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अपराध और दंड, अभियोजन और संयुक्तिकरण

इस पृष्ठ में अपराध और दंड, अभियोजन और संयुक्तिकरण की विस्तृत जानकारी दी गयी है।

सीजीएसटी/एसजीएसटी के अंतर्गत निर्धारित अपराध क्या हैं?

सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियम अध्याय XVI अपराध और दंड को संहिताबद्ध करता है। अधिनियम की धारा 122 में 21 अपराधों को सूचीबद्ध किया गया है, धारा 10 के अंतर्गत निर्धारित दंड की अतिरिक्त कराधीन व्यक्ति द्वारा आपसी निपटारा प्राप्त करने के लिए

इसका हकदार नहीं है।

कथित अपराध इस प्रकार हैं:-

1)  चालान/बिल के बिना आपूर्ति करना या झूठे/गलत बिल/चालान के साथ आपूर्ति करना,

2)  बगैर आपूर्ति किए चालान/बिल जारी करना,

3)  3 महीने की अधिक अवधि के लिए एकत्रित किए कर का भुगतान न करना,

4)  सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियम का उल्लंघन करते हुए 3 महीने से अधिक अवधि के लिए एकत्रित कर क भुगतान न करना,

5)  गैर-कटौती या स्रोत पर कर की कम कटौती करना य धारा 37 के अंतर्गत स्रोत पर कर कटीती (TDS) की रकम जमा नहीं करना, गैर-संग्रह या कम-संग्रह या धारा 43सी के अंतर्गत स्रोत पर एकत्रित कर का भुगतान नहीं करना,

6)  वस्तुओं और/या सेवाओं की वास्तविक प्राप्ति के बिना इनपुट कर क्रेडिट का लाभ प्राप्त/उपयोग करना,

7)  धोखे से कोई प्रतिदाय/रिफड प्राप्त करना,

8)  धारा 17 के उल्लंघन में इनपुट सेवा वितरक से इनपुट कर क्रेडिट का लाभ उठाना/उपयोग करना,

9)  झूठी जानकारी या झूठे वित्तीय अभिलेख बनाकर प्रस्तुत करना या कर के भुगतान से बचने के लिए फर्जी खाते/दस्तावेज प्रस्तुत करना;

10)कर के लिए उत्तरदायी होने के बावजूद पंजीकरण कराने में विफलता,

11)पंजीकरण के लिए अनिवार्य क्षेत्रों के बारे में झूठी जानकारी प्रस्तुत करना,

12)किसी अधिकारी को उसके कर्तव्य का निर्वहन करने में रूकावट डालना या रोकना;

13)निर्धारित दस्तावेजों के बगैर माल परिवहन करना,

14)कारोबार के आंकड़े दबाना जिससे कर की चोरी की जा सके,

15)अधिनियम में निर्दिष्ट की गई विधि अनुसार खातों/ दस्तावेज बनाए रखने में विफलता या अधिनियम में निर्दिष्ट अवधि के लिये खातों/दस्तावेज बनाए रखने के लिए विफल रहना,

16)अधिनियम/नियम के अनुसार एक अधिकारी द्वारा जानकारी/ दस्तावेज की मांग पर विफल रहना य किसी भी कार्यवाही के दौरान झूठी जानकारी/दस्तावेज

17)प्रस्तुत करना;

18)किसी भी जब्ती किये जाने वाले माल की आपूर्ति/ परिवहन/ भंडारण,

19)किसी अन्य व्यक्ति के जी.एस.टी.आई.एन. का उपयोग कर चालान/बिल या दस्तावेज जारी करना;

20)किसी भी सामग्री से छेड़छाड़/साक्ष्य नष्ट करना,

21)हिरासत/जब्त/अधिनियम के अंतर्गत संलग्न माल का निपटान / छेड़छाड करना,

शब्द दंड का क्या अर्थ है?

शब्द दंड को सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियम में परिभाषित नहीं किया गया है लेकिन न्यायिक घोषणाओं और न्यायशास्त्र के सिद्धांतों में दंड की प्रकृति का निम्नाकित उल्लेख किया गया है:

  • एक अस्थायी सजा या संविधि द्वारा लगाई गई पैसे की राशि,जिसे किसी निश्चित अपराध करने के लिए सजा के रूप में भुगतान किया जाता है,
  • कानून द्वारा दंड लगाना या अनुबंध पर करना या कुछ करने में विफल होना जिसे करना पक्ष का कर्तव्य था ।

दंड लगाते समय किस सामान्य अनुशासन का पालन किया गया है?

