सामग्री पर पहुँचे | Skip to navigation

शेयर
Views
  • अवस्था संपादित करने के स्वीकृत

दीर्घकालीन विकास के लिए सहायता

इस लेख में दीर्घकालीन विकास के लिए सहायता की जानकारी दी गई है।

परिचय

बैंक ने भारत में एमएसएमई की प्रतिस्पर्द्धात्मक को सुदृढ़ करने के लिए एमएसएमई के दीर्घकालिक विकास को उच्च संभावना वाले क्षेत्र के रूप में चिहिन्त किया है। अत्यंत लघु, लघु एवं मध्यम उद्यमों में उर्जा दक्षता एवं स्वच्छतर पर्यावरण सम्बन्धी निवेशों के वित्तपोषण के लिए, बैंक विगत में विभिन्न बहुपक्षीय/द्विपक्षीय एजेंसियों जैसे क्रेडिटैन्सटैल्ट फर वीडराफबाउ (केफडब्ल्यू), जर्मनी जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी (जाइका), जापान, एजेंसे फ्रैन्काइस’ डि डेवलपमेंट (एएफडी), फ्रांस से प्राप्त ऋण-व्यवस्थाएँ परिचालित करता रहा है।

उद्देश्य

  1. इस बात के लिए बढ़ावा देना कि एमएसएमई उर्जा दक्षता एवं स्वच्छतर प्रौद्योगिकियों का उपयोग करें।
  2. भारतीय अत्यंत लघु, लघु एवं मध्यम उद्यमों की उर्जा खपत में कमी लाना, उर्जा दक्षता में वृद्धि करना, कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी लाना और दीर्घावधि में उनकी लाभप्रदता में सुधार करना।
  3. ब्याजदरों में कुछ रियायत का प्रावधान कर मौजूदा उत्पादों/योजनाओं के अंतर्गत नये उत्पाद शुरू कर एमएसएमई क्षेत्र में उर्जा दक्षता तथा दीर्घकालिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सहयोग करना।
  4. प्रौद्योगिकी, उत्पादों और वितरण/सुपुर्दगी में, विशेष रूप से आपूर्ति पक्ष को लक्ष्यगत करते हुए नवोन्मेष को बढ़ावा देना।
  5. नवोन्मेषी प्रौद्योगिकी आधारित परियोजना के विकास, स्तर-वृद्धि निदर्शन तथा वाणिज्यिक के लिए एमएसएमई को सहायता देना।
  6. जो एमएसएमई स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के आपूर्ति पक्ष में सक्रिय हैं और नवोन्मेषी स्वच्छ प्रौद्योगिकियों, उत्पादों, प्रक्रियाओं तथा सेवाओं के विकास एवं अनुकूलन, निदर्शन, विनियोजन और वाणिज्यिकरण में लगी है, उनको सुदृढ़ करना।

व्यवसाय के अधिक महत्व वाले क्षेत्र: दीर्घकालिक विकास के लिए प्रयत्क्ष वित्त

एमएसएमई क्षेत्र के उन उद्योग-क्षेत्रों की सांकेतिक सूची नीचे दी गई है, जिनमें उर्जा दक्षता एवं स्वच्छतर उत्पादन की अधिक संभावनाएं हैं और जिन पर अधिक महत्व वाले व्यवसाय क्षेत्र के रूप में बल दिया जाना है:

