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आई.जी.एस.टी. अधिनियम का अवलोकन

इस पृष्ठ में आई.जी.एस.टी. अधिनियम का अवलोकन किया गया है।

आई.जी.एस.टी. क्या है?

एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (आई.जी.एस.टी.) का मतलब आई.जी.एस.टी. अधिनियम को अंतर्गत अंतर-राज्यीय व्यापार य वाणिज्य के दौरान वस्तुओं और/या सेवाओं की आपूर्ति पर करारोपण है।

अंतर-राज्यीय आपूर्ति क्या है?

अंतर-राज्यीय व्यापार या वाणिज्य के दौरान वस्तुओं और/या सेवाओं की आपूर्ति का मतलब किसी भी आपूर्ति से है जहां आपूर्तिकर्ता का स्थान और आपूर्ति का स्थान अलग राज्यों में हैं। (आई.जी.एस. टी. अधिनियम की धारा 7)

जी.एस.टी. के अंतर्गत वस्तुओं और/या सेवाओं की अंतर-राज्यीय आपूर्ति पर कैसे कर लगाया जाएगा?

अंतर-राज्यीय आपूर्ति पर करेंद्र द्वारा आई.जी.एस.टी. कर लगाया और एकत्र किया जाएगा। मोटे तौर पर आई.जी.एस.टी. सी.जी.एस. टी. और एस.जी.एस.टी. को जोड़ कर प्राप्त किया जाता है और सभी अंतर-राज्यीयवस्तुओं और/या सेवाओं की कराधीन आपूर्ति पर लगाया जाएगा। अंतर-राज्यीय विक्रेता अपनी खरीद के मूल्य संवर्धन पर आई.जी.एस.टी. सी.जी.एस.टी. और एस.जी.एस.टी. के उपलब्ध क्रेडिट को समायोजित करने के बाद आई.जी.एस.टी. का भुगतान करेंगे। निर्यातक राज्य को केंद्र को आई.जी.एस.टी. के भुगतान में इस्तेमाल किया एस.जी.एस.टी.का क्रेडिटहस्तांतरितकरन होगा । आयात करने वाला डीलर आई.जी.एस.टी. के क्रेडिट का दावा करते हुए अपने ही राज्य में अपने उत्पादन कर के दायित्व का निर्वहन करेंगे । केंद्र आयात करने वाले राज्य को एस.जी.एस.टी. के भुगतान में इस्तेमाल किया आई.जी.एस.टी. का क्रेडिट हस्तांतरित करेगा। केंद्रीय एजेंसी को प्रासंगिक जानकारी भी प्रस्तुत कर दी जाएंगी जो एक क्लियरिंग हाउस तंत्र के रूप में कार्य करेगी, दावों को सत्यापित कर और संबंधित सरकारों को कोष के हस्तांतरण की सूचना देंगी।

आई.जी.एस.टी.कानून की मुख्य विशेषताएं क्या है?

आई.जी.एस.टी. कानून को 9 अध्यायों और 25 अनुभागों में विभाजित किया गया है। मसौदा, अन्य बातों के साथ, वस्तुओं की आपूर्ति के स्थानके निर्धारण के लिए नियम निर्दिष्ट करता है। जहां आपूर्ति में वस्तुओं की आवाजाही शामिल है, आपूर्ति का स्थान वह स्थल होगा जहां जिस समय वस्तुओं की आवाजाही प्राप्तकर्ता के स्थान पर डिलीवरी के बाद समाप्त हो जाती है। जहां आपूर्ति में वस्तुओं की आवाजाही शामिल नहीं होती, आपूर्ति का स्थान कथित वस्तुओं के लिये उस समय वह स्थल होगा जहां प्राप्तकर्ता को माल की डिलीवरी की गई है। वस्तुओं/माल को एसेम्बल या साइट पर स्थापित करने के मामलों में, आपूर्ति स्थल वह स्थान होगा जहां पर इन वस्तुओं/माल को एसेम्बल या स्थापित किया गया है। अंत में, जहां वस्तुओं/माल की आपूर्ति किसी वाहन पर की गई है, तब आपूर्ति का स्थान वह होगा जहां पर कथित वस्तुओं को वाहन पर डाला गया है। कानून सेवा की आपूर्ति के स्थान का निर्धारण भी प्रदान करता है जहां पर आपूर्तिकर्ता एवं प्राप्तकर्ता दोनों भारत में स्थित हों (घरेलु आपूर्ति) अथवा जहां पर आपूर्तिकर्ता एवं प्राप्तकर्ता दोनों भारत के बाहर स्थित हों (अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति) इसकी चर्चा विस्तृत रूप से अगले अध्याय में की गई है।

