सामग्री पर पहुँचे | Skip to navigation

शेयर
Views
  • अवस्था संपादित करने के स्वीकृत

अल्प वित्त संस्थाओं को सावधि ऋण

इस लेख में अल्प वित्त संस्थाओं को सावधि ऋण की जानकारी दी गई है।

अल्प वित्त संस्थाओं को सावधि ऋण
  1. उद्देश्य

सिडबी निम्नलिखित को सावधि ऋण प्रदान करती है:

  • गरीबों- अकेले व्यक्तियों को या संयुक्त देयता स्मिः (जीएलजी), स्वसहायता समूह (एसएचजी), आदि रूप में गठित व्यक्तियों के समूहों को आगे उधार देने के लिए अल्प वित्त संस्थाओं को।
  1. पात्रता मानदंड

सिडबी से ऋण सहायता के लिए पात्र होने के लिए अल्प वित्त संस्थाओं को:

क. सोसाइटी न्यास, कंपनी/धारा-25 के अधीन कम्पनी, गैर-बैकिंग वित्त कंपनी रूपी अल्प वित्त संस्था, सहकारी सोसाइटी और एमसीएस के रूप में पंजीकृत होना चाहिए।

ख. किसी अन्य विधिमान्य संस्था के रूप में पंजीकृत संस्थाओं पर केवल तभी विचार किया जा सकता है, जब शाखा कार्यालय विधि विभाग से उसकी उपयुक्तता के बारे में स्पष्टीकरण प्राप्त कर ले।

ग. अल्प वित्त के क्षेत्र में कम से कम 36 माह से उधार देने का कार्य कर ही हो या प्रवर्तकों/वरिष्ठ प्रबंधतंत्र को अल्प ऋण/बैंकिंग/गैर-बैंकिंग वित्त कंपनी संबधी उधार परिचालनों का दस वर्ष का अनुभव होना चाहिए।

घ. उसकी पहुँच न्यूनतम 5,000 ऋण खातों या 3,000 उधारकर्ताओं तक होनी चाहिए।

ङ. उसका लक्ष्य-समूह गरीब व्यक्ति, विशेषकर महिलाएं हों और वह धर्मनिरपेक्ष हो।

च. जिनके पास लेखापरीक्षित वित्तीय विवरण (जिन गैर-सरकारी संगठनों में अल्प वित्त एक कार्यक्रम के रूप में मौजूद है, उनके पास अल्पवित्त कार्यक्रम के लिए अलग से लेखापरीक्षित वित्तीय विवरणियाँ होनी चाहिए) उपलब्ध हों तथा

छ. जिनके पास वित्तीय मध्यवर्त्ती संस्थाओं के लिए अपेक्षित प्रणालियाँ पद्धतियाँ एवं प्रक्रियाएं, जैसे- आंतरिक लेखांकन , आंतरिक लेखापरीक्षा, जोखिम प्रबंध, नकदी प्रबंध, समय से प्रबंध सूचना प्रणाली, आदि स्थापित हों।

ज. जो भारतीय रिजर्व बैंक और अन्य सांविधिक दिशानिर्देशों का अनुपालन करती हो। इसमें उचित व्यवहार संहिता एवं भारिबैंक के 03 मई 2011 तथा 02 दिसंबर 2011 के यथा संशोधित एवं अद्यतन किये गये परिपत्रों का अनुपालन भी शामिल है।

  1. अन्य

क. सिडबी अल्प ऋण कोष, प्रधान कार्यालय मुख्य धारा की गैर-बैकिंग वित्त कम्पनियों को मामला-दर-मामला आधार पर अल्प वित्त के तहत सहायता देने पर विचार करेगा।

ख. अल्पवित्त संस्था अल्पवित्त का कोई भी सामान्य परम्परागत मॉडल, जैसे-ग्रामीण बैंक मॉडल, स्व-सहायता समूह मॉडल, संयुक्त देयता समूह मॉडल, आदि और विधि के अधीन अनुमत किसी अन्य उपयुक्त मॉडल का अनुसरण कर सकती है।

ग. अल्पवित्त संस्थाएं निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए सिडबी का ऋण आगे उधार देने के लिए करें:

