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प्रधानमंत्री आवास योजना(ग्रामीण)

इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना(ग्रामीण) अर्थात् सबके लिए आवास योजना की विस्तृत दिशानिर्देश को बताया गया है।

भूमिका


प्रधानमंत्री आवास योजना वर्ष २०२२
सभी के लिए आवास के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए केन्द्र सरकार ने एक व्यापक मिशन ''2022 तक सबके लिए आवास'' शुरू किया है।

सभी के लिए आवास (एचएफए) मिशन सरकार के उपरोक्त उद्देश्य  की अनुपालना में तथा सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन से शुरू किया गया है। इस मिशन का उद्देश्य निम्नलिखित कार्यक्रम विकल्पों के माध्यम से स्लमवासियों सहित शहरी  गरीबों  की आवासीय आवश्यकता  को पूरा करना है

  • भूमि का संसाधन के रूप में उपयोग करते हुए निजी प्रवर्तकों की भागीदारी से स्लमवासियों का स्लम पुनर्वास
  • ऋण से जुड़ी ब्याज सब्सिडी के माध्यम से कमजोर वर्ग के लिए किफायती आवास को प्रोत्साहन
  • सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्रों के साथ भागीदारी में किफायती आवास
  • लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास निर्माण के लिए सब्सिडी ।

योजना के कार्यक्षेत्र

  1. वर्ष 2015-2022 के दौरान शहरी क्षेत्र के लिए सबके लिए आवास मिशन को कार्यान्वित किया जाएगा और यह मिशन वर्ष  2022 तक सभी पात्र परिवारों के लाभार्थियों को आवास प्रदान करने के लिए राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के माध्यम से कार्यान्वयन अभिकरणों को केन्द्रीय सहायता प्रदान करेगा।
  2. मिशन को ऋण से जुड़ी सहायता के संघटक को छोड़ कर केन्द्रीय प्रायोजित स्कीम (सीएसएस) के रूप में कार्यान्वित किया जाएगा जिसको एक केन्द्रीय क्षेत्र स्कीम के रूप में क्रियान्वित किया जाएगा।
  3. एक लाभार्थी परिवार में पति पत्नी अविवाहित पुत्र और/अथवा अविवाहित लड़कियां शामिल होंगे। जिस लाभार्थी परिवार का भारत के किसी भाग में अपने नाम पर अथवा उसके परिवार के किसी भी सदस्य के नाम पर अपना घर नहीं होना चाहिए। वही परिवार इस मिशन के अंतर्गत केन्द्रीय सहायता प्राप्त करने का पात्र होगा।
  4. राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र अपने विवेक पर अंतिम तिथि निर्धारित कर सकते हैं जिसमें लाभार्थियों को स्कीम के अंतर्गत लाभ लेने हेतु पात्रता के लिए उस शहरी  क्षेत्र का निवासी होना आवश्यक  होगा।
  5. यह मिशन अपने सभी घटकों के साथ दिनांक 17.06.2015 से लागू हो गया है और इसको 31.03.2022 तक कार्यान्वित किया जाएगा।

योजना का कवरेज और अवधि

1. 500 श्रेणी-I शहरों  पर ध्यान केन्द्रित करने के साथ जनगणना 2011 के अनुसार सभी 4041 सां. विधिक कस्बों को तीन चरणों में कवर किया जाएगा जिनका ब्यौरा इस प्रकार हैः

चरण-I (अप्रैल, 2015 - मार्च, 2017)- राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों से उनकी इच्छुकता के अनुसार 100 शहरों  को कवर करने के लिए।

चरण-II (अप्रैल,2017 - मार्च, 2019)-अतिरिक्त 200 शहरों  को कवर करने के लिए।

चरण- III (अप्रैल,2019 - मार्च,2022) - सभी अन्य शेष शहरों को कवर करने के लिए।

तथापि, मंत्रालय को यदि राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों से संसाधन समर्थित मांग प्राप्त होती है, तो पहले के चरणों मे अतिरिक्त शहरों  को शामिल  करने के संबंध में नम्यता होगी।

2. यह मिशन बुनियादी सिविक अवस्थापना सहित 30 वर्ग मीटर के फर्शी क्षेत्रफल तक के आवासों के निर्माण में सहायता करेगा। राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को मंत्रालय से परामर्श  लेते हुए राज्य स्तर पर आवास के आकार और अन्य सुविधाओं का निर्धारण करने के संबंध में नम्यता होगी परन्तु यह केन्द्र से किसी बढ़ी हुई वित्तीय सहायता के बिना होगी । स्लम पुनर्विकास परियोजनाओं और भागीदारी में किफायती आवास परियोजनाओँ में जल, सफाई, सीवरेज, सड़क, बिजली इत्यादि जैसी बुनियादी सिविक अवस्थापना होनी चाहिए। शहरी  स्थानीय निकाय को यह सुनिश्चित  करना चाहिए कि ऋण से जुड़ी ब्याज सहायता और लाभार्थी आधारित निर्माण में इन बुनियादी सिविक सेवाओँ के लिए प्रावधान होना चाहिए।

3.प्रत्येक घटक के अंतर्गत इस मिशन के तहत निर्मित आवासों का न्यूनतम आकार राष्ट्रीय  भवन-संहिता (एनबीसी) में प्रदान किए गए मानकों के अनुरूप होना चाहिए। तथापि, यदि भूमि का उपलब्ध क्षेत्रफल एनबीसी के  अनुसार आवासों के ऐसे न्यूनतम आकार के  भवन-निर्माण की अनुमति न दे और यदि कम आकार के आवास के लिए लाभार्थी की सहमति उपलब्ध हो, तो एसएलएसएमसी के अनुमोदन से राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा क्षेत्रफल के संबंध में उपयुक्त निर्णय लिया जा सकता है। इस मिशन के अंतर्गत निर्मित अथवा विस्तारित सभी आवासों में अनिवार्य रूप से शौचालय की सुविधा होना चाहिए।

4. इस मिशन के अंतर्गत आवासों को राष्ट्रीय भवन संहिता और अन्य संगत भारतीय मानक ब्यूरों(बीआईएस) संहिताओं के अनुरूप  भूकम्प,  बाढ़,  चक्रवात,  भू-स्खलन  इत्यादि  के  लिए अवसंरचनात्मक सुरक्षा की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए तैयार और निर्मित किया जाना चाहिए।

5. इस मिशन के अंतर्गत केन्द्रीय सहायता से निर्मित/अधिग्रहण किए गए आवास, परिवार की महिला मुखिया अथवा परिवार के पुरुष  मुखिया और उसकी पत्नी के संयुक्त नाम में होना चाहिए और केवल उन मामलों में, जब परिवार में कोई वयस्क महिला सदस्य नहीं हो, आवास को परिवार के पुरुष  सदस्य के नाम में किया जा सकता है।

6. राज्य/संघ राज्य क्षेत्र सरकार और कार्यान्वयन एजेंसियों को इस मिशन के अंतर्गत निर्मित किए जा रहे आवासों के रख-रखाव की देख-रेख करने के लिए आवासी कल्याण संघ इत्यादि जैसा स्कीम के अंतर्गत लाभार्थियों के संघ बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

कार्यान्वयन की कार्यपद्धति

इस मिशन को लाभार्थियों, शहरी  स्थानीय निकायों और राज्य सरकारों को विकल्प देते हुए चार विकल्पों के माध्यम से क्रियान्वित किया जाएगा। ये चार विकल्प इस प्रकार हैं

1. स्व-स्थाने स्लम पुनर्विकास

  • संसाधन के रूप में भूमि का उपयोग
  • निजी भागीदारी और लोक प्राधिकरण के द्वारा
  • अतिरिक्त एफएसाई/टीडीआर/एफएआर परियोजनाओं को वित्तीय व्यवहार्य बनाने के लिए यदि अपेक्षित हो।

2. क्रेडिट से जुड़ी सब्सिडी के माध्यम से किफायती आवास

  • नए आवास और आवासों के विस्तार के लिए ईडबल्यूएस और एलआईजी हेतु सब्सिडी
  • ईडबल्यूएस: वार्षिक पारिवारिक आय 03 लाख रुपये तक और आवास का आकार 30 वर्ग मीटर तक।
  • एलआईजी: वार्षिक पारिवारिक आय 03-06 लाख रुपये तक और आवास का आकार 60 वर्ग मीटर तक।

3. भागीदारी में किफायती आवास

  • पैरास्टेटल एजेंसीयों सहित निजी अथवा  सार्वजनिक क्षेत्र के साथ
  • किफायती आवासीय परियोजनाओं में जहाँ 35% निर्मित आवास ईडबल्यूएस श्रेणी के लिए है,प्रति ईडबल्यूएस केन्द्रीय सहायता।

4. लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास निर्माण के लिए सब्सिडी

  • व्यक्तिगत आवास की आपेक्षा वाले ईडबल्यूएस श्रेणी के व्यक्तियों के लिए
  • राज्य के ऐसे लाभार्थियों के लिए पृथक योजना तैयार करनी है
  • अलग अलग/छितरे हुए लाभार्थी को शामिल नहीं किया जायेगा।

 

भूमि का संसाधन के रूप में उपयोग करके स्वस्थाने स्लम पुनर्विकास

पात्र स्लम वासियों को आवास प्रदान करने के लिए निजी सहभागिता से संसाधन के रूप में भूमि का उपयोग करते हुए स्वस्थाने स्लम पुनर्वास सभी के लिए आवास मिशन का एक महत्वपूर्ण घटक है। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य  पात्र स्लमवासियों को औपचारिक शहरी  व्यवस्थापना में लाते हुए उनको आवास प्रदान करने के लिए स्लमों के अंतर्गत भूमि की लॉक्ड क्षमता को बढ़ाना है।