दंड लगाना एक निश्चित अनुशासनात्मक व्यवस्था के अधीन है जो न्यायशास्त्र, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समझौतों के संचालन पर आधारित है। ऐसे सामान्य अनुशासन अधिनियम की धारा 126 में प्रतिष्ठापित किये गये हैं।

तदनुसार-

  • किसी भी मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किये बिना और उचित सुनवाई के कोई दंड नहीं लगाया जाएगा, यह व्यक्ति को उसके विरूद्ध लगाये आरोपों को गलत साबित करने के लिये अवसर प्रदान करता है,
  • दंड मामले के तथ्यों और परिस्थितियों की समग्रता पर निर्भर करता है,
  • दंड कानून के प्रावधानों या उसके नियमों के उल्लंघन में लगाए गये आरोप के परिमाण और गंभीरता के अनुरूप होना चाहिए,
  • दंड लगाने के आदेश में उल्लंघन की प्रकृति स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट की जानी चाहिए, उन्हें निर्दिष्ट किया जाना चाहिए
  • धारा 126 आगे यह स्पष्ट करती है कि, विशेषकर इन मामलों में कड़े दंड नहीं लगाए जाएं-
  • कोई भी मामूली उल्लंघन (मामूली उल्लंघन को ऐसे मामले में प्रावधानों के उल्लंघन के रूप में परिभाषित किया गया है जहां शामिल कर 5000 रूपये से कम है), या
  • कानून की एक प्रक्रियात्मक आवश्यकता है, या
  • दस्तावेज में आसानी से संशोधन योग्य गलती/चूक (रिकार्ड में त्रुटि के रूप में स्पष्ट समझाए गई है) जिसे बिना धोखाधडी के इरादे या घोर लापरवाही के किया गया है।

इसके अतिरिक्त, जहाँ कहीं भी सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियम में दंड निश्चित राशि या निश्चित प्रतिशत पर प्रदान किया गया है, वही लागू होगा।

सीजीएसटी/एसजीएसटीअधिनियम में कितने परिमाण में दंड प्रदान किया जाता है?

धारा 122(1) में प्रावधान करती है कि कोई भी कराधीन व्यक्ति है जिसने धारा 122 में उल्लिखित कोई अपराध किया हे उसे दंड स्वरूप निम्नलिखित में सबसे अधिक राशि का भुगतान करना होगाः

  • करवंचना की राशि, धोखे से रिफड के रूप में प्राप्त राशि, क्रेडिट के रूप में लाभ उठाया, या कटौती नहीं करना या एकत्र नहीं करना या कम कटौती करना या थोड़ा कम एकत्र करना, से संबंधित राशि या
  • 10,000/- रुपए की राशि

इसके अतिरिक्त धारा 122(2) में प्रावधान है कि कोई भी पंजीकृत कराधीन व्यक्ति जो बार-बार कम कर का भुगतान करता है वह सजा के लिए उत्तरदायी है जो निम्न में सबसे अधिक होगी :

  • कम अथवा नहीं भुगतान किए कर का 10 प्रतिशत या
  • 10,000/- रुपये

क्या कराधीन व्यक्ति के अतिरिक्त किसी व्यक्ति के लिये कोई दंड निर्धारित किया गया है? हाँ। धारा 122(3) किसी व्यक्ति पर 25,000/- रूपये तक का विस्तारित दंड लगाने का प्रावधान करती है जो –

  • 21 में से किसी भी अपराध में सहयोग और सहायता करता है,
  • किसी भी तरीके (चाहे प्राप्त, आपूर्ति, भंडारण या परिवहन के लिए)से ऐसे माल/वस्तुओं का लेनदेन करता है जो जब्ती के लिए उत्तरदायी हैं,
  • अधिनियम का उल्लंघन करते हुए सेवाओं की आपूर्ति प्राप्त करता है या लेनदेन करता है,
  • अधिकारी द्वारा सम्मन भेजे जाने पर पेश नहीं होता,
  • किसी आपूर्ति के लिये चालान/बिल जारी करने या कानून के अंतर्गत अनिवार्य चालान/बिल के हिसाब जारी करने में विफल रहता है।

किसी उल्लंघन के लिए क्या दंड दिया जाता है जिसे सीजीएसटी/एसजीएसटीअधिनियम के अंतर्गत अलग से निर्धारित नहीं किया गया है?

सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियम की धारा 125 प्रदान करती है कि कोई भी व्यक्ति जो इस अधिनियम के किसी प्रावधान का उल्लंघन करता है या इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गये नियम जिनके लिये अलग से कोई दंड निर्धारित नहीं किया गया है उसे दंडित किया जाएगा जिसका दंड 25,000 रुपये तक लगाया जा सकता है।

वैध दस्तावेजों के बिना परिवहन की जाने वाली वस्तुओं या बिना उपयुक्त खातों के रिकार्ड के उसे हटाने का प्रयास करने पर उसके लिये क्या कार्यवाही की जा सकती है ?

यदि कोई व्यक्ति किसी माल की दुलाई करता है या ऐसे माल की दुलाई करते समय बिना दस्तावेज (यानी चालान/बिल औरघोषणा) के भंडारण करता है जो अधिनियम के अंतर्गत निधारित किये गये हैं या आपूर्ति या किसी माल/वस्तुओं का भंडारण करता है जिसे उसके द्वार रखे बहियों या खातों में दर्ज नहीं किया गया है, तब ऐसी वस्तुएं तथा वाहन जिसमें उन वस्तुओं को ले जाया जा रहा है, जब्ती के लिये उत्तरदायी होंगी।

जहां मालिक आगे आता है : ऐसी वस्तुओं को लागू कर और 100 प्रतिशत कर के बराबर दंड की राशि सहित या कथित भुगतान के बराबर की सुरक्षा राशि देकर ही छोड़ा जा सकता है।

छूट प्राप्त वस्तुओं के मामले में दंड राशि वस्तुओं के मूल्य की 2 प्रतिशत अथवा रू 25000/—, जो भी कम हो, होगी । वस्तुओं के मूल्य के 50 प्रतिशत बराबर दंड की राशि सहित या

कथित भुगतान के बराबर की सुरक्षा राशि देकर ही छोड़ा जा सकता है।

छूट प्राप्त वस्तुओं के मामले में दंड राशि वस्तुओं के मूल्य की 5 प्रतिशत अथवा रू 25000/—, जो भी कम हो, होगी ।

ऐसे व्यक्ति के लिये क्या दंड निर्धारित किया गया है जो संरचना योजना के विकल्प का चयन करता है बावजूद इसके कि वह कथित योजना का पात्र नहीं है?

धारा 10(5) में यह प्रावधान किया गया है कि यदि एक व्यक्ति जिसने अपने कर दायित्व के लिये संरचना योजना के विकल्प का चयन किया है जब यह ज्ञात हो जाता है कि वह इसके लिये पात्र नहीं है तब कथित अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत कथित व्यक्ति देय कर के बराबर की राशि के लिए दंड का उत्तरदायी होगा अर्थात एक सामान्य कराधीन व्यक्ति के रूप में और यह कि यह दंड उसके द्वारा देय कर के अतिरिक्त होगा।

कुर्की से क्या मतलब है?

शब्द कुर्की को अधिनियम में परिभाषित नहीं किया गया है। इस अवधारणा को रोमन कानून से लिया गया है जिसमें जब्त करना या सम्राट के हाथों में लेना, और सम्राट के जेब या खजाने में स्थानांतरित करना है। शब्द 'जब्त' को अय्यर के विधि शब्दकोश में लिये हथियाना (निजी संपति); संपत्ति से वंचित कर राज्य के लिये जब्त करना।

संक्षेप में इसका अर्थ वस्तुओं के हक का स्थानांतरण सरकार को होना है।

सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियम के अंतर्गत किन परिस्थितियों में वस्तुओं/माल को जब्त किया जा सकता है?

सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियमकी धारा 70 के अंतर्गत, वस्तुएं/माल जब्ती के लिये उत्तरदायी होगा यदि कोई व्यक्ति:

  • इस अधिनियम के किसी प्रावधान के उल्लंघन के परिणाम में माल की आपूर्ति और उस कथित उल्लंघन के परिणामस्वरूप अधिनियम को अंतर्गत कर की चोरी करता है, या
  • अधिनियम के अंतर्गत आवश्यक तरीके से वस्तुओं/माल का सही खाते नहीं रखता है, या
  • बिना पंजीकरण का आवेदन किये कर के लिये उत्तरदायी वस्तुओं की आपूर्ति करता है,
  • या सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन में किसी भी वाहन का इस्तेमाल माल की दुलाई के माध्यम के लिए करता है (जब तक मालिक की जानकारी के बिना किया गया हो)
  • कर भुगतान से बचने के इरादे के साथ अधिनियम/ नियमों के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन करता है।

सक्षम अधिकारी द्वारा वस्तुओं/माल जब्त करने के मामले में वस्तुओं/माल का क्या होता होता है?

जब्त करने पर, जब्त वस्तुओं/माल पर सरकार का स्वामित्व हो जाता है और इस संबंध में सक्षम अधिकारी जिन पुलिस अधिकारियों को अनुरोध करता है वह प्रत्येक पुलिस अधिकारी वस्तुओं/ माल का कब्जा प्राप्त करने में उसकी सहायता करेंगे।

जब्त करने के बाद, क्या उस व्यक्ति को यह विकल्प देना आवश्यक है कि वह भुगतान कर कथित वस्तुओं/माल को छुड़ा लें?

हाँ। धारा 130(2) के अनुसार, जब्त की गई वस्तुओं/माल के लिये उत्तरदायी स्वामी या प्रभारी को जब्ती के बदले जुर्माने (जब्त किये माल की बाजार कीमत से अधिक नहीं) का विकल्प दिया जाना चाहिए है। यह जुर्माना कर की राशि और अन्य शुल्कों के अतिरिक्त होगा जो इस तरह के माल के संबंध में देय होंगे।

क्या कोई वाहन जो वस्तुओं/माल को बिना निर्धारित दस्तावेजों के ले जाया जा रहा है जब्त किया जा सकता है?

हाँ। धारा 130 प्रदान करती है कि कोई भी वाहन जो वस्तुओं/ माल को बिना निर्धारित दस्तावेजों या अधिनियम के अंतर्गत घोषणा के ले जाया जा रहा है, जब्ती के लिए उत्तरदायी होगा। हालांकि, अगर वाहन का मालिक यह साबित कर देता है कि वस्तुएं/माल बिना आवश्यक दस्तावेजों/घोषणा के उसकी जानकारी के बिना अथवा मिलीभगत या उसके एजेंट की जानकारी अथवा मिलीभगत के बिना ले जाया जा रहा था, तो वाहन जब्त नहीं होगा जैसा कि उपर बताया गया है।

अभियोजन पक्ष क्या है?

अभियोजन कानूनी कार्यवाही का प्रारंभ या शुरूआत है, अपराधी की विरूद्ध औपचारिक आरोप निष्पादित करने की प्रक्रिया है । दड प्रक्रिया संहिता की धारा 198 अभियोजन को किसी व्यक्ति के विरूद्ध कानूनी कार्यवाही को प्रारम्भ या शुरूआत करने के रूप में परिभाषित करती है।

कौन से अपराध हैं जो सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा चलाने अधिकार/आदेश देते हैं?

सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियम की धारा 73 अधिनियम के अंतर्गत कुछ प्रमुख अपराधों को सूचीबद्ध किया गया है जो आपराधिक कार्यवाही और अभियोगप्रारम्भ करने का आदेश देते हैं । नीचे 12 ऐसे प्रमुख अपराधों को सूचीबद्ध किया गया है:

1)  बिना चालान/बिल जारी किये आपूर्ति करना या झूठे/ गलत चालान/बिल जारी करना,

2)  बिना आपूर्ति किये चालान/बिल जारी करना,

3)  3 महीने से भी अधिक अवधि के लिये एकत्रित किये कर का भुगतान ना करना,

4)  अधिनियम का उल्लंघन करते हुए 3 महीने से भी अधिक समय के लिये एकत्र किये गये किसी कर को जमा नहीं करना है,

