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उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग

उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग

फलपौध रोपण अनुदान योजना

प्रदेश की भूमि, जलवायु तथा सिंचाई सुविधा की उपलब्धता के आधार पर यह योजना प्रदेश में संचालित है। इस योजना में कृषक द्वारा बैंक ऋण लेने पर अमरूद, अनार, ऑवला, आम, संतरा, मौसम्बी, नीबू, केला, पपीता एवं अंगूर के रोपण पर नाबार्ड के इकाई लागत पर 25 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। किन्तु जो कृषक बैंक ऋण नहीं लेना चाहते हैं, उन्हें विभागीय फलोद्यान योजना अंतर्गत केवल संतरा, मौसम्बी, अमरूप, अनार, आंवला, आम एवं नीबू पर 25 प्रशित अनुदान नाबार्ड के इकाई लागत पर दिया जाता है।

अंगूर की खेती

अंगूर की खेती को बढ़ावा देने के लिये प्रदेश के हरदा, धार , खरगौन, गुना, अशोकनगर, उज्जैन, देवास एवं रतलाम जिले के कृषकों को टेबलग्रेप्स के लिये बैंक ऋण पर नावार्ड द्वारा निर्धारित इकाई लागत रू. 391060 प्रथम वर्ष का 25 प्रतिशत रूपये 98000 का अनुदान तथा द्वितीय वर्ष की लागत रूपये 66560 का 25 प्रतिशत अनुदान रूपये 16640 इन प्रकार कुल प्रति हेक्टर रूपये 4,57,620 का 25 प्रतिशत रूपये 1,14,640 का अनुदान देय है।

बाड़ी (किचन गार्डन) के लिये आदर्श कार्यक्रम

राज्य शासन की प्राथमिकता के अंतर्गत गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लघु/सीमान्त किसानों एवं खेतिहर मजदूरों को इस योजना के अंतर्गत प्रति हितग्राही को रूपये 57/- की सीमा तक उनकी बाड़ी हेतु स्थानीय कृषि जलवायु के आधार पर सब्जी बीजों के पैकेट वितरित करने का प्रावधान है।

सब्जी क्षेत्र विस्तार योजना

सब्जी क्षेत्र विस्तार की नवीन योजना अंतर्गत उन्नत/संकर सब्जी फसल के लिये आदान सामग्री का 50 प्रतिशत अधिकतम 12500 रूपये प्रति हैक्टर तथा सब्जी के कंदवाली फसल जैसे-आलू, अरबी के लिये आदान सामग्री का 50 प्रतिशत अधिकतम रूपये 25000/- अनुदान दिये जाने का प्रावधान किया गया है। योजना में एक कृषक को 0.25 हैक्टर से लेकर 2 हैक्टर तक का लाभ दिया जाना प्रावधानित है।

मसाला क्षेत्र विस्तार योजना

प्रदेश में मसाला क्षेत्र विस्तार की नवीन योजना अंतर्गत सभी वर्ग के कृषकों के लिये उन्नत/संकर मसाला फसल के क्षेत्र विस्तार के लिये आदान सामग्री का 50 प्रतिशत अधिकतम रूपये 12500/- प्रति हैक्टर तथा कंदवाली फसल जैसे-हल्दी, अदरक, लहसुन के लिये आदान सामग्री का ५० प्रतिशत अधिकतम रूप 25000/- दिये जाने का प्रावधान किया गया है।

प्रदर्शन/मिनिकिट की योजना

समस्त उद्यानिकी फसलों के प्रदेर्शन/मिनीकिट की नवीन योजनान्तर्गत आगामी तीन वर्षो का कार्यक्रम निर्धारित जिले की जलवायु एवं मिट्‌टी को देखते हुए किया जायेगा।

एकीकृत शीतश्रृंखला से संबंधित सहायता

उद्यानिकी फसलोत्तर प्रबंधन अंतर्गत एकीकृत शीतश्रृंखला की अधोसंरचना विकास की प्रोत्साहन योजना

अभी तक प्रदेश में इस तरह की योजना मिशन योजना अंतर्गत केवल मिशन जिलों के लिये क्रियान्वयन थी। नवीन योजना सभी जिलों के लिये वर्ष 2011-12 से प्रारंभ की जा रही है जिसके अंतर्गत एकीकृत शीतश्रृंखला की अधोसंरचना का विकास कर उद्यानिकी फसलों के उत्पादन की सेल्फ लाईफ बढ़ाना, कृषकों के उत्पादों का सही मूल्य उपलब्ध करवाना, प्रदेश एवं प्रदेश के बाहर निर्यात को बढ़ावा देना है, ताकि उद्यानिकी फसलों की खेती को लाभ का धंधा बनाया जा सकें।

संरक्षित खेती की प्रोत्साहन योजना

व्यावसायिक उद्यानिकी फसलों की संरक्षित खेती की प्रोत्साहन योजना

अभी तक प्रदेश में इस तरह की योजना मिशन अंतर्गत मिशन जिलों में लागू है। उसी अनुसार प्रदेश के सभी जिलों में नवीन योजना वर्ष 2011-12 से प्रारंभ की गई है। योजना में प्रावधान अनुसार राष्ट्रीय उद्यानिकी मिशन द्वारा निर्धारित मापदण्ड एवं बागवानी में प्लास्टिक कल्चर उपयोग संबंधी राष्ट्रीय समिति के द्वारा निर्धारित ड्राईंग डिजाइन के अनुसार ग्रीनहाऊस, शेडनेट एंव प्लास्टिक लो-टनल इत्यादि का निमार्ण किया जाएगा।

उद्यानिकी के विकास हेतु यंत्रीकरण को बढ़ावा देने की योजना

उद्यानिकी के क्षेत्र में यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिये कोई योजना संचालित नहीं थी।वर्ष 2011-12 से नवीन योजना प्रारंभ की गई है। उद्यानिकी फसलों की खेती में उपयोग में आने वाले आधुनिक यंत्रों की इकाई लागत ज्यादा होने से सामान्य कृषक इसका उपयोग नहीं कर पाते है।

उद्यानिकी अधिकारी/कर्मचारी प्रशिक्षण योजना

योजनान्तर्गत संचालनालय उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी के अधीन पदस्थ अधिकारी एवं कर्मचारियों को कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई तकनीक के विषय में जानकारी से अवगत कराने हेतु प्रशिक्षण एवं रिफ्रेसर कोर्स आयोजित किये जाते है, तथा राज्य शासन के बाहर विभिन्न संस्थाओंद्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भेजा जाता है।

कृषक प्रशिक्षण सह भ्रमण कार्यक्रम

कृषकों को उद्यानिकी फसलों की खेती की नवीन तकनीक एवं उससे होने वाले लाभ से अवगत कराया जाता है।

प्रदर्शनी मेला एवं प्रचार-प्रसार योजना

जिला एवं ब्लाक स्तर पर फल, फूल एवं सब्जी आदि की प्रदर्शनी एवं सेमिनार आयोजित कर कृषकों को नवीन तकनीकी विकास के कार्यक्रम प्रदर्शित किये जाते है।

ग्रीन हाऊस के भीतरी वातावरण का नियंत्रण

कहां सम्पर्क करें

संबंधित जिले के उप संचालक/सहायक संचालक/वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी

स्त्रोत : किसान पोर्टल,भारत सरकार



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