यह सरलीकृत प्रावधान का अनुचर करते हुए आईजीएसटी अधिनियम के अंतर्गत ऑनलाईन सूचना द्वारा कर का भुगतान एवं भारत में किसी गैर-पंजीकृत व्यक्ति को भारत में पंजीकरण लेने पर भारत के बाहर स्थित सेवा प्रदाता को डेटाबेस पहुँच जैसे कुछ अन्य

विषिष्ट प्रावधान भी प्रदान करता है। (आईजीएसटी अधिनियम की धारा 14)

आई.जी.एस.टी. मॉडल के क्या लाभ हैं?

आई.जी.एस.टी. मॉडल के प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:-

क)   अंतर-राज्यीय लेन-देन पर अविरल आई.टी.सी. श्रृंखला क रखरखाव;

ख)   अंतर-राज्यीय विक्रेता या खरीदार के लिए अग्रिम कर का भुगतान या पर्याप्त धन जुटाना आवश्यक नहीं है,

ग)    निर्यात राज्यों में रिफंड का दावा नहीं किया जायेगा, क्यूंकि कर का भुगतान करते समय आईटीसी का उपयोग किया जाता है,

घ)    स्वयं-निगरानी मॉडल,

ङ)     कर प्रणाली को सरल रखते हुए कर निष्पक्षता सुनिश्चित करता है,

च)    सरल लेखा के साथ करदाता पर अनुपालन का कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डालता,

छ)   उच्च स्तर की अनुपालन सुविधाएं प्रदान करेगा और इस प्रकार उच्च राजस्व संग्रह क्षमता सुनिश्चित करता है। मॉडल 'व्यापार से व्यापार' (बी 2 बी) के साथ-साथ 'व्यापार से उपभोक्ता'(बी 2 सी) कोनियंत्रित कर सकता है।

आई.जी.एस.टी. के अंतर्गत आयात/निर्यात करारोपण कैसे किया जाएगा?

जीएसटी (आई.जी.एस.टी.) के करारोपण प्रयोजनों के लिये सभी आयात/निर्यात अंतर-राज्यीय आपूर्ति के रूप में माने जाएंगे। कर की घटनाएं गंतव्य सिद्धांत का अनुसरण करेंगी और कर राजस्व एस.जी.एस.टी. के मामले में उस राज्य को प्राप्त होंगे जहां आयातित माल और सेवाओं का उपभोग किया जा रहा है। वस्तुओं और सेवाओं के आयात पर आई.जी.एस.टी.के भुगतान का पूरा का पूरा हिस्सा आईटीसी के रूप में उपलब्ध होगा, शून्य दर से होगा। निर्यातक की पास विकल्प होगा कि वह बंध-पत्र के अंतर्गत बिना शुल्क भुगतान के निर्यात करे एवं आईटीसी के धनवापसी का दावा करे। आयात पर आईजीएसटी के करारोपण का प्रावधान सीमा शुल्क टेरिफ अष्टि नियम के अंतर्गत है एवं सीमा शुल्क अधिनियम के करारोपण के साथ में आयात के समय करारोपित किए जाएंगे। (आई.जी.एस.टी. अधिनियम की धारा 5)

आई.जी.एस.टी. का भुगतान कैसे किया जाएगा?

