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कृषि विपणन

क्या करें?

    • किसान अपनी उपज के भाव की जानकारी एगमार्कनेटवेबसाइट पर या किसान काल सेन्टर अथवा एस.एम.एस. के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं।
    • फसल की कटाई और गहाई उचित समय की जानी चाहिए।
    • उचित कीमत के लिए बिक्री से पहले उचित ग्रेडिंग, पैकिंग और लेबलिंग की जानी चाहिए।
    • उपज का लाभकारी मूल्य प्राप्त करने के लिए उचित बाजार/मण्डी में परिवहन किया जाना चाहिए।
    • अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए उपज का भंडारण करके ऑफ-सीजन में बिक्री करनी चाहिए।
    • मजबूरन बिक्री से बचना चाहिए।
    • बेहतर विपणन सुविधाओं के लिए किसान समूह में सहकारी मार्केटिंग कर सकते हैं।
    • विपणन सहकारी समितियां खुदरा एवं थोक दुकाने खोल सकती हैं।
    • मजबूरन बिक्री से बचने के लिए किसान उपज के भण्डारण के लिए शीत भंडारण और गोदाम का संचालन कर सकते हैं।

    आप क्या कर सकते हैं?

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    सुविधा के प्रकार

    उपलब्ध सहायता के प्रकार

    योजना

    1

    राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना के अन्तर्गत कृषकों तथा कृषि उद्यमियों द्वारा कृषि प्रसंस्करण एवं कृषि व्यवसाय से अधिक आमदनी तथा कृषि में निवेश को आकर्षित कर वृहद स्तर पर रोजगार सृजन

    कृषि प्रोसेसिंग इकाई को राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना 2010 के अंतर्गत उपलब्ध समस्त प्रोत्साहन, उदाहरर्णाथ पूंजी निवेश अनुदान, विद्युत कर, स्टांप डयूटी, रूपान्तरणशुल्क, मण्डी शुल्क में छूट प्राप्त आदि निम्नानुसारः -नये रोजगार सृजन हेतु कृषि उत्पाद आधारित उद्योग एवं व्यवसायिक इकाई जिसमें निवेश रु.5 करोड़ एवं अधिक हो, में प्रति नियोजित व्यक्ति प्रति वर्ष 6,000/- रूपये एवं महिलाओं, एससी/एसटी के व्यक्तियों के लिए 8,000/- रूपये प्रति वर्ष 3 वर्ष तक का प्रोत्साहन। जमीन खरीदने तथा पटटे (लीज) पर लेने पर स्टाम्प डयूटी में 50 प्रतिशत छूट।

    कृषि प्रसंस्करण एवं कृषि व्यवसाय प्रोत्साहन नीति-2010

    2

    लघु कृषक कृषि व्यापार संख्या -केन्द्रीय लघु कृषक कृषि व्यापार संघ की सहायता से राज्य लघु कृषक कृषि व्यापार संघ की स्थापना 23 अप्रैल 2005 को की गई। राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड इस कार्य हेतु नोडल विभाग है।

      • योजना का उद्देश्य बैंकों के सहयोग से कृषि व्यापार उद्यमों की स्थापना में सहायता करना, निजी निवेश को प्रोत्साहित कर ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाना।
      • इस योजना में व्यक्ति, कृषक,उत्पादक समूह, साझेदारों/ एकल फर्मों, स्वयं सहायता समूहों, कम्पनियों, कृषि निर्यात इकाईयों तथा बेरोजगार कृषि स्नातक सहायता प्राप्त करने के पात्र है।
      • योजना कृषि या सम्बन्धित क्षेत्रों में तथा बागवानी फलोत्पादन, औषधीय एवं सुगन्धित पौधों, लघु वन उत्पाद, जैविक खेती, वर्मी कम्पोस्ट, मधुमखखी पालन, वृक्षा रोपण हेतु नर्सरी तथा मछली पालन से सम्बन्धित होने चाहिए।

    1.उद्यमी पूंजी सहायताराशि निम्न मानकों के तहत जो भी सबसे कम हो, देय हैः-

    () बैंक द्वारा निर्धारित कुल परियोजना लागत का 10 प्रतिशत।

    () परियोजना अंश पूंजी का 26 प्रतिशत।

    (स) रूपये 75 लाख

    2. विस्तृत परियोजना संघ के खर्चे पर तैयार करने का प्रावधान है बशर्ते, परियोजना की लागत 50 लाख या अधिक हो व बैंक ऋण प्रदान करने को सहमत हो।

    लघु कृषक कृषि व्यापार

    संघ

    3

    कृषि निर्यात जोनः -

    राज्य में जीराएवं धनियां के निर्यात को प्रोत्साहितकरने के लिए दो कृषि निर्यात जोन कीस्थापना की गई है। धनियां निर्यात जोनमें हाडोती क्षेत्र के कोटा, झालावाड, बारा,बूंदी व चित्तौडगढ तथा जीरे हेतु जोधपुर,जालौर, पाली, नागौर एवं बाडमेर जिले सम्मलित किए गये है।