  1. स्लम, चाहे वे केन्द्र सरकार की भूमि/राज्य  सरकार की भूमि/शहरी  स्थानीय निकाय की भूमि, निजी भूमि पर हों, को सभी पात्र स्लम वासियों को आवास प्रदान करने के लिए स्व स्थाने  पुनर्विकास के लिए लिया जाना चाहिए। ऐसे पुनर्विकसित स्लमों की अधिसूचना को अनिवार्य रूप से रद्द किया जाना चाहिए।
  2. स्लम पुनर्विकास के लिए निजी भागीदार का चयन खुली बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया जायेगा। राज्य सरकारें और नगर, स्लम पुनर्विकास परियोजनाओं को वित्तीय रूप से  व्यवहार्य  बनाने के लिए अतिरिक्त फर्शी क्षेत्र अनुपात (एफएआर)/फ्लोर  स्पेस इनडैक्स (एफएसआई) हस्तांतरण विकास अधिकार (टीडीआर) यदि अपेक्षित हुआ, प्रदान करेंगे। ऐसी सभी परियोजनाओं में पात्र स्लम वासियों के लिए सभी निर्मित आवासों के लिए एक लाख रूपया प्रति आवास, औसतन, का स्लम पुनर्वास अनुदान स्वीकार्य होगा। राज्यों/संघ शासित प्रदेशों  को यह छूट प्राप्त होगी कि वे केन्द्रीय अनुदान को निजी भागीदारी, निजी भूमि पर स्लमों को छोड़कर, से पात्र स्लम वासियों के आवास प्रदान करने के लिए पुनर्विकसित किये जा रहे अन्य स्लमों में लगा सकते हैं। इसका अर्थ यह है कि, राज्य/संघ राज्य प्रदेश कुछ परियोजनाओं में प्रत्येक आवास के लिए 1 लाख रू0 प्रति आवास से भी अधिक और अन्य परियोजनाओं में कम, का उपयोग कर सकते हैं परन्तु यह राज्य/संघ  शासित  प्रदेश  में परिकलित औसतन 1 लाख रू. प्रति आवास के भीतर ही रहेगा।
  3. ऐसी स्लम पुनर्विकास परियोजनाओं के लिए प्रति आवास अधिकतम केन्द्रीय सहायता, यदि कोई

हो, मंत्रालय द्वारा निर्धारित की जायेगी।

  1. पात्र स्लमवासियों को आवास प्रदान करने के लिए निजी स्वामित्व की भूमियों पर स्लमों के स्व स्थाने  पुनर्विकास को राज्य सरकारें/संघ शासित  प्रदेश  अथवा यूएलबी अपनी नीति के अनुसार भू-स्वामियों को अतिरिक्त एफएसआई/एफएआर अथवा टीडीआर देकर प्रोत्साहित कर सकते हैं। ऐसे मामलों में केन्द्रीय सहायता उपयोग नहीं किया जा सकता है।
  2. स्लम पुनर्विकास परियोजना में लाभार्थी योगदान, यदि कोई हो, संबंधी निर्णय और निर्धारण राज्य/यूटी सरकार द्वारा किया जाना चाहिए।
  3. पात्र स्लमवासियों, की निर्धारित तारीख आदि जैसी  पात्रताओं  का  निर्णय  राज्य/यूटी  द्वारा अधिमानतः विधान के द्वारा किया जायेगा ।
  4. राज्य/यूटी यह निर्णय लेंगे कि क्या निर्मित आवास मालिकाना अधिकार पर आवंटित किए जाएंगे

या पट्टा अधिकार पर । पट्टा अधिकार नवीकरणीय, बंधकयोग्य और उत्तराधिकार योग्य होने चाहिए। राज्य/यूटी इस संघटक के अंतर्गत निर्मित आवासों के हस्तांतरण पर उपयुक्त प्रतिबंध लगा सकते हैं।

निजी भागीदारी से स्लम पुनर्वास हेतु दृष्टिकोण की रूपरेखा नीचे दी गई है:-

  1. पहले कदम के रूप में, शहर  की सभी के लिए आवास कार्य योजना (एचएफएपीओए) में चिन्हित किए गए सभी मान्य स्लमों का उनकी अवस्थिति, उस स्लम में पात्र स्लमवासियों की संखया (देखें 4.6), स्लम भूमि का क्षेत्रफल, भूमि की बाजार संभावना (रेडिरेक्नर के अनुसार भूमि का मूल्य का उपयोग किया जा सकता है), उपलब्ध एफएआर/एफएसआई और उस भू-खंड पर लागू घनत्त्व मानदण्ड आदि के संदर्भ से विश्लेषण  किया जाना चाहिए।
  2. स्लमों के विश्लेषण  के आधार पर, कार्यान्वयन प्राधिकारियों को यह निर्णय लेना चाहिए कि क्या एक विशिष्ट स्लम का भूमि का एक संसाधन के रूप में प्रयोग करके निजी भागीदारी से पुनर्विकास किया जा सकता है अथवा नहीं और पात्र स्लम वासियों को आवास प्रदान किया जा सकता है । कुछेक मामलों में, परियोजनाओं को वित्तीय रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए राज्यों और शहरों  को अतिरिक्त एफएआर/एफएसआई अथवा टीडीआर देना होगा तथा घनत्व और अन्य आयोजना मानदण्डों को शिथिल  करना होगा। राज्य/यूटी भूमि/एफएआर के कुछ भाग की भूमि के मिश्रित उपयोग के रूप में वाणिज्यिक उपयोग की भी अनुमति दे सकते हैं।
  3. राज्य/यूएलबी स्वस्थाने पुनर्विकास को वित्तीय और तकनीकी रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए निकटवर्ती स्लमों को एक समूह में इक्ठ्‌ठा भी कर सकते हैं। स्लमों के ऐसे समूह को एक एकल परियोजना समझा जायेगा।
  4. एक व्यवहारिक स्लम पुनर्वास परियोजना के दो संघटक होंगे अर्थात स्लम पुनर्वास संघटक जो पात्र स्लम वासियों को बुनियादी सिविक अवसंरचना के साथ आवास प्रदान करता है और दूसरा  मुक्त बिक्री संघटक जो विकासकों को बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध होगा ताकि परियोजना को क्रास सब्सिडी दी जा सके।
  5. परियोजना बनाते समय, परियोजना नियोजन और कार्यान्वयन प्राधिकारियों को यह निर्णय भी करना चाहिए कि स्लम भूमि का कितना क्षेत्र निजी विकासकों को दिया जाना चाहिए। कुछेक मामलों में, स्लम का क्षेत्र सभी पात्र स्लमवासियों का पुनर्वास करने और परियोजना में क्रास सब्सिडी प्रदान करने के लिए मुक्त बिक्री संघटक के पश्चात्  भी बचा रहता है। ऐसे मामलों में परियोजना नियोजन प्राधिकारी को निजी विकासकों को अपेक्षित स्लम भूमि ही दी जानी चाहिए और शेष स्लम भूमि को अन्य स्लमों मे रहने वाले स्लमवासियों  के पुनर्वास के लिए या अन्य शहरी  गरीबों के आवास के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए।
  6. पुनर्विकास परियोजनाएं बनाते समय, विशेषकर  स्लम पुनर्विकास संघटक की रूपरेखा के प्रयोजन  से स्लमवासियों से उनकी संस्थाओं के माध्यम से अथवा अन्य उपयुक्त साधनों से परामर्श  करना चाहिए।
  7. निजी विकासकों, जो स्लम पुनर्विकास परियोजना को निष्पादित  करेंगे, का चयन खुली पारदर्शी  बोली प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए। भावी विकासकों के लिए पात्रता मानदंड का निर्णय राज्य/यूटी/यूएलबी द्वारा लिया जा सकता है। भावी विकासकों का कार्यक्षेत्र कार्यान्वयन एजेंसी द्वारा अपने वित्तीय और तकनीकी स्रोतों का प्रयोग करते हुए सौंपी गई परियोजना की संकल्पना और निष्पादन होना चाहिए। निर्माण अवधि के दौरान पात्र स्लमवासियों को ट्रांजिट आवास प्रदान कराना परियोजना विकासकर्ताओं का उत्तरदायित्व होगा।
  8. सभी वित्तीय और गैर-वित्तीय प्रोत्साहन और रियायतें, यदि कोई हों, परियोजना में एकीकृत की जानी चाहिए और बोली दस्तावेजों में एक प्राथमिकता घोषित की जानी चाहिए। इन प्रोत्साहनों और रियायतों में लाभार्थियों/स्लमवासियों से योगदान, यदि कोई हों, शामिल  किया जाना चाहिए।
  9. परियोजना के मुक्त बिक्री संघटक की बिक्री  को सम्पूर्णता और कार्यान्वयन एजेंसी/राज्य को स्लम पुनर्वास संघटक के अंतरण के साथ सम्बद्ध किया जाना चाहिए। किसी पेचीदगी से बचने के लिए ऐसी शर्तों  का बोली दस्तावेजों में स्पष्ट उल्लेख किया जाना चाहिए।
  10. स्लम पुनर्वास घटक को कार्यान्वयन एजेंसी को सौपा जाना चाहिए ताकि पात्र स्लम वासियों को एक  पारदर्शी  प्रक्रिया के माध्यम से आवंटन किए जा सकें। आवंटन करते समय, शारीरिक  रूप से विकलांग व्यक्तियों वाले परिवारों और वरिष्ठ नागरिकों को भू-तल अथवा नीचे की मंजिलों पर आवंटन हेतु प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
  11. स्लम पुनर्विकास परियोजना के लिए खुली बोली से सकारात्मक प्रीमियम अथवा नकारात्मक प्रीमियम प्राप्त हो सकता है। सकारात्मक प्रीमियम के मामले में, विकासकर्ता, जो सभी अन्य शर्तों  को पूरा करते हुए उच्चतम सकारात्मक प्रीमियम प्रस्तुत करता है, का चयन  किया जाना चाहिए। नकारात्मक प्रीमियम के मामले में, कार्यान्वयन प्राधिकरण निम्नतम नकारात्मक प्रीमियम का प्रस्ताव करने वाले बोलीकर्ता का चयन कर सकता है। इस परियोजना को व्यवहार्य बनाने के लिए अपेक्षित धन राशि  केन्द्र सरकार के स्लम पुनर्वास अनुदान अथवा राज्योंध्द्गाहरी स्थानीय निकायों की अपनी निधियों तथा अन्य  परियोजनाओं  से  प्राप्त सकारात्मक प्रीमियम से उपलब्ध करायी जा सकती है। ऐसी निजी सहभागिता, जो सरकार से भारी अनुदान की मांग  करें, को प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए। स्लमों को विकास के लिए या तो बाद में लिया जा सकता है अथवा स्लमों में कच्चे/अप्रयोज्य आवासों को मिशन के किसी अन्य संघटक के अन्तर्गत लिया जा सकता है।
  12. राज्य आयोजना और कार्यान्वयन प्राधिकरण, यूएलबी का स्लम पुनर्विकास परियोजना के लिए एकल परियोजना खाता होना चाहिए जहां सकारात्मक प्रीमियम केन्द्र सरकार से स्लम पुनर्वास अनुदान, राज्य सरकार अथवा किसी अन्य स्रोत से निधियों को जमा कराया जा सके और उन्हें नकारात्मक प्रीमियम वाली सभी स्लम पुनर्वास परियोजनाओं के वित्तपोषण  के लिए उपयोग में लाया जा सके। ऐसे खाते शहर-वार खोले जा सकते हैं।
  13. स्लम पुनर्वास परियोजनाओं के लिए राज्य/यूटी में प्रचलित नियमों और कार्यविधियों के अनुसार विभिन्न एजेंसियो से कई अनुमोदनों की जरूरत पड़ेगी। परियोजना विकास के लिए विभिन्न विकास नियंत्रण नियमों में परिवर्तनों की अपेक्षा भी हो सकती है। ऐसे परिवर्तनों को सुविधाजनक बनाने और परियोजनाओं को शीघ्र बनाने तथा अनुमोदन के लिए यह सुझाव दिया जाता है कि एक एकल प्राधिकरण का गठन किया जाए। जिसे परियोजनाओं की आयोजन  और अन्य मानदण्डों में परिवर्तन करने और अनुमोदन देने का उत्तरदायित्व दिया जा सके।