5)  बिना वस्तुओं/माल और/या सेवाओं की वास्तविक प्राप्ति किए इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाना या उपयोग करना,

6)  किसी भी प्रकार की धोखाधडी से रिफंड प्राप्त करना,

7)  झूठी जानकारी प्रस्तुत करना या वित्तीय अभिलेखों क जालसाझी करना या कर के भुगतान से बचने के लिए फर्जी खातों/दस्तावेज प्रस्तुत करना,

8)  किसी अधिकारी को उसके कर्तव्यों का निष्पादन करने में अवरोध उत्पन्न करना या रोकना,

9)  जब्ती के लिए उत्तरदायी वस्तुओं/माल से निपटन दूसरे शब्दों में, जब्ती के लिए उत्तरदायी वस्तुओं/माल की रसीद, आपूर्ति, भंडारण या दुलाई करना,

10)अधिनियम के उल्लंघन करने वाली सेवाओं की आपूर्ति प्राप्त करना/ निपटना,

11)किसी भी महत्वपूर्ण साक्ष्य अथवा दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करना अथवा नष्ट करना

12)अधिनियम/ नियम द्वारा आवश्यक किसी जानकारी देने में विफलता या झूठी जानकारी देना

13)को प्रतिबद्ध करने का प्रयास या ऊपर 11 अपराधों में से किसी एक को करने का प्रयास करना या सहयोग देना ।

सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियम के अंतर्गत किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए जाने पर क्या दंड निर्धारित किया जाता है?

धारा 132(1) में दंड की योजना नीचे प्रदान की जाती है

अपराध में संलग्नता

दंड (कारावास का विस्तार - )

5 करोड़ रूपये से भी अधिक कर की चोरी अथवा अपराध दोहराना 250 लाख रूपये

 

5 साल और जुर्माना

 

2 करोड़ और 5 करोड़ रूपये के बीच कर की चोरी

 

3 साल और जुर्माना

1 करोड़ और 2 करोड़ रूपये के बीच कर की चोरी

1 साल और जुर्माना

झूठा रिकार्ड अधिकारी का कार्य बाधित करना रिकार्ड से छेड़छाड़

 

छ: महीने

सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियम के अंतर्गत संज्ञेय और गैर-संज्ञेय अपराध क्या हैं?

सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियम की धारा 132(4) और 132(5) के अनुसार

  • सभी अपराध जिनमें कर की चोरी 5 करोड़ रुपये से कम है वह गैर-संज्ञेय और जमानती होंगे,
  • सभी अपराध जिन में कर की चोरी 5 करोड़ रुपये से अधिक है वह संज्ञेय और गैर जमानती होंगे ।

क्या अभियोजन प्रारम्भ करने के लिए सक्षम अधिकारी की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य है?

हाँ । किसी भी व्यक्ति पर किसी अपराध के लिए बिना प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति के मुकदमा नहीं चलाया जाएगा।

सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा चलाने के लिए ‘mens-rea” या दोषी मानसिक स्थिति आवश्यक है?

हाँ, हालाकिं, धारा 135 मानसिक अवस्था (अर्थात् दोषी मानसिक रिथति या mens-rea) के अस्तित्व को मानती है जो एक अपराध करने के लिए आवश्यक है, जिसे अगर मानसिक अवस्था ऐसी नहीं होती तो नहीं किया जा सकता था।

दोषी मानसिक स्थिति क्या है?

एक अपराध करते समय, एक “दोषी मानसिक स्थिति” मन की वह अवस्था है जिसमें -

  • कृत्य जानबूझकर किया गया है;
  • कृत्य और इसके असर समझ में आ रहे थे और नियंत्रित किये जा सकते थे,
  • जिस व्यक्ति ने यह कृत्य किया है उसे ऐसा करने के लिये मजबूर नहीं किया गया था और यहां तक कि कथित अपराध करने के लिए बाधाओं को भी पार किया था
  • व्यक्ति को विश्वास है या विश्वास करने का कारण है कि कृत्य कानून के प्रतिकूल है।

क्या एक कपनी के खिलाफ कार्यवाही की जा सकती है या सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियमके अंतर्गत किसी अपराध के लिए मुकदमा चलाया जा सकता है?

