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भोजन का अधिकार

यह भाग सामाजिक सुरक्षा के अंतर्गत भोजन के अधिकार के अंतर्गत पोषण सहित रोज़गार प्रदान करने वाली विभिन्न योजनाओँ के साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली की जानकारी देता है।

भोजन और पोषण सुरक्षा

पोषण सुरक्षा की देखभाल राष्ट्रीय तैयार मध्याह्न भोजन कार्यक्रम, समन्वित बाल विकास योजना, किशोरी शक्ति योजना, किशोर लड़कियों के लिए पोषण कार्यक्रम और प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना के तहत की जाती है। राष्ट्रीय तैयार मध्याह्न भोजन कार्यक्रम लगभग पूरे भारत में फैल चुका है जबकि समन्वित बाल विकास योजना का विस्तार चरणबद्ध रूप से किया जा रहा है। 11 से 18 वर्ष तक की उम्र की लड़कियों के पोषण और स्वास्थ्य संबंधी विकास के लिए सरकार ने किशोरी शक्ति विकास योजना को हर जगह लागू कर दिया है।

सरकार ने 4882 करोड़ रुपये की लागत से राष्ट्रीय भोजन सुरक्षा मिशन प्रारंभ किया। वर्ष 2008-09 के दौरान सरकार ने 225 लाख टन गेहूं की खरीद की गई जो कि अपने आप में अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड था। सरकार ने 265 लाख टन चावल की खरीद भी की जो कि उस साल से पहले खरीदे गये चावलों की मात्रा में सबसे अधिक थे। वर्ष 2004-05 की तुलना में पिछले चार वर्षों के दौरान सरकार ने गेहूं के अधिकतम समर्थन मूल्य को लगभग 56 प्रतिशत बढ़ाया। वर्ष 2008-09 के लिए यह 1000 रुपये/क्विंटल था। धान का अधिकतम समर्थन मूल्य जो वर्ष 2004-05 में 560 रुपये था उसे बढा़कर 2008-09 में 850 रुपये कर दिया गया था। गेहूं के पर्याप्त भंडार और स्थायी मूल्य की मदद से भोजन सुरक्षा सुनिश्चित करने के क्रम में सरकार द्वारा 2007-08 में 17.69 लाख टन गेहूं का आयात किया था।

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना

भोजन के अधिकार अभियान (और भारत में श्रम आंदोलन) के तहत लंबे समय से एक मांग की जाती रही है जो "राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम" से संबंधित है। यह मांग 2005 के मध्य में आंशिक रूप से पूरी की गई और इसके लिए राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरेगा 2005) लागू किया गया। इस अधिनियम के तहत कोई भी वयस्क व्यक्ति जो न्यूनतम मजदूरी पर आकस्मिक श्रम करने के लिए इच्छुक है वह 15 दिनों के अंदर स्थानीय जन कार्य मे रोजगार पाने के लिए पात्र होगा। इसके अंतर्गत लोगों को वर्ष में उसके निवास से 1 किमी के भीतर 100 दिनों का काम दिये जाने के प्रावधान को लागू किया गया।

जन वितरण प्रणाली (पी.डी.एस)

खाद्य सुरक्षा का प्रावधान करने में जन वितरण प्रणाली (पी.डी.एस) महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 4 लाख से अधिक उचित मूल्य की दुकानों (एफ.पी.एस) का नेटवर्क स्थापित किया गया था ताकि लगभग 16 करोड़ परिवारों के लिए 15000 करोड़ से अधिक का सामान वार्षिक रूप से वितरित किया जा सके। भारतीय जन वितरण प्रणाली (पी.डी.एस) शायद अपने आप में पूरी दुनिया में इस प्रकार की सबसे बड़ी वितरण प्रणाली है।

अनाज भंडार

ग्रामीण अनाज भंडार योजना संशोधित की गई है ताकि इसे अधिक समग्र और व्यापक बनाया जा सके। यह इसलिए किया गया है ताकि राष्ट्रीय आपदाओं और खराब मौसमों के दौरान भुखमरी से निपटा जा सके। पहले इस योजना के तहत केवल अनुसूचित जनजाति को शामिल किया गया था तथा जनजाति क्षेत्रों में रह रहे अनुसूचित जाति के लोगों की इच्छा पर उन्हें इस योजना में सम्मिलित किया जाता था। इस योजना के तहत अब उन सभी परिवारों को सम्मिलित किया गया है जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर कर रहे हैं तथा जो देश में भोजन की कमी से जूझ रहे क्षेत्रों यथा सूखा संभावित क्षेत्रों, रेगिस्तानों और अगम्य पहाड़ी क्षेत्रों में रह रहे है। पिछले चार वर्षो के दौरान स्वीकृत ग्रामीण अनाज भंडारों की संख्या 4858 से बढ़कर 18129 हो गई है।

अंत्योदय अन्न योजना (ए.ए.वाई.)

अंत्योदय अन्न योजना (ए.ए.वाई.) का दायरा भी बढ़ा दिया गया है ताकि एक करोड़ अतिरिक्त घरों को इसके तहत सम्मिलित किया जा सके। यह 67 % की वृद्धि निरूपित करती है। राष्ट्रीय नमूना सर्वे अभ्यास यह वास्तविकता इंगित करता है कि देश की लगभग 5% आबादी को दोनो शाम का भोजन प्राप्त नहीं होता है। आबादी के इस भाग को "भूखा" कहा जा सकता है। आबादी के इस भाग के लिए लक्षित जन वितरण प्रणाली अधिक केन्द्रित हो तथा इसे अपना लक्ष्य समझे। इसके लिए गरीब से गरीब परिवारों के लिए दिसंबर 2000 में "अंत्योदय अन्न योजना (ए.ए.वाई.)" प्रारंभ की गई। राज्यों के अंतर्गत लक्षित जन वितरण प्रणाली के तहत पहचान किये गये गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों में से, अत्यन्त ही गरीब एक करोड़ परिवारों की पहचान करने का कार्य अंत्योदय अन्न योजना के तहत की जा रही है। इन परिवारों को 2 रुपये/कि.ग्रा की दर से गेहूं और 3 रुपये/कि.ग्रा की दर से चावल उपलब्ध होगा। लेकिन, राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को वितरण लागत वहन करना होगा। इसमें डीलरों/खुदरा व्यापारियों को दिया जाने वाला मार्जिन तथा परिवहन लागत सम्मिलित है। इस प्रकार, इस योजना के अंतर्गत संपूर्ण भोजन सब्सिडी उपभोक्ताओं को पहुंचायी जाती है।

ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें।
2.90322580645

प क पाठक Jun 12, 2017 09:55 AM

प्लीज अपडेट कीजिये जानकारी को, अधूरी है

Raghavendra Patidar Feb 27, 2017 02:39 PM

यह गलत है अादमी आलसी हो रहे हैं

Raghavendra Patidar Feb 27, 2017 02:37 PM

भोजन

kauleshgupta Feb 23, 2017 12:27 PM

kupa panchayat ke mukhiya baiju sah gram Vikash ke nam par banaya Hua tha jo ki swartswarthy oor abhimani ke karan ganv ka Vikash nahi ho raha hai

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