आई.जी.एस.टी.का भुगतान आईटीसी का उपयोग या नकद द्वारा किया जा सकता है। हालांकि, आई.टी.सी. का उपयोग आई.जी.एस.टी. के भुगतान के लिए निम्न पदानुक्रम में किया जाएगा, -

  • आई.जी.एस.टी ही का उपलब्ध आई.टी.सी. का उपयोगआई. जी.एस.टी.के भुगतान के लिये किया जाएगा,
  • जब एक बार आई.जी.एस.टी.का आई.टी.सी. रिक्त/पूरा हो जाता है सी.जी.एस.टी.के आई.टी.सी. कोआई.जी.एस. टी.भुगतान के लिए इस्तेमाल किया जाएगा,
  • यदि दोनों आई.जी.एस.टी.के आई.टी.सी.औरसी.जी.एस. टी.के आई.टी.सी. रिक्त/पूरे हो गये हैं, तब ही डीलर को एस.जी.एस.टी.के आई.टी.सी. का उपयोग कर आई.जी.एस.टी.के भुगतान की अनुमति दी जाएगी।

शेष आई.जी.एस.टी. दायित्व, यदि कोई हो, नकद में भुगतान का उपयोग कर निर्वहन किया जाएगा। जी.एस.टी. प्रणाली क्रेडिट का उपयोग कर आई.जी.एस.टी. के भुगतान के लिए इस पदानुक्रम के अनुरक्षण को सुनिश्चित करेगी।

केंद्र , निर्यातक राज्य और आयातक राज्य का प्रकार निपटान कैसे किया जाएगा?

केंद्र औरराज्यों के बीच खाते का निपटान दो प्रकार से किया जाएगा, जिन्हें निम्नांकित दिया जा रहा है:

केंद्र और नियतिक राज्य: नियतिक राज्यकेंद्र सरकार को एस.जी.एस.टी. के आई.टी.सी. के समतुल्यराशि का भुगतान करेगा जिसे आपूर्तिकर्ता द्वारा इस्तेमाल किया है।

केंद्र और आयातक राज्यः निर्यातक राज्यकेंद्र सरकार को एस.जी.एस.टी. को आई.टी.सी. के सम्तुल्यराशि का भुगतान करेगा जिसे आपूर्तिकर्ता द्वारा इस्तेमाल किया है।

केंद्र और आयातक राज्य: केंद्र आई.जी.एस.टी.के आई.टी.सी. के समतुल्य राशि का भुगतान आपूर्तिकर्ता द्वारा अंतर-राज्यीय आपूर्तियों पर एस.जी.एस.टी. के भुगतान के लिये करेगा।

निपटान राज्यों के लिये निपटान अवधि में सभी डीलर द्वारा प्रस्तुत विवरण के स्नाचायी आधार पर किया जायेगा। इसी प्रकार राशि का निपटान सी.जी.एस.टी.और आई.जी.एस.टी. के बीच सम्पन्न किया जायेगा।

एसईजैड इकाई एवं डिवेलपर को की गई आपूर्ति के साथ क्या व्यवहार किया जाएगा?

एसईजैड इकाई एवं डिवेलपर को आपूर्ति शून्य दर से होगी उसी तरीके से जैसा कि भौतिक निर्यात में किया गया है। आपूर्तिकर्ता के पास विकल्प होगा कि वह एसईजैड को आपूर्ति बिना कर भुगतान के कर सकता है एवं उस आपूर्ति पर इंपुट कर का धनवापसी दावा कर सकता है।

क्या आईजीएसटी एवं सीजीएसटी अधिनियम में व्यापार प्रकिया एवं अनुपालन आवश्यकता एक जैसी हैं?

प्रकियाएं जैसे पंजीकरण, रिटर्न भरने एवं कर भुगतान के लिए प्रकिया एवं अनुपालन आवश्यकता एक जैसी हैं। इसके अतिरिक्त, आईजीएसटी कर निर्धारण, लेखा-परीक्षा, मूल्यांकन, आपूर्ति का समय, बिल, लेखा, रिकॉर्ड, न्याय निर्णय, अपील इत्यादि प्रावधानों को सीजीएसटी अधिनियम से लेता है।

स्रोत: भारत सरकार का केंद्रीय उत्पाद व सीमा शुल्क बोर्ड, राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय

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