हाँ, सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियमकी धारा 137 प्रदान करती है कि प्रत्येक व्यक्ति जो अपने व्यापार के संचालन के लिए एक कपनी का प्रभारी है या कपनी के व्यवसाय संचालन के प्रति जिम्मेदार है, कपनी सहित, उसके विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी और उसे कपनी द्वारा किये अपराध करने के लिये दंडित किया जाएगा क्योंकि कथित व्यक्ति कपनी के मामलों का प्रभारी था । यदि कपनी द्वारा कोई निम्न अपराध किया जाता है -

  • आपसी सहमति/मिलीभगत से किया गया है, या
  • लापरवाही की कारण है –

अगर यह कृत्य कपनी के किसी अधिकारी द्वारा किया गया है तब कथित अधिकारी को कथित अपराध का दोषी मान लिया जाएगा और वह कार्यवाही के लिये उत्तरदायी होगा और तदनुसार दंडित किया जाएगा।

अपराधों के संयुक्तीकरण का क्या मतलब है?

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 320 ‘संयुक्तिकरण/ Compounding को किसी प्रतिफल या किसी निजी कारणवश अभियोग को रोकने के रूप में परिभाषित किया गया है।

क्या सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियम के अंतर्गत अपराधों का संयुक्तिकरण किया जा सकता है?

हाँ । सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियमकी धारा 138 के अनुसार, किसी भी अपराध का, निम्नलिखित के अतिरिक्त निर्धारित भुगतान की राशि पर संयुक्तिकरण किया जा सकता है और इस तरह के संयुक्तिकरण या तो अभियोजन शुरू करने से पहले या बाद में करने की अनुमति है:

• 12 प्रमुख अपराधों में से क्रम 1 से 6, यदि एक व्यक्ति जिस पर अपराध का आरोप लगाया गया है उसने इनमें कथित अपराधों में से किसी एक के संबंध में संयुक्तिकरण पहले कर लिया है;

  • 12 प्रमुख अपराधों में से क्रम 1 से 6 में सहायता/सहयोग करने, यदि एक व्यक्ति जिस पर अपराध का आरोप लगाया गया है उसने इनमें कथित अपराधों में से किसी एक के संबंध में संयुक्तिकरण पहले कर लिया है;
  • एस.जी.एस.टी. अधिनियम/आई.जी.एस.टी. अधिनियम के अंतर्गत कोई अपराध (ऊपर अपराधों के अतिरिक्त)1 में, यदि अपराध का दोषी व्यक्ति ने पहले ही कथत अपराधों के संबंध में संयुक्तिकरण कर लिया है;
  • कोई अपराध जो एन.डी.पी.एस.ए. या एफ.ई.एम.ए. य सी.जी.एस.टी./एस.जी.एस.टी.के अतिरिक्त भी किसी अन्य अधिनियम के अंतर्गत अपराध है,

संयुक्तिकरण के लिए अनुमति केवल कर, ब्याज और दंड क भुगतान करने के बाद दी जानी चाहिए और पहले से ही किसी भी कानून के अंतर्गत शुरू की गई किसी कार्यवाही को यह प्रभावित नहीं करेगा ।

क्या अपराध के संयुक्तिकरण के लिये कोई मौद्रिक सीमा निर्धारित सीमा की गई है?

हाँ। संयुक्तिकरण की राशि की न्यूनतम सीमा निम्नलिखित राशियों से अधिकतम राशि होगी:-

  • संलग्न कर का 50 प्रतिशत, या
  • 10,000/- रुपये

संयुक्तिकरण की राशि के लिए ऊपरी सीमा निम्न राशियों से अधिक होगी:-

  • संलग्न कर का 150 प्रतिशत, या
  • 30,000 रुपये ।

सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियम के अंतर्गत एक अपराध में संयुक्तिकरण का क्या असर है?

धारा 138 की उप-धारा (3) यह प्रदान करती है कि संयुक्तिकरण की राशि का भुगतान करने पर इस अधिनियम के अंतर्गत आगे कोई कार्यवाही शुरू नहीं की जानी चाहिए और पहले से चल रही आपराधिक कार्यवाही समाप्त मानी जाएगी।

स्रोत: भारत सरकार का केंद्रीय उत्पाद व सीमा शुल्क बोर्ड, राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय

3.0350877193

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