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शराब की लत

इस लेख में शराब की लत और उससे होने वाली परेशानियों का जिक्र किया गया है|

खुद से करो प्यार,शराब को करो इ्ऩकार

शराब सेहत के लिये हानिकारक हैं,ये घरेलू हिंसा परिवार के बीच आपसी फूट का कारण है। शराब एक ऐसी लत है जो एक बार किसी इंसान को लग जाती है तो उसे मौत के मुंह तक ले जाती है।

हमारे देश में हर घंटे में लोग इसके कारण मौत के शिकार होते है,जिसका कारण शराब है। अत: एक शराबी मरते मरते अपने परिवार को भी मार देता है। अप्रैल माह को शराब के खिलाफ जागरूकता के रूप में मनाया जाता है,सरकारी अस्पतालो में शराब की आदत से मुक्ति के लिए  तरह-तरह की दवाएं मुफ्त में दिया जाता है।आजकल इस बुरी आदत से मुक्ति के लिए दुकानों में आयुर्वेद दवा भी उपलब्ध है|

अत: में हम सब आपस में निर्णय लें कि इस बुरी आदत को हमारे समाज से मिलकर हटायेंगे।

मद्यपान निषेध

1992 में महिलाओं द्वारा छेड़े गए मद्यपान विरोधी आन्दोलन के कारण, भारत में आन्ध्र प्रदेश में सभी प्रकार के अल्कोहल की बिक्री तथा उसे पीना एक अपराध है। इससे पहले, सरकार ने वरुण वाहिनी (मद्य की बाढ़) नीति का समर्थन किया था जिसकी वज़ह से अल्कोहल से बने पेय “अरक” का ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यधिक विपणन देखा गया। इस नीति के फलस्वरूप 1991-92 में मद्य की वज़ह से आबकारी शुल्क का राजस्व राज्य के कुल वार्षिक बजट के 10 प्रतिशत से भी अधिक हो गया। शराब उद्योग द्वारा राजनीतिक दलों को भी गलत तरीकों से वित्तीय योगदान दिया गया। जबकि सरकार द्वारा लागू रोक पर अभी भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं, महिलाओं के संघर्ष का राजनीतिक प्रभाव स्पष्ट है।

यह संघर्ष तब शुरू हुआ जब महिलाओं के स्वतंत्र समूहों ने अरक को गांव से दूर रखने का प्रयास किया। अरक से होनेवाले जीवन विनाश की वज़ह से महिलाएं एकजुट हुईं क्योंकि सरकार द्वारा वित्तपोषित साक्षरता अभियान, गैर सरकारी संगठनों द्वारा चलाया जा रहा था जिन्होंने साक्षरता के प्राथमिक पाठों में मद्यपान करने वाले पतियों के हाथों महिलाओं पर होने वाले ज़ुल्मों का वर्णन शामिल किया। महिलाएं अल्कोहल के विरुद्ध नहीं थी बल्कि सस्ते पेय की पैकिंग के विरुद्ध जो उसे उन दूरस्थ इलाकों में आसानी से उपलब्ध बनाता था जहां लोगों को पानी के लिए मीलों चलना पड़ता था। महिलाएं गुस्से में थीं क्योंकि उनके पति अपनी पूरी आमदनी पीने में खर्च कर रहे थे एवं वे पतियों के अत्याचारों से तंग आ चुकी थीं। महिलाओं ने उपभोक्ताओं के बजाय अरक के प्रदाताओं तथा व्यापारियों पर ध्यान केन्द्रित किया, इसलिए उन्हें कई पुरुषों का मूक समर्थन हासिल हुआ। महिलाओं ने गतिविधियों को अपने-अपने गांव तक सीमित रखा तथा गैर सरकारी संगठनों का समर्थन हासिल किया, हालांकि इस संघर्ष का नेतृत्व स्थानीय महिलाओं द्वारा ही किया गया।

अब यह संघर्ष गरीब, ग्रामीण महिलाओं से मध्यम वर्ग की शहरी महिलाओं तथा पुरुषों तक आ गया है जो गान्धीवादी आदर्शों में विश्वास करते हैं तथा शराब की पूर्ण रोक की मांग करते हैं। गांवों की महिलाएं चाहे राज्य-व्यापी सम्पूर्ण रोक के परिणामों के नतीज़ों का सामना कर पाएं या नहीं, लेकिन उन्होंने अवश्य राजनीतिक शक्ति की बुनियादें हिलाने में कामयाबी हासिल की है।