  1. अभियन्त्रिकी एवं मशीनी औजार
  2. ऑटो घटक
  3. इलेक्ट्रोनिक्स और बिजली के उत्पाद
  4. स्पंज आयरन संयंत्र
  5. ढलाईघर (फाउंड्री) एवं फोर्जिंग्स
  6. लुगदी (पल्प) एंव कागज
  7. डिजिटिल मुद्रण सहित मिरित्तिका शिल्प (सेरेमिक्स)
  8. चावल मिल
  9. वस्त्र, विशेष रूप से सेलेसिलाये परिधान एवं जोजरी
  10. औषधि एवं फार्मास्यूटिकल्स
  11. खाद्य प्रसंस्करण और कृषि-आधारित उद्योग
  12. खतरनाक कचरा उपचार एवं समस्त कचरा प्रबंध परियोजनाएँ
  13. कचरे से उर्जा परियोजनाएं तथा कचरा सामग्री का पुनर्चक्रण
  14. औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण प्रौद्योगिकियाँ
  15. दीर्घकालिक परिवहन समाधान (जैसे एलपीजी/सीएनजी आदि स्वच्छतर ऊर्जा का उपयोग करने वाले परिवहन परिचालक)
  16. वाणिज्यिक हरित भवन
  17. ऊर्जा का सह-जनन और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग
  18. सौर, पवन, आदि नवीकरणीय परियोजनाएं
  19. ऊर्जा दक्षता/स्वच्छतर उत्पाद/सेवा/उपकरणों के विनिर्माण एवं सेवा में लगी इकाईयां
  20. ऊर्जा दक्षता परियोजनाओं की व्यवस्था के लिए आंशिक जोखिम साझेदारी सुविधा वाली ऊर्जा सेवा कंपनियां
  21. दीर्घकालिक कृषि व्यवसायम जिसमें खाद्य प्रसंस्करण जैसे उद्योगों से संम्बद्धता वाली जैव कृषि भी शामिल है (जैसे ग्रीन हाउस और पुष्प-कृषि)
  22. उर्जा लेखा परीक्षा/पर्यावरण अनुपालन लेखापरीक्षा/प्रदूषण नियंत्रण एवं प्रंबधन परामर्श सेवाओं सम्बन्धी व्यय
  23. हरित श्रेणीनिर्धारण (ग्रीन रेटिंग), अपने उत्पाद की बीईई स्टार श्रेणीनिर्धारण, पर्यावरण- अनुकूलता सम्बन्धी लेबलिंग आदि से सम्बन्धित व्यय
  24. आईएसओ 50001/14000 अथा अन्य मान्यताप्राप्त पर्यावरण प्रमाणन
  25. सीडीएम पंजीकरण से सम्बन्धित व्यय और जलवायु परिवर्तन शमन परियोजनाएं
  26. विभिन्न अल्प वित्त मध्यवर्त्तियों  अथवा गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के माध्यम से हरित अल्प वित्त (सूक्ष्म उद्यमों को हरित/ऊर्जा दक्षता उपकरण उपायों के लिए प्रदत्त रु० 5 लाख तक के अल्प ऋण)
  27. कोई क्षेत्र-जो ओजोन का क्षरण करने वाले पदार्थों को समाप्त कर रहा हो।

ऊर्जा बचत/स्वच्छतर उत्पादन/आधुनिकीकरण अपनाने के लिए प्रोत्साहित करते समय बेहतर जोखिम शमन-युक्त सावधानीपूर्ण/उच्चतर चयनशील दृष्टिकोण कायम रखा जाये, जैसाकि अनुच्छेद 2.2.2 में कहा गया है।

दीर्घकालिक विकास के लिए सहायता योजनाएँ

संपोषणीय वित्तपोषण के लिए अन्तर्राष्ट्रीय/बहुपक्षीय ऋण-व्यवस्थाएं

जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना करने और जीवाश्म ईंधनों से ऊर्जा की मांग में कमी लाने की दृष्टि से ऊर्जा दक्षता एवं स्वच्छतर उत्पादन के महत्व को देखते हुए सिडबी विभिन्न बहुपक्षीय/द्विपक्षीय एजेंसियों जैसे क्रेडिटैन्सटैल्ट फर वीडराफबाउ (केफडब्ल्यू), जर्मनी जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी (जाइका), जापान, एजेंसे फ्रैन्काइस’ डि डेवलपमेंट (एएफडी), फ्रांस के साथ  ऋण-व्यवस्थाएँ परिचालित करता रहा है, ताकि एमएसएमई में ऊर्जा दक्ष एवं स्वच्छतर उत्पादन निवेश का वित्तीयन किया जा सके। इन ऊर्जा दक्ष/स्वच्छतर उत्पादन निवेशों से ऊर्जा की बचत और वैश्विक ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आएगी। साथ ही, इसने भारत और वैश्विक बाजारों में एमएसएमई की प्रतिस्पर्द्धात्मकता को भी सुदृढ़ बनाया है।

4ई (आद्यांत ऊर्जा दक्षता समाधान)

सिडबी ने 05 जून, 2014 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आद्यांत ऊर्जा दक्षता समाधान (4ई समाधान) उत्पाद आरंभ किया है। सिडबी के इस 4ई समाधान के अंतर्गत एमएसएमई ग्राहकों को तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जायेगा, ताकि वे सेवा की गुणवत्ता के आश्वासन के साथ उचित लागत पर तकनीकी परामर्शदाता/ऊर्जा सेवा कंपनियों की सेवाएं प्राप्त कर सकें और अपनी ऊर्जा बचत में सुधार कर सकें। इस प्रयोजन के लिए विश्व बैंक- वैश्विक पर्यावरण सुविधा परियोजना से प्राप्त निधि से एक परिक्रामी निधि बनाई गई है, जिससे एमएसएमई को ऊर्जा दक्षता परियोजनाओं के लिए रियायती ब्याजदरों तथा सुगम शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराया जायेगा। 4ई समाधान का कार्यान्वयन विशेषज्ञ ऊर्जा व्यवसायिकों की सेवाओं का उपयोग करते हुए सिडबी की सहयोगी संस्था भारत एसएमई प्रौद्योगिकी सेवा लि.(आईएसटीएसएल) के सहयोग से सिडबी की शाखाएं करेंगी।

ऊर्जा दक्षता परियोजनाओं के लिए आंशिक जोखिम साझेदारी सुविधा

सिडबी ने “ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आंशिक जोखिम साझेदारी सुविधा” के लिए विश्व बैंक से करार किया है।

