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अग्रिम न्यायिक निर्णय

इस पृष्ठ में अग्रिम न्यायिक निर्णय की जानकारी दी गयी है।

अग्रिम न्यायिक निर्णय का क्या अर्थ है?

सीजीएसटी/एसजीएसटी कानून की धारा 95 एवं यूटीजीएसटी कानून की धारा 12 के अनुसार, अग्रिम न्यायिक निर्णय का अर्थ प्राधिकरण अथवा अपीलीय प्राधिकरण द्वारा आवेदनकर्ता को उन मामलों में या उन प्रश्नों पर प्रदान किया जाने वाला निर्णय है जैसा कि सीजीएसटी/एसजीएसटीअधिनियम की धारा 97(2) अथवा 100(1) में उल्लिखित है जोकि आवेदनकर्ता द्वारा की जा रही अथवा प्रस्तावित माल और/अथवा सेवाओं की आपूर्ति के संबंध में है।

वे कौन से प्रश्न हैं जिनमें अग्रिम न्यायिक निर्णय की मांग की जा सकती है?

निम्नलिखित मामलों में अग्रिम न्यायिक निर्णय की मांग की जा सकती हैं:

(क) अधिनियम के अंतर्गत किसी भी वस्तुओं या सेवाओं का वर्गीकरण;

(ख) अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत जारी अधिसूचना जो कर की दर को प्रभावित करती है,

(ग) मूल्य निर्धारण के प्रयोजनों के लिए अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत वस्तुओं या सेवाओं के अपनाये जाने वाले सिद्धांत;

(घ) इनपुट कर क्रेडिट के भुगतान या माने गये भुगतान की स्वीकार्यता,

(ई) अधिनियम के अंतर्गत किसी भी वस्तुओं या सेवाआ पर कर भुगतान के दायित्व का निर्धारण,

(च) क्या अधिनियम के अंतर्गत आवेदक का पंजीकृत होना आवश्यक है,

(छ) आवेदक द्वारा वस्तुओं या सेवाओं के संबंध में कोई विशिष्ट कार्य जिसका परिणाम किन्ही किया गया वस्तुओं या सेवाओं के रूप में हो अथवा वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति

से संबंधित हो, जो इस शब्द के दायरे में आते हों।

अग्रिम न्यायिक निर्णय के तंत्र का क्या उद्देश्य है?

कथित प्राधिकरण के गठन के व्यापक उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  1. आवेदक द्वारा प्रस्तावित की जाने वाली गतिविधि के संबंध में अग्रिम कर देयता में निश्चितता प्रदान करना है,
  2. ii. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित (एफडीआई) करना;
  3. मुकदमेबाजी में कमी,
  4. पारदर्शिता और किफायत के साथ तत्काल न्यायिक निर्णय घोषित करना

जीएसटी के अंतर्गत अग्रिम न्यायिक निर्णयों (एएआर) के लिए प्राधिकरण की संरचना क्या होगी?

अग्रिम न्यायिक निर्णय के लिए प्राधिकरण (एएआर) में सीजीएसटी का एक और एसजीएसटी/यूटीजीएसटी का एक सदस्य शामिल होगा । उन्हें क्रमशः केंद्र और राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जायेगा। उनकी शैषिक योग्यताएँ और नियुक्ति की शर्तें मॉडल जीएसटी नियमों में निर्धारित की जाएँगी।

क्या अग्रिम न्यायिक निर्णय (एएआर) मांग करने वाले व्यक्ति का पंजीकृत होना आवश्यक है?

नहीं, जीएसटी अधिनियम(मों) के अंतर्गत पंजीकृत अथवा पंजीकरण प्राप्त करने का इच्छुक कोई भी व्यक्ति आवेदनकर्ता हो सकता है (धारा 95 बी)।

अग्रिम न्यायिक निर्णय (एएआर) का आवेदन किस समय किया जा सकता है?