मद्यपान रोकने के दस उपाय

21 दिनों के अन्दर अल्कोहल पीना छोड़ें
(1) अपने लक्ष्य निर्धारित करें। कम पीने की इच्छा के लिए आपके क्या व्यक्तिगत कारण हैं? अपने विचार लिखें एवं इसे कोई लक्ष्य निर्धारित करने के लिए मार्गदर्शक बनाएं। चाहे यह पीने की अवसरों से दूर रहना हो, नियंत्रित रूप से पीने में हिस्सेदारी, या पूर्ण रूप से पीना बन्द करना, यह सुनिश्चित करें कि आपको मालूम हो कि आप ऐसा क्यों कर रहे हैं तथा यह सुनिश्चित करें कि कारण आपके लिए है, न कि किसी और के लिए, अन्यथा आप सफल नहीं होंगे।

(2) पीना कम करने के लिए अगले हफ्ते का कोई दिन चुनें। वह दिन चुनें जब आप आराम की स्थिति में तथा तनावमुक्त हों। ऐसे एक दिन की योजना बनाएं जब अल्कोहल से दूर रहना आसान हो।

(3) हार नहीं मानें। इस लेख में हमने यह कहीं नहीं लिखा है कि पीना छोड़ देना आसान होगा! अपने लक्ष्य अपने उन कारणों के साथ दिमाग में रखें जिनके बलपर आपने यह लक्ष्य निर्धारित किए। यदि आप एक दिन अधिक पी लें तो उसे अपने लक्ष्य को बिगाड़ने का कारण न बनने दें। अगले दिन फिर सही रास्ते पर आ जाएं। जब आप स्वयं को असफल करें तो केवल रॉबर्ट एफ. कैनेडी की यह उक्ति याद करें “आप सफल होंगे यदि आप वास्तव में अपनी पीने की आदत को नियंत्रण में लाना चाहते हों या पीना पूर्ण रूप से छोड़ना चाहते हों।”

(4) अपनी योजना को दूसरों के साथ बांटें। अपनी योजना के बारे में परिवार के सदस्यों एवं विश्वस्त मित्रों के साथ बात करें। उन्हें मालूम होने दें कि वे सफल होने में आपकी किस तरह मदद कर सकते हैं।
(5) अपने परिवार एवं मित्रों से मदद के लिए कहें। जो वास्तव में आपके परिवर्तन में मदद करना चाहते हों वे पूरे समय आपकी मदद करके प्रसन्न होंगे। स्पष्टरूप से अपनी चिंताएं बताएं।

(6) आराम करें। अल्कोहल लेना कम करने के आपके प्रयास के कड़ी में हफ्ते में एक दिन ऐसा रखें जब आप अल्कोहल नहीं पिएंगे। एक बार यह एक दिन आसानी से निकल जाए, उसे दो दिन करें, फिर तीन दिन, फिर एक हफ्ता। आपके बड़े लक्ष्य को छोटे लक्ष्यों में बांटना किसी संकल्प से कम नहीं है। उल्टे, यह आपको वास्तव में आपके लक्ष्य की ओर लम्बे समय तक बने रहने में मदद करेगा।

(7) यह मालूम करें कि आपके पीने की सम्भावना सबसे अधिक कब है तथा उससे बचने का प्रयास करें। जब घर पर या पार्टियों में हों तो अपनी योजना पर बने रहने के लिए अल्कोहल के बजाय कोई और पेय पदार्थ पीना चाहिए। आप अपनी पीने की आदत को किसी रचनात्मक शौक से भी स्थानापन्न कर सकते हैं, जो कि रचनात्मक हो जैसे व्यायाम करना, पढ़ना, पेंटिंग करना या अन्य बातें।

(8) लालच से दूर रहें। आपको पीने की इच्छा कब होती है? वह पार्टियां हैं या जब आप अकेले होते हैं? यह सुनिश्चित करें कि आपके लालच क्या हैं एवं उसके बाद उनसे बचने के लिए सरल योजनाएं बनाएं। शराब की जगह कोई अन्य पेय पदार्थ लें तथा घर पर भी यही करें। अन्यथा, अपनी पीने की आदत को अन्य रचनात्मक शौकों से बदलें जैसे व्यायाम करना, पढ़ना, पेंटिंग करना या अन्य बातें जिसमें आपको आनन्द मिलता हो।
(9) स्वयं को इनाम दें। जो पैसा आप पहले पीने पर खर्च कर रहे थे, उससे अपने परिवार या मित्रों के साथ कुछ मज़ेदार बातें करें। बाहर खाने जाएं, मूवी देखें, या खेल खेलें।
इससे संबंधित और जानकारी व विशेषज्ञ सलाह के लिए यहाँ क्लिक करें।

