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भागलपुर के चार प्रखंडों की बेटियों ने देश में बनायी अलग पहचान

इस पृष्ठ में बिहार की बेटियों के अनोखे प्रयास की जानकारी दी गयी है।

परिचय

वह किसी बड़े घर में नहीं पली हैं। कोई मजदूर की बेटी हैं, तो कोई छोटे-मोटे किराना दुकानदार की लाड़ली। किसी बड़े स्कूल की की छात्र नहीं, लेकिन जज्बा और बहुत कुछ पा लेने की भूख के बलबूते भागलपुर के चार प्रखंडों की 10 बेटियां राज्य व देश स्तर पर धूम मचा चुकी हैं। भले ही इनके चेहरे पर मासूमियत दिखती हो, पर अब तक राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होनेवाली जूड़ो -कराटे प्रतियोगिता में कई धुरंधरों को धूल चटा चुकी हैं। 10-12 वर्ष की उम्र में खेल शुरू करनेवाली इन बेटियों ने अब तक स्वर्ण और कई कांस्य पदक तक हासिल कर चुकी हैं।

कराटे में कमाल कर रही ये लडकियाँ

सभी 10 बच्चियाँ कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में पढ़ाई कर चुकी हैं। वर्ष 2012 से जूडो-कराटे सीख रही हैं। बिहार शिक्षा परियोजना की ओर से इन्हें अब तक टुकड़ों में 60 दिन, 100 दिन और 15 दिनों का प्रशिक्षण मिल पाया है। इन 10 बच्चियों का चयन सभी 16 प्रखंडों से चयनित 160 बच्चियों में से किया गया था। सभी 10 बच्चियों ने वर्ष 2014 में बीइपी द्वारा पटना में आयोजित राज्यस्तरीय प्रतियोगिता ‘जोश’ में भाग लिया। इसमें गुलनाज ने गोल्ड पर कब्जा जमाया, तो चमेली, नेहा, करिश्मा व मुन्नी ने कांस्य पदक प्राप्त किया। करिश्मा का कहना था कि वह यह कला खुद के व दूसरों के बचाव के लिए सीख रही हैं। अधिकतर बच्चियों का कहना था कि वह प्रशिक्षक बन कर उनकी तरह की 100 टीम भागलपुर में तैयार करेंगी। इसके बाद स्पोर्ट्स कराटे एसोसिएशन ऑफ बिहार द्वारा चमेली का चयन कर दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग दिलाया गया। इसमें वह सेमीफाइनल तक पहुंच पायी।

बच्चियों में गजब का जुनून है : प्रशिक्षक

जीरो माइल निवासी घड़ी मेकैनिक सुनील कुमार चौधरी की बेटी बबिता चौधरी (ब्लैक बेल्ट सेकेंडडन ) द्वारा बच्चियों को प्रशिक्षता किया जाता है। उन्होंने बताया कि इन बच्चियों में बहुत कुछ पा लेने का जुनून है। बिहार शिक्षा परियोजना के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी नसीम अहमद ने बताया कि आनेवाले दिनों में ये बच्चियां भागलपुर की शान बनेंगी। मेरी शुभकामना इन लोगों के साथ जूडो-कराटे में कई राज्यों में बेहतर प्रदर्शन कर चुकीं लड़कियां रोज मैदान में बहाती हैं पसीना।

मजदूर व किराना दुकानदार के घर से निकलीं राज्य व राष्ट्रस्तरीय प्रतिभा

- प्रतिमा कुमारी, पिता -शंकर प्रसाद सिंह (पेशा-मजदूरी), कुमारपुर, सुलतानगंज

- नेहा कुमारी, पिता-श्याम साह (पेशा-मजदूरी), कुमारपुर, सुलतानगंज

- करिश्मा कुमारी, पिता-निरंजन कुमार यादव (पेशा-दुकानदारी), श्रीरामपुर, सुलतानगंज

- चांदनी कुमारी, पिता - स्व नारायण दास, मां- सविता देवी (पेशा-मजदूरी), मिरजागांव, पीरपैंती

- ममता कुमारी, पिता-टैरु दास (पेशा-मजदूरी), पसाईचक, पीरपैंती

- मुन्नी कुमारी, पिता-रामचंद्र उरांव (पेशा-मजदूरी), फूलजोरी, पीरपैंती

- चमेली कुमारी, पिता-कुलदीप पासवान (पेशा-खेती), मुस्तफापुर, जगदीशपुर

- प्रीत कुमारी,पिता-बजरंगी चौधरी (पेशा-पाशी), नयाचक मकना, जगदीशपुर

- रोशनी कुमारी, पिता-बिरजू ऋषिदेव (पेशा-मजदूरी), कासड़ी , कहलगांव

- गुलनाज खातून, पीरपैंती

लेखन : संदीप कुमार, स्वतंत्र पत्रकार

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