आवेदनकर्ता अग्रिम न्यायिक निर्णय के लिए आवेदन लेनदेन (वस्तुओं अथवा सेवाओं की प्रस्तावित आपूर्ति)अथवा आपूर्ति के संबंध में, जोकि की जाने वाली है, से पहले भी कर सकता है। एकमात्र प्रतिबंध यह है कि आवेदनकर्ता के मामले में उठाया गया प्रश्न लंबित न हो अथवा किसी कार्यवाही में निर्णीत न हुआ हो।

अग्रिम न्यायिक निर्णय प्राधिकरण को कितने समय में न्यायिक निर्णय सुनाना होगा।

सीजीएसटी/एससीजीएसटी अधिनियम की धारा 98 (6) के अनुसार प्राधिकरण को आवेदन प्राप्त होने की तिथि के 90 दिन के अंदर लिखित में न्यायिक निर्णय सुनाना होगा। प्र 8. अग्रिम न्यायिक निर्णय (एएएआर) के लिए अपीलीय प्राधिकरण क्या है । उत्तर: अग्रिम न्यायिक निर्णय (एएएआर) के लिए अपीलीय प्राधि किरण का गठन एसजीएसटी अथवा यूटीजीएसटी अधिनियम के अंतर्गत होगा एवं इस तरह का एएएआर संबंधित राज्य सरकार अथवा संघ शासित क्षेत्र की संबंध में सीजीएसटी की अंतर्गत अपीलीय प्राधिकरण माना जाएगा। किसी भी अग्रिम न्यायिक निर्णय से असंतुष्ट आवेदक अथवा क्षेत्राधिकार अधिकारी अपोलीय प्राधिकरण में अपील कर सकता है।

जीएसटी के अंतर्गत एएआर और एएएआर को कैसे गठित किया जाएगा?

प्रत्येक राज्य के लिए एक एएआर और एएएआर होगा।

अग्रिम न्यायिक निर्णय किन पर लागू होगा?

धारा 103 प्रदान करती है कि एएआर या एएएआर द्वारा सुनाई अग्रिम न्यायिक निर्णय केवल उस आवेदक पर, जिसने वह 97(2) से संदर्भित किसी भी मामले के संबंध में मांगी है, और आवेदक के कर प्राधिकरण क्षेत्राधिकारी पर बाध्य होगा। इसका स्पष्ट रूप से यह अर्थ है कि अग्रिम न्यायिक निर्णय राज्य में एक ही तरह के कराधीन व्यक्तियों पर लागू नहीं होता है। यह केवल उन्हीं व्यक्तियों तक सीमित है जिन्होंने अग्रिम न्यायिक निर्णय के लिए आवेदन किया है।

क्या अग्रिम न्यायिक निर्णय को उच्च न्यायालय अथवा उच्चतम न्यायालय के फैसले की अग्रगामी मूल्य होगी?

नहीं, अग्रिम न्याय निर्णय केवल संदर्भित मामले के संबंध में बाध्यकारी होगा। इसका कोई अग्रगामी मूल्य नहीं होगा, यद्यपि, आवेदक के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति के लिए भी इसका प्रेरक मूल्य होगा।

अग्रिम न्यायिक निर्णय को लागू करने की क्या समय अवधि है?

अग्रिम न्यायिक निर्णय लागू करने के लिये कानून कोई निश्चित समय अवधि प्रदान नहीं करता। इसके बजाय, धारा 103(2)में, यह उपबंधित है कि अग्रिम न्यायिक निर्णय उस अवधि तक बाध्यकारी होगा जब तक मूल अग्रिम न्यायिक निर्णय को समर्थित कानून, तथ्य या परिस्थितियां बदल नहीं जाते। इस प्रकार जब तक लेनदेन जारी रहैगा एवं जब तक कानून, तथ्य या परिस्थितियां में कोई बदलाव नहीं आता, अग्रिम न्याय निर्णय प्रभावी रहैगा।

क्या एक अग्रिम न्यायिक निर्णय को निरस्त माना जा सकता है?