    निर्यात जोन में ग्रेडिंग, प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना व विकास सरकारी व निजी क्षेत्र की भागीदारी से किया जा रहा है। धनिये की 105 तथा जीरे की 20 आधुनिक यूनिट स्थापित की जा चुकी है।कृषकों व व्यापारियों को प्रशिक्षण के साथ साथ स्थानीय किस्मों से निर्यात योग्य किस्म विकसित करने का कार्य कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान केन्द्र, उम्मेदगंज (कोटा) द्वारा किया जा रहा है। बोर्ड द्वारा झालावाड में रु.2.21 करोड़ की लागत से एक कोल्ड स्टोरेज भी स्थापित किया गया है। धनिये व जीरे के निर्यात को बढ़ावा देने, प्रोजेक्ट तैयार करने एवं आधारभूत संरचनाओं के निर्माण में मार्गदर्शन हेतु दो प्रकोष्ठ स्थापित है। जहां विशेषज्ञों प्रशिक्षण के माध्यम से योजना तैयार करके एकल व पी.पी.पी. मॉडल पर आधारित ढाचांगत विकास में सहयोग प्रदान करते है।

    कृषि निर्यात जोन

    4

    किसान भवन -किसानों को सस्ती दर

    पर ठहरने व भोजन की व्यवस्था

    दूर दराज के कृषकों को मण्डी कार्य से बिलम्ब होने पर रात्रि विश्राम हेतु राज्य के सभी संभाग स्तर पर एवं जिला स्तर पर किसान भवन संचालित है इन किसान भवनों में सस्ती दर पर ठहरने व भोजन की सुविधा मिलेगी। किसानों के ज्ञानवर्धन हेतु आधुनिक सुविधा युक्त वाचनालय भी है जिसमें देश-विदेश के जिन्सों के भी बाजार भाव ज्ञात हो सकते है।

    किसान भवन

    5

    राजीव गांधी कृषक साथी योजना-2009

    कृषकों/ खेतीहर मजदूरों को कृषि कार्य के दौरान दुर्घटना से अंग-भंग होने पर 5,000/-रूपये से 50,000/-रूपये तथा मृत्यु होने पर 2.00 लाख रूपये सहायता राशि देय।

    मण्डी समिति

    6

    आपणी रसोई योजना-2009

    राज्य की विशिष्ट एवं '' एवं '' श्रेणी की मण्डियों में अपने उत्पाद की बिक्री हेतु आने वाले कृषकों/ पंजीकृत हमालों/ मजदूरों को रियायती/अनुदानित दर पर भोजन व्यवस्था उपलब्ध।

    मण्डी समिति

    7

    महिला सशक्तिकरण

    कृषि उपज मण्डी समितियों के चुनावों में मण्डी समिति के कृषक सदस्यों एवं मण्डी समिति के अध्यक्ष पदों के लिए महिलाओं का 50 प्रतिशत आरक्षण।

    मण्डी समिति

    8

    ग्रामीण भंडारण योजना

    100 से 30000 मैट्रिक टन क्षमता के गोदामों के निमार्ण हेतु समस्त कृषकों को लागत का 25 प्रतिशत अनुदान, महिला कृषकों, स्वयं सहायता समूह, सहकारी समिति तथा अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति उद्यमियों को 33 .३३ प्रतिशततथा अन्य श्रेणी को 15 प्रतिशत अनुदान

    ग्रामीण भंडारण योजना

    9

    डेयरी, मांस, मत्स्य पालन और लघु वन उत्पादों सहित कृषि और संबंध क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के तीव्र विकास के लिए। विभिन्न कृषि उत्पादों के विपणन अधिशेष की फसलोपरान्त आवश्यकता को पूरा करने के विपणन के बुनियादी ढांचे को विकसित करने हेतु।

    50 लाख तक परियोजना की पूंजीगत लागत का 25 प्रतिशतपहाड़ी और आदिवासी क्षेत्रों में या अनुसूचित जाति/जनजाति के उद्यमियों और उनकी सहकारी समितियों में सब्सिडी, पूंजी लागत का 33.33 प्रतिशत तक होगा, जो कि प्रत्येक मामलों में रु.60 लाख तक होगा। राज्य की एजेंसियों की परियोजनाओं के संबंध में कोई उचित सीमा नहीं है ।

    कृषि विपणन बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण,ग्रेडिंग और मानकीकरण के विकास की योजना

    किससे संपर्क करें?

    क्रम सं. 1 से 4 तक सचिव राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड, पंत कृषि भवन राजस्थान जयपुर टेलीफोन नं। 0141-2227336। क्रम सं. 5 से 7 के लिए सचिव मंडी समिति, क्रम सं. 8 9 के लिए विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय, भारत सरकार एवं नाबार्ड क्षेत्रीय कार्यालय से सम्पर्क करें।

    स्त्रोत : किसान पोर्टल,भारत सरकार



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