ऋण आधारित ब्याज सब्सिडी योजना

मिशन में शहरी  गरीबों की आवास की जरूरतों के लिए संस्थागत ऋण प्रवाह को बढाने के लिए मॉंग पक्ष व्यवस्था के रूप में ऋण आधारित ब्याज सब्सिडी घटक का कार्यान्वयन किया जाएगा । पात्र शहरी  गरीबों (ईडब्ल्यूएस/एलआईजी) द्वारा अधिग्रहण, आवास के निर्माण के लिए, लिए गए गृह ऋण पर ऋण आधारित सब्सिडी दी जाएगी ।

  1. आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) और निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के लाभार्थी जो बैंकों, आवास वित्त कंपनियों और अन्य ऐसे संस्थाओं से गृह ऋण की मॉंग कर रहे हैं, वे 6.5% की दर पर 15 वर्षों  की अवधि के लिए अथवा ऋण अवधि के दौरान, इसमें से जो कम हो, के लिए ब्याज सब्सिडी के लिए पात्र होंगे । ब्याज सब्सिडी का निवल वर्तमान मूल्य (एनपीबी) की 9% की छूट दर पर गणना की जाएगी ।
  2. ऋण आधारित सब्सिडी केवल 6 लाख रू. तक की ऋण राशि  के लिए उपलब्ध होगी और 6 लाखरू. से अधिक का ऋण गैर सब्सिडीकृत दर पर होगा। ब्याज सब्सिडी ऋणदाता संस्थाओं के माध्यम से लाभार्थियों के ऋण खाते में अग्रिम रूप से जमा कर दी जाएगी, इससे प्रभावी आवास ऋण और समान मासिक किस्त (ईएमआई) में कमी आएगी ।
  3. ऋण आधारित सब्सिडी विस्तारणीय आवास के रूप में मौजूदा आवासों के लिए नए निर्माण और कमरों का विस्तार, रसोई, शौचालय आदि हेतु उपलब्ध आवास ऋणों के लिए उपलब्ध होगी ।
  4. आवास और शहरी  विकास कारपोरेशन (हुडको) और राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी) को ऋणदाता संस्थाओं को इस सब्सिडी का वितरण और इस घटक की प्रगति की निगरानी करने के लिए केन्द्रीय नॉडल एजेंसियों (सीएनए) के रूप में निर्धारित किया गया है । मंत्रालय भविष्य  में अन्य संस्थाओं को सीएनए के रूप में अधिसूचित कर सकता है ।
  5. प्राथमिक ऋणदाता संस्था (पीएलआई) अनुलग्नक-1 में दिये गए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करके केवल एक सीएनए के साथ पंजीकरण कर सकता है ।
  6. सीएनए स्कीम की उचित कार्यान्वयन और निगरानी सुनिश्चित  करेंगी और इस उद्देश्य  के लिए उचित तंत्र को अपनाएंगी । सीएनए आवास और शहरी  गरीबी उपशमन मंत्रालय को अनुलग्नक-2 के अनुसार नियमित मासिक और तिमाही रिपोर्टों के माध्यम से आवधिक निगरानी सूचना मुहैया करेंगी ।
  7. राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र/शहरी स्थानीय निकाय/प्रथम ऋणदाता संस्थाएं दोहराव से बचने के लिए लाभार्थी पहचान को आधार, मतदाता पहचान पत्र, किसी अन्य विशिष्ट पहचान अथवा लाभार्थी के पैतृक जिले के राजस्व प्राधिकारी से जारी आवास स्वामित्व प्रमाण-पत्र से जोड़ेंगे ।
  8. स्कीम के अन्तर्गत हाथ से मैला ढ़ोने वाले, महिलाओं (विधवाओं को  वरीयता  दी  जाएगी), अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछडे वर्गों के व्यक्तियों, अल्पसंखयकों, विकलांगों और उभयलिंगी को वरीयता दी जानी चाहिए बर्शते कि  लाभार्थी  ईडब्ल्यूएस/एलआईजी  वर्गों  से संबंधित हो ।
  9. मिशन के कार्यान्वयन हेतु राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र द्वारा निर्धारित राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी(एसएलएनए) पहचाने गए पात्र लाभार्थियों को ऋण आधारित सब्सिडी उपलब्ध कराने होते हेतु अनुमोदन और दस्तावेजों आदि को प्राप्त करने में मदद करेगी।
  10. स्कीम के अंतर्गत ईडब्ल्यूएस अथवा एलआईजी लाभार्थी के रूप में पहचान के लिए व्यक्तिगत ऋण आवेदक को आय प्रमाण के रूप में स्व-प्रमाण पत्र / शपथ  पत्र प्रस्तुत करना होगा ।
  11. यदि किसी ऋणी ने स्कीम के अंतर्गत एक आवास ऋण लिया है और ब्याज सहायता प्राप्त की है, लेकिन बाद में शेष अंतरण के लिए अन्य पीएलआई में परिवर्तन किया जाता है तो, ऐसे लाभार्थी पात्र नहीं होंगे अथवा फिर से ब्याज सहायता के लाभ का दावा नहीं कर सकेंगे।
  12. मिशन के अंतर्गत लाभार्थी केवल एक घटक के तहत ही लाभ उठा सकता है । चूँकि अन्य तीन घटक, राज्य सरकार द्वारा शहरी  स्थानीय निकायों/प्रधिकरणों आदि के माध्यम से कार्यान्वित किए जाने हैं, और ये घटक पीएलआई द्वारा कार्यान्वित किए जाने हैं, इसलिए कि लाभार्थी एक से अधिक घटक से लाभ नहीं उठाए, ऋण आधारित सब्सिडी के अंतर्गत लाभ दिये जाने वाले लाभार्थियों की सूची बनाने के लिए पीएलआई को राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र सरकारों अथवा राज्य/संघ राज्य क्षेत्र सरकार की निर्दिष्ट  एजेंसी से तिमाही अनापत्ति प्रमाण-पत्र लेना चाहिए । इस प्रक्रिया को सक्षम बनाने के लिए लाभार्थियों को अपने आधार संखया/मतदाता पहचान-पत्र/अन्य किसी विशिष्ट पहचान संखया अथवा लाभार्थी के पैतृक जिले के राजस्व प्राधिकारी से जारी आवास स्वामित्व प्रमाण-पत्र से जुडना चाहिए और राज्य/संघ  राज्य सरकार अथवा उसकी निर्दिष्ट एजेंसी को ऐसे अनुरोध की प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना चाहिए।

भागीदारी में किफायती आवास

भागीदारी में किफायती आवास मिशन का तीसरा घटक है । यह एक आपूर्ति आधारित अवयव है। यह मिशन राज्य संघ/ राज्य क्षेत्रो/शहरों द्वारा विभिन्न भागीदारी से बनाए जा रहे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के आवासों को वित्तीय सहायता प्रदान करेगा ।

  1. किफायती दर पर ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए आवासों की उपल धता बढाने हेतु राज्य संघ/राज्य क्षेत्र, अपनी एजेंसियों अथवा उद्योगों सहित निजी क्षेत्र के साथ भागीदारी के माध्यम से, किफायती आवास परियोजनाओं की योजना तैयार कर सकते हैं । ऐसी परियोजनाओं में 1.5 लाख रू. की दर से केंद्रीय सहायता सभी ईडब्ल्यूएस आवासों के लिए उपलब्ध होगी ।
  2. राज्य/संघ राज्य क्षेत्र लक्षित लाभार्थियों के लिए किफायती तथा लेने योग्य बनाने के लक्ष्य के साथ ऐसी परियोजनाओं में कारपेट क्षेत्र प्रति वर्ग मी. रूपए में ईडब्ल्यूएस आवासों के विक्रय मूल्य पर ऊपरी सीमा का निर्णय करेंगे। इस प्रयोजनार्थ, राज्य और शहर अन्य रियायतों जैसे कि -उनकी राज्य सब्सिडी, किफायती लागत पर भूमि, स्टाम्प शुल्क छूट आदि को बढ़ा सकते हैं।
  3. निम्नलिखित सिद्धांतों का प्रयोग करते हुए परियोजना आधार अथवा शहर  आधार पर विक्रय मूल्यों  को निर्धारित किया जा सकता है;

परियोजना का कार्यान्वयन

  • बिना निजी क्षेत्र के साथ राज्य/संघ राज्य क्षेत्र/यूएलबी/पैरास्टेटल
  • निजी क्षेत्र के साथ राज्य/संघ राज्य क्षेत्र/यूएलबी/पैरास्टेटल

आवासों का आबंटन –

  • राज्य/संघ राज्य क्षेत्र/यूएलबी/पैरास्टेटल
  • पात्र लाभार्थियों को ईडब्लूएस आवासों के बिक्री के लिए अधिकृत निजी भागीदार

राज्य मूल्य निर्धारण –

  • बिना लाभ हानि के
  • खुली पारदर्शी के माध्यम से जो केंद्र/राज्य/ यूएलबी द्वारा प्रदान की गयी प्रोत्साहनों का कारण है

4. किफायती आवास परियोजना विभिन्न श्रेणियों के लिए आवासों का योग हो सकता है परंतु यह केन्द्रीय सहायता का पात्र तभी होगा, यदि परियोजना में आवासों का कम से कम 35% आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए हो तथा एक परियोजना में कम से कम 250 आवास हों । तथापि, सीएसएमसी राज्य सरकार के अनुरोध पर एक परियोजना में आवासों की न्यूनतम संखया की आवश्यकता  को कम कर सकता है ।

5. एएचपी परियोजनाओं में चिन्हित पात्र लाभार्थियों को आवासों का आबंटन एसएलएसएम सी द्वारा यथा अनुमोदित पारदर्शी  प्रक्रिया का अनुपालन करते हुए किया जाना चाहिए तथा चयनित लाभार्थी एचएफएपीओए का हिस्सा हों । आवंटन में प्राथमिकता शारीरिक  रूप से निरूसहाय लोगों, वरिष्ठ नागरिकों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्गों, अल्पसंखयकों, एकल महिलाओं, उभयलिंगी तथा समाज के अन्य कमजोर तथा उपेक्षित वर्गों को दी जाए । आवंटन करते समय, निरूसहाय व्यक्तियों तथा वरिष्ठ नागरिकों वाले परिवारों को प्राथमिक रूप से भूतल अथवा नीचे तलों पर आवासों का आवंटन किया जाए । 6. संबद्ध कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा तैयार ऐसी परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट

एसएलएसएमसी द्वारा अनुमोदित होनी चाहिए ।

लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास का निर्माण अथवा विस्तार

इस मिशन का चौथा घटक मिशन के अन्य घटकों का लाभ लेने में अक्षम लाभार्थियों को शामिल  कर स्वयं उनके द्वारा नए आवासों के निर्माण अथवा मौजूदा आवास के सुधार के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग श्रेणी से संबद्ध वैयक्तिक पात्र परिवारों को सहायता देता  है। इस मिशन के अंतर्गत ऐसे परिवार नए आवासों के निर्माण के लिए 1.5 लाख रू. की केन्द्रीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे लाभार्थी एचएफएपीओए का हिस्सा होने चाहिए।

  1. इस सहायता प्राप्ति का इच्छुक लाभार्थी उनके स्वामित्वाधीन भूमि की उपलब्धता के संबंध में पर्याप्त दस्तावेजों के साथ शहरी  स्थानीय निकायों से संपर्क करेगा । ऐसे लाभार्थी स्लमों में अथवा स्लमों के बाहर रहने वाले हो सकते हैं । पुनर्विकसित नहीं किए जा रहे स्लमों के लाभार्थियों को इस घटक के अंतर्गत शामिल  किया जा सकता है यदि लाभार्थियों के पास कच्चा आवास है ।
  2. शहरी  स्थानीय निकाय लाभार्थी द्वारा दी गई सूचना तथा उसके द्वारा प्रस्तुत की गई आवास की भवन-निर्माण योजना को प्रमाणित करेंगे जिससे भूमि के स्वामित्व तथा लाभार्थी के अन्य ब्यौरों, जैसे-आर्थिक  स्थिति  और पात्रता, का पता लगाया जा सके । इसके अलावा, नए  आवासों के निर्माण हेतु लाभार्थी की परिणामी पात्रता सुनिश्चित  करने के लिए लाभार्थियों हेतु कच्चा, अर्द्‌ध कच्चा आदि जैसे आवासों की स्थिति की जांच सामाजिक आर्थिक एवं जाति जनगणना(एसईसीसी) आंकड़ों के साथ की जाए । लाभार्थी की आवासों में वृद्धि की पात्रता सुनिश्चित  करने के लिए कमरों की संखया, परिवार के सदस्यों आदि से संबंधित एसईसीसी आंकड़ों की भी जांच होनी चाहिए।
  3. इन आवेदनों के आधार पर शहरी  स्थानीय निकाय नगर विकास योजना (सीडीपी) अथवा शहर  की ऐसी योजनाओं के अनुसार ऐसे वैयक्तिक लाभार्थियों के लिए एक एकीकृत शहर  व्यापी आवास परियोजना यह सुनिश्चित  करते हुए तैयार करेंगे कि प्रस्तावित आवासों का निर्माण शहर  के आयोजन मानकों के अनुरूप है तथा स्कीम का कार्यान्वयन एकीकृत रूप में हुआ है । सहायता हेतु व्यक्तिगत आवेदकों पर विचार नहीं किया जाएगा ।
  4. ऐसी परियोजनाएं एसएलएसएमसी में राज्यों द्वारा अनुमोदित की जाएगी ।
  5. व्यक्तिगत आवास निर्माण के लिए परियोजना को अनुमोदन देते समय शहरी  स्थानीय निकायों तथा राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों को सुनिश्चित  कर लेना चाहिए कि लाभार्थी के स्वयं के योगदान, भारत सरकार सहायता, राज्य सरकार सहायता आदि, सहित विभिन्न स्रोतों से नियोजित आवास के निर्माण हेतु अपेक्षित वित्त-पोषण  उपलब्ध है । किसी ऐसे मामलों में, आवास के लिए भारत सरकार सहायता जारी नहीं की जाएगी जिसमें निर्माण की शेष लागत संबद्ध नहीं है अन्य  रूप से अधूरे निर्मित आवासों के मामले में भारत सरकार सहायता जारी हो सकती है।
  6. राज्य/संघ राज्य क्षेत्र अथवा शहर  भी ऐसे व्यक्तिगत आवास निर्माण हेतु वित्तीय योगदान दे सकते हैं । राज्य/संघ राज्य क्षेत्र की सिफारिशों के अनुसार राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों के माध्यम से केन्द्रीय सहायता परियोजनाओं में चिह्नित लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा की जाएगी ।
  7. चूंकि इस घटक के लिए सहायता सहित राज्य सरकारों को केंद्र  सरकार से धनराशि  एकमुश्त  जारी की जाएगी, अतः  राज्य सरकार को आवास के निर्माण की प्रगति के आधार पर 3-4 किस्तों  में लाभार्थियों को वित्तीय सहायता जारी करनी चाहिए। लाभार्थी स्वयं की धनराशि  अथवा किसी अन्य  निधि का प्रयोग करते हुए निर्माण आरंभ कर सकता है तथा व्यक्तिगत लाभार्थी द्वारा निर्माण के अनुपात में भारत सरकार सहायता जारी की जाएगी । भारत सरकार सहायता की 30,000/रू. की अंतिम किस्त आवास के पूर्ण हो जाने के पश्चात्  ही जारी की जाएगी ।
  8. ऐसे व्यक्तिगत आवासों की प्रगति का पता भू-चिह्नित (जियो-टैड) छायाचित्रों के माध्यमसे लगाया जाना चाहिए ताकि प्रभावी रूप से प्रत्येक आवास की निगरानी की जा सके। राज्यों को जियो-टैग्ड छायाचित्रों के माध्यम से ऐसे आवासों के निर्माण का पता लगाने के लिए एक प्रणाली के विकास की आवश्यकता होगी ।

लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास का निर्माण अथवा विस्तार

इस मिशन का चौथा घटक मिशन के अन्य घटकों का लाभ लेने में अक्षम लाभार्थियों को शामिल  कर स्वयं उनके द्वारा नए आवासों के निर्माण अथवा मौजूदा आवास के सुधार के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग श्रेणी से संबद्ध वैयक्तिक पात्र परिवारों को सहायता देता  है। इस मिशन के अंतर्गत ऐसे परिवार नए आवासों के निर्माण के लिए 1.5 लाख रू. की केन्द्रीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे लाभार्थी एचएफएपीओए का हिस्सा होने चाहिए ।

  1. इस सहायता प्राप्ति का इच्छुक लाभार्थी उनके स्वामित्वाधीन भूमि की उपलब्धता के संबंध में पर्याप्त दस्तावेजों के साथ शहरी  स्थानीय निकायों से संपर्क करेगा । ऐसे लाभार्थी स्लमों में अथवा स्लमों के बाहर रहने वाले हो सकते हैं । पुनर्विकसित नहीं किए जा रहे स्लमों के लाभार्थियों को इस घटक के अंतर्गत शामिल  किया जा सकता है यदि लाभार्थियों के पास कच्चा आवास है ।
  2. शहरी  स्थानीय निकाय लाभार्थी द्वारा दी गई सूचना तथा उसके द्वारा प्रस्तुत की गई आवास की भवन-निर्माण योजना को प्रमाणित करेंगे जिससे भूमि के स्वामित्व तथा लाभार्थी के अन्य ब्यौरों, जैसे-आर्थिक  स्थिति  और पात्रता, का पता लगाया जा सके । इसके अलावा, नए  आवासों के निर्माण हेतु लाभार्थी की परिणामी पात्रता सुनिश्चित  करने के लिए लाभार्थियों हेतु कच्चा, अर्द्‌ध कच्चा आदि जैसे आवासों की स्थिति की जांच सामाजिक आर्थिक एवं जाति जनगणना(एसईसीसी) आंकड़ों के साथ की जाए । लाभार्थी की आवासों में वृद्धि की पात्रता सुनिश्चित  करने के लिए कमरों की संख्या , परिवार के सदस्यों आदि से संबंधित एसईसीसी आंकड़ों की भी जांच होनी चाहिए।
  3. इन आवेदनों के आधार पर शहरी  स्थानीय निकाय नगर विकास योजना (सीडीपी) अथवा शहर  की ऐसी योजनाओं के अनुसार ऐसे वैयक्तिक लाभार्थियों के लिए एक एकीकृत शहर  व्यापी आवास परियोजना यह सुनिश्चित  करते हुए तैयार करेंगे कि प्रस्तावित आवासों का निर्माण शहर  के आयोजना मानकों के अनुरूप है तथा स्कीम का कार्यान्वयन एकीकृत रूप में हुआ है । सहायता हेतु व्यक्तिगत आवेदकों पर विचार नहीं किया जाएगा ।
  4. ऐसी परियोजनाएं एसएलएसएमसी में राज्यों द्वारा अनुमोदित की जाएगी
  5. व्यक्तिगत आवास निर्माण के लिए परियोजना को अनुमोदन देते समय शहरी  स्थानीय निकायों तथा राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों को सुनिश्चित  कर लेना चाहिए कि लाभार्थी के स्वयं के योगदान, भारत सरकार सहायता, राज्य सरकार सहायता आदि, सहित विभिन्न स्रोतों से नियोजित आवास के निर्माण हेतु अपेक्षित वित्त-पोषण  उपलब्ध है । किसी ऐसे मामलों में, आवास के लिए भारत सरकार सहायता जारी नहीं की जाएगी जिसमें निर्माण की शेष लागत संबद्ध नहीं है अन्य  रूप से अधूरे निर्मित आवासों के मामले में भारत सरकार सहायता जारी हो सकती है।
  6. राज्य/संघ राज्य क्षेत्र अथवा शहर  भी ऐसे व्यक्तिगत आवास निर्माण हेतु वित्तीय योगदान दे सकते हैं । राज्य/संघ राज्य क्षेत्र की सिफारिशों के अनुसार राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों के माध्यम से केन्द्रीय सहायता परियोजनाओं में चिह्नित लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा की जाएगी ।
  7. चूंकि इस घटक के लिए सहायता सहित राज्य सरकारों को केंद्र  सरकार से धनराशि  एकमुश्त  जारी की जाएगी, अतः  राज्य सरकार को आवास के निर्माण की प्रगति के आधार पर 3-4 किस्तों  में लाभार्थियों को वित्तीय सहायता जारी करनी चाहिए। लाभार्थी स्वयं की धनराशि  अथवा किसी अन्य  निधि का प्रयोग करते हुए निर्माण आरंभ कर सकता है तथा व्यक्तिगत लाभार्थी द्वारा निर्माण के अनुपात में भारत सरकार सहायता जारी की जाएगी । भारत सरकार सहायता की 30,000/रू. की अंतिम किस्त आवास के पूर्ण हो जाने के पश्चात्  ही जारी की जाएगी ।
  8. ऐसे व्यक्तिगत आवासों की प्रगति का पता भू-चिह्नित (जियो-ट ड) छायाचित्रों के माध्यमसे लगाया जाना चाहिए ताकि प्रभावी रूप से प्रत्येक आवास की निगरानी की जा सके। राज्यों को जियो-टैग्ड छायाचित्रों के माध्यम से ऐसे आवासों के निर्माण का पता लगाने के लिए एक प्रणाली के विकास की आवश्यकता होगी ।

