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प्राप्य वित्त के लिए सहायता

इस लेख में प्राप्य वित्त के लिए सहायता की जानकारी दी गई है।

परिचय

 

  • एमएसएमई क्षेत्र के विक्रेताओं की प्राप्यराशि सम्बन्धी समस्या का समाधान करने और उनके नकदी प्रवाह/चलनिधि में सुधार के लिए, बैंक लगभग दो दशकों से प्राप्त वित्त योजना परिचालित कर रहा है।
  • प्राप्य वित्त योजना में उन बिलों/बीजकों की भुनाई की जाती है, जो अत्यंत लघु, लघु एवं मध्यम उद्यमों और पात्र सेवाप्रदाताओं से बड़े कॉर्पोरेट क्रेताओं की बिक्री किये जाने वाले देशीय घटकों/पुर्जों/उप-संयोजनों/सहायक उपकरणों/विनिर्मित मध्यवर्तकों/किए गये ठेका-आधारित कार्यों उपलब्ध सेवाओं के परिणामस्वरूप उत्पन्न होते हैं। इस योजना में सेवाप्रदाता होने के कारण लघु सड़क परिवहन परिचालकों से सम्बन्धित बिलों को शामिल किये जाने की भी अनुमति हैं। योजना में सेवा-प्रदाता होने के कारण लघु सड़क परिवहन परिचालकों से संबधित बिल भी शामिल करने की अनुमति है।
  • बैंक अन्य बातों के साथ-साथ, बदलते व्यवसाय परिवेश, ग्राहकों की मांग, परिचालन कार्यालयों से प्राप्त प्रतिसूचानाओं पर विचार करते हुए और साथ ही बड़ी संख्या में  अत्यंत लघु, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लाभ के लिए योजना की व्यापक पहुँच के लिए योजना में आवश्यकता-आधारित आशोधन/सरलीकरण/सुसंगतीकरण करता रहा है।
  • निधियों के अंतिम उपयोग का सत्यापन लाभग्राही अत्यंत लघु, लघु एवं मध्यम उद्यमों के चुनिन्दा दौरों तथा भुनाई किये गए बीजकों/बिलों के याद्दच्छिक/अनियमित सत्यापन के माध्यम से किया जाता है।

 

समग्र संविभाग की गुणवत्ता में सुधार करने और मौजूदा आंतरिक श्रेणीनिर्धारण प्रणाली की अपर्याप्तता का समाधान करने के उद्देश्य से, एमएसएमई-आरएफएस के अधीन के नये ग्राहकों के लिए अब बाह्य श्रेणीनिर्धारण अनिवार्य बना दिया गया है, विशेष रूप से उन मामलों में जिनमें सीमा के लिए संपशिर्विक प्रतिभूति का समर्थन प्राप्त नहीं है। साथ ही, जिन सीमाओं के लिए संपशिर्विक प्रतिभूति उपलब्ध नहीं होगी, उनके लिए जहाँ कहीं उपलब्ध हो, अवशिष्ट प्रभार/द्वितीयप्रभार की संभावना का पता लगाया जायेगा। जहाँ संभव होगा, ऐसी सुविधाओं के लिए निदेशकों की वैयक्तिक गारंटियां  भी प्राप्त की जाएँगी। प्रत्याभूत/अंशतः प्रत्याभूत सीमाओं वाले संविभाग के निर्माण पर और अधिक बल दिया जायेगा, और उन्हें कुल संविभाग में धीरे-धीरे कम करके सीमाओं के उस हिस्से तक लाया जायेगा, जो संपशिर्विक प्रतिभूति से समर्थित न हों।

व्यवसाय के अधिक महत्व वाले क्षेत्र

1)  इस योजना की मूलतः वे बिल शामिल किये जाते हैं जो विनिर्माण.ठेका-आधारित कार्यों/सेवा क्षेत्र में कार्यरत एमएसएमई जारी करते हैं। सेवाक्षेत्र की बढ़ती हिस्सेदारी को ध्यान मने रखते हए इन क्षेत्रों में व्यवसाय के अवसर चिन्हित किये जायेगे। किन्तु योजना के अतर्गत सेवाक्षेत्र के वित्तीयन में प्रतीत होनेवाले उच्च जोखिम को देखते हुए बैंक सावधानीपूर्ण दृष्टिकोण अपनाएगा, जिसमें ग्राहक के चयन और लेखांकन निगरानी पर और अच्छी तरह ध्यान केन्द्रित किया जायेगा।

2)  एमएसएमई की सेवा को केंद्रबिंदु में रखते हुए इस वर्ष सीधे एमएसएमई को विक्रेकतावार प्राप्य वित्त सीमाएं दिए जाने पर अधिकाधिक बल दिया जा रहा है, ताकि एमएसएमई/सेवाप्रदाताओं का नकदी प्रवाह और चलनिधि स्थिति सुधारी जा सके। इसके लिए उन्हें संतोषजनक बाजार हैसियत रखने वाली क्रेता कंपनियों को बेचे गया सामान्य और/या प्रदत्त सेवाओं के प्रति वितीय सहायता दी जाती है।

3)  सभी वित्तीय उत्पादों के लिए इलेक्ट्रॉनिक अपनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बैंक अपने आंतरिक रूप से विकसित प्रत्यक्ष ई-भुनाई मॉड्यूल के अंतर्गत अधिकाधिक व्यवसाय लाने पर ध्यान केन्द्रित करेगा।

4)  बैंक फैक्टरिंग सेवाओं को बढ़ावा देना सुकर बनाएगा, जिसमें फैक्टरिंग विनियमन अधिनियम 2012  के प्रावधानों के अनुसार भारतीय रिजर्व बिंक पंजीकृत फैक्टरिंग कंपनियों अथवा फैक्टरिंग सेवाएं प्रदान कर रहे है बैंकों को बढ़ती हुई मात्रा में अधिकाधिक ऋण सहयोग उपलब्ध कराया जाना भी शामिल हैं। फैक्टरिंग सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए, जहाँ-कहीं आवश्यक होगा, मौजूदा एसआरएफएस में समुचित आशोधन किये जायेंगे, ताकि फैक्टरिंग विनियमन अधिनियम 2012 के अधीन फैक्टरों को उपलब्ध उठाये जा सके।

5)  मौजूदा ग्राहकों की मदद  के लिए, यह सुनिश्चित करने के बाद की कोई दोहरा वित्तपोषण नहीं हो रहा है, एमएसएमई तथा गैर- एमएसएमई दोनों से की जाने वाली उधार खरीदारियां व्यापार वित्त योजना/कच्चामाल सहायता योजना के अंतर्गत शामिल की जा सकती है।

उत्पाद युक्तिसंग बनाना

समय के साथ- साथ बढ़ती व्यवसायगत अपेक्षाएं पूरी करने के लिए एमएसएमई आरएफएस को उन्नत बनाया गया है, जैसे विनिमय बिल विहीन एमएसएमई आरएफएस, साखपत्र से समर्थित एमएसएमई आरएफएस, विक्रेता-वार प्राप्य वित्त योजना (आरएफएस), अशोधित बीजक भुनाई योजना, एनटीआरईईएस मंच के अंतर्गत ई-भुनाई और व्यापार वित्त योजना/कच्चामाल सहायता योंजना। वर्ष के दौरान, आवश्यकता के अनुसार, युक्तिसंगत बनाने की प्रक्रिया जारी रहेगी।

 

स्रोत: भारतीय लघु, उद्योग विकास बैंक (सिडबी)

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