  • ऋण संदर्भ एजेंसियां
  • बैंक का यह दायित्व हैं कि जब वह किसी ग्राहक का खाता खोलता है और उसे ऋण प्रदान करता तो वह किन परिस्थियों में ग्राहक के खाते का विवरण ऋण संदर्भ एजेंसियों को देगा इसकी जानकारी ऋण देते समय ग्राहक को प्रदान किया जाना चाहिए।

निम्नलिखित परिस्थितियों में बैंक ऐसा कर सकता है :

  1. जब ग्राहक भुगतान न करा हो।
  2. बैंक की औपचारिक मांग के बाद, ऋण की चुकौती के बारे में बैंक ग्राहक के प्रस्तावों से संतुष्ट न हो।

ऐसे मामलों में बैंक द्वारा ग्राहक को लिखित सूचना दिया जाना चाहिए।

  • जब भी बैंक किसी ग्राहक को ऋण देता है तो उसे चुकौती की राशि तथा उस पर लगने वाले ब्याज आदि के बारे में पूरी जानकारी दी जानी चाहिए।
  • यदि ग्राहक बैंक द्वारा ऋण ली गयी राशि का चुकौती नहीं करता है, तो बैंक को यह अधिकार है कि वह राशि की वसूली के लिए देश के कानूनों के मुताबिक कार्रवाई करे। इस प्रणाली में नोटिस भेजकर या व्यक्तिगत रूप से मिलकर या यदि कोई प्रतिभूति है तो उस पर पुनः अधिकार प्राप्त करना शामिल है। लेकिन बैंक ग्राहक के साथ किसी प्रकार की जोर-जबर्दस्ती नहीं कर सकता।
  • बैंक की समाहरण नीति शिष्टाचार, उचित व्यवहार और समझाने बुझाने पर आधारित होनी चाहिए। बैंक का कोई भी स्टॉफ या कोई व्यक्ति जिसे राशि के सामहरण या प्रतिभूति के पुनः अधिकार के लिए प्रतिनिधित्व दिया गया है। वह यदि ग्राहक के पास जाता है तो पहले वह स्वयं की पहचान बताएगा तथा बैंक द्वारा जारी किया गया अधिकार पत्र दिखाएगा।

समाहरण या/प्रतिभूति के पुनः अधिकार के लिए बैंक द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति या स्टॉफ के लिए निम्नलिखित दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य है।

  1. सामान्यता ग्राहक के पसन्द के स्थान पर और यदि कोई विशेष स्थान नहीं है तो ग्राहक के आवास पर और यदि वह वहाँ उपलब्ध नहीं है तो कारोबार के स्थान पर संपर्क करेगा।
  2. पहचान व प्रतिनिधित्व करने के अधिकार के बारे में ग्राहक को तुरंत बताएगा।
  3. ग्राहक के प्राइवेसी का आदर करेगा।
  4. ग्राहक से वार्तालाप करते समय शिष्टाचार के नियमों का पालन करेगा।
  5. सामान्यतः बैंक के प्रतिनिधि को सुबह 7 बजे से सायं 7 बजे के बीच ग्राहक से संपर्क करना चाहिए, जब तक की ग्राहक के कारोबार की विशेष परिस्थितियों के कारण कोई अन्य समय की जरूरत न हो।
  6. एक विशेष समय या किसी विशेष स्थान पर कॉल्स न करने के ग्राहक के अनुरोध का भरसक आदर करना चाहिए।
  7. देय राशि संबंधी विवाद या मतभेदों को आपस में स्वीकार्य तथा विधिवत रूप से निपटाने की पूरी कोशिश की जानी चाहिए।
  8. अनुचित अवसरों जैसे परिवार में शोक या अन्य किसी विपदा के समय कॉल करने तथा ग्राहक के पास जाने से बचा जाना चाहिए।

(स्रोतः आरबीआई, बीसीएसबीआई)

इस संबंध में विस्तृत जानकारी-

भारतीय रिजर्व बैंक अथवा भारतीय बैंकिंग कोड एवं मानक बोर्ड से प्राप्त किए जा सकती है।

बैकिंग लोकपाल योजना, 2006

बैंक के ग्राहकों एवं उपभोक्ताओं के परिवादों के निवारण के लिए बैंकिग लोक पाल योजना लागू की गयी है। यह योजना भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 1 जनवरी, 2006 से पूरे देश में लागू है। लगभग सभी राज्यों की राजधानियों में इसके कार्यालय हैं, जहाँ भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से न्युक्त अधिकारी ग्राहकों की समस्याएँ सुनते हैं तथा उसका समाधान करते हैं।

सभी बैंकों की वेबसाइट पर अथवा बैंकों की शाखाओं में अनुरोध करके नाममात्र के प्रभार पर भारतीय रिजर्व बैंक की बैंकिंग लोकपाल योजना की एक प्रति प्राप्त की जा सकती है। इनके कार्यालयों के पते बैंक में न्युक्त नोडल अधिकारी से प्राप्त किया जा सकता है। इस योजना के अधीन सभी कामर्शियल, क्षेत्रीय ग्रामीण तथा कोऑपरेटिव बैंक आते हैं।

कौन-कौन सी शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं?

बैंकिंग लोकपाल योजना, 2006 के अन्तर्गत प्रमुख रूप से निम्न प्रकार की शिकायतें दर्ज करायी जा सकती हैं :

  • इंटरनेट बैंकिंग सहित सभी प्रकार की सेवा में कमी से संबंधित शिकायतें। जैसे, धननिकासी या जानबूझकर धननिकासी में बैंक द्वारा देर करना।
  • चेक, ड्राफ्ट, बैंक ड्राफ्ट आदि से संबंधित शिकायत होने पर।
  • बिना किसी उचित कारण के बैंक द्वारा सिक्कों तथा नोट को न देना।
  • बिना किसी कारण के लोन के आवेदन को अस्वीकार कर देना।
  • बैंक खातों को बन्द न करना या उसमें जानबूझकर देरी करना।
  • बिना किसी पूर्व सूचना के ग्राहक के खाते को बन्द कर देना।
  • इसके अलावा वे सभी कार्य जो भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशों का अनुपालन न करती हों।

शिकायत कब दर्ज करायी जा सकती हैं?

निम्नलिखित स्थितियों में कोई ग्राहक या उपभोक्ता बैंकिंग लोकपाल योजना, 2006 के तहत शिकायत दर्ज करा सकता है-

  • जब ग्राहक की शिकायत पर बैंक कोई कार्रवाई न कर रहा हो।
  • ग्राहक द्वारा बैंक में शिकायत करने के 30 दिन के भीतर यदि बैंक कोई जवाब न दे तो ग्राहक को यह अधिकार प्राप्त है कि वह अपनी समस्या के समाधान के लिए बैंकिंग लोकपाल कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकता है।
  • यदि कोई बैंक ग्राहक की शिकायत को स्वीकार नहीं करता है तो ऐसी स्थिति में भी ग्राहक बैंकिंग लोकपाल योजना, 2006 के तहत शिकायत दर्ज करा सकता है।
  • यदि कोई ग्राहक बैंक द्वारा दिए गये जवाब से संतुष्ट न हो, तो ऐसी दशा में वह बैंकिंग लोकपाल कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकता है।

स्त्रोत: भारतीय लोक प्रशासन संस्थान,नई दिल्ली।

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