कार्यान्वयन की प्रक्रिया

  1. प्रथम कदम के रूप में, राज्य / संघ राज्य क्षेत्र अनिवार्य शर्तों और अन्य तौर-तरीकों पर सहमत होकर मिशन में भागीदारी के लिए करार ज्ञापन पर हस्ताक्षर करेंगे । राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र और केन्द्र के बीच हस्ताक्षर किए जाने वाले करार ज्ञापन की प्रति अनुलग्नक में है ।
  2. राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र मिशन में शहरों को शामिल करने के लिए आवास और संसाधन की अपेक्षा के व्यापक मूल्यांकन के साथ मंत्रालय के पास  प्रस्ताव  भेजेंगे। मंत्रालय संसाधनों की उपलब्धता पर विचार करते हुए इन शहरों  को शामिल  करने को अनुमोदित करेगा । मिशन के ऋण  आधारित सब्सिडी घटक को मिशन के प्रारंभ से ही देशके सभी सांविधिक शहरों/कस्बों में कार्यान्वित किया जाएगा ।
  3. राज्य/शहर  आवास की वास्तविक मांग के आकलन हेतु उचित माध्यम से मांग सर्वेक्षण करेंगे। मांग सर्वेक्षण को मान्यता देते समय राज्यों /शहरों  को केवल आवास स्कीम का लाभ लेने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से शहर  में संभावित अस्थायी प्रवासन पर विचार करना चाहिए तथा ऐसे प्रवासियों को लाभार्थियों की सूची से हटा देना चाहिए । मांग सर्वेक्षण और अन्य उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर, शहर  सभी के लिए आवास कार्य योजना (एचएफएपीओए) तैयार करेंगे। एचएफएपीओए में दिशा निर्देशों  के पैरा 3 में उल्लिखित चार विकल्पों में से चयनित कार्यक्रम के साथ शहर  में पात्र लाभार्थियों द्वारा आवास की मांग निहित होनी चाहिए । लाभार्थियों के संबंध में सूचना राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा उचित प्रारूप में एकत्र की जानी चाहिए लेकिन अनुलग्नक 4 में दिए अनुसार सूचना होनी चाहिए । एचएफएपीओए तैयार करते समय राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र और कार्यान्वयन एजेंसियों को शहर  में पहले से उपलब्ध किफायती आवास स्टाक पर भी विचार करना चाहिए। जैसा कि जनगणना आंकड़ों में दर्शाया  गया है कि बड़ी संख्या  में आवास खाली पड़े है।
  4. एक व्यक्तिगत परिवार को दोहरा फायदा पहुंचाने से बचने के लिए एचएफएपीओए के डाटा बेस में लक्षित लाभार्थियों के जन धन योजना/अन्य बैंक खाता संख्या  और आधार संख्या /कोई  अन्य विशेष  पहचान के ब्यौरों अथवा लाभार्थी के पैतृक जिले के राजस्व प्राधिकारी से जारी आवास स्वामित्व प्रमाण-पत्र को समेकित किया जाएगा । राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों और यूएलबी द्वारा परियोजनाओं की तैयारी और परियोजनाओं के अनुमोदन के समय उनकी पात्रता सुनिश्चित  करके लाभार्थियों को वैधता दी जाएगी ।
  5. एचएफएपीओए के आधार पर, राज्य/शहर  बाद में संसाधनों और प्राथमिकता की उपलब्धता को देखते हुए वर्ष  2022 तक कार्य को विभाजित करके वार्षिक  कार्यान्वयन योजना (एआईपी) तैयार करेंगे । बड़े शहरों  के लिए एचएफएपीओए और एआईपी, संबंधित राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र सरकार के अनुमोदन से, उप-नगर (वार्ड/जोन इत्यादि) स्तर पर तैयार की जा सकती है ।
  6. विधायकों और संसद सदस्यों सहित स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ मांग सर्वेक्षण के परिणाम, प्रारूप एचएफएपीएओए और प्रारूप एआईपी पर विचार विमर्श  किया जाना चाहिए ताकि उनके विचारों को योजनाओं और लाभार्थी की सूची को अंतिम रूप देते समय पर्याप्त महत्व दिया जाए।
  7. ऐसे शहर जिन्होंने आवास संबंधी आंकड़ों के साथ स्लम मुक्त शहर  कार्य योजना (एचएफएपीओए) अथवा अन्य कोई आवास योजना पहले ही तैयार की है तो इसका उपयोग ''सबके लिए आवास कार्य योजना'' (एचएफएपीओए) तैयार करने हेतु मौजूदा योजना और आंकड़ों का उपयोग करना चाहिए । विभिन्न स्कीमों के अंतर्गत निर्मित आवास को एचएफएपीओए और एआईपी तैयार करते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए ।
  8. एचएफएपीओए और एआईपी समग्र योजना एवं अपेक्षित केन्द्रीय वित्तीय सहायता के आकलन हेतु राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति के अनुमोदन के बाद मंत्रालय को प्रस्तुत की जानी चाहिए । वित्त की उपलब्धता और योजना के मूल्यांकन को देखते हुए, केन्द्रीय स्वीकृति और निगरानी समिति (सीएसएमसी), सभी के लिए आवास कार्य योजना (एचएफएपीओए) और वार्षिक  कार्यान्वयन योजना (एआईपी) में परिवर्तन हेतु निर्देश  जारी कर सकती है ।
  9. एचएफएपीओए की वार्षिक आधार पर समीक्षा की जानी चाहिए ताकि पूर्ववर्ती वर्षों  में वार्षिक  कार्यान्वयन योजना (एआईपी) के कार्यान्वयन को देखते हुए परिवर्तन किया जा सके।
  10. एचएफएपीओए और संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर, प्रत्येक शहर  मिशन के प्रत्येक घटक के अंतर्गत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार (डीपीआर) करेंगे । सभी डीपीआर राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति द्वारा अनुमोदित किए जाने चाहिए ।
  11. शहरी स्थानीय निकायों को केन्द्र और राज्य सरकारों दोनों की अन्य चालू कार्यक्रमों के साथ तालमेल बैठाने हेतु एचएफएपीओए तैयार करने में शहर  विकास योजना, शहर  स्वच्छता योजना इत्यादि के प्रावधान को ध्यान में रखना चाहिए।
  12. एक लाभार्थी मौजूदा विकल्पों अर्थात निजी भागीदार के साथ स्लम पुनर्विकास, ऋण आधारित सब्सिडी, व्यक्तिगत लाभार्थी को प्रत्यक्ष सब्सिडी और भागीदारी में किफायती आवास के अन्तर्गत केवल एक लाभ प्राप्त करने के लिए पात्र होगा। यह सुनिश्चित  करना राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र सरकार की जिम्मेवारी होगी कि लाभार्थी को मिशन के एक घटक से अधिक घटकों के अंतर्गत लाभ नहीं दिया जाए और सभी सहायता प्राप्त परिवार एचएफएपीओए के भाग हैं।

प्रौद्योगकी उपमिशन

  1. मिशन के अंतर्गत आवासों के तीव्र एवं गुणवत्तापरक निर्माण के लिए आधुनिक, अभिनव एवं हरित प्रौद्योगिकियों तथा भवन सामग्री को अपनाने के लिए एक प्रौद्योगिकी उप-मिशन की स्थापना की जाएगी । प्रौद्योगिकी उप-मिशन विभिन्न भू-जलवायु क्षेत्रों के लिए उपयुक्त लेआउट डिजाईनों एवं भवन नक्शों  की तैयारी करेगा और उन्हें अपनाएगा। यह राज्यों /शहरों  में आपदा रोधी एवं पर्यावरण हितैषी  प्रौद्योगिकियों के प्रयोग में सहायता देगा।
  2. उप मिशन पारम्परिक निर्माण के स्थान पर आधुनिक निर्माण प्रौद्योगिकियों एवं सामग्री के विकास को आसान एवं बढ़ावा देने के लिए विभिन्न विनियामक एवं प्रशासनिक  इकाईयों के साथ समन्वय करेगा । प्रौद्योगिकी उप-मिशन हरित एवं ऊर्जाक्षम प्रौद्योगिकी जलवायु परिवर्तन इत्यादि में कार्यरत अन्य एजेंसियों के साथ भी समन्वय स्थापित करेगा ।
  3. उप-मिशन निम्नलिखित पहलुओं पर कार्य करेगा-  1) प्रारुप एवं योजना 2) अभिनव प्रौद्योगिकी एवं सामग्री 3) प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग करके हरित भवन और  4) भूकंप एवं अन्य आपदारोधी प्रौद्योगिकी एवं प्रारुप । पर्याप्त सूर्य प्रकाश  एवं हवा सुनिश्चित  करने वाले सरल संकल्पना के प्रारुप को अपनाना चाहिए ।
  4. राज्य और शहर  के तकनीकी समाधानों, क्षमता निर्माण एवं हेंडहोल्डिंग के विकास के लिए केन्द्र एवं राज्य भी इच्छुक आईआईटी, एनआईटी और योजना एवं स्थापत्य संस्थाओं के साथ सहभागी होंगे ।
  5. इस उप मिशन के अन्तर्गत राज्य अथवा क्षेत्र विशेष  की प्रौद्योगिकियों एवं डिजाइनों  को  भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

केंद्र सरकार की भूमि पर स्लम

  1. केन्द्र सरकार की भूमि स्वामित्व एजेन्सियों को स्लम निवासियों को आवास उपलब्ध कराने के लिए स्लमों द्वारा काबिज अपनी भूमि का संसाधन के रुप में प्रयोग द्वारा ''स्वस्थाने'' स्लम पुनर्विकास भी शुरु करना चाहिए । पुनर्स्थापन की स्थिति में, एजेंसी को या तो भूमि अपने आप मुहैया करानी चाहिए अथवा एजेंसी राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र/शहर  से भूमि प्राप्त करने के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के साथ सहयोग करना चाहिए । केन्द्र सरकार एजेंसियों को पात्र स्लमवासियों के आवास के प्रयोजनार्थ उपयोग की गई भूमि के लिए भूमि लागतें नहीं लेनी चाहिए ।
  2. निजी विकासकों के साथ भागीदारी में स्लम विकास करने वाली केन्द्र सरकार की  एजेंसियां निजी भागीदारों के साथ उनकी भूमि पर पुनर्विकास के लिए शुरु किए जा रहे सभी स्लमों हेतु औसतन 1 लाख रुपए प्रति आवास के स्लम पुनर्वासन अनुदान हेतु पात्र होंगी ।