  1. गैर- कृषि आय-अर्जक गतिविधियों चलाने तथा एमएसएमई अधिनियम के अंतर्गत अंत्यंत लघु उद्यमों की स्थापना, तथा
  2. नई आवासीय इकाइयों/आवासीय इकाई-सह-वर्कशेड, आदि के निर्माण/उनके पुनरुद्धार/विस्तार के लिए।
  3. अल्पवित्त संस्था को ऋण वार्षिक/आवश्यकता के आधार पर दिया जायेगा और किसी एक अल्पवित्त संस्था के लिए न्यूनतम ऋण रु० 0.50 करोड़ होगा।
  4. गैर-बैंकिंग वित्त कम्पनी-वित्त संस्थाओं को किसी सनदी लेखाकार से इस आशय का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा कि वे भारतीय रिजर्व बैंक के गैर-बैंकिंग वित्त कम्पनी-अल्प वित्त संस्था सम्बन्धी मानदंडों का अनुपालन करती हैं और अन्य सभी अल्पवित्त संस्थाएं किसी सनदी लेखाकार से इस आशय का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करेंगी कि वे प्राथमिकता क्षेत्र के अंतर्गत बैंक ऋण के लिए अल्प वित्त संस्थाओं की पात्रता से सम्बन्धित भारतीय रिजर्व बैंक के मानदंडों का अनुपालन करती हैं।
  5. स्वीकार्य ग्रेड की वैध बाह्य रेटिंग की उपलब्धता एक पूर्वापेक्षा है।
  6. प्राथमिकता प्रतिभूति के रूप में भी ऋणों/प्राप्यराशियों का दृष्टिबंधक सृजित किया जायेगा।
  7. समुचित संपार्शिविक प्रतिभूति जैसे-सावधि जमा, व्यक्तिगत गारंटी, शेयरों को गिरवी रखना, बहुपक्षीय दानकर्त्ताओं की गारंटी और संपार्शिविक प्रतिभूति के अन्य स्वरूपों पर मामला-दर-मामला आधार पर विचार किया जा सकता है।

सूक्ष्म उद्यमों/उपेक्षित मध्यवर्त्ती उद्यमों को आगे उधार देने के उद्देश्य से ऋण

  1. दृष्टिकोण

बैंक अत्यंत लघु उद्यमों को आगे प्रति उद्यम/प्रति उधारकर्त्ता रु० 50,000 रु० 10,00,000 तक का उधार देने के लिए भागीदार वित्तीय संस्थाओं को सावधि ऋण प्रदान करेगा।

  1. पात्रता मानदंड

गैर-बैकिंग वित्त कंपनियों तथा अल्प वित्त कम्पनियों (गैर-बैकिंग वित्त कम्पनी-अल्प वित्त संस्थाओं सहित) के लिए पात्रता मानदंड निम्नवत है:

  • जिन्हें अल्प वित्त तथा अत्यंत लघु एवं लघु उद्यमों को उधार देने के क्षेत्र में अनुभव हो एवं जिनका विगत में कामकाज अच्छा हो।
  • जिनके पास पर्याप्त संगठनात्मक क्षमताएँ और अभिशासन सम्बन्धी ढांचा हो।
  • ऋण प्रबंध एवं जोखिम मूल्यांकन प्रणाली से सम्बन्धित न्यूनतम अपेक्षाएं पूरी करें।
  • जो भा.रि.बैंक के सभी लागू विवेकपूर्ण विनियमों तथा दिशानिर्देशों का पालन करें।
  • उन्हें न्यूनतम विनिद्रिष्ट बाह्य रेटिंग-प्राप्त (आस्ति वित्तीय कम्पनी और ऋण कंपनी हेतु) तथा न्यूनतम विनिदिष्ट क्षमता आकलन रेटिंग (अल्पवित्त संस्था, एनबीएफसी-एमएफआई) हेतु) होना चाहिए।
  • जिनमें पर्याप्त धन-शुद्धि निरोधी प्रक्रियाएं स्थापित हों।
  • किसी ऋण ब्यूरो के साथ व्यवस्था की हो या शीघ्र ही करने वाली हों।
  • पूंजी पर्याप्तता, निवल सम्पत्ति, गैर-निष्पादक आस्तियों, जोखिम श्रेणीनिर्धारण, आदि के सम्बन्ध में वे न्यूनतम वित्तीय मानक पूरा करती हों जो सिडबी की वर्ष दर वर्ष समीक्षित एवं पुनरीक्षित ऋण नीति में निर्धारित हैं
  • अंत्यंत लघु एवं लघु उद्यम सम्बन्धी वित्तीयन के लिए लागू पर्यावरणीय एवं सामाजिक सुरक्षा संबधी ढांचा अपनाने के बारे में सिडबी की न्यूनतम अपेक्षाएं पूरी करती हों।