धारा 104(1) प्रदान करती है कि एक अग्रिम न्यायिक निर्णय प्रारम्भ से ही अवैध माना जाएगा यदि एएआर या एएएआर यह पाता है कि आवेदक द्वारा अग्रिम न्यायिक निर्णय धोखाधड़ी या तथ्यों की सामग्री को दबाकर या तथ्यों की गलत बयानी से प्राप्त किया गया है। ऐसी स्थिति में, आवेदक पर जीएसटी अधिनियम(मों) के सभी प्रावधान इस प्रकार से लागू होंगे जैसे कथित अग्रिम न्यायिक निर्णय कभी किया ही नहीं गया था (लेकिन उस अवधि को छोड़कर जब अग्रिम न्यायिक निर्णय दिया गया था और उस अवधि तक जब अवैध घोषित किये आदेश जारी किया जाता है)। अग्रिम न्यायिक निर्णय घोषणा को अवैध करार देने का आदेश् केवल आवेदक की सुनवाई करने के बाद ही पारित किया जा सकता है।

अग्रिम न्यायिक निर्णय प्राप्त करने की क्या प्रक्रिया है?

धारा 97 और 98 अग्रिम न्यायिक निर्णय प्राप्त करने की प्रक्रिया से संबंधित है। धारा 97 प्रदान करती है कि अग्रिम न्यायिक निर्णय प्राप्त करने के इच्छुक आवेदक को एक निर्धारित प्रपत्र और तरीके से एएआर के लिए आवेदन करना चाहिए। आवेदन का प्रारूप और आवेदन करने के लिए विस्तृत प्रक्रिया का प्रारूप नियमों में निर्धारित किया जाएगा।

धारा 98 अग्रिम न्यायिक निर्णय के लिए आवेदन की प्रक्रिया प्रदान करती है। एएआर आवेदन की एक प्रति उन अधिकारियों को भेजेगे जिनके क्षेत्राधिकार में आवेदक आता है और सभी प्रासंगिक रिकॉर्ड की मांग करेगी । इसके बाद एएआर रिकॉर्ड के साथ आवेदन की जांच और आवेदक की सुनवाई कर सकती है। इसके बाद वह या तो आवेदन की स्वीकृति या रद्द करने के आदेश पारित कर देंगे।

किन परिस्थितियों के अंतर्गत अग्रिम न्यायिक निर्णय के आवेदनों को अनिवार्य रूप से अस्वीकार किया जा सकता है?

आवेदन अस्वीकार कर दिया जाएगा यदि जीएसटी अधिनियम(मों) के किसी प्रावधान अंतर्गत आवेदक के मामले में आवेदन में उठाया गया प्रश्न किसी कार्यवाही में पहले से ही लंबित है अथवा निर्णीत हो चुका है।

यदि आवेदन अस्वीकार कर दिया जाता है तो यह अस्वीकरण स्वत: स्पष्ट आदेश के माध्यम से किया जाना चाहिए जिसमें अस्वीकरण का कारण उल्लिखित हो ।

एक बार आवेदन स्वीकार किया जाता है तब एएआर द्वारा क्या प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिये?

यदि आवेदन को स्वीकार कर लिया जाता है, तब एएआर आवेदन प्राप्त करने के नब्बे दिनों के भीतर अपना न्यायिक निर्णय घोषित कर देगा। अपने न्यायिक निर्णय देने से पहले, यह आवेदन और आवेदक या संबंधित विभागीय अधिकारी द्वारा दी गई सामग्री की जांच करेगा । न्यायिक निर्णय देने से पहले, एएआर को आवेदक या उसके अधिकृत प्रतिनिधि के साथ सीजीएसटी/एसजीएसटी/प्यूटीजीएसटी के क्षेत्राधिकार के अधिकारियों को भी सुनना होगा।

यदि एएआर के सदस्यों के बीच मतभेद हो जाता है तब क्या होगा?

अगर वहाँ एएआर के दो सदस्यों के बीच कुछ मतभेद हो जाता है, वे जिस मुद्दे या मुद्दों पर उनके बीच विवाद है उन मुद्दों की सुनवाई के लिए वे एएएएआर को संदर्भित कर देंगे। यदि एएआर एएएआर के सदस्य भी इन मुद्दे(दों) के संबंध में एक आम निष्कर्ष पर आने में विफल हो जाते हैं, तब यह मान लिया जाएगा कि एएएआर स्तर पर उन विवादों के संबंध में कोई अग्रिम न्यायिक निर्णय नहीं दिया जा सकता है।

एएआर के आदेश के विरूद्ध अपील के लिए क्या प्रावधान हैं?