स्त्रोत:

पोर्टल विषय सामग्री टीम

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नरबद सिंह ार्मो Jan 07, 2020 03:35 PM

शराब पीना एक गलत आदत और गलत नशा है जो लोग शुरआत में शराब का सेवन करते है उनहे पहले तो बड़ा मजा आता है पर धीरे धीरे ये मजा समाज में बदनामी का कारन बन जाता है कुछ लोग पार्टी में जा कर इतनी शराब पी लेते है के उनहे पता भी नहीं चलता के उनका मजाक कब बन गया शराब पीने वाले का मजाक तो बना पर उसके परिवार का भी बन गया तो आपसे विनती है की इसे छोड़ दो मै तो बस इतना ही कहना चाहता हूॅ क‍ि शराब जैसे बुरी चीज़ को हाथ भी नही लगाना चाईये . यह हेल्थ केे लिए बहुत हानिकारक है सो यह मेरी रिक्वेस्ट है की जो लोग शराब पीते है वो शराब पीना छोड़ दे इससे हमारा समांजिक बदलाव आयेगाण्,

अमर ठाकुर Apr 02, 2019 10:49 AM

में हिमाचल प्रदेश से हूं, मुझे पीने की आदत ऐसे लगी कि 15 साल जिंदगी के कैसे गुजरे पता ही नही चला हर रोज शाम को दारू कबाब चलता रहा, जिसकी बवजह से मुझे बहुत नुकसान हुआ।। क्योंकि शराब वास्तव में शारीरिक और मानसिक रूप से नुकसान करती है, यह सामाजिक मूल्यों में भी पतन ला कारण बनने के साथ साथ कंगाल भी बनाती है

विजय राजपूत Aug 29, 2018 06:28 PM

मैं हरियाणा प्रदेश के सोनीपत जिले के एक छोटे से गाँव का निवासी हूँ,,,मैने अपने गाँव में पाया कि मेरे गाँव में बुढापा पैंशन से ज्यादा विधवा पैंशन है ,,,जब मैने इस पर अधय्यन किया तो पाया ज्यादातर विधवाओं के पतियो की मौत छोटी उम्र में ही शराब पीने से हुई है तो आप सोचिये वे बहने जो छोटी उम्र में ही शराब के कारण विधवा हो गई,,,, उनका पहाड़ जैसा जीवन कैसे गुजरेगा ,,जरा विचार कीजिएगा❗ इस संदर्भ में मैं भारत सरकार से हाथ जोड़कर गुजारिश करता हूँ कि शराबबंदी पूरे भारत वर्ष में लागू कर दी जाए,,,, वंदे मातरम

अजय sharma Sep 15, 2016 09:50 AM

शराब पीना एक गलत आदत और गलत नशा है जो लोग शुरआत में शराब का सेवन करते है उनहे पहले तो बड़ा मजा आता है पर धीरे धीरे ये मजा समाज में बदनामी का कारन बन जाता है कुछ लोग पार्टी में जा कर इतनी शराब पी लेते है के उनहे पता भी नहीं चलता के उनका मजाक कब बन गया शराब पीने वाले का मजाक तो बना पर उसके परिवार का भी बन गया तो आपसे विनती है की इसे छोड़ दो

जया सोढाणी Dec 19, 2015 06:02 PM

मै तो बस इतना ही कहना चेउंगी की हमे शराब जैसे बुरी चीज़ को हाथ भी नही लगाना चईये . यह हेल्थ कई लिए बहुत हानिकारक है सो यह मेरी रिक्वेस्ट है की जो लोग शराब पीते है वो शराब पीना छोड़ दे इससे हमारा देश प्रगति कर पायेगा . थैंकू

जया सोढाणी Dec 19, 2015 05:58 PM

मै तो बस इतना ही कहना चेउंगी की हमे शराब जैसे बुरी चीज़ को हाथ भी नही लगाना चईये . यह हेल्थ कई लिए बहुत हानिकारक है सो यह मेरी रिक्वेस्ट है की जो लोग शराब पीते है वो शराब पीना छोड़ दे इससे हमारा देश प्रगति कर पायेगा . थैंकू

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