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जी.एस.टी. में मूल्यांकन

इस पृष्ठ में जी.एस.टी. में मूल्यांकन की जानकारी दी गयी है।

जीएसटी करारोपण के लिए कराधीन आपूर्ति का अपनाए जाने वाला मूल्य क्या होता है?

वस्तुओं और सेवाओं की कराधीन आपूर्ति का मूल्य आमतौर पर लेनदेन का मूल्य’ होगा अर्थात् जिस मूल्य पर वास्तव मे भुगतान किया गया है या देय है, जब पार्टियां संबंधित नहीं हैं और कीमत एकमात्र प्रतिफल है। सी.जी.एस.टी./एस.जी.एस.टी अधिनियम की धारा 15, लेनदेन मूल्य के दायरे से संबंधित विभिन्न समावेशन और बहिष्करण स्पष्ट करती है। उदाहरण के लिए, लेनदेन के मूल्य में वापस / रिफंड जमा राशि तथा आपूर्ति से पहले या आपूर्ति के समय पर मिली छूट को शामिल करने की अनुमति नहीं होगी ।

लेनदेन मूल्य क्या है?

लेनदेन मूल्य वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति की वास्तव में भुगतान की गई या देय उस मूल्य को संदर्भित करता है जहां आपूर्तिकर्ता और प्राप्तकर्ता आपस में संबंधित नहीं हैं और केवल कीमत आपूर्ति का एकमात्र प्रतिफल है। इसमें कोई भी राशि शामिल हो सकती है जिसके भुगतान के लिये आपूर्तिकर्ता उत्तरदायी है, लेकिन आपूर्ति प्राप्तकर्ता द्वारा उसके लिये खर्च वहन किया गया है ।

क्या सीजीएसटी, एसजीएसटी और आईजीएसटी और वस्तुओं और सेवाओं के लिये अलग मूल्यांकन का प्रावधान हैं?

नहीं, धारा 15 सभी तीन प्रकार के करों के लिये सामान्य है और यह वस्तुओं और सेवाओं के लिए भी सामान्य है।

क्या अनुबंधित मूल्य आपूर्ति के मूल्यांकन को निर्धारित करने के लिये पर्याप्त नहीं है?

अनुबंधित मूल्य अधिकतर विशेष रूप में “लेनदेन के मूल्य" को संदर्भित करती है और वह कर संगणना के लिए आधार है।

हालांकि, जब मूल्य कुछ कारकों से प्रभावित होती हैं जैसे पक्षों का आपसी संबंध या कुछ लेनदेन जो आपूर्ति माने जाते हैं या जिनक कोई कीमत नहीं होती, ऐसे लेनदेन के मूल्य को जी.एस.टी. मूल्यांकन नियमों के अनुसार निर्धारित किया जायेगा।

क्या सभी मामलों में जी.एस.टी. मूल्यांकन नियमों का संदर्भ लेना आवश्यक है?

नहीं। जी.एस.टी. मूल्यांकन नियमों का संदर्भ लेना केवल उन मामलों में लेना आवश्यक है, जहां मूल्य, धारा 15 की उप धारा (1) के अंर्तगत निर्धारित नही किया जा सकता है।

क्या धारा 15(1) के अंतर्गत घोषित लेनदेन की कीमत को स्वीकार किया जा सकता है?

हाँ, इसे धारा 15(2) में समावेश करने के लिए जांच करने के बाद स्वीकार किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, लेनदेन का मूल्य यहां तक कि आपूर्तिकर्ता और आपूर्ति प्राप्तकर्ता के बीच संबंध होने के बावजूद भी स्वीकार किया जा सकता है, बशर्त उनके आपसी संबंध के कारण मूल्य प्रभावित नहीं हुआ है।

क्या आपूर्ति के बाद छूट या प्रोत्साहनों को लेनदेन के मूल्य में शामिल किया जाना चाहिए?

हाँ, जहां आपूर्ति के समय या उससे पहले ज्ञात अनुबंध के अनुसार पोस्ट सप्लाई डिस्काउंट की स्थापना की जाती है और ने इनपुट टैक्स क्रेडिट को ऐसी आरोपणीय छूट में बदल किया है, ऐसी स्तिथि में छूट की अनुमति मॉडल जी.एस.टी. कानून की धारा 15 की अंतर्गत दी जाती है |

क्या आपूर्ति के समय या उससे पहले अनुमत आपूर्ति-पूर्व छूट को लेन देन के मूल्य में सम्मिलित किया जा सकता है?

नहीं, बशर्त उसकी सामान्य व्यापार के अभ्यास के क्रम में अनुमति दी गई है और विधिवत चालान/बिल में दर्ज किया गया है ।

मूल्यांकन नियम कब लागू होते हैं?

मूल्यांकन के नियम तब लागू होते हैं जब (i) प्रतिफल पैसे के रूप में हैय (ii) पक्ष आपस में संबंधित हैं या आपूर्ति किसी निर्दिष्ट वर्ग के आपूर्तिकर्ता की है, और (iii) घोषित किया गया लेनदेन का मूल्य विश्वसनीय नहीं है।

धारा 15(2) में निर्दिष्ट कौन से समावेशन है जिन्हें लेनदेन के मूल्य में जोड़ा जा सकता है?

धारा 15 (2) में निर्दिष्ट समावेशन जो लेनदेन के मूल्य में जोड़ा जा सकता हए वह निम्न प्रकार से है।

(क) आपूर्तिकर्ता द्वारा प्राप्तकर्ता से एस.जी.एस.टी./सी.जी.एस.टी अधिनियम और वस्तु एवं सेवाकर (राजस्व हानि हैतु राज्यों की प्रतिपूर्ति) अधिनयिम 2016 के अतिरिक्त अलग से किसी भी अधिनियम के अंतर्गत आरोपित कोई भी कर, शुल्क, उपकर ।

(ख) आपूर्तिकर्ता ऐसी आपूर्ति के संबंध में भुगतान करेन के लिए उत्तरदायी है, लेकिन वह जोकि आपूर्ति के प्राप्तकर्ता के द्वार किया गया हो और जिसमें भुगतान किया मूल्य शामिल हो य वस्तु और सेवाओं के लिए देय हो।

(ग) आपूर्तिकर्ता द्वारा आपूर्ति के प्राप्तकर्ता को प्रभारित कमीशन और पैकिंग जैसे आकस्मिक व्यय, आपूर्तिकर्ता द्वारा वस्तुओं और/या सेवाओं की आपूर्ति के संबंध में आपूर्तिकर्ता द्वारा किसी भी चीज के लिए भारित कोई भी मूल्य वस्तुओं या सेवाओं की सुपुर्दगी के समय या पहले या जैसा भी मामला हो ।

(घ) किसी भी आपूर्ति के लिए किसी भी विचार से देरी से भुगतान के लिए ब्याज, देरी पर शुल्क या दण्ड।

(ड.) केन्द्रीय और राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सब्सिडी को छोड़कर अन्य सब्सिडी सीधे मूल्य से जुड़ी हुई है।

स्रोत: भारत सरकार का केंद्रीय उत्पाद व सीमा शुल्क बोर्ड, राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय

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