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बाल विवाह

यह भाग भारत में राज्यनुसार बाल विवाह संबंधी आंकड़े रखते हुए उसके कारण,कुप्रभाव और उसके उन्मूलन हेतु किये जा रहे प्रयासों की जानकारी देता है।

बाल विवाह -एक परिचय

बाल विवाह का सम्बन्ध आमतौर पर भारत के कुछ समाजों में प्रचलित सामाजिक प्रक्रियाओं से जोड़ा जाता है, जिसमें एक युवा लड़की (आमतौर पर 15 वर्ष से कम आयु की लड़की) का विवाह एक वयस्क पुरुष से किया जाता है। बाल विवाह की दूसरे प्रकार की प्रथा में दो बच्चों (लड़का एवं लड़की) के माता-पिता भविष्य में होने वाला विवाह तय करते हैं। इस प्रथा में दोनों व्यक्ति (लड़का एवं लड़की) उनकी विवाह योग्य आयु होने तक नहीं मिलते, जबकि उनका विवाह सम्पन्न कराया जाता है। कानून के अनुसार, विवाह योग्य आयु पुरुषों के लिए 21 वर्ष एवं महिलाओं के लिए 18 वर्ष है।

यदि किसी का कोई भी साथी इससे कम आयु में विवाह करता है, तो वह विवाह को अमान्य/ निरस्त घोषित करवा सकता/सकती है।

बाल विवाहः तथ्य व आँकड़े

विभिन्न राज्यों में अठारह वर्ष से कम आयु में विवाहित हो रही लड़कियों का प्रतिशत खतरनाक है-

  • मध्य प्रदेश – 73 प्रतिशत
  • राजस्थान – 68 प्रतिशत
  • उत्तर प्रदेश – 64 प्रतिशत
  • आन्ध्र प्रदेश – 71 प्रतिशत
  • बिहार – 67 प्रतिशत

यूनीसेफ की  “विश्व के बच्चों की स्थिति-2009” रिपोर्ट के अनुसार 20-24 वर्ष आयु वर्ग की भारत की 47 प्रतिशत महिलाएं कानूनी रूप से मान्य आयु सीमा– 18 वर्ष से कम आयु में ब्याही गईं, जिसमें 56 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों से थीं। यूनीसेफ के अनुसार (‘विश्व के बच्चों की स्थिति-2009’) विश्व के बाल विवाहों में से 40 प्रतिशत भारत में होते हैं।

बाल विवाह के कुप्रभाव

जो लड़कियां कम उम्र में विवाहित हो जाती हैं उन्हें अक्सर कम उम्र में सेक्स की शुरुआत एवं गर्भधारण से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं होने की प्रबल सम्भावना होती है, जिनमें एच.आई.वी एवं ऑब्स्टेट्रिक फिस्चुला शामिल हैं।

  • कम उम्र की लड़कियां, जिनके पास रुतबा, शक्ति एवं परिपक्वता नहीं होते, अक्सर घरेलू हिंसा, सेक्स सम्बन्धी ज़्यादतियों एवं सामाजिक बहिष्कार का शिकार होती हैं।
  • कम उम्र में विवाह लगभग हमेशा लड़कियों को शिक्षा या अर्थपूर्ण कार्यों से वंचित करता है जो उनकी निरंतर गरीबी का कारण बनता है।
  • बाल विवाह लिंगभेद, बीमारी एवं गरीबी के भंवरजाल में फंसा देता है।

जब वे शारीरिक रूप से परिपक्व न हों, उस स्थिति में कम उम्र में लड़कियों का विवाह कराने से मातृत्व सम्बन्धी एवं शिशु मृत्यु की दरें अधिकतम होती हैं।

बाल विवाह के कारण

  • गरीबी
  • लड़कियों की शिक्षा का निचला स्तर
  • लड़कियों को कम रुतबा दिया जाना एवं उन्हें आर्थिक बोझ समझना
  • सामाजिक प्रथाएं एवं परम्पराएं

बाल विवाहः उन्मूलन हेतु सरकार व गैर सरकारी संस्थाओं की पहल

  • बाल विवाह के विरुद्ध कानूनों का निर्माण
  • लड़कियों की शिक्षा को सुगम बनाना
  • हानिकारक सामाजिक नियमों को बदलना
  • सामुदायिक कार्यक्रमों को सहायता
  • विदेशी सहायता अधिकतम करना
  • युवा महिलाओं को आर्थिक अवसर प्रदान करना
  • बाल वधुओं की विरले ज़रूरतों को पूरा करना
  • कार्यक्रमों का आकलन कर देखना कि क्या बात असरदार होगी

सरकार की पहल

  • बाल विवाह निरोधक कानून
  • बाल विवाह प्रथा रोकने के प्रयास में राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं हिमाचल प्रदेश राज्यों ने कानून पारित किए हैं जो प्रत्येक विवाह को वैध मानने के लिए उसका पंजीकरण आवश्यक बनाते हैं।
“बच्चों के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना 2005” के अनुसार (भारत के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रकाशित) 2010 तक बाल विवाह को पूर्ण रूप से समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।  
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Vinay Kumar keshari Jul 26, 2019 10:37 AM

Sir Sabse pahle samaj me jagruk karna hoga .aur Batana hoga ki Bal biwah thik nahi hai .Kam Umar ki shadi jivan ki barbadi hai . Kuch bimari Ko lekar dikha hoga . Samaj ki galat soch Ko ba dana hoga . education hona Bahut jaruri hai . Soch badelega to Desh badlega

Armaan Malik Apr 22, 2019 06:16 PM

हिंदी में सभी जानकारी के लिए पढ़े हिंदी यार

Akhilesh kumar Dec 26, 2018 04:13 PM

सर मैं बहुत दुखी हूं मेरे लाख समझाने के बावजूद मेरे घरवाले मेरे छोटे भाई का जबरदस्ती शादी कर रहे हैं और मेरा भाई शादी करना नहीं चाहता है call me sir main ush family ko chod Kar main bahut dur Chala jaunga please solution call me m. 89XXX55

yash Aug 25, 2018 05:40 AM

Bal viva AK kanune crime

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