अन्तर्राष्ट्रीय ऋणदाता एजेन्सियों के परामर्श से, सिडबी के निर्धारण तथा ऋण नीति के आधार पर नवारंभ गैर-बैकिंग वित्त कंपनियों को इन मानदंडों में से कुछेक से विशिष्ट छूट दी जा सकती हैं।

  1. अन्य

क. ऋण मंजूरी आंतरिक मूल्यांकन तथा स्वतंत्र श्रेणीनिर्धारण एजेंसी से ऋण श्रेणीनिर्धारण के आधार पर प्रदान की जाएगी, जैसा कि सिडबी अल्प ऋण कोष में प्रचलित हो।

ख. आस्ति वित्त कंपनी या ऋण कंपनी के रूप में पंजीकृत गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों के आपस क्रिसिल से न्यूनतम निवेश स्तर का बीबीबी+ का समूहगत श्रेणीनिर्धारण या अन्य ऐसी श्रेणीनिर्धारण एजेंसियों से इसके समकक्ष श्रेणीनिर्धारण होना चाहिए, जिनका श्रेनिनिर्धारण सिडबी स्वीकार करता हो।

ग. जहाँ तक अल्प वित्त कंपनियों (गैर-बैंकिंग कंपनी अल्प वित्त संस्थाओं सहित) का सम्बन्ध है, उनके पास क्रिसिल से क्षमता निर्धारण का एमएफआर5 स्तर का न्यूनतम श्रेणीनिर्धारण या अन्य ऐसी ग्रेडिंग एजेंसी से इसके समकक्ष श्रेणीनिर्धारण होना चाहिए जो सिडबी को स्वीकार्य हो।

घ. मामला-दर-मामला आधार पर, प्रतिभूति के रूप में ऋण से सृजित आस्तियों का दृष्टिबंधक और संपार्शिविक प्रतिभूति शामिल होगी।

ङ. ऋण-जोखिम सीमा मानक और ब्याज दरें समय-समय पर जारी दिशानिर्देशों के अनुसार होंगी।

प्रतिभूतिकरण/नकदी प्रवाह के प्रत्यक्ष समनुदेशन के रूप में अभिग्रहण

प्रतिभूतिकरण/नकदी प्रवाह के प्रत्यक्ष समनुदेशन के रूप में अत्यंत लघु उद्यम/उपेक्षित मध्यवर्ती उद्यम सम्बन्धी ऋणों की खरीदारी पर मामला-दर-मामला आधार पर और भारतीय रिजर्व बैंक के सम्बन्धित मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुरूप विचार किया जायेगा।

स्रोत: भारतीय लघु, उद्योग विकास बैंक (सिडबी)

3.05769230769

अपना सुझाव दें

(यदि दी गई विषय सामग्री पर आपके पास कोई सुझाव/टिप्पणी है तो कृपया उसे यहां लिखें ।)

Enter the word
नेवीगेशन
संबंधित भाषाएँ
Back to top

T612019/06/18 06:41:27.464934 GMT+0530

T622019/06/18 06:41:27.496446 GMT+0530

T632019/06/18 06:41:27.497221 GMT+0530

T642019/06/18 06:41:27.497504 GMT+0530

T12019/06/18 06:41:27.435137 GMT+0530

T22019/06/18 06:41:27.435307 GMT+0530

T32019/06/18 06:41:27.435446 GMT+0530

T42019/06/18 06:41:27.435592 GMT+0530

T52019/06/18 06:41:27.435675 GMT+0530

T62019/06/18 06:41:27.435742 GMT+0530

T72019/06/18 06:41:27.436502 GMT+0530

T82019/06/18 06:41:27.436680 GMT+0530

T92019/06/18 06:41:27.436904 GMT+0530

T102019/06/18 06:41:27.437115 GMT+0530

T112019/06/18 06:41:27.437158 GMT+0530

T122019/06/18 06:41:27.437257 GMT+0530