अनिवार्य शर्तें

शहरी  भूमि की उपलब्धता कमजोर वर्गों सहित सभी के लिए आवास मुहैया कराने में सबसे बड़ी बाधा है । इसलिए, प्रशासनिक  और विनियामक अवरोधों को दूर करने के लिए किफायती आवास सहित आवास क्षेत्र का विकास करने के लिए मिशन में अनिवार्य शर्तें  शामिल  की गई हैं । मिशन में भाग लेने तथा केन्द्र सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों

को निम्नलिखित अनिवार्य शर्तों  को पूरा करने हेतु सहमत होना चाहिए -

  1. यदि भूमि अथवा क्षेत्र पहले ही नगर के मास्टर प्लान में निर्धारित रिहायशी  जोन में आते हैं तो राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र को पृथक गैर-कृषि (एनए) अनुमति के लिए आवश्यकता  को समाप्त करने हेतु क्रियाविधि और नियमों में समुचित परिवर्तन करने होंगे ।
  2. राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र किफायती आवास के लिए भूमि का निर्धारण करते हुए अपने-अपने मास्टर प्लान तैयार/संशोधित  करेंगे ।
  3. शहरी  स्थानीय निकाय स्तर पर ले आउट अनुमोदन तथा भवन निर्माण की अनुमति के लिए एकल खिड़की, समयबद्ध मंजूरी सुनिश्चित  करने हेतु एक प्रणाली कार्यान्वित की जानी चाहिए।
  4. राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र ईडब्ल्यूएस/एलआईजी आवास के लिए पूर्व-अनुमोदित ले-आऊट तथा भवन-निर्माण नक्शों  के आधार पर मान्य भवन-निर्माण अनुमति तथा ले-आउट अनुमोदन के
  5. दृष्टिकोण को अपनाएंगे अथवा कतिपय निर्मित क्षेत्रफल अथवा भूखंड क्षेत्रफल से कम क्षेत्र के आवासों के लिए अनुमोदन से छूट देंगे ।
  6. मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए मॉडल किराया अधिनियम की तर्ज पर राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र या तो किराया कानून बनाएंगे अथवा मौजूदा किराया कानूनों में संशोधन  करेंगे ।
  7. राज्य / संघ राज्य क्षेत्र यदि आवश्यक  हो तो स्लम पुनर्विकास तथा निम्न लागत आवास के लिए अतिरिक्त एफएआर/एफएसआई/टीडीआर मुहैया कराएंगे और सघनता मानदंडों में ढील देंगे ।

क्षमता निर्माण और प्रशासनिक गतिविधियाँ

इस स्कीम के अंतर्गत 5% आवंटन क्षमता निर्माण, सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) और प्रशासनिक  और अन्य व्यय (ए एंड ओई) के लिए निर्धारित किया गया है । इस शीर्षक  के अंतर्गत उपलब्ध आवंटन का उपयोग मिशन के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए अपेक्षित विभिन्न कार्यकलापों हेतु किया जाएगा । इस घटक के अंतर्गत विस्तृत गतिविधियां इस प्रकार हैं-

क्षमता निर्माण

  1. मिशन के कार्यान्वयन में विभिन्न हितधारकों की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण , कार्यशालाएं , अध्ययन/ विषय  परिचायन दौरे आदि जैसी क्षमता निर्माण गतिविधियॉं शुरु की जाएंगी । क्षमता निर्माण के लिए अनुसंधान अध्ययनों के प्रलेखन और उत्तम पद्धतियों का प्रसार,  अन्य  स्कीम संबंधित सामग्रियों की तैयारी भी शुरु की जाएगी ।
  2. सीएसएमसी द्वारा क्षमता निर्माण के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियों के लिए वित्तीय तथा अन्य मानदंडों का निर्णय लिया जाएगा । सीएसएमसी द्वारा इन मानदंडों का निर्णय लेने तक राजीव आवास योजना (आरएवाई) जैसी पूर्ववर्ती स्कीमों के अंतर्गत अंतिम रुप दिए गए मानदंडों का उपयोग किया जाएगा।
  3. मिशन प्रशिक्षण  प्रदान करने तथा अन्य गतिविधियां शुरु करने के लिए संसाधन केन्द्रों को सूचीबद्ध करेगा। राज्य सीएसएमसी के पूर्वानुमोदन से अपनी आवश्यकता  के अनुसार बनाए गए प्रशिक्षण  कार्यक्रमों को तैयार करने के लिए संसाधन केन्द्रों को भी सूचीबद्ध कर सकते हैं।
  4. सीएसएमसी द्वारा निर्णीत मानदंडों के अनुसार सीएसएमसी द्वारा अनुमोदित सभी क्षमता निर्माण गतिविधियों का निधियन पूरी तरह से भारत सरकार द्वारा किया जाएगा ।
  5. सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) के अंतर्गत, मिशन सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन से विभिन्न हितधारकों के लिए लक्षित परामर्शी सामग्री के विकास तथा प्रसार के लिए गतिविधियां शुरु करेगा। मंत्रालय द्वारा सूचना, शिक्षा तथा संचार संबंधी कार्यकलापों का भी पूर्णत: वित्त पोषण  किया जाएगा ।
  6. सामाजिक लेखा-परीक्षा मिशन अपने विवेक पर राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र की सरकारों की इस मिशन के अंतर्गत कार्यान्वित की जा रही परियोजनाओं की लेखा-परीक्षा शुरु करने में भी सहायता करेगा । राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र की सरकारों और शहरी  स्थानीय निकायों द्वारा तकनीकी संस्थाओं (आईआईटी, एनआईटी इत्यादि) और वास्तुकला और  डिजाइन  संस्थानों  समेत विश्वसनीय संस्थाओं तथा ऐसी संस्थाओं के छात्रों के माध्यम से ऐसी सामाजिक लेखा-परीक्षा करवाई जाएगी। मिशन सीएसएमसी के अनुमोदन से सामाजिक लेखा-परीक्षा के लिए 100% वित्तीय सहायता प्रदान करेगा ।
  7. इस निर्धारित निधियों में से मिशन के प्रशासनिक  और अन्य व्ययों का भी वहन किया जाएगा । मंत्रालय अल्प और दीर्घावधि के लिए संविदा आधार पर जनशक्ति की सेवाएं भाड़े पर लेने समेत इस स्कीम के कारगर कार्यान्वयन के लिए मिशन हेतु यथावश्यक  तकनीकी  कक्ष,  परियोजना प्रबंधन कक्ष इत्यादि सृजित करेगा
  8. मंत्रालय को एचएफएपीओए और वार्षिक  कार्यान्वयन योजनाओं (एआईपी) का मूल्यांकन करने में मंत्रालय की सहायता करने के लिए बीएमटीपीसी और हुडको जैसी मूल्यांकन एजेंसियों की भी आवश्यकता  होगी । इन मूल्यांकन एजेंसियों की सेवाओं की यादृच्छिक रुप से परियोजनाओं की जांच करने के लिए भी आवश्यकता  होगी । ऐसे कार्यकलापों पर होने वाले व्यय को भी इन निधियों से पूरा किया जाएगा । सीएसएमसी ऐसे कार्यकलापों के लिए वित्तीय मानदंडों का निर्णय करेगा ।
  9. इस मिशन के अंतर्गत एक प्रौद्योगिकी उप-मिशन बनाया जा रहा है । इस उप-मिशन के कार्यकलापों का वित्त-पोषण  मिशन के क्षमता निर्माण आबंटन के अंतर्गत किया जाएगा।
  10. तृतीय पक्ष गुणवत्ता एजेंसीयां(टीपीक्यूएमए)  यह परिकल्पना की गई है कि राज्य/संघ राज्य क्षेत्र टीपीक्यूएमए को इस मिशन के विभिन्न घटकों के अंतर्गत निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित  करने के लिए लगाएंगे । राज्य/संघ  राज्य क्षेत्रों को तृतीय पक्ष एजेंसियों को शामिल  करते हुए अपनी गुणवत्ता निगरानी और आस्वासन योजनाएं तैयार करनी चाहिए । ऐसी योजना में परियोजना स्थल पर तृतीय पक्ष एजेंसियों द्वारा दौरे करना और राज्य और शहरी  स्थानीय निकायों को गुणवत्ता से संबंधित मुद्दों पर सलाह देना शामिल  होंगे । ऐसी एजेंसियों द्वारा गुणवत्ता आस्वासन रिपोर्ट और अपने तकनीकी स्टाफ की रिपोर्टों के आधार पर भी राज्य और शहरी  स्थानीय निकायों को यह सुनिश्चित  करने के लिए निवारक और उपचारी दोनों उपाय करने चाहिए ताकि इस मिशन के अंतर्गत मानक गुणवत्ता के आवास और अवस्थापना का निर्माण किया जा सके । मंत्रालय 75:25 और पूर्वोत्तर तथा विशेष  श्रेणी के राज्यों के मामले में 90:10 के आधार पर लागत बांटकर तृतीय पक्ष गुणवत्ता निगरानी तंत्र को कार्यान्वित करने के लिए सहायता प्रदान करेगा । मंत्रालय टीपीक्यूएमए द्वारा प्रत्येक परियोजना के लिए अधिक से अधिक तीन दौरों हेतु व्यय शेयर  करेगा । राज्य स्तरीय निगरानी समिति का अनुमोदन लेने के पश्चात्  मिशन को सीएसएमसी के अनुमोदन के लिए वार्षिक  गुणवत्ता निगरानी योजनाएं प्रस्तुत करनी चाहिए ।
  11. राज्य और शहरों में सभी के लिए आवास कार्य योजना(एचएमएपीओए) और तकनीकी कक्ष तैयार करना-एचएमएपीओए को तैयार करने के लिए राज्यों और शहरों  द्वारा अनेक कार्यकलापों की आवश्यकता  है । मिशन राज्यों /शहरों  की क्षमता निर्माण और प्रशासनिक  तथा अन्य व्यय (ए एण्ड ओ ई) निधियों के अन्तर्गत एचएफएपीओए को तैयार करने के लिए इन कार्यकलापों को चलाने में सहायता करेगा । कई शहरों  को पहले ही स्लम मुक्त शहर  कार्य योजना (एसएफसीपीओए) तैयार करने के लिए राजीव आवास योजना के अंतर्गत सहायता दी जा चुकी है। राज्यों और शहरों  को एचएफएपीओए को तैयार करने के लिए उस धनराशि  का उपयोग तथा जारी की गई निधियों में से 70% निधियों का उपयोग कर लिए जाने के बाद अगली किस्त का दावा करना चाहिए ।
  12. मंत्रालय द्वारा एचएफएपीओए तैयार करने के लिए  अपेक्षित  कार्यकलापों  हेतु  75:25  और पूर्वोत्तर तथा विशेष  श्रेणी के राज्यों के मामले में 90:10 के आधार पर वित्त-पोषण  किया जाएगा। सीएसएमसी द्वारा विभिन्न कार्यकलापों के लिए यूनिट लागत/वित्तीय मानदंड निर्धारित किए जाएंगे और तब तक राजीव आवास योजना के अंतर्गत विद्यमान मानदंडों का उपयोग किया जाना चाहिए।
  13. ''सभी के लिए आवास'' को कार्यान्वित करने के लिए, राज्यों और शहरों  को आयोजना, अभियांत्रिकी, सामाजिक गतिशीलता , वित्तीय आयोजना इत्यादि जैसी विभिन्न क्षमताओं की आवश्यकता  होगी । मंत्रालय राज्यों और शहर  की सरकार को इन प्रचालनात्मक क्षेत्रों में उनके कर्मचारियों/अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए सहायता प्रदान करेगा । मंत्रालय शहर  और राज्य की सरकार को राज्य और शहर  स्तर पर तकनीकी और परियोजना प्रबंधन कक्ष के गठन में भी सहायता करेगा । सीएसएमसी के अनुमोदन से 5-10 व्यवसायियों वाले एक राज्य स्तरीय तकनीकी कक्ष (एसएलटीसी) की सहायता की जाएगी । सीएसएमसी राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र की आवश्यकता  पर ऐसे कक्ष का आकार बढ़ा सकता है ।
  14. मिशन द्वारा सीएसएमसी के अनुमोदन से शहर  के आकार और कार्य की मात्रा के आधार पर 2-4 व्यवसायियों वाले शहर  स्तरीय तकनीकी कक्ष (सीएलटीसी) की भी सहायता की जाएगी। सीएसएमसी के अनुमोदन से महानगरीय शहरों  जैसे बड़े शहरों  के मामले में सीएलटीसी में व्यवसायियों की संख्या  4 से अधिक हो सकती है ।
  15. सीएलटीसी और एसएलटीसी के लिए मंत्रालय की सहायता 75:25 और पूर्वोत्तर तथा विशेष  श्रेणी के राज्यों के लिए 90:10 के अनुपात में होगी । सीएसएमसी द्वारा ऐसे कक्षों के लिए वित्तीय मानदंड निर्धारित किए जाएंगे और सीएसएमसी द्वारा इन मानदंडों को निर्धारित करने के समय तक राजीव आवास योजना के अंतर्गत पहले ही अनुमोदित मानदंड लागू होंगे।
  16. कोई अन्य कार्यकलाप जिसकी मिशन को कार्यान्वित करने के लिए क्षमता निर्माण अथवा सामान्यतरु इस क्षेत्र में केन्द्र, राज्यों और शहरी  स्थानीय निकायों की क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक  हो को सीएसएमसी के अनुमोदन से शुरु किया जा सकता है ।