एएएआर के समक्ष अपील के प्रावधान सीजीएसटी/ एसजीएसटी अधिनियम की धारा 100 और 101 एवं यूटीजीएसटी की धारा 14 में दिए गए हैं।

यदि आवेदक एएआर के निष्कर्ष से असंतुष्ट है, तब वह एएएआर के समक्ष अपील दायर कर सकता है। इसी तरह, यदि सीजीएसटी/ एसजीएसटी/यूटीजीएसटी के संबद्ध या क्षेत्राधिकार अधिकारी एएआर की निष्कर्ष परिणामों के साथ सहमत नहीं है, वह भी एएएआर के समक्ष अपील दायर कर सकते हैं। सीजीएसटी/एसजीएसर्ट के संबद्ध अधिकारी का अर्थ एक ऐसे अधिकारी से है जिसे सीजीएसटी/एसजीएसटी प्रशासन द्वारा आवेदन के संबंध में अग्रिम न्यायिक निर्णय के लिए नामित किया गया है। सामान्य परिस्थितियों में, संबंधित अधिकारी वह अधिकारी है जिसके क्षेत्राधिकार में आवेदक स्थित होगा। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारी सीजीएसटी/एसजीएसटी क्षेत्राधिकार का अधिकारी होगा। कोई भी अपील अग्रिम न्यायिक निर्णय की प्राप्ति से तीस दिनों के भीतर दायर की जानी चाहिए। अपील निर्धारित प्रारूप में की जानी चाहिए और निर्धारित तरीके से उसका सत्यापन होना चाहिए। इसे मॉडल जीएसटी नियमों में निर्धारित किया गया है। अपीलीय प्राधिकारी अपील दायर करने के नब्बे दिनों की अवधि के भीतर अपील करने के लिए पक्षों की सुनवाई के बाद एक आदेश पारित करेगा। यदि अपील में निर्दिष्ट किसी मुद्दे पर एएएआर के सदस्यों के बीच कोई मतभेद है तो, यह समझा जाएगा कि अपील के अंतर्गत किसी भी प्रश्न के संबंध में कोई अग्रिम न्यायिक निर्णय जारी नहीं किया गया है।

क्या अग्रिम न्यायिक निर्णय के लिए अपीलीय प्राधिकरण क निर्णय के विरुद्ध उच्च न्यायालय अथवा उच्चतम न्यायालय में अपील दायर की जा सकती है?

सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियम में न्यायिक निर्णय की लिए अपीलीय प्राधिकरण के विनिर्णय के विरूद्ध अपील दायर करने का उपबंध नहीं है। इस प्रकार आगे कोई अपील नही है एवं आवेदक के संबंध में विनिर्णय आवेदक एवं उसके साथ साथ क्षेत्राधिकारी अधिकारी पर बाध्यकारी होगा । यद्यपि रिट अधिकारिता माननीय उच्च न्यायालय अथवा उच्चतम न्यायालय के समक्ष हो सकती है।

क्या एएआर और एएएआर न्यायिक निर्णय की गलतियों में सुधार के लिये कोई आदेश जारी कर सकता है?

हाँ, अधिनियम की धारा 102 एएआर और एएएआर को उसके आदेश की तारीख से छह महीने की अवधि के भीतर किस भी गलती जो अभिलेखों से स्पष्ट हों, को सुधारने के लिए  शक्तियां प्रदान करती है। इस तरह की गलतियां प्राधिकारी द्वारा स्वंय भी सूचित की जा सकती हैं या आवेदक द्वारा उनके संज्ञान में लाई जा सकती हैं क्षेत्राधिक वृद्धि या आदेश पारित करने से पहले आवेदक/याचिकाकर्ता को सुना जाना या निर्धारित की जा सकती है या सीजीएसटी/एसजीएसटी र अधिकारी द्वारा। यदि सुधार का प्रभाव कर देनदारी की इनपुट कर क्रेडिट के परिमाण को कम करता है, तब आवश्यक होगा।

स्रोत: भारत सरकार का केंद्रीय उत्पाद व सीमा शुल्क बोर्ड, राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय

2.9649122807

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