इस परियोजना का उद्देश्य देकर भारत में ऊर्जा दक्षता बाजार को रूपांतरित करने में भारत सरकार को सहयोग देना है और इसके लिए विशेष रूप से ऊर्जा सेवा कंपनियों की ऊर्जा सेवा कार्यनिष्पादन संविदा के माध्यम से उर्जा दक्षता सम्बन्धी निवेश में अधिकाधिक वृद्धि को प्रोत्साहित किया जायेगा। परियोजना के अधीन, सिडबी बैंको/वित्तीय संस्थाओं/गैर-बैकिंग वित्त कंपनियों के उन ऋणों (सिडबी के ऋणों सहित) के लिए गारंटी प्रदान करेगा, जो ऊर्जा सेवा कंपनियों तथा ऊर्जा सेवा सके अरु साथ भारत में ऊर्जा दक्षता परियोजनाओं के लिए ऊर्जा सेवा कार्यनिष्पादन संविदाओं पर आधारित उर्जा सेवा कंपनियों का बाजार तैयार हो सके।

संपोषणीय वित्त योजना (एसएफएस)

कुछ ऐसी परियोजनाएं होती है, जो अन्तर्राष्ट्रीय दानदाता एजेंसियों के निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं कर सकती है, किन्तु तथ्य पर विचार करते हुए कि ऐसी परियोजनाओं के फलस्वरूप भी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की ऊर्जा दक्षता में सुधार होता है और पर्यावरण को हानि पहुँचाने वाली ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी होती है, ऐसी परियोजनाओं की प्रत्यक्ष सहायता के लिए मौजूदा प्रयत्क्ष योजना में से “संपोषणीय वित्त योजना” नामक एक अलग योजना बनाई गई है।

प्रौद्योगिकी नवोन्मेष परियोजनाओं हेतु सहायता

प्रौद्योगिकी के उभरते हुए क्षेत्रों में नवोन्मेष करने और व्यवसाय के अवसर पैदा करने की राष्ट्रीय क्षमताएँ विकसित करने की क्षमता बड़ी शिद्दत से अनुभव की गई है क्योंकि जिन प्रौद्योगिकियों को आजमाया नहीं गया है, उनमें निवेश का जोखिम अधिक होने के कारण एमएसएमई द्वारा नवोन्मेषन के वाणिज्यीकरण हेतु शुरूआती चरण के निधीयन की कमी बनी हुई है। इस प्रकार उपलब्ध निधीयन का ज्यादातर हिस्सा अपेक्षाकृत निम्न जोखिम/आजमाई हुई प्रौद्योगिकियों में निवेश हो जाता है, जिसके कारण नवोन्मेषन का बाजार तक पहुँचाना सिमित हो जाता है। इन बाधाओं के समाधान के लिए बैंक ने प्रौद्योगिकी नवोन्मेष कार्यक्रम (सृजन योजना) के कार्यान्वयन हेतु टेक्नोलॉजी इंफोर्मेशन फोरकास्टिंग एंड काउन्सिल (टिफाक०, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार और केएफडब्ल्यू नवोन्मेष वित्त कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए क्रेडिटांस्टाल्ट फर वीडरफबाउ (केएफडब्ल्यू) जर्मनी का सहयोग लिया है। सुलभ शर्तों व प्रणाली पर वित्तीय उत्पाद विकसित किये गए हैं और क्रियान्वित किये जा रहे हैं।

स्रोत: भारतीय लघु, उद्योग विकास बैंक (सिडबी)

3.0

yaseen khan Jul 13, 2016 11:43 PM

Hom many member in kfw local cometee

अपना सुझाव दें

(यदि दी गई विषय सामग्री पर आपके पास कोई सुझाव/टिप्पणी है तो कृपया उसे यहां लिखें ।)

Enter the word
नेवीगेशन
संबंधित भाषाएँ
Back to top

T612020/01/20 14:55:47.411104 GMT+0530

T622020/01/20 14:55:47.446841 GMT+0530

T632020/01/20 14:55:47.447668 GMT+0530

T642020/01/20 14:55:47.447980 GMT+0530

T12020/01/20 14:55:47.386968 GMT+0530

T22020/01/20 14:55:47.387125 GMT+0530

T32020/01/20 14:55:47.387264 GMT+0530

T42020/01/20 14:55:47.387401 GMT+0530

T52020/01/20 14:55:47.387489 GMT+0530

T62020/01/20 14:55:47.387560 GMT+0530

T72020/01/20 14:55:47.388305 GMT+0530

T82020/01/20 14:55:47.388491 GMT+0530

T92020/01/20 14:55:47.388701 GMT+0530

T102020/01/20 14:55:47.388924 GMT+0530

T112020/01/20 14:55:47.388971 GMT+0530

T122020/01/20 14:55:47.389062 GMT+0530