अन्य मंत्रालयों के साथ समाभिरूपता

  1. औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) के माध्यम से उद्योगों से अनुरोध किया जाएगा कि वे अपने सभी कर्मचारियों, चाहे वे संविदा अथवा स्थाई आधार पर हों, के  लिए  आवास सुविधाओं हेतु योजना बनाएं और प्रावधान करें । अपने कर्मचारियों के लिए आवास उपलब्ध कराना उद्योगों द्वारा औद्योगिक संरचना का एक भाग होता है और राज्य सरकारों द्वारा योजना बनायी जाती है।
  2. रेल मंत्रालय और अन्य भू-स्वामी केन्द्र सरकार की एजेंसियों से भी अनुरोध किया जायेगा कि उनकी भूमि पर स्लमों के स्व स्थाने  पुनर्विकास कर पात्र स्लमवासियों को आवास प्रदान किये जाएं।
  3. शहरी  विकास मंत्रालय से उनके 500 शहरों  के अटल नवीकरण और शहरी  परिवर्तन मिशन (अमृत) नामक प्रस्तावित राष्ट्रीय  शहरी  नवीकरण मिशन (एनयूआरएम) के अन्तर्गत नगरों के बाहरी क्षेत्रों में नागरिक सुविधाएं और अवसंरचना विकास करने का अनुरोध किया जायेगा ताकि नागरिक सुविधाओँ के साथ अधिक भूमि उपलब्ध हो सके और उसके एक भाग को नगरों द्वारा कमजोर वर्गों के लिए आवास हेतु प्रयोग में लाया जा सकता है। शहरी  विकास मंत्रालय से यह अनुरोध भी किया जायेगा कि स्मार्ट सिटीज में कमजोर वर्गों के लिए आवास का प्रावधान आरम्भ से ही कर लिया जाए।
  4. राज्यों/संघ राज्य क्षेत्र द्वारा भवन और अन्य निर्माण श्रमिक (रोजगार का नियमन और सेवा शर्त ) अधिनियम, 1996 के केन्द्रीय कानून के अन्तर्गत निर्माण श्रमिक कल्याण निधि का गठन किया जाता है। राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र निर्माण परियोजनाओं पर उपकर संग्रह करेंगे और उस राशि  को निर्माण श्रमिक कल्याण निधि को अंतरित करेंगे। श्रम मंत्रालय से राज्यों/संघ राज्य क्षेत्र को यह कहने का अनुरोध किया जायेगा कि एक कल्याणकारी कदम के रुप मे श्रमिकों के लिए किराया आधार पर आवास स्टॉक का सृजन करें।
  5. भारत सरकार राष्ट्रीय  शहरी  आजीविका मिशन, राष्ट्रीय  शहरी  स्वास्थ्य मिशन, सर्व शिक्षा अभियान, सौर मिशन आदि जैसी विभिन्न स्कीमें कार्यान्वित कर रही है जिनका लक्ष्य शहरी  गरीब हैं। राज्य/ संघ राज्य क्षेत्र को इस मिशन के अन्तर्गत आरम्भ की जाने वाली आवास परियोजनाओं को संगत योजनाओं में सम्मिलित करने का अनुरोध किया जाता है।

ऋण आधारित सब्सिडी को छोड़कर केंद्रीय सहायता जारी करने के लिए तंत्र

  1. शहरी आबादी और अनुमानित स्लम आबादी अथवा आवास और शहरी  गरीबी उपशमन मंत्रालय द्वारा निर्धारित किसी अन्य कसौटी के आधार पर राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र-वार सांकेतिक आवंटन किया जायेगा। प्रत्येक संघटक के लिए आवंटन अलग से किया जायेगा। सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन से मंत्रालय विभिन्न संघटकों के बीच आवंटन को परस्पर परिवर्तित कर सकता है।
  2. विभिन्न संघटको के अन्तर्गत केन्द्रीय सहायता सीएसएमसी के अनुमोदन के पश्चात्  और मंत्रालय के एकीकृत वित्त प्रभाग (आईएफडी) की सहमति से राज्यों/संघ राज्य क्षेत्र को जारी की जाएगी। केन्द्रीय अंश  का हिस्सा 40%, 40%और 20% की 3 किस्तों में जारी किया जायेगा।
  3. मंत्रालय, सीएसएमसी के अनुमोदन से, एचएफएपीओए, तैयार करने के लिए मिशन के अन्तर्गत लाये गए नगरों की संख्या  पर विचार करने के पश्चात्  आरम्भिक कार्यकलापों के लिए आरम्भिक राशि  जारी करेगा। राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र चुनिंदा शहरों  के लिए, यथाशीघ्र, अधिमानतः नगर के चयन के 6 महीनें के भीतर, एचएफएपीओए प्रस्तुत करेंगे। एचएफएपीओए के आधार पर, भारत सरकार से वित्तीय सहायता की अपेक्षाओं को प्रक्षेपित किया जा सकेगा।
  4. राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र आगामी वर्ष  के लिए अनुलग्नक 6 में दिये गए निर्धारित प्रपत्र में प्रत्येक वर्ष  वार्षिक  कार्यान्वयन रिपोर्ट (एआईपी) प्रस्तुत करेंगे ताकि मंत्रालय बजटीय अपेक्षाओं का निर्धारण कर सके। एआईपी प्रति वर्ष  प्रस्तुत की जानी चाहिए।
  5. वार्षिक  कार्यान्वयन रिपोर्ट (एआईपी) के अनुमोदन के पश्चात् , राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र को मिशन के भिन्न-भिन्न संघटकों के अन्तर्गत एसएलएसएमसी द्वारा अनुमोदित, जैसाकि अनुलग्नक 7 में दिये गए अनुसार निर्धारित किया गया है, परियोजनाओँ का ब्यौरा प्रस्तुत करना  आवश्यक होगा। प्रत्येक संघटक के लिए ग्राह्य केन्द्रीय सहायता की 40% की पहली किस्त जारी करने के लिए सीएसएमसी परियोजना-वार सूचना पर विचार करेगी। पहली किस्त जारी करने के लिए, सीएसएमसी तकनीकी/अन्य संस्थानों की सहायता से चुनिंदा डीपीआर की संवीक्षा कर सकता है। वर्ष  2015-16 अर्थात मिशन के पहले वर्ष  के लिए, एआईपी की आवश्यकता  नहीं होगी । राज्य/ संघ राज्य क्षेत्र  अनुलग्नक 7 में निर्धारित प्रपत्र में अनुमोदित परियोजनाओं का ब्यौरा प्रत्येक तिमाही में स्कीम दिशा निर्देशों  के अनुसार, एसएलएसएमसी द्वारा परियोजनाओँ के अनुमोदन के आधार पर केन्द्रीय सहायता पा सकते हैं।
  6. 40% की दूसरी किस्त, राज्य द्वारा जारी धन राशि यों के साथ केन्द्रीय सहायता की पूर्व में जारी किस्त के 70% उपयोग और वास्तविक प्रगति के आधार पर जारी की जायेगी। दूसरी किस्त जारी करने से पूर्व, सीएसएमसी, गुणवत्ता निगरानी प्रयोजन से यादृच्छिक आधार पर, निर्मित किये जा रहे आवासों की अथवा विशिष्ट परियोजना के आवासों की तकनीकी संस्थानों के माध्यम से राज्यों द्वारा चयनित तृतीय पक्ष गुणवत्ता निगरानी एजेंसियों की रिपोर्ट के साथ गुणवत्ता जांच कर सकता है। प्रस्तुत किये जाने वाले उपयोगिता प्रमाण-पत्र का प्रारुप अनुलग्नक 8 में दिया गया है।
  7. राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र नगरों और अथवा कार्यान्वयन एजेंसियो को और केन्द्रीय अनुदान जारी करेंगे। शिथिलता प्रदान करने के उद्देश्य  से राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र को परियोजनाओं की वास्तविक प्रगति के आधार पर निधियां जारी करने की अनुमति इस विश्वास  पर दी जाती है कि परियोजना तीव्रता से कार्यान्वित की जानी है अतः राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र और अधिक निधियां जारी कर सकती हैं।
  8. केन्द्रीय सहायता की 20% की अन्तिम किस्त पूर्व में जारी केन्द्रीय निधियों के 70%उपयोग और प्रत्येक परियोजना में आवासों और अवसंरचना निर्माण सहित, जो भी लागू हो, परियोजनाओं के पूरा होने के अधीन जारी की जायेगी। केन्द्रीय सहायता की 20% की अंतिम किस्त अनिवार्य सुधार प्राप्त करने पर निर्भर करेगा। राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र सभी अनुमोदित परियोजनाओं की परियोजना समापन रिपोर्टें, अनुलग्नक 9 के अनुसार, प्रस्तुत करेंगे।
  9. लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास निर्माण अथवा विस्तार के लिए सहायता संघटक के अन्तर्गत केन्द्रीय सहायता राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र को हस्तांतरित की जाएगी, इसे लाभार्थी के बैंक खाते में इलैक्ट्रानिक रुप से अंतरित कर दिया जाएगा । राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र व्यक्तिगत निर्माण के लिए परियोजनाएं स्वीकृत करने से पूर्व आधार/मतदाता पहचान-पत्र/अन्य किसी विशिष्ट पहचान संख्या  अथवा लाभार्थी के पैतृक जिले के राजस्व प्राधिकारी से जारी आवास स्वामित्व प्रमाण-पत्र और वैध बैंक खाता संख्या  के साथ पात्र लाभार्थियों की एक इलैक्ट्रानिक सूची तैयार करेंगे।
  10. स्कीम के सभी घटको के अन्तर्गत सभी पात्र लाभार्थियों के पास आधार कार्ड/मतदाता पहचान-पत्र/अन्य किसी विशिष्ट पहचान पत्र अथवा लाभार्थी के पैतृक जिले के राजस्व प्राधिकारी से जारी आवास स्वामित्व प्रमाण-पत्र होना चाहिए और उसे लाभार्थी के ब्यौरे के साथ सम्बद्ध किया जाना चाहिए। यदि किसी पात्र लाभार्थी के पास आधार कार्ड नहीं है तो राज्य और नगर को यह सुनिश्चित  करना चाहिए कि ऐसे लाभार्थी का आधार नामांकन प्राथमिकता के आधार पर किया जाए ।
  11. राज्य द्वारा नगर अथवा किसी अन्य कार्यान्वयन एजेंसी को जारी निधियों को इस मिशन के लिए खोले गए एक अलग खाते में रखा जाना चाहिए । इस खाते पर मिलने वाले किसी ब्याज की राशि  को मिशन प्रयोजन के लिए ही उपयोग में लाया जाना चाहिए।

मिशन के ऋण आधारित सब्सिडी घटक के लिए केंद्रीय सहायता जारी करना

  1. स्कीम के आरम्भ में प्रत्येक सीएनए को अग्रिम सहायता जारी की जायेगी। ऋण सम्बद्ध सहायता की बाद की धनराशियां सीएनए को पूर्व की राशियों के 70% उपयोग के पश्चात्, तिमाही आधार पर और सीएनए द्वारा अनुलग्नक 10 में दिये गए प्रपत्र में किये गए दावों के आधार पर जारी की जायेगी।
  2. पीएलआई द्वारा ईडब्ल्यूएस और एलआईजी लाभार्थियों को वितरित ऋण के आधार पर, सीएनए कुल वितरित ऋण पर प्रस्तुत दावों के आधार पर सहायता राशि  सीधे पीएलआई को जारी करेगा। सीएनए द्वारा पीएलआई को जारी की गई सहायता की अधिकतम 4 किस्तें होंगी।
  3. सीएनए द्वारा पीएलआई को वितरित कुल निधि का 0.1% सीएनए को उनके प्रशासनिक व्ययों के लिए भुगतान किया जायेगा।
  4. पीएलआई द्वारा सहायता राशि  सीधे लाभार्थी के खाते में उधारकर्ता के ऋण की मूल राशि  में से घटा कर अग्रिम रुप से क्रेडिट की जाएगी । उधारकर्ता ऋण की मूल राशि  में से शेष राशि  पर ऋण दर पर ईएमआई का भुगतान करेगा।
  5. स्कीम के अन्तर्गत, उधारकर्ता के आवासीय ऋण के लिए प्रक्रिया शुल्क के स्थान पर, पीएलआई को स्वीकृत प्रति आवेदन के लिए एकमुश्त  1000 रुपये का भुगतान दिया जायेगा। पीएलआई लाभार्थी से कोई प्रौसेसिंग प्रभार नहीं लेगा।
  6. लाभार्थी आवास ऋण के लिए सीधे अथवा शहरी  स्थानीय निकाय अथवा लक्षित लाभार्थियों से आवेदनों को सुविधाजनक बनाने के लिए राज्य/शहरी स्थानीय निकाय द्वारा निर्धारित स्थानीय एजेंसियों के माध्यम से आवेदन कर सकता है। शहरी  स्थानीय निकाय अथवा एनजीओ के अधिकृत स्टाफ को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य  से प्रति स्वीकृत आवेदन 250 रु0 का भुगतान ऋण से जुड़ी सब्सिडी (सीएलएस) स्कीम की धनराशि  में से किया जायेगा जिनका भुगतान राज्य सरकारों के माध्यम से किया जायेगा।

प्रशासन और कार्यान्वयन ढाँचा

कार्यक्रम का तीन स्तरीय कार्यान्वयन ढ़ांचा होगा।

  1. मिशन के कार्यान्वयन, उसके अन्तर्गत अनुमोदन और निगरानी के  लिए एक अन्तर - मंत्रालयी समिति अर्थात केन्द्रीय स्वीकृति और निगरानी समिति (सीएसएमसी) का गठन सचिव (हुपा) की अध्यक्षता में किया जायेगा। सीएसएमसी की संरचना और इसके निदेशात्मक  कार्य अनुलग्नक 2 में दिये गए हैं।
  2. मिशन के ऋण से जुडी सब्सिडी घटक की निगरानी और पीएलआई आदि को लक्ष्य देने के लिए सचिव (हूपा) और सचिव (डीएफएस), भारत सरकार की एक समिति भी गठित की जायेगी। समिति आवश्यकता  पड़ने पर अन्य सदस्यों को भी सहयोजित कर सकती है।
  3. मिशन के कार्यान्वयन के लिए मंत्रालय के अधीन एक मिशन निदेशालय  (एमडी) भी गठित किया जाएगा । इसके अध्यक्ष संयुक्त सचिव (मिशन) होंगे।
  4. मिशन के विभिन्न संघटकों के अन्तर्गत कार्य योजनाओं और परियोजनाओं के अनुमोदन के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्र द्वारा अन्तरविभागीय राज्य स्तरीय स्वीकृति और निगरानी समितियों (एसएलएसएमसी) का गठन करना अपेक्षित होगा। इस समिति की अध्यक्षता मुखय सचिव को करनी चाहिए और समिति की संस्तुत संरचना व इसके निर्देशित  कार्यो का ब्यौरा अनुलग्नक 12 में दिया गया है।
  5. प्रत्येक राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र को मिशन के अन्तर्गत राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी (एसएलएनए) का पता लगाना होगा जिसमें स्कीम के समन्वय और सुधार - संबद्ध कार्यकलापों के लिए राज्य स्तरीय मिशन निदेशालय  गठित किया जायेगा।
  6. यूएलबी/कार्यान्वयन एजेसियों द्वारा प्रस्तुत डीपीआर के तकनीकी-आर्थिक मूल्यांकन करने के लिए राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र द्वारा राज्य स्तरीय मूल्यांकन समिति (एसएलएसी) का गठन भी किया जा सकता है। एसएलएसी अपनी मूल्यांकन रिपोर्टो को अपनी टिप्पणियों और संस्तुतियों सहित,एसएलएसएमसी का अनुमोदन प्राप्त करने के लिए, एसएलएनए को प्रस्तुत करेगी।
  7. आवास ऋण लेने वाले लाभार्थियों का पता लगाने, उन्हे प्रेरित करने और संगठित करने के लिए मिशन के ऋण सम्बद्ध सहायता संघटक के अन्तर्गत राज्य अलग से एक राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी (एसएलएनए) नामित कर सकता है।
  8. चुनिंदा नगरों में महापौर अथवा यूएलबी के अध्यक्ष, जैसा भी मामला हो, की अध्यक्षता में एक नगर स्तरीय मिशन का गठन भी करना चाहिए।
  9. विभिन्न हितधारकों से मिशन के कार्यान्वयन में आई शिकायतों  के निपटारे के लिए राज्य और नगर, दोनों स्तरों पर, एक उपयुक्त शिकायत निवारण तंत्र का गठन किया जाना चाहिए।

निगरानी और मूल्यांकन

मिशन की निगरानी सभी तीन स्तरों पर की जायेगीः नगर, राज्य और केन्द्र सरकार। सीएसएमसी एचएफएपीओए की तैयारी, वार्षिक  कार्यान्वयन योजनाओं (एआईपी) और परियोजना कार्यान्वयन की निगरानी करेगी। मिशन द्वारा उपयुक्त निगरानी तंत्र विकसित किया जायेगा। राज्यों और नगरों के लिए भी मिशन और उसके विभिन्न संघटकों की प्रगति के लिए निगरानी तंत्र का विकास करना अपेक्षित होगा।

स्रोत: आवास और शहरी  गरीबी उपशमन मंत्रालय भारत सरकार।

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Budhbharti Feb 21, 2019 09:47 AM

सर में राज्य राजस्थान बाड़मेर जिले के ग्रमीण क्षेत्र से हूं ग्राम पचायत काकराला से ही मैं सहमत नहीं हूं कियो की मेरे गाव के सरपच से मैने पीएम आवास में नाम जोड़ने को कहा तो उन्होंने मना कर दिया जो कि मेरा घर कच्चा हैं में चाहता हूं कि मुझे भी पीएम आवास योजना के तहत पका घर मिले

Budhbharti Feb 21, 2019 09:16 AM

सर में राज्य राजस्थान बाड़मेर जिले के ग्रमीण क्षेत्र से हूं ग्राम पचायत काकराला से ही मैं सहमत नहीं हूं कियो की मेरे गाव के सरपच से मैने पीएम आवास में नाम जोड़ने को कहा तो उन्होंने मना कर दिया जो कि मेरा घर कच्चा हैं में चाहता हूं कि मुझे भी पीएम आवास योजना के तहत पका घर मिले

Prashant Manik Feb 13, 2019 11:36 PM

Pmay gramin yojna kist Kitne bar me niklege or kitne niklege

Prashant Manik Feb 13, 2019 11:08 PM

Pmay gramin yojna kist prtikiriya

Ramu kumar Dec 15, 2018 04:33 PM

Makan ka form bhara mera net par koi